रेलवे अतिक्रमण याचिका स्टे
9 मार्च को होंगे कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र में चुनाव
उत्तराखंड चुनाव से पहले हुए सड़क दुर्घटना की वजह से कर्णप्रयाग में चुनाव रद्द कर दिए गए थे।निर्वाचन आयोग के जारी नोटिस में दोबारा चुनाव कराने की तारीख का ऐलान किया गया है।बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी,कुलदीप सिंह कंवासी जो चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों में से एक थे उनका निधन चमोली के पास एक रोड एक्सीडेंट में हो गया और उनके दो साथी भी बुरी तरह से घायल हो गए हैं।12 फरवरी को यह दुर्घटना तब हुई जब कुलदीप अपने दो साथियों के साथ गौचर से कर्णप्रयाग की तरफ जा रहे थे और उनकी गाड़ी गहरी खाई में गिर गई।
चुनाव नामांकन,जांच,और नाम वापसी के लिए निर्वाचन आयोग ने नई तारीख तय कर ली है।हालांकि बहुजन समाज पार्टी ने चुनाव नामांकन की आखिरी तारीख 20 फरवरी 2017 को तय की है,स्क्रूटनी के लिए 21 फरवरी,और नाम वापस लेने के लिए 23 फरवरी।
कर्णप्रयाग में 6 सीटों के लिए चुनीव की नई तारीख 9 मार्च रखी गई है,जबकि बाकी 69 सीटों पर 15 फरवरी को मतदान होंगें।
सचिन तेंदुलकर पर बन रहीं फिल्म ”सचिन” होगी 26 मई को रिलीज
सचिन तेंदुलकर ने टिव्टर के माध्यम से यह बताया कि उनकी जीवन पर आधारित ‘सचिन ए बिलीयन ड्रीम्स’ के रिलीज होने की तारीख 26 मई 2017 है।फिल्म का पहला पोस्टर अप्रेल 2016 में लांच हो गया था और फिल्म का नाम टिव्टर पर एक कांटेस्ट के जरिए रखा गया था।
भारत के महानतम बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की फिल्म सचिन का पोस्टर सोशल मीडिया पर फिर एक बार चर्चा में आ चुका है।पोस्टर एक फिर तब चर्चा में आया जब सचिन ने फिल्म के रिलीज होने की तारीख बताई। फिल्म का पोस्टर रिलीज करते ही वायरल हो गया।पोस्टर पर बड़े बड़ें फिल्मी और खेल के दुनिया के दिग्गजों जैसे कि शंहशाह शाहरुख खान,विरेंद्र सेहवाग,विराट कोहली ने फिल्म को जल्दी ही देखने की इच्छा जताई है।
वर्ष 2013 में सचिन नें क्रिकेट से संन्यास ले लिया था।सचिन की आटोबायाग्राफी ‘प्लेईंग ईट माई वे’ भी सचिन के खेल छोड़ने के कुछ समय बाद लांच हुई।इसके बाद सचिन मीडिया से और अलग अलग कार्यक्रमों के जरिए अपने 24 साल के करियर और अपने अनुभव को लोगों के बीच रखते रहें हैं।
अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि इस फिल्म में सचिन का किरदार वह खुद निभाऐंगे या कोई और एक्टर करेगा,और उनकी पत्नी का किरदार कौन अभिनेत्री करेगी,लेकिन यह फिल्म एक ”मस्ट वाच” होगी उनके करोड़ो फैन्स के लिए जो कि अपने पसंदीदा खिलाड़ी के बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं।
482 पेटी शराब के साथ तीन गिरफ्तार
ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने भारी मात्रा मे अंग्रेजी शराब के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सभी आरोपियों का चालान कर दिया है। शराब चुनाव में बांटने के लिए लाई जा रही थी।
