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दून में सक्रिय है बच्चों से भीख मंगवाने वाला गिरोह

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रदेश में भिक्षावृत्ति पर प्रतिबंध लगाया गया है वाबजूद इसके अभी तक राज्य में भिक्षावृत्ति का गिरोह अपने काम को अंजाम दे रहा है। वहीं दून की बात की जाए तो यहां हर चौराहों पर बच्चे खुलेआम भीख मांगते नजर आते हैं। यही नहीं, गिरोह ने बच्चों को इतना प्रशिक्षित किया हुआ है कि जब भी उनसे भीख मंगवाने वाले व्यक्ति के बारे में पूछते हैं तो वह मौके से भाग खड़े होते हैं।

गौरतलब हो कि राज्य सरकार द्वारा तीन माह पूर्व उत्तराखंड में भिक्षावृत्ति को प्रतिबंधित कर दिया गया था। हालांकि, प्रतिबंध लगने के कुछ समय बाद तक भीख मांगने वाले बच्चे सड़कों पर नजर नहीं आए, लेकिन अब फिर से वहीं आलम दिखने लगा है। बड़े पैमाने पर बच्चे सड़कों पर हाथ में कटौरा लेकर भीख मांगते नजर आ रहे हैं। इसकी वजह ये है कि दून में भीख मंगवाने वाले कई गिरोह सक्रिय हो चुके हैं। चार माह पहले तत्कालीन अपर सचिव समाज कल्याण मनोज चंद्रन ने भी इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कार्रवाई के लिए कहा था। तब अपर सचिव ने कहा था कि सुबह के समय टैंपों में इन बच्चों को शहर के प्रमुख चौराहों पर छोड़ा जाता है और फिर शाम को वापस टैंपों से इन्हें किसी गुमनाम जगह पर ले जाता है। दिनभर ये बच्चे सड़कों पर घुमकर भीख मांगते हैं। हैरत की बात ये है कि बच्चों को इतना डराया जाता है कि यह पूछने के बावजूद उस व्यक्ति का नाम नहीं बताते, जो इनसे भीख मंगवा रहा है। उदाहरण के तौर पर लालपुल पर बुधवार सुबह तीन छोटी लड़कियां भीख मांग रही थी, एक व्यक्ति ने जब इन बच्चों से उस व्यक्ति का नाम पूछा तो उन्होंने रोना शुरू कर दिया और चिल्लाते हुए भाग खड़ी हुई। इस दौरान जिलाधिकारीएसए मुरुगेशन ने कहा कि प्रशासन ने इस मामले में पिछले दिनों बड़ी कार्रवाई की है। यदि अब भी कुछ जगहों पर बच्चों से भीख मंगवाई जा रही है तो इन जगहों पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

अल्पसंख्यक विभाग की छात्रवृत्ति में घपले की आशंका, मामले की होगी जांच

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देहरादून। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक विभाग की ओर से बांटी जा रही छात्रवृत्ति में घपले की आशंका बन गई है। ऑनलाइन व्यवस्था होने के बाद अचानक से आई आवेदनों की कमी से विभाग सकते में है। मामले को संज्ञान में लेते हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग ने मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग का तर्क है कि रिपोर्ट आने के बाद ही मामले से स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

