विदेश भेजने के नाम पर नौ लाख की ठगी
काशीपुर मवेशियों के साथ तीन पशु तस्करों को आई टी आई थाने की पुलिस ने घर दबोचा
काशीपुर मवेशियों के साथ तीन पशु तस्करों को आई टी आई थाने की पुलिस ने घर दबोचा है। पुलिस को शनिवार देर रात ट्रक से वध के लिए पशु लाए जाने की सूचना मिली। इसके बाद आइटीआइ पुलिस सक्रिय हो गई और बाजपुर रोड स्थित बहल्ला नदी के पास पहुंच गई। रविवार सुबह करीब पौने चार बजे काशीपुर से सुल्तानपुरपट्टी की ओर आ रहे ट्रक संख्या एचआर 55 एच 6124 को रोक कर तलाशी ली तो इसमें 22 बड़े बैल पकड़े गए।

पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर पशुओं से भरे ट्रक को थाने ले आई। पूछताछ में आरोपियों ने पशुओं को पंजाब के जिला संगरूर से स्वार, रामपुर ले जाने की बात कुबूली। पकड़े गए आरोपियों में ग्राम टांडा बादली, थाना टांडा, जिला रामपुर, उत्तर प्रदेश निवासी ताहिर पुत्र अमजद, ग्राम संभालेडा, थाना मीरापुर, जिला मुजफ्फरनगर निवासी शहजाद पुत्र अमजद और इसी गांव के रिजवान पुत्र सलामतुल्ला है। ट्रक से बैल उतारते समय से एक बैल थाने की बाउंड्री की छलांग लगाकर भाग गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गोवंश संरक्षण अधिनियम व पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है। पशु पकड़ने वाले टीम में आइटीआइ थाना प्रभारी नरेश चौहान, उपनिरीक्षक जसवीर सिंह चौहान सहित पुलिस कर्मी थे। पशुओं को गोशाला में भेजा जाएगा। इस उपलब्धि पर अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने पुलिस टीम को 15 सौ रुपये का इनाम देने की घोषणा की।
आरोपी ताहिर का कहना था कि वह स्वार, रामपुर के एक व्यक्ति का करीब एक माह से ट्रक चला रहे हैं। उन्हीं के कहने पर पंजाब से पशु लाते हैं। यह दूसरी बार ट्रक में पशुओं को लाया था।
काशीपुर आग लगने से दुकान में लाखों का माल राख
पुरानी सब्जी मंडी स्थित परचून की दूकान में आग लगने से लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। सूचना पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने बमुश्किल आग पर काबू पाया।
मोहल्ला लाहोरियान निवासी राजकुमार अग्रवाल की बंसल डेली नीड नाम से पर परचून की दुकान है। शनिवार रात करीब नौ बजे राजकुमार ने दुकान बंद कर घर चले गए। कुछ ही देर बाद उनकी दुकान से धुआ उठता देख आसपास के लोगों ने आग लगने की सूचना दुकान स्वामी को दी।
दुकान स्वामी मौके पर पहुंचकर दमकल कर्मियों को सूचना आग लगने की सूचना दी। दमकल कर्मियों ने करीब एक घटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। तब तक आग पर काबू पाया गया तब तक दुकान में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। शॉट सर्किट से आग लगने की वजह बताई जा रही है। दुकान स्वामी राजकुमार के मुताबिक करीब 20 लाख रुपये का सामान जलकर राख हो गया है।
मुख्यमंत्री आवास के तिलस्म को नहीं तोड़ पाये हरीश रावत
