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उत्तराखंड के नए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और कैबिनेट मंत्रियों ने ली शपथ

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बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड के नये मुख्यमंत्री बनने पर शनिवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में 3 बजे शपथ ग्रहण करेंगे।शुक्रवार को देहरादून में पार्टी विधायक दल की बैठक में रावत के नाम पर सर्वसहमति से मुहर लगा दी गई।शुक्रवार को हुई बैठक में दिल्ली से आये पार्टी पर्यवेक्षक भी मौजूद रहे। बीजेपी के चुनाव जीतने के साथ ही प्रदेश सीएम के नामों की अटकले लगना शुरु हो गई थी। इस रेस में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आये सतपाल माहराज, बीजेपी के प्रकाश पंत और त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम आगे था। इन सबके बीच त्रिवेंद्र रावत का नाम साफ छवि वाला और केंद्र में अच्छी पकड़ वाला रहा। त्रिवेंद्र सिंह रावत के पक्ष में उनकी साफ छवि के साथ साथ बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से नज़दीकी भी काम आई।

शनिवार को त्रिवेंद्र सिंह रावत के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी मौजूद रहेंगे।आपको बता दे कि त्रिवेंद्र सिंह रावत ओएनजीसी के गोस्ट हाउस में रह रहें हैं।शनिवार को सुबह 11 बजे  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत शहीद स्थल पर शहीदों को नमन करने और फूल अर्पण करने  पहुंचे।दिन के 3 बजे पीएम मोदी देहरादून के परेड ग्राउंड में पहुंचे।उत्तराखंड के राज्यपाल के.के पाल ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और अन्य 9 मंत्रीयों को शपथ दिलाई।

कैबिनेट मंत्रियों के नाम इस प्रकार हैः

  • सतपाल महाराज
  • प्रकाश पंत
  • हरक सिंह रावत
  • मदन कौशिक
  • यशपाल आर्य
  • अरविंद पांडे
  • सुबोध उनियाल

मंत्रीमंडल में दो राज्यों मंत्रियों को भी सपथ दिलाई गई।

  • रेखा आर्या
  • धन सिंह रावत

कैबिनेट में आने वाले 9 मंत्रियों के बाद अभी भी 2 नामों आने की गुंजाइश है। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह, उमा भारती, जे.पी नड्डा, अजय टम्टा, रामलाल,एम.एल खट्टर(हरियाणा सीएम), कैलाश विजयवर्गीय, विजय बहुगुणा, भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक, भुवन चंद्र खंडूड़ी के साथ ही राज्य के पूर्व सीएम हरीश रावत भी रहे मौजूद।

उत्तराखंड में बना कांग्रेस युक्त मंत्रीमंडल

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शनिवार को उत्तराखंड के नौवे सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शपथ ले ली। ऱाज्यपाल के.के पाल ने पीएम मोदी और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में मुख्यमंत्री के साथ साथ मंत्रीमंडल के सदस्यों को शपथ दिलाई। चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देस को कांग्रेस मुक्त करने के अपे वादे की तरफ तो एक और कदम बढ़ा लिया लेकिन मंत्रीमंडल को अगर देखें तो ये कांग्रेस युक्त कहा जा सकता है। शनिवार को जिन मंत्रियों ने शपथ ली उनमें

  • नरेंद्रनगर से सुबोध उनियाल
  • कोटद्वार से हरक सिंह रावत
  • नैनीताल से यशपाल आर्या
  • चौबट्टाखाल से सतपाल माहराज रहे