बता दें कि तीन साल पहले अल्पसंख्यक आयोग ने विभाग की छात्रवृत्ति को ऑनलाइन कर दिया था। हुआ यूं, कि ऑनलाइन व्यवस्था से पहले अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के लिए प्रत्येक साल दो लाख से ज्यादा छात्रों के आवेदन विभाग को प्राप्त होते थे। जिन्हें हर साल छात्रवृत्ति आवंटित की जाती थी। लेकिन, जब से छात्रवृत्ति को ऑनलाइन किया गया तब से आवेदनों की संख्या दो लाख से घटकर बीस हजार तक सिमट गई है। इतना ही नहीं, इस साल तो मात्र 12 हजार आवेदन विभाग को प्राप्त हुए हैं। हालांकि, आयोग यह भी मान रहा है कि कुछ क्षेत्रों में नेटवर्किंग व जानकारी के अभाव के कारण आवेदन पत्रों में कुछ कमी आई है। साथ ही कुछ जगह पर स्कूल स्तर पर भी लापरवाही हुई है, लेकिन बावजूद इसके इतने बड़े पैमाने पर आवेदन पत्रों में कमी आने से संदेह पैदा हो गया है। आयोग से लेकर विभाग भी संख्या को देखकर आश्चर्यचकित है। यही कारण है कि अल्पसंख्यक आयोग ने अब इसकी वजह तलाशने के लिए जांच कराने का निर्णय लिया है। इस दौरान आयोग उन छात्रों की जांच भी कराएगा, जिन्हें व्यवस्था ऑनलाइन होने से पहले छात्रवृत्ति बांटी गई है। साथ ही यह भी तलाशा जाएगा कि अब आवेदनों की संख्या घटकर इतनी कम क्यों हो गई है। इस मौके पर अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही कि अचानक आवेदन पत्रों की संख्या घटकर इतनी कम हो गई। साथ ही पूर्व में जो छात्रवृत्ति बंटी है उसकी भी जांच कराई जा रही है। 

जरूरतमंद को समय से मिले ब्लड:डीएम

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रूद्रपुर। जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश देते हुए कहा आज के समय में जरूरतमंद को समय से ब्लड मिल सके, इसके लिए बैंको मे जो रक्त है, उसकी सूचना जनपद के प्राईवेट चिकित्सालयों मे भी होनी चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर जरूरतमंदो को समय से ब्लड उपलब्ध हो सके।

बुधवार को जिलाधिकारी डा. नीरज खैरवाल द्वारा कलेक्ट्रेट सभागार मे ई-रक्त कोष संचालन की प्रगति की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने कहा जनपद मे जो चार ब्लड बैंक है,उन्हे भी ई-रक्त कोष से जोडने की कार्यवाही की जाए व समय-समय पर प्राईवेट ब्लड बैंक के डाक्टर व स्टाफ की बैठक आयोजित की जाए। उन्होंने कहा कि पारर्शिता से कार्य करते हुए जिला चिकित्सालय मे ई-रक्तकोष संचालन हेतु 01 नोडल अधिकारी को नियुक्त करें। उन्होंने कहा कि ई-ब्लड बैंक बनने से जनपद के बाहर कितने लोग ब्लड ले गये उसका भी विवरण उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा ई-रक्तकोष के सम्बन्ध मे जानकारी देने के लिए पैथालाॅजी व टैक्नीशियनो की भी ट्रेनिंग कराई जाए। जिलाधिकारी ने कहा किच्छा व जसपुर मे स्टोरेज यूनिट के लाईसेंस नवीनीकरण हेतु शासन को शीघ्र पत्र प्रेषित करे साथ ही खटीमा चिकित्सालय मे ब्लड बैंक खोलने हेतु लाईसेंस लेने के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजे। उन्होने कहा इस कार्य मे जो उपकरण व मैन पाॅवर चाहिए उसे लिखित मे दे ताकि उसकी व्यवस्था कराई जा सके।
चिकित्सालयो मे लगे सीसीटीवी कैमरो की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश देेते हुए कहा सीसीटीवी कैमरो की स्थापना जिस उद्देश्य के लिए की गई है, वह उद्देश्य पूरा हो इसके लिए सीएमओ चिकित्सालयो मे जाकर कैमरो की लोकेशन देखे। उन्होने कहा चिकित्सालयो मे सभी सीसीटीवी कैमरो को आॅनलाइन करने की कार्यवाही शीध्र अमल मे लाई जाए।
सीएमएस डा. अमिता उप्रेती ने बताया जनपद मे वर्ष 2016-17 मे 6322 यूनिट रक्त प्राप्त हुआ इसके लिए 24 रक्तदान शिविर आयोजित किये गये। वर्ष 2017-18 मे 3619 यूनिट रक्त प्राप्त हुआ इसके लिए 16 कैंप लगाये गये। बैठक में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. संजय कुमार शाह, निदेशक आरके पाण्डे, चिकित्साधीक्षक काशीपुर बीके टम्टा, एसीएमओ मनीष अग्रवाल सहित अन्य लोग उपस्थित थे। 

