Page 661

लंदन में तिरंगे के अपमान को लेकर घिरे अक्षय कुमार, मांगी माफी

0

रविवार को लंदन के लार्ड्स क्रिकेट मैदान में हुए महिला विश्व कप के फाइनल के दौरान भारतीय महिला टीम का हौसला बढ़ाने पंहुचे अक्षय कुमार उस वक्त आलोचनाओं में घिर गए, जब सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें उन्होंने गलत तरीके से तिरंगा झंडा थामा हुआ है।

इस तस्वीर के ‍वायरल होते ही जब सोशल मीडिया पर तिरंगे का अपमान करने को लेकर अक्षय कुमार की आलोचना शुरू हुई, तो अक्षय कुमार की ओर से मीडिया के नाम जारी एक बयान में माफी मांगी गई। इस बयान में अक्षय कुमार की ओर से कहा गया कि तिरंगे का अपमान करने की बात वे सोच भी नहीं सकते। उस पल में जो भी हुआ, वो अनजाने में हुआ। फिर भी अगर मेरी वजह से किसी को ठेस पंहुची हो, तो मैं अपनी गलती मानकर माफी मांगने के लिए तैयार हूं।

अक्षय कुमार इन दिनों अपनी आने वाली नई फिल्म टायलेट एक प्रेमकथा के प्रमोशन के लिए लंदन के दौरे पर हैं। अक्षय की ये फिल्म 11 अगस्त को रिलीज होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को समर्पित कही जाने वाली इस फिल्म में अक्षय कुमार के अलावा भूमि पेड़णेकर, सुधीर पांडे और अनुपम खेर मुख्य भूमिकाओं में हैं। हाल ही में ये फिल्म रिलीज से पहले आनलाइन लीक होने के मामले को लेकर सुर्खियों में रही, लेकिन पाइरेसी के इस मामले पर जल्दी ही काबू पा लिया गया।

सुबेदार लेखराज को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

0

देश की सेवा में तत्पर रहने वाले एक जवान को सीमा पर दुश्मन की गोलियां तो नहीं मार पायी मगर उसके शरीर के अन्दर के दुश्मन ने ही उन्हे मार दिया और देश की सेना के एक जवान ड्यूटी के दौरान बिमारी से मौत हो गयी, जिनके पार्थिव शरीर को सैन्य सम्मान के साथ नागालैंड से काशीपुर के आवास विकास में उनके घर पर लाया गया। जवान के पार्थिव शरीर के पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों और सैन्य अधिकारियों ने नम आंखों से वीर सैनिक को आखिरी विदाई दी गयी।

तीरंगे में लिपटे घर पहुंचा पार्थिव शरीर है सुबेदार लेखराज सिंह का है। पौडी जिले के रहने वाले सुबेदार लेखराज नागालेंड में 28 आसाम राईफल्स तैनात थे, सुबेदार लेखराज सिंह एक साल से बिमारी से जूझ रहे थे और अचानक ही उनकी बिमारी ने उनके शरीर को तोड दिया और उनकी उपचार के दौरान ही मौत हो गयी।

लेखराज सिंह ने देश के लिए कारगिल युद्ध में भाग लेते हुए दुश्मनों के कई बंकर उडाकर अपनी सेना का मान बडाया था। 1980 में सेना में भर्ती हुए लेखराज सेना भर्ती जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम देते थे, सीमा पर दुश्मनो से डट कर मुकाबला करने वाले लेखराज के शरीर के अंदर के दुश्मन आखिर उनकी जान ले ली। 23 जुलाई को अचानक तबीयत बिगडने पर अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मैौत हो गय़ी, जिसके बाद उनके पार्थव शरार को सैन्य बल के साथ काशीपुर लाया गया। पूरे सैन्य सम्नान के साथ उनको अंतिम विदाई दी गयी।

