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उत्तराखण्ड गठन के बाद से यमकेश्वर सीट पर कांग्रेस को नहीं मिली जीत

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उत्तराखण्ड के पौड़ी जिले की यमकेश्वर विधानसभा में कांग्रेस पार्टी राज्य गठन के बाद से आज तक जीत नही दर्ज कर पाई है।उत्तराखण्ड में पिछले तीन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को इस विधानसभा में हर बार हार का मुंह देखना पड़ता है। वर्ष 2002 और 2007 तथा 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याश्यी विजया बड़थ्वाल लगातार तीसरी बार विधायक चुनी गईं। हालांकि इस बार भाजपा ने उनका टिकट काट कर पूर्व सीएम बीसी खंडूरी की पुत्री को चुनाव मैदान में उतारा है। ऐसे में इस सीट को बचाना भाजपा के लिए भी चुनौती है,लेकिन इस सीट पर कांग्रेस को भी बागियों से खुली चुनौती मिल रही है।
उत्तराखण्ड राज्य निर्माण होने के बाद से यानी तीन विधानसभा चुनावों में अपने बागियों की करतूतों के चलते हार का मुंह देखने वाली कांग्रेस पार्टी इस विधानसभा चुनाव में जीत का सपना देख रही है। लेकिन भाजपा आलाकमान विजय बड़थ्वाल को मनाने में कामयाब रही है जिससे कांग्रेस के लिए राह आसान नहीं है।
विजय बडथ्वाल की नाराजगी को देखते हुए कांग्रेस ने भाजपा के शैलेन्द्र सिंह रावत को यमकेश्वर के चुनावी रण में उतारा है लेकिन कांग्रेस से टिकट कटने के बाद निर्दलयी प्रत्याशी रेनू बिष्ट उनकी राह में बाधा बनती दिख रही है। भाजपा से टिकट की मांग करने वाले पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रशांत बड़ौनी ने पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर खुद भी निर्दलीये प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकी हुई है, जो भाजपा के लिए दिक्कत है। कांग्रेस और भाजपा दोनों का इस बार हाल एक ही जैसा देखा जा रहा हैं। शैलेन्द्र रावत के मुताबिक कांग्रेस इस बार 15 साल के रिकॉर्ड को तोड़ देगी।
हालांकि इस बार करीब 83 हजार चार सौ 85 मतदाताओं वाली यमकेश्वर विधानसभा में इस बार 44 हजार पांच सौ 82 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया है, जो पिछली बार के विधानसभा चुनाव से कम है। ऐसे में जीत का सेहरा किसके सिर सजेगा 11 मार्च का इंतजार हैं।

10 मार्च को तिब्बत नेशनल अपराइजिंग डे

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दुनियाभर में तिब्बत समुदाय एकजुट होकर 10 मार्च को तिब्बत नेशनल अपराइजिंग डे मनाता है।तिब्बत के ल्हासा में वर्ष 1959 में 10 मार्च को हजारों तिब्बती लोगो ने एकसाथ गैरकानूनी पेशे के विरुद्ध खड़े होकर क्मयूनिस्ट चाईना से बगावत की थी। इस पेशे कि वजह से 1.2 मिलियन तिब्बती लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ था और लगभग 6000 पुरानी इमारतों को ध्वस्त कर दिया गया था। इतना ही नहीं तिब्बत समुदाय के जंगल उनका जीने और जरुरत की चीजों के साथ भी छेड़छाड़ की गई थी,और उनकी संस्कृति के साथ भी पक्षपात किया गया।80 हजार से भी ज्यादा तिब्बतीयों को भागना पड़ा और उसके बाद सन 1959 में तिब्बत सुमदाय के 14वे दलाई लामा भारत आए।

