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मुख्यमंत्री आवास के तिलस्म को नहीं तोड़ पाये हरीश रावत

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कहते हैं कि उगते सूरज को सब सलाम करते हैं। ये बात राजनीति में सौ फीसदी फिट बैठती है। राज्य में चुनावों में मिली करारी हार के बाद कुछ दिन पहले तक लोगों और समर्थकों की बीड़ से गुलज़ार रहने वाले मुख्यमंत्री हरीश रावत का सरकारी आवास बीजपुर गेस्ट हाउस आज लोगों को तरस रहा है। चुनावी हार के बाद15 मार्च को रावत ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया था। नी सरकार के गठन तक राज्सोयपाल ने उनसे कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा। शुक्रवार को हरीश रावत का बतौर मुख्यमंत्री आधिकारिक तौर पर आकिरी दिन होगा। शनिवार को प्रचंड बहुमत से राज्य में जीती बीजेपी की नई सरकार के मुख्यमंत्री शपथ लेंगे। बीजापुर गेस्ट हाउस में रह रहे हरीश रावत का यहां से जाने के बारे में अभी किसी को नहीं पता है। उनके पीआरओ से लेकर सुरक्षा अधिकारी तक को इस बारे में कुछ नही पता ।

गौरतलब है कि जब विजय बहुगुणा को हटाकर हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया था तब रावत ने आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास में रहने से मना कर दिया था। इसके पीछे रावत ने तर्क दिया था कि राज्य में आपदा से विस्थापित हुए सबी लोग अपने घरों में नहीं जाते तब तक वो भी अपने आधिकारिक घर में नहीं जायेंगे। हांलाकि राजनीतिक गलियारों में रावत के इस कदम को ाधिकारिक मुख्यमंत्री आवास से जुड़े अंधविश्वास से भी जोड़ कर देखा गया। कहा जाता है कि जो भी मुख्यमंत्री देहरादून कैंट में स्थित मुख्यमंत्री आवास में रहने गया है उसने अपना कार्यकाल पूरा नही किया है। चाहे वो भुवन चंद्र खंडूरी हो, रमेश पोखरियाल निशंक या विजय बहुगुणा। और इसी के चलते हरीश रावत ने भी उस घर में न रहने का फैसला किया। लेकिन ऐसा लगता है कि रावत का पीछा मुख्यमंत्री आवास के तिलस्म ने नहीं छोड़ा। न केवल चुनावों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा बल्कि खुद हरीस रावत को अपनी दोनों सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा। इतना ही नहीं ये हार हरीश रावत के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी हार और चुनौती के रूप में निकल कर आई है।

हरीश रावत ने गल्जवाड़ी में किराए का एक मकान तलाश लिया है। बीजापुर गेस्ट हाउस से उन्होंने अपना सामान शिफ्ट कराना भी शुरू दिया है। गौरतलब है कि सरकार जाने के बाद सभी मंत्रियों और सीएम को 15 दिन में आवास खाली करने होते हैं। 11 मार्च को नतीजों के बाद सरकार को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। अब 26 मार्च तक मंत्रियों व सीएम को आवास खाली करने हैं। रावत का आशियाना सीएम रहते हुए बीजापुर गेस्ट हाउस ही रहा। उन्होंने गेस्ट हाउस खाली करना शुरू कर दिया है। राजधानी में उन्होंने अपना नया ठिकाना गल्जवाड़ी में तलाशा है। यहां किराए के मकान को लेकर बात पक्की हो चुकी है। जल्द शिफ्टिंग शुरू होगी। फिलहाल उन्होंने बीजापुर गेस्ट हाउस से कुछ सामान अपने किसी नजदीकी के आवास पर शिफ्ट कराया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के लिए आवास की व्यवस्था नहीं है।

राजनीति अनिश्चिताओं का खेल है और ऐसे में हरीश रावत को पूरी तरह खारिज कर देना ठीक नही होगा। लेकिन फिलहाल रावत और कांग्रेस के लिये उत्तराखंड में बहुत कुछ करने को रह नही गया है। अब देखना ये होगा कि रावत देहरादून छोड़ कर अपने घर हल्द्वानी जाएंगे या फिर दिल्ली में अपने राजनितिक सफर को आगे बढ़ाएंगे।

