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“गाडू घड़ी” के साथ शुरु हो गई बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तैयारी

शनिवार से भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने की परम्परा का श्री गणेश हो गया है। सदियों पुरानी गाडू घडी परम्परा के तहत आज टिहरी राज़ परिवार की महिलाओं और अन्य महिलाओं द्वारा हाथों से निकाले तिलों के तेल को घड़ों में भरकर बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना किया गया। इसी तेल से 6 मई सुबह 4:15 बजे को कपाट खुलने के बाद अगले 6 महीने भगवान का श्रृंगार और पूजा अर्चना की जायेगी।

गौरतलब है कि परम्पराएं  संस्कृति की संवाहक होती है, और अगर आधुनिकता के इस दौर मे भी ये जीवित है तो आश्चर्य होता है। जी हां हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड में टिहरी नरेश के नरेंद्र नगर स्थित राजमहल की। जहाँ भगवान बद्रीनाथ के श्रृंगार और पूजा के लिए तिल का तेल निकलने की गाडू घडी परम्परा का आज भी पालन हो रहा है। पीले वस्त्रों से सजी-धजी सुहागिन महिलाएं राजमहल में रानी के साथ तेल कलश को भरने के लिये तिलों का तेल निकालती हैं। यह परम्परा राज परिवार सदियों से निभाता आ रहा है। तेल कलश को भरने के लिये ये महिलायें पूरे दिन बिना कुछ खाए पिए मुह पर पीले रंग का कपडा बांध कर तेल निकालने का काम करती है। ये पूरा काम टिहरी की महारानी और राज परिवार से जुड़ी महिलाओं के साथ सुहागन महिलाऐं भी करती है।

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सुबह से ही व्रत रख कर भगवान की सेवा के लिए दूर दराज के क्षेत्रों से आई सभी महिलाएं किसी न किसी रूप से राज महल की इस परम्परा से जुड़ी हुई हैं। अपने हाथों से तिल को पीस कर उसका तेल निकाल कर भगवान बद्री  विशाल को अपनी श्रद्धा प्रकट करती हैं। उनके द्वारा निकाले गए तेल से शीतनिद्रा से जागने के बाद रोज ही भगवान की मूर्ति की मालिश और अभिषेक किया जायेगा। इस परम्परा से जुड़ कर सभी जन्मो-जन्मो का पुन्य कमा लेती है और अपने को सौभाग्यशाली मानती है।महल में शाम को पूजा अर्चना के बाद राज परिवार इस गाडू घडी को बद्रीनाथ से आये डिमर समुदाय के पुजारियों को सौंप कर रवाना करता है। फिर ये गाडू घडी तेल कलश विभिन पंच प्रयागों से होता हुआ बद्रीनाथ धाम पहुंचता है, जहाँ ये साल भर भगवान बद्री विशाल की पूजा अर्चना और श्रृंगार के काम आएगा। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को टिहरी राज परिवार बखूबी से निभाता चला आ रहा है | मान्यता है कि टिहरी के राजा को भगवान बद्रीनाथ का बोलता रूप कहा जाता है। लिहाज़ा बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के पदाधिकारी भी इसे राज परिवार का भगवान के प्रति समपर्ण मानते है।

दून का युवक मलेशिया में फंसा,सरकार से मदद की गुहार

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पाक में कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि उत्तराखंड के एक युवक के मलेशिया में फंसे होने का मामला सामने आया है। वहीं  परिजनों ने इस मामले में उत्तराखंड सरकार से मदद की गुहार लगाई। युवक के मलेशिया में फंसे होने से परिजन काफी परेशान हैं।

गौरतलब है कि दून के जौनसार बावर में रहने वाले संजय सिंह चौहान मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप में मलेशिया जेल में बंद हैं। चकराता के बरौंथा क्षेत्र के रहने वाला संजय, मार्च 2013 में दिल्ली की प्रीमियम प्लाजा कम्पनी के लोगों के सम्पर्क में आया। विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे पचास हजार रुपये भी जमा करा लिये गये। सितम्बर 2013 में कम्पनी का काम बताकर संजय को मलेशिया भेजा गया, जहां क्वालालमपुर में ड्रग्स तस्करी के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

चंपावत के युवक को भी बनाया गया था बंधक:

वहीं बीते महीने मलेशियों में चंपावत के युवक को बंधक बनाने और उत्पीड़न करने का एक मामला सामने आया था। युवक के परिजनों ने इस मामले में भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई थी। मूल रूप से चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लाक स्थित हथरंगिया निवासी जगत सिंह ने मलेशिया से परिजनों को फोन कर मदद की गुहार लगाई। जगत सिंह के फोन आने के बाद उसके घर में कोहराम मचा गया। सभी ने उसकी सलामती की दुआ मांगी थी। जगत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने बताया कि तीन साल पहले होटल में काम करने के लिए वह मलेशिया गया था। इसके लिए जगत सिंह ने तीन साल का वीजा बनाया था। उसने बताया कि बीती 24 जनवरी की सायं मलेशिया से जगत सिंह का फोन आया कि उसके वीजा की अवधि समाप्त हो गई। वह जिस होटल में वह काम करता है, उसके मालिक ने पासपोर्ट जब्त कर लिया और जबरन काम करवा रहा था। उसने बताया कि टार्चर की डर से वह होटल से कहीं भाग गया है।

अब नैनीताल की सारी जानकारी एक क्लिक दूर

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जिला प्रशासन नैनीताल ने जनता, और पर्यटकों को होने वाली असुविधा से बचाने और सूचना प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में पहल करते हुये एक बेबसाइट e-collectornainital.com  शुरू कर दी है। इस वेब साइट का शुभारम्भ प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिह रावत ने किया।  

इस बेबासाइट से प्रथम चरण में

  • जनपद नैनीताल के परगना नैनीताल के समस्त गांवों के नक्शे,
  • राजस्व गांवो की मूल एवं सामान्य जानकारियां,
  • गांवों की जनसंख्या,
  • ग्राम्य स्तरीय अधिकारियों के नाम,
  • क्षेत्रफल गांव में उपलब्ध संसाधन चिकित्सा इत्यादि की जानकारियां,
  • न्यायालय में गतिमान राजस्व वादो की अद्यावधिक स्थिति,
  • जनपद के मुख्य पर्यटक स्थल के फोटोग्राफ्स और
  • सामान्य जानकारी सूचनायें एक क्लिक के साथ उपलब्ध रहेेंगी।

इसके अतिरिक्त जनपद के परगनाधिकारी से निर्गत होेने वाले आय, पारिवारिक सदस्यता, जाति,स्थायी, निवास, चरित्र प्रमाण पत्र को जनता की सुविधा के लिए पेपरलैस कर दिया है। जिससे जनता को मूल दस्तावेजों के साथ कार्यालय में नही भटकना पडेगा। इस व्यवस्था से जनता को काफी लाभ होगा। इस मौके पर आयुक्त कुमायू मंडल डी सेंथिल पांडियन, जिलाधिकारी दीपक रावत, डीआईजी अजय रौतेला, एसएसपी जन्मेजय खंडूरी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट बन्दना,एडीएम बीएल फिरमाल, प्रबन्ध निदेशक केएमवीएम धिराज सिह गब्र्याल, सामान्य प्रबन्धक त्रिलोक सिह मर्ताेलिया भी मौजूद थे।

पार्क प्रशासन के नोटिस से सकते में वन गुर्जर

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राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में वर्षों से रह रहे वन गुर्जरों को पार्क प्रशासन ने पार्क खाली करने के लिये नोटिस जारी कर दिए है  जिसको लेकर वन गुर्जरों ने गोरी रेंज मे प्रदर्शन किया और वन विभाग को ज्ञापन सौंपा।राजाजी टाइगर रिजर्व की गोहरी रेंज के कुणाल चोट में सालों से रह रहे वन गुर्जर अपनी विस्थापन की राह देख रहे हैं लेकिन पार्क प्रशासन इन लोगों को विस्थापन प्रतिक्रिया के तहत विस्थापित नहीं कर पा रहा है जिसके चलते वन गुजरों के छोटे से परिवारों में पार्क प्रशासन के प्रति रोष हैं। वन गुर्जरों का कहना है कि हमारे 70 परिवारों का विस्थापन अभी तक नहीं हो पाया है हम सरकार से लगातार विस्थापन की मांग कर रहे हैं लेकिन पार्क प्रशासन नीति का पालन ना करते हुए यहां से बचे परिवारों को बाहर निकालने की साजिश रच रहा है।जिसके चलते इन्हें पार्क खाली कराने के नोटिस थमा दिए गए हैं। जिसके विरोध में वन गुर्जरों ने गौहरी रेंज कार्यालय में प्रदर्शन कर विभाग को ज्ञापन सौंपा हैं।
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वही पार्क प्रशासन का कहना है कि विस्थापन की प्रतिक्रिया पार्क प्रशासन द्वारा समय पर ही कर दी गई थी लेकिन लगातार वन गुर्जरों के परिवारों की आबादी बढ़ने पर लगी है बावजूद इसके सभी को  जमीन उपलब्ध करा दी गई है लेकिन यह लोग पार्क की जमीन खाली करने को तैयार नहीं है जिसके चलते पार्क प्रशासन ने इनको डेरे खाली करने के नोटिस दिए हैं। गुज्जरों के और पार्क प्रशासन के बीच हमेशा से ही विस्थापन को लेकर आपसी खींचातानी चली आ रही है। एक तरफ वन विभाग का कहना है कि गुर्जरों को पार्क प्रशासन ने भूमि आवंटित कर दी है लेकिन यह गुज्जर वहां ना रहकर पार्क की भूमि खाली नहीं करना चाहते जिसको लेकर दोनों पक्षों में लगातार मतभेद बना रहता है। अब देखना यह होगा कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन कितनी जल्दी पार्क से इन गुर्जरों को विस्थापित कर पाता है।