आज भी कम्मयूनिस्ट चाईना सरकार के अंर्तगत,अपनी जन्मभूमि में भी तिब्बत समुदाय को वही पक्षपात और घृणा झेलनी पड़ती है। अब तक 145 तिब्बती, ज्यादातर जवान आदमी और औरत,बहुत से कम उम्र के संन्यासी और संन्यासिनी इंतजार कर रहे कि उनके पवित्र महान 14वे दलाई लामा अपने तिब्बत में वापस आए और सही मायनों में उनको आजादी तिब्बत में आज़ादी दिलाएं।

इसी कड़ी में तिब्बत नेशनल अपराइजिंग डे पर 58वी सालगिरह मनाने के लिए दून तिब्बतन कम्यूनिटी ने एक शांतिपुर्ण पब्लिक कार्यक्रम का आयोजन तिब्बती बाजार,पंत रोड,देहरादून में सुबह 9:30 बजे से 12 बजे तक किया है।

बनारस के तर्ज पर गंगा घाटों का सुंदरीकरण करेगा हंस फाउंडेशन

एक तरफ सरकार और प्रशाशन गंगा घाटों के लिए समय समय पर काम करते आये है तो वहीँ अब गंगा घाटों के सुंदरीकरण के लिए हंस फाउंडेशन ने भी अपने कदम बढ़ाये है।तीर्थनगरी छेत्रों के गंगा घाटों का सुंदरीकरण का काम अब हंस फाउंडेशन करेगी जिसके लिए वो स्थानीय प्रशाशन से इस योजना के बारे में प्रस्ताव रखेगी।हंस फाउंडेशन काफी समय से गंगा की स्वच्छता और जरूरतमंद लोगों के लिए कार्य करता आया है।  इससे  फाउंडेशन की मदद से बनारस के गंगा घाटों का भी सुंदरीकरण का कार्य पूरा हो चूका है और अब बनारस के घाटों के तर्ज पर ऋषिकेश के घाटों का भी काम जल्द शुरू होगा। जिससे आने वाले समय पर गंगा घाट साफ़ और स्वच्छ हो सकेंगे। ऋषिकेश स्तिथ त्रिहरी होटल में प्रेस वार्ता कर संस्था के सचिव चन्दन सिंह भंडारी ने बताया की अब बनारस के घाटों के तर्ज पर ऋषिकेश और मुनि की रेती छेत्र में भी गंगा तटों और घाटों की स्वच्छता और सुंदरीकरण की योजना पर विचार कर रहा है।उन्होंने बताया की संस्था को सिर्फ स्थानीय पहल और प्रस्ताव का इन्तजार है।

उत्तराखण्ड में परिणाम से पहले निर्दलियों को साधने की तैयारी

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उत्तराखण्ड में मतदान के बाद अपने दम पर सरकार बनाने की तमाम अटकलों के बावजूद प्रदेश में सत्तासीन कांग्रेस और विपक्ष में बैठी भाजपा अन्य छोटों दलों को साधने में जुट गयी है।

देवभूमि में 15 फरवरी को 69 सीटों पर मतदान संपन्न होने के बाद से सरकार किसकी बनेगी इसे लेकर कयास लगाये जा रहे है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों को देखा जाए तो, 2002, 2007 और 2012 में बसपा, उक्रांद और निर्दलियों के समर्थन से सरकार बनायी गयी। ऐसी संभावना को देखते अंदरखाने दोनों राष्ट्रीय दल प्रदेश के अन्य छोटों पार्टियों को वैशाखी बनाने की योजना पर काम कर रहे है।
इस बार बड़ी संख्या में भाजपा कांग्रेस के बागियों द्वारा मैदान में किस्मत अजमाने से बहुमत की सरकार बनाने की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। इसे देखते हुए भाजपा और कांग्रेस के प्रमुख नेता इस पर गंभीरता से विचार कर रहे है। उक्रांद का इससे पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों के साथ गठबंधन रह चुका है।
उत्तराखण्ड में मतदान के दिन आधा दर्जन सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार दोनों दलों के प्रत्याशियों को कांटे की टक्कर देते दिखे। यह कितना सच साबित होगा यह 11 मार्च को पता चलेगा, लेकिन पार्टियां निर्दलियों को नजर अंदाज करने के मूड में नहीं है। हालांकि कांग्रेस गठबंधन के बारे में पहले ही संकेत भी दे चुकी है लेकिन भाजपा अन्य दलों और निर्दलियों के साथ सरकार बनाने की बात को तवज्जो नही दे रही है।
बागी निर्दलीय, नरेंद्रनगर से ओमगोपाल, केदारनाथ से आशा नौटियाल और कुलदीप कुमार, सहसपुर में आर्येंद्र शर्मा, गंगोत्री में सूरत राम नौटियाल, पुरोला में दुर्गेश लाल, यमकेश्वर में रेनू बिष्ट, धनौल्टी में प्रीतम पंवार, टिहरी में दिनेश धनै, देवप्रयाग में दिवाकर भट्ट, डीडीहाट से काशी सिंह ऐरी और द्वाराहाट से पुष्पेश त्रिपाठी भी परिणाम के दिन गुल खिला सकते है।

