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लिजिए अब ड्राइविंग लाइसेंस के लिए देना होगा आनलाईन टेस्ट

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ड्राइव‌िंग लाइसेंस को लेकर परिवहन व‌िभाग ने नए नियम लागू कर दिए हैं।अभी से जो लोग व‌िभाग क‌ी कसौटी पर खरे उतरेंगे उन्हीं को मिलेगा लाइसेंस।परमानेंन्ट ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अब कंप्यूटराइज्ड टेस्ट देना होगा। परिवहन विभाग रोशनाबाद में सिम्यूलेटर टेस्ट शुरू कर दिया। अब आवेदक को पहले कंप्यूटर स्क्रीन पर वाहन चलाकर दिखाना होगा।

अभी तक स्थायी लाइसेंस के लिए ही सिम्यूलेटर टेस्ट अनिवार्य किया गया है। जल्द ही लर्निंग लाइसेंस के लिए भी इसे लागू कर दिया जाएगा। आपको बता दें कि परिवहन विभाग वाहन मालिकों को दो चरणों में ड्राइविंग लाइसेंस देता है। पहले लर्निंग और बाद में स्थायी लाइसेंस। अब तक टेस्ट ड्राइविंग मैन्युअल तरीके से होती रही है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा अब आवेदक को कंप्यूटराइज्ड टेस्ट देना होगा। यातायात नियमों की बुनियादी जानकारी देने और सांकेतिक चिह्नों को पहचानने के बाद वाहन चलाकर दिखाने पर आवेदक को पहले लर्निंग और कुछ महीने बाद स्थायी लाइसेंस दे दिया जाता है।

इसके लिए आवेदक को कंप्यूटराइज्ड कार में बैठाया जाता है। इसमें ड्राइवर के सामने शीशे की जगह कंप्यूटर स्क्रीन लगी होती है। स्क्रीन में वीडियो गेम की तरह यातायात के बीच वाहन चलाना होता है। खास बात यह है कि सिम्यूलेटर टेस्ट पूरी तरह ऑनलाइन है। आवेदक से चूक हुई तो रिजेक्ट होने में देर नहीं लगेगी। इसके बाद फिर से आवेदन की पूरी प्रक्रिया अपनानी होगी।

मैन्युअल टेस्ट ड्राइविंग में कई बार कम प्रशिक्षित आवेदक भी लाइसेंस हासिल करने में कामयाब हो जाते थे। दफ्तर के आसपास सक्रिय दलाल तो टेस्ट ड्राइविंग के बिना ही डीएल बनवाने का पूरा ठेका ले लेते थे। अब तक प्रति 10 आवेदकों में अमूमन आठ या नौ आवेदकों को डीएल मिल जाता था। अब इस पर लगाम लगेगी। इस प्रक्रिया से पूरी तरह प्रशिक्षित आवेदक ही ड्राइविंग लाइसेंस बनवा पाएगा।

इस विषय पर हरिद्वार के एआरटीओ प्रशासन, मनीष तिवारी ने बताया कि लर्निंग लाइसेंस पा चुके आवेदकों को स्थायी लाइसेंस के लिए सिम्यूलेटर टेस्ट शनिवार से शुरू कर दिया गया है। जल्द ही लर्निंग डीएल के लिए भी सिम्यूलेटर टेस्ट देना होगा।

गंगा के प्रति त्रिवेंद्र सरकार हुई तेज,प्रदेश के गंगा घाटों पर चलाया सफाई अभियान

नमामि गंगे के उत्तराखंड प्रभारी रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री बनते ही अपनी कैबनेट को पहला काम गंगा सफाई का दिया। जिसके तहत कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर गंगा स्वच्छता अभियान की शुरुवात की। और लोगों से गंगा को स्वच्छ रखने की अपील की।

उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है जिसकी पहचान गंगा माँ से होती है लेकिन साल दर साल अपनी स्वच्छता खोती गंगा आज बेहद मैली हो चुकी ही। गंगा माँ की स्वच्छता को बचाने के लिए अब निर्वाचित मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहल शुरू की है। पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर आते ही रावत सरकार ने अपनी कैबिनेट को गंगा स्वच्छता पर लगा दिया है। इसी कड़ी में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने ऋषिकेश के गंगा तट पर सफाई अभियान चलाया जिसमें उनके साथ कई लोगों ने हिस्सा लिया और गंगा घाट की सफाई की। इस मौके पर सुबोध उनियाल ने बताया कि गंगा को साफ़ और स्वच्छ रखने की जरूरत है और हम सबको इसके लिए आगे आना चाहिए। प्रदेश में भजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार के बाद नव निर्वाचित मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपना पहला ही निणर्य गंगा स्वछता का उठाया जिसके लिये सभी कैबिनेट मंत्री अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर स्वछता मिशन में सहयोग करते दिखे तो वहीँ आम लोगों ने भी इस अभियान में बढ़-चड़कर हिस्सा लिया। स्थानीय लोगों का मानना है कि मोदी सरकार आने वाले समय में गंगा को पूर्ण तरह से स्वत्छ करने में कामयाब होंगे बस इसके लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।  मोदी और त्रिवेंद्र रावत की जुगलबंदी का असर जल्द से जल्द गंगा के जल में दिखने लगेगा। त्रिवेंद्र कैबिनेट की पहले दिन के कार्य की शुरुवात माँ गंगा के सफाई अभियान से हुयी है। अब देखना यह है कि आगे चलकर ये अभियान कितना सफल हो पाता है।

क्षेत्र में अभी दो बाघों की मौजूदगी से दहशत

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दो लोगों को मौत की नींद सुलाने वाले बाघ से भले ही लोगों को निजात मिल गई,लेकिन सावधान खतरा अभी टला नहीं।  खतरे के बादल अभी भी वन रेंज में मंडरा रहा हैं। अभी दो बाघों की मौजूदगी है… जो लोगों के लिए दहशत बना है गौरतलब है कि रामनगर रैंज में बीते दिनों बाघ के हमले से दो लोगों की मौत के बाद बी अभी दो बाघों की मौजूदगी लोगों के लिए दहशत बना है…जनवरी में वन विभाग की ओर से लगाए गए कैमरा ट्रैप में दस वर्ग किमी के दायरे में अलग-अलग जगह पर पांच बाघ व एक बाघिन की तस्वीर आई थी।
कम वन क्षेत्र में छह बाघों की मौजूदगी आपसी संघर्ष की वजह बन गई। बाघों के बीच वर्चस्व कायम करने के लिए जंग होती रही। इस जंग में 19 जनवरी को देचौरी, 16 फरवरी को बैलपड़ाव, 22 फरवरी को फिर बैलपड़ाव में एक बाघ मारा गया। 16 मार्च को दो इंसानी जीवन को खत्म करने के बाद एक और बाघ ने रेस्क्यू के बाद दम तोड़ दिया। यह बाघ भी पूर्व में आपसी संघर्ष में घायल हो गया था।

छह में से चार बाघ खत्म होने के बाद अभी भी छोई के वन क्षेत्र में एक बाघ व एक बाघिन घूम रही है। ऐसे में जनसुरक्षा को लेकर वन विभाग के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। बाघों की मौजूदगी से क्यारी, छोई, बैलपड़ाव, टेड़ा आदि गांव में खतरा बरकरार है।जिसके लिए वन विभाग के अधिकारियों ने अलर्ट घोषित किया है वहीं सुरक्षा की दृष्टी से लोगों को सचेत करने के लिे उपाय बताये गये हैं…छोई, टेड़ा, क्यारी, बैलपड़ाव से सटे वन क्षेत्रों में जाने,समूह के रूप में शोर करने,जलस्रोत व नालों के आसपास ना जाने,वन क्षेत्र से निकलने वाली सड़क पर देर शाम व रात में अकेले न जाने की हिदायद भी दी गयी है।

