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सीएम त्रिवेंद्र भी चले डिजिटल इंडिया की राह पर

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आज के इंटरनेट की दुनिया में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी ट्विटर के प्रयोग के लिए लोगो से निवेदन कर रहे हैं। पीएम मोदी की योजना डिजिटल इंडिया के साथ जोड़ने का सपना साकार करने में त्रिवेंद्र ने भी अपना हाथ बढ़ा लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया इस समय सबसे तेज चलने वाली मीडिया है, इसके साथ चलने में ही लोगो का फायदा है। सोशल मीडिया हर वक़्त हमारे साथ रहता है ,आजकल की मोबाइल की दुनिया में सबके पास स्मार्टफोन होता है और इसका फायदा हम जैसे लोगों को उठाना चाहिए। त्रिवेंद्र के ट्वीट करने पर 15 हजार से ज्यादा  फॉलोवर्स भी जुड़ गए हैं। इस समय उत्तराखंड के ट्विटर अकाउंट के हीरो त्रिवेंद्र सिंह रावत  ही बने हुए हैं।
त्रिवेंद्र के ट्विटर पढ़ने वालो में से एक यूजर ने कहा कि ‘आप को ही अभी तक का सबसे अच्छा सी एम बन कर दिखाना है’, इस से यह साबित होता है कि त्रिवेंद्र की फैन फॉलोइंग के साथ अपेक्षया भी हैं। इन्टरनेट के माध्यम से लोग मुख्यमंत्री से सीधी अपनी बात रख सकते हैं। यह एक अच्छी शुरुआत है कि, ‘आप लोगो से सोशल मीडिया के माध्यम से  खुद जुड़ रहे हैं।’ लोगो ने ट्विटर पर अपनी बात रखते हुए यह भी कहा की “आपने पहाड़ का पानी पिया है” साथ ही पूरा उत्तराखंड की उम्मीदें इस वक़्त ईमानदार सरकार की अपेक्षा कर रही हैं।कई लोगो ने तो अपनी शिकायते भी ट्विटर पर ही दर्ज कर दी, वहीं सीएम ने सम्बंधित अधिकारी को तुरंत जांच के लिए बोला है। लोगो से सीधे जुड़ना यह राज्य के हित के लिए है और एक अच्छी पहल भी है।
रावत ने ट्विटर के माध्यम से यह कहा कि हमारी सरकार पारदर्शा और एक जिम्मेदार सरकार है साथ ही सोशल मीडिया को बढ़ावा देते हुए लोगो को कहा कि सोशल मीडिया एक ऐसा माध्यम है जो आपकी बात पारदर्शिता के साथ सरकार तक पहुंच सकती है।
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आईटी और सोशल मीडिया के युग में पिछली सरकार ने भी लोगों से सीधा जुड़ने के लिये कॉल सेंटर और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का सहारा लिया था। मगर वो क़वायद आम लोगों को सही मायने में सरकार से जोड़ने में नाकामयाब रही। उम्मीद यही है कि नए सीएम की यह कोशिश भी मीडिया की सुर्खिंया भर बन कर नहीं रहेंगी और सही मायने में ज़रूरत मंद लोगों तक उनकी सरकार को पहुँचाने का काम करेगी