करण और कंगना की जुबानी जंग हुई तेज

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कंगना और करण जौहर के बीच चल रही जुबानी जंग और ज्यादा तेज हो गई है। कंगना ने करण जौहर पर पलटवार करते हुए उनको ढोंगी कहा है। साथ ही कहा है कि वे महिलाओं के सम्मान के लिए अपनी जंग जारी रखेंगी और करण जैसे लोगों को बेनकाब करती रहेंगी।

करण जौहर ने कंगना पर विक्टिम कार्ड खेलने का आरोप लगाते हुए कहा था कि कंगना को अगर बॉलीवुड में काम करने में परेशानी होती है, तो उनको फिल्म इंडस्ट्री छोड़ देनी चाहिए। करण के इस कमेंट के जवाब में कंगना ने कहा है कि फिल्म इंडस्ट्री हर किसी के लिए है और वे इसे छोड़कर कहीं नहीं जाएंगी और महिलाओं के सम्मान के लिए अपनी जंग जारी रखेंगी।
करण के शो काफी विद करण में कंगना ने करण को मूवी माफिया कह दिया था, इस पर चिढ़कर करण ने कंगना पर विक्टम कार्ड खेलने का आरोप लगाते हुए उनको फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने की सलाह दे डाली थी। जिसके बाद दोनों के बीच तूतू-मैं मैं की जंग और तेज हो गई। बॉलीवुड में ये भी कहा जा रहा है कि करण ने रितिक को खुश करने के लिए कंगना के खिलाफ मोर्चा खोला है। कंगना और रितिक के बीच लंबे समय से कानूनी जंग चल रही है। इस जंग को लेकर भी करण पहले रितिक का समर्थन कर चुके हैं। कहा जा रहा है कि रितिक के साथ करण जल्दी ही फिल्म शुरु करना चाहते हैं।
कंगना को आड़े हाथो लेते हुए करण ने कहा कि उन्होंने अपने शो में कंगना को बुलाकर उनको मौका दिया था कि उनकी बातें दुनिया तक पंहुचे, जिसका उन्होंने गलत फायदा उठाया। कंगना ने पलटवार करते हुए कहा कि उनको अपनी बात कहने के लिए किसी करण के शो की जरुरत नहीं रही। उनका कहना है कि करण की टीम उनको शो में लाने के लिए लंबे समय से कोशिश कर रही थी, जिसे वे लगातार टाल रही थीं। कंगना का कहना है कि बतौर कलाकार उनके पास अपनी बात कहने के लिए तमाम मंच हैं, जहां से वे अपनी बात कहती रही हैं और आगे भी करती रहेंगी।

