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उत्‍तराखंड में 69 सीटों के लिए मतदान हुआ पूरा, कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान

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उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव के 69 सीटों पर निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग और पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद इंतजाम करते हुए राज्य से सटे अंतर्राष्टीय और राज्य की सीमा को सील कर दिया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने बताया कि बुधवार को होने वाले मतदान के लिए

  • प्रदेशभर में 10,685 बूथ बनाए गए हैं।
  • इन बूथों पर 7,513,547 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे

वहीं अगर वीआईपी सीटों की बात करे तो

  • हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा से मुख्यमंत्री हरीश रीवत
  • विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल जागेशवर
  • बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट रानीखेत
  • कांग्रेस के बागी हरक सिंह रावत कोटद्वार
  • कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय सहसपुर
  • पूर्व केंद्रीय मंत्री सतपाल महाराज चौबट्टाखाल
  • बीजेपी के टिकट पर सितारगंज से पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे
  • मुख्यमंत्री के खास सिपेसलार रंजीत रावत रामनगर से चुनाव मैदान में अपना राजनीतिक भाग्य अाज़मा रहे हैं।

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प्रदेश की कुल 70 सीटों में एक कर्णप्रयाग सीट पर बसपा प्रत्याशी की मृत्यु के बाद चुनाव स्थगित कर दिया गया है।कुल 69 सीटों के लिए 628 प्रत्याशियों में

  • कांग्रेस और भाजपा के 69-69,
  • बसपा के 68,
  • उक्रांद के 52,
  • सपा के 21,
  • सीपीआइ-एम के 06,
  • सीपीआइ के चार,और
  • आरएलडी के छह हैं। अधिकतर प्रत्याशी निर्दल या अन्य दलों से हैं।
  • राज्य भर में अतिसंवेदनशील एवं संवेदनशील 1,283 मतदान केन्द्र को चिन्हित किया गया है।
  • कुल 221 मतदेय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे एवं 202 मतदेय स्थलों पर फोटोग्राफी की जायेगी।
  • कुल 1,173 मतदेय स्थलों पर माइक्रो आॅबजर्वर नियुक्त किए गए हैं तथा
  • 1,282 मतदेय स्थलों पर सीएपीएफ नियुक्त की जायेगी।
  • 181 मतदेय स्थलों की वेबकास्टिंग की जाएगी।
  • राज्य में कुल 479 स्थल हिमाच्छादित है तथा 287 स्थल शेडो एरिया है।
  • इस बार मतदान में उपस्थित सेक्टर और जोनल मजिस्ट्रेट की गाड़ियां जीपीएस से लैस रहेंगी। सुरक्षा को ध्यान में राखते हुए मतदान के दिन
  • 219 जोनल तथा 1309 सेक्टर मजिस्ट्रेट नियुक्त किये गये है।
  • इसके लिए 12,878 पुलिसकर्मी, 25 कम्पनी पी.ए.सी. एवं 105 कम्पनी केन्द्रीय पुलिस बल की तैनाती की गयी है।
  • उत्तराखण्ड होमगार्ड्स सहित अन्य राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश एवं हिमाचल प्रदेश से कुल 16930 होमगार्ड्स की व्यवस्था की गयी है। राजस्थान से 8000, उत्तर प्रदेश से 2000 एवं हिमाचल प्रदेश से 2500 होमगार्ड्स तैनात किये गए हैं।
  • संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों पर तैनात फोर्स को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अराजक तत्वों देखते ही गोली मार दी जाये।
  • सेक्टर मजिस्ट्रेट, सेक्टर पुलिस अधिकारी, संबंधित थाने के इंस्पेक्टर या एसओ व चौकी प्रभारी तुरंत मौके पर पहुंचेंगे। सभी को अतिरिक्त तौर पर पैरामिलिट्री फोर्स दिया गया है।


आयोग की सख्ती के चलते अब तक राज्यभर में तकरीबन एक लाख लीटर शराब पकड़ी जा चुकी है, जबकि करीब 2.50 करोड़ नकदी को भी पकड़ा गया है। तकरीबन 80 किलो मादक द्रव्य भी जब्त किए गए हैं। आचार संहिता उल्लंघन के मामले में सोमवार को 16 लोगों को नोटिस दिया गया। अब तक 383 लोगों को नोटिस थमाया जा चुका है।

 