इसके अलावा लगातार दलबदलती और निर्दलीय रही रेका आर्या ने बी मंत्रीपद की शपथ ली। इसको देखकर ये साफ है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत के आधे मंत्री पुराने कांग्रेसी नेता हैं। 2017 चुनाव शुरु से कांग्रेसी बागियों को लेकर उठा पटक से भरा हुआ था। कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल सभी बागियों को टिकटमिलने से जहां पार्टी नेताओं में नाराजगी थी वहीं चुनाव में इस चाल के उलटा पड़ने का डर। हांलाकि चुनावी नतीजों ने इन सब बातों को दरकिनार कर दिया और ये नेता अपनी अपनी सीटों पर जीत का परचम लहरा कर आये। पार्इटी को मिली इपार सफलता के बाद इस बात की सूगबुगाहटें भी तेज़ हो गई थी कि क्या अब पार्टी में इन बागियों की कोई महत्वपूर्ण भूमिका रह गई है? लेकिन मंत्रीमंडल की तस्वीर ने ये साफ कर दिया है कि न केवल पार्टी में बल्कि प्रधानमनंत्री मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के लिये इन नेताओं का रोल अहम है। इस कदम से ये साफ है कि ये नेता अमित शाह की बीजेपी को एक नई बीजेपी बनाने के रोडमैप में मील ता पत्थर हैं। और शायद अब ये राज्य में बीजेपी के पुराने और उम्र दराज़ नेताओं के लिये रिटायर्मेंट का संकेत है।

त्रिवेंद्र रावत के मुख्यमंत्री बनने से गढ़वाल विश्वविद्यालय में है कुछ खास उत्साह

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दायें से पहले स्थान पर है सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गढ़वाल विश्वविद्धालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।पत्रकारिता विभाग गढ़वाल विश्वविद्यालय से त्रिवेंद्र रावत ने 1981-83 तक प्रो.आशा राम डंगवाल जी के मार्गदर्शन में पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया। सीएम बनने से यह विश्वविद्यालय के टीचरों को उम्मीद है कि रावत न सिर्फ पूरे प्रदेश को विकास के पथ पर ले जायेंगे बल्कि पत्रकारिता के छात्रों की विभिन्न समस्याओं का समाधन भी करेंगे। आज गविवि अपने पूर्व छात्र पर गर्व महसूस कर रहा है।

गढ़वाल विश्वविद्धालय के पत्रकारिता एंव जनसंचार केंद्र के निदेशक प्रो.ए.आर डंगवाल सहित विभाग के डा.सुधांशु जायसवाल, डा. विक्रम बर्तवाल, डा. दिनेश भट्ट, डा. वंदना नौटियाल, डा. मनोज सुंद्रियाल ने भी त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री बनने पर प्रसन्नता ज़ाहिर की है। विभाग निदेशक प्रोफेसर डंगवाल ने कहा कि “त्रिवेंद्र सिंह रावत गढ़वाल विश्वविद्धालय में पत्रकारिता विषय के छात्र रहे हैं।उन्होंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। अपने छात्र जीवन से ही रावत को एक शांत स्वाभाव के छात्र के रूप में याद किया जाता है।”  प्रो. डंगवाल ने कहा कि उम्मीद है कि मुख्यमंत्री पत्रकारिता को लेकर सकारातमक बदलाव करेंगे।

गौरतलब है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत गढ़वाल विश्वविद्धालय में पत्रकारिता के छात्र रहे हैं और शनिवार को उत्तराखंड के सीएम पद की शपथ लेगें। आपको बता दे कि उत्तराखंड के 60-70 प्रतिशत मीडिया में काम करने वाले युवाओं ने गढ़वाल विवि से मीडिया की पढ़ाई की और उस लिहाज़ से त्रिवेंद्र सिंह रावत जी मेरे साथ बहुत से लोगों के सीनियर हुए।

मलाईदार कुर्सियों पर काबिज हैं 118 करोड़ के घोटाले के सूत्रधार

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नेशनल हाइवे भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में हुए 118 करोड़ के घोटाले की जांच देर रात बंद कमरे में चलती रही। सवाल यह उठ रहा है कि एनएच के चौड़ीकरण व मुआवजे के वितरण को लेकर समय समय पर उच्चाधिकारियों द्वारा समीक्षा बैठकें की जाती रहीं, लेकिन चार सालों तक यह खेल पकड़ में क्यों नहीं आया? कहीं न कहीं इन अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के दायरे में आ गई है। एक अहम सवाल यह भी है कि इस घोटाले की शुरूवात कृषि भूमि को अकृषक कराकर हुई, लेकिन कृषि भूमि को 143 के जरिए अकृषक घोषित करने वाले अफसरों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और वह अभी भी मलाईदार कुर्सियों पर काबिज हैं।