उत्तराखंड में चोटियों पर हिमपात

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सूबे में बदलते मौसम के साथ ही बर्फबारी का क्रम शुरू हो गया है। केदारनाथ, बदरीनाथ व हेमकुंड साहिब, चार धाम सहित आसपास की चोटियों पर हिमपात हो रहा है। वहीं, प्रदेश के अनेक हिस्सों में रिमझिम बारिश हो रही है।
मौसम विभाग के मुताबिक सूबे में अनेक स्थानों में हल्की से मध्यम वर्षा और तीन हजार मीटर व इससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात का क्रम जारी रहेगा। देहरादून, हरिद्वार, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पौड़ी, टिहरी में रिमझिम बारिश हो रही है। कुमाऊं मंडल में पिथौरागढ़ में ऊंची चोटियों पर हिमपात हो रहा है। साथ ही अन्य इलाकों में बारिश हो रही है। चंपावत, नैनीताल आदि स्थानों पर बादल घिरे हैं। वहां बारिश की संभावना बनी है। इसके चलते हवा में ठंडक बनी हुई है।
राजधानी रेहरादून में मार्च माह के पहले सप्ताह में तापमान बढ़कर 28 डिग्री सेल्सियस के पास पहुंच गया था। वहीं मौसम में परिर्वतन के चलते गुरुवार को अब घटकर 20 डिग्री सेल्सियस हो गया है।

गंगोत्री सीट पर 60 वर्षों की मिथक पर टिकी है सबकी निगाहें

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उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र मान्यताओं से भरे पड़े हैं यही कारण है कि गंगोत्री विधानसभा सीट की विजयी पार्टी की प्रदेश में 60 वर्षों से सरकार बनती आ रही है। उत्तरकाशी जिले की गंगोत्री सीट को लेकर चाहे संयोग समझें या चमत्कार, हकीकत यही है कि जिस भी दल का उत्मीदवार यहां से चुनाव जीतता आया है उसकी प्रदेश में सरकार बनती आई है। यह परंपरा वर्ष 1958 से लेकर अब तक चलती आ रही है।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भी अपने सिटिंग उम्मीदवार को मौका दिया, तो वहीं दूसरी ओर बीजेपी भी अपने पूर्व विधायक गोपाल रावत को मैदान में उतारी हैं।
लिहाजा गंगोत्री सीट पर जो चुनावी द्वंद्व को लेकर भाजपा, कांग्रेस के साथ—साथ आम लोग भी उत्साहित हैं। अब देखना है कि यह सीट 2017 में भी इतिहास दोहरा पाएगी।
वर्ष 1958 में यूपी का हिस्सा रहे टिहरी जिले के उत्तरकाशी सीट से कांग्रेस के रामचंद्र उनियाल विधायक बने, तो राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी। इसके बाद तीन बार कांग्रेस के कृष्ण सिंह विधायक बने, तो प्रदेश में तीनों बार कांग्रेस की सरकार बनी।
1974 में उत्तरकाशी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए घोषित होने पर यहां कांग्रेस नेता बलदेव सिंह आर्य विधायक बने, तब भी राज्य में कांग्रेस सत्ता में आयी।
वहीं आपातकाल के बाद भी जनता पार्टी अस्त्तिव में आई और जनता पार्टी के बर्फिया लाल जुवाठा चुनाव जीते और राज्य में जनता पार्टी की सरकार बनी। ऐसे में उत्तरकाशी सीट से जुड़े इस मिथक को बनाए रखने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों ने ही गंगोत्री विधानसभा पर हमेशा अपनी पूरी ताकत से चुनाव लड़ी है।
वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य के अस्तित्व में आने के बाद विधानसभा सीटों के परिसीमन से उत्तरकाशी विधानसभा जौनसार, टिहरी, पुरोला, यमुनोत्री और गंगोत्री चार विधानसभा सीटों में बंट गया।
वर्ष 2002 में राज्य में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के विजयपाल सजवाण कांग्रेस से जीत कर विधानसभा में पहुंचे, वर्ष 2012 में दोबारा फिर कांग्रेस के विजयपाल के जीतने पर प्रदेश में उन्हीं की पार्टी कांग्रेस की सरकार बनी।

कर्णप्रयाग सीट पर प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद, 58.60 प्रतिशत हुआ मतदान