जानकारी के अनुसार, रानीपुर झाल पर चैकिंग के दौरान तड़के ट्रक (संख्या यूके-08-टीए-1871) को रोककर उसकी चैकिंग की गयी तो ट्रक में गाजर के कट्टे भरे पड़े थे। उक्त सम्बन्ध में वाहन चालक व अन्य दो व्यक्तियों से पूछताछ की गयी तो चालक सकपकाने लागा। शक होने पर गाजर के कट्टों की चैकिंग की गई तो उसमें शराब की पेटियां भरी पड़ी थी। पुलिस ने कट्टों से 140 पेटी मैकडाउल व 342 पेटी अंगे्रजी शराब कुल 482 पेटी शराब की बरामद की।
पूछने पर चालक ने बताया गया कि उक्त शराब ज्वालापुर क्षेत्र में छोड़ने के लिए कहा गया था। पकड़ी गई शराब की कीमत 20 लाख रुपये के करीब बताई गई है। ट्रक की नम्बर प्लेट भी फर्जी पायी गयी। पकड़े गए आरोपियों का नाम महेन्द्र पुत्र स्वरूप सिंह निवासी सन्दोली थाना पहेवा कुरूक्षेत्र हरियाणा, सुभाष पुत्र बृजलाल निवासी कृष्णापुरा थाना पिपली कुरूक्षेत्र हरियाणा तथा सोनू पुत्र बृजलाल निवासी कृष्णापुरा थाना पिपली कुरूक्षेत्र हरियाणा बताया गया। पुलिस ने तीनों आरोपियों का चालान कर दिया। पकड़ी गई शराब कांग्रेस प्रत्याशी की बताई जा रही है।
प्रियंका चोपड़ा की कंपनी बनाएगी बच्चों की तीन फिल्में
हाल ही में मराठी और पंजाबी फिल्में बनाने के बाद प्रियंका चोपड़ा की प्रोडक्शन कंपनी पर्पल पिक्चर्स ने अपनी नई योजनाओं की घोषणा करते हुए तीन नई फिल्में बनाने की योजना जारी की है। इन घोषणाओं की सबसे खास बात ये रही कि ये तीनों फिल्में बच्चों के लिए बनाई जाएंगी। घोषणा के मुताबिक, इनमें से एक फिल्म हिन्दी मे बनेगी और बाकी दो फिल्में प्रादेशिक भाषाओं में बनेंगी। ये फिल्में कोंकणी और सिक्कमी भाषा में बनेंगी। एक और खास बात इन घोषणाओं की ये रही कि तीनों फिल्मों का निर्देशन महिलाएं करेंगी।
सिक्कमी भाषा में बनने जा रही फिल्म का नाम ‘पहुना’ होगा, जिसका निर्देशन पाखी टायरवाला करेंगी। ये फिल्म माओवादी आंदोलन में नेपाल से भागकर सिक्कम पंहुचे तीन बच्चों की जिंदगी पर आधारित होगी। पहली बार सिक्कम की भाषा में कोई फिल्म बनने जा रही है और इसकी पूरी टीम स्थानीय प्रतिभाओं के साथ बनाई गई है। राज्य सरकार भी इस फिल्म को हर तरह से मदद कर रही है। फिल्म की पूरी शूटिंग सिक्कम के अलग-अलग स्थानों पर हुई है। दूसरी फिल्म कोंकणी में होगी और इसका निर्देशन सुवर्णा नसनोडकर करेंगी और इसका टाइटल ‘लिटिल जो’ कहां हो रखा गया है। ये फिल्म आरके लक्ष्मण और मारियो मिरांडा जैसी महान कार्टूनिस्टों को श्रद्धांजलि के तौर पर बनाई जा रही है। इसकी पूरी शूटिंग गोवा में होगी। तीसरी फिल्म ‘अलमसर’ हिन्दी में बनेगी, जिसका निर्देशन लारा मिश्रा करेंगी। ये आगरा के ताजमहल की पृष्ठभूमि पर होगी, जिसमें एक कुत्ते और बच्चों के प्रति उसके प्रेम पर कहानी होगी।