कहते हैं कि उगते सूरज को सब सलाम करते हैं। ये बात राजनीति में सौ फीसदी फिट बैठती है। राज्य में चुनावों में मिली करारी हार के बाद कुछ दिन पहले तक लोगों और समर्थकों की बीड़ से गुलज़ार रहने वाले मुख्यमंत्री हरीश रावत का सरकारी आवास बीजपुर गेस्ट हाउस आज लोगों को तरस रहा है। चुनावी हार के बाद15 मार्च को रावत ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया था। नी सरकार के गठन तक राज्सोयपाल ने उनसे कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा। शुक्रवार को हरीश रावत का बतौर मुख्यमंत्री आधिकारिक तौर पर आकिरी दिन होगा। शनिवार को प्रचंड बहुमत से राज्य में जीती बीजेपी की नई सरकार के मुख्यमंत्री शपथ लेंगे। बीजापुर गेस्ट हाउस में रह रहे हरीश रावत का यहां से जाने के बारे में अभी किसी को नहीं पता है। उनके पीआरओ से लेकर सुरक्षा अधिकारी तक को इस बारे में कुछ नही पता ।
गौरतलब है कि जब विजय बहुगुणा को हटाकर हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया था तब रावत ने आधिकारिक मुख्यमंत्री आवास में रहने से मना कर दिया था। इसके पीछे रावत ने तर्क दिया था कि राज्य में आपदा से विस्थापित हुए सबी लोग अपने घरों में नहीं जाते तब तक वो भी अपने आधिकारिक घर में नहीं जायेंगे। हांलाकि राजनीतिक गलियारों में रावत के इस कदम को ाधिकारिक मुख्यमंत्री आवास से जुड़े अंधविश्वास से भी जोड़ कर देखा गया। कहा जाता है कि जो भी मुख्यमंत्री देहरादून कैंट में स्थित मुख्यमंत्री आवास में रहने गया है उसने अपना कार्यकाल पूरा नही किया है। चाहे वो भुवन चंद्र खंडूरी हो, रमेश पोखरियाल निशंक या विजय बहुगुणा। और इसी के चलते हरीश रावत ने भी उस घर में न रहने का फैसला किया। लेकिन ऐसा लगता है कि रावत का पीछा मुख्यमंत्री आवास के तिलस्म ने नहीं छोड़ा। न केवल चुनावों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा बल्कि खुद हरीस रावत को अपनी दोनों सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा। इतना ही नहीं ये हार हरीश रावत के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी हार और चुनौती के रूप में निकल कर आई है।
हरीश रावत ने गल्जवाड़ी में किराए का एक मकान तलाश लिया है। बीजापुर गेस्ट हाउस से उन्होंने अपना सामान शिफ्ट कराना भी शुरू दिया है। गौरतलब है कि सरकार जाने के बाद सभी मंत्रियों और सीएम को 15 दिन में आवास खाली करने होते हैं। 11 मार्च को नतीजों के बाद सरकार को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। अब 26 मार्च तक मंत्रियों व सीएम को आवास खाली करने हैं। रावत का आशियाना सीएम रहते हुए बीजापुर गेस्ट हाउस ही रहा। उन्होंने गेस्ट हाउस खाली करना शुरू कर दिया है। राजधानी में उन्होंने अपना नया ठिकाना गल्जवाड़ी में तलाशा है। यहां किराए के मकान को लेकर बात पक्की हो चुकी है। जल्द शिफ्टिंग शुरू होगी। फिलहाल उन्होंने बीजापुर गेस्ट हाउस से कुछ सामान अपने किसी नजदीकी के आवास पर शिफ्ट कराया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के लिए आवास की व्यवस्था नहीं है।
राजनीति अनिश्चिताओं का खेल है और ऐसे में हरीश रावत को पूरी तरह खारिज कर देना ठीक नही होगा। लेकिन फिलहाल रावत और कांग्रेस के लिये उत्तराखंड में बहुत कुछ करने को रह नही गया है। अब देखना ये होगा कि रावत देहरादून छोड़ कर अपने घर हल्द्वानी जाएंगे या फिर दिल्ली में अपने राजनितिक सफर को आगे बढ़ाएंगे।
योगी की बहन ने कहा-पंख होते तो उड़ कर भाई को मुख्यमंत्री बनते देखती
राजभवन में हुए कार्यक्रम में मसूरी के मशहूर लेखक स्टीफन अल्टर ने की शिरकत