नेशनल हाइवे 74 के भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले की जांच कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन ने शुरू की है। गहनता से एक एक पत्रावली का अवलोकन किया जा रहा है। जांच के दायरे में बाजपुर व गदरपुर की 120 ऐसी पत्रावली हैं जिनकी 143 की गई है। पूरा खेल नेशनल हाइवे की जद में आ रही कृषि योग्य जमीनों को अकृषि में करा कर किया गया है, क्योंकि कृषि योग्य भूमि के मुआवजे की तुलना में अकृषि की भूमि का मुआवजा दस गुना अधिक होता है। कमिश्नर पांडियन ने अपनी शुरूवाती जांच में 118 करोड़ के घोटाले की बात कही थी। इस प्रकरण में सवाल यह उठ रहा है कि जब 2013 से ही इस खेल की शुरूवात हो गई थी तो समय समय पर उच्चाधिकारियों की द्वारा की गई समीक्षा बैठकों में यह घोटाला पकड़ में क्यों नहीं आया? यदि समय रहते अफसरों ने खेल को पकड़ लिया होता तो शायद इतना बड़ा घोटाला नहीं हो पाता। कहीं न कहीं इन समीक्षा बैठकों पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह सभी जानते हैं कि जमीनों की बैक डेट में 143 की गई, क्योंकि 143 का परवाना उसी वक्त अमल दरामद नहीं हुआ। खसरा खतौनी में मौके पर खेती दर्शायी जाती रही, जबकि कागजों में भूमि को अकृषि घोषित किया जा चुका था। जमीनों की143 करने में पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार, एसडीएम की भूमिका रहती है। अब यह बात उजागर हो चुकी है कि कौन कौन अफसर इसके दायरे में आ रहे हैं, फिर भी इन अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। आज की तारीख में भी यह अफसर मलाईदार कुर्सियों पर काबिज हैं।

दुर्घटना के बाद मौके पर मची चीख पुकार

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सितारगंज थाना क्षेत्र के विस्टी चौराहे पर डस्ट से भरा डंपर बेकाबू होकर मार्शल जीप पर पलट गया जिससे मार्शल जीप में सवार चार यात्रियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। नौ यात्रियों को मामूली चोट आई हैं। दुर्घटना का शिकार हुए 16 लोग सिडकुल की रॉकेट फैक्ट्री में काम करने वाले हैं। चार लोगों की मौत की खबर से उनके परिवारों में कोहराम मच गया है। पुलिस लाशों को पोस्टमार्टम के लिए ले आई है। दुर्घटना के बाद डंपर छोड़कर चालक फरार हो गया है।

सिडकुल में रात की ड्यूटी कर लोग घर लौट रहे थे। सिडकुल से उन्होंने सवेरे मार्शल जीप (यूए04डी 6169) पकड़ी थी। सुबह करीब छह बजे मार्शल जीप सितारगंज स्थित विस्टी चौराहे पर पहुंची तो सामने से आ रहा डस्ट से भरा ओवरलोड डंपर एचआर65/5036 बेकाबू होकर मार्शल जीप पर पलट गया। जीप में सवार लोगों में चीख पुकार मच गई। सवेरे घूमने निकले लोगों ने दुर्घटना की जानकारी पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह जीप में फंसे लोगों को निकलवाया और सरकारी एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सक ने शेर सिंह (19) पुत्र महेंद्र सिंह, सीताराम (55) पुत्र पूरनलाल, हरिशंकर (45) पुत्र पोथीराम पप्पू उर्फ  हरचरन सिंह (46) को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में ज्यादातर लोग ग्राम भूड़ा कैमोर अमरिया पीलीभीत निवासी बताए गए हैं। जबकि गोविंद राम, मनोज कुमार, करन सिंह, कृष्ण पाल सिंह, महेश चंद, सूरजपाल, बलवंत सिंह, अमित, ग्राम हररायपुर निवासी शानू, ग्राम निरसा निवासी जुम्मा सहित 16 लोग घायल हुए हैं। यह सभी रॉकेट फैक्ट्री में काम करने वाले हैं। घायलों में शानू, जुम्मा, अमित की हालत गंभीर बनी हुई है। जबकि बाकि लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी है।