फ्लोटिंग मतदाता पार्टी और प्रत्याशियों की बिगाड़ सकते हैं खेल

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उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए भाजपा कांग्रेस सहित 34 अन्य दलों के प्रत्याशी मतदान से पूर्व फ्लोटिंग मतदताओं पर विशेष नजर बनाये हुये थे, इसिलिये प्रत्याशी स्वयं घर—घर जाकर मतदताओं से अपील करते नजर आये। मतदाता ठीक मतदान से पूर्व अपने मत का कहा और किसे देना है उसका फैलसा करते है। ऐसे तीन से पांच प्रतिशत मतदाता हर वर्ग से होते है जो प्रत्याश्यिों के हार जीत में अहम भूमिका निभाते है जिन्हें फ्लोटिंग मतदाता कहते है। पिछले चुनाव के आंकड़ों पर ध्यान दे तो कई सीटों पर एक से पांच फीसद वोटों के अंतर से ही हार-जीत का सामना करना पड़ा है। ऐसे में इन सीटों पर फ्लोटिंग मतदाता प्रत्याशियों की भविष्य तय करते हैं।
विधानसभा चुनाव-2012 में राज्य की 70 सीटों में से 17 फीसद सीटों पर हार-जीत का अंतर एक हजार मतों से कम था। जबकि 55 प्रतिशत विधानसभा में पांच हजार से कम के अंतर से जीत हुई। 90 फीसद सीटों पर हार-जीत का अंतर 10 हजार मतों से कम था। प्रदेश में पिछले चुनाव में 66.17 फीसद मतदान हुआ था।
बीते दो-तीन दिन में जिस तरह से राज्य में भाजपा-कांग्रेस समेत तमाम दलों के स्टार प्रचारक मैदान में उतरे हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि 50 फीसद सीटों पर अंतिम समय में परिणाम बदलने की स्थिति बन गई है। स्टार प्रचारकों के अलावा फ्लोटिंग वोटर अपने मत के सदुपयोग प्रत्याशी की पकड़ को देखते हुए वोट करते है। भाजपा कांग्रेस सहित तमाम दलों ऐसे प्रत्याशियों को अपने पक्ष में लाने की भरपुर कोशिश किये है।
उत्तराखण्ड के 2012 विधानसभा में हार का अंतर

  • सौ से कम मतों से-01,
  • 500 से कम मतों से-05,
  • एक हजार से कम मतों से-06,
  • दो हजार से कम मतों से 10,
  • पांच हजार से कम मतों से-17,
  • दस हजार से कम मतों से-24,
  • पच्चीस हजार से कम मतों से-06,
  • चालीस हजार से कम मतों से-01 सीटों परों हार जीत का अंतर इस प्रकार रहा।

निर्वाचन अधिकारी ने टॉफ़ी देकर किया पहले मतदाता का स्वागत

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उत्तराखण्ड की 69 विधानसभा सीटों पर मतदान शुरू । नैनीताल में हल्के बादलों और मीठी ठण्ड के बीच मतदाता निकले अपना मताधिकार का प्रयोग करने के लिए । प्रशासन और पुलिस के पुख्ता इंतजाम । निर्वाचन के अधिकारी ने टॉफ़ी देकर पहले मतदाता का स्वागत किया ।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव अपनी निश्चित तारीख पर शुरु हो चुका है।लोग उत्तसाहित होकर अपने घरों से निकलकर वोट दे रहें है।आज नेताओं की किस्मत का फैसला इन वोटरों पर ही निर्भर करेगा।

 

उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार रिर्जव फाॅरेस्ट में बनेंगे पोलिंग बूथ

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ऐसा उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार होगा जब उत्तराखंड निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार मिलकर रिर्जव जंगलों में वन गुर्जरों के तराई क्षेत्र पोलिंग बूथ लगाऐंगें। ये पोलिंग बूथ जंगलों में डाक बंगलों ,फारेस्ट आउटपोस्ट और अस्थायी घरों में लगेंगे। इस काम के लिये फाॅरेस्ट रेंजरों को पोलिंग अधिकारियों की मदद के लिये लगाया गया है।अफसरों को लगता है ऐसा करने से जंगलों में रहने वाले मूल निवासी वन गुर्जर,जो पिछले 50 सालों से भी लंबे समय से जंगल में रह रहें हैं और जिनकी जनसंख्या लगभग 80,000 है उनको एक मौका मिलेगा कि वह पहली बार एकजुट होकर अपना वोट डाल पाऐंगे।