बीमार पड़ा है जन औषधीय केन्द्र, गरीबों को नहीं मिल रही सुविधा

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अल्मोड़ा- रोगियों को सस्ते दामों में दवाइयां उपलब्ध कराने की सरकार की मंशा को पंख नहीं लग पा रहे हैं। इस योजना के क्रियान्वयन में बरती जा रही लापरवाही का ही परिणाम है कि रोगी अब भी बाजार से दवाइयां खरीद रहे हैं। जबकि दवाओं के लिए खोले गए जन औषधि केंद्र घाटे में चल रहे हैं।
अल्मोड़ा जिला मुख्यालय में रोगियों को सस्ते दामों में जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बेस अस्पताल में जन औषधि केंद्र खोला गया। इस केंद्र में जेनरिक दवाओं की उपलब्धता सैकड़ों की तादात में है। लेकिन इसके बाद भी यह जन औषधि केंद्र घाटे में चल रहा है। इस जन औषधि केंद्र में सिर्फ कर्मचारियों के वेतन में प्रतिमाह लगभग 24 हजार रुपये का खर्चा आता है। लेकिन महीने भर में दवाओं को बिक्री 15 हजार से अधिक नहीं है। अस्पताल के सूत्रों की मानें तो चिकित्सकों के जेनेरिक नाम से दवाएं लिखने के बजाय ट्रेड नाम से दवाएं लिखने के कारण रोगियों को जन औषधि केंद्र से दवाइयां नहीं मिल पा रही है। जिस कारण जन औषधि केंद्र में दवाओं की बिक्री नहीं हो पा रही है। यही हालात रहे तो रोगियों के लिए सस्ते दामों में दवाएं उपलब्ध कराने की मंशा से खोले गए जन औषधि केंद्र जल्द बंद होने के कगार पर आ जाएंगे।

नगर के बेस अस्पताल में खोले गए जन औषधि केंद्र में प्रयोग में नहीं आ रही दवाओं को वापस नहीं लिया जा रहा है। जिस कारण यहां लाखों रुपये की दवाएं बेकार पड़ी हुई हैं। दरअसल जन औषधि केंद्र को बीपीपीआई, आइडीपीएल कार्पोरेशन गुड़गांव से दवाइयों की सप्लाई की जाती है। लेकिन सैकड़ों तरह की दवाओं में से कुछ दवाएं प्रयोग में ही नहीं आती हैं। वर्तमान में इस जन औषधि केंद्र में लगभग 70 हजार रुपये की 26 प्रकार की दवाएं निष्प्रयोज्य पड़ी हुई हैं। जिन्हें वापस करने के लिए जन औषधि केंद्र के प्रभारी ने संबंधित आपूर्तिकर्ता को कई बार पत्र भी भेजा है लेकिन इसके बाद भी इन दवाओं को वापस नहीं किया जा रहा है।

एस्ट्रो टूरिज्म की भारत में अपार संभावनाएं

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नैनीताल। नदी, झील, पहाड़, झरना और समुद्र जा जाकर अब पर्यटक ऊब चुका है। अब सिर्फ ब्रह्मांड ही अछूता है, यही कारण है कि अब देश में अंतरिक्ष पर्यटन की शुरुआत हो चुकी है। फिलहाल यह बहुत महंगा है, इसलिए नया कॉन्सेप्ट एस्ट्रो टूरिज्म आ गया है। विदेशों में तो यह चलन में है, लेकिन भारत में भी इसकी अपार संभावनाएं है। प्राचीन मंदिर व गिरजाघरों समेत देश के विभिन्न शहरों में स्थापित जंतर-मंतर को इस पर्यटन से जोड़ा सकता है।