जानिए भूमि घोटालें की बारीकियां

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नैनीताल ऊधमसिंह नगर के विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के पद पर पर 2012 से अब दस एसएएलओ के पद पर दस अफसरों की तैनाती हो चुकी है। जानकारी के अनुसार 13 जून 2012 को अशोक कुमार जोशी की एसएएलओ के पद पर नियुक्ति हुई जो 22 अक्टूबर 2013 तक तैनात रहे। 23 अक्टूबर को कार्यभार संभाला शिवचरण द्विवेदी ने, जो दो जनवरी 2014 तक तैनात रहे। इसके बाद दो जनवरी को ही मोहम्मद नासिर ने कार्यभार संभाला। उनका 18 जनवरी तक ही रहा। 19 जनवरी को यह कार्यभार चंद्र सिंह ने संभाला। 13 जुलाई 2014 को उनका तबादला हो गया। उसके बाद 14 जुलाई तीर्थपाल को कार्यभार सौंपा गया। वह 22 अगस्त तक एसएएलओ के पद पर रहे। इला गिरी का कार्यकाल 23 अगस्त 2014 से 25 नवंबर 2014 तक रहा। उसके बाद चंद्र सिंह मर्तोलिया ने 21 दिसंबर को कार्यभार संभाला और वह आठ जनवरी 2015 तक तैनात रहे। नौ जनवरी 2015 को कार्यभार संभाला अनिल कुमार शुक्ला ने जो 17 जनवरी 2016 तक तैनात रहे। 18 जनवरी 2016 को डीपी सिंह ने कार्यभार संभाला जो 15 मार्च 2017 तक रहे। उसके बाद एनएस नबियाल को यह जिम्मा सौंपा गया है। इस दौरान एपी बाजपेई अपर विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के पद पर सात जुलाई 2016 से 12 अगस्त 2016 तक तथा चंद्र सिंह इमलाल भी इसी पद पर 16 अगस्त 2016 से 23 अगस्त 2016 तक तैनात रहे।

जो सभी नेशनल हाइवे के भूमि मुआवजा वितरित करने में118 करोड़ के घोटाले की जद में हैं। जिसको लेकर जांच शुरु हो गयी है।जिसको लेकर कुमाऊ कमिश्नर ने अधिकारियों की बृहस्पतिवार को जमकर परेड कराई और फाईलों के पुलिदे लगवा दिये।वहीं परतें खुलती जा रही हैं। हालांकि गत दिवस शासन के निर्देश पर विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के पद से डीपी सिंह को हटा दिया गया था, मगर शुरूवाती जांच में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि श्री सिंह साजिश के शिकंजे में फंसे हुए हैं। भूमि अधिग्रहण से लेकर अभिनिर्णय पारित करने और मुआवजा वितरण का अधिकतर कार्य डीपी सिंह की तैनाती से पहले हो चुका था। अपनी दबंग छवि के कारण डीपी सिंह सिंडिकेट व अफसरों के निशाने पर हैं। इसकी पृष्ठभूमि में सरकारी भूमि का मुआवजा लेने वालों के मंसूबे नाकामयाब करने की बात भी चर्चा में हैं।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 74 काशीपुर सितारगंज अनुभाग का प्रथम गजट नोटिफिकेशन पांच जुलाई 2013 को और द्वितीय गजट नोटिफिकेशन 3 एक 19 मार्च 2014 को हुआ। इसके साथ ही प्रथम 3 डी नोटिफिकेशन 25 फरवरी 2014 और द्वितीय 3 डी नोटिफिकेशन को हुआ। हम बात करें अभिनिर्णय पारित करने की तो ग्राम कनौरी में आठ अगस्त 2014, कनौरा में सात मार्च 2015, महेशपुरा में पांच फरवरी 2015, हरलालपुर में एक अगस्त 2014, गुमसानी आठ अगस्त 2014, ताली नौ नवंबर 2015, बिचपुरी 23 अगस्त 2014, टांडा आजम में 26 सितंबर 2014, भव्वा नंगला एक अगस्त 2014, केलाखेड़ा 28 अगस्त 2014, मुंडिया मर्न 23 मार्च 2015, रत्ना की मंडिया 21 जनवरी 2015, फतेहगंज 21 फरवरी 2015, मसीत 29 अगस्त 2014, पत्थरकुई 26 सितंबर 2014, मुंकुंदपुर 30 अगस्त 2014, गोपालनगर 27 सितंबर 2014, बरी राई 30 अक्टूबर 2014, अलखदेई 23 अगस्त 2014, बराखेड़ा 17 मार्च 2015, मोतियापुरा नौ जनवरी 2015, झगड़पुरी 30 अगस्त 2014, पिपलिया/गदरपुर दो मार्च 2015, बूरानगर 20 अप्रैल 2015, महतोष 16 अप्रैल 2015, खानपुर 21 अप्रैल 2015, जाफरपुर 12 मई 2015, दानपुर छह मई 2015, रुद्रपुर 22 मई 2015, चुटकी 22 मई 2015, लालपुर 12 मई 2015, रम्पुरा 13 अप्रैल 2015, बगवाड़ा 22 मई 2015, सिरौली कलां 27 अप्रैल 2015, पिपलिया किच्छा 11 जुलाई 2014, कोठा, किशनपुर व सिरौली खुर्द 11 जुलाई 2014, भमरौला सात जुलाई 2015, भंगा 10 जुलाई 2015, कोलडिया 11 मई 2015, शिमला पिस्तौर छह मई 2015, बरा 27 अप्रैल 2015, नकहा 11 मई 2015, कुंवरपुर पांच मई 2015, कठंगरी छह मई 2015, सिसैया पांच मई दढ़हा आठ जुलाई 2014, गोठा 27 मई 2014, मखबारा 10 जुलाई 2014, लौका 11 जुलाई 2014 एवं गौरीखेड़ा सात अप्रैल 2016 को हुआ।