उत्तराखंड का 70 प्रतिशत से भी ज्यादा क्षेत्र जंगलों में आता है और आधा से भी ज्यादा क्षेत्र फारेस्ट डिर्पाटमेंट के अंर्तगत आता है।नीतिश मनी त्रिपाठी,क्षेत्र के सिनीयर फारेस्ट आफिसर बताते हैं कि यहां पर वन गुर्जर के लगभग 194 परिवार रिर्जव फारेस्ट के तराई(पूरब) में रहते हैं।

16 साल के इंम्तियाज अली, किशनपुर रेंज में रहते हैं और वन गुर्जर के 12 लोगों के परिवार के मालिक बताते हैं कि हमें यहा रहते हुए लगभग 50 साल हो गए हैं,लेकिन आज तक भी हमें उन जमींनों का मालिकाना हक नहीं दिया गया है जिनपर हम रहते हैं।पहले उन्हें हमेशा करीब 20 किमी सफर करने के बाद वोट करने का मौका मिलता था लेकिन अब ये सब बदलने वाला है।hrt-gujjars-1

वन गुर्जरों का युवा वर्ग यह मानता है कि पोलिंग बूथ पास में होना होना अच्छी बात है लेकिन उनकी ज़रूरत स्कूल है जो कि यहां से इतना दूर है कि बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते हैं, ये कहना है राईखाल सेटलमेंट में 25 साल के शमशाद अली का, जो कि वन गुर्जर की तीसरी पीढ़ी के नौजवान है।

बहरहाल कई सालों में सरकार की तरफ से ये कदम वन गुर्जरों को मुख्य धारा में शामिल करने की एक अच्छी पहल है।

 

हरीश चंद्र दुर्गापाल के बेटे से कैश बरामद, चुनाव में पैसे बांटने का आरोप

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नैनीताल की लालकुआं विधानसभा में चुनाव से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस के प्रत्याशी हरीश चंद्र दुर्गापाल के बेटे पंकज दुर्गापाल से पुलिस ने एक लाख से अधिक की धनराशि बरामद की है । बिंदुखत्ता के गांधीनगर क्षेत्र में निर्दलीय प्रत्याशी हरेंद्र बोरा के समर्थकों ने पंकज को घेर लिया और हरेंद्र बोरा के समर्थकों ने पंकज दुर्गापाल पर चुनाव के दौरान पैसे बांटने का आरोप लगाया । समर्थकों ने पंकज दुर्गापाल की गाड़ी को बंधक बना लिया, इस दौरान सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची लालकुआं कोतवाली पुलिस ने लोगों को हटाकर कार की तलाशी ली जिसमें से मंत्री पुत्र के पास 1,08,900 रुपए कैश बरामद किए गए जिसके बाद पुलिस इस पूरे घटना की छानबीन में जुट गई है ।

उधर दूसरी तरफ मंत्री दुर्गापाल समर्थकों ने भी निर्दलीय प्रत्याशी हरेंद्र बोरा के खिलाफ नारेबाजी की कुल मिलाकर चुनाव से ठीक एक दिन पहले लालकुआं विधानसभा में चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई गई । बहरहाल सेक्टर मजिस्ट्रेट संजय उपाध्याय का कहना है कि बरामद किए गए रुपए के संदर्भ में जांच की जा रही है । जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी | मौके पर पहुचे दुर्गापाल व हरेन्द्र बोरा समर्थक आपस में भिड़ गए इस दौरान पुलिस व समर्थको में झड़प भी हुई जिसके चलते पंकज और उनके समर्थकों को चोटें आई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

अब नए रूप रंग में सजे हुए मिलेंगे मतदान बूथ

इस बार जब आप वोट डालने जायेंगे तो मतदान केंद्र का नजारा कुछ बदला बदला लगेगा, मतदान स्थल इस बार स्लोगन,गुब्बारे और सजावट के साथ सजे मिलेंगे।15 फरवरी  उत्तराखंड के 69 सीटों में मतदान होने है जिसके लिए प्रशासन की तरफ से सारी तैयारी हो गयी है तो वहीँ अब स्कूली बच्चों ने भी लोगों को मतदान के लिए जागरूक करने की पहल शुरू की है।इसी के चलते सभी सरकारी स्कूलों में स्कूली बच्चो द्वारा चार्ट और स्लोगन बना कर मतदाता को जागरूक करने और उनको मतदान के लिए प्रेरित करने के लिए बूथों को जो जर्जर हालात में हैं वहां पहुच कर स्कूली बच्चों ने स्कूल अब नए रूप में तैयार कर  रहे है।

