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हैवान बनी शिक्षिका

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बच्चे को हल्की खरोंच भी लग जाए तो मां बाप का दिल कराह उठता है। खुद मुश्किलों में रहने के बाद भी पैरेंट्स बच्चों को किसी भी कीमत पर तकलीफ नहीं दे सकते। मगर न जाने क्यों समाज में अब बच्चों से हिंसक स्तर तक मारपीट करने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। ऐसा ही एक मामला काशीपुर क्षेत्र के दडिय़ाल रोड स्थित, प्रतिष्ठित मारिया असम्पा विद्यालय का सामने आया है, जहां एक शिक्षिका ने मासूम बच्चों को इस कदर पीटा कि वह अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं हो सका। उसका कसूर केवल इतना था कि दिए गए होमवर्क को वह समय से पूरा नहीं कर सका।

बताया जाता है कि कक्षा चार में पढऩे वाला अंशुमान सिंह (आठ वर्ष), पुत्र नवीन सिंह, काशीपुर में अपनी नानी के साथ रहता है। उनके माता पिता बाहर काम करते हैं। आज शुक्रवार को जब वह विद्यालय गया तो होमवर्क पूरा न करने पर विद्यालय की शिक्षिका प्रिया ने पहले तो मासूम अंशुमन को घुटनों के बल पर चलाया। इसके बाद भी शिक्षिका का मन नहीं भरा तो उसने  अंशुमान को छड़ीसे इतना पीटा कि इसका शरीर नीला पड़ गया। अंशुमान जब घर पहुंचा तो उसने अपनी नानी को घटना के बारे में बताया। नानी जब स्कूल के प्रधानाचार्य के पास शिकायत करने पहुंची तो वहां से उसे भगा दिया गया।

इसके बाद नानी आस पास के लोगों के साथ कोतवाली पहुंची और कार्रवाई की मांग को लेकर विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उधर, कोतवाल रचिता जुयाल ने बताया कि मासूम के साथ हुई मारपीट का मामला प्रकाश में आया है, उन्होंने चौकी प्रभारी को मौके पर भेजा है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

युवा अौर युवती ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

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पूर्व प्रधान गल्जवाडी ग्रामसभा, देहरादून ने सूचना दी गई कि संतला देवी मंदिर आने जाने वाले रास्ते में ऊपर चढ़ाई में जंगल के अंदर पेड़ पर एक पुरुष व एक महिला के द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या की गई है। इस सूचना पर तत्काल प्रभारी निरीक्षक थाना कैन्ट पुलिस टीम रवाना हुए जहां करीब 2 किलोमीटर पर जंगल मे सुबह महिलाऐं घास और लकड़ी लेने गए थे। उन्होंने वहां एक पेड़ पर एक महिला व एक पुरुष को फांसी लगे देखा।

शवों पर कीडें व मक्खियां लगी थी, मौके पर घटना स्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की गई तथा ग्रामीणों से शवों की शिनाख्त के प्रयास कराई गई। मौके पर एक बैग मिला जिसमें एक नोट बुक मिली जिसमे मृतक का नाम वीरेंद्र एवं मृतिका का नाम प्रियंका पता चला तथा उसमें अंकित एक मोबाइल नंबर पर कॉल करने पर पता चला गया कि यह नंबर सुमित्रा का है जो मृतक वीरेंद्र की बहन है तथा उनके द्वारा बताया गया कि उनका भाई वीरेंद्र सिंह बहादुर व प्रियंका खत्री सोमवार से साथ गए हैं तथा दोनों के बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा है और वीरेंद्र अविवाहित है जबकि प्रियंका दो बच्चों की मां है।

।दोनों शवों को पेड़ से नीचे निकाला गया तथा मौके पर दोनों मृतकों के परिजन आए। मृतक वीरेंद्र की तलाशी में उसके जेब से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ, दोनों के द्वारा आपसी प्रेम में आत्महत्या करना अंकित किया गया है। दोनों शवोंं का पंचायत नामा आवश्यक कारवाई करने के पश्चात शवों को पोस्टमार्टम के लिये भिजवा दिया गया।

फिर शानदार हुई मसूरी माल रोड

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पिछले 18 साल से, निहाज सिंह मसूरी के माल रोड पर रिक्शा चला रहे है, कहते हैं, कितना अच्छा लग रहा है माल रोड, पहले चलने की जगह भी नहीं होती थी, गंदगी अलग होती थी, अब कितना साफ सुथरा लग रहा है, एक बार फिर माल रोड पहले जैसा सुंदर और साफ हो चुका है।

