Page 892

कांग्रेस के तीन पदाधिकारी पार्टी से निष्कासित

0

प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष ताहिर अली ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश सचिव तनवीर शेख रियाजुद्दीन, इम्तियाज अली एवं संगठन सचिव मोईनखान को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है।

जानकारी देते हुए प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष ताहिर अली ने बताया तनवीर शेख रियाजुद्दीन, इम्तियाज अली एवं संगठन सचिव मोईनखान काफी लम्बे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे जिन्हें पूर्व में मौखिक रूप से चेतावनी भी दी गई थी,किन्तु वह लगातार पार्टी अनुशासन को तोड़ने का काम करते रहे हैं। ताहिर अली ने कहा कि किसी भी कार्यकर्ता ने पार्टी अनुशासन के खिलाफ कार्य किया तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पीएम मोदी की उत्तराखंड में 4 जनसभाएं तय

0

भाजपा के स्टार कैंपेनर में सबसे पहला नाम पीएम मोदी का है और प्रेदेश में चुनाव प्रचार के लिए पीएम मोदी का कार्यक्रम तय हो चुका है।पार्टी ने पीएम मोदी का चुनाव प्रचार अभियान अंतिम चरण के लिए सुरक्षित रखा है।प्रधानमंत्री मोदी 10 से 12 तक दो दिन प्रदेश में जनसभाएं करेंगें।

पीएम मोदी का कार्यक्रमः

  • 10 फरवरी- हरिद्वार(दोपहर 2 बजे)
  • 11 फरवरी- पिथौरागढ़(दोपहर 2 बजे)
  • 12 फरवरी- श्रीनगर(सुबह 11 बजे)
  • 12 फरवरी- रुद्रपुर(दोपहर 2 बजे)

10 फरवरी को पीएम मोदी के कार्यक्रम की शुरुआत देवों के स्थान हरिद्वार से होगी ।अमित शाह 7 फरवरी से जनसभाएं शुरु करेंगें और गढ़वाल औपॉर कुमाऊं मिलाकर कुल 12 जनसभाएं करेंगें।6 फरवरी को रुड़की से केंद्रीय मंत्री पीयुष गोयल का कार्यक्रम शुरु होगा जिसके बाद 7 फरवरी को पीयूष गोयल देहरादून के धर्मपुर में जनसभा करेंगें।7 फरवरी को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की जनसभाएं नई टिहरी और केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित हैं।7 फरवरी को शहनवाज हुसैन पिरानकलियर आ रहें।12 फरवरी को सांसद मनोज तिवारी की ऋषिकेश,देहरादून में चार जनसभाएं प्रस्तावित हैं।

सैनिकों के बाद नेताओं ने सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द

0

सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर में पीड़ित और कमजोरों को अपने शब्द कहना का एक बेहतरीन मौका मिल गया है। बी.एस.एफ. हो सी.आर.पी.एफ. या हो भारतीय फ़ौज, सभी ने अपने दर्द सोशियल मीडिया के माध्यम से ही अपने बॉस तक पहुंचाया है। उत्तराखण्ड के हल्द्वानी में अब चुनाव से ठीक पहले एक निष्काशित भाजपा कार्यकर्ता का अपने साथ हुई अलोकतांत्रिक कार्यवाही को बयां करता विडियो वायरल हुआ है। उन्होंने अपने को उपेक्षित मानते हुए पार्टी पर अपमानित करने का आरोप लगाया है। आरोप लगाया कि गलत काम करके कुछ लोग आर.एस.एस.का नाम बदनाम कर रहे हैं। यहाँ योग्यता कोई मायने नहीं रखती और पार्टी में पद को आर.आर.एस.तय करती है। सुशील भट्ट कहते हैं कि उन्होंने कुछ समय पहले पार्टी सदस्यों के शोषण को पार्टी हाईकमान के आगे उठाया जिसके बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वायरल विडियो में अपने दोस्तों को संबोधित करते हुए शुशील भट्ट ने कहा है कि उनके साथ अन्याय हुआ और अपने दोस्तों से अनुरोध किया है कि इस विडियो को शेयर करके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भा.ज.पा.राष्ट्राध्यक्ष अमित साह तक पहुंचाएं। उन्होंने ये भी कहा कि उनका मन्ना है कि राजनितिक पार्टियों में बिना लोकतंत्र स्थापित किये आजाद भारत की परिकल्पना बेईमानी होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री और भा.ज.पा.राष्ट्राध्यक्ष से अनुरोध किया है कि पार्टी में पद योग्य लोगों के हाथों में दिया जाए और एक सर्जिकल स्ट्राइक भा.ज.पा.में भी की जाए।