यही सभी निर्वाचन आयोग और शिक्षा विभाग की पहल पर किया जा रहा है।जिसकी तैयारी ऋषिकेश के सभी स्कूलों में गयी है ऋषिकेश के पूर्व माध्यमिक स्कूल में बच्चो और शिक्षिकाओ की मेहनत दीवारों पर साफ़ नजर आ रही है।इन बच्चों की मदद से नीरस मतदान बूथ भी नए रंग रूप में ढल गए है जो एक नया पहल और मिसाल बना रहे है। ऋषिकेश में 11 बूथों पर कल मतदान होना है अब इन  रंग रूप मतदाताओ को बदला बदला लगेगा जब  करेंगे वोट। 

तो यह है 14 फरवरी को वेलेंटाईन डे मनाने का राज़

14 फरवरी युवाओं के साथ हर उम्र के लोगों में वेलेंटाईन डे के नाम से प्रचलित है।आज के दिन हर कोई अपने दिल की बात खुल के अपने पार्टनर से करता है।वेलेंटाईन के लिए बाजार में भी बहुत सी तैयारियां होती है।फूल,चाकलेट,कार्ड,गिफ्टस,टैडी बीयर और तरह तरह के अन्य सामान।दरअसल वेलेंटाईन डे को जानने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाकर इतिहास के कुछ पन्नों में झांकना पड़ेगा।

आखिर क्या हैं वेलेंटाईन?क्यों मनाते है वेलेंटाईन?खास क्या है 14 फरवरी में? इन सभी सवालों के जवाब आगे की कुछ लाईनों में छिपा हुआ है।आईये जाने वेलेंटाईन डे का राज़ः

कैथोलिक विश्वकोश के अनुसार, शुरूआत में 3 ईसाई संत थे। पहले रोम में पुजारी थे, दूसरे टर्नी में बिशप थे और तीसरे थे सेंट वेलेंटाइन, जिनके बारे में कोई इतिहास अभी तक सामने नहीं आया है, सिवाय इसके कि वे अफ्रीका में मिले थे। हैरानी की बात यह है कि तीनों वैलेंटाइन्स 14 फरवरी के दिन शहीद हुए थे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण रोम के सेंट वेलेंटाइन माने जाते हैं।

रोम में तीसरी शताब्दी में सम्राट क्लॉडियस का शासन था, जिनके अनुसार एकल पुरुष विवाहित पुरुषों की तुलना में ज्‍यादा अच्‍छे सैनिक बन सकते हैं। वेलेंटाइंस, जो एक पादरी थे ने इस क्रूर आदेश का विरोध किया. इन्‍होंने अनके सैनिकों और अधिकारियों के विवाह करवाए। जब सम्राट क्लॉडियस को इस बात का पता चला तो उन्‍होंने वेलेंटाइंस को फांसी पर चढ़वा दिया। इन्‍हीं की याद में वेलेंटाइंस डे मनाया जाने लगा।

कहते हैं सेंट वेलेंटाइन ने अपनी मौत के समय जेलर की अंधी बेटी जैकोबस को अपनी आंखे दान कीं। सैंट ने जेकोबस को एक पत्र भी लिखा, जिसके आखिर में उन्होंने लिखा था ‘तुम्हारा वेलेंटाइन’।

इसके साथ ही हर 14 फरवरी को पूरे देश में प्रेम का दिवस यानी वैलेंटाइन डे मनाया जाता है, लोग अपने चाहने वालों को संत वेलेंटाइन के नाम पर फूल, गिफ्ट्स,कार्डस,टैडी बियर देते हैं। इस दिन को अपने प्रेमी के प्रति अपना प्रेम दिखाने के लिए बेस्‍ट दिन माना जाता है, आप अपने साथी के सामने इस दिन दिल खोलकर अपने प्रेम का इज़हार करते हैं।

 