मौसम का यूटर्न, उत्तराखंड में बारिश के आसार

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बीते दो-तीन दिनों में उत्तराखंड के मौसम ने लोगों के पसीने छुड़ा दिए थे लेकिन शुक्रवार रात के बाद मौसम बदलने से राज्य में एक बार फिर तापमान सामान्य हो गया है। हालांकि मौसम को लेकर मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि आने वाले 48 घंटों में तूफान और ओलावृष्टि की संभावना है। इसके साथ ही गरज के साथ 85 किमी प्रति घंटे के तूफान के आसार भी है । मौसम के एकाएक बदलने से मुख्य सचिव ने तूफान,ओलावृष्टि के मद्देनजर सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ज़रूरी एहतियात बरते अौर किसी भी स्थिति में तत्पर रहे। आज दून का अधिकतम तापमान 38 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है।

इसके साथ ही सवेरे से ही ऊधमसिंह नगर में मौसम ने ली करवट, भयंकर गर्मी के बाद मौसम हुया सुहाना, दिन में अंधेरा छाया अौर हल्की बुँदाबन्दी शुरू होने से लोगों ने राहत की साँस ली।वहीं पौड़ी जिले के मांडाखाल में तेज हवा के चलते मकान की छत उड़ गई लेकिन जान माल की हानि की कोई खबर नहीं हैं।

उत्तराखण्ड के पहाड़ों में मौसम ने भी करवट ली । यहाँ आज सवेरे से ही बादल छाए रहे और रुक रुककर बरसात होती रही। तेज हवाओं के कारण मौसम ठण्डा हो गया है । तापमान में भी गर्मियों के दिनों में गिरावट देखी जा रही है । मैदानों की तप्ती धूप से नैनीताल में कुछ पल सुकून के बिताने पहुंचे पर्यटकों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है । पहाड़ों में घूमने आए पर्यटक मौसम का आनंद ले रहे हैं । बदलते मौसम के कारण सामान्य जनजीवन थोडा प्रभावित जरूर हुआ है लेकिन व्यवसाई तापमान में गिरावट को पर्यटन के लिहाज से अच्छा मान रहे हैं ।

उत्तराखंड के बुग्यालों को मिलेगा नया लुकः सतपाल महाराज

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राज्य को पर्यटन हब और राज्य के बुग्यालों को विश्वस्तरीय स्कीइंग रिजोर्टस के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री डॉ. महेश शर्मा से दिल्ली में मुलाकात कर वित्तीय सहयोग की मांग की। इस दौरान उन्होंने राज्य में पर्यटन की संभावनाओं और विकास को लेकर विस्तृत चर्चा भी की।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश में धार्मिक, साहसिक और स्वास्थ्य पर्यटन के साथ योग, आयुर्वेद और पंचकर्म को पर्यटन से जोडऩे की ओर केंद्र सरकार का ध्यान खींचा। केंद्रीय पर्यटन मंत्री से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के तहत माता भगवती की उपासना के लिए शक्ति सर्किट, भगवान शंकर के पूजास्थल पंचकेदार, जागेश्वर धाम और अन्य मंदिरों को शामिल करने को कहा।

उन्होंने शैव सर्किट, पंचबदरी और भगवान विष्णु के मंदिरों को शामिल करते हुए वैष्णव सर्किट और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री कलविष्ट दाना, नागराज व गोलू गैराड धाम को विकसित करने को लेकर मंथन किया। उन्होंने इसके लिए केंद्र से वित्तीय सहयोग की मांग भी की।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि उत्तराखंड में तमाम रमणीक व दर्शनीय स्थल हैं, जो सर्दियों में बर्फ से ढके रहते हैं। इन्हें विकसित कर राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे। उन्होंने कहा कि बर्फ से ढके बुग्यालों को स्कीइंग रिजोट्र्स के रूप में विकसित कर देश और दुनिया के सैलानियों को लुभाया जा सकता है।