योगी की बहन ने कहा-पंख होते तो उड़ कर भाई को मुख्यमंत्री बनते देखती

ऋषिकेश से मात्र 60 किमी दूर यमकेश्वर के एक छोटे से गाव पंचूर में ख़ुशी का माहौल है क्योंकि यहाँ के लाल ने आज यूपी के मुख्यमंत्री की शपथ लेली और अब उत्तरप्रदेश योगी आदित्य नाथ के रंग में रंग नजर आएगा।पंचूर गांव की पगडंडियो से निकल कर उत्तरप्रदेश के सीएम की कुर्सी तक पहुचने का जलवा इस छोटे से गाव के ग्रामीण लड़के ने कर दिखाया है। ये दूसरा मौका है जब उत्तराखंड के गढ़वाल छेत्र ने दूसरी बार यूपी के सीएम को अपने आँगन से दिया है। योगी आदित्य नाथ बहनों के सबसे प्रिय भाई है और यही कारण है कि भाई की शपथ को अपने मायके में सेलिब्रेट करने के लिए उनकी बहन शाशि अपने ससुराल से मायके पहुची हैं।हमसे बात करते हुए वो बोली इतनी ख़ुशी की बात है कि हम शब्दो में बया नहीं कर सकते।कल जब मैने भाई के मुख्यमंत्री बनने की खबर सुनी तो मुझ से रहा नहीं गया मैं गाडी पकड़ कर सीधे अपने घर पहुंची,ऐसा लग रखा है मेरे पंख होते तो में सीधे उड़ कर भाई के पास पहुंच जाती और उसे सामने मुख्यमंत्री बनते देखती।हम भाई बहनो में आपस में बड़ा प्यार है गौरतलब है कि अजय मोहन बिष्ट ग्राम पंचूर के निवासी आनंद सिंह बिष्ट और सावित्री देवी के चार पुत्रों में से दूसरे नबर के है और बहन से उनको काफी स्नेह है। पुरे यमकेश्वर क्षेत्र में योगी की इस कामयाबी का जश्न मनाया जा रहा है। लोगो उम्मीद है मोदी सरकार पहाड़ो पर विकास की गंगा बहायेगी।

राजभवन में हुए कार्यक्रम में मसूरी के मशहूर लेखक स्टीफन अल्टर ने की शिरकत

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मसूरी में पैदा हुए लेखक, स्टीफन अल्टर को राजभवन देहरादून के एक गोष्ठी में जहां अलग अलग श्रेणी के लेखक, पत्रकार और विशेषज्ञ मौजूद थे वहां विशेष मेहमान की तरह बुलाया गया था। स्टीफन का स्वागत करते हुए प्रदेश के राज्यपाल के.के पाल ने कहा कि,स्टीफन अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर लेखक हैं जिनका जन्म मसूरी में हुआ है, प्रारंभिक पढ़ाई वुडस्टाक इंटरनेशनल स्कूल मसूरी में हुई है और सही मायनों में स्टीफन एक उत्तराखंडी हैं। इसके बाद स्टीव ने अपने सफर के बारे में लोगों को बताया जिसमें एमआईटी में क्रिएटिव राइटिंग विषय पढाने से लेकर और भी चीजें थी।

 स्टीव ने अपने जीवन की कथा में जिम कार्बेट के जिक्र के साथ अपनी भारत से विदाई के बारे में भी बताया।उन्होंने बताया कि एक भारतीय जो अपने देश से खासकर गढ़वाल और कुमाईं से बहुत प्यार करता है उसके लिए दूसरे देश केन्या में रहना कितना मुश्किल रहा होगा।इसके साथ ही स्टीफन ने अपने आने वाली किताब जिसका विषय ग्रेट हिमालया के बारे में भी जिक्र किया जिसके बारे में वो आजकल हर तरह की रिसर्च कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि इस किताब के लिए उन्होंने सांस्कृतिक, सांइटिफिकली, वातावरण, और पहाड़ी क्षेत्रों से लोगों के पलायन के बारे में खोज कर रहे हैं।