विदेश भेजने के नाम पर नौ लाख की ठगी

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सितारगंज के एक युवक से विदेश भेजने के नाम पर शातिर ने करीब नौ लाख रुपये ठग लिए। लम्बे समय से युवक को टालमटोल करने पर ही युवक को अहसास होने लगा जिसके बाद युवक ने आरोपी के खिलाफ पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की।
मामला कौंधा  गांव का है, हरजीत सिंह पुत्र महेंद्र  सिंह, ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि नानकमत्ता क्षेत्र के ग्राम इटोवा निवासी एक आरोपी ने उसके बेटे पवनप्रीत सिंह को विदेश भेजने के नाम पर झांसे में लिया। साथ ही पैसों की डिमांड की। इस पर युवक ने अप्रैल 2016 में एक लाख और जून में चार लाख रुपये उसको दे दिए। जब पवन ने विदेश भेजने में हो रही देरी का कारण पूछा तो उसने और धनराशि की मांग की। शक होने पर युवक ने ठगी के मामले की पंचायत कराई।
आरोपी ने दबाव बनने पर पूर्व में की गई औपचारिकता का बहाना बनाकर तीन लाख से अधिक रकम युवक से और झटक ली। ठगी के मामले में नानकमत्ता स्थित ग्राम जरासु प्रतापपुर निवासी एक बिचौलिया भी शामिल रहा। इसके बाद भी जब आरोपी ने युवक को विदेश नहीं भेजा, तो उसने रकम वापस करने का दबाव बनाया। जिस पर आरोपी ने पीएनबी बैंक के ढाई लाख रुपये के दो चेक दे दिए। जबकि खाते में रकम नहीं थी। इससे युवक भड़क गया और आरोपी के पास पहुंचा। आरोपी ने दोबारा पैसा मांगने पर जान से मारने की धमकी दी।
पीड़ित का आरोप है कि ठग ने उससे आठ लाख 90 हजार 760 रुपये की रकम ली थी। युवक के पिता ने पुलिस को तहरीर देकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। एसएसआई वीरेंद्र चंद रमौला का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी।

सीआइडी अफसर की पत्नी को लात मारने का मामला

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नैनीताल रोड पर हाइप्रोफाइल मॉल में स्थित जिम में महिला और युवती से मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद नया मोड आ गया है, युवती को लात मारने वाला युवक शहर के बड़े व्यवसायी का बेटा बताया जा रहा है। जिस महिला के साथ मारपीट और अभद्रता की गई, वह किसी सीआइडी अफसर की पत्नी और उसकी सहेली बताई जा रही है। पुलिस  ने कत्था फैक्ट्री के मालिक के आरोपी बेटे बसंत वशिष्ठ पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।
जिम में शहर के अधिकारी और बड़े व्यवसायी ही जिम करने जाते है। जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले सीआइडी अफसर की पत्नी और उसकी सहेली भी जिम में रोजाना की तरह व्यायाम करने गए थे। इस दौरान उनके साथ वहां मौजूद युवक ने मारपीट कर दी। वीडियों में नजर आ रहा युवक रामपुर रोड स्थित किसी फैक्ट्री के मालिक का पुत्र बताया जा रहा है। वह पहले एक युवती पर हमला करता है। उसे बचाने पहुंची सीआइडी अफसर की पत्नी पर उसने लात मारी है। वह इतने पर ही नहीं रुका। जैसे ही महिला बाहर निकली, वह लोहे की रॉड लेकर उसने पीछे भागता हुआ दिख रहा है। रास्ते में एक और महिला के बाल खींचते हुए भी नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार मामला पुलिस के पास पहुचा, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं हुई।
सीआइडी अफसर ने काठगोदाम पुलिस से सहायता भी मागी। पीड़ि‍ता की तरफ से रिपोर्ट थाने में दी गई, लेकिन बेटे की तरफ से उसके पिता ने सीआइडी अफसर से माफी मागकर बेटे की मानसिक स्थिति का हवाला देकर मामले को रफा-दफा करने की बात कही। इसके बाद रिपोर्ट दर्ज नही की गई। जानकारी के अनुसार घटना के दिन पुलिस भी मौके पर पहुंची थी, लेकिन मॉल मे जिम मे जाने के बजाय नीचे से ही वापस लौट गई।
इस संबंध में हल्द्वानी के एसपी सिटी यशवंत सिंह चौहान का कहना है कि मेरे संज्ञान मे मामला मामला आज ही आया है। वीडियो वायरल हुआ है। उसकी जांच कराई  गई। पुलिस  ने कत्था फैक्ट्री के मालिक के आरोपी बेटे बसंत वशिष्ठ पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।

