यौन शोषण के कारण विवादों में एनआईवीएच देहरादून

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देहरादून। 1959 में देहरादून के राजपुर मार्ग पर स्थित राष्ट्रीय दृष्टि बाधितार्थ संस्थान भारत सरकार द्वारा दृष्टिबाधितों के लिए पहली और एकमात्र राष्ट्रीय स्तर की संस्था है। इसकी स्थापना 43 एकड़ भूमि पर की गई है। 19वीं सदी के नब्बे के दशक में इस संस्थान ने अपना मूर्त रूप लिया। विकलांगों के लिए स्थापित चार राष्ट्रीय संस्थाओं की श्रृंखला में इसकी स्थापना की गई। जिसमें राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संस्था के लिए देहरादून का चयन किया गया। यहां दृष्टिबाधित बच्चों के लिए स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, ब्रेल पुस्तास्तलय एवं ध्वन्यांकित पुस्तकों का पुस्तकालय भी स्थापित किया गया है। वर्तमान में यह संस्थान कुछ लोगों की स्वार्थ लिप्सा के कारण बदनाम हो रहा है जबकि इसकी स्थापना का उद्देश्य काफी पवित्र और जनोपयोगी था।
पिछले कुछ वषों से इस संस्थान में भ्रष्टाचार का घुन लग गया, जिसके कारण यह संस्थान काफी चर्चाओं में है। इन दिनों यह संस्थान छात्र-छात्राओं के दैहिक शोषण के लिए चर्चित है। लेकिन इसमें भी शोषण से कहीं अधिक राजनीति है और सरकारी राजस्व हड़पने की भावना है। इसका उदाहरण कुछ पत्रों से लिया जा सकता है, जिसमें वहीं के शिक्षकों ने शासन, प्रशासन को इस अव्यवस्था से अवगत कराया था। संस्थान के एक अध्यापक रमेश कश्यप 7वीं के छात्र से यौन शोषण के कारण जेल में है। जिस शिक्षक ने इस घटना का खुलासा किया उसे भी यौन शोषण के प्रकरण में ही निलंबित कर दिया है। इसके पीछे केवल आपसी राजनीति है। इस राजनीति का शिकार हुए हैं दृष्टिहीन संगीत शिक्षक सुचित नारंग। नारंग ने 25 मई को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा संस्थान निदेशक को एक पत्र लिखकर अवगत कराया था कि संस्थान के कुछ छात्र-छात्राओं ने उन्हें यौन शोषण की जानकारी दी है। इस घटना के बाद प्रभावित पक्ष ने उनका बहिष्कार कर दिया और यह कहा कि आप शिक्षकों का साथ दें अन्यथा आपके साथ भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
25 मई को लिखे इस पत्र के बाद श्री नारंग ने 9 मई 2018 को एक पत्र लिखा और दूसरा पत्र 25 जुलाई को लिखा जिसमें इन बातों की विस्तार से चर्चा की गई है। इसके बाद से ही संस्थान में लंबी हड़ताल चली जिसका समापन 28 अगस्त को हुआ है, जब नए निदेशक केवीएस राव ने चार्ज लेने के बाद इन छात्रों की मांगों को मान लिया तथा 30 सूत्रीय सिटीजन चार्टर जारी किया है। राव ने माना है कि छात्र-छात्राओं को आंदोलित करने के लिए कुछ विशेष लोग प्रयासरत रहे हैं। यह कौन है, इसका खुलासा जल्द हो जाएगा। इसके लिए छात्र-छात्राओं के वाट्सएप ग्रुप की जांच की जाएगी। राव के अनुसार यह पूरा प्रकरण संवादहीनता और समन्वय के अभाव में हुआ लेकिन अब सबकुछ ठीक है। केवीएस राव का मानना है कि छात्र-छात्राओं ने फिलहाल संस्थान की गरिमा बनाए रखते हुए पढ़ाई पर ध्यान देने की बात कही है।
राव ने माना है कि छात्र-छात्राओं के पीछे कौन लोग आंदोलन को हवा दे रहे थे, इस बात के साक्षी बने हैं। विशेषकर व्हाट्स ग्रुपों से छात्रों को उकसाने वाले लोगों की जांच कराई जा रही है। व्हाट्स में पूर्व छात्रों, दिव्यांग जनों से जुड़ी संस्थाओं के सदस्यों और एनआईवीएच के स्टाफ को जांच के दायरे में रखा है। अब परिसर के साथ क्लास रूम, छात्रावास मेस भी सीसीटीवी की निगरानी में रहेंगे।
छात्र-छात्राओं की जिन मांगों पर एनआईवीएच के निदेशक केवीएस राव ने सहमति जताई तथा समय सीम तय की है उनमें 15 सितंबर तक परिचय पत्र बनने, जनरेटर का प्रस्ताव, कैंटीन में गुणवत्ता, एक प्रोजेक्टर खरीदा जाना, स्कूल हॉस्टल से आने वाले सुझावों पर 31 अगस्त से अमन, पॉकेट मनी 15 तक मिल जाना, कर्मचारियों के व्यवहार में सुधार, ब्वायज छात्रावास के लिए वार्डन, गणित, विज्ञान संस्कृत विषयों का शिक्षण आदि शामिल है।
इसी संदर्भ में संगीत शिक्षक सुचित नारंग के प्रकरण पर निदेशक ने स्पष्ट किया है कि उनके खिलाफ विभागीय जांच नहीं कराई जाएगी। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। इस पर न्यायालय का जो फैसला होगा उसे माना जाएगा। निदेशक ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में केंद्रीय स्तर के अधिकारियों द्वारा जांच कर उसकी रिपोर्ट भेज दी गई है। उस पर केंद्र अपने अनुसार निर्णय लेगा। यौन शोषण के मामले पर पहले से ही एक शिक्षक रमेश कश्यप पर कानूनी शिकंजा कसा हुआ है। जिनके कारण पहले से छात्र इस शोषण का शिकार हुए हैं जबकि पूर्व की निदेशक अनुराधा इस्तीफा दे चुकी है। एनआईवीएच प्रकरण में गत दिनों संस्थान के प्रिंसिपल कमलवीर सिंह जग्गी और वाइस प्रिंसिपल अनुसुया शर्मा को पद से हटा दिया गया है। प्रिंसिपल के पद पर डा. गितिका माथुर को नियुक्त किया गया है। वाइस प्रिंसिपल के पद पर अमित शर्मा आ गए हैं। संस्थान की पूर्व निदेशक अनुराधा डालमिया को पद से हटाकर सिकंदराबाद भेजा गया है। इस घटनाक्रम के पीछे केवल राजनीति का होना और संस्थान को बदनाम करने का प्रयास तथा आर्थिक गोलमाल आ रहा है। इन पर जो अंकुश लगाता है उस पर कार्यवाही हो जाती है। संभवत: सुचित नारंग भी ऐसी ही कार्यवाही के शिकार हुए हैं।

