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पलायन रोकने कि लिए सभी जरुरते होंगी पूरीःसीएम त्रिवेंद्र

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मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ग्रामीण पर्यटन, कृषि व आजीविका पर सेमीनार को संबोधित किया। रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड के महत्व को देखते हुए पलायन को रोकना अति आवश्यक है। सेमीनार में लंदन बिज़नेस स्कूल के प्रतिनिधि ने भाग लिया साथ ही अलग अलग 24 देशों के छात्र भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता उसे बहुत ही खास पहचान दिलाती है। स्विट्ज़रलैंड की तर्ज पर यहां पर्यावरण को सरंक्षित रखते हुए पर्यटन को विकसित किया जा सकता है। सीएम ने कहा की देहरादून में एक टूरिज्म विलेज विकसित किया जा सकता है, जहां पुरे राज्य की झलक मिल सके।
सीएम रावत के संबोधन में स्वच्चता और पर्यावरण संरक्षण मुख्य बिंदु थे।उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बायोडाइवर्सिटी टूरिज्म, विंटर स्पोर्ट्स टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म रूरल होम स्टे व हेरिटेज टूरिज्म की अपार सम्भावनाये हैं।सीएम रावत ने कहा कि पलायन को रोकने के लिए रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य की सुविधाएं उपलब्ध होंगी जिससे युवा वर्ग। और यहां की जनता को राज्य से बाहर जाने की जरुरत नही पड़ेगी। इसके साथ ही सीएम ने कहा कि एग्रीकल्चर सेक्टर व प्लांटेशन का बढ़ावा देना होगा जिससे ना केवल शहरी क्षेत्र बल्कि ग्रामीण क्षेत्र भी विकास की राह पर आगे बढ़ सके।
त्रिवेंद्र ने यह भी कहा कि राज्य के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में लोगो की आय वृद्धि बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देना होगा। उत्तराखंड के प्राकृतिक रूप से आर्गेनिक खेती होती है।अगर चकबन्दी कर सकें तो खेती लाभदायक बनाया जा सकता है।वहीं सेमिनार में मौजूद पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि पहाड़ो से पलायन को रोकने के लिए इन छात्रों  के विचार,अनुभव काफी कारगार होगें।
सीएम त्रिवेंद्र की बातों से एक बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह भी पीएम मोदी की राह पर चल पड़े हो चाहें वह स्वच्छता हो, या डिजीटल हो या ग्रामीण विकास हो।लेकिन अभी तो केवल शुरुआत है, यह देखना ज्यादा महत्तवपूर्ण होगा कि आगे आने वाले समय में भी क्या सीएम इस मजबूती और गति से काम करते हैं कि नहीं।

चैत्र नवरात्र से बढ़ी बाजारों में रौनक,चैत्र शुक्लप्रतिपदा से हिन्दू नववर्ष का आरम्भ

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आज से माँ दुर्गा के नौ रूपों यानी नवरात्रों का प्रारंभ हो गया है चैत्र माह से शुरु होने वाले इन नवरात्रो का विशेष महत्व है।आज घरों में माँ दुर्गा के शैलपुत्री रूप की पूजा की जा रही है,लोग व्रत आदि रखकर माँ दुर्गा से खुशहाली की कामना करते हैं। वहीं ऋषिकेश में नवरात्र कुछ अलग रंग भी देखने को मिले यहाँ विदेशियों ने नवरात्र के महत्व के विषय में जाना।सौम्य नाम विक्रम संवत 2073 के शुभारम्भ पर आज नवरात्र का पहला दिन है।मंदिरों में दुर्गा के रूप माँ शैली पुत्री की पूजा हो रही है। पर्वत पुत्री होने के कारण माँ दुर्गा के इस स्वरुप को शैल पुत्री का नाम मिला है माँ का वास पर्वत पर है इस कारण वह प्रकृति की अधिशष्टि है जो पूर्व जन्म में महाराजा दक्ष की पुत्री थी। गंगा तट पर ऋषिकेश में सुबह से स्नान कर लोग माँ के दर्शन कर रहे है और घरो में हरियाली लगाई जा रही है।