काशीपुर मवेशियों के साथ तीन पशु तस्करों को आई टी आई थाने की पुलिस ने घर दबोचा

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काशीपुर मवेशियों के साथ तीन पशु तस्करों को आई टी आई थाने की पुलिस ने घर दबोचा है। पुलिस को शनिवार देर रात ट्रक से वध के लिए पशु लाए जाने की सूचना मिली। इसके बाद आइटीआइ पुलिस सक्रिय हो गई और बाजपुर रोड स्थित बहल्ला नदी के पास पहुंच गई। रविवार सुबह करीब पौने चार बजे काशीपुर से सुल्तानपुरपट्टी की ओर आ रहे ट्रक संख्या एचआर 55 एच 6124 को रोक कर तलाशी ली तो इसमें 22 बड़े बैल पकड़े गए।

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पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पशुओं से भरे ट्रक को थाने ले आई। पूछताछ में आरोपियों ने पशुओं को पंजाब के जिला संगरूर से स्वार, रामपुर ले जाने की बात कुबूली। पकड़े गए आरोपियों में ग्राम टांडा बादली, थाना टांडा, जिला रामपुर, उत्तर प्रदेश निवासी ताहिर पुत्र अमजद, ग्राम संभालेडा, थाना मीरापुर, जिला मुजफ्फरनगर निवासी शहजाद पुत्र अमजद और इसी गांव के रिजवान पुत्र सलामतुल्ला है। ट्रक से बैल उतारते समय से एक बैल थाने की बाउंड्री की छलांग लगाकर भाग गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गोवंश संरक्षण अधिनियम व पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है। पशु पकड़ने वाले टीम में आइटीआइ थाना प्रभारी नरेश चौहान, उपनिरीक्षक जसवीर सिंह चौहान सहित पुलिस कर्मी थे। पशुओं को गोशाला में भेजा जाएगा। इस उपलब्धि पर अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने पुलिस टीम को 15 सौ रुपये का इनाम देने की घोषणा की।

आरोपी ताहिर का कहना था कि वह स्वार, रामपुर के एक व्यक्ति का करीब एक माह से ट्रक चला रहे हैं। उन्हीं के कहने पर पंजाब से पशु लाते हैं। यह दूसरी बार ट्रक में पशुओं को लाया था।

काशीपुर आग लगने से दुकान में लाखों का माल राख 

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पुरानी सब्जी मंडी स्थित परचून की दूकान में आग लगने से लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। सूचना पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने बमुश्किल आग पर काबू पाया।

मोहल्ला लाहोरियान निवासी राजकुमार अग्रवाल की बंसल डेली नीड नाम से पर परचून की दुकान है। शनिवार रात करीब नौ बजे राजकुमार ने दुकान बंद कर घर चले गए। कुछ ही देर बाद उनकी दुकान से धुआ उठता देख आसपास के लोगों ने आग लगने की सूचना दुकान स्वामी को दी।

दुकान स्वामी मौके पर पहुंचकर दमकल कर्मियों को सूचना आग लगने की सूचना दी। दमकल कर्मियों ने करीब एक घटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। तब तक आग पर काबू पाया गया तब तक दुकान में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। शॉट सर्किट से आग लगने की वजह बताई जा रही है। दुकान स्वामी राजकुमार के मुताबिक करीब 20 लाख रुपये का सामान जलकर राख हो गया है।

मुख्यमंत्री आवास के तिलस्म को नहीं तोड़ पाये हरीश रावत

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कहते हैं कि उगते सूरज को सब सलाम करते हैं। ये बात राजनीति में सौ फीसदी फिट बैठती है। राज्य में चुनावों में मिली करारी हार के बाद कुछ दिन पहले तक लोगों और समर्थकों की बीड़ से गुलज़ार रहने वाले मुख्यमंत्री हरीश रावत का सरकारी आवास बीजपुर गेस्ट हाउस आज लोगों को तरस रहा है। चुनावी हार के बाद15 मार्च को रावत ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया था। नी सरकार के गठन तक राज्सोयपाल ने उनसे कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा। शुक्रवार को हरीश रावत का बतौर मुख्यमंत्री आधिकारिक तौर पर आकिरी दिन होगा। शनिवार को प्रचंड बहुमत से राज्य में जीती बीजेपी की नई सरकार के मुख्यमंत्री शपथ लेंगे। बीजापुर गेस्ट हाउस में रह रहे हरीश रावत का यहां से जाने के बारे में अभी किसी को नहीं पता है। उनके पीआरओ से लेकर सुरक्षा अधिकारी तक को इस बारे में कुछ नही पता ।

