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लेंस से यादें संजोते: मुकेश खुग्साल

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मुकेश खुग्साल एक ऐसा नाम है जो कम उम्र में अपने नाम से ही पहचाने जाते हैं।गले में केनन 5-डी और 6-डी टांगे हुए मुकेश को उत्तराखंड के किसी भी ऐसी जगह देखा जा सकता है जहां तस्वीरों से कोई कहानी बयां की जा सके।फिर चाहे वो उनके क्षेत्र में हो या उत्तराखंड से बाहर। वैसे तो मुकेश की पैतृक जड़े पौड़ी से हैं, लेकिन उनके माता पिता अपने शुरुआती दिनों में ही दिल्ली शिफ्ट हो गये थे। दिल्ली में उनके पिता सुरेंद्र खुग्साल सरकारी विभाग में कार्यरत थे और उनकी मां गोदावरी हाउस वाईफ हैं।

मुकेश का तस्वीरों की दुनिया से पहला सामना अपने चचेरे भाई को देखकर हुआ जो फोटोग्राफी की दुनिया में अपनी मंज़िल तलाश रहे ते।मुकेश उनसे बहुत प्रभावित थे और फोटोग्राफी की दुनिया में जाने के लिए अपना मन बना चुके थे। दिल्ली यूनिर्वसिटी से आर्ट स्ट्रीम में डिग्री लेने वाले मुकेश बताते हैं कि “मुझे लेंस के पीछे काम करने का लगभग 15 साल का अनुभव हैं, और मैं फोटो क्लिक करने से ज्यादा फोटो बनाने में विश्वास रखता हूं। मुझे असली भावनाएं और यादें अपने कैमरे में कैद करना पसंद हैं जिसको देख कर लोग अपनी पुरानी यादों में वापस जा सके।”

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मुकेश फोटोग्राफी में कैमरे को रोल से अाजडिजीटल होते देखा है और बदलते समय के साथ उन्होंने पैंटेक्स कैमरे का इस्तेमाल भी किया है और आज टेक्नालीजी के साथ चलते हुए सबसे बेहतरीन रेंज के कैमरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। मुकेश बताते हैं कि “मैंने फोटोग्राफी की शिक्षा किसी और से नहीं बल्कि खुद से ली है,और इस प्रोफेशन ने मेरा अपने इर्द-गिर्द चीजों को देखने का नज़रिया बिल्कुल बदल दिया है। मैं अपनी आस-पास की चीजों में हमेशा कुछ नया तलाशने की कोशिश करता हूं,और प्रकृति की सुंदरता को एक सुलझे हुए मनुष्य की तरह अपने कैमरे में कैद करने में विश्वास रखता हूं।”

मुकेश ने फोटोग्राफी में पारंगत हासिल की है और अपना दायरा केवल लैंडस्केप, वाईल्ड लाईफ और मानयूमेंटल फोटोग्राफी तक सीमित नहीं रखा। फोटोग्राफी की दुनिया में कदम रखने के बाद लगभग हर क्षेत्र चाहें वो पोर्टफोलियो, इंडस्ट्रीयल फोटोग्राफी, कार्पोरेट, वेडिंग, फैशन शो और लाईव शो में भी फोटोग्राफी की है।

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नंदा देवी राज जात में मुकेश के कैमरे से ली हुई एक फोटो पेरिस में आयोजित तीसरे ग्लोबल लैंडस्केप फोरम-दिसंबर-2015 के एक्जिबिशन में दिखाई गई थी जहां उन्हें बहुत सराहना मिली। मुकेश द्वारा किए गए कार्य में “फारेस्ट फ्राम वेयर वी गेट फूड फार आवर एनिमलस सो दैट वी कैन सरवाईव” को भी 2012 में गैंगटोक में आयोजित दूसरे इंडियन माउंटेन इनिशिएटिव सम्मीट में काफी प्रोत्साहन मिला था।

मुकेश ने इन सालों में कई कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों में हिस्सा लिया है जिसमें 2015 में मसूरी मे आयोजित मसूरी राईटर माउंटेन फेस्टिवल, नंदा देवी- ए स्टोरी आफ हिमालयन गाडेज, विरासत देहरादून 2015, दिल्ली फोटो फेस्टिवल 2015, कलर आफ उत्तराखंड, मुंबई(कौथिग) 2014 और 2105, शेड्स आफ दिल्ली- इंडियन हैबिटेट सेंटर और हाल ही में उनका लेटेस्ट एक्जिबीशन आकलैंड,न्यूजीलैंड में 16 अप्रैल- बडूली 2017 में हुआ।