जांच रिपोर्ट मंत्री को सौंपी
देहरादून के राजपुर रोड स्थित राष्ट्रीय दृष्टि बाधितार्थ का दौरा करने वाली बाल कल्याण समिति की सदस्यों कविता शर्मा एवं डॉ. सुधा देवरानी ने अपनी रिपोर्ट प्रदेश की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रेखा आर्य को सौंप दी है, जिसमें कई समस्याओं की चर्चा की गई है। इसी संदर्भ में कुछ छात्रों ने शिक्षक सुचित नारंग पर भी आरोप लगाए हैं जिन पर पुलिस कार्यवाही कर रही है। इस संदर्भ में सूचित नारंग के पत्रों का भी हवाला लिया गया है जिसमें उन्होंने पहले ही इस आशय की शिकायत कर दी थी। लेकिन इस मामले में जांच समिति भी कुछ लोगों के आरोप प्रत्यारोप से इनकार नहीं कर रहे हैं। इसमें मीडिया के कुछ लोगों की भूमिका पर भी चर्चा की गई है। जो संस्थान के मामलों मे लगातार मुखर है और उन समाचारों को प्रमुखता से छाप रहे हैं। यह मुद्दा कहीं न कहीं भ्रष्टाचार से भी जुड़ा है जिसके कारण एक ग्रुप नहीं चाहता की संस्थान को व्यवस्थित चलने दिया जाएग। 

हाईकोर्ट का एक्शनः हाईकोर्ट ने एनआईवीएच संस्थान में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ और यौन शोषण के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने संस्थान के निदेशक को आदेश दिए हैं कि आरोपी टीचर को निलंबित किया जाए और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

हाईकोर्ट ने इस मसले का स्वतः संज्ञान लेते हुए ये आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने ये भी आदेश दिया है कि संस्थान में 12 घंटे के भीतर एमबीबीएस डाॅक्टर की नियुक्ति की जाए ताकि बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए सचिव संथिल पांडियन को जांच अधिकारी नियुक्त कर 3 दिन के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही एसएसपी देहरादून को आदेश दिया गया है कि एक महिला एसआई के साथ दो कांस्टेबल की टीम बनाकर एनआईवीएच में रेगुलर विजिट कराई जाए।