दुर्घटना में मृतकों और घायलों की शिनाख्त कर पुलिस ने सभी के परिजनों को सूचना दे दी है। ज्यादातर घायल इलाज के बाद छुट्टी लेकर घर चले गए जबकि अस्पताल में भर्ती लोगों के परिजन बेहतर इलाज की व्यवस्था करने के लिए पहुंच गए हैं। दुर्घटना में मरने वाले चारों लोगों के परिवार भी जानकारी मिलते ही सितारगंज पहुंच गए हैं। परिवार के सदस्यों की मौत की खबर से चारों के घरों में कोहराम मचा है। परिवार के सदस्य पोस्टमार्टम के इंतजार में है। ताकि लाश को साथ ले जा सकें।

बीजेपी के राजतिलक की तारीख 18 मार्च है उत्तराखंड के लिये खास

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शनिवार यानि 18 मार्च को “तारीख गवाह है” जुमला देहरादून में सच होता दिखेगा। उत्तराखंड के लिए यह तारीख इतिहास के पन्नों पर लिखी हुई है। साल भर पहले इसी दिन प्रदेश ने राजनितिक तख्ता पलट देखा था। इसके चलते कांग्रेस के विधायकों ने विधान सभा में ही पार्इटी और मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ बगावत कर सरकार को अल्पमत में ला दिया था। उस दिन से शुरु हुई सत्ता की लड़ाई ने कई राज्य ने राष्ट्रपति शासन, कानूनी लड़ाई और दलबदल की तसिवारों से प्रदेश को रूबरू कराया।

एक बार फिर यह तारीख सामने हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि इस साल इस तारीख को होने वाले राजतिलक का लोगों पर क्या असर होगा।आपको बता दें कि पिछले साल 18 मार्च को बीजेपी पर प्रदेश में राजनितिक अस्थिरता फैलाने का आरोप लगा था।ठीक 1 साल बाद बीजेपी ने प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने जा रही है और राजतिलक करने के लिए भी इसी तारीख को चुना है।

18 मार्च 2016 को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विनियोग बिल पारित होने की प्रक्रिया के दौरान उत्तराखंड में नया इतिहास रचा गया था। सत्ताधारी पार्टी के 9 विधायकों ने पूर्व सीएम विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत की अगुवाई में सदन के अंदर ही बगावत कर दी थी। उस बगावत का नाम भले ही सत्ता में बदलकर जनहित में बगावत कर दिया गया हो लेकिन लड़ाई वो स्वार्थ के लिए ही थी।बीजेपी ने इस बगावत के चलते प्रदेश में सत्ता हासिल करने के लिए जी जान लगा दी थी। हरीश रावत सरकार बर्खास्त हुई, कानूनी दांव पेंच के बाद सरकार बहाल हुई।

गौरतलब है कि इस वाक्ये के बाद बीजेपी पर सत्ता के लालची होने का आरोप लगा तो,सीएम रावत पर विधायक खरीद फरोख्त का इल्जाम लगा जिसका दाग कार्यवाहक सीएम आज भी धो रहे हैं और कहीं ना कहीं आज कांग्रेस की कड़ी शिकस्त का और रावत की हार का कारण भी यही दाग है।

बात तो यह है कि इन सबके बाद बीजेपी की शानदार जीत से पार्टी और हाईकमान गदगद हैं और पिछला सबकुछ भूल चुके हैं।सत्ता का लालच और इन सारे बवालों की वजह से एक साल पहले तक बीजेपी खाली हाथ थी लेकिन इस बार मतदाताओं ने सब कुछ भुलाकर बीजेपी को अपनी भाग्य विधाता बना दिया है।खैर बीजेपी ने क्या किया,कांग्रेस ने क्या किया से ऊपर उठकर अब बीजेपी अपनी सरकार उत्तराखंड में बनाने जा रही। बीजेपी को मिले बहुमत से इतना साफ हो गया है कि उत्तराखंड की जनता ने बीजेपी को राज्य के विकास के लिए चुना है।