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नवरात्र के चलते बाजारों में रौनक बढ़ गयी है।बाजारों में पूजन सामग्री की दुकानो में काफी भीड़ नजर आ रही है। बाजार में फलों के साथ साथ जौ और नारियल  की कीमतों में उछाल आ गया है। चैत्र  नवरात्र शुरू होने के साथ ही हिन्दू नव वर्ष भी आरम्भ हो जाता है और घरो में व्रत रख हरियाली बोई जाती है और राम जन्मोत्सव मनाया जाता है। ऋषिकेश में भी नवरात्रो के इस पर्व की शुरुवात श्रद्धालुओं ने बड़े उत्साह से की सुबह से ही गंगा स्न्नान के साथ ही माँ दुर्गा के पहले रूप शैलपुत्री की पूजा की।नवरात्र को लेकर विदेशियों में भी काफी उत्साह दिखा उन्होंने गंगा में स्न्नान कर नवरात्रों के महत्व के बारे में जाना आज से हिन्दू संवत के नए साल के साथ साथ नवरात्र का शुभारम्भ हो गया है। आज माँ दुर्गा के पहले रूप शैलपुत्री की पूजा की जा रही है , श्रद्धालु नवरात्र के इन नौ दिनों में व्रत रखकर सुख समृद्धि  कामना करते है।

उत्तराखंड की शादियों में स्वागत करेगा ”महिला बैंड”

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जल्द ही उत्तराखंड की शादियों और मांगलिक कार्यों में महिला बैंड पौराणिक वाद्य यंत्रों को बजाती नजर आएंगी। प्रदेश से ढोल दमाऊ की खत्म होती परंपरा को बचाने के लिये लोक गायिका माधुरी बड़त्थवाल ने अपनी एक टीम बनाकर उसे ढोल और दमऊं का प्रशिक्षण दे रही हैं। महिलाओं के ढोल बजाने को सांस्कृतिक और सामाजिक बदलाव के एक अहम पड़ाव के रूप में भी देखा जा रहा है।

आपको बता दें कि माधुरी बड़थ्वाल ने 32 साल आकाशवाणी में काम किया है, वहां से रिटायर होने के बाद जब वह देहरादून आई तो उन्हें शादियों और मंगल कार्यक्रमों में कुछ कमी लगती थी। वो कमी थी परंपरागत ढ़ोल व दमाऊ की आवाज।लेकिन माधुरी के प्रयास से ढ़ोल की थाप पहाड़ी इलाकों में महिला सशक्तीकरण की गूंज पैदा कर रही है।आपको बता दें कि महिलाओं का ढ़ोल थामना रुढ़ियों को चुनौती है क्योंकि ढोल वादन परंपरागत रुप से औजी समाज के पुरुषों का पेशा है।

प्रशिक्षण ले रहीं महिलाएं

गौरतलब है कि उत्तराखंड से पलायन के साथ वहां की लोक संस्कृति भी खत्म होती जा रही है। प्रदेश से खत्म होती संस्कृति को बचाने का जिम्मा अब महिलाओं ने उठाया है। माधुरी करीब 20 महिलाओं की एक टीम बनाकर उन्हें वाद्य यंत्रों को बजाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। टीम जल्द ही शादी ब्याह में ढोल-दमाऊं एक पेशेवर की तरह बजाती नजर आएगी।

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माधुरी को यह प्रेरणा एक शादी के दौरान ही मिली। शादी उत्तराखंड की रीति रिवाजों के मुताबिक हो रही थी लेकिन उस शादी से पारंपरिक वाद्य यंत्र पूरी तरह से गायब थे। आपको बता दें कि पहाड़ में ढोल-दमाऊं बजाने का काम बाजगी समाज के जिम्मे है। जो सदियों से यह काम करते आए हैं। उनके लगाए मंडाण पुरानी पीढ़ी के जेहन में तो हैं, मगर पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव कहें या लोगों का अपने इलाके से दूरी नई पीढ़ियों को उस संस्कृति से दूर करती जा रही है। इस वजह से प्रदेश के पुराने वाद्य यंत्र भी खत्म होने के दहलीज पर पहुंच गए हैं।इस बात को ध्यान में रखते हुए गायक माधुरी बड़थ्वाल ने पहली बार महिलाओं का ढ़ोल बैंड बनाया है।

उम्मीद यही है कि माधुरी के इस प्रयास से न सिर्फ़ पारंपरिक वाद्यों की लुप्त होती कला बच सकेगी बल्कि समाज में महिलाओं को बराबरी पर लेने में भी ये प्रयास अहम भूमिका निभायेगा।

 

उत्तराखंड की ख़ुशबू को देश विदेश तक पहुंचा रहा है ”पांडवाज़ ग्रुप”