एटीएम क्लोनिंग में आरोपियों की पहचान, 34 लाख की रिकवरी

0

सूबे की राजधानी देहरादून में एटीएम क्लोंनिग कर 30 लाख की ठगी करने वाले गिरोह की पुलिस ने पहचान कर ली है। पुलिस के मुताबिक एटीएम क्लोनिंग में शामिल हरियाणा के तीन युवकों की पहचान कर उनके खातों से 34 लाख रुपये की रिकवरी की गई है। हालांकी, तीनों आरोपी अभी फरार चल रहे हैं। पहचाने गए आरोपियों में रामबीर, सुदेश और जगमोहन, सभी झज्जर, हरियाणा के रहने वाले हैं।

राजधानी में एटीएम क्लोंनिग कर रुपये निकालने का मामला पुलिस के सामने बीती 14 जुलाई को आया। पुलिस को सुचना मिली कि विभिन्न बैंकों के एटीएम की क्लोंनिग कर खाताधारकों की धनराशि संदिग्ध रूप से निकाली जा रही है।इस पर पुलिस एवं एसटीएफ ने वादीगण की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कराते हुए तत्काल कार्यवाही शुरू की। अभी तक अभियुक्तों ने पीड़ितों के कुल तीस लाख रुपये निकाले थे।

पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बीती एक जुलाई से आठ जुलाई के बीच देहरादून में ही रहकर एटीएम में स्कीमर लगाए और क्लोंनिंग की। इसके बाद जयपुर में जाकर खाताधारकों की धनराशि निकाली। इस के बाद आरटीजीएस के माध्यम से अभियुक्तों के विभिन्न खातों में 11 लाख, 7 लाख, 5 लाख, 2 लाख और 9 लाख, कुल 34 लाख रुपये जमा कराए गए। उक्त सभी बैंक खातों को सीज कर दिया गया है। पीड़ितों की निकाली गई समस्त धनराशि पुलिस ने बैंकों से प्राप्त कर ली है। इसे नियमानुसार सम्बन्धित को वापस किया जाएगा। अभियुक्तों की तलाश में पुलिस की टीम विभिन्न स्थानों में दबिश दे रही है।

पहाड़ों में पहुंच के लिये अब बिजली के तारों में दौड़ेगा इंटरनेट

0

देश भर में केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया की चर्चा है। केंद्र और राज्य सरकारें इंटरनेट के माध्यम से लोगों को जोड़ने और उनके जीवन को आसान बनाने की कवायद में लगी हैं। उत्तराखंड में भी सरकार ने डिजिटल क्रांति को अपनाने के लिये कई कार्यक्रम शुरू किया हैं। लेकिन राज्य की भूगौलिक स्थिति के कारण इसमें सरकार को काफी अड़चने आ रही हैं। लेकिन अब सरकार ने इसका तोड़ निकालने के लिये बिजली के तारों के जरिये दूर दराज के इलाकों में हाई स्पीड इंटरनेट मुहैया कराने की तैयारी की है। इसके लिये पावर काॅपरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने राज्यभर में फैले अपने बिजली के तारों के नेटवर्क के जरिये इंटरनेट की सुविधा देने का भी फैसला किया है।

इसके लिये यूपीसीएल अपने नेटवर्क और लगातार इंटरनेट देने वाली निजि कंपनियों के साथ इस प्राॅजेक्ट का खांचा तैयार कर रहा है। अगर इस योजना को अमली जामा पहनाया जाता है तो आने वाले दिनों में पहाड़ों में भी हाई स्पीड इंटरनेट चल सकेगा। उत्तराखंड के अधिक्तर इलाकों में मोबाइल और इंटरनेट कनक्टिविटी के हालात किसी से छुपी नहीं हैं। इस बारे में हाल ही में केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने भी मोबाइल सेवाऐं देने वाली निजि और सरकारी कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसके बाद खुद मुख्यमंत्री ने भी टेलिकाॅम क्ंपनियों को हिदायत दी थी कि मौजानी इलाकों में केवलिंग की इजाजत तभी मिलेगी जब कंपनियां पहाड़ों में नेटवर्क सुधारने पर जार देंगी। दुर्गम पहाड़ी इलाके ही नहीं शहर के भी कई इलाकों में मोबाइल औऱ नेट सेवाओं का ख्सताहाल है।