मशहूर लेखक स्टीफन ने बहुत से ऐसे किस्सों के बारे में बात की जो हिमालय से शुरु होकर दून घाटी में आकर खत्म हो गई हो।चाहे वो पुराने समय के पंडित हो जिन्होंने पहाड़ की चोटीयों पर जाकर खोज की हो, या जर्मन हो जिन्होंने फारेस्ट सुविधाओं की शुरुआत की हो और या फिर वाडिया इंस्टीट्यूट के वाडिया की अपनी कहानी क्यों ना हो जिन्होंने श्रीनगर में पढ़ाया और खुद जंगलों में विचरण करते थे।(जिनकी मकड़ी जैसी चाल को अभी भी वाडिया संग्रहालय में देखा जा सकता है)

यह सेशन लगभग एक घंटे तक चला जिसको दर्शकों ने ध्यानमग्न होकर सुना। राज्यपाल के.के पाल ने राजभवन को संस्कृति और साहित्य का एक शानदार स्थान बना दिया है जिसकी तारीफ जितनी करो कम है।

जिसको मरा समझ किया अंतिम संस्कार वो अचानक वापस लौट आई।

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 उत्तरप्रदेश और उत्तराखण्ड की सीमा से सटे गांव भूबरा से कुछ दिन पूर्व गायब जिस बेटी को मरा समझ परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया वो अंतिम संकार के बाद जीजा के साथ लौट आई। बेटी के जिंदा लौटने की खुशी तो परिजनों को थी मगर सवाल ये खड़ा हो गया कि जिसका अंतिम संस्कार किया वह शव किसका था।

प्रदेश की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के ग्राम भूबरा निवासी भूप सिंह की 20 वर्षीय पुत्री राजरानी कुछ दिन पहले रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गई थी। बुधवार को भूबरा ग्राम के पास ही किसी युवती का अधजला शव बरामद हुआ था। भूप सिंह ने उसकी पहचान अपनी पुत्री के रूप में की और पुलिस ने शव उन्हें सौंप दिया। परिजनों ने उसका विधिवत अंतिम संस्कार भी कर दिया।

वहीं, गुरुवार देर शाम अचानक राजरानी अपने जीजा के साथ घर पहुंच गई। उसे देखकर परिजन जहां खुश तो हुए साथ ही चकित भी हैबेटी के जिंदा लौटने की कबर पुलिस को दी गयी जिसके बाद पुलिस भी हैरत में पड़ गई। दिल्ली में निजी व्यवसाय करने वाले युवती के जीजा राकेश मौर्य ने बताया कि वह दिल्ली से लौट रहा था तो मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर उसने राजरानी को अकेले घूमते देखा और उसे लेकर ससुराल आ गया। जबकि स्वार रामपुर कोतवाल मनोज कुमार ने भूप सिंह को कोतवाली बुलाकर पूछताछ की तो भूप सिंह के परिवार में जहां पुत्री के सही सलामत होने से खुशी है, वहीं, बीते दिनों मिला युवती का अधजला शव पुलिस के लिए पहेली बन गया है। पुलिस अब आसपास के थानों से संपर्क कर जानकारी जुटा रही है। वहीं अब पुलिस के लिए चुनौती है कि अधजला शव किसका है?

उधमसिंहनगर में जमकर चल रहा है अवैध खनन का कारोबार

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अवैध खनन का गोरखधन्धा प्रशानिक अधिकारियों और पुलिस के संरक्षण में जमकर फलफूल रहा है। शासन द्वारा रोक के बावजूद उधमसिंहनगर जनपद में अवैध खनन का कारोबार जमकर चल रहा है। दिन रात खनन के कारोबारी नदी का सीना चीर कर अवैध खनन के कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।

शाम ढलते ही नदी का सीना चिरते हुए जेसीबी और पोपलेन अवैध रुप से खनन के लिए नदियों में उतर जाती है। इन खनन माफियाओं को ना तो पुलिस का डर है और ना ही प्रशासन का।अवैध खनन का गढ बन चुका बाजपुर काशीपुर सितारगंज और किच्छा में खनन कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद है कि दिन दहाडे ही अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं। यही नहीं कुछ इलाकों में तो शाम ढलते ही जेसीबी और पोपलेन से नदियों का सीना चिरकर खनन किया जा रहा है।अवैध खनन से भरे डम्पर और ट्रलियां नेशनल हाईवे से होकर ही उत्तर प्रदेश और अन्य जगहों के लिए जाती है, मगर अवैध खनन तो खनन ओवर लोर्ड वाहन होने के बावजूद इनपर कोई ठोस कार्यवाही नहीं होती है।