29 मई 2010 को बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल नें पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई। दो बार भा.ज.पा.के सक्रीय सदस्य रहे व उत्तराखंड भा.ज.पा.खेल प्रकोष्ट में 2 बार प्रदेश सह संयोंजक के पद पर भी रहे हैं । दस अगस्त 2015 को भा.ज.पा.में कार्यकर्ताओं के हो रहे शोषण के खिलाफ तथा पार्टी में लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना के लिए एस.डी.एम.हल्द्वानी के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भा.ज.पा.राष्ट्राध्यक्ष अमित शाह को ज्ञापन भेजा था । जिसके बाद 13 अगस्त 2015 को प्रदेश संगठन ने कारण बताओ नोटिस जारी किया गया । बीस अगस्त 2015 को सुशील भट्ट ने इसका लिखित जवाब भी दिया । आरोप है कि चार सितम्बर 2015 को अचानक उन्हें अलोकतांत्रिक तरीके से पार्टी से 6 वर्ष के लिए निष्काशित कर दिया गया । इसके बाद 2 अक्टूबर 2015 को पार्टी कार्यकर्ताओ के शोषण के विरूद्ध और पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की माँग को लेकर अपने समर्थकों के साथ सुशील भट्ट आमरण अनशन शुरू करने के लिए दिल्ली रवाना हुए, जहाँ भा.ज.पा.मुख्यालय कूच करते हुए उन्हें समर्थकों समेत दिल्ली पुलिस ने 10 घंटे तक हिरासत में ले लिया और पार्लियामेंट थाने में नजरबन्द कर दिया।

उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी में वापस जोड़ने के लिये तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने 2 मई 2010 को उत्तराखंड प्रदेशाध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल के लिए एक पत्र भी लिखा था । सुशील ने ये सभी लिखित तथ्य अपने वायरल विडियो में डाले हैं जिन्हें लोग देख भी रहे हैं।

उत्तराखंड में माओवादियों की सक्रियता बढ़ी

0

भले ही प्रदेश सरकार ने इस बात को स्वीकार नहीं किया कि माओवादी गतिविधियां जारी हैं पर अब पुलिस प्रशासन मानने लगा है कि उत्तराखंड में माओवादी सक्रिय हैं। इसका प्रमाण नैनीताल के धारी ब्लाक विकास खंड में सरकारी वाहन में आगजनी व झंडे पोस्टर बैनर मिलने से हुआ है।

इतना ही नहीं नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जन्मेजय खंडूरी ने आधा दर्जन से अधिक लोगों को चिन्हित भी कर लिया है जो इन गतिविधियों में संलिप्त पाए गए हैं। सूत्रों की मानें तो इस घटना में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) के उत्तराखंड क्षेत्रीय समिति के सचिव विजय पनेरू का नाम प्रमुख है। जिनकी खोज इन दिनों चल रही है। इनके लिए पुलिस की चार टीमें अल्मोड़ा, नैनीताल सहित कई जनपदों में अभियान चला रही हैं। मूल रूप से अल्मोड़ा के सोमेश्वर निवासी विजय पनेरू 2007 में भी ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए गए थे और उन्हें दोषी माना गया था। यही कारण है कि प्रशासन ने नैनीताल जिले के धारी ब्लॉक में माओवादियों की गतिविधियों के बाद चंपावत जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है।