मसूरी के एसडीएम और शहर के मेयर की पहल से मसूरी की लगभग साढ़े तीन किमी लंबी माल रोड एक बार फिर अपनी पुरानी पहचान वापस पाने लगा है। पिछले कुछ सालों में राजनितिक पार्टियों ने अपने-अपने वोट बैंक के चक्कर में माल रोड को बिगाड़ दिया गया, घंटों का ट्रैफिक जाम, घोड़े, साइकिल, रिक्शा और बड़ी बड़ी गाड़ियों ने शहर की सड़कों को चोक कर दिया था। ऊपर से सड़क के किनारे लगभग सौ से अधिक अलग-अलग रेड़ियों और ठेली वालों ने माल रोड की खुबसूरती फीकी कर दी थी।

मसूरी के एसडीएम हरगिरी कहते हैं, औरों का नहीं पता लेकिन मैं अब किसी भी वेंडर को माल रोड पर दुकान लगाने की परमिशन नहीं दूंगा। इनके लिए म्यूनिसिपल काउंसिल को एक अलग प्लान तैयार करना होगा।

अब वेंडरों को कैमल बैक रोड निर्धारित करा दी गई है जिससे वेंडर खुश नहीं है, क्योंकि उनके मुताबिक, टूरिस्ट उस लोकेशन पर बहुत ज्यादा नहीं जाते। मनोज दिवान जो पिछले 25 सालों से माल रोड पर नेम प्लेट का बिजनेस करते हैं वो भी इस फैसले का शिकार हुए हैं। मनोज कहते हैं कि मेरे दो बेटे हैं जो क्लास 11 में जा रहे हैं, उनकी फीस तो भुल जाइए मेरे पास अब इतने पैसे भी नहीं कि अपना परिवार पाल सकूं, पिछले एक महीने से मेरी एक पैसे की कमाई भी नहीं हुईं है।

म्यूनिसिपल काउंसिल के अध्यक्ष मनमोहल मल्ला कहते हैं कि माल रोड हमेशा से ऐसा ही दिखना चाहिए था जैसा अब दिख रहा है, और इसकी खुबसूरती को बनाएं रखने के लिए हर कोशिश करेंगे। आशा है कि आने वाले समय में वोट बैंक पालिटिक्स के लिए मसूरी में हुए पाजिटिव बदलाव फिर से शहर की सुन्दरता पर दाग न लगें।

राजकीय जूनियर हाईस्कूल जखेड़ा के गुरुजी का अनोखा प्रकृति प्रेम

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राजकीय जूनियर हाईस्कूल जखेड़ा, गरुड़ बागेश्वर के प्रधानाध्यापक रामलाल को प्रकृति से अगाध प्रेम है। वह बचपन से ही प्रकृति के संरक्षण में लगे हैं। वह अब तक हज़ारों पौधे लगा चुके हैं। उन्हें तरुश्री सम्मान मिलने पर लाहुरघाटी में चारों ओर खुशी का माहौल है। लाहुरघाटी के जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और शिक्षकों ने उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया है।

प्रधानाध्यापक रामलाल बताते हैं कि उन्हें पौधे लगाने का जूनून बचपन से ही था। कौसानी की खूबसूरत वादियों ने उन्हें प्रकृति प्रेमी बना दिया। कौसानी स्कूल में पढ़ते हुए शिक्षकों ने उनके जूनून में और पंख लगाने का कार्य किया। शिक्षकों की प्रेरणा से ही विद्यार्थी जीवन में कई पौधे स्कूल के आसपास और गांव में लगाए और 1987 में शिक्षा विभाग में प्रथम नियुक्ति के बाद से ही स्कूल के बच्चों के साथ प्रत्येक सप्ताह पौधरोपण का कार्य करते आ रहे हैं।

वह बताते हैं कि राष्ट्रीय पर्व और किसी भी कार्यक्रम में वे अवश्य पौधरोपण करते हैं। उन्होंने बताया कि जखेड़ा स्कूल के पास काफी भूमि थी। वन विभाग के अधिकारियों और ग्राम प्रधान ने उन्हें हज़ारों पौधे उपलब्ध कराए। उन्होंने विद्यालय के आसपास कई छायादार और फलदार तथा औषधीय पौधे लगाये हैं। आज बच्चे और ग्रामीण उनके लगाए  पेड़ों से आंवला, संतरा, नीबू, केले, माल्टा आदि फल खा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि धरती को बढ़ते तापमान और ग्लोबल वार्मिंग से बचाना है तो अधिक से अधिक पौधरोपण करना होगा और पेड़ बनने तक उनका संरक्षण करना होगा।