मसूरी में पैदा हुए लेखक, स्टीफन अल्टर को राजभवन देहरादून के एक गोष्ठी में जहां अलग अलग श्रेणी के लेखक, पत्रकार और विशेषज्ञ मौजूद थे वहां विशेष मेहमान की तरह बुलाया गया था। स्टीफन का स्वागत करते हुए प्रदेश के राज्यपाल के.के पाल ने कहा कि,स्टीफन अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर लेखक हैं जिनका जन्म मसूरी में हुआ है, प्रारंभिक पढ़ाई वुडस्टाक इंटरनेशनल स्कूल मसूरी में हुई है और सही मायनों में स्टीफन एक उत्तराखंडी हैं। इसके बाद स्टीव ने अपने सफर के बारे में लोगों को बताया जिसमें एमआईटी में क्रिएटिव राइटिंग विषय पढाने से लेकर और भी चीजें थी।
स्टीव ने अपने जीवन की कथा में जिम कार्बेट के जिक्र के साथ अपनी भारत से विदाई के बारे में भी बताया।उन्होंने बताया कि एक भारतीय जो अपने देश से खासकर गढ़वाल और कुमाईं से बहुत प्यार करता है उसके लिए दूसरे देश केन्या में रहना कितना मुश्किल रहा होगा।इसके साथ ही स्टीफन ने अपने आने वाली किताब जिसका विषय ग्रेट हिमालया के बारे में भी जिक्र किया जिसके बारे में वो आजकल हर तरह की रिसर्च कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि इस किताब के लिए उन्होंने सांस्कृतिक, सांइटिफिकली, वातावरण, और पहाड़ी क्षेत्रों से लोगों के पलायन के बारे में खोज कर रहे हैं।
मशहूर लेखक स्टीफन ने बहुत से ऐसे किस्सों के बारे में बात की जो हिमालय से शुरु होकर दून घाटी में आकर खत्म हो गई हो।चाहे वो पुराने समय के पंडित हो जिन्होंने पहाड़ की चोटीयों पर जाकर खोज की हो, या जर्मन हो जिन्होंने फारेस्ट सुविधाओं की शुरुआत की हो और या फिर वाडिया इंस्टीट्यूट के वाडिया की अपनी कहानी क्यों ना हो जिन्होंने श्रीनगर में पढ़ाया और खुद जंगलों में विचरण करते थे।(जिनकी मकड़ी जैसी चाल को अभी भी वाडिया संग्रहालय में देखा जा सकता है)
यह सेशन लगभग एक घंटे तक चला जिसको दर्शकों ने ध्यानमग्न होकर सुना। राज्यपाल के.के पाल ने राजभवन को संस्कृति और साहित्य का एक शानदार स्थान बना दिया है जिसकी तारीफ जितनी करो कम है।
जिसको मरा समझ किया अंतिम संस्कार वो अचानक वापस लौट आई।
प्रदेश की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के ग्राम भूबरा निवासी भूप सिंह की 20 वर्षीय पुत्री राजरानी कुछ दिन पहले रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गई थी। बुधवार को भूबरा ग्राम के पास ही किसी युवती का अधजला शव बरामद हुआ था। भूप सिंह ने उसकी पहचान अपनी पुत्री के रूप में की और पुलिस ने शव उन्हें सौंप दिया। परिजनों ने उसका विधिवत अंतिम संस्कार भी कर दिया।
वहीं, गुरुवार देर शाम अचानक राजरानी अपने जीजा के साथ घर पहुंच गई। उसे देखकर परिजन जहां खुश तो हुए साथ ही चकित भी हैबेटी के जिंदा लौटने की कबर पुलिस को दी गयी जिसके बाद पुलिस भी हैरत में पड़ गई। दिल्ली में निजी व्यवसाय करने वाले युवती के जीजा राकेश मौर्य ने बताया कि वह दिल्ली से लौट रहा था तो मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर उसने राजरानी को अकेले घूमते देखा और उसे लेकर ससुराल आ गया। जबकि स्वार रामपुर कोतवाल मनोज कुमार ने भूप सिंह को कोतवाली बुलाकर पूछताछ की तो भूप सिंह के परिवार में जहां पुत्री के सही सलामत होने से खुशी है, वहीं, बीते दिनों मिला युवती का अधजला शव पुलिस के लिए पहेली बन गया है। पुलिस अब आसपास के थानों से संपर्क कर जानकारी जुटा रही है। वहीं अब पुलिस के लिए चुनौती है कि अधजला शव किसका है?