मुकेश खुग्साल ने लाईट के माध्यम से इस कला में अपने आप को रचा बसा लिया है और अपनी आंखों को इस तरीके से ट्रेनिंग दी है कि वह अनदेखे और अनछुए पलों को बहुत सी खूबसूरती से अपने कैमरे में कैद कर लेते हैं। मुकेश का मानना है कि वो अपने कैमरे के ज़रिये मौजूदा पीढ़ी के साथ साथ आने वाले पीढ़ियों के लिए खूबसूरत यादें संजो रहे हैं।

सीएम रावत ने नैनीताल को दी जरुरी सौगात

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मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार सरोवर नगरी पहुंचे मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जनपद नैनीताल को अनुपम सौगाते दी। मुख्यमंत्री रावत ने अपने सम्बोधन में कहा कि उत्तराखण्ड के कुमायूं में प्रकृति का अनुपम सौन्दर्य सहित अनेकों पर्यटन स्थल हैं, हल्द्वानी कुमायूं का प्रवेश द्वार है। कुमायूं की जनता व पर्यटकों को हल्द्वानी से होकर गुजरना होता है, इसलिए यातायात को सुगम बनाने हेतु हल्द्वानी में 400(चार सौ) करोड की लागत से रिंग रोड का निर्माण, नैनीताल शहर में 50(पचास) करोड़ की लागत से 800 वाहनों की क्षमता वाला सुविधायुक्त बहुमंजिली पार्किंग का निर्माण की घोषणा की। उन्होनें सहकारी डेरी फैडरेशन द्वारा पशुआहार में पहले प्रयोग किये जाने वाले यूरिया के स्थान पर मैग्ना प्रयोग किया जायेगा, जिससे और शुद्ध दूध मिल सकेगा। इस पशुआहार न्यूट्रीशन को 01 मई से सब्सिडी प्रदान करते हुए 50(पचास) रूपये कम पर पशुपालकों को मुहैया कराये जाने की घोषणा भी की, जिससे लगभग 01 लाख 55 हजार पशुपालकों को लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री रावत ने नैनी झील के गिरते जलस्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि झील के गिरते जलस्तर का परीक्षण नीरी समिति द्वारा कराया जायेगा। उन्होनें कहा कि नैनी झील को जीवित रखने के लिए सरकार हर सम्भव प्रयास करेगी।

शराब की दुकान हटाने के लिये पथराव

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कमलुवागांजा मेहता गांव, हल्द्वानी में शराब की दुकान के विरोध एक स्थानीय नेता ने आत्मदाह का प्रयास कर दिया। पुलिस से उसे गिरफ्तार कर लिया है।

वहीं इससे भड़की महिलाओं ने शराब की दुकान में पथराव कर दिया। एसडीएम के शराब की दुकान हटाने के आश्वाशन के बाद लोग शांत हुए। वहीं पनचक्की और महर्षि स्कूल के पास भी शराब की दुकान खोलने को लेकर प्रदर्शन हुआ।

कमलुवागांजा मेहता में शराब की दुकान खोलने का लंबे समय से विरोध चल रहा था। अब तक दुकान नहीं हटने से आक्रोशित प्रमोद बोरा ने आज आत्मदाह का प्रयास कर दिया।

पुलिस ने प्रमोद को गिरफ्तार कर लिया है। आक्रोशित महिलाओं ने शराब कारोबारी व शराब की दुकान पर पथराव दिया। महिलाओं ने डंडे व दरांती लेकर शराब कारोबारियों को दौड़ाया।

सलाद के 521 जायकों से बना नया कीर्तिमान

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दो वर्ल्ड रिकॉर्ड समेत तीन कीर्तिमान बना चुके ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी देहरादून के शिक्षकों और छात्र छात्राओं ने एक और रिकॉर्ड कायम कर दिया। दो घंटे 41 सेकेंड में 521 तरह के सलाद बनाकर ग्राफिक एरा के होटल मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के छात्रों और शिक्षकों ने यह चौथा कीर्तिमान बनाया है।