उनकी इस उपलब्धि पर जिला पंचायत के उपाध्यक्ष देवेंद्र परिहार, लाहुरघाटी विकास मंच के अध्यक्ष और जखेड़ा के प्रधान ईश्वर सिंह परिहार, सचिव डी के जोशी, लमचुला के प्रधान मदन सिंह बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र मेहता, बीआरसी समन्वयक उमेश जोशी आदि ने उन्हें एक समारोह में सम्मानित करने का निर्णय लिया।

टिहरी में खुला पहला रैन बसेरा

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पंडित दीन दयाल अन्त्योदय योजना के तहत टिहरी जिले में पहले रैन बसेरे का स्थानीय विधायक धनसिंह नेगी ने उद्घाटन किया।इस मौके पर विधायक धनसिंह नेगी ने कहा कि गरीब और निराश्रित लोगों को मिलेगा इसका लाभ। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अन्तर्गत पंडित दीन दयाल अन्त्योदय योजना के तहत टिहरी जिले के नई टिहरी मुख्यालय में पहला रैन बसेरा खोला गया, जिसका उद्घाटन स्थानीय विधायक धनसिंह नेगी ने किया।

बौराड़ी बस अड्डे के पास बने रैन बसेरे में गरीब निराश्र्ति और विकलांग करीब एक दर्जन लोगों के रहने की व्यवस्था की गई है।जिसकी देखरेख का जिम्मा फिलहाल नगर पालिका के पास है। नगर पालिका अध्यक्ष उमेश चरण गुंसाई का कहना है कि लंबे समय से रैन बसेरे की मांग चली आ रही थी, लेकिन पालिका के पास संसाधनों का अभाव होने के चलते रेन बसेरा नहीं खोला गया।

लेकिन पंडित दीन दयाल अन्त्योदय योजना के तहत करीब 14 लाख की लागत से बौराड़ी बस अड्डे के पास रैन बसेरा खोला गया है। जिससे करीब एक दर्जन निराश्रित लोगों को लाभ मिलेगा।

टिहरी विधायक धनसिंह नेगी का कहना है कि लंबे समय से टिहरी में रैन बसेरे की मांग की जा रही थी, जो कि अब पूरी हुई है।इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अभी तो यह शुरुआत है हम कोशिश करेंगे कि इस रैन बसेरे की कैपेसिटी और बढ़ाई जाए।

सीएम त्रिवेंद्र ने पर्वतारोही ताशी और नुंग्शी से की मुलाकात

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शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से उत्तराखण्ड की विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही बहनों ताशी एवं नुंग्शी मलिक ने भेंट कर, गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्ड के प्रमाण पत्र को दिखाया। मलिक बहनों को यह प्रमाण पत्र, उनके द्वारा सर्वाधिक कम आयु में ही विश्व की सभी प्रसिद्ध पर्वत चोटियों पर आरोहण करने और उत्तरी ध्रुव पर पहुंचने हेतु प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने ताशी एवं नुंग्शी मलिक को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि वे एडवेंचर स्पोट्र्स के साथ-साथ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेंगी।

अधिकारी आवास से नाबालिक बच्चिया की बरामद

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 देहरादून के थाना रायपुर क्षेत्र स्थित रक्षा मंत्रालय के ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के बड़े अधिकारी आवास जहां एक एनजीओ की शिकायत के आधार पर पुलिस ने नेपाल मूल की दो नाबालिक बच्चिया बरामद की । शिकायतकर्ता एनजीओ का आरोप है की ये दोनों बच्चियों को मानव तस्करी के माध्यम से लाई गई हैं।और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के अधिकारी आवास में इनका शोषण हो रहा हैं। उधर एनजीओ की  तहरीर के आधार पर देहरादून पुलिस ने इस मामलें में मुकदमा दर्ज कर जांच  शुरू कर दी है।