अर्मेनिया गणतंत्र में 13 से 17 नवंबर तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय एस्ट्रोनॉटिकल हेरिटेज ऑफ द मिडिल ईस्ट सम्मेलन में भाग लेकर लौटे भारतीय तारा भौतिकी संस्थान बंगलुरु के सेवानिवृत्त खगोलविद प्रो. आरसी कपूर ने जागरण के साथ बातचीत में सम्मेलन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि आसमान में होने वाली रोमांचक खगोलीय घटनाओं के दीदार तो कहीं से भी किए जा सकता हैं। इनके अलावा भी जमीनी स्तर पर ऐतिहासिक धरोहरों का अंबार है, जिनकी महत्ता खगोल विज्ञान के लिहाज से कहीं अधिक बढ़ जाती है। हमारे देश में प्राचीन काल में बनी कई महत्वपूर्ण इमारतें सूर्य की दिशा के अनुसार ही बनी हैं। गिरजाघरों की नींव अयनांत व विषुव के हिसाब से पड़ती थी, जबकि मंदिरों का निर्माण भी दिशा के हिसाब से ही होता था। इनके अलावा दिल्ली, उज्जैन, बनारस के जंतर-मंतर खगोल की ही देन है। इनके बल पर देश में खगोलीय पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। समय-समय पर स्टार(तारा) पार्टियों का आयोजन किया जा सकता है। विदेशों में होने वाली स्टार पार्टियां बेहद लोकप्रिय हो चली हैं। खुले आसमान के नीचे सुनसान स्थानों व जंगलों में टैंट कैंप के जरिए आसमानी गतिविधियों को निहारा जा सकता है।
प्रो. कपूर ने बताया कि अर्मेनिया सम्मेलन में कई देशों के वैज्ञानिकों ने अपने देशों में एस्ट्रो टूरिज्म की गतिविधियों में प्रकाश डाला। इस मौके पर उन्होंने भी अपना शोध पत्र भी प्रस्तुत किया। इस शोध पत्र में बताया कि भारत में एस्ट्रो टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए राज्यों के पर्यटन विभागों को आगे आना होगा। विदेशों की बात करें तो वहां वेधशालाओं के अलावा इस पर्यटन पर कार्य कर रहे निजी कंपनियों का जनसंपर्क बेहद मजबूत हैं, जिस कारण वहां का एस्ट्रो टूरिज्म काफी आगे जा पहुंचा है। भारत में भी पर्यटकों को लुभाने के लिए ऐसा ढांचा तैयार करने की पहल की जा सकती है।

आयकर विभाग ने 60 करोड़ के टीडीएस बकाएदार विभागों के खाते किए फ्रीज

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देहरादून। आयकर विभाग की टीडीएस विंग ने करीब 60 करोड़ रुपये की टीडीएस अदायगी न करने वाले डेढ़ दर्जन से अधिक विभागों व संस्थानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए इन विभागों के खातों के भुगतान पर रोक लगा दी है। इसमें उत्तराखंड सचिवालय, राज्य सरकार के कई विभागों के कार्यालय समेत केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले संस्थान भी शामिल हैं। आयकर विभाग की इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है।

अधिकारियों ने आनन-फानन में हिसाब-किताब बनाना शुरू कर दिया है। खातों पर रोक के चलते संबंधित संस्थानों के कार्मिकों को वेतन भी जारी नहीं किया जा सकेगा। आयकर अधिकारी (टीडीएस) आबिद अली के मुताबिक, जिन विभागों व संस्थानों के खातों पर रोक लगाई गई है, उन पर पिछले सात-आठ सालों से टीडीएस का बकाया चल रहा है। वेतन, ठेकेदारों को भुगतान, भवन किराया आदि पर टीडीएस काटकर इन संस्थानों ने जमा ही नहीं कराया है। वहीं, तमाम संस्थान रिटर्न फाइल करने में भी पीछे चल रहे हैं। विभाग ने ऐसे टॉप संस्थानों व उनके कार्यालयों की सूची तैयार की, जिन पर टीडीएस का सबसे अधिक बकाया चल रहा है। लोनिवि व सिंचाई विभाग के सबसे अधिक कार्यालयों के खातों पर रोक लगाई गई है।
आयकर अधिकारी आबिद अली ने बताया कि संबंधित कोषागार कार्यालयों व बैंकों के माध्यम से बकाएदार संस्थानों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है। अब जब तक टीडीएस का बकाया अदा नहीं कर दिया जाता या फिर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे दिया जाता, तब तक खातों पर से रोक नहीं हटाई जाएगी। पहले चरण की इस कार्रवाई के बाद अन्य संस्थानों के खातों पर भी रोक लगाने की कार्रवाई की जाएगी।
बड़े बकाएदार, जिनके भुगतान पर रोक