सुरक्षा एजेसियों ने तराई व भाबर के जंगलों में गहन कांबिंग अभियान चलाया और सीमा पर गतिविधियों पर नजर रखी ताकि आरोपी को जल्द ही हिरासत में लिया जा सके। सूत्रों की मानें तो अन्य माओवादियों की तलाश में शारदा रेंज, दक्षिणी गुलिया पानी, उत्तर गुलिया पानी आदि जंगलों में संदिग्धों की तलाश में एसओटीएफ और वन विभाग की टीम ने तराई व भावर के जंगलों में सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया है। इस अवधि में क्षेत्रवासियों से इनकी जानकारी भी मांगी गई और शत प्रतिशत मतदान का भी आग्रह किया गया।


एक लंबे अरसे से कुमाऊँ और गढ़वाल का कुछ क्षेत्र लाल घाटी के नाम से जाना जाता था जहां वामपंथी संगठनों और माओवादियों गतिविधियां तेज थीं। प्रदेश बनने के बाद इन गतिविधियों पर अंकुश लगा या यूं कह लें कि विकास के कारण माओवादी गतिविधियां कम हुई, लेकिन चुनाव में माओवादियों की सक्रियता ने गुप्तचर इकाईयों की नींद उड़ा दी है। जिसके कारण प्रशासन अब मानने लगा है कि क्षेत्र में माओवादियों की उपस्थिति है। पिछले दिनों अल्मोड़ा और सोमेश्वर में चुनाव बहिष्कार और लोकतंत्र विरोधी पोस्टरों से चुनाव में इनकी उपस्थिति का आभास हुआ और अब प्रशासन इन पर नजर रखने लगा है।
चीन और नेपाल सीमा से सटे इलाकों में माओवादी गतिविधियां होती रही हैं। ऐसे ही तत्व अब मतदान को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। जिसके कारण शासनतंत्र द्वारा यहां रात्रिकालीन भ्रमण व्यवस्था शुरू कर दी गई है। साथ ही साथ सुरक्षा बलों ने अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है। पिछले दिनों हुई ऐसी गतिविधियों को तत्कालीन डीजीपी बीएस सिद्दू ने विशेष गंभीरता से नहीं लिया था। उनका कहना था कि यह आम घटनाएं हैं जिसके कारण सामान्य औपचारिकता के रूप में रात्रि कालीन भ्रमण तथा सुरक्षा बलों का प्रस्तुतिकरण किया जा रहा था| एक बार फिर पूर्व डीजीपी सिद्धू द्वारा नकारी गई व्यवस्थाएं प्रशासन की ध्यान में आयी हैं जिसके कारण माओवादी गतिविधियों पर विशेष सतर्कता की आवश्यकता आ गई।

कांग्रेस ने कहा ”अटल जी ने बनाया मोदी जी सवारेंगें” सिर्फ चुनावी जुमला

0

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 जैसे जैसे करीब आ रहा वैसे ही राज्य की सभी पाटिर्या कांग्रेस से बीजेपी और यूकेडी से सपा तक,हर कोई 16 साल पुराने राज्य को बनाने का क्रेडिट अपने नाम लेने की होड़ में है।

बीजेपी को ही देख लिजिए देहरादून शहर के हर गली हर नुक्कड़ पर अपने होर्डिंग जिनपर मोटे अक्षरों मे लिखा है अटल जी ने बनाया मोदी जी सवारेंगे।भाजपा का तकिया कलाम बनी यह पंक्ति पीएम मोदी के उत्तराखंड दौरे के बाद ज्यादा मशहूर हुआ क्योंकि पीएम मोदी ने अपने भाषण में इस लाईन का इस्तेमाल बहुत बार किया था।आलम यह है कि भाजपा की सभी टैग लाईनों में सबसे मजबूत यही बात है।बीजेपी हमेशा से यह कहती आ रही कि वर्ष 2000 में संसद में वाजपेयी जी के देखरेख में अलग राज्य बनाने का बिल पास हुआ था।