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कहते हैं कि अगर हौंसला हो तो कोई मंज़िल दूर नही होती। इसी कहावत को चरितार्थ किया श्रीनगर के तीन भाईयों की जोड़ी ने। ईशान, कुणाल और सलिल डोभाल ने उत्तराखंड के लोक संगीत को देश और दुनिया के संगीत के चाहने वालों तक पहुँचाने की ठानी। यही नहीं इस संगीत को मार्डन धुनो के साथ सँवार कर आज के युवा वर्ग के लिये भी प्रासंगिक बना दिया।

एक सपना देखा और उस सपने को सच बनाने के लिए उस पर काम किया। 2010 से एक कमरे के स्टूडियों में संगीत रिकार्ड करने से लेकर हर तरह के संगीत से जुड़े प्रयोग किए जाते रहे हैं।

सबसे पहले, स्टूडिओ खोलने का ईशान ने सोचा, ईशान डोभाल को संगीत में प्रयोग करना पसंद है। कुछ ऐसे नये प्रयोग जो की पैसे की कमी की वजह से दिल्ली या मुंबई के स्टूडिओ में करना मुश्किल था।इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए ईशान ने अपनी प्रयोगशाला श्रीनगर गढवाल में बनायी।समय के साथ धीरे धीरे लोगों को ये नये प्रयोग पसंद आने लगे और स्टूडिओ में गढ़वाली फ़ोल्क म्यूज़िक प्रोडक्शन का काम आना शुरू हो गया । फिर कुणाल डोभाल ने विडियो प्रोडक्शन का बीड़ा उठाया और सलिल डोभाल ने फोटोग्राफी की कला से सहयोग देना शुरु किया।ये सब 2010 में शुरू हुआ जब इनके स्टूडियो मॆ लोग दिल्ली में रिकॉर्डिंग करवाना पसंद नही करते थे, 22-23 साल के लड़के जिन्होंने आजतक एक भी गाना नहीं बनाया ना किसी के साथ काम करने या सीखने का अनुभव लिया, उन पर आसानी से कोई भी विश्वास नहीं करता था।

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ईशान बताते हैं कि 6 महीनों तक निक्म्मे पड़े रहने के  बाद काम आया वो भी रेडिओ नाटक का और फिर काम आता रहा। ईशान ने अभी तक 50 से ज्यादा गढ़वाली एल्बम और 10 हिंदी सिंगल गीत किए हैं इनमे सबसे ज्यादा फ़ेमस गीत मेरी गाजिना, फ़्योलाड़िया, सुन जा बात मेरी हाँ, (दूसरे गायकों के लिए संगीत निर्देशन के रूप में)। पाण्डवाज़ के ख़ुद के सबसे फ़ेमस प्रोडक्शन (यू ट्यूब के लिए) ढ़ूढता हूं तुझे (2013) रंचणा (2014) उड़ने दो 2014 तीन चीजें 2015 गढ़वाली कविता सिरीज़ (11 कवि 11 कवितायें) (2016) टाईम मशीन 1 (घुघुती बसुती) (2016), टाईम मशीन 2 (फुलाणी) (2017)। पांडवास के मुखिया ईशान का कहना हैं, कि वह किसी के साथ भी काम करने की इच्छा रखते, आख़िर हमारा काम तो परदे के पीछे का ही है।” ईशान कहते हैं।” यू ट्यूब के लिए जल्द ही गढ़वाली शॉर्ट मूवीज़ बनाएँगे  और उसके बाद शायद फ़ुल लैंन्थ फ़ीचर फ़िल्म भी बनायेंगे। फ़िलहाल तो टाईम मशीन के आने वाले पार्ट्स पर ही फ़ोकस है और गढ़वाली कविता सीज़न 2 का दर्शकों को बेसब्री से इंतज़ार है वो भी 2017 में ही लांच होगी।”

‘टाईम मशीन’ कॆ स्पांसर दिल्ली और न्यूजीलैंड से कुछ लोगों ने की हैं , जिसने हमारे लिए संजीवनी का काम किया है। ईशान कहते हैं, “ये लोग ना अपना नाम चाहते हैं ना हम पर खुद को सिंगर या एक्टर बनाने का दबाव डालते हैं, यह लोग उत्तराखंड की सेवा करना चाहते हैं।”

इसके अलावा डा.दाताराम पुरोहित जिन्होंने गढ़वाल की संस्कृति को संजोने और उसको बढ़ाने का काम किया है वो कहते हैं, “आजकल का युवा वर्ग नए प्रयोग कर रहा है। यह बहुत अच्छी बात है, लेकिन एक सुझाव डा. पुरोहित देते हैं, ‘कि कापीराइट के महत्व को समझना चाहिए, और इसको ध्यान में रखते हुए लोक संगीत की परंपरा को उससे अलग करके नहीं बढ़ाना चाहिए”।