आज दोपहर सरकार के कई विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों के निरीक्षण के बाद यह नया रिकॉर्ड बन जाने की घोषणा की गई। ग्राफिक एरा ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. कमल घनशाला ने यह नया कीर्तिमान बनाने वाली टीम को 51 हजार रूपये का पुरस्कार प्रदान किया। उन्होंने कहा कि दुनिया को हजारों कामयाब प्रोफेशनल देने वाला ग्राफिक एरा छात्र-छात्राओं को ऐसा माहौल देता है कि वे विश्व स्तर की स्पर्धाओं में शामिल और सफल हो सकें। यह चौथा रिकॉर्ड इसी का परिणाम है।

होटल मैनेजमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ. विनय राणा ने बताया कि दुनिया में सबसे ज्यादा तरह की और सबसे ज्यादा चीजें डालकर 521 अनूठे सलाद तैयार किए गए हैं। इनमें शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के सलाद शामिल हैं। ये सलाद तैयार करने से पहले शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने तीन महीने सलाद के प्रकारों और उनमें विभिन्न पदार्थ मिलने पर बनने वाले फ्लेवर पर रिसर्च की। एक साथ इतने ज्यादा तरह के सलाद बनाने के लिए एक माह से तैयारियां की जा रही थीं।

विशेषज्ञ के रूप में आये यूसर्क के निदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि सलादों पर बहुत व्यापक स्तर पर रिसर्च के कारण ग्राफिक एरा यह कीर्तिमान स्थापित कर सका है। इसके जरिये यूनिवर्सिटी ने दुनिया के इस हिस्से के लिए नए आयाम खोल दिये हैं। विशेषज्ञ के रूप आये उद्यान एवं खाद्य प्रस्संकरण के अपर निदेशक डॉ. रतन कुमार ने 521 तरह के सलाद बनाकर ग्राफिक एरा ने लोगों को एक राह सुझाई है।

यह रिकॉर्ड लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के लिए बनाया गया है। कीर्तिमान बनाने वाली टीम टी-26 के लीडर असिस्टेंट प्रोफेसर चंद्रमौली ढौंढियाल ने कहा कि सलाद तैयार करने के लिए चार सौ से ज्यादा तरह की सब्जी, फल, मसाले, अनाज, मीट उत्पाद, दुग्ध उत्पाद, जड़ी बूटियों आदि का इस्तेमाल किया गया है। श्री चन्द्रमौली ने कहा कि इनमें से करीब 60 तरह के सलाद परम्परागत रूप से दुनिया में बनाये जाते हैं। बाकी सलाद खुद रैसीपी तैयार करके बनाये गए हैं। लिम्का बुक में इस कीर्तिमान को शामिल कराने के लिए इसके दस्तावेज और विशेषज्ञों की रिपोर्ट भेजी जा रही है।

 

“गाडू घड़ी” के साथ शुरु हो गई बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारी

शनिवार से भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने की परम्परा का श्री गणेश हो गया है। सदियों पुरानी गाडू घडी परम्परा के तहत आज टिहरी राज़ परिवार की महिलाओं और अन्य महिलाओं द्वारा हाथों से निकाले तिलों के तेल को घड़ों में भरकर बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना किया गया। इसी तेल से 6 मई सुबह 4:15 बजे को कपाट खुलने के बाद अगले 6 महीने भगवान का श्रृंगार और पूजा अर्चना की जायेगी।

गौरतलब है कि परम्पराएं  संस्कृति की संवाहक होती है, और अगर आधुनिकता के इस दौर मे भी ये जीवित है तो आश्चर्य होता है। जी हां हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड में टिहरी नरेश के नरेंद्र नगर स्थित राजमहल की। जहाँ भगवान बद्रीनाथ के श्रृंगार और पूजा के लिए तिल का तेल निकलने की गाडू घडी परम्परा का आज भी पालन हो रहा है। पीले वस्त्रों से सजी-धजी सुहागिन महिलाएं राजमहल में रानी के साथ तेल कलश को भरने के लिये तिलों का तेल निकालती हैं। यह परम्परा राज परिवार सदियों से निभाता आ रहा है। तेल कलश को भरने के लिये ये महिलायें पूरे दिन बिना कुछ खाए पिए मुह पर पीले रंग का कपडा बांध कर तेल निकालने का काम करती है। ये पूरा काम टिहरी की महारानी और राज परिवार से जुड़ी महिलाओं के साथ सुहागन महिलाऐं भी करती है।