अब नजर डालते हैं बाजपुर के ग्राम ताली पर जहां तकरीबन 20 करोड़ का मुआवजा 2015 में ही वितरित किया गया है। जिसमें राजेश कुमार, महेश चंद्र, अशोक कुमार, संजय पुत्रगण राजकुमार, जसमीत कौर पुत्री जितेंद्र पाल व सुरेंद्र को दो जनवरी 2016 को 951500 रुपये 32883531 रुपये, 21 दिसंबर 2015 को 27828472 रुपये 10164000 रुपये मुआवजा दिया गया। हरजिंदर कौर पत्नी सुखदेव सिंह, सुखविंदर कौर पत्नी बलदेव सिंह को 14 अक्टूबर को 7788000 रुपये,  हरजीत सिंह पुत्र जोगेंद्र सिंह आदि को 29 अक्टूबर 2015 को 19592099 रुपये, हरवंत सिंह पुत्र जोगेंदर सिंह को 12399310 रुपये, हरप्रीत कौर पत्नी हरदीप सिंह को 14 अक्टूबर 2015 को 1204500 रुपये तथा 4213000, लखविंदर सिंह पुत्र रूवैल सिंह को 14 अक्टूबर 2015 को 9168500 रुपये, 8723000 रुपये, 1908500, 1479500, 105600, 689700, 1584000, 751300, 2392500 व 22000 रुपये का भुगतान किया गया। दलजीत कौर पत्नी हरपिंदर आदि को 14 अक्टूबर 15 को 40010248, अमृतपाल सिंह पुत्र तारा आदि को 14140500 रुपये आदि को 19 करोड़ 9938486 रुपये का भुगतान किया गया।

यहां बता दें कि गदरपुर के बरीराई में खसरा संख्या 30 रकवा 0.4836 में जरनैल सिंह पुत्र सुंदर सिंह को दो करोड़ 3938200 रुपये का मुआवजा भी वर्ष 2015 में अवैध तरीके से भूमि को अकृषक कराकर जारी किया गया था। जिस पर तत्कालीन जिलाधिकारी पंकज पांडेय ने पटवारी, कानूनगो से लेकर तहसीलदार व एसडीएम तक के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी, मगर यह पत्रावली कागजों में गुम होकर रह गई। यानि अभिनिर्णय पारित करते वक्त भी डीपी सिंह तैनात नहीं थे और मुआवजा देते वक्त भी उनकी तैनाती नहीं थी। ऐसे में उन पर उठ रही अंगुली सवालों के घेरे में जरूर है। यहां चर्चा है कि डीपी सिंह ने अपने कार्यकाल में दबंगई दिखाई और सरकारी भूमि का मुआवजा ले रहे कुछ लोगों की सारी कोशिशों पर पानी फेर दिया। इसके बाद से वह सिंडीकेट और कुछ अफसरों के निशाने पर आ गए। उनके घर आयकर का छापा पड़ा। इस घोटाले में एनएचआई के अफसरों की भी मिलीभगत सामने आ रही है, क्योंकि उन्होंने किसी भी फाइल पर आपत्ति तक नहीं की और एसएएलओ द्वारा पारित अभिनिर्णय के अनुसार ही मुआवजा राशि जारी कर दी।