गौरतलब है कि जब विजय बहुगुणा को हटाकर हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया था तब रावत ने आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास में रहने से मना कर दिया था। इसके पीछे रावत ने तर्क दिया था कि राज्य में आपदा से विस्थापित हुए सबी लोग अपने घरों में नहीं जाते तब तक वो भी अपने आधिकारिक घर में नहीं जायेंगे। हांलाकि राजनीतिक गलियारों में रावत के इस कदम को ाधिकारिक मुख्यमंत्री आवास से जुड़े अंधविश्वास से भी जोड़ कर देखा गया। कहा जाता है कि जो भी मुख्यमंत्री देहरादून कैंट में स्थित मुख्यमंत्री आवास में रहने गया है उसने अपना कार्यकाल पूरा नही किया है। चाहे वो भुवन चंद्र खंडूरी हो, रमेश पोखरियाल निशंक या विजय बहुगुणा। और इसी के चलते हरीश रावत ने भी उस घर में न रहने का फैसला किया। लेकिन ऐसा लगता है कि रावत का पीछा मुख्यमंत्री आवास के तिलस्म ने नहीं छोड़ा। न केवल चुनावों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा बल्कि खुद हरीस रावत को अपनी दोनों सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा। इतना ही नहीं ये हार हरीश रावत के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी हार और चुनौती के रूप में निकल कर आई है।

हरीश रावत ने गल्जवाड़ी में किराए का एक मकान तलाश लिया है। बीजापुर गेस्ट हाउस से उन्होंने अपना सामान शिफ्ट कराना भी शुरू दिया है। गौरतलब है कि सरकार जाने के बाद सभी मंत्रियों और सीएम को 15 दिन में आवास खाली करने होते हैं। 11 मार्च को नतीजों के बाद सरकार को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। अब 26 मार्च तक मंत्रियों व सीएम को आवास खाली करने हैं। रावत का आशियाना सीएम रहते हुए बीजापुर गेस्ट हाउस ही रहा। उन्होंने गेस्ट हाउस खाली करना शुरू कर दिया है। राजधानी में उन्होंने अपना नया ठिकाना गल्जवाड़ी में तलाशा है। यहां किराए के मकान को लेकर बात पक्की हो चुकी है। जल्द शिफ्टिंग शुरू होगी। फिलहाल उन्होंने बीजापुर गेस्ट हाउस से कुछ सामान अपने किसी नजदीकी के आवास पर शिफ्ट कराया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के लिए आवास की व्यवस्था नहीं है।

राजनीति अनिश्चिताओं का खेल है और ऐसे में हरीश रावत को पूरी तरह खारिज कर देना ठीक नही होगा। लेकिन फिलहाल रावत और कांग्रेस के लिये उत्तराखंड में बहुत कुछ करने को रह नही गया है। अब देखना ये होगा कि रावत देहरादून छोड़ कर अपने घर हल्द्वानी जाएंगे या फिर दिल्ली में अपने राजनितिक सफर को आगे बढ़ाएंगे।