यूपीसीएल इसी का समाधान निकालने के लिये अपने राज्यभर में फैले नेटवर्क का इस्तेमाल करना चाहता है। यूपीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह बिजली आपूर्ति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। और इस प्राॅजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है।बहरहाल अगर यूपीसीएल की ये योजना कामयाब होती है तो उत्तराखंड का हर गांव इंटरनेट की सुविधा से जुड़ सकेगा और प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के सपने को सुबह का सवेरा देखने में और बल मिलेगा।

क्रिकेट को नहीं पावर लिफ्टिंग को मिला ये खिलाड़ी

1

कहते हैं कि किस्मत से ज्यादा औऱ वक्त से पहले कुछ नहीं मिलता। कुछ इसी की मिसाल हैं देहारदून के अंकित मिश्रा। 23 साल के अंकित तीन भाई बहनों में सबसे बड़े हैं। देहरादून में अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अंकित ने डीएवी काॅलेज से बी काॅम की पढ़ाई की। पढ़ाई के साथ-साथ अंकित की खेलों में भी खासी रुची रही थी औऱ आम युवाओं की तरह ही अंकित भी क्रिकेट में अपना करियर बनाने को सपने देख रहे थे। वो कहते हैं कि, ‘खेलों के प्रति मेरी पहले से ही रुची रही है और मुझे क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था। पर क्रिकेट में कुछ खास सफलता नहीं मिल रही थी, इसके बाद मैने जिम में बाॅडी बिल्डिंग शुरू की। इसके लिये मेरे परिवार ने मेरा काफी साथ दिया।’

ankit mishra

19 साल की उम्र में अंकित ने पहली बार ‘नार्थ इंडिया पावर लिफटिंग चैंपियनशिप’ में 66 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लिया और 200 खिलाड़ियों में पांचवा स्थान प्राप्त किया। इसके बाद से ही अंकित ने बाॅडी बिल्डिंग को अपनी मंजिल बना लिया। इस युवा खिलाड़ी के दृड़ संकल्प का उद्धाहरण इसी से मिलता है कि एक एक्सीडेंट के बाद वो करीब एक साल तक बिस्तर पर रहा लेकिन ये हादसा ने अंकित की हिम्मत को नहीं तोड़ा। 2014 में काशीपुर में हुई ‘स्टेट पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप’ में अंकित ने गोल्ड मेडल जीतकर सबको अपनी काबलियत का लोहा मनवा लिया। इसके बाद अंकित की कामयाबी का सिलसिला नहीं रुका। 2015 में 66 किलोग्राम कैटिगरी मेें अंकित को ओवरआॅल चैंपियन घोषित किया गया। और इसी साल जुलाई में राज्य स्तरीय मुकाबले में गोल्ड मेडल जीतकर सीधे नेशनल्स में अपनी जगह पक्की कर ली है।

आज अंकित इंडिया को पावर लिफ्टिंग में ओलंपिक गोल्ड दिलाने के सपने को साकार करने के लिये दिन में तीन से चार घंटे जिम में पसीना बहाते हैं। इसके साथ-साथ देहरादून में 26-27 जुलाई को होने वाली ‘एशिया स्ट्रांग मैन’ की आॅर्गनाईसिंग कमेटी में भी वो सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। टीम न्यूजपोस्ट की तरफ से अंकित को उनके लक्ष्य के लिये शुभकामनाऐं।

मलेशिय़ा में गोल्ड जीत दीपक ने बढ़ाया देश का गौरव

0
Deepak wins gold in Malaysia

हल्द्वानी के दीपक ने विदेश में परचम लहराते हुए ना सिर्फ देश का नाम रोशन किया है बल्कि प्रदेश का नाम भी रोशन किया है। मलेशिया में आयोजित 31वीं मलेशियन इंटरनेशनल ओपन मास्टर्स एथेलिटिक्स चैंपियनशिप में कालाढूंगी के दीपक ने दो स्वर्ण पदक जीत देश का गौरव बढाया हैं। दीपक ने लंबी कूद और ट्रिपल जंप में गोल्ड जीत कर देश का नाम रोशन किया है। दीपक इससे पूर्व बंगलुरु में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में भी दो स्वर्ण जीत चुका हैं। इस वक्त वह गुड़गांव में तैनात हैं। 