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कर्णप्रयाग विधान सभा सीट के लिए मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। क्षेत्र की 169 मतदेय स्थलों पर 58.60 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। क्रीटिकल एवं वनरेवल मतदेय स्थलों पर भी किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नही हुई। सभी मतदेय स्थलों पर ईवीएम को लेकर कोई शिकायत नही हुई।
कर्णप्रयाग विधान सभा क्षेत्र में 46,268 पुरूष एवं 45,581 महिला मतदाता सहित कुल 91,849 मतदाता थे, जिसमें से 54,164 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
बता दें कि 15 फरवरी को हुए मतदान में बद्रीनाथ विधान सभा क्षेत्र में 61.62 तथा थराली में 58.04 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया था। वहीं गुरूवार को कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर 58.60 प्रतिशत मतदान हुआ। इस प्रकार जिले में कुल 59.56 प्रतिशत मतदान रहा।
कर्णप्रयाग चुनाव में सबसे बडी मेहरबानी मौसम की रही। जिले में भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद कर्णप्रयाग विस क्षेत्र में पूरे मतदान के दौरान मौसम खुशनुमा बना रहा। लोगों ने घर से निकलकर जमकर मतदान किया। पहली वार वोट देने वाले युवाओं में जहाॅ काफी उत्साह दिखा, वही बुर्जुग एवं दिव्यांग मतदाताओं ने भी बढ-चढकर मतदान में भाग लिया।
बुर्जुग महिला मतदाताओं में 88 वर्ष की सोवती देवी, 85 वर्ष की सीता देवी, 85 वर्ष की जेठुली देवी, 80 वर्ष की जानकी देवी तथा बुर्जुग पुरूष मतदाताओं में 94 वर्ष के प्रेमलाल, 90 वर्ष के सचिदानंद, 83 वर्ष के मानसिंह आदि ने मदतान किया।
वही दिव्यांग मतदाताओं में बच्ची लाल, हिमांशु, दिनेश कुमार, मोहन सिंह, पंचम सिंह आदि ने भी उत्साह पूर्वक मतदान किया। जाख मतदेय स्थल पर पहली वार वोट डालते हुए प्रियंका सहित अन्य युवाओं में काफी उत्साह देखा गया। जिले के सीमावर्ती मतदेय स्थलों पर मतदान शांतिपूर्ण रहा।

तरह तरह के क्यूजिन बनाने वाली हार्ट आन ए प्लेटर- राशिका

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मां दुर्गा की धरती,गंगा मां के किनारे और सांस्कृतिक रुप से परिपूर्ण शहर कोलकाता में जन्मी है राशिका।राशिका अपने आप को किस्मत वाला समझती हैं कि उन्हें होटल,टूरिज्म,ट्रेवल और केटरिंग मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन करने का मौका मिला वो भी स्विट्जरलैंड से,जो दुनिया का एक बेहतरीन कालेज है और क्यूलीनरी क्षेत्र में उम्दा भी।राशिका ने पढ़ाई के साथ दुनिया भर में सफर किया और अलग अलग प्रकार के लोगो से मिली हैं।

राशिका ने दो अलग अलग देशों में काम किया।राशिका कुछ समय बाद भारत वापस आई और उनकी शादी हो गई।अपने पति के लिए राशिका कहती हैं कि आज वह बहुत खुश हैं कि उन्हें अपने पति का पुरा सहयोग मिल रहा है।अलग अलग प्रोजेक्ट पर काम करने के बाद राशिका का सपना था कुछ हट कर और अपना करने का,और उनके इस सपने में भी उन्होंने ट्रेवल और फूड को नही छोड़ा।राशिका बताती हैं कि उनके इस सपने में उनके परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया और कुछ हट कर करने की प्रेरणा दी और ऐसे शुरु हुआ 2016 में फ्लो बिस्ट्रो का सफर।