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सुबह से ही व्रत रख कर भगवान की सेवा के लिए दूर दराज के क्षेत्रों से आई सभी महिलाएं किसी न किसी रूप से राज महल की इस परम्परा से जुड़ी हुई हैं। अपने हाथों से तिल को पीस कर उसका तेल निकाल कर भगवान बद्री  विशाल को अपनी श्रद्धा प्रकट करती हैं। उनके द्वारा निकाले गए तेल से शीतनिद्रा से जागने के बाद रोज ही भगवान की मूर्ति की मालिश और अभिषेक किया जायेगा। इस परम्परा से जुड़ कर सभी जन्मो-जन्मो का पुन्य कमा लेती है और अपने को सौभाग्यशाली मानती है।महल में शाम को पूजा अर्चना के बाद राज परिवार इस गाडू घडी को बद्रीनाथ से आये डिमर समुदाय के पुजारियों को सौंप कर रवाना करता है। फिर ये गाडू घडी तेल कलश विभिन पंच प्रयागों से होता हुआ बद्रीनाथ धाम पहुंचता है, जहाँ ये साल भर भगवान बद्री विशाल की पूजा अर्चना और श्रृंगार के काम आएगा। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को टिहरी राज परिवार बखूबी से निभाता चला आ रहा है | मान्यता है कि टिहरी के राजा को भगवान बद्रीनाथ का बोलता रूप कहा जाता है। लिहाज़ा बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के पदाधिकारी भी इसे राज परिवार का भगवान के प्रति समपर्ण मानते है।

दून का युवक मलेशिया में फंसा,सरकार से मदद की गुहार

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पाक में कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि उत्तराखंड के एक युवक के मलेशिया में फंसे होने का मामला सामने आया है। वहीं  परिजनों ने इस मामले में उत्तराखंड सरकार से मदद की गुहार लगाई। युवक के मलेशिया में फंसे होने से परिजन काफी परेशान हैं।

गौरतलब है कि दून के जौनसार बावर में रहने वाले संजय सिंह चौहान मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में मलेशिया जेल में बंद हैं। चकराता के बरौंथा क्षेत्र के रहने वाला संजय, मार्च 2013 में दिल्ली की प्रीमियम प्लाजा कम्पनी के लोगों के सम्पर्क में आया। विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे पचास हजार रुपये भी जमा करा लिये गये। सितम्बर 2013 में कम्पनी का काम बताकर संजय को मलेशिया भेजा गया, जहां क्वालालमपुर में ड्रग्स तस्करी के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

चंपावत के युवक को भी बनाया गया था बंधक:

वहीं बीते महीने मलेशियों में चंपावत के युवक को बंधक बनाने और उत्पीड़न करने का एक मामला सामने आया था। युवक के परिजनों ने इस मामले में भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई थी। मूल रूप से चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लाक स्थित हथरंगिया निवासी जगत सिंह ने मलेशिया से परिजनों को फोन कर मदद की गुहार लगाई। जगत सिंह के फोन आने के बाद उसके घर में कोहराम मचा गया। सभी ने उसकी सलामती की दुआ मांगी थी। जगत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने बताया कि तीन साल पहले होटल में काम करने के लिए वह मलेशिया गया था। इसके लिए जगत सिंह ने तीन साल का वीजा बनाया था। उसने बताया कि बीती 24 जनवरी की सायं मलेशिया से जगत सिंह का फोन आया कि उसके वीजा की अवधि समाप्त हो गई। वह जिस होटल में वह काम करता है, उसके मालिक ने पासपोर्ट जब्त कर लिया और जबरन काम करवा रहा था। उसने बताया कि टार्चर की डर से वह होटल से कहीं भाग गया है।

अब नैनीताल की सारी जानकारी एक क्लिक दूर

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जिला प्रशासन नैनीताल ने जनता, और पर्यटकों को होने वाली असुविधा से बचाने और सूचना प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में पहल करते हुये एक बेबसाइट e-collectornainital.com  शुरू कर दी है। इस वेब साइट का शुभारम्भ प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिह रावत ने किया।  

इस बेबासाइट से प्रथम चरण में

  • जनपद नैनीताल के परगना नैनीताल के समस्त गांवों के नक्शे,
  • राजस्व गांवो की मूल एवं सामान्य जानकारियां,
  • गांवों की जनसंख्या,
  • ग्राम्य स्तरीय अधिकारियों के नाम,
  • क्षेत्रफल गांव में उपलब्ध संसाधन चिकित्सा इत्यादि की जानकारियां,
  • न्यायालय में गतिमान राजस्व वादो की अद्यावधिक स्थिति,
  • जनपद के मुख्य पर्यटक स्थल के फोटोग्राफ्स और
  • सामान्य जानकारी सूचनायें एक क्लिक के साथ उपलब्ध रहेेंगी।