उधमसिंहनगर में जमकर चल रहा है अवैध खनन का कारोबार
अवैध खनन का गोरखधन्धा प्रशानिक अधिकारियों और पुलिस के संरक्षण में जमकर फलफूल रहा है। शासन द्वारा रोक के बावजूद उधमसिंहनगर जनपद में अवैध खनन का कारोबार जमकर चल रहा है। दिन रात खनन के कारोबारी नदी का सीना चीर कर अवैध खनन के कारोबार को अंजाम दे रहे हैं।
उत्तराखंड से निकल उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री तक का इस योगी का सफर
आज का दिन कई मायनो में ख़ास है क्योंकि उत्तराखंड के पौड़ी जिले से दोदो लाल मुख्यमंत्री की कमान समलने जा रहे है पौड़ी गढ़वाल के एक छोटे से गांव में 5 जून, 1972 को जन्मे योगी आदित्यनाथ अब देश के सबसे बड़े राज्य के उत्तरप्रदेश के मुखिया बनने जा रहे हैं।जिस पर बीजेपी आलाकमान और विधायक दल ने मोहर लगा दी है ,राजभवन पहुच कर योगी आदित्य नाथ ने अपना दावा भी पेश कर दिया है और कल दिन में उनको शपथ दिलाई जाएगी
योगी आदित्यनाथ के सीएम पद की शपथ लेते ही उत्तराखंड के पौड़ी से मुख्यमंत्री बनने वालों की फेहरिस्त बढ़कर पांच हो जाएगी। अबतक रमेश पोखरियाल निशंक, बीसी खंडूड़ी, विजय बहुगुणा और त्रिवेंद्र सिंह रावत पौड़ी गढ़वाल से संबंध रखते हैं।पिछले कुछ समय से देखें तो देश में मुख्यधारा की राजनीति हो या कोई बड़ा संवैधानिक पद, वहां पहाड़ियों का वर्चस्व कायम हो रहा है। साल 2016 दिसंबर में बिपिन रावत को भारतीय थलसेना का प्रमुख बनाया गया है। रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का चीफ अनिल धस्माना हों या राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ये सभी लोग उत्तराखंड से संबंध रखते हैं।

योगी अदित्यनाथ का जीवन परिचय
- असली नाम: अजय सिंह बिष्ट।
- पिता का नाम: नंदन सिंह बिष्ट।
- भाई का नाम: महेंद्र बिष्ट (पत्रकार)।
- गाव: पंचूर।
- जिला: पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड)।
- जन्म तिथि: 05 जून, 1972 ।
- शिक्षा : हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय से गणित में बेचलर्स डिग्री।
- छात्र राजनीतिक जीवन: विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रखर कार्यकर्ता रहे।
योगी आदित्यनाथ के जीवन के महत्वपूर्ण जानकारी-
- 22 साल की उम्र में परिवार त्यागकर योगी स्वरूप में आ गए।
- 1993 से अपना केंद्र गोरखपुर बना लिया।
- गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महंत बने।
- आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी हैं।
- 14 सितंबर, 1998 को उनके जीवन में नया अध्याय जुड़ गया।
- अवैद्यनाथ ने 14 सितंबर को राजनीति से संन्यास लिया और योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
- यहीं से योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक पारी शुरू हुई है।
- 1998 में गोरखपुर से 12वीं लोकसभा का चुनाव जीतकर योगी आदित्यनाथ संसद पहुंचे तो वह सबसे कम उम्र के सांसद थे।
- 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने।
- 2014 में पांचवी बार योगी सांसद बने।
- आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया और धर्म परिवर्तन के खिलाफ मुहिम छेड़ दी।
- 2007 में गोरखपुर में दंगे हुए तो योगी आदित्यनाथ को मुख्य आरोपी बनाया गया, गिरफ्तारी हुई।
- योगी के खिलाफ कई अपराधिक मुकदमे भी दर्ज हुए।
ऋषिकेश से नीलकंठ मार्ग पर लगभग 50 – 55 किमी दूर के यमकेश्वर के एक छोटे से गांव से आज उत्तर प्रदेश के कमान संभालने जा रहे योगी के गांव पंचूर में भी जश्न का माहौल है। पिता अजय सिंह बिष्ट इस अवसर पर अपने बेटे की इस सफलता पर काफी खुश है भाई महेन्द्र सिंह का कहना है कि ये पुरे यमकेश्वर छेत्र के लिए गर्व की बात है कि यहाँ की पहाड़ की पगडंडियो से निकल योगी आदित्य नाथ आज उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री होने जा रहे है जिस से हमारे छेत्र में एक नयी इबारत लिखी जाएगी



























