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राशिका कहती है कि अलग अलग देशों में रहने और काफी तरह के डिश बनाने के बाद अपने ही अनुभव का इस्तेमाल कर उन्होंने अपने फ्लो बिस्ट्रो में बहुत सारे प्रयोग किए।ऱाशिका का मानान है कि यह तो अभी शुरुआत है अभी बहुत कुछ होना बाकी है,यह कभी भी आसान नहीं था,क्योंकि राशिका को दो अलग अलग रोल निभाने थे, अपनी 6 साल की बेटी समायरा की मां होने का,दूसरा फ्लो बिस्ट्रो को संभालने का।

देहरादून करेगा राष्ट्रमंडल वानिकी सम्मेलन की मेजबानी

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पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (प.व.ज.प.मं.), भारत सरकार तथा राष्ट्रमण्डल वानिकी संगठन (सी.एफ.सी) के सहयोग से भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् के अंतर्गत वन अनुसंधान संस्थान (एफ.आर.आई), देहरादून 3 से 7 अप्रैल, 2017 तक एफ.आर.आई, देहरादून में 19वें राष्ट्रमंडल वानिकी सम्मेलन का आयोजन कर रहा है।सम्मेलन की मुख्यतः ’’समृद्वि एवं  भावी पीढी हेतु वानिकी’’ है। सम्मेलन के दौरान सुनियोजित 24 तकनीकी सत्रों में नीति एवं निर्णायकताओं, विषय विशेषज्ञों, अकादमीशियनों, वन प्रवेधकों, उद्योग जगत तथा गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा भाग लिया जाएगा। तकनीकी सत्र के दौरान विश्व के लगभग 600 शैक्षणिक विशेषज्ञों, वन कार्यकर्ताओं, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण एवं विकास में कार्यरत एजेंसियों के प्रतिनिधियों द्वारा सहभागिता की जाएगी एवं वैज्ञानिक दस्तावेजों का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा। इस सम्मेलन में (अंतर्राष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान केन्द्र), (वन अनुसंधान संगठनों का अन्तर्राष्ट्रीय संघ), । (राष्ट्रमंडल वानिकी संगठन), (एकीकृत पर्वत विकास अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र), और (खाद्य एवं कृषि संगठन) जैसे कई अनेक विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान संगठनों के प्रमुख भी सहभागिता करेंगे।

केन्द्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार, श्री अनिल माधव दवे, मुख्य अतिथि अपेक्षित हैं। पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव, श्री अजय नारायण झा भी इसमें शिरकत करेंगे। मंत्रालय के वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव भी 3 अप्रैल, 2017 को उपस्थित रहेंगें। महानिदेशक, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, निदेशक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आई.जी.एन.एफ.ए), देहरादून, निदेशक, भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्लू.आई.आई.), महानिदेशक, भारतीय वन सर्वेक्षण (एफ.एस.आई.) पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के और वरिष्ठ अधिकारीगण, भारतीय वन अनुसंधान शिक्षा परिषद्, वन अनुसंधान संस्थान, आई.जी.एन.एफ.ए. तथा राज्य वन सेवा केन्द्रीय अकादमी(कैशफोस), देहरादून भी सहभागिता करेंगे। देहरादून वन में स्थित संस्थानों की प्रतिभागिता भी रहेगी।राष्ट्रमंडल देशों के क्षमता निर्माण तथा जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण एवं क्षमता अनुकूलन के उद्देश्य से 19वें सी.एफ.सी. का आयोजन किया जा रहा है। सी.एफ.सी. में आजीविका उत्पादन, गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा तथा महिला सशक्तिकरण जैसे पहलुओं पर भी चर्चा की जाएगी। उद्घाटन सत्र में चार अधिवेशन सत्रों, एक पोस्टर सत्र तथा उन्नीस तकनीकी सत्रों को चलाया जाना सुनिश्चित किया गया है। साथ ही छः साईड ईवेन्ट एवं दो समानान्तर सत्र भी होंगे।

सम्मेलन में वानिकी क्षेत्र के लगभग 40 राष्ट्रमंडल देशों से तथा भारत सरकार व राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों (एन.जी.ओ.) के 600 से भी अधिक प्रतिनिधियों के उपस्थित होने की आशा है।