राष्ट्रीय राजमार्ग 74 घोटालेबाजों ने गायब की फाईले

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कांग्रेस राज का सबसे बडा घोटाला अब अधिकारियों और सफेदपोशों के लिए गले की हड्डी बन गया है। जो ना उगलते बन रहा है और ना निगलते, उधम सिंह नगर मे राष्ट्रीय राजमार्ग 74 लेंड यूज बदलने को लेकर हुए घोटाले की जडे जसपुर से भी जुडी है, जांच जैसे जैस आगे बढ रही है वैसे वैसे घोटालों का परतें खुलती जा रही हैं।118 करोड का दिखने वाला घोटाला अब 300 करोड का आंकडा छूता दिखाई दे रहा है।अधिकारियों और दलालों के सिंडीकेट से हुए इस घोटाले की शुरुवात जसपुर से ही हुई है, जहां से सबसे ज्य़ादा 143 की फाईलें सरकारी दफ्तार से घायब हैं… ।

जसपुर तहसील से जुडी भूमि अधिगृहण घोटाले की परतें अब परत दर परत खुलती नजर आ रही है, उच्च स्तरीय जांच शुरु होने के बाद जसपुर तहसील में भी हडकम्प मचा हुआ है। जहां एक तरफ फाईलों में लिपापोती की जा रही है वहीं कुछ महत्वपुर्ण फाईलें ही तहसील से गायब कर दी गयी है। जिससे करोडों के घोटालें में अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता से भी इन्कार नहीं किया जा सकता, काबिले गौर है कि जसपुर एसडीएम कार्यालय से इन्हीं मामलों से संबंधित डेढ दर्जन फाईले गुम बताई जा रही है। हाला कि एसडीएम कार्यालय ने इस के लिये तत्कालीन पेशकार को जिम्मेदार मानते हुए स्थानीय कोतवाली मे नामदर्ज रिर्पोट भी दर्ज कर दी है।

वहीं भाजपा नेता व पूर्व विधायक डा. शैलैन्द्र मोहन सिंघल शुरूवाती दौर से ही इस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की वकालत कर रहे हैं, इसी मांग को लेकर प्रधान मंत्री को भी पत्र लिख चुके हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रय राजमार्ग के साथ लगती कृषि भूमि को अनैतिक रूप से व्यवसायिक श्रेणी में दर्ज किये जाने के मामले की जाचॅ कुमाउॅ कमिशनर द्वारा की जा रही है।बताया जा रहा हे प्रारंभिक जांच मे कई अधिकारियों व कर्मचारियों की संलिप्ता का अंदेशा हे।वर्ष 2011 से लेकर अब तक कई पीसीएस अधिकारी और कर्मचारियों के साथ ही एनएच के अधिकारी भी संदेह के दायरे मे बताये जा रहे है।