इस दौरान उन्होंने पौड़ी जनपद के व्यावसायिक गतिविधियों के केंद्र सतपुली को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर विकसित करने का सुझाव दिया। इसके साथ ही पर्यटन मंत्री ने गंगा आरती को भव्य बनाने के लिए ऋषिकेश और हरिद्वार में लाइट एंड साउंड और थ्री डी होलोग्राफिक तकनीक से गंगा जी की इमेज जल में पैदा करने, संस्कृति आधारित थीम पार्क विकसित करने और तीर्थ स्थल नानकमत्ता व कलीयर शरीफ में सुविधाओं के विकास को भी राशि की मांग की।

पर्यटन मंत्री ने टिहरी झील में फ्लोटिंग होटल के निर्माण और पानी के नीचे स्थित पुराने टिहरी शहर को पनडुब्बी से दिखाने,  पैराग्लाइडिंग, पैरासेलिंग, स्कूबा डाइविंग आदि की व्यवस्था हेतु धन की मांग की। उन्होंने टिहरी झील के चारों ओर जॉगिंग ट्रैक, साइकल ट्रैक, ट्राम ट्रैक, कैफेटेरिया और रोपवे विकसित करने के लिए भी केंद्र सरकार से सहयोग की मांग की।

कैलाश मानसरोवर मार्ग बंद

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धारचूला-लखनपुर, पिथौरागढ के पास मलबा आ जाने से कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग बंद हो गया है। मलबे से कैलाश मानसरोवर पैदल यात्रा पथ ध्वस्त हो गया है। इसकी वजह से भारत-चीन व्यापार के लिए गुंजी मंडी भेजा जा रहा भारतीय व्यापारियों का सामान मार्ग में फंस गया है, जिससे व्यापारी खासे परेशान है।

व्यास घाटी के अंतर्गत आने वाले बूंदी, गुंजी, गब्र्यांग, कुटी, नपल्च्यू आदि गांवों के तमाम परिवार मार्ग में फंस हुए हैं। इन परिवारों के साथ जानवर भी हैं, ये परिवार घाटियों में माइग्रेशन पूरा कर वापस अपने मूल गांवों को लौट रहे हैं। मार्ग में फंसे ग्रामीणों को तमाम परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं।

भारत-चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रौंकली की अगुवाई में व्यापारियों ने शुक्रवार को एसडीएम आरके पांडे से मुलाकात की और उन्हें मार्ग में फंसे लोगों की जानकारी दी। एसडीएम ने सड़क निर्माण कर रही एजेंसी को मार्ग को अविलंब खुलवाए जाने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड में 20 फीसदी महंगी हो सकती है बिजली की दरें

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अभी तक उत्तराखंड में सबसे सस्ती बिजली उपभोक्ताओं को देने की बात कही जाती है, लेकिन अगर पावर डेवलेपमेंट फंड पर रिटर्न आफ इक्विटी यूजेवीएनएल को मिली तो दरों में 20 फीसद की बढ़ोत्तरी हो जाएगी। यूईआरसी यूजेवीएनएल की इस मांग को खारिज कर चुका है। लेकिन अब एपेलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (एप्टेल) का फैसला जल्द ही इस प्रकरण में आने वाला है।

दरअसल, मनेरी भाली-द्वितीय (304 मेगावाट) परियोजना निर्माण के लिए राज्य सरकार से पावर डेवलेपमेंट फंड (पीडीएफ) से करीब 350 करोड़ रुपये दिए थे। परियोजना से वर्ष 2007-08 से बिजली उत्पादन शुरू हुआ। पीडीएफ के नियमानुसार 10 साल से पुरानी और ऐसी परियोजना जिनका टैरिफ यानी बिजली दरें 80 पैसे कम हैं, उन पर 30 पैसे प्रति यूनिट की दर से पीडीएफ सेस लगना शुरू हो गया।

उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) इस सेस उपभोक्ताओं से वसूल करता है। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) पीडीएफ पर प्रतिवर्ष 16 फीसद के हिसाब से रिटर्न ऑफ इक्विटी मांग रहा है। ब्याज समेत अब तक यह रकम साढ़े आठ सौ करोड़ रुपये पहुंच गई है। अगले साल तक यह करीब एक हजार करोड़ रुपये हो जाएगी।