18 मार्च सुनकर अभी तक सबके ज़हन में बुरी यादें थी लेकिन अगर एक बार फिर इस तारीख से आम जनता के बेहतरी के लिए कुछ ठोस कदम उठाएं जाऐंगे तो बुरी यादों के उपर अच्छी यादों के लिए कुछ जगह बनेगी और 18 तारीख हर किसी के लिए एक सकारात्मक तारीख की तरह याद रखा जाऐगा।

परेड ग्राउंड में कार्यक्रम के लिए डायवर्ट होंगे कुछ रुट

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18 मार्च को वीवीआईपी परेड ग्राउण्ड में कार्यक्रम के लिये देहरादून शहर की आन्तरिक यातायात व्यवस्था हेतु डायवर्ट एवं मार्ग व्यवस्था।18 मार्च को शहर क्षेत्र में सभी प्रकार के भारी वाहनों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबन्धित रहेगा।

  • वीवीआईपी के जीटीसी हैलीपैड पर पहुंचने से 10 मिनट पूर्व जीटीसी हैलीपैड की ओर जाने वाले समस्त वाहनों को रोक दिया जायेगा।
  • दिलाराम चैक से कालीदास रोड की ओर कोई वाहन नही जाने दिया जायेगा। सभी वाहनों को राजपुर रोड की ओर भेजा जायेगा।
  • कालीदास मार्ग में आने जाने वाले वाहनों को कालीदास तिराहे के अन्दर या सालावाला कट से अन्दर डायवर्ट किया जायेगा।
  • हाथीबडकला की ओर से आने वाले वाहनों को सर्वे गेट की ओर से राजपुर रोड की ओर डायवर्ट किया जायेगा
  • अनारवाला की ओर से आने वाले वाहनों को कैन्ट होते हुए बल्लूपुर चैक की ओर भेजा जायेगा।
  • राजपुर रोड से आने वाले समस्त यातायात को ग्रेट वैल्यू की ओर तथा ग्रेट वैल्यू से आने वाले वाहनों को वापस किया जायेगा।
  • मधुबन कट से दिलाराम चैक की ओर आने वाले वाहनों को डीएल रोड की ओर डायवर्ट किया जायेगा। कोई भी वाहन डीएल कट से राजपुर रोड पर नही आयेगा।
  • मिडो प्लाजा कट से कोई भी वाहन राजपुर रोड पर नही आयेगा।
  • बल्लूपुर से घण्टाघर की ओर आने वाले यातायात को बिन्दाल से वापस या घण्टाघर से दर्शनलाल चैक होते हुए प्रिन्स चैक/आराघर चैक की ओर भेजा जायेगा। घण्टाघर से कोई भी वाहन राजपुर रोड की ओर नही जायेगा।
  • घण्टाघर से यूकेलिप्टस चैक के बीच वाले यातायात को नेशविला रोड अथवा यूटर्न कर वापस किया जायेगा।
  • इस दौरान आराघर से कोई भी वाहन ई0सी रोड की ओर नही जायेगा, आराघर से वाहनों को सीएमआई की ओर डायवर्ट किया जायेगा।
  • ई0सी0 रोड को जीरो जोन कर दिया जायेगा।
  • रायपुर से आने वाले समस्त वाहनों को सहस्त्रधारा क्रासिंग से आई0टी पार्क की ओर भेजा जायेगा। आई0टी0पार्क से आने वाले वाहनों को रायपुर रोड, लाडपुर की ओर भेजा जायेगा।
  • कर्जन रोड से कोई भी वाहन सर्वे चैक की ओर नही जायेगा।
  • रूडकी, सहारनपुर रोड, आई0एस0बी0टी से मसूरी की ओर जाने वाले वाहनों को कारगी चैक से हरिद्वार बाईपास रोड से रिस्पना से जोगीवाला से पुलिया न0 6 से रायपुर होते हुए भेजा जायेगा। या बल्लूपुर जोहडी गांव, कुठाल गेट से मसूरी भेजा जायेगा। इसी प्रकार से मसूरी से आने वाले वाहनों को भी इसी रूट से भेजा जायेगा।
  • दर्शनलाल चैक से कोई भी वाहन लैन्सडाउन चैक की ओर नही जायेगा।
  • बुद्धा चैक से कोई भी वाहन लैन्सडाउन चैक तथा क्रास रोड की ओर नही जायेगा।
  • डीएवी कट/लार्ड वेंकटेश कट से कोई भी वाहन ई0सी रोड पर नही आयेगा। इस दौरान यदि ई0सी रोड पर यदि कोई वाहन रहते हैं तो उन्हे नजदीकी कटो/मार्गो के द्वारा हटा दिया जायेगा।
  • हरिद्वार से मसूरी जाने वाले वाहनों को जोगीवाला, लाडपुर, सहस्त्रधारा क्रासिंग आई0टी0पार्क, कुठाल गेट होते हुए मसूरी भेजा जायेगा। मसूरी से वापस आने वाले वाहनों को भी इसी रूट से भेजा जायेगा।