 

जिलाधिकारी दीपक रावत ने तहसील परिसर में छापेमार कार्रवाई की, सात दुकानॆ सील

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हल्द्वानी, डीएम दीपक रावत ने औचक निरीक्षण करते हुए तहसील के लाइसेंस पर बाजारों में दूकान खोल कर स्टाम्प बेचने वाले दुकानदारों के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए आधा दर्जन स्टाम्प विक्रेताओं के दफ्तरों को सीज कर दिया।

बताया जा रहा है की लंबे समय से शिकायतें मिल रही थी की निर्धारित मूल्य से अधिक पर स्टाम्प बिक्री किये जा रहे थे, अल्मोड़ा के एक फरियादी के शिकायत पर जिलाधिकारी दीपक रावत ने तहसील परिसर में छापेमार कार्रवाई की।

दुकानों पर छापामारी से ई-स्टॉम्प का धंधा करने वालों में खलबली मच गई। छापेमारी कार्रवाई के दौरान पता चला कि तहसील परिसर के अंदर बहुत से लोग बिना लाइसेंस के स्टॉम्प की बिक्री कर रहे थे। डी एम् ने सभी विक्रेताओं के लाइसेंसों को रद्द करने के दिए निर्देश।

सीएम और मंत्री होंगे लोकायुक्त के दायरे में

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उत्तराखंड में प्रचंड मतों से और जनता के भरोसे से सत्ता में आयी भाजपा सरकार अब भ्रष्टाचार को भी जड़ से उखाड़ना चाहती है। इसलिए 2011 में खंडूरी सरकार के जमाने में पास हुए लोकायुक्त एक्ट को लेकर फिर सामने आई है और एक बार फिर इसे विधानसभा में पेश कर दिया गया है। भ्रष्टाचार पर युद्ध और भ्रष्टाचारियों को सामने लाने की मुहिम सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पहले ही छेड़ दी है।बिना यह सोचे की सीएम और उसके मंत्री भी इस एक्ट के अंर्तगत आऐंगं सीएम रावत ने यह एक्ट लागू करने का मन बना लिया है। इस एक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सीएम और उसके मंत्री भी इसके दायरे में होंगे।
आपको बता दें कि 2012 में विजय बहुगुणा की सरकार ने अपने हिसाब से लोकायुक्त एक्ट पारित किया था, जिसमें सीएम को इसके दायरे से बाहर कर दिया गया था। मगर त्रिवेंद्र सरकार ने सीएम को उसके अधीन रखकर यह जाहिर करने का इरादा जताया है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ वाकई में सख्त कदम उठाना चाहते है।
कुछ इस तरह का होगा लोकायुक्तः
एक अध्यक्ष, जो मुख्य न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं। या, एक विख्यात व्यक्ति, जिसकी भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों, सार्वजनिक प्रशासन, सतर्कता, वित्त, कानून और प्रबंधन से संबंधित विषयों में 25 से अधिक वर्षों की विशेषज्ञता है।
अधिकतम चार सदस्यों, जिनमें से 50 प्रतिशत न्यायिक सदस्य होंगे। लेकिन, लोकायुक्त सदस्यों का 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाओं से होगा।
लोकायुक्त के मुख्य बिंदु-
किसी भी मामले में, प्रारंभिक जांच या निरीक्षण के लिए निर्देश दे सकते हैं।
लोकायुक्त की अनुमति के बिना अधिकारी को स्थानांतरित करना संभव नहीं है।
किसी भी मामले में वकील के अलावा अन्य वकीलों का एक पैनल बना सकते हैं,
जांच करते समय लोकायुक्त को सिविल कोर्ट की सभी शक्तियां प्राप्त होंगी।
इन्हें लोकायुक्त बनाया नहीं जा सकता-
संसद के किसी भी सदन के सदस्य, किसी भी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के विधानमंडल का कोई सदस्य नहीं होगा।
अपराध के दोषी व्यक्ति को लोकायुक्त संस्था का सदस्य नहीं बन सकता है।
45 वर्ष से कम उम्र के कोई व्यक्ति लोकायुक्त संस्था का हिस्सा बनने में सक्षम नहीं होगा।
किसी भी पंचायत या नगर पालिका का कोई सदस्य लोकायुक्त संस्था का हिस्सा नहीं होगा।
एक व्यक्ति जिसे संघ या किसी भी राज्य की सेवा से हटा दिया गया है।
एक राजनीतिक दल या व्यापारी से संबंधित व्यक्ति
यदि ट्रस्ट या लाभ का पद आयोजित किया जाता है, तो ऐसे व्यक्ति पद से पहले इस्तीफा दे देंगे।