इस कड़ी में कांग्रेस खेमे से प्रदेश प्रवक्ता आर.पी रतूड़ी ने कहा भाजपा का पसंदीदा चुनावी जुमला अटल जी ने बनाया मोदी जी सवारेंगें केवल उत्तराखंड के लोगों को गुमराह करने के लिए बनाया गया है।रतूड़ी ने कहा कि रही बात अलग राज्य की तो वह नौजवानों की शहादत,महिलाओं के अपमान और हजारों लोगों के नौकरी गंवाने के बाद बना है।रतूड़ी ने कहा कि अलग राज्य सर्वदलीय सर्पोट से बना है ना कि किसी एक की वजह से और अगर सच में मोदी जी को प्रदेश संवारने की चिंता होती तो केदारनाथ आपदा के बाद वह सबसे पहले यहां आते लेकिन वह तो विदेश यात्राओं मे व्यस्त थे।रतूड़ी ने कहा कि केंद्र से राज्य को मिला ही क्या है एन.जी.टी पर रोक,ग्रीन बोनस पर रोक,और नमामि गंगा के नाम पर बजट में कोई राशि नहीं है और राज्य को संवारने के लिए भाजपा केवल चुनावी जुमले इस्तेमाल कर रही।रतूड़ी ने कहा कि भाजपा एक जुमला पार्टी है और जुमला छोड़ने के अलावा कुछ नहीं कर सकती।

उधर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल ने कहा कि हमने बहुत सोच समझ के यह टैग लाईन दी है,इस लाईन के पीछे उत्तराखंड राज्य बनने का इतिहास जुड़ा हुआ है।गोयल ने कहा साल 2000 में जब उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने का आंदोलन चल रहा था तब अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने सरकार की चिंता ना करते हुए संसद में इस बिल को पास किया।गोयल ने कहा कि अटल जी ने उस वक्त बिना यह सोचे कि 17 विधायक यू.पी से अलग होकर उनकी सरकार में कम हो जाऐंगे,अटल जी ने उत्तराखंड के इस बिल को संसद में आगे बढ़ाया।गोयल ने कहा कि अटल जी से पहले बहुत सी सरकारें आई लेकिन किसी ने इस प्रभावी मांग पर ध्यान नहीं दिया और अपनी सरकार से 17 विधायकों को कम करते हुए अलग राज्य के मांग को एक कामयाबी दिलाई।गोयल ने कहा कि अटल जी ने उत्तराखंड को मंत्री विशेष और उद्योगिक विशेष राज्य का दर्जा दिया जिसको कांग्रेस की सरकार ने शासन में आने के बाद खत्म कर दिया,सीएम रावत के कार्यकाल में तो राज्य का हित नहीं हुआ और कांग्रेस सरकार जिन योजनाओं का मजाक उड़ाती है शायद कांग्रेस को उन याजनाओं का मतलब ही नहीं पता,आल वेदर और ऋषिकेश पर्यटन योजना से राज्य का विकास होगा जिसे पीएम मोदी ने पास किया।गोयल ने कहा कि यूनियन बजट में 522 करोड़ रेल बजट और 120 करोड़ उत्तराखंड के लिए स्वीकृत किया गया है जिससे राज्य का ही विकास होगा तो यह सब देखने के बाद अटल जी ने जिस राज्य को बनाया था मोदी जी उसको संवार रहे है यह लाईन बिल्कुल सटीक है।

जुमलों और चुनावी प्रचार में लिप्त दोनों पार्टियों ने जनता को लुभाने के लिए हर कोशिश की है लेकिन इन जुमलों का असर कितना हो रहा यह तो आने वाले समय में पता चलेगा।

भाजपा ने कहा किसानों का भला करने में रावत सरकार रही फिसड्डी

0

रविवार को भाजपा ने बीजेपी कार्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया।कांफ्रेंस को केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने संचालित किया।राधा मोहन सिंह ने कहा कि केन्द्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी में 13वें वित् आयोग में 16,709 करोड़ प्राप्त हुए जबकि मोदी सरकार के आने पर 14 वें वित आयोग में उत्तराखण्ड को 43,441 करोड़ प्राप्त हुए, यदि एक वर्ष का ही हिसाब 2013-14  में 3,643 करोड़ तो 2015-16 में 5,807 करोड़ रुपये राज्य को प्राप्त हुए है जो पिछले साल से बहुत ज्यादा है लेकिन विकास के नाम पर तब भी राज्य सरकार ने कुछ नहीं किया।