उत्तराखंड से निकल उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री तक का इस योगी का सफर

आज का दिन कई मायनो में ख़ास है क्योंकि उत्तराखंड के पौड़ी जिले से दोदो लाल मुख्यमंत्री की कमान समलने जा रहे है पौड़ी गढ़वाल के एक छोटे से गांव में 5 जून, 1972 को जन्मे योगी आदित्यनाथ अब देश के सबसे बड़े राज्य के उत्तरप्रदेश के मुखिया बनने जा रहे हैं।जिस पर बीजेपी आलाकमान और विधायक दल ने मोहर लगा दी है ,राजभवन पहुच कर योगी आदित्य नाथ ने अपना दावा भी पेश कर दिया है और कल दिन में उनको शपथ दिलाई जाएगी

योगी आदित्यनाथ के सीएम पद की शपथ लेते ही उत्तराखंड के पौड़ी से मुख्यमंत्री बनने वालों की फेहरिस्त बढ़कर पांच हो जाएगी। अबतक रमेश पोखरियाल निशंक, बीसी खंडूड़ी, विजय बहुगुणा और त्रिवेंद्र सिंह रावत पौड़ी गढ़वाल से संबंध रखते हैं।पिछले कुछ समय से देखें तो देश में मुख्यधारा की राजनीति हो या कोई बड़ा संवैधानिक पद, वहां पहाड़ियों का वर्चस्व कायम हो रहा है। साल 2016 दिसंबर में बिपिन रावत को भारतीय थलसेना का प्रमुख बनाया गया है। रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का चीफ अनिल धस्माना हों या राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ये सभी लोग उत्तराखंड से संबंध रखते हैं।
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योगी अदित्यनाथ का जीवन परिचय 

  • असली नाम: अजय सिंह बिष्ट।
  • पिता का नाम: नंदन सिंह बिष्ट।
  • भाई का नाम: महेंद्र बिष्ट (पत्रकार)।
  • गाव: पंचूर।
  • जिला: पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)।
  • जन्म तिथि: 05 जून, 1972 ।
  • शिक्षा : हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय से गणित में बेचलर्स डिग्री।
  • छात्र राजनीतिक जीवन: विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रखर कार्यकर्ता रहे।

योगी आदित्यनाथ के जीवन के महत्वपूर्ण जानकारी-

  • 22 साल की उम्र में परिवार त्यागकर योगी स्वरूप में आ गए।
  • 1993 से अपना केंद्र गोरखपुर बना लिया।
  • गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महंत बने।
  • आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी हैं।
  • 14 सितंबर, 1998 को उनके जीवन में नया अध्याय जुड़ गया।
  • अवैद्यनाथ ने 14 सितंबर को राजनीति से संन्यास लिया और योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
  • यहीं से योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक पारी शुरू हुई है।
  • 1998 में गोरखपुर से 12वीं लोकसभा का चुनाव जीतकर योगी आदित्यनाथ संसद पहुंचे तो वह सबसे कम उम्र के सांसद थे।
  • 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने।
  • 2014 में पांचवी बार योगी सांसद बने।
  • आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया और धर्म परिवर्तन के खिलाफ मुहिम छेड़ दी।
  • 2007 में गोरखपुर में दंगे हुए तो योगी आदित्यनाथ को मुख्य आरोपी बनाया गया, गिरफ्तारी हुई।
  • योगी के खिलाफ कई अपराधिक मुकदमे भी दर्ज हुए।

ऋषिकेश से नीलकंठ मार्ग पर लगभग 50 – 55  किमी दूर के यमकेश्वर के एक छोटे से गांव से आज उत्तर प्रदेश के कमान संभालने जा रहे योगी के गांव पंचूर में भी जश्न का माहौल है। पिता अजय सिंह बिष्ट इस अवसर पर अपने बेटे की इस सफलता पर काफी खुश है भाई महेन्द्र सिंह का कहना है कि ये पुरे यमकेश्वर छेत्र के लिए गर्व की बात है कि यहाँ की पहाड़ की पगडंडियो से निकल योगी आदित्य नाथ आज उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री होने जा रहे है जिस से हमारे छेत्र में एक नयी इबारत लिखी जाएगी