हालाँकि पुलिस अधिकारीयों के अनुसार अभी तक की पूछताछ में बरामद हुई बच्चियों ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री अधिकारी के खिलाफ कोई शोषण जैसी बात नहीं बताई हैं।  लेकिन प्रथम जांच में ये बात ज़रूर सामने आई है की ये नाबालिक बच्चियां नेपाल से यहाँ लाई गई हैं। पुलिस इस मामलें में ऑर्डिनेंस  फैक्ट्री के अधिकारी सहित अन्य लोगों से पूछताछ कर रही है। साथ ही पुलिस जांच के बाद ही आगे की कार्यवाही सुनिश्चित करने की बात कह रही हैं, कहा हरबंस सिंह, सीओ, डालनवाला ने।

इससे  कुछ दिन पहले भी देहरादून के  रायपुर स्थित भारत सरकार के डील संस्थान में कार्यरत एक वैज्ञानिक के घर से भी  पुलिस और प्रशासन ने बंधक बनी एक लड़की को मुक्त करवाया था। तब 6 माह से वैज्ञानिक के घर में बंधक लड़की ने ही किसी तरह 100 नंबर में फोन कर पुलिस से मद्द्त की गुहार लगाईं थी, जिसके बाद मामलें में मुकदमा दर्ज हुआ और कुछ दिन बाद देहरादून पुलिस ने इस मामलें से जुड़े एक मानव तस्कर को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। जिसने लड़की को दिल्ली से बेचा था। हालांकि इस मामलें में फरार  डील वैज्ञानिक की  गिरफ्तारी  इस लिए नहीं हो सकी , क्योंकि उसने गिरफ्तारी से पहले ही कोर्ट से स्टे ले लिया था।  अब ऐसे में सवाल यह है की – कही उत्तराखंड मानव तस्करी खरीदारों का गढ़ तो नहीं।

एन एच घोटाले की खुलती परत

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किच्छा, मे राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहण की गई जमीन के मामले में कृषि भूमि को गैरकृषि दर्शाकर किए गए घोटाले की चल रही जांच के बीच दलालों व विभागीय अधिकारियों की सांठ गांठ के चलते नया घोटाला प्रकाश में आया है। अधिकारियों ने दलालों के साथ मिली भगत कर भू-स्वामियों से अधिग्रहण की गई भूमि का रकबा कम करते हुए करोड़ों रुपये का लाभ दलालों को देने का काम किया है।

जहां एक ओर अधिग्रहण की गई भूमि के वास्तविक भू स्वामी अपने हक की लड़ाई के लिए अधिकारियों के दफ्तरों में  चक्कर लगाकर घोटाले की निष्पक्ष जांच कराने को भटक रहे हैं  वहीं दूसरी ओर पूरे मामले में अधिकारियों की शह पर कुछ दलाल करोड़ों का खेल खेलने की तैयारी कर रहे हैं। इसी मामले में कई ऐसे पात्र ग्रामीण भी हैं जिनकी भूमि प्रशासन द्वारा अधिग्रहण तो की गयी है परन्तु मुआवजे के लिए प्रशासन द्वारा जारी की गई सूची में उनका नाम नहीं है। मामले को लेकर क्षेत्र के तमाम ग्रामीण व पीडि़त भू स्वामी लामबंद हो रहे हैं। उन्होंने आर पार की लड़ाई लडऩे का ऐलान कर दिया है।

राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के किच्छा-सितारगंज मार्ग स्थित ग्राम उत्तम नगर, हथमना  क्षेत्र में सड़क चौडीकरण के लिए अधिग्रहण  की गई भूमि में नया मामला प्रकाश में आया है। बताया जा रहा है कि ग्राम उत्तम नगर में अधिकारियों ने अधिग्रहण की गई तमाम ग्रामीणों की भूमि  का रकबा  करीब चार से आठ गुना कम कर उक्त भूमि का मालिक अपने चहेतों को दर्शाकर उन्हें करोड़ों को लाभ पहुंचाने का काम कर दिया है। पीडि़त ग्रामीणों का आरोप है कि उनके द्वारा कई बार इस संबध में प्रशासन के तमाम आला अधिकारियों को लिखित शिकायत देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच व कार्यवाही की गुहार लगाई गई है, परन्तु अधिकारियों द्वारा उनकी शिकायत की लगातार अनदेखी कर भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही न की गई तो वे उग्र आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेगें और क्षेत्र में चौड़ीकरण का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। ग्राम उत्तम नगर के बैंकेट हॉल में ग्रामीणों की सम्पन्न हुई बैठक में आर पार की लड़ाई लडऩे तथा उग्र आन्दोलन की रूप रेखा तैयार की गई।  ।