राधा ने कहा कि रावत सरकार सिर्फ नारे लगाती रही,निष्ठा के साथ विकास का कोई काम नहीं किया।आगे उन्होंने कहा कि यह सरकार पूरी तरह से भ्रष्टाचार से लिप्त है।राज्य में कांग्रेस की भ्रष्ट चौकड़ी ने अपने हवाले से पिछड़े गांव, गरीब किसान के विकास की योजनाओ के लिए आने वाली राशि को ठीक ढंग से खर्च भी नहीं किया।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए राधा मोहन ने कहा कि प्रधान मंत्री कृषि सिचाई योजना और उसके सम्बंधित अन्य कार्यों के लिए राज्य को पिछले दो सालों में दी गए राशि को राज्य सरकार ने ना तो खर्च किया और ना ही इसकी प्रगति की रिपोर्ट  भारत सरकार को दी।प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के खर्च का ब्यौरा दो वर्षों में भी केंद्र सरकार को उपलब्ध नहीं कराया।राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए प्राप्त 2015-16  के 36.74  करोड़ में लगभग 10 करोड़ और 2016-17 में राज्य के पास उपलब्ध 54.4 करोड़ में से अभी तक केवल 15 करोड़ ही खर्च हुए हैं।कांग्रेस हवाला देती है कि हरीश रावत ने पहाड़ी क्षेत्रों का विकास किया है लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।पहाड़ी राज्यों में बागवानी किसानों का मुख्य साधन है बागवानी मिशन के तहत दी गई राशि को भी खर्च करने में राज्य सरकार फिसड्डी ही रही।उत्तराखंड राज्य के पिथौरागड़ और चमोली जिले केंद्र सरकार ने राज्य पोशित वित्त केंद्र शुरु करने के लिए मार्च 2016, सितम्बर 2016, दिसम्बर 2016, में तीन बार जमीनों के लिए पत्र दिया लेकिन यह काम भी सरकार अब तक नहीं कर पाई है।

जन आंदोलन के बाद भी नहीं बन पाया सपनों का उत्तराखंड

0

‘लड़ के लेंगे,भीड़ के लेंगे,लेकर रहेंगे उत्तराखंड’’ कवि अतुल शर्मा कि इन पंक्तियों ने एक अलग पहाड़ राज्य बनाने के लिए समूह आंदोलन किया था, आज खुद को वो उदास और ठगा हुआ महसूस करते है।70 विधानसभा सीट में से 38 सीटें मैदानी क्षेत्र की है और बाकी 32 सीटें पहाड़ी हैं,जिसमें कहने के लिए पहाड़ी राज्य का फायदा उठा रहे है मैदानी क्षेत्र। “इसकी संस्कृति एक बड़े यू.पी से अलग थी इसलिए एक कल्पना की गई थी इसके अलग हो जाने से बहुत सारी बातें बन जाएंगी,लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इस वजह से एक निराशा बनीं हुई है।”

ऐसे ही अलग राज्य निर्माण के लिए आंदोलनकारी है गणेश सैली।उनसे पूछने पर कि क्या यह वही उत्तराखंड है जिसकी कल्पना आपने की थी? उनका जवाब बहुत ही ज्यादा दुख पहुचाने वाला था,उन्होंने कहा,”मुझे सोच कर आर्श्चय होता है कि हमने इस राज्य के लिए आंदोलन किया था, मैं और मेरे साथ जितने भी लोग इस आंदोलन का हिस्सा थे, हमरी आशाओं और महत्तवाकांक्षाओं को प्रदेश के राजनितिक पार्टियों ने निगल लिया और सबसे ज्यादा खतरनाक तो यू.के.डी पार्टी है।यू.के.डी के लोगों ने राज्य का मतलब ही बदल दिया।” आगोे सैली जी कहते है, “यह वो राज्य है ही नहीं जिसके लिए हमने संघर्ष किया था। यह तो उसी उत्तर प्रदेश की कार्बन कापी है जिससे हम अलग हुए थे और शायद भ्रष्टाचार में उससे कहीं आगे निकल रहा उत्तराखंड।”