स्पोटर्स समिति अध्यक्ष व दीपक के बड़े भाई कोच राजेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि 22 व 23 जुलाई को मलेशिया में आयोजित एथेलेटिक्स चैंपियनशिप मेंलंबी कूद और ट्रिंपल जंप में भारत की ओर से प्रतिनिधित्व कर दीपक ने दो गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि दीपक ने पहली बार कुमाऊं विश्वविद्यालय की चैंपियनशिप 1998 में जीती थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 

इसी वर्ष जनवरी में बंगलुरु में हुई नेशनल प्रतियोगिता में भी उन्होंने लंबी कूद तथा ट्रिपल जंप में दो स्वर्ण जीते थे। इसके बाद ही उनका अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ। दीपक ने राजकीय इंटर कालेज कालाढूंगी से इंटर की परीक्षा पास की। उबड-खाबड़ रास्तों को वे दौड़कर ही पार करते थे। एमकॉम की परीक्षा डीएसबी नैनीताल से पास की। इस वक्त वे गुड़गांव में एक प्रतिष्ठित निजी हॉस्पिटल में मैनेजर के पद पर तैनात हैं। कोच ने बताया कि यह राज्य व क्षेत्र के लिए पहला अवसर है जब कालाढूंगी के खिलाड़ी ने पदक जीता है।

अनिल रतूड़ी ने संभाला उत्तराखंड के डीजीपी का पदभार

1
Anil raturi takes over as new DGP

उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनिल रतूड़ी ने सोमवार को पदभार संभाला लिया है। पुलिस मुख्यालय में डीजीपी एमए गणपति ने उन्हें पदभार सौंपा।
आईपीएस अनिल रतूड़ी ने प्रदेश के 10वें डीजीपी के रूप में पदभार ग्रहण किया। 1987 बैच के आईपीएस रतूड़ी राज्य गठन के बाद से ही पुलिस महकमे के अहम पदों पर तैनात रहे हैं।

संक्षिप्त परिचय
नाम- अनिल के रतूडी, आई.पी.एस.
पद-पुलिस महानिदेशक उत्तराख
शिक्षा- कान्वेंट ऑफ जीसस एण्ड मेरी, हैम्पटन कोर्ट एवं सेन्ट जार्ज कालेज मसूरी से प्रारम्भिक शिक्षा। दिल्ली विश्वविद्यालय से ऑनर्स स्नातक एवं अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर डिग्री।
बैच-1987 आई.पी.एस. उ0प्र0 कैडर आवंटित, इसके पश्चात उत्तराखण्ड राज्य गठन के कारण उत्तराखण्ड आवंटित।

उप्र में नियुक्तियाँ
पुलिस अधीक्षक नगर, लखनऊ।
पुलिस अधीक्षक जनपद पीलीभीत एवं रायबरेली।
वरिष्ट पुलिस अधीक्षक जनपद आजमगढ़,इटावा एवं मेरठ।

भारत सरकार में नियुक्ति
राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद में सहायक निदेशक। यहाँ 04 वर्ष तक नियुक्त रहकर प्रशिक्षु आई.पी.एस, केन्द्रीय सेवाओं एवं विदेश पुलिस सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण में योगदान।

