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अधिकारी आवास से नाबालिक बच्चिया की बरामद

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 देहरादून के थाना रायपुर क्षेत्र स्थित रक्षा मंत्रालय के ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के बड़े अधिकारी आवास जहां एक एनजीओ की शिकायत के आधार पर पुलिस ने नेपाल मूल की दो नाबालिक बच्चिया बरामद की । शिकायतकर्ता एनजीओ का आरोप है की ये दोनों बच्चियों को मानव तस्करी के माध्यम से लाई गई हैं।और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के अधिकारी आवास में इनका शोषण हो रहा हैं। उधर एनजीओ की  तहरीर के आधार पर देहरादून पुलिस ने इस मामलें में मुकदमा दर्ज कर जांच  शुरू कर दी है।

हालाँकि पुलिस अधिकारीयों के अनुसार अभी तक की पूछताछ में बरामद हुई बच्चियों ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री अधिकारी के खिलाफ कोई शोषण जैसी बात नहीं बताई हैं।  लेकिन प्रथम जांच में ये बात ज़रूर सामने आई है की ये नाबालिक बच्चियां नेपाल से यहाँ लाई गई हैं। पुलिस इस मामलें में ऑर्डिनेंस  फैक्ट्री के अधिकारी सहित अन्य लोगों से पूछताछ कर रही है। साथ ही पुलिस जांच के बाद ही आगे की कार्यवाही सुनिश्चित करने की बात कह रही हैं, कहा हरबंस सिंह, सीओ, डालनवाला ने।

इससे  कुछ दिन पहले भी देहरादून के  रायपुर स्थित भारत सरकार के डील संस्थान में कार्यरत एक वैज्ञानिक के घर से भी  पुलिस और प्रशासन ने बंधक बनी एक लड़की को मुक्त करवाया था। तब 6 माह से वैज्ञानिक के घर में बंधक लड़की ने ही किसी तरह 100 नंबर में फोन कर पुलिस से मद्द्त की गुहार लगाईं थी, जिसके बाद मामलें में मुकदमा दर्ज हुआ और कुछ दिन बाद देहरादून पुलिस ने इस मामलें से जुड़े एक मानव तस्कर को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। जिसने लड़की को दिल्ली से बेचा था। हालांकि इस मामलें में फरार  डील वैज्ञानिक की  गिरफ्तारी  इस लिए नहीं हो सकी , क्योंकि उसने गिरफ्तारी से पहले ही कोर्ट से स्टे ले लिया था।  अब ऐसे में सवाल यह है की – कही उत्तराखंड मानव तस्करी खरीदारों का गढ़ तो नहीं।

एन एच घोटाले की खुलती परत

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किच्छा, मे राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहण की गई जमीन के मामले में कृषि भूमि को गैरकृषि दर्शाकर किए गए घोटाले की चल रही जांच के बीच दलालों व विभागीय अधिकारियों की सांठ गांठ के चलते नया घोटाला प्रकाश में आया है। अधिकारियों ने दलालों के साथ मिली भगत कर भू-स्वामियों से अधिग्रहण की गई भूमि का रकबा कम करते हुए करोड़ों रुपये का लाभ दलालों को देने का काम किया है।

जहां एक ओर अधिग्रहण की गई भूमि के वास्तविक भू स्वामी अपने हक की लड़ाई के लिए अधिकारियों के दफ्तरों में  चक्कर लगाकर घोटाले की निष्पक्ष जांच कराने को भटक रहे हैं  वहीं दूसरी ओर पूरे मामले में अधिकारियों की शह पर कुछ दलाल करोड़ों का खेल खेलने की तैयारी कर रहे हैं। इसी मामले में कई ऐसे पात्र ग्रामीण भी हैं जिनकी भूमि प्रशासन द्वारा अधिग्रहण तो की गयी है परन्तु मुआवजे के लिए प्रशासन द्वारा जारी की गई सूची में उनका नाम नहीं है। मामले को लेकर क्षेत्र के तमाम ग्रामीण व पीडि़त भू स्वामी लामबंद हो रहे हैं। उन्होंने आर पार की लड़ाई लडऩे का ऐलान कर दिया है।

राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के किच्छा-सितारगंज मार्ग स्थित ग्राम उत्तम नगर, हथमना  क्षेत्र में सड़क चौडीकरण के लिए अधिग्रहण  की गई भूमि में नया मामला प्रकाश में आया है। बताया जा रहा है कि ग्राम उत्तम नगर में अधिकारियों ने अधिग्रहण की गई तमाम ग्रामीणों की भूमि  का रकबा  करीब चार से आठ गुना कम कर उक्त भूमि का मालिक अपने चहेतों को दर्शाकर उन्हें करोड़ों को लाभ पहुंचाने का काम कर दिया है। पीडि़त ग्रामीणों का आरोप है कि उनके द्वारा कई बार इस संबध में प्रशासन के तमाम आला अधिकारियों को लिखित शिकायत देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच व कार्यवाही की गुहार लगाई गई है, परन्तु अधिकारियों द्वारा उनकी शिकायत की लगातार अनदेखी कर भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही न की गई तो वे उग्र आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेगें और क्षेत्र में चौड़ीकरण का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। ग्राम उत्तम नगर के बैंकेट हॉल में ग्रामीणों की सम्पन्न हुई बैठक में आर पार की लड़ाई लडऩे तथा उग्र आन्दोलन की रूप रेखा तैयार की गई।  ।

ऋषीकेश नारायण भरत भगवान की 108 परिक्रमा से मिलता है बदरीनाथ के दर्शनों का पुन्य

उत्तराखंड में बैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीय को पड़ने वाले अक्षयतृतीया पर्व का विशेष महत्व है। धर्म ग्रंथो और पुराणो के अनुसार आज ही के दिन सतयुग का प्रारभ हुआ था,  वैष्णव परम्परा से जुड़े पोरानणिक मंदिरों में इस दिन भगवान् विष्णु के विशेष पूजन- आराधना का विधान है । ऋषीकेश के 7-8वी सदी के पोराणिक भरत मंदिर में आज के दिन १०८ परिक्रमा करने से भगवान् बदरीनाथ के दर्शनों  के समान पुन्य का लाभ मिलता है
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ऋषीकेश के सबसे प्राचीन मंदिर भरत मंदिर में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है, सातवी शताब्दी में शन्कराचार्य द्वारा पुनह स्थापित ऋषीकेश नारायण भरत मंदिर से जुडी