 

शौर्यचक्र प्राप्त चंदन सिंह भंडारी की 20वीं पुण्यतिथि मनाई गई

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द्वाराहाट अल्मोड़ा, शौर्यचक्र प्राप्त चंदन सिंह भंडारी की 20वीं पुण्यतिथि शहीद स्मारक पर मनाई गई। इस दौरान परिजनों, कुमाऊं रेजिमेंट अधिकारियों तथा क्षेत्रवासियों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

सेना के जवानों ने बैंड के माध्यम से देशभक्ति व पहाड़ी धुन बजाई। इस मौके पर सेना के कैप्टन बप्पा दितिया डे ने मौके पर युवाओं से सेना से जुड़ने का आह्वान किया। भंडरगांव के सैनिक चंदन सिंह भंडारी पुत्र हरक सिंह 19 मार्च 1997 को कुपवाडा सेक्टर में आपरेशन रक्षक के दौरान आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। इस मुठभेड़ में उन्होंने तीन आतंकियों को ढेर किया। उनकी वीरता पर राष्ट्रपति ने उन्हें शौर्यचक्र से सम्मानित किया।

बग्वालीपोखर के शहीद स्मारक पर शहीद चंदन को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सर्वप्रथम माता शांति देवी, बड़े भाई रमेश सिंह, कुंदन सिंह, देव सिंह, जसोद सिंह, प्रेम सिंह ने पुष्प अर्पित किए।

उसके बाद ब्रिगेडियर आतेश चाहर के प्रतिनिधि के तौर पर पहुंचे कैप्टन बप्पा दितिया डे ने पुष्पचक्र अर्पित किए। उन्होंने चंदन सिंह की शहादत को सच्ची देश सेवा बताया औऱ युवाओं से सेना के साथ जुड़ने का आह्वान किया। पूर्व सैनिक लीग अध्यक्ष कुंवर सिंह नेगी ने इस कार्यक्रम को और अधिक भव्य बनाने की बात कही।

इस मौके पर हवलदार भवान सिंह के नेतृत्व में सेना के जवानों ने बैंड के माध्यम से देशभक्ति व कुमाऊंनी धुने बजाई।

ड्रग्स के साथ पकड़े गए महिला और युवक

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पुलिस ने मंडी चौकी क्षेत्र से स्मैक की 250 पुड़िया के साथ 1 युवक और एक महिला को किया गिरफ्तार। दोनों बनभूलपुरा के इंदिरानगर के निवासी है जो पिछले लम्बे समय से स्मैक की तस्करी कर रहे थे। सीओ लोकजीत सिंह ने बताया की पकड़ी गयी स्मैक की कीमत 2 लाख रूपये है।

हल्द्वानी शहर मे हो रही अवैध स्मैक की तस्क्री पर पुलिस को एक बडी सफलता हासिल हुई है, मंडी चौकी क्षेत्र से पुलिस ने अवैध स्मैक का धंधा करने वाले एक युवक और एक महिला को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से पुलिस को 250 पुडिया स्मैक की बरामद हुई है, जिसकी कीमत 2 लाख रूपये के आसपास बतायी जा रही है। वही मामले का खुलासा करते हुए सीओ लोकजीत सिह ने बताया की शहर मे अवैध रूप से नशे के कारोबार करने वालो के खिलाफ पुलिस के द्वारा एक टीम बनाई गई है, जो की इस तरह की गतिविधियो पर अपनी नजर रखती है। जिसको आज बडी कामयाबी हाथ लगी है उन्होने बताया गया पकडे गये अभियुक्त इन्द्रानगर के रहने वाले है जिनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है और आगे की कार्यवाही की जा रही है।