चारधाम यात्रा की सुरक्षा में नहीं होगी कोई कमी-सीएम त्रिवेंद्र

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को सचिवालय में चार धाम यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यात्रा की पुख्ता व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। यात्रा की व्यवस्थाओं में लगे अधिकारियों व कर्मचारियों व पुलिस के जवानों का व्यवहार मित्रवत हो। उत्तराखण्ड से एक अच्छा संदेश जाना चाहिए। केदारनाथ व यमुनोत्री में यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए। चारों धाम व ऋषिकेश में लाईट एंड साउंड शो द्वारा चारों धाम के महत्व का प्रसारण किया जाए। यात्रा मार्ग के पांच जिलों में प्रत्येक जिलाधिकारी को 1-1 करोड़ रूपए शासन उपलब्ध करवाए।
म्ुाख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि यात्रा मार्ग में सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यात्रा मार्ग के पांच जिलों में प्रत्येक जिलाधिकारी को 1-1 करोड़ रूपए उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। यात्रा मार्ग पर संवेदनशील चिन्हित किए गए स्थानो ंपर जेसीबी, पोकलैंड व मेनपावर पहले से तैनात रखे जाएं ताकि मार्ग बाधित होने पर तुरंत खोला जा सके। मार्ग बाधित होने पर अधिकारी यात्रियों के बीच जाएं और उनके खाने पीने की व्यवस्था हो। संचार व्यवस्था को दुरूस्त किया जाए।
यात्रा में लगे वाहनों की फिटनेस आवश्यक रूप से चैक की जाए। ओवर लोडिंग, ओवर ड्राईविंग, नशे में ड्राईविंग पर सख्ती के साथ रोक हो। यह बताए जाने पर कि यात्रा के लिए लगभग 1600 वाहनों की व्यवस्था है, मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यकता होने पर अतिरिक्त वाहनों की व्यवस्था का भी प्रबंध हो। फोटोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन के लिए स्थानों की संख्या बढ़ाई जाए। लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। भविष्य में यात्रियों के रजिस्ट्रेशन के लिए आधुनिकतम तकनीक का उपयोग किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा मार्ग पर गुणवत्ता युक्त पेयजल व स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाए। जगह जगह साईनबोर्ड लगें हों जिनमें आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता व इमरजेंसी में कान्टेक्ट नम्बरों को प्रदर्शित किया जाए। यात्रा मार्ग में ढ़ाबों व रेंस्टोरेंट में क्वालिटी भेजन की उपलब्धता के लिए फूड इंस्पेक्टर लगातार चैकिंग करें। ढ़ाबों पर वस्तुओं की रेट लिस्ट लगाई जाए।
मुख्यमंत्री ने जीएमवीएन के पर्यटक आवास गृहों को सुविधाजनक बनाने के निर्देश दिए। केदारनाथ मार्ग में यात्रियों की सुविधाओं के लिए पर्याप्त व्यवस्था हो। स्वास्थ्य विभाग प्रमुख स्थानों पर जीवनरक्षक दवाईयों के साथ मेडिकल स्टाफ तैनात रखे। केदारनाथ व यमुनोत्री में यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए। चारों धाम व ऋषिकेश में लाईट एंड साउंड शो द्वारा चारों धाम के महत्व का प्रसारण किया जाए।
बैठक में केबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज, श्री प्रकाश पंत, श्री मदन कौशिक, श्री यशपाल आर्य, मुख्य सचिव श्री एस.रामास्वामी, डीजीपी श्री एम.ए. गणपति सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