उत्तराखण्ड में नियुक्ति
विशेष कार्यधिकारी (ओएसडी) के रुप में उत्तराचंल देहरादून आने वाले प्रथम आईपीएस अधिकारी। उप्र सरकार द्वारा अगस्त 2000 में नियुक्ति तथा नये उत्तराखण्ड राज्य के पुलिस मुख्यालय की स्थापना एवं उत्तराखण्ड पुलिस की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका।
पुलिस उप-महानिरीक्षक/पुलिस महानिरीक्षक एवं अपर पुलिस महानिदेशक पद पर नियुक्त रहते हुए पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं यथा-एसटीएफ, सतर्कता अभिसूचना, सुरक्षा, पीएसी, प्रशिक्षण एवं अपराध शाखा, अपराध अनुसंधान विभाग, निदेशक अभियोजन एवं पुलिस महानिरीक्षक अभिसूचना के साथ-साथ पुलिस महानिरीक्षक, कुमाँऊ परिक्षेत्र के पदों पर नियुक्त रह चुके हैं। महानिदेशक (रुल्स एण्ड मैनुअल्स), निदेशक सतर्कता, निदेशक अभियोजन, उत्तराखण्ड।

विदेश में प्राप्त 1-एफबीआई अकादमी क्वाँटिको, संयुक्त राज्य अमेरिक-2003
प्रशिक्षण 2-लंदन बिजनेस स्कूल, लंदन इंग्लैण्ड-2012
3-संघीय कानून प्रर्वतन केन्द्र, ग्लाईन्को, जार्जिया, संयुक्त राज्य अमेरिका-1997

प्राप्त सम्मान चिन्ह-
महामहिम राष्ट्रपति का विशिष्ट सेवा मेडल-2011
सराहनीय सेवा पुलिस मेडल-2003
निदेशक, राष्ट्रीय पुलिस अकादमी का डिस्क-1997

खेल- अन्तराष्ट्रीय रोलर स्केटिंग हाँकी चैम्पियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व, काहिरा मिश्र-1983

‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ पर चित्रांगदा व कुशान के बीच झगड़ा बढ़ा

0
female-producer-accuses-censor-board-members

नवाजुद्दीन सिद्दीकी की रिलीज होने जा रही फिल्म ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ को लेकर इस फिल्म के निर्देशक कुशान नंदी और हीरोइन चित्रांगदा सिंह के बीच तकरार और ज्यादा बढ़ गई है। विवाद ये बताया जाता है कि चित्रांगदा सिंह को इस फिल्म में नवाजुद्दीन की हीरोइन के तौर पर कास्ट किया गया था, लेकिन नवाज के साथ रोमांटिक सीनों को लेकर चित्रांगदा सिंह का फिल्म की टीम के साथ इतने ज्यादा विवाद हुए कि उन्होंने खुद को इस फिल्म से अलग कर लिया।

बाद में उनकी जगह बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री बिदिता बाग को नवाज की हीरोइन बनाया गया और फिल्म का ट्रेलर देखने से ही पता चल जाता है कि नवाज के अपनी हीरोइन के साथ कई सारे हाट सीन हैं। चित्रांधा सिंह ने कुछ दिनों पहले फिल्म के निर्देशक पर अनप्रोफेशनल होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वे नवाज के साथ रोमांटिक सीनों के लिए बहुत ही शर्मनाक हरकतें करने के लिए दवाब डाल रहे थे, जिनको करना उनके लिए संभव नहीं था।

अब पलटवार करते हुए फिल्म के निर्देशक कुशान नंदी ने भी चित्रांगदा सिंह पर अनप्रोफेशनल होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि फिल्म से अलग होने के बाद भी उन्होंने फिल्म की फीस के तौर पर मिला पैसा वापस नहीं लौटाया। कुशान नंदी के मुताबिक, चित्रागंदा से ज्यादा अनप्रोफेशनल कलाकार उन्होने नहीं देखा। तमाम गालियों और हाट सीनों से भरी नवाज की ये फिल्म 25 अगस्त को रिलीज होगी।

दो अक्तूबर को रिलीज होगी इरफान-दीपिका की फिल्म

0

इस साल फरवरी में रिलीज हुई फिल्म रंगून के बाद निर्देशक विशाल भारद्वाज के निर्देशन में शुरू होने जा रही नई फिल्म की रिलीज डेट तय कर दी गई है। मिली जानकारी के अनुसार, ये फिल्म अगले साल 2018 में 2 अक्तूबर को रिलीज की जाएगी। संयोग से सन 2014 में 2 अक्तूबर को ही विशाल भारद्वाज द्वारा कश्मीर मुद्दे पर बनी फिल्म ‘हैदर’ रिलीज हुई थी, लेकिन बाक्स आफिस पर फिल्म सफल नहीं रही थी।