ऋषीकेश नारायण भरत भगवान की 108 परिक्रमा से मिलता है बदरीनाथ के दर्शनों का पुन्य

उत्तराखंड में बैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीय को पड़ने वाले अक्षयतृतीया पर्व का विशेष महत्व है। धर्म ग्रंथो और पुराणो के अनुसार आज ही के दिन सतयुग का प्रारभ हुआ था,  वैष्णव परम्परा से जुड़े पोरानणिक मंदिरों में इस दिन भगवान् विष्णु के विशेष पूजन- आराधना का विधान है । ऋषीकेश के 7-8वी सदी के पोराणिक भरत मंदिर में आज के दिन १०८ परिक्रमा करने से भगवान् बदरीनाथ के दर्शनों  के समान पुन्य का लाभ मिलता है
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ऋषीकेश के सबसे प्राचीन मंदिर भरत मंदिर में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है, सातवी शताब्दी में शन्कराचार्य द्वारा पुनह स्थापित ऋषीकेश नारायण भरत मंदिर से जुडी एक प्राचीन मान्यता अक्षय तृतीया को यहाँ की १०८ परिक्रमा करके भगवान बदरीनाथ के दर्शन के समान पुन्य मिलता है। यही कारण है की अक्षय तृतीया के दिन सुबह से ही यहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगती है। मान्यता है कि जो लोग भगवान बदरीनाथ के दर्शन नहीं कर पाते वो आज के दिन ऋषीकेश नारायण की परिक्रमा करके वहा के सामान पुन्य लाभ अर्जित करते है।
ऋषीकेश के इस मंदिर पर लगातार मुगलों का आक्रमण होता रहा, मुगलों ने यहाँ की मूर्तियों को खंडित भी किया, शंकराचार्य ने इस मंदिर की पुनह प्राण प्रतिष्ठा कर यहाँ मूर्ति स्थापित की, यहाँ की ऋषीकेश नारायण की मूर्ति और बदरीनाथ भगवान की मूर्ति दोनों ही एक पाषणशिला से निर्मित है। आज के दिन देश के कोने-२ से आकर श्रद्धालु यहाँ परिक्रमा लेते है और भगवान् बदरीनाथ के दर्शनों  का पुन्य प्राप्त करते है।

माओवादियों की गतिविधि फिर हुई तेज

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हिंसा के लिए उकसाने वाले पोस्टर व भड़काऊ स्लोगन से माओवादी बाज नहीं आ रहे। शराब विरोधी आंदोलन से सुलग रहे द्वाराहाट ब्लॉक क्षेत्र का मामला अभी सुर्खियों में चल ही रहा था कि अब अल्मोड़ा के भैंसियाछाना विकासखंड के पेटशाल इलाके में माओवादियों की दस्तक से हडकंप मच गया। हालांकि दोपहर तक स्थानीय लोगों ने भड़काऊ पोस्टर फाड़ दिए। वहीं आरएफसी गोदाम व एक विद्यालय की दीवारें लाल रंग से पुती पड़ी हैं।

द्वाराहाट के बाद माओवादियों ने भैंसियाछाना विकासखंड में गुपचुप कदम रखे हैं। जिला मुख्यालय से कुछ दूर पेटशाल क्षेत्र में आरएफसी के गोदाम व एक विद्यालय की दीवारों पर शराब के विरोध को समर्थन का एलान तथा मदिरालयों को आग के हवाले करने की अपील करते स्लोगन लिखे गए हैं। माना जा रहा है कि बीती देर रात्रि माओवादियों ने दीवारें रंगी। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ स्थानों पर पोस्टर भी लगायें गए थे, जिन्हें गुरुवार को फाड़ दिया गया। इधर राजस्व टीम ने मौका मुआयना कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी है।

बताते चलें कि बीती 23 अप्रैल की देर रात्रि द्वाराहाट विकासखंड के बिंता, कामा, बग्वालीपोखर आदि क्षेत्रों में भी माओवादियों ने भड़काऊ पोस्टर चस्पा कर दीवारें लाल रंग से हिंसा के लिए उकसाते स्लोगनों से पोत दिया था। तभी से पुलिस प्रशासन व खुफिया तंत्र सतर्क हो गया है।

राजस्व उपनिरीक्षक पेटशाल युगल किशोर पांडे का कहना है कि आरएफसी गोदाम व एक विद्यालय की दीवार में लाल रंग की मिट्टी से शराब विरोधी नारे लिखे गए हैं। सूचना मिलने पर मौका मुआयना कर जिलाधिकारी को मामले की रिपोर्ट भेज दी गई है।