31 मई तक ओडीएफ फ्री होगा प्रदेश

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को सचिवालय में पेयजल विभाग की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मियों को देखते हुए नागरिकों को पेयजल आपूर्ति की समुचित व्यवस्था अभी से कर ली जाए। जिन स्थानों में गर्मियों में नियमित तरीके से पेयजल की कमी सम्भावित  हो वहां वैकल्पिक साधनों का प्रबंध कर लिया जाए। प्रदेशवासियों को पेयजल उपलब्ध करवाने में धन की कमी नहीं आने दी जाएगी। बताया गया कि शहरी क्षेत्रों के 422 मोहल्ले व ग्रामीण क्षेत्रों की 1006 बस्तियों में पेयजल की कमी सम्भावित है। यहां टैंकरों व पर्वतीय क्षेत्रों में खच्चरों द्वारा पेयजल पहुंचाया जाता है। पावर सप्लाई बाधित होने की स्थिति में पेयजल योजनाओं के लिए जनरेटर की व्यवस्था हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले से बन रही  पेयजल योजनाएं को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए। जल प्रबंधन को ठीक किए जाने की आवश्यकता है। पेयजल विभाग टोल फ्री नम्बर सार्वजनिक करे जहां पेयजल समस्या होने पर लोग अपनी शिकायत दर्ज करवा सकें।
स्वच्छ भारत मिशन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने निर्देश दिए कि मई माह के अंत तक 100 प्रतिशत (ओडीएफ) खुले में शौच से मुक्ति का लक्ष्य पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री ने ओडीएफ घोषित किए गए गांवो की सूची उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए ताकि उनका रेंडम परीक्षण कराया जा सके। शहरों में तब्दील हो रहे ग्रामीण क्षेत्रों में भी सोलिड व लिक्विड वेस्ट मेनेजमेंट प्लान तैयार किया जाए।
बैठक में पेयजल मंत्री श्री प्रकाश पंत, मुख्य सचिव श्री एस रामास्वामी, अपर मुख्य सचिव श्री ओमप्रकाश सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम त्रिवेंद्र ने एनएच 74 घोटाले पर बिठाई सीबीआई जांच

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त्रिवेंद्र रावत ने कांग्रेस सरकार के दौरान राष्ट्रिय राजमार्ग में हुए घोटाले की सीबीआई जाँच की घोषणा की। इस मामले में 200 करोड़ रुपये का घोटाला कमिश्नर की जांच में सामने आया है। 4 तत्कालीन एसडीएम और 3 भूमि अध्यापित अधिकारी दोषी पाए गए। 6 लोगों को निलंबित किया गया, जब की 1 अधिकारी रिटायर हो चुकॆ है। पूर्व सीएम हरीश रावत की विधान सभा क्षेत्र किच्छा के अंतर्गत थे चारों एसडीएम। राजनितिक साजिश की भी बू आ रही है इस घोटाले में। ज़मीनों के मुआवज़े बांटने में हुआ था यह बड़ा खेल। 20 गुना तक बांटा गया मुआवजा तथा कृषि भूमि को अकृषि दर्शाया गया। कमिश्नर की जांच में पकड़ा गया था घोटाला। इस मामले की तह तक जाने के लिए सीबीआई जांच के निर्देश दिए गए हैं।

कुमाऊ कमिश्नर ने अधिकारियों की बृहस्पतिवार को जमकर परेड कराई और फाईलों के पुलिदे लगवा दिये। हालांकि गत दिवस शासन के निर्देश पर विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के पद से डीपी सिंह को हटा दिया गया था, मगर शुरूवाती जांच में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि श्री सिंह साजिश के शिकंजे में फंसे हुए हैं। भूमि अधिग्रहण से लेकर अभिनिर्णय पारित करने और मुआवजा वितरण का अधिकतर कार्य डीपी सिंह की तैनाती से पहले हो चुका था। अपनी दबंग छवि के कारण डीपी सिंह सिंडिकेट व अफसरों के निशाने पर हैं।

चर्चा है कि डीपी सिंह ने अपने कार्यकाल में दबंगई दिखाई और सरकारी भूमि का मुआवजा ले रहे कुछ लोगों की सारी कोशिशों पर पानी फेर दिया। इसके बाद से वह सिंडीकेट और कुछ अफसरों के निशाने पर आ गए। उनके घर आयकर का छापा पड़ा। इस घोटाले में एनएचआई के अफसरों की भी मिलीभगत सामने आ रही है, क्योंकि उन्होंने किसी भी फाइल पर आपत्ति तक नहीं की और एसएएलओ द्वारा पारित अभिनिर्णय के अनुसार ही मुआवजा राशि जारी कर दी। इसकी पृष्ठभूमि में सरकारी भूमि का मुआवजा लेने वालों के मंसूबे नाकामयाब करने की बात भी चर्चा में हैं।