भाजपा की नाक बचाएगा उत्तराखंड

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देवभूमि कहलाने वाले देश के दुर्गम पहाड़ी राज्य उत्तराखण्ड में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार इस बार बेहद पेचीदा और धुआंधार रहा। चुनाव से पहले और उसके दौरान भी कांग्रेस और भाजपा ने देश की राजनीति से जुड़े तमाम दाव आजमाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सत्ता की अंधी चाहत में भाजपा ने तो इस बार तमाम ऐसे प्रयोग कर डाले जिनके लिए वो पिछले 37 साल से कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करती आ रही है। चाहे राजनीतिक तिकड़म हो या पैसा झोंकने का सवाल भाजपा ने इस बार उत्तराखंड में सबको पीछे छोड़ दिया। भाजपा की कार्यशैली से साफ जाहिर है कि उत्तराखंड को जीतने के लिए वह कितनी बेताब है। और आखिर हो भी क्यों न! दरअसल उत्तराखंड ही उन पांच राज्यों में एकमात्र ऐसा राज्य है जो छोटा होने के बावजूद राजनीतिक दृश्टि से भाजपा की नाक बचा सकता है। विधानसभा चुनाव का ताजा दौर जिन पांच राज्यों में चल रहा है, उनमें पंजाब, और गोवा में भाजपा सत्तारूढ़ है। उन दोनों राज्यों में भाजपा को षासन से जनता की नाराजगी के साथ ही कांग्रेस के अलावा आप जैसे नए प्रतिद्वंद्वी को भी झेलना पड़ रहा है।इससे उनमें सत्ता में वापसी के आसार धूमिल हैं।

तीसरा राज्य मणिपुर है, जहां भाजपा पहली बार सत्ता के लिए दावेदारी के इरादे से चुनाव लड़ रही है। इसी वजह वहां का चुनाव परिणाम भी भाजपा के लिए अनिष्चित है। अब बचे दो सहोदर राज्य, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड। जाहिर है कि उत्तर प्रदेष बहुत विशाल राज्य है। उसके अलग-अलग अंचलों का राजनीतिक मिजाज भी भिन्न-भिन्न है। इसीलिए उत्तर प्रदेश में 405 विधानसभा सीटों के लिए पूरे सात दौर में मतदान कराया जा रहा है। वहां सत्ता की जीतोड़ लड़ाई में भाजपा का अपने बराबर के दो अन्य दावेदारों बसपा और सपा-कांगेस किलेबंदी से जोरदार मुकाबला है। सपा-कांग्रेस किलेबंदी ने जाहिर है कि भाजपा के लिए सत्ता की लड़ाई कठिन बना दी है। दूसरी तरफ बसपा भी मायावती की अगुआई और मुसिलमान-दलित गठजोड़ के फार्मूले के कारण बड़ी चुनौती साबित हो रही है।

इस लिए उत्तर प्रदेश की लड़ाई में भाजपा को अपने लिए बिहार जैसे नतीजे आने की आषंका सता रही हो तो भी ताज्जुब नहीं। ऐसे में ले-दे कर उत्तराखंड ही ऐसा राज्य बचा जिसका हर पांच साल बाद सत्तारूढ़ दल को बदल देने का रिकॉर्ड है। राज्य की मुख्य चुनाव अधिकारी राधा रतूड़ी को इस बात का गर्व भी है। उनके अनुसार उत्तराखंड भले ही छोटा ओर दुर्गम मौसमी पिरस्थितियों वाला राज्य हो मगर यहां का मतदाता बहुत समझदार है। पिछले दस साल से राज्य में विभिन्न विधायी सदनों के चुनाव करवा रहीं सुश्री रतूड़ी बताती हैं कि लोग यहां अपने मत के जरिए बोलते हैं। इसीलिए उनके अनुसार उत्तराखंड में चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो जाते हैं।