संस्थान/कार्यालय, बकाया राशि (रु. लगभग में)
सिंचाई खंड चमोली, 2.91 करोड़
एम्स ऋषिकेश, 2.75 करोड़
लोनिवि प्रांतीय खंड 2.70 करोड़
लोनिवि निर्माण खंड 2.32 करोड़
इंजीनियर लायजन ऑफिसर, 1.95 करोड़
एमडीडीए, 1.94 करोड़
लोनिवि प्रांतीय खंड, 1.55 करोड़
कंप्टरोलर्स कार्यालय,
पंतनगर 1.44 करोड़
उत्तराखंड सचिवालय 1.41 करोड़
लोनिवि अस्थाई खंड 1.40 करोड़
जीई एमईएस रुड़की, 1.35 करोड़
सिंचाई खंड कार्यालय, 1.22 करोड़
लघु सिंचाई 1.18 करोड़
उत्तराखंड जल संस्थान 92.79 लाख
एलबीएस प्रशासनिक अकादमी, 91.59 लाख 

सरकारी योजना की आस में टूट गयी रामसिंह की सांस

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पिथौरागढ़- राज्य गठन के बाद से ही प्रदेश की सभी सरकारों ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक के उत्थान के लिए तमाम दावे करती रहती हैं। लेकिन यह दावे सिर्फ कागजी ही साबित हो रहा है। पिथौरागढ़ जिले में रामसिंह की मौत ने सरकार के इन दावों की सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है। राम सिंह को कई बार आवास बनाने का भरोसा मिला, लेकिन यह भरोसा पूरा नहीं हुआ। यह परिवार किस हाल में जी रहा होगा और इसका अंदाज इसी से लगाया जा कि राम सिंह के अंतिम संस्कार तक के लिए परिवार के पास पैसे नहीं थे।

धारचूला तहसील के बलुवाकोट क्षेत्र के तल्ला गांव निवासी राम सिंह ग्वाइला 65 वर्ष की उम्र में मौत हो गई। राम सिंह के परिवार में पत्नी और दो नाबालिग बच्चे हैं। पूंजी के नाम पर राम सिंह के पास एक कमरे का मकान है, जिसकी दीवार दो वर्ष पूर्व टूट गई थी। अंत्योदय की श्रेणी में आने वाले इस परिवार को पिछले कई वर्षो से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सरकारी योजना के तहत आवास देने आश्वासन दिया। आवास तो मिला नहीं मकान की टूटी दीवार की मरम्मत तक के लिए सरकार से पैसा नहीं मिल पाया। इस कारण पूरा परिवार प्लास्टिक की पन्नियों से टूटी हुई दीवार को ढंककर शीतकाल का सामना कर रहा है।

एक सप्ताह पहले राम सिंह ठंड का शिकार हो गया और सोमवार को उसकी मौत हो गई। राम सिंह और उनकी पत्नी मुर्सी देवी मजदूरी करती है। कोई जमा पूंजी नहीं होने के कारण मंगलवार को गांव के चंचल सिंह ऐरी, त्रिलोक सिंह, तारा सिंह भंडारी, कल्याण सिंह, दिलीप सामंत आदि ने चंदा एकत्रित कर राम सिंह का अंतिम संस्कार किया।

मजदूर की मौत के बाद भी इस परिवार की सुध लिए जाने की कोई उम्मीद नहीं के बराबर है। प्रशासन भी अपनी उदासीनता को छुपाने के लिए अक्सर ऐसे मामलों से बचने की ही कोशिश ज्यादा करता रहा है। सरकार की आवास योजनाओं का हाल किसी से छुपा नहीं है। राम सिंह जैसे कई लोग आज भी एक अदद आवास के लिए एड़ियां रगड़ रहे हैं।