पिथौरागढ़: थल तहसील, में हस्तशिल्प कला का प्रशिक्षण शिविर जारी

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थल तहसील, के उतरा पथ सेवा संस्थान में विभिन्न स्वयं सहायता समूह की महिलाओं व पुरुषों का हस्तशिल्प कला का प्रशिक्षण शिविर जारी है। प्रशिक्षण के तहत रिंगाल व बांस से विभिन्न दैनिक उपयोग की वस्तुएं बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के गुर सिखाए गए।

मास्टर ट्रेनर राजेश लाल द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को रिंगाल व बांस से पैन स्टैंड, फूल बास्केट, पूजा टोकरी, लैंप सैट, झूमर आदि दैनिक प्रयोग में आने वाली वस्तुएं बनाने की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। संस्थान के इस प्रयास से खासकर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।

महिलाओं द्वारा प्रशिक्षण का भरपूर लाभ उठाकर स्वयं द्वारा बनाए गए उत्पादों को बाजार में बेचकर अपनी आजीविका चलाई जा रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान जिला विकास प्रबंधक नाबार्ड पुनीत नागर, संस्थान के पंकज कार्की, निर्मल पंत, राधा खनका आदि मौजूद थे।

सहसपुर विधानसभा क्षेत्र में प्लास्टिक से बनेंगी सड़कें

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दून में प्लास्टिक की सड़क बनाने का प्रयोग सफल होने के बाद लोक निर्माण विभाग अब ग्रामीण क्षेत्रो में प्लास्टिक की सड़क बनाने की तैयारी में है। इस माह सहसपुर क्षेत्र में इस तरह की सड़कें बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
यह पहल एक साल पहले लोनिवि प्रांतीय खंड ने की थी। कनक चौक से सर्वे चौक के बीच प्लास्टिक की सड़क बनाई गई थी, यह प्रयोग सफल रहा। लोनिवि प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता देवेंद्र शाह ने बताया कि सहसपुर क्षेत्र में करीब 9 किलोमीटर लंबी प्लास्टिक की सड़क बनाई जाएंगी। लोनिवि के पास इस समय 12 टन प्लास्टिक है, जो इसके लिए पर्याप्त है। सहसपुर- शंकरपुर से भाऊवाला तक 2.6 किमी, नन्दा की चौकी से कंडोली तक 1.5 किमी, दूंगा चौक से घास मंदिर तक 1.5 किमी तक, सुधोवालासे भद्रकाली मंदिर तक दो किमी और होरावाला क्षेत्र में 1.5 किमी प्लास्टिक की सड़क बनेगी।