लंदन के रायल कालेज आफ आर्ट में हुआ गोपेश्वर के दीपक का चयन

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उत्तराखंड की परंपरा और यहां कि प्रतिभा किसी से छिपी नहीं हैं।इसी कड़ी में विकासखंड घाट जाखणी निवासी दीपक का सेलेक्शन दुनिया भर में मशहूर और रैंकिंग में शीर्ष पर यूनिवर्सिटी रायल कालेज आफ आर्ट एंड डिजाईन,लंदन में मास्टर आफ फाईन आर्ट में रिसर्च के लिए हुआ है।इतना ही नहीं इस रिसर्च के लिए उन्हें स्कालरशिप भी मिलेगी।
दीपक सिंह कठैत की शुरुआती शिक्षा राजकीय इंटर कालेज घाट से हुई है।2004 में  इंटर करने के बाद 2006 में ललित कला महाविद्धालय से फाईन आर्ट के लिए एडमिशन लिया और 2010 में डिग्री ली।2017 में दीपक ने लंदन के रायल कालेज आफ आर्ट एंड डिजाईन से मास्टर और स्कालरशिप के लिए परीक्षा दी थी।बीते 13 मार्च को दीपक को उनके सेलेक्शन की खबर मिली।
विकासखंड घाट के जाखणी गांव के किसान परिवार में पैदा हुए दीपक को हमेशा से कला के क्षेत्र में रुचि थी और उन्होंने अपने सपनों के पीछे भागना नहीं छोड़ा।प्रारंभिक पढाई करने के बाद हमेशा ही कला से जुडाव रखा और अपना कैरियर भी इस क्षेत्र को चुना।दीपक के एडमिशन की बात से उनके परिवार के साथ साथ गांव वालों में भी खुशी की लहर है।दीपक हम में से ही एक है जिनके सपने कुछ अलग हट के करने के थी और उसके लिए दीपक ने बहुत मेहनत की और आज अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बदौलत दीपक लंदन जा रहें हैं,अपनी पढ़ाई पूरी करने।दीपक का कहना है कि  इस यूनिर्वसिटी में दूर दूर से और अलग अलग 60 देशों से एक हजार से ज्यादा छात्र छात्राएं अपनी पढ़ाई करने आऐंगे।दीपक कहते हैं कि हमारे देश में यू तो पढ़ाई की सारी सुविधाएं है लेकिन कला के क्षेत्र में रुचि रखने वाले बहुत से सामान्य परिवार के लोग अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते हैं।इस संबंध में दीपक कहते हैं कि राज्य सरकार को  ऐसे लोगों की मदद करने के लिए प्रावधान निकालना चाहिए जिससे उनके जैसे छात्रों को आगे बढ़कर अपना सपना पूरा करने का मौका मिल सके।दीपक ने बताया कि आने वाले सितंबर से उनका सेमेस्टर शुरु हो जाएगा और वह अपने जाने की तैयारी करना शुरु कर चुके हैं।

सरकारी भूमि का 7.39 करोड़ मुआवजा लेना चाहता था पीआईएल कर्ता

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हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले रामनारायन ने सरकारी जमीन का 7.39 करोड़ रुपये मुआवजा लेने की कोशिश की थी, लेकिन एसएएलओ डीपी सिंह ने उनका मुआवजा मंजूर नहीं किया था। इसी तरह कोर्ट में दूसरी याचिका करने वाले रमन फुटेला को गलत तरीके से 28 लाख मुआवजा वापस करने का नोटिस जारी किया गया था। सूत्रों की मानें तो कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले बरी गांव के रामनरायन ने खसरा संख्या 419 रकबा 0.0790 हेक्टेयर वर्ग 6 (4) खंती का 5403200 रुपये, खसरा संख्या 408 रकबा 0.0720 हेक्टेयर वर्ग चार क, खसरा संख्या 410 रकबा 0.088 हेक्टेयर वर्ग चार क, खसरा संख्या 411 रकबा 0.0848 वर्ग चार क, खसरा 468 रकबा 0.0331 हेक्टेयर, खसरा 709 रकबा 0.063 हेक्टेयर वर्ग 5 (3) अन्य बंजर का सात करोड़ 39 लाख दो हजार चार सौ रुपये का क्लेम किया था। इस मुआवजे की राशि को रोक दिया गया। इसके अलावा रमन फुटेला ने भी जनहित याचिका की है। सूत्रों की मानें तो रमन ने एसएएलओ, एसएएलओ दफ्तर के कर्मचारियों व चकबंदी अधिकारी से सांठगांठ करके 2895750 रुपये का मुआवजा हासिल कर लिया था। इसकी शिकायत मुनीश्वर दयाल ने की, जिसका संज्ञान लेते हुए रमन को नोटिस जारी करके उनसे प्रतिकर की राशि जमा करने के आदेश पारित किए गए थे।