जो राज्य यह सब आंदोलनकारी चाहते थे वह एक सुखद सपना बन कर रह गया है और अभी जो राज्य है यह एक डरावना सपना है जिसकी किसा ने भी कल्पना नहीं की थी। उत्तराखंड  प्रदेश जहां है वहां से उसे वापस लाना मुश्किल होगा पर यह नामुमकिन नहीं।वह दिन दूर नहीं जब हमारी तत्कालीन राजनीति एक ऐसे लेवल पर पहुंचेगी और तब एक बार फिर वहीं हवा चलेगी और हमें हमारा सपनों का उत्तराखंड वापस मिलेगा.

जब  एक भी राज्य की कल्पना की गई तब आज के राज्य आंदोलन  युवा वर्ग में आते थे और इनके अथक प्रयासों के बाद अलग राज्य मिला और  इन  सभी का यही मानना है कि आने वाले समय में इतिहास खुद को दोहराएगा और एक बार फिर से सपनों का उत्तराखंड वापस मिलेगा। यह हर उस आंदोलनकारी का सपना है जो कि 16 साल पहले उत्तराखंड के लिए सड़कों  पर निकला था, आजकल जो राजनीति प्रदेश में देखने को मिल रही वो कुछ इस तरह है कि पहले भ्रष्टाचार करो फिर भजपा में शामिल होकर खुद को स्वच्छ दिखाओं।भाजपा में शामिल होने के बाद नेता ऐसा समझते हैं मानों गंगा नहा लिया हो।

उत्तराखंड को संभव करने वाले उन सभी आंदोलनकारीयों का कहना है कि  कि, ‘बदलाव तो युवा ही करेंगें और उस बदलाव के लिए इंतजार हैं सरकार कि तरफ से एक ऐसी गलती का जो युवाओं का मुद्दा बनेगा- ’हम होंगें कामयाब एक दिन’’

कांग्रेस ने जारी किया पुराने वादों का नया संकल्प पत्र

0

रविवार को कांग्रेस ने उत्तराखंड चुनावों के लिये अपना “संकल्प पत्र” जारी किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सबसे पहले बीजेपी के विशन डाॅक्यूमेंट को महज़ चुनावी स्टंट करार दिया। हांलाकि जब कांग्रेस के वोदों की बारी आई तो पार्टी ने भी पहाड़ों के सबसे ज्वलंत और पुराने मुद्दे को ही अुना मुख्य चुनावी दांव बनाया। पार्टी ने राज्य से लगातार हो रहे पलायन को 2022 तक पूरी तरह रोकने का वादा किया। इस पत्र में :

  • नए जिले को बनाने का प्रवधान
  • पलायान और रोजगार के लिए उठाये जायेगें कदम
  • 2022 तक पलायन रोका जायेगा
  • 48 प्रतिशत करीब प्रदेश में बेरोजगारों मिलेगा रोजगार
  • युवाओ पर खासा जोर
  • 50 हज़ार युवाओं को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दी जायेगी
  • शिक्षा पर दिया जायेग जोर स्कूलो को किया जायेगा मॉडर्नाइजेशन
  • महिला कल्याण के लिये हर संभव मदद
  • कृषि से जुडी महिलाओं को सहायता राशि एक 1 लाख
  • दलितों और ओबीसी छात्रों के लिए खोले जाएंगे नए इंस्टिट्यूट
  • मदरसों को मार्डनाइज किया जायेगा
  • जल संरक्षण के लिए बेहतर कदम उठाया जाएगा
  • व्यापरियों को मुआवजे दिए जायेगें और उनकी समस्या की लिए जिला अदालतों को दुरस्त किया जायेगा
  • एक्स सर्विस मेंन के लिए एक अलग मंत्रालय
  • एक्स सर्विस मैन के लिये अलग सोसाइटी बनाई जायेगी
  • 10 लाख लोगों को पेंशन दिया जायेगा 2017-2018 तक
  • महँगाई को दूर किया जायेगा
  • एपीआई कार्ड धारकों को 3 रूप गेहूं 2017 में 2018 तक इसे 2 रूप किया जायेगा
  • गैरसैण में 3 साल के अंदर खूब विकास किया जायेगा