यूजेवीएनएल की याचिका को खारिज करते हुए यूईआरसी ने कहा था कि सेस उपभोक्ताओं से वसूल हो रहा है। अगर रिटर्न ऑफ इक्विटी दी गई तो उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ेगी। क्योंकि यूपीसीएल का खर्च बढ़ेगा और इससे टैरिफ में बढ़ोत्तरी होगी। यूईआरसी के इस निर्णय के खिलाफ यूजेवीएनएल एप्टेल चला गया था। आने वाले एक-दो हफ्ते में इस मामले में फैसला आना है। यूईआरसी सचिव नीरज सती ने बताया कि एप्टेल में पक्ष रख दिया है।

ऐसे बढ़ेंगी दरेंः

यूईआरसी ने ऊर्जा निगम का वर्ष 2017-18 का राजस्व 5840 करोड़ रुपये अनुमोदित किया है। अगर यूपीसीएल को रिटर्न ऑफ इक्विटी देनी पड़ी तो करीब एक हजार करोड़ का भार पड़ेगा। इसकी पूर्ति के लिए गणना के अनुसार बिजली दरों में करीब 20 फीसद की वृद्धि बैठती है। बता दें कि पिछले महीने ही यूईआरसी ने बिजली दरों में 5.72 फीसद की बढ़ोत्तरी की थी।

उद्यमियों का भारी विरोधः

पीडीएफ सेस का पैसा यूजेवीएनएल को देने का विरोध उद्यमी यूईआरसी में हुई कईं बैठकों में कर चुके हैं। यूईआरसी की सलाहकार समिति के सदस्य और इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता का कहना है कि पावर डेवलेपमेंट का पैसा जनता का ही है। इसलिए रिटर्न ऑफ इक्विटी का कोई मतलब नहीं बैठता है। इसका हर स्तर पर विरोध होगा।

उद्यमियों का भारी विरोधः

पीडीएफ सेस का एक मामला पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड का भी है। यह रकम 181 करोड़ रुपये है। हालांकि अगर यूजेवीएनएल के हक में एप्टेल का फैसला आया तो यह पिटकुल के केस में भी लागू होगा।

वर्तमान में बिजली की औसत दरें (रुपये प्रति यूनिट) ः

  • घरेलू——————-3.89
  • अघरेलू————— 5.69
  • एलटी उद्योग——–5.38
  • एचटी उद्योग——–5.41

ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे पर मैक्स और ट्रोला वाहन की भिड़त

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ऋषिकेश-बद्रीनाथ  हाईवे पर व्यासी के समीप एक मैक्स और ट्राला की टक्कर में मैक्स सवार ग्यारह लोग घायल हो गए। दो घायलों को गंभीर अवस्था में हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया है। बाकी  पांच लोगों का राजकीय हॉस्पिटल ऋषिकेश में उपचार चल रहा है।

मैक्स वाहन ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की ओर जा रहा था। सुबह करीब 7:30 बजे व्यासी के निकट ऋषिकेश की और आ रहे एक ट्राला वाहन से मैक्स की टक्कर हो गई। जिसमे 11 लोग घायल हो गए। दुर्घटना के कारण रास्ता बंद हो गया। हालांकि बाद में पुलिस ने रास्ता खुलवा दिया,ऋषिकेश में  घायलों का इलाज कर रहे डॉ एम के सैनी ने बताया की फिलहाल घायलों का इलाज चल रहा है जिनकी हालत थोड़ी गंभीर थी उन्हें दून और जॉलीग्रांट हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया गया है।

भाजपा विधायक चीमा के खिलाफ याचिका दायर

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नैनीताल हाई कोर्ट, ने काशीपुर के भाजपा विधायक हरभजन सिंह चीमा को चुनाव में दिए गए हलफनामे में गलत जानकारी देने के मामले में सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया है। साथ ही चीमा के साथ भारत निर्वाचन आयोग व रिटर्निग अफसर को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

काशीपुर निवासी व हालिया विस चुनाव में पराजित प्रत्याशी राजीव अग्रवाल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर विधायक चीमा का निर्वाचन निरस्त करने की मांग की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि चीमा ने फर्जी दस्तावेज संलग्न कर नामांकन पत्र दाखिल किया है। साथ ही अपने इनकम टैक्स में देयकों को छिपाया है। कहीं हाईस्कूल पास तो कहीं स्नातक पास दिखाया है। इसके अलावा पैनकार्ड में जन्म तिथि आठ जनवरी 1944 दर्शायी है तो पासपोर्ट में सात अप्रैल 1946 है।

इसकी शिकायत निर्वाचन आयोग से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसके गुप्ता की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद विधायक चीमा व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। बता दें कि गुरुवार को चीमा के अधिवक्ता ने हाई कोर्ट में याचिका खारिज होने की जानकारी मीडिया को दी थी।