इन फिल्मों की घोषणाओं पर खुशी व्यक्त करते हुए प्रियंका चोपड़ा का कहना है कि आजकल बच्चों के लिए बनने वाली फिल्में कम होती जा रही हैं। ऐसे में हम कोशिश कर रहे हैं कि बच्चों के लिए फिल्में ज्यादा बनें। उन्होंने कहा कि तीनों फिल्में इसी साल रिलीज कर दी जाएंगी।
गंगा में लहरों का रोमांच,इंटरनेशनल कयाक फेस्टिवल 2017
चुनावी ड्यूटी करने वालों पर भी नोटबंदी की मार
तुम तो ठहरे दलबदलु देश क्या चलाओगे, दलबदलुओं का अखाड़ा बना विधानसभा चुनाव
उत्तराखंड के आने वाले पांच सालों के शासक का फैसला 15 फरवरी को ईवीएम मशीनों में बंद हो जायेगा। आने वाले चुनाव में क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा फिलहाल जो एक बात चुनाव से पहले देखने को मिल रही वो है नेताओं का दल बदलना। इस परिस्थिती में एक ही बात ज़हन में आती है “तुम तो ठहरे दलबदलू देश क्या चलाओगे”। जी हां उत्तराखंड चुनाव तो दल बदलते नेताओं का अखाड़ा बन चुका है। कभी कोई भाजपा का कमल खिला रहा है तो कोई कांग्रेस का हाथ पकड़ रहा है। इन सबके बीच कोई भी वोटर की मानसिकता नहीं समझ रहा है। सालों साल एक पार्टी की सेवा और प्रचार करने के बाद चुनाव से ठीक एक महीना पहले अपनी पार्टी बदल कर दूसरी पार्टी में शामिल होना शायद आजकल का फैशन हो गया है। कभी जो नेता एक पार्टी का चेहरा और पहचान था उसके पार्टी बदलते ही वह भ्रष्टाचारी और गलत हो जाता है? जो प्रत्याशी कभी एक पार्टी के लिए सारे बेहतर कदम उठाता था दूसरी पार्टी में जाकर पहली पार्टी के तौर तरीको पर सवाल उठाता है? हमारे देश की राजनिती क्या सिर्फ सवालों-जवाबों,आरोप-प्रत्यारोप और एक दूसरे पर उंगली उठाने के लिए है। सवाल यह है कि चुनाव को अब एक पुरा महीना भी नहीं बचा और पार्टियां एक दूसरे की टांग खिंचाई से बा़ज नही आ रहे हैं।
प्रदेश की दो बड़ी पार्टियां एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगी हुई है,अपनी उपलब्धियों से ज्यादा दूसरों की कमिया गिनाने में दोनों पार्टियां मुकाबला कर रही हैं। आधे से ज्यादा सभाओं में पार्टी के लोग इस बात से परेशान है कि दूसरी पार्टी ने यह घोषणा कैसे कर दी? कोई भी पार्टी इस बात को नहीं सोच रही कि उन्हें अपनी योजनाओं पर ध्यान देने का समय निकालना चाहिए और जितना हो सके जनता से मुखातिब होने के विषय में सोचना चाहिए। जनता की इच्छाओं को जानने के बाद य़ोजनाएं बना कर,उसपर काम करना सभी पाटिर्यों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यह आरोप प्रत्यारोप शायद हर राजनितिज्ञ जानता है और इन कामों के लिए नेताओं के पास बहुत समय है और आगे भी होगा। अभी इन उम्मीदवारों के समय की दरकार जनता को है जिनसे बातचीत करने के बाद ही शायद नेताओं को अपनी जनता को जानने का मौका मिलेगा,ऐसे में जनता की मंशा जानने के बाद कोई भी पार्टी ज्यादा अच्छा काम कर पाएगी,अगर उनकी सरकार बनती है।