राज्यपाल ने ‘गरीब नवाज ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती’ के 805 वें उर्स के लिए पेश किये अकीदत के फूल और चादर

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उत्तराखण्ड के राज्यपाल डाॅ. कृष्ण कांत पाल ने आज उत्तराखण्ड में  सुख-समृद्धि, खुशहाली और अमन-चैन, सांप्रदायिक सौहार्द्ध की दुआ के लिए ’’सूफी संत ख्वाजा गरीब नवाज मोईनुद्दीन चिश्ती’’ की मजार (अजमेर शरीफ) में होने वाले 805 वें उर्स के अवसर पर चादर और फूलों की पेशकश भेजी।
इस मौके पर अजमेर शरीफ में एकत्र होने वाले विश्वभर के जायरीनों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत में सूफी संतों ने सदैव आपसी सौहार्द, भाई-चारे तथा शान्ति का संदेश दिया है जो हमारी राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक व सामाजिक सद्भावना का प्रतीक है। गरीब नवाज द्वारा की गई मानवता की सेवा सभी के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
राज्यपाल की ओर से चादर और फूलों की यह पेशकश कलियर शरिफ उर्स संयोजक व उत्तराखण्ड नागरिक सम्मान व सद्भाव समिति के सचिव शायर अफजल मंगलौरी द्वारा अजमेर शरीफ पहुँचाई जाएगी।

नशे से लड़ने को बनाएंगे एंटी ड्रग एम्बेसडर

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नशा हमारी युवा पीढ़ी को अंदर से खोखला करता जा रहा है। स्कूल से लेकर कॉलेज तक के छात्र नशे की चपेट में आ चुके हैं। ऐसे में दून विश्विद्यालय ने एक कदम बढ़ाते हुए विवि में एंटी ड्रग एम्बेसडर बनाने का फैसला किया है। यह एंटी ड्रग एम्बेस्डर विश्वधायल में नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ने और जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे।
बीते कुछ वक्त में प्रदेश में नशीले पदार्थो के सेवन और तस्करी के मामले बड़ी मात्रा में सामने आए हैं। ऐसे में शिक्षण संस्थानों में नशे के खिलाफ मुहिम की आवश्यकता है। इसी को देखते हुए यू.जी.सी ने भी संस्थानों को अपने स्तर पर नशे के खिलाफ विशेष अभियान छेड़ने के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं।
दून विश्विद्यालय के डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. एच.सी पुरोहित का कहना है कि युवा वर्ग लगातार नशे की चपेट में आ रहा है। जिस कारण उनका करियर चौपट हो रहा है। मादक पदार्थो के सेवन का प्रचलन किसी भी सभ्य समाज के लिए आपत्तिजनक होना चाहिए। इसी के तहत विश्विद्यालय में छात्रों के बीच से ऐसे छात्र चियेनित किये जायेंगे जो नशे के खिलाफ इस मुहीम को आगे बढ़ाएंगे।
विवि में बनाई जाने वाली एंटी ड्रग कमेटी में शामिल छात्र विश्विद्यालय के साथ ही बाकी संस्थानों में भी मादक पदार्थो के सेवन की प्रवति के दुष्प्रभावों की जानकारी देंगे। इसके लिए सेमीनार कांफ्रेंस और नुक्कड़ नाटक के साथ विभिन्न गतिविधयों आयोजित की जाएँगी। ताकि युवाओ को ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जा सके।

लड़कियों की शादी में ”मांगटीका” होगा टिहरी विधायक धन सिंह नेगी का तोहफा

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टिहरी विधानसभा क्षेत्र से विजयी हुए धन सिंह नेगी ने एक ऐसी पहल की है जो उत्तराखंड राज्य के लिए बड़ी अहम पहॆल है।आपको बता दें कि बीजेपी की प्रचंड बहुमत वाली सरकार में टिहरी से जीतने वाले विधायक धन सिंह नेगी ने चुनाव जीतने के बाद यह ऐलान किया है कि अपने वेतन का आधा खर्चा वह विधवा और निराश्रित महिलाओं की बेटियों की शादी में खर्च करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जरुरतमंद लोगों का चुनाव वह खुद करेंगे।