इसके अतिरिक्त जनपद के परगनाधिकारी से निर्गत होेने वाले आय, पारिवारिक सदस्यता, जाति,स्थायी, निवास, चरित्र प्रमाण पत्र को जनता की सुविधा के लिए पेपरलैस कर दिया है। जिससे जनता को मूल दस्तावेजों के साथ कार्यालय में नही भटकना पडेगा। इस व्यवस्था से जनता को काफी लाभ होगा। इस मौके पर आयुक्त कुमायू मंडल डी सेंथिल पांडियन, जिलाधिकारी दीपक रावत, डीआईजी अजय रौतेला, एसएसपी जन्मेजय खंडूरी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट बन्दना,एडीएम बीएल फिरमाल, प्रबन्ध निदेशक केएमवीएम धिराज सिह गब्र्याल, सामान्य प्रबन्धक त्रिलोक सिह मर्ताेलिया भी मौजूद थे।

पार्क प्रशासन के नोटिस से सकते में वन गुर्जर

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राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में वर्षों से रह रहे वन गुर्जरों को पार्क प्रशासन ने पार्क खाली करने के लिये नोटिस जारी कर दिए है  जिसको लेकर वन गुर्जरों ने गोरी रेंज मे प्रदर्शन किया और वन विभाग को ज्ञापन सौंपा।राजाजी टाइगर रिजर्व की गोहरी रेंज के कुणाल चोट में सालों से रह रहे वन गुर्जर अपनी विस्थापन की राह देख रहे हैं लेकिन पार्क प्रशासन इन लोगों को विस्थापन प्रतिक्रिया के तहत विस्थापित नहीं कर पा रहा है जिसके चलते वन गुजरों के छोटे से परिवारों में पार्क प्रशासन के प्रति रोष हैं। वन गुर्जरों का कहना है कि हमारे 70 परिवारों का विस्थापन अभी तक नहीं हो पाया है हम सरकार से लगातार विस्थापन की मांग कर रहे हैं लेकिन पार्क प्रशासन नीति का पालन ना करते हुए यहां से बचे परिवारों को बाहर निकालने की साजिश रच रहा है।जिसके चलते इन्हें पार्क खाली कराने के नोटिस थमा दिए गए हैं। जिसके विरोध में वन गुर्जरों ने गौहरी रेंज कार्यालय में प्रदर्शन कर विभाग को ज्ञापन सौंपा हैं।
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वही पार्क प्रशासन का कहना है कि विस्थापन की प्रतिक्रिया पार्क प्रशासन द्वारा समय पर ही कर दी गई थी लेकिन लगातार वन गुर्जरों के परिवारों की आबादी बढ़ने पर लगी है बावजूद इसके सभी को  जमीन उपलब्ध करा दी गई है लेकिन यह लोग पार्क की जमीन खाली करने को तैयार नहीं है जिसके चलते पार्क प्रशासन ने इनको डेरे खाली करने के नोटिस दिए हैं। गुज्जरों के और पार्क प्रशासन के बीच हमेशा से ही विस्थापन को लेकर आपसी खींचातानी चली आ रही है। एक तरफ वन विभाग का कहना है कि गुर्जरों को पार्क प्रशासन ने भूमि आवंटित कर दी है लेकिन यह गुज्जर वहां ना रहकर पार्क की भूमि खाली नहीं करना चाहते जिसको लेकर दोनों पक्षों में लगातार मतभेद बना रहता है। अब देखना यह होगा कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन कितनी जल्दी पार्क से इन गुर्जरों को विस्थापित कर पाता है।

मौसम का यूटर्न, उत्तराखंड में बारिश के आसार

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बीते दो-तीन दिनों में उत्तराखंड के मौसम ने लोगों के पसीने छुड़ा दिए थे लेकिन शुक्रवार रात के बाद मौसम बदलने से राज्य में एक बार फिर तापमान सामान्य हो गया है। हालांकि मौसम को लेकर मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि आने वाले 48 घंटों में तूफान और ओलावृष्टि की संभावना है। इसके साथ ही गरज के साथ 85 किमी प्रति घंटे के तूफान के आसार भी है । मौसम के एकाएक बदलने से मुख्य सचिव ने तूफान,ओलावृष्टि के मद्देनजर सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ज़रूरी एहतियात बरते अौर किसी भी स्थिति में तत्पर रहे। आज दून का अधिकतम तापमान 38 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है।