    इस मौके पर कांग्रेस के तमाम नेताओं के साथ साथ दिल्ली से अंबिका सोनी और कुमारी शैलजा भी मौजूद रहीं।

टिहरी हाउस में भीषण आग से कई दुकानें खाक

0

जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हरकी पैड़ी स्थिति बड़ा बाजार के टिहरी हॉउस की दुकानों में देर रात करीब साढ़े 12 बजे आग लग गई। जिसकी चपेट में आने से कई दुकानों में रखे लाखों के सामान जलकर राख हो गए। इससे स्थानीय व्यापारियों को बड़ी क्षति पहुंची। अग्निकांड की सूचना मिलते ही आनन-फानन में फायर ब्रिगेड की कई गाड़िया मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।

प्राप्त सूचना के अनुसार आग पर काबू पाने के लिए दमकल की गाड़ियां रात भर मशक्कत करती रही। आग लगने के कारणों का पता नहीं लग सका है। घटना की सूचना पर शहर के व्यापारी मौके पर जुट गए। अभी तक प्राप्त सूचना के अनुसार आग से तीन दुकानें पूरी तरह राख हो गई हैं जबकि आग लगने से लाखों का नुकसान का भी अनुमान लगाया जा रहा है। प्रशासन इस अग्निकांड से हुए नुकसान का आकलन कर रहा है।
बताया गया कि बड़ा बाजार की गलियां संकरी होने के कारण फायर बिग्रेड की बड़ी गाड़ियों को मौके पर पहुंचने में परेशानी हुई। जिसके चलते फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को सुभाष घाट पर खड़ा किया गया। टिहरी हाऊस की दुकानों में कोयले की भट्टी पर अधिकतर कार्य किया जाता था। समोसे, पूरी और अन्य खाद्य सामग्री भी कोयले की भट्टी पर तैयार की जाती थी। प्राथमिक तौर पर कोयले की भट्टी से ही दुकान में आग लगने का कारण बताया जा रहा है।

खाली हाथ लौटे जे. पी नड्डा मान मुनुव्वल के बाद भी नहीं माने ऋषिकेश के बागी कार्यकर्त्ता

2

मतदान में अब कुछ ही दिन का समय बचा है लेकिन ऋषिकेश विधान सभा में भाजपा की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। पूर्व राज्य मंत्री बागी संदीप गुप्ता समेत 150 से ज्यादा कार्यकर्ताओं और पधादिकारियों को मानाने में भाजपा के रणनीतिकार फेल साबित हो रहे है जिससे चुनावी गणित बिगड़ता जा रहा है। उत्तराखंड प्रभारी जे. पी नड्डा ने रूठे हुए कार्यकर्ताओ के साथ बंद कमरे में लगभग २ घण्टे बातचीत की लेकिन कार्यकर्त्ता टिकट वितरण में हुयी अनदेखी से नाराज रहे। नड्डा की सभी कोशिश बेकार गयी ,बागी सार्थक कार्यकर्ताओ को कहना था कि पार्टी प्रेम अग्रवाल का टिकट वापस लेकर संदीप गुप्ता को समर्थन दे जिस पर जे पी नड्डा राजी नहीं हुए और उनकी सभी कोशिश नाकाम रही। गौरतलब है कि ऋषिकेश विधान सभा से विधायक प्रेमचन्द्र अग्रवाल को भाजपा आलाकमान ने तीसरी बार विधायक के रूप में उतारा है जिस से ऋषिकेश में भाजपा में दो फाड़ हो गए हैं। टिकट बाटने में उपेक्षा के चले पूर्व राज्य मंत्री संदीप गुप्ता बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में है उनके साथ दो पूर्व जिलाध्यक्ष समेत 150 से ज्यादा कार्यकर्ता हैं जो भाजपा के लिए ऋषिकेश में मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।