गुणवत्ता युक्त शिक्षा पर ध्यान दें शिक्षक: सीएम

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देहरादून।मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को लक्ष्मण इण्टर कालेज में आयोजित राजकीय शिक्षक संघ के चतुर्थ द्विवार्षिक अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री कहा कि शिक्षकों व सरकारी कर्मियों में अन्तर है, शिक्षक राज्य के लिये प्राइड भी होता है। राज्य में शिक्षकों की बड़ी संख्या के दृष्टिगत उन्होंने देहरादून में संगठन के लिये संघ भवन की जरूरत बतायी, उन्होने कहा कि संगठन लोकतंत्र को मजबूत करते है, लोकतंत्र संविधान की रीढ़ है, राज्य का आधार ही शिक्षा से जुडे लोग है, यह राज्य के सम्मान से जुड़ा विषय भी है।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि किसी भी विभाग का केन्द्र बिन्दु आम आदमी होना चाहिए, शिक्षा से बच्चे का अहित न हो यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। हमारी चाहे कोई भी समस्या हो किन्तु बच्चों की शिक्षा बाधित न हो इसके लिये शिक्षकों को सम्वेदनशील बनना होगा। प्रदेश में बच्चों से सीधा संवाद कार्यक्रम करने के लिये प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पहल की गई है। बच्चों को महसूस होना चाहिए कि हममेें और आपमें एक कदम का फासला है। हम आज जहां है वहां कल बच्चे भी पंहुच सकते है, उनमें यह अहसास होना चाहिए।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जब स्कूलों में बच्चों की संख्या अधिक रहेगी तभी स्कूल बंद होने से बचे रहेंगे तथा शिक्षकों को भी लाभ मिल सकेगा। उन्होंने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि आज 60 प्रतिशत बच्चे निजि स्कूलों में पढ़ रहे हैं, केवल 40 प्रतिशत बच्चे ही सरकारी स्कूलों में रह गये हैं। जबकि सरकारी स्कूलों के अध्यापक सबसे योग्य है तथा वेतन भी अधिक पाते है। ए ग्रेड में सरकारी अध्यापक ही आता है। हमारे बच्चे भी सरकारी अध्यापक तभी बन पायेंगे जब हम उनके लिये अवसर छोड़ेंगे, इसके लिये स्कूलों को बंद होने से बचाना होगा, उनकी गुणवत्ता युक्त शिक्षा पर ध्यान देना होगा। उन्होने शिक्षकों से योग्य 10-12 शिक्षकों का थिंक टैंक गठित करने की भी बात कही। यह थिंक टैंक शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यालयों की मजबूती स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने आदि समस्याओं के समाधान के लिये अपने सुझाव रखे। हमे अपने बच्चों की चिंता करनी होगी, हमारे बच्चे हमारे विद्यालयों में गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त कर सके इस पर मनन करने की जरूरत है। इसमें सभी को सहयोगी बनना होगा।
शिक्षक संघ के अधिवेशन में प्रतिभाग करने वाले शिक्षकों को विशेष आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति भी उन्होंने प्रदान की तथा कहा कि शीघ्र ही प्रदेश में स्थानान्तरण अधिनियम लाया जायेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने राजकीय शिक्षक संघ की स्मारिका ‘‘शिक्षा दर्पण‘‘ का विमोचन तथा वेबसाइट का लोकार्पण किया। कार्यक्रम संगठन के प्रान्तीय महामंत्री सोहन माजिला द्वारा संगठन में कार्यकलापों की जानकारी दी।

वन निगम का रास्ते को लेकर जीएमवीएन ठेकेदारों से विवाद

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देहरादून/डोईवाला। वन विकास निगम माजरीग्रान्ट जाखन लांट तौल कांटे से संचालित खनन के वाहनों के आवागमन के रास्ते को लेकर गढ़वाल मण्डल विकास निगम के खजिन ठेकेदारों के साथ विवाद खड़ा हो गया। ठेकेदारों ने निगम के तौल कांटे से संचालित वाहनो का रास्ता बन्द कर दिया।