इसके साथ ही सवेरे से ही ऊधमसिंह नगर में मौसम ने ली करवट, भयंकर गर्मी के बाद मौसम हुया सुहाना, दिन में अंधेरा छाया अौर हल्की बुँदाबन्दी शुरू होने से लोगों ने राहत की साँस ली।वहीं पौड़ी जिले के मांडाखाल में तेज हवा के चलते मकान की छत उड़ गई लेकिन जान माल की हानि की कोई खबर नहीं हैं।

उत्तराखण्ड के पहाड़ों में मौसम ने भी करवट ली । यहाँ आज सवेरे से ही बादल छाए रहे और रुक रुककर बरसात होती रही। तेज हवाओं के कारण मौसम ठण्डा हो गया है । तापमान में भी गर्मियों के दिनों में गिरावट देखी जा रही है । मैदानों की तप्ती धूप से नैनीताल में कुछ पल सुकून के बिताने पहुंचे पर्यटकों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है । पहाड़ों में घूमने आए पर्यटक मौसम का आनंद ले रहे हैं । बदलते मौसम के कारण सामान्य जनजीवन थोडा प्रभावित जरूर हुआ है लेकिन व्यवसाई तापमान में गिरावट को पर्यटन के लिहाज से अच्छा मान रहे हैं ।

उत्तराखंड के बुग्यालों को मिलेगा नया लुकः सतपाल महाराज

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राज्य को पर्यटन हब और राज्य के बुग्यालों को विश्वस्तरीय स्कीइंग रिजोर्टस के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री डॉ. महेश शर्मा से दिल्ली में मुलाकात कर वित्तीय सहयोग की मांग की। इस दौरान उन्होंने राज्य में पर्यटन की संभावनाओं और विकास को लेकर विस्तृत चर्चा भी की।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश में धार्मिक, साहसिक और स्वास्थ्य पर्यटन के साथ योग, आयुर्वेद और पंचकर्म को पर्यटन से जोडऩे की ओर केंद्र सरकार का ध्यान खींचा। केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के तहत माता भगवती की उपासना के लिए शक्ति सर्किट, भगवान शंकर के पूजास्थल पंचकेदार, जागेश्वर धाम और अन्य मंदिरों को शामिल करने को कहा।

उन्होंने शैव सर्किट, पंचबदरी और भगवान विष्णु के मंदिरों को शामिल करते हुए वैष्णव सर्किट और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री कलविष्ट दाना, नागराज व गोलू गैराड धाम को विकसित करने को लेकर मंथन किया। उन्होंने इसके लिए केंद्र से वित्तीय सहयोग की मांग भी की।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड में तमाम रमणीक व दर्शनीय स्थल हैं, जो सर्दियों में बर्फ से ढके रहते हैं। इन्हें विकसित कर राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे। उन्होंने कहा कि बर्फ से ढके बुग्यालों को स्कीइंग रिजोट्र्स के रूप में विकसित कर देश और दुनिया के सैलानियों को लुभाया जा सकता है।

इस दौरान उन्होंने पौड़ी जनपद के व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र सतपुली को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर विकसित करने का सुझाव दिया। इसके साथ ही पर्यटन मंत्री ने गंगा आरती को भव्य बनाने के लिए ऋषिकेश और हरिद्वार में लाइट एंड साउंड और थ्री डी होलोग्राफिक तकनीक से गंगा जी की इमेज जल में पैदा करने, संस्कृति आधारित थीम पार्क विकसित करने और तीर्थ स्थल नानकमत्ता व कलीयर शरीफ में सुविधाओं के विकास को भी राशि की मांग की।

पर्यटन मंत्री ने टिहरी झील में फ्लोटिंग होटल के निर्माण और पानी के नीचे स्थित पुराने टिहरी शहर को पनडुब्बी से दिखाने,  पैराग्लाइडिंग, पैरासेलिंग, स्कूबा डाइविंग आदि की व्यवस्था हेतु धन की मांग की। उन्होंने टिहरी झील के चारों ओर जॉगिंग ट्रैक, साइकल ट्रैक, ट्राम ट्रैक, कैफेटेरिया और रोपवे विकसित करने के लिए भी केंद्र सरकार से सहयोग की मांग की।