हाईकोर्ट के आदेशों की उड रही धज्जियां बिना अनुमति के चल रही पालीथीन की फैक्ट्रियां

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पालीथीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए भले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा कडे आदेश दिये गये हों और जिला प्रसाशन सहित सरकार को भी कडे निर्देश दिये गये हों बावजूद इसके जनपद उधमसिंह नगर में कई दर्जन पालीथीन की फैक्ट्रीयां प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर चल रही है जिनपर कार्यवाही करना तो दूर प्रशासन द्वारा अब तक इन फैक्ट्रीयों को बंद करने की जहमत तक नहीं उठाई गयी है।जिसके चलते बाजारों में धडल्ले से पालीथीन का उपयोग हो रहा है।यही नहीं काशीपुर क्षेत्र में एक दर्जन से भी अधिक एसी पालेथिन की फैक्ट्रीयां है जिनका पता तक प्रशासन को नहीं है गुपचुप तरीके से चल रही इन फैक्ट्रीयों द्वारा जहां मानकों की धज्जियां उडाई जा रही है वहीं लाखों रुपये के राजस्व को भी चूना लगाया जा रहा है।जब इस बारे में जिलाधिकारी चन्द्रेश यादव  से पूछा गया तो वही रटा रटाया जवाब कार्यवाही का आश्वासन देकर पल्ला झाड लिया।

राज्य के नौंवे मुख्यमंत्री होंगे त्रिवेंद्र सिंह रावत

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बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड के नये मुख्यमंत्री होंगे। शुक्रवार को देहरादून में पार्टी विधायक दल की बैठक में रावत के नाम पर सर्वसहमति से मुहर लगा दी गई। इस बैठक में दिल्ली से आये पार्टी पर्यवेक्षक भी मौजूद रहे। बीजेपी के चुनाव जीतने के साथ ही प्रदेश सीएम के नामों की अटकले लगना शुरु हो गई थी। इस रेस में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आये सतपाल माहराज, बीजेपी के प्रकाश पंत और त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम आगे था। इन सबके बीच त्रिवेंद्र रावत का नाम साफ छवि वाला और केंद्र में अच्छी पकड़ वाला रहा। त्रिवेंद्र सिंह रावत के पक्ष में उनकी साफ छवि के साथ साथ बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से नज़दीकी भी काम आई।

डोईवाला सीट से जीत हासिल कर विधायक बने त्रिवेंद्र रावत उत्तराखंड के नौवें सीएम बनेंगे। त्रिवेंद्र सिंह रावत साफ़ सुधरी छवि के नेता होने के साथ ही आरएसएस से भी जुड़े रहे हैं। सूत्रों के अनुसार दो घंटे चली बैठक में उत्तराखंड पर चर्चा के दौरान त्रिवेंद्र रावत और सतपाल महाराज के नाम की चर्चा हुई थी, जिसमें त्रिवेंद्र सिंह रावत की पैरोकारी अधिक मजबूत रही। वहीँ भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने लगभग यह तय कर दिया था कि सीएम चुने गये विधायकों में से ही होगा। पैराशूट से सीएम उतारने की संभावना न के बराबर थी ।