देहरादून जिला पंचायत बैठक में हुई बजट पर चर्चा

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जिला पंचायत सभागार में जिलापंचायत समिति की बैठक अध्यक्ष चमन सिंह की अध्यक्षता में की गयी। बैठक में विधायक धर्मपुर/मेयर देहरादून विनोद चमोली ने भी भाग लिया। सदन ने जिला पंचायत देहरादून के पुराने बजट वर्ष 2016-17 के कुल बजट 48 करोड़ 49 लाख 61 हजार 4 सौ 81 रू0 और  वर्ष 2017-18 के अनुमानित बजट 54 करोड़, 9 लाख, 97 हजार, 4 सौ 81 रू0 का जांच किया गया।
बैठक में जनपद स्तरीय अधिकारियों द्वारा अपने-2 विभागों की विकास कार्यों से सम्बन्धित जानकारी दी गयी तथा मा सदस्यों ने विचार – विमर्श किया गया। विभिन्न सदस्यों ने शिकायत की, कि बैठक का एजेंडा सदन के सदस्यों को पहले से प्राप्त नही कराया गया, जबकि पंचायत एक्ट में बैठक से 15 दिन पूर्व एजेंडा भेजने का प्रावधान है। बहुत से सदस्यों द्वारा मांग की गयी कि क्षेत्र में विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं द्वारा कार्य करते समय स्थानीय प्रतिनिधियों को विश्वास में लिया जाये तथा इस प्रकार की मांग हर बैठक में की जाती रही है, जिस पर कोई संज्ञान नही लिया जा रहा है। सदस्यों ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई जगह बड़ी संख्या में अनावश्यक/अनाधिकृत स्पीड बे्रकर लगाये जाने पर नाराजगी व्यक्त की, जिस पर जिला पंचायत अध्यक्ष चमन सिंह ने सड़क सुरक्षा समिति के माध्यम से अनाधिकृत स्पीड बे्रकर को हटाये जाने के निर्देश लो.नि.वि को दिये। उन्होने सड़क मार्ग पर पैराफिट को मानक के अनुसार लगाने तथा  रोड की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए जहां भी रोड़ के किनारे अतिक्रमण किया जाता है उसे तत्काल हटाये जाने के निर्देश दिये।
बैठक में विधायक धर्मपुर/मेयर विनोद चमोली ने लो.नि.वि के अधिकारियों को शिमला बाईपास वाली सड़क के चैड़ीकरण को प्लान में सम्मिलित करते हुए प्रस्ताव निर्मित करने के निर्देश दिये, साथ ही कहा कि अगर तय सीमा से अधिक जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो उसी अनुपात में मुआवजा भी प्रदान किया जाये।
क्षेत्र पंचायत सदस्य ने ब्लाक कालसी के अन्तर्गत आने वाली बहुत सी नहरें ऐसी जगर पर निर्मित करने की शिकायत की जहां पर पानी की कोई निकासी/स्त्रोत ही नही है तथा सदन द्वारा इस बात पर बल दिया गया कि आगे कोई भी प्रस्ताव स्वीकृत करने से पूर्व उसकी रचनात्मकता तथा उपयोगिता का ध्यान रखते हुए कार्य किया जाये, जिससे बजट अनावश्यक रूप से खर्च न हो पाये। सदन द्वारा  सिंचाई, लघु सिंचाई, पेयजल, जल निगम व जल संस्थान आदि विभागों द्वारा सिंचाई तथा पेयजल से सम्बन्धित नये निर्माण तथा मरम्मत के कार्यों में प्रस्ताव निर्मित करने के पश्चात कार्य करते समय सभी विभाग से गुणवत्ता व पारदर्शिता पर ध्यान देने पर बल दिया गया।
इस  अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष डबल सिंह भण्डारी, ब्लाक प्रमुख रायपुर एवं सहसपुर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चैहान, जिला विकास अधिकारी, परियोजना प्रबन्धक आई.आर.डी.ए राजेन्द्र सिंह सहित मा जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

शहर के नदी गांव में नकाबपोश लुटेरों ने मचाया आतंक

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बागेश्वर। शहर के नदी गांव में नकाबपोश लुटेरों ने आतंक मचा रखा है। रात के अंधेरे लुटेरों का यह गैंग लोगों को अपना शिकार बना रहा है। मामले में आज तमाम लोग एसपी सुखबीर सिंह से मिलने पहुंचे और ज्ञापन दिया।

मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी सुखबीर सिंह ने जांच के आदेश दे दिए है। लोगों का कहना है लूटपाट करने वाले अभी तक कई लोगों को लूट का शिकार बना चुके है।

नशेड़ी प्रवृत्ति के ये युवक महिलाओं से छेड़छाड़ भी कर रहे है। बीते दिनों युवकों ने रात दरवाजा खटखटा कर एक महिला से छेड़छाड़ की कोशिश की। शोर मचाने पर युवक मौके से फरार हो गए। युवक लोगो के मोबाईल और नगदी लूट रहे है।