योगी की बहन ने कहा-पंख होते तो उड़ कर भाई को मुख्यमंत्री बनते देखती

ऋषिकेश से मात्र 60 किमी दूर यमकेश्वर के एक छोटे से गाव पंचूर में ख़ुशी का माहौल है क्योंकि यहाँ के लाल ने आज यूपी के मुख्यमंत्री की शपथ लेली और अब उत्तरप्रदेश योगी आदित्य नाथ के रंग में रंग नजर आएगा।पंचूर गांव की पगडंडियो से निकल कर उत्तरप्रदेश के सीएम की कुर्सी तक पहुचने का जलवा इस छोटे से गाव के ग्रामीण लड़के ने कर दिखाया है। ये दूसरा मौका है जब उत्तराखंड के गढ़वाल छेत्र ने दूसरी बार यूपी के सीएम को अपने आँगन से दिया है। योगी आदित्य नाथ बहनों के सबसे प्रिय भाई है और यही कारण है कि भाई की शपथ को अपने मायके में सेलिब्रेट करने के लिए उनकी बहन शाशि अपने ससुराल से मायके पहुची हैं।हमसे बात करते हुए वो बोली इतनी ख़ुशी की बात है कि हम शब्दो में बया नहीं कर सकते।कल जब मैने भाई के मुख्यमंत्री बनने की खबर सुनी तो मुझ से रहा नहीं गया मैं गाडी पकड़ कर सीधे अपने घर पहुंची,ऐसा लग रखा है मेरे पंख होते तो में सीधे उड़ कर भाई के पास पहुंच जाती और उसे सामने मुख्यमंत्री बनते देखती।हम भाई बहनो में आपस में बड़ा प्यार है गौरतलब है कि अजय मोहन बिष्ट ग्राम पंचूर के निवासी आनंद सिंह बिष्ट और सावित्री देवी के चार पुत्रों में से दूसरे नबर के है और बहन से उनको काफी स्नेह है। पुरे यमकेश्वर क्षेत्र में योगी की इस कामयाबी का जश्न मनाया जा रहा है। लोगो उम्मीद है मोदी सरकार पहाड़ो पर विकास की गंगा बहायेगी।

राजभवन में हुए कार्यक्रम में मसूरी के मशहूर लेखक स्टीफन अल्टर ने की शिरकत

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मसूरी में पैदा हुए लेखक, स्टीफन अल्टर को राजभवन देहरादून के एक गोष्ठी में जहां अलग अलग श्रेणी के लेखक, पत्रकार और विशेषज्ञ मौजूद थे वहां विशेष मेहमान की तरह बुलाया गया था। स्टीफन का स्वागत करते हुए प्रदेश के राज्यपाल के.के पाल ने कहा कि,स्टीफन अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर लेखक हैं जिनका जन्म मसूरी में हुआ है, प्रारंभिक पढ़ाई वुडस्टाक इंटरनेशनल स्कूल मसूरी में हुई है और सही मायनों में स्टीफन एक उत्तराखंडी हैं। इसके बाद स्टीव ने अपने सफर के बारे में लोगों को बताया जिसमें एमआईटी में क्रिएटिव राइटिंग विषय पढाने से लेकर और भी चीजें थी।

 स्टीव ने अपने जीवन की कथा में जिम कार्बेट के जिक्र के साथ अपनी भारत से विदाई के बारे में भी बताया।उन्होंने बताया कि एक भारतीय जो अपने देश से खासकर गढ़वाल और कुमाईं से बहुत प्यार करता है उसके लिए दूसरे देश केन्या में रहना कितना मुश्किल रहा होगा।इसके साथ ही स्टीफन ने अपने आने वाली किताब जिसका विषय ग्रेट हिमालया के बारे में भी जिक्र किया जिसके बारे में वो आजकल हर तरह की रिसर्च कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि इस किताब के लिए उन्होंने सांस्कृतिक, सांइटिफिकली, वातावरण, और पहाड़ी क्षेत्रों से लोगों के पलायन के बारे में खोज कर रहे हैं।

मशहूर लेखक स्टीफन ने बहुत से ऐसे किस्सों के बारे में बात की जो हिमालय से शुरु होकर दून घाटी में आकर खत्म हो गई हो।चाहे वो पुराने समय के पंडित हो जिन्होंने पहाड़ की चोटीयों पर जाकर खोज की हो, या जर्मन हो जिन्होंने फारेस्ट सुविधाओं की शुरुआत की हो और या फिर वाडिया इंस्टीट्यूट के वाडिया की अपनी कहानी क्यों ना हो जिन्होंने श्रीनगर में पढ़ाया और खुद जंगलों में विचरण करते थे।(जिनकी मकड़ी जैसी चाल को अभी भी वाडिया संग्रहालय में देखा जा सकता है)

यह सेशन लगभग एक घंटे तक चला जिसको दर्शकों ने ध्यानमग्न होकर सुना। राज्यपाल के.के पाल ने राजभवन को संस्कृति और साहित्य का एक शानदार स्थान बना दिया है जिसकी तारीफ जितनी करो कम है।