साफ छवि और लंबा राजनीतिक सफर आया त्रिवेंद्र के काम

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डोईवाला सीट से विधायक बने त्रिवेन्द्र सिंह रावत हमेशा पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के करीब रहे हैं। संगठन ही नहीं केन्द्र सरकार के मुखिया नरेन्द्र मोदी भी त्रिवेन्द्र सिंह रावत की सादगी और उनकी क्षमता के कायल हैं। यही कारण है कि उन्हें यूपी के चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस का प्रभारी नियुक्त किया गया था।इसके अलावा त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड के कृषि मंत्री के रुप में भी काम किया है।उत्तराखंड में चुनाव खत्म होने के बाद पार्टी ने कई नेताओं को उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार की कमान सौंपी थी। जिसमें विजय बहुगुणा, हरक सिंह रावत ,तीर्थ सिंह रावत, रमेश पोखरियाल निशंक और बीसी खंडूरी को यूपी में प्रचार के लिए बुलाया गया था। सबसे बड़ी जिम्मेदारी मिली त्रिवेंद्र सिंह रावत को । उन्हें पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में प्रचार कर बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने का काम सौंपा गया। रावत इसे पहले छत्तीसगढ़ के चुनाव प्रभारी भी रह चुके हैं। इसके साथ ही कई राज्य के चुनावों में वो काम कर चुके हैं। रावत को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देते समय ही इस बात का आभास हो गया था कि यदि उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनती है तो त्रिवेन्द्र सिंह रावत सीएम बनाये जा सकते हैं।

गौरतलब है कि साल 2012 में सिंह चुनाव हार गए थे, फिर उपचुनाव भी हार गए थे। हालांकि, सिंह को पार्टी संगठन में हमेशा महत्व दिया गया और उन्हें झारखंड इकाई का बीजेपी इंचार्ज बनाया गया।

  • 1979 में राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ में शामिल हुए।
  • 1981 में संघ के प्रचारक के रुप में प्रतिज्ञा ली।1981 में आरएसएस के प्रचारक की तरह लैंड्सडाउन तहसील में काम किया।
  • 1983-90 तक राज्य में प्रचारक के रुप में काम किया।
  • 1997-2002 तक पार्टी में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में संगठन सचिव के तौर पर काम किया।
  • 2002 में डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के विधायक होने के साथ साथ एमडीडीए के कार्यप्रणाली में बदलाव के लिये कापी मेहनत की।
  • 2007 में एक बार फिर डोईवाला क्षेत्र से विधायक रहे,जिसमें उन्होंने कृषि,कृषि शिक्षा,एनिमल हस्बेन्ड्री,डेरी,डिजास्टर मैनेजमेंट,हार्टिकल्चर,लैग्वेज आदि क्षेत्रों में काम किया।
  • 2013 में रावत को बीजेपी का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। इसके साथ ही पार्टी ने उन्हें अमित शाह के साथ उत्तर प्रदेश का सह प्रभारी भी बनाया।
  • 2014 लोक सभा चुनावों में नये और युवा वोटरों को पार्टी से जोड़ने के लिये बनाई गई समिति का भी रावत हिस्सा रहे।

प्रदेश के चर्चित ढैंचा बीज घोटाले की जांच के लिए गठित त्रिपाठी आयोग ने इस मामले में त्रिवेन्द्र सिंह से सीधी पूछताछ की थी। त्रिवेन्द्र सिंह रावत के विरोधी इसी को आधार बनाकर सीएम पद की रेस से उन्हें बाहर निकालना चाहते थे। इसके अतिरिक्त लगातार दो बार विधायक का चुनाव हार जाना भी उनके खिलाफ जा रहा था। परंतु केन्द्रीय आला कमान ने इन तर्कों को खारिज कर दिया।