विशाल की नई फिल्म में ‘पीकू’ के बाद इरफान के साथ दीपिका पादुकोण की जोड़ी एक बार फिर काम करने जा रही है। इरफान ने विशाल के साथ इससे पहले ‘मकबूल’, ‘सात खून माफ’ और ‘हैदर’ फिल्मों में काम किया है, जबकि दीपिका के लिए उनकी फिल्म में काम करने का ये पहला मौका होगा।

इस फिल्म की एक और खास बात ये होगी कि विशाल भारद्वाज इस फिल्म के सिर्फ निर्माता और लेखक होंगे, जबकि इसका निर्देशन हनी त्रेहान करने जा रहे हैं, जिनकी बतौर निर्देशक ये पहली फिल्म होगी। ये फिल्म मुंबई के मशहूर क्राइम जर्नलिस्ट रहे एस हुसैन जैदी के उपन्यास, ‘माफिया क्वींस आफ मुंबई’ की एक स्टोरी ‘फैमी टेल’ पर आधारित बताई गई है।

विशाल भारद्वाज के साथ मिलकर रोहन नरुला इसकी पटकथा लिख रहे हैं। ‘रंगून’ की पटकथा भी इसी टीम ने लिखी थी। नई फिल्म में दीपिका मुंबई के अंडरवर्ल्ड की एक महिला सरगना राहिमा खान का किरदार करेंगी, जो सपना दीदी के नाम से जानी जाती थी और 90 के दशक में मुंबई के अपराध जगत में उसका दबदबा रहा था। इरफान का रोल एक ऐसे छुटभैये गैंगस्टर का है, जो राहिमा के साथ प्यार में पड़ जाता है।  कहानी कुछ यूं बताई जाती है कि राहिमा के पति को दाऊद ने धोखे से मार दिया था। इसका बदला लेने के लिए राहिमा खुद कमान संभालती है और इरफान के किरदार की मदद से दुबई में एक क्रिकेट मैच के दौरान दाऊद इब्राहिम की हत्या का प्लान बनाती है, लेकिन मैच से पहले दाऊद को इसकी भनक लग जाती है और उसी मैच के दौरान राहिमा की हत्या कर दी जाती है। 

काशीपुर में दस लाख की स्मैक बरामद

0

काशीपुर में भी नशे के खिलाफ पुलिस के अभियान के दौरान बडी कामयाबी हासिल हुई है। नशे के सौदागरों पर इन दिनों कुमाऊं मण्डल में पुलिस पैनी नजर बनाये हुए है, जिसके चलते लगातार पुलिस कारोबारियों की धरपकड में लगी है। लेकिन नशे के ये कारोबारी उत्तराखण्ड में नशे के कारोबार को बरेली से अंजाम दे रहे हैं। बरेली का नशे का सौदागर इतना शातिर है कि उसके गुर्गों  को तक उसका ठिकाना मालूम नहीं है, सिर्फ छोटी सी पुडिया देकर सौदागरों को उत्तराखण्ड के अलग अलग जगहों पर भेज कर नशे के कारोबार को फैला रहा है, इसका खुलासा काशीपुर पुलिस ने किया है।

पुलिस के हाथ दो सौदागर लगे हैं जो बरेली से लाखों की स्मैक लेकर काशीपुर में छोटे छोटे सौदागरों को ये स्मैक बेचते थे, इन दोनों सौदागरों के पास से पुलिस को करीब दस लाख की स्मैक बरामद हुई है। बताया जा रहा है कि नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस को सफलता मिली है। पुलिस ने देर रात दो लोगों को करीब पचास ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया है। पता चला कि बरेली से स्मैक खरीदकर यह यहा लाते हैं और स्कूल कॉलेजों, कोचिंग सेंटरों में लड़के-लड़कियों को बेचते हैं। वहीं पुलिस अब बरेली के सर्गना को तलाशने में जुटी है।