विधानसभा चुनाव केवल नेताओं क लिए नहीं बल्कि जनता के लिए भी महत्तवपूर्ण है क्योंकि जनता भी अपनी समझ से एक ऐसा प्रतिनिधि चाहती है जो अपने वादों पर अडिग रहे और भविष्य में अच्छे काम कर सके।जनता के मन में इस बात का संदेह है कि अगर एक नेता उस दल का नही हुआ जहां से उसे मान-सम्मान मिला है तो वह जनता के क्या होगा? चुनाव से पहले जब इन नेताओं ने दल बदल लिया तो क्या गारंटी है कि चुनाव जीतने के बाद यह नेता अपने वादों पर खरा उतरेंगें! इन सभी सवालों के साथ यह चुनाव नेताओं के साथ जनता के लिए भी बहुत जरुरी है। जहां प्रदेश के नेता एक दूसरे पर इल्जाम लगा रहें वही अगर वह अपना समय जनता से मिलने में और उनकी मंशा जानने की कोशिश करने में लगाऐंगें तो फायदा शायद नेता और पार्टी दोनो को ही मिलेगा।चुनाव से कुछ दिन पहले जनता के सामने भी पार्टियों का चिट्ठा खुलने से नुकसान तो दोनों ही पार्टी को हो रहा है। पार्टियों की इस उठा पटक में जनता भी अपना कैंडिडेट फिल्टर कर रहीं और समझने की कोशिश कर रही कि असल में उनके लिए कौनसी पार्टी फायदेमंद है और कौन सिर्फ वादों के राजा है। समय कम है लेकिन दूर नही जब सबके सामने जनता का प्रतिनिधि होगा।
उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव में 62 महिला अाजमा रही हैं किस्मत
उत्तराखण्ड सहित देश भर में संसद व विभिन्न विधानसभाओं में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व प्रदान करने के मामले में हालात अब भी चिंताजनक हैं। चुनाव से पहले महिलाओं को आरक्षण से लेकर तरक्की की चाहत दिखाकर लुभाने में राजनीतिक पार्टियां पीछे नहीं रहना चाहती है, जब उन्हें जनता का प्रतिनिधित्व करने के लिए मैदान में उतारने की बारी आती है तो खुद को समेट ली है। आंकड़े के अनुसार प्रदेश में पुरूष और महिला मतदाता का अंतर पांच हजार से भी कम है। जबकि प्रदेश में कुल 637 उम्मीदवार मैदान में अपना भाग्य अजमा रहे हैं जिससे 62 महिला भी चुनाव लड़ रही हैं। महिलाओं की इतनी कम संख्या में चुनाव मैदान में है।
बताते चले कि उत्तरखण्ड विधान सभा आम चुनाव 2017 में 75,12,559 कुल मतदाता हैं जिसमें 39,33,564 पुरुष वोटर है और 35,78,995 महिला मतदाता हैं।
उत्तराखण्ड के केदारनाथ, पौड़ी, चौबट्टाखाल, पिथौरागढ़ और द्वाराहाट सीटों पर महिला मतदताओं की संख्या और पिछले चुनावों में मतदान मामले में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है। धारचूला और डीडीहाट में भी वे पुरुषों से अधिक है। फिर भी प्रदेश में तीन सीटों पर मात्र पांच महिलायें मैदान में उतरी है। केदारनाथ में भाजपा प्रत्याशी शैलरानी रावत, तो निर्दलीय आशा नौटियाल तथा चौबट्टाखाल में प्रजा मंडल पार्टी से पूनम कैंतूरा, जबकि मंजू रावत निर्दलीय तथा पिथौरागढ़ में सुषमा माथुर यूकेडी प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरी है। डीडीहाट, द्वाराहाट, धारचूला और पौड़ी में एक भी महिला प्रत्याशी नहीं है।





























