निगम के वाहनों रूकने का मामला उच्चाधिकारियों के पास पहुंचा। जिलाधिकारी ए.एस. मुरूगेशन ने मामले की सुलझाने के लिए डोईवाला एसडीएम कुष्म चौहान को निर्देशित किया। बुधवार की एसडीएम की मध्यक्षता में वन विकास निगम, जीएमवीएन के अधिकारियों के साथ रास्ते के विवाद को सुलझाने को लेकर बातचीत हुई,लेकिन अभी रास्ते का मामला सुलझ नही पाया है। फि लहाल निगम के खनन केवाहनों का संचालन जारी रहा,लेकिन निगम के तौल कांटे से संचालित खनन केवाहनों के रास्ते का कोई निस्तारण नही हुआ तो निगम क ा तौल कांटे का संचालन बन्द हो सकता है। माजरीग्रान्ट स्थित जाखन नदी में वन विकास निगम का खनन का लांट खुला हुआ है। इस लांट के तौल कांटे से खनन संचालित किया जा रहा था। जीएमवीएन ने वन निगम के लांट के समीप खनिज के चुगान का ठेका दे दिया है। जहां से निगम के तौल कांटे से खनन के वाहन का संचालन हो रहा था।
जीएमवीएन के ठेकेदारों ने निगम के संचालित वाहनो का रास्त बन्द कर दिया। रास्ता बन्द करने से जीएमवीएन ठेकेदार और वन विकास निगम के कर्मचारियों में रास्ते को लेकर आपस में विवाद हो गया। मामले देहरादून के जिलाधिकारी एएस मुरूगेशन के संज्ञान में आया। उन्होंने मामले के निस्तारण के लिए डोईवाला एसडीएम कुष्म चौहान को निर्देशित किया। इस मौके पर उपजिलाधिकारी कु ष्म चौहान, जीएमवीएन के महाप्रबंधक मोहन सिह, निगम के डीएलएम इन्द्रसिह नेगी, क्षेत्रीय खनन अधिकारी कुबेर सलाल आदि अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे। 

एमडीडीए उपाध्यक्ष से मिले मसूरी विधायक

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देहरादून। मसूरी विधायक गणेश जोशी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमण्डल ने मसूरी क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर बुधवार को एमडीडीए उपाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव से मुलाकात की। इस दौरान विधायक गणेश जोशी ने मुख्यमंत्री की घोषणाओ के बावजूद विकास कार्य शुरू न होने पर नाराजगी जाहिर की।
इसपर एमडीडीए उपाध्यक्ष ने सचिव पीसी दुमका, एससी अनिल त्यागी ओर अधिशाशी अभियंता को मौके पर बुला कर सभी कार्यो की जानकारी ली। गणेश जोशी ने कहा की इससे पूर्व एमडीडीए के 2 अन्य उपाध्यक्ष मसूरी मे वेंडर जोन के लिये निरीक्षण कर चुके है। किन्तु अभी तक कार्य शुरू नहीं हुए। इसी प्रकार मसाइनिक लॉज (मसूरी) पर बन रही पार्किंग, मसूरी मे पर्यटकों के लिये सौचालय निर्माण, माता संतला देवी मंदिर का मार्ग निर्माण एवं मंदिर प्रांगण मे सौंदीकरण कार्य, श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क का सौंदीकरण कार्य, टपकेशवर मंदिर मे लिफ्ट लगवाने, अनरवाला मे शहीद रमेश बहादुर थापा के नाम पर बन ने वाले शहीद द्वार ओर घुचुपानी के लिये वैकल्पिक मार्ग निर्माण एवं नयागाँव मे बन रहे सामुदायिक भवन मे हो रही देरी को प्रमुखता से रखा। हाल ही मे 15 सितम्बर को आतंकियो से लोहा लेते हुए असम मे शहीद हुए मेजर विजय सिंह अहलावत के सम्मान मे विजय कॉलोनी मे द्वार का निर्माण कार्य जल्द पूर्ण करने को कहा। इन सभी विषयो पर उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया की जल्द ही उपरोक्त कार्य को प्राथमिकता से पूर्ण करा जाएगा। इस अवसर पर दीपक पुण्डीर, संध्या थापा, ज्योति कोटिया, ईशांत छेत्री एवं राजीव गुरुङ उपस्थित रहे।