गौरतलब है कि विधायक बनने के साथ ही धन सिंह नेगी ने क्षेत्र के विकास के साथ ही गरीबों के भले का काम करना भी शुरु कर दिया है।विधायक नेगी ने इस बात का ऐलान कर दिया है कि गरीब बेटियों की शादी में वह खुद मांगटीका देंगे।आपको बता दें कि उत्तराखंड की परंपरा में मांगटीका एक अलग और महत्तवपूर्ण स्थान है।मंगटीका महिलों के श्रृंगार का अभिन्न अंग तो है ही साथ ही उत्तराखंड की परंपरा के अनुसार लड़की की शादी में लड़की के मामा उसको उपहार के तौर पर यह मांगटीका देते हैं जिसको पहना कर लड़की की विदाई की जाती है।

विधायक धन सिंह नेगी के सौजन्य से यह बेहतरीन काम 1 अप्रैल से शुरु हो जाएगा।इसके साथ ही टिहरी को विकास की राह पर आगे बढ़ाने के लिए नेगी ने कदम उठाने शुरु कर दिए हैं।इको टूरिज्म के क्षेत्र में टिहरी का स्थान आगे बढ़ाने के लिए जुलाई महीने से बांज, परांश और देवदार के पौधों का रोपण किया जाएगा।साथ ही नई टिहरी में चिड़ियाघर और जंगली जानवरों के लिए रेस्कयू सेंटर भी बनाए जाऐंगे।

विधायक नेगी के विकास की लिस्ट में नया पिकनिक स्पाट, जनता को रोज लगने वाले जाम से छुटकारा दिलाने के लिए मल्टीस्टोरी पार्किंग के निर्माण की बात और उसके लिए डीएम को भूमि चिन्हित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही आने वाले दो साल में सारज्यूला, कोशियारताल और काणाताल पंपिंग योजनाओं का निर्माण भी पूरा करवाने की बात विधायक धन सिंह नेगी ने की है।

इन सबके साथ ही रानीचौरी और चंबा पेयजल योजना,निर्माणधीन बौराड़ी स्टेडियम,टिहरी बांध प्रभावित लोगों को भूमि आवंटन आदि पर काम करना विधायक का मुख्य लक्ष्य है।

उत्तराखंड पुलिस अब टिव्टर पर

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पीएम मोदी के डिजीटल इंडिया की राह पर चलने वाले लोग जुङते जा रहें हैं।पहले उत्तराखड के सीएम त्रिवेंद्र ने टिव्टर पर अपने एकाउंट को सार्वजनिक तौर पर लोगों के सुझाव के लिए खोल दिया है।अब लोगो से जुड़ने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने भी अपना टिव्टर अकाउंट खोल दिया हैं।

डीजीपी एम.ए गणपति ने बताया कि अब उत्तराखंड पुलिस का जनता के लिए समर्पित एक टिव्टर अकाउंट होगा जिससे वह लोगों से सीधे आनलाईन जुड़ सेकंगे।उन्होंने बताया कि हम जल्दी ही उत्तराखंड पुलिस का एक आफिशियल टिव्र्टर हैंडल शुरु करने वाले हैं जिसके जरिए लोगों के साथ बातचीत के साथ लोग पुलिस से जुड़ी अपनी परेशानियां भी बता सकते हैं। डीजीपी गणपति ने बताया कि इन सभी संदेशो को पढ़ने व इनका उत्तर देने के लिए एक सर्मपित स्टाफ का गठन होगा।

स्टाफ इन संदेशों को रिसीव करके इनको संबंधित अधिकारियों को पहुंचाने के साथ ही, लोगों की परेशानियों का सामाधान भी बताऐंगे और शिकायतों को अपडेट भी करेंगे।इस समय उत्तर प्रदेश पुलिस,मुंबई, दिल्ली, झारखंड पुलिस सोशल साइट टिव्टर पर एक्टिव हैं।डीजीपी गणपति ने बताया कि पहले टिव्टर हैंडल के रिस्पांस को चैक करने के बाद जिला पुलिस मुख्यालयों को भी टिव्टर पर अकाउंट बनने के निर्देश दिए जाऐंगे।

उत्तराखंड पुलिस ने लोगों से जुड़ने व जनता से ज्यादा तालमेल बिठाने के लिए अपना टिव्र्टर अकाउंट शुरु करने का फैसला किया है अब यह कितना लाभदायक होगा, यह तो समय ही तय करॆगा।