इसीलिए भाजपा ने उत्तराखंड का विधानसभा चुनाव जीतने के लिए अपनी चाल, चरित्र, चेहरा और नारा तक कुछ भी बदलने से परहेज नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित षाह ने राज्य में रिकार्ड तोड़ रैलियां कीं और अपने मार्गदर्षक मंडल के अलावा सभी बड़े नेताओं, मंत्रियों को पहाड़ों की सैर करवा दी। इससे पहले किसी पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष अथवा प्रधानमंत्री ने इतने बड़े पैमाने पर राज्य में चुनाव प्रचार नहीं किया। इससे जाहिर है कि पांच राज्यों में कम से कम उत्तराखंड में तो अपनी जीत सुनिष्चित करके भाजपा इस दौर में अपनी नाक बचाने का जुगाड़ कर लेने को आतुर है। सत्तर सदस्यों वाली राज्य विधानसभा की 69 सीटों पर 15 फरवरी को वोट पड़ेंगे। फिलहाल कार्यकर्ता और उम्मीदवार घर-घर गुहार लगाने में व्यस्त हैं। प्रचार अभियान सोमवार शाम पांच बजे थम चुका हे। कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी प्रत्याशी की मौत के कारण मतदान बाद में होगा। राज्य में 76,10,126 मतदाता हैं, जिनमें 40,00751 पुरुष और 36,09,190 महिला मतदाता हैं।

यह बात दीगर है कि महिला मतदाताओं की इतनी बड़ी तादाद ओर मतदान में उनकी भागीदारी अव्वल होने के बावजूद भाजपा ने कुल छह और कांग्रेस ने भी महज आठ महिला उम्मीदवारों को ही पार्टी उम्मीदवार बनाया है। हालांकि प्रधानमंत्री की सभाओं में भारी मौजूदगी दर्ज करा कर प्रदेश की महिलाओं ने भाजपा को आईना जरूर दिखाया है।यह महिलाएं राज्य की दुर्गम परिस्थितियों में भी काम ओर गृहस्थी के बोझ को हंसतं-हंसते झेल जाने वाली बेहद मजबूत इच्छाशक्ति से लैस हैं। प्रदेश में 34 पॉलिटिकल पार्टियों के कुल 637 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस ने सभी 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इनके अलावा बसपा ने 69,  सीपीआई ने 5, सीपीएम ने 5, एनसीपी ने 2, आरएलडी ने 3, सपा ने 21, एसएस ने 7 उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया है। इनके अलावा 262 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में डटे हुए हैं।

उत्तराखण्ड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गढ़वाल और कुमांउ मंडल में तीन दिनों में ताबड़तोड़ चार रैली कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का काम किया। वहीं कांग्रेस राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हरिद्वार में 10 विधानसभा में रोड शो कर मोदी की रैली का जवाब देकर जनता को कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील की। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अपने प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करते हुए कांग्रेस-भाजपा से लोगों को दूर रहने की सलाह दी।कुल मिलाकर अब देखना यही है कि उत्तराखंड जैसे बेहद महत्वपूर्ण मगर संख्या बल में छोटे से राज्य का मतदाता प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा की नाक बचाएगा अथवा अपने बीच के हरदा यानी मुख्यमंत्री हरीष रावत को ही अगले पांच साल के लिए गले लगाएगा।

बीजेपी प्रत्याशी की गाड़िया तोड़ी

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उधम सिंह नगर जनपद की खटीमा विधानसभा के पचौरिया ग्राम में बीजेपी प्रत्याशी पुष्कर सिंह धामी की गाडियो पर निर्दलीय प्रत्याशी ललित सिंह के समर्थको ने हमला कर गाडियो को तोडा डाला। हमला होने के बाद चालको ने भाग कर अपनी जान बचायी। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने क्षतिग्रस्त गाडियो को कब्जे में लिया। पुलिस ने चुनाव के मौके पर गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।

कांग्रेस ने स्टिंग सीडी पर मुख्य चुनाव आयुक्त से की रोक लगाने की मांग

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विधानसभा चुनाव के मौके पर एक स्टिंग के सामने आने से उत्तराखण्ड की राजनीति में भूचाल आ गया है, जिसे कांग्रेस भाजपा पर चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगा रही है।

सीएम के मुख्य प्रवक्ता सुरेन्द्र कुमार ने स्टिंग मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिख कर इस मामले में शिकायत की है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि भाजपा कथित स्टिंग सीडी लाकर चुनाव को प्रभावित करना चाहती है। सुरेन्द्र ने मुख्य चुनाव आयुक्त से स्टिंग सीडी के प्रसारण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
भाजपा के पूर्व विधायक और वर्तमान में भीमताल से कांग्रेस के प्रत्याशी दान सिंह भंडारी को कथित रूप से सात करोड़ रुपये देकर पार्टी छोड़ने के लिए तैयार करने का वीडियो एक चैनल पर दिखाया जा रहा है जिसे लेकर कांग्रेस, भाजपा में अरोप-प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो गई है।