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काशीपुर हमले के आरोपियों पर मामूली धाराएं लगाने पर भड़के

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काशीपुर, एक अधिवक्ता व उसके भाई पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस द्वारा मामूली धाराएं लगाए जाने एवं आरोपियों की गिरफ्तारी न किये जाने के विरोध में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आनन्द स्वरूप रस्तोगी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने कोतवाली पहुंच पुलिस के विरूद्ध नारेबाजी करते हुए धरना प्रदर्शन किया।

बता दें कि प्रभात कॉलोनी निवासी नरेश चन्द्र पुत्र हजारी सिंह ने पुलिस को तहरीर देते हुए कहा है कि उसके पुत्रा मोहित काम्बोज एड. अपने भाई मोहन काम्बोज के साथ बीती 12 मार्च की रात्रि बाइक द्वारा अपने घर लौट रहे थे कि कालोनी के पास विशाल कांबोज पुत्र विजय सिंह, संदीप बाबू, पुत्र ईश्वर चन्द्र व एक अन्य व्यक्ति ने उनके पुत्रों को घेर कर उन पर लाठी डण्डों व कांच की बोतलों से जानलेवा हमला कर उन्हें लहूलुहान कर दिया।

पुलिस ने घायल अधिवक्ता मोहित के पिता नरेश चन्द्र काम्बोज की तहरीर के आधार पर आरोपियों के विरूद्व धारा 323,504,506 आइपीसी के तहत नामजद रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच एसआई प्रशिक्षु भावना कर्णवाल को सौंपी थी। इधर आज अधिवक्ताओं ने उक्त मामले में मामूली धाराएं लगाए जाने व आरोपियों के खुले आम घूमने के विरोध में कोतवाली पहुंच पुलिस के विरूद्ध नारेबाजी कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

अधिवक्ताओं की मांग थी कि पुलिस जांच में हीलाहवाली बरत रही है तथा आरोपी खुलेआम घूमकर लगातार पीडि़तों को धमकी दे रहे हैं। अधिवक्ताओं ने मामले को धारा 307 या 308 आईपीसी में भी तरमीम करने की मांग की। इस दौरान एसएसआई व प्रभारी कोतवाल लाखन सिंह ने अधिवक्ताओं को बताया कि पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है तथा घायल अधिवक्ता का मेडिकल आने पर मेडिकल के आधार पर धाराएं बढ़ा दी जाएंगी। उन्होंने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी का भी आश्वासन दिया।

रोज़गार की मीठी उड़ान है मधुमक्खी पालन

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उत्तराखंड प्रकृति से सराबोर एक ऐसा राज्य है जहां बाग बागानों और उद्यानों की कोई कमी नहीं है। ऐसे में बहुत से लोग अपनी जीविका के लिए इन बागों पर निर्भर रहते हैं। जी हां इन्हीं बागों पर निर्भर है उन व्यापारियों की कहानी जो अपनी रोजी रोटी के लिए हर साल देहरादून के अलग अलग जगहों पर अपना टैंट लगाकर अपने व्यापार को आगे बढाते हैं।

अगर आपको तो अच्छी बात,नहीं तो हम आपको बता दें कि देहरादून की मीठी लीची दुनियाभर में मशहूर है। इन्हीं लीची के बागानों में आजकल मधुमक्खियों के व्यापारी अपनी मधुमक्खियों के घर लेकर रह रहे हैं और मधुमक्खी पालन उद्योग इसमें उनकी भरपूर मदद कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों से न सिर्फ लोगों का रुझान इसकी तरफ बढ़ा है, बल्कि खादी ग्राम उद्योग भी अपनी तरफ से कई सुविधाएं प्राप्त करा रहा है। मधुमक्खी पालन एक लघु व्यवसाय है, जिससे शहद एवं मोम प्राप्त होता है। यह एक ऐसा व्यवसाय है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का पर्याय बनता जा रहा है। फिलहाल शहद उत्पादन के मामले में भारत पांचवें स्थान पर है।

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देहरादून के अलग अलग क्षेत्र बिंदाल पुल, रायपुर, वसंत विहार, डालनवाला, अजबपुर, राजपुर के बागान और उनके फुलों पर मधुमक्खियां ही नज़र आएंगी।बिंदाल के पास लीची के बाग में अपनी मधुमक्खियां लेकर आए व्यापारी रामकुमार बताते हैं कि सन 1992 से वह अपनी मधुमक्खी लेकर यहां आते हैं और शहद बनने तक यहीं रहते हैं।इस समय रामकुमार लगभग 1000 मधुमक्खी के बक्से के साथ यहां रह रहे हैं।रामकुमार कहते हैं कि लीची के फुलों से मधुमक्खियों को ज्यादा मात्रा में रस मिलता है जिससे शहद भी ज्यादा स्वादिष्ट और सेहतमंद निकलता है।सहारनपुर के यह व्यापारी हर साल अपना रुख देहरादून की तरफ मोड़ते हैं और शहद निकलने के बाद लाखों का व्यापार करते हैं।रामकुमार ने बताया कि इतना ही नहीं इस दौरान वह मधुमक्खी पालन के लिए वर्कशाप का आयोजन भी करते हैं।

मधुमक्खी पालन से संबंधित कुछ जरुरी सवालों के जवाब इस प्रकार हैः

  • कब शुरू करें मधुमक्खी पालन?
    मधुमक्खी पालन के लिए जनवरी से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है, लेकिन नवंबर से फरवरी का समय तो इस व्यवसाय के लिए वरदान है।
  • यह व्यवसाय कितनी लागत से शुरू किया जाना चाहिए?
    शुरू में यह व्यवसाय कम लागत से छोटे पैमाने पर आरंभ करना चाहिए। मधुमक्खी की प्रमुख किस्में छोटी मधुमक्खी, सारंग मधुमक्खी, भारतीय मधुमक्खी तथा इटेलियन मधुमक्खी का इस्तेमाल करना चाहिए। इन मधुमक्खियों से शहद अधिक प्राप्त होगा और मुनाफा भी ज्यादा होगा।
  • इसके लिए सबसे उपयुक्त मौसम कौन-सा है?
    सबसे उपयुक्त मौसम नवम्बर से फरवरी तक का है। यह समय मधुमक्खियों के लिए तापमान के हिसाब से सबसे उपयुक्त है और इसी मौसम में ही रानी मक्खी अधिक संख्या में अंडे देती है।
  • बचाव
    जहां मधुमक्खियां पाली जाएं, उसके आसपास की जमीन साफ-सुथरी होनी चाहिए। बड़े चींटे, मोमभझी कीड़े, छिपकली, चूहे, गिरगिट तथा भालू मधुमक्खियों के दुश्मन हैं, इनसे बचाव के पूरे इंतजाम होने चाहिए।

मधुमक्खी पालन ना केवल एक आसान बल्कि अच्छी आमदनी वाला व्यवसाय भी है।अगर इसके कुछ बिंदुओं पर ध्यान दिया जाए तो बिना किसी प्रशिक्षण के भी लोग इस व्यवसाय से जुड़े हैं और अच्छा कर रहें हैं।खासकर प्रकृति के करीब शहर देहरादून जो फरवरी से लेकर मार्च के महीनों में मधुमक्खी पालन का केंद्र रहता है।

कौन करेगा उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस का नेतृत्व

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2017 के चुनाव में तगड़ी शिक्स्त मिलने के बाद अब कांग्रेस के लिए यह तय कर पाना थोड़ा मुश्किल होगा कि कौन होगा कांग्रेस पार्टी का विधान दल का नेता। एक तरफ हरीश रावत अपनी दोनों सीटों से चुनाव हार चुके हैं वहीं पार्टी प्रदेश अध्यक्ष भी अपनी सीट गवां चुके हैं। प्रदेश की सत्ता से हटकर विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई कांग्रेस के खाते में केवल 11 विधायक आए हैं।इनमें से भी कुछ नए हैं और कुछ का अनुभव कम है।सारी गणित लगाने के बाद जो नाम ज़हन में आते हैं वो है
  • इंदिरा हृदयेश
  • गोविंद सिंह कुंजवाल और
  • प्रीतम सिंह
अब से पहले तक कांग्रेस की बागडोर प्रदेश के सीएम रावत और अध्यक्ष का कार्यभार किशोर उपाध्याय के हाथ में था लेकिन दोनो ही दिग्गज नेताओं की अपनी सीटों पर करारी हार के बाद कांग्रेस संगठन में बदलाव के आसार नज़र आ रहे हैं। प्रदेश में अब तक हर तरह से कांग्रेस की बागडोर हरीश रावत के हाथ में थी जिसके चलते लंबे समय से संगठन और सरकार में तनातनी बनी हुई थी। संगठन में बदलाव के साथ ही नई विधानसभा में कांग्रेस विपक्ष की भूमिका महत्तवपूर्ण रहेगी। ऐसे में पार्टी के भीतर नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं जोरो पर हैं। इन चर्चाओं में मुख्य तरह से पिछली सरकार के वरिष्ठ नेताओं में जो दो नाम हैं वह हैं इंदिरा हृदयेश और प्रीतम सिंह। इसके अलावा जागेश्वर से जीतने वाले वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह कुंजवाल को भी इस रेस में माना जा रहा है।
अब तक हुए चार विधानसभा चुनाव में पहली बार कांग्रेस की इतनी दुर्गति हुई है अब इसका ठीकरा कौन किसके सर फूड़ोगा यह तो वक्त ही बताएगा। 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश की बागडोर हरीश रावत के हाथ में दी थी, लेकिन चाहे रावत हो या फिर चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर कोई भी मोदी लहर के सामने ठहर नहीं पाया। अब जब चुनाव में ये पूरी कवायद धरी रही गई तब चुनाव प्रबंधन और रणनीति पर सवाल उठना लाज़मी है।

आर्य नगर में आग पर काबू पाने में फायर सर्विस रही कामयाब

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गुरुवार को थाना डालनवाला को सूचना प्राप्त हुई की चौकी नालापानी क्षेत्र में आर्य नगर नई बस्ती में एक घर में आग लग गयी है। जिसके बाद चौकी पुलिस द्वारा तुरुन्त घटनास्थल पर पहुँचकर फायर सर्विस की मदद से आग को बुझाया गया। आग लगने का कारण संभवतः शार्ट सर्किट पाया गया। घर के मालिक रामावतार पुत्र श्री जगदीश प्रसाद निवासी 141/2 आर्य नगर नई बस्ती थाना डालनवाला ने बताया की एक कमरे का सारा सामान जल गया है तथा किसी प्रकार की जन हानि नही हुई है। पुलिस व फायर सर्विस के द्वारा किये गए त्वरित सहयोग व कार्यवाही की जान मानस ने प्रशंसा की।

उत्तराखंड में कैसे चला मोदी मैजिक

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उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में मिली ऐतिहासिक जीत को बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ किया है कि सरकार बहुमत से बनती है, लेकिन चलेगी सबके मत से। यह सरकार उनकी भी है जिन्होंने साथ दिया और उनकी भी है जिन्होंने साथ नहीं दिया। मोदी ने 2022 में देश की आजादी की 75 साल पूरे होने पर देश के सवा सौ करोड़ लोगों से एक संकल्प लेने का आह्वान किया जिससे देश विकास के पथ पर आगे बढे़ और एक गौरवशाली भारत का निर्माण हो सके। अपनी इस जीत के साथ मोदी ने 2019 के चुनावों का अजेंडा सेट कर दिया है। हमने जानने की कोशिश करी कि आखिर मोदी की इस अप्रत्याशित जीत के पीछे क्या कारण रहे।

नोटबंदी पर मोदी के साथ खड़ा हुआ मतदाता।

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नोटबंदी को लेकर मोदी जनता का भरपूर साथ मिला। बीजेपी अंदरखाने नोटबंदी को लेकर हलचल और आशंकित भी थी। नोटबंदी की अधिसूचना 8 नवम्बर को हुई थी। तब उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव की अधिसूचना लागू होने में करीब दो माह का वक्त था। बीजेपी के नेता इस बात को लेकर आशंकित थे कि चुनाव से पहले नोटबंदी पार्टी को उल्टी न पड़ जाये। बीजेपी से जुड़े व्यापारी नेता ही बल्कि कुछ वरिष्ठ नेता भी उस समय की इस नोटबंदी को पार्टी के पक्ष में नहीं मान रहे थे।

इस चुनाव में जनता की अदालत ने नोटबंदी को 100 में से 95 अंक दिए है। इसलिए उत्तराखंड में बीजेपी की इस अभूतपूर्व जीत को नोटबंदी पर जनता के समर्थन की मुहर के तौर पर भी लिया जा रहा है। नोटबंदी को आम लोगो ने पैसे वालों पर मोदी की बड़ी चोट के तौर पर भी देखा। चुनाव के दौरान जनसभाओं में भी मोदी ने नोटबंदी को जनहित में बताकर इसके फायदे गिनाए। खासकर महिलाओं में नोटबंदी को लेकर मोदी का खासा समर्थन नजर आया। आम लोगो का यही समर्थन वोटो में बदला और बीजेपी को तीन चौथाई से अधिक सीटे मिली।

वहीं वरिष्ठ पत्रकार अविकल थपलियाल ने कहा कि “एक उत्तराखंड की जनता को कांग्रेस सरकार के खिलाफ नाराज़गी थी, सरकार से जनता खुश नहीं थी, साथ ही हरीश रावत चुनाव प्रचार में बुरी तरह पिछड़ गए और अपनी बात जनता तक चुनाव के समय नहीं पहुंचा पाए जबकि बीजेपी ने धुआंधार प्रचार किया।” 

थपलियाल कहते हैं कि “हिन्दू वोट 6 से 7 प्रतिशत बीजेपी की तरफ शिफ्ट हुआ जबकि बसपा का वोट इस चुनाव में कम हुआ। इसकी वजह यह भी रही की हरीश रावत ने चुनाव से पहले यह बोल दिया था कि जुम्मे के दिन कर्मचारियों को 2 घंटे का अवकाश लेले । यह वजह रही की पहाड़ का वोट बीजेपी की तरफ हो गया था।”

मोदी लहर चलने की एक बड़ी वजह राज्य में फौजी होने के कारण मोदी का फार्मूला ‘वन रैंक वन पेंशन” का ख़ास फायदा देखने को मिला। हरीश रावत वर्सेज मोदी में लोगों ने प्रधानमंत्री का ही हाथ थामा है क्योंकि मोदी जनता को कह गए थे की उत्तराखंड को डबल इंजन की जरूरत है एक इंजन केंद्र का और एक इंजन उत्तराखंड का, इसका सीधा फायदा बीजेपी को 11मार्च को दिख गया है।

रुद्रपुर भूमि घोटाले के मामले में आया नया मोड़

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एनएच – 74 के चौड़ीकारण भूमि लेंड का यूज बदलकर सरकार को 118 करोड़ के राजस्व के नुकसान पहुचाने के मामले में ऊधम सिंह नगर में विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी पद पर तैनात डॉ डी०पी० सिंह पर गिरी गाज। डीपी सिंह को त्तकाल प्रभाव से एसएलओ पद से हटा द्या गया है।

118 करोड़ के भूमि घोटाले के मामले में परत दर परत खुलती जा रही है। जंहा घोटाले को लेकर जाँच की आंच कई अधिकारियो पर गिरती नजर आ रही है वहीं घोटाले के मास्टर माइंड माने जा रहे भूमि अध्यापित अधिकारी डीपी सिंह को शासन के निर्देशों पर पद मुक्त कर दिया गया है।

इससे पहले आयकर विभाग की छापेमारी में डीपी सिंह के पास बेनामी संपत्ति का होना पाया गया। वहीं 143 के 118 करोड़ के घोटाले में संलिप्तता के साथ ही कई अधिकारियों की भी मिलीभगत पाई गई है। जिलाधिकारी उधमसिंघनगर ने शासन के निर्देशों पर डीपी सिंह को पदमुक्त करने के आदेश दिए है। इसके पीछे कारण ये बताया गया कि उनके खिलाफ होने वाली जाँच प्रभावित न हो सके।

गौरतलब है कि दबंग और रसिक मिजाज डीपी सिंह हमेशा ही चर्चाओं में रहे हैं। कभी प्रेमप्रसंग के चलते तो कभी अवैध खनन में मिली भगत। वहीं अब बिल्डरों के साथ मिलकर करोड़ों की खरीदफरोख्त डीपी सिंह के लिए हानिकारक सिद्ध हो रही है।

कांग्रेस को लगा एक और चुनावी झटका, बीजेपी ने जीती लोहाधाट सीट

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बीजेपी ने लोहाधाट सीट जीत कर मौजूदा विधानसभा में अपने विधायकों की संख्या 57 कर ली है। यहां से बीजेपी के उम्मीदवार पूरण सिंह फर्त्याल ने कांग्रेस के कुशल सिंह को 839 वोटों से हरा दिया। फर्त्याल को 27685  मिलें वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार को 26851 वोट ही मिल सके। विधानसभा चुनाव में लोहाघाट सीट की कर्णकरायत बूथ संख्या 128 पर एक इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के नहीं खुलने से यहां के परिणाम का एलान नहीं हो सका था। जब ईवीएम बंद हुई तो भाजपा प्रत्याशी पूरन सिंह फर्त्याल अपनी करीबी प्रतिद्वंदी कांग्रेस के खुशाल सिंह से 450 मतों से आगे चल रहे थे।इसके चलते चुनाव आयोग ने यहां बुधवार को दोबारा मतदान कराया गया। इसके बाद आधिकारिक नतीजों का ऐलान हुआ। हांलाकि जिस तरह से सारे राज्य में बीजपी ने कांग्रेस के किले को ध्वस्त कर दिया था उसके चलते ये ही उम्मीद की जा रही थी कि इस सीट पर जीत भी पार्टी के लिये आसान रहेगी। हांलाकि जीत का अंतर कम रहा लेकिन इस जीत से बीजेपी ने कांग्रेस के चुनावी ज़्खमों पर और नमक लगा दिया है।

जेटली ने कहा निरामयम है रोग से मुक्ति का केंद्र

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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने निरामयम चिकित्सा केन्द्र का उदघाटन किया। निरामयम चिकित्सा केंद्र स्थित प्राकृत-पंचकर्म-चिकित्सा केंद्र है। मड थेरेपी कक्ष और योग व ध्यान केंद्र का भ्रमण करने के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि यह दवा, सर्जरी और रोग से मुक्ति का केंद्र है। वहीं बाबा रामदेव ने कहा कि लोगो को निस्वार्थ भाव से चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना ही निरामयम का उद्देश्य है। उन्होंने निरामयम की वेबसाइट का भी विमोचन किया।
उद्धघाटन के अवसर पर अरुण जेटली ने कहा कि दुनिया के विकसित देशों में इस प्रकार की चिकित्सा सेवाएं बहुत अधिक खर्च पर प्रदान की जा रही है। योगग्राम कि चिकित्सा सेवाएं के माध्यम से लोगो को महंगी दवाओं तथा सर्जरी से निजात मिलेगी। जेटली ने पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क पदार्थां का भी भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे बहुत कम फूड पार्क है, जो सफल साबित हुए हैं। और यह भी कहा कि देश में ऐसे फूड पार्क और बनने चाहिए, जिससे किसान और जनता दोनों को लाभ हो सके। इस दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि निस्वार्थ भाव से लोगो को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना ही निरामयम का उद्देश्य है। साथ ही आचार्य बाल कृष्ण ने कहा कि योगग्राम में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार देश के लोगो के लिए उपहार है।
 ये है निरामयम:
योगगुरु बाबा रामदेव ने निरामयम के विषय में विस्तृत जानकारी दी और कहा कि योगग्राम में पहले करीब 400 लोगो के उपचार,आवास, भोजन सहित सभी प्रकार की यथा-योग, आर्युवेद, पंचकर्म और पष्टकर्म चिकित्सा की व्यवस्था थी। उसमें करीब 100 लोगो की व्यवस्था का विस्तार किया गया है। यह पूरा परिसर लगभग 100 एकड़ में फैला हुआ है। पतंजलि योगपीठ ने पिछले आठ सालों में योगग्राम में करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। इसमें 4 अतिविशिष्ट श्रेणी, 12 विशिष्ट क्षेणी और 16 एकल व्यवस्था के कक्ष बनाए गए हैं।
बाबा रामदेव ने दिया था नोटबंदी का सुझाव: जेटली
पतंजलि में अरुण जेटली ने योगगुरु बाबा रामदेव की खुलकर तारीफ की और उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी के फैसले को लेकर उनकी बाबा रामदेव से वार्ता हुई थी। उन्होंने ही देश में एक टैक्स और प्लास्टिक मनी को बढ़ावा देने का सुझाव दिया था। रामदेव ने कहा था की बड़े नोट तुरन्त बंद कर दें। दूसरा देश में एक टैक्स लगना चाहिए और तीसरा पेपर करेंसी के स्थान पर प्लास्टिक करेंसी को बढ़ावा दिया जाए। वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार तीनो बिंदुओं पर काम कर रही हैं। इससे देश में भ्र्ष्टाचार और भ्रष्ट व्यवस्थाओं पर रोक लगी है।

बच्चों ने राजभवन के आंगन में मनाई फूल देई

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आज प्रातः राजभवन में ‘फूल-संक्राति’/‘फूल देई’ मनाई गई। प्रकृति के साथ सुख-शान्ति और समृद्धि की शुभकामनाएं लेकर राजभवन की दहलीज पर बच्चों ने फूल बरसाये। राज्यपाल डाॅ.कृष्ण कान्त पाल ने बालक एवं बालिकाओं का अत्यन्त प्रसन्न मन से स्वागत किया और परम्परानुसार उन्हें चावल व मिष्ठान्न देकर शुभकामनाओं के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

राज्यपाल ने उत्तराखण्ड के लोक पर्व फूल संक्राति/फूल देई के अवसर पर कहा कि हमारे पर्व ही हमारी संस्कृति के संरक्षक होते है । भारतीय समाज में मनाये जाने वाले पर्वों का किसी न किसी ऋतु से सीधा सम्बन्ध होता है, जो हमारी नयी पीढ़ियों को हमारी संस्कृति से परिचित कराने में संवाहक की भूमिका निभाते हैं। इसलिए पर्वाे को संस्कृति का संरक्षक कहा जा सकता है।

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में चैत्र मास में मनाया जाने वाला फूल देई पर्व प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है। यह पर्व विशेष रूप से बच्चों द्वारा मनाया जाता है इससे हर बच्चा अपने लोक पर्व के महत्व व भूमिका से सरल रूप से परिचित हो जाता है और बचपन से ही अपनी संस्कृति से जुड जाता है।

राधा रतूड़ी ने निर्वाचन अधिकारी पद छोड़ने की इच्छा जताई

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प्रदेश की मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूड़ी ने अपने पद को छोड़ने की इच्छा जताई है।उन्होंने पत्र लिखकर मुख्य सचिव एस रामास्वामी को नए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के चुनाव के लिए तीन नाम देने का अनुरोध किया है।

उन्होंने मुख्य सचिव एस रामास्वामी को पत्र लिखकर यह इच्छा जताई है। मुख्य सचिव को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि दस वर्षो से उनके पास यह पद है। वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। ऐसे में वे अब यह पद छोड़ना चाहती है।भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी राधा रतूड़ी वर्ष 2007 में प्रमुख सचिव एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी बनी थी। तब से ही वे इस पद पर बनी हुई हैं। अब उन्हें इस पद पर बने दस साल हो चुके हैं। इतना लंबा कार्यकाल संभालने के बाद वे अब इस पद को छोड़ना चाह रही हैं। उन्होंने पत्र में अनुरोध किया है कि नए मुख्य अधिकारी का चयन करने के लिए शासन की ओर से तीन नामों का पैनल भारत निर्वाचन आयोग को भेजा जाता है। उन्हें इस पदभार से अवमुक्त करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग को तीन अधिकारियों का पैनल भेजा जाए। सूत्रों की मानें तो प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी के इस पत्र के बाद मुख्य सचिव ने कार्मिक विभाग से इस संबंध में पत्रावली तलब की है ताकि आगे की कार्यवाही की जा सके। माना जा रहा है कि नई सरकार में यह कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी।