चार धाम यात्राः इस बार की देरी अच्छी है

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आम तौर पर जिस यात्रा सीजन में पवित्र धामों के कपाट देरी से खुलते हैं, उसमें यात्रा से रोजगार चलाने वाले लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन इस बार यात्रा की देरी से शुरुआत कई मायनों में अच्छी है। खास तौर पर बदरीनाथ धाम के कपाट 18 मई से खुलने की जो खबर आई है, वह रैणी गांव आपदा की रोशनी में अच्छी मानी जा रही है। प्रभावितों की मदद और पुनर्वास के कार्य करते हुए सरकार के सामने यात्रा की तैयारियों के लिए भी अब सरकार जल्दबाजी में नहीं होगी।

-बदरीनाथ के कपाट खुलने से पहले तैयारियों के लिए मिलेगा वक्त
-रैणी गांव आपदा के कारण इस बार दोहरे दबाव में होगा प्रशासन
उत्तराखंड के चारों धामों में से बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि सबसे पहले तय हो जाती है। इस बार 18 मई की तिथि निकली है। यह तिथि पिछले साल की तुलना में भी तीन दिन ज्यादा है। पिछली बार पहले 30 अप्रैल की तिथि कपाटोद्घान के लिए निकली थी, लेकिन कोरोना महामारी का संक्रमण इस कदर फैला कि उसकी मार कपाट खुलने की प्रक्रिया पर पड़ गई। बदरीनाथ के इतिहास में पहली बार पहले से घोषित तिथि को बदलना पड़ा और नई तिथि निकली।
दरअसल,  उत्तराखंड की चार धाम यात्रा यहां के लोगों की आजीविका का बहुत बड़ा साधन है। इसी तरह, सरकार को भी यात्रा के अच्छे चलने से काफी राजस्व प्राप्त हो जाता है। आम तौर पर स्कूल-काॅलेजों में छुट्टियां पड़ने के बाद देश के तमाम हिस्सों से लोग यात्रा के लिए निकल पड़ते हैं। देखा गया है कि जब-जब अप्रैल मध्य या आखिरी सप्ताह में कपाट खुले, तब तक व्यवसायियों को काफी लाभ पहुंचा। मई के पहले सप्ताह तक कपाट खुलना भी ठीक-ठीक ही रहा है, लेकिन यात्रा में देरी सीधे आजीविका पर चोट करती है। देरी से कपाट खुलने की वजह से देशभर के यात्री अन्य स्थानों के लिए अपने कार्यक्रम बनाकर वहां निकल लेते हैं।
इन स्थितियों के बीच, इस बार यात्रा के देर से शुरू होने के फायदे की बात करें, तो चमोली आपदा का जिक्र करना जरूरी है। सात फरवरी को चमोली जिले के रैणी गांव में प्राकृतिक आपदा के बाद जान-माल का बड़ा नुकसान हुआ है।
यह क्षेत्र बदरीनाथ धाम से बहुत ज्यादा दूर नहीं है, ऐसे में लोगों के मन में डर पैदा होने की आशंका प्रकट की जा रही है। साथ ही पूरा सरकारी सिस्टम इस वक्त केवल आपदा राहत कार्य में ही जुटा हुआ है। आपदा-पुनर्वास का काम लंबा चलना है। ऐसे में यात्रा जल्दी शुरू हो जाती, तो चमोली जिला प्रशासन दो बडे़े लक्ष्यों के बीच फंसकर रह सकता था। अब उसके पास यात्रा से पहले इतना समय तो है ही कि वह आपदा-राहत से जुड़े मामले में प्राथमिक तौर पर चीजों को ठीक-ठाक कर ले। इसके अलावा यात्रा से पहले पूरे सरकारी सिस्टम को हरिद्वार में महाकुंभ को भी देखना है। कोरोना की गति बेशक कम हो गई है, लेकिन छिटपुट संक्रमित अब भी मिल रहे हैं। ऐसे में मई तक और बेहतर स्थिति की उम्मीद भी की जा सकती है।
चार धाम यात्रा विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं का कहना है कि पिछली मर्तबा कोरोना के बावजूद यात्रा संचालित की गई थी। इस बार पहले के मुकाबले बहुत बेहतर स्थिति है और यात्रा अपने नए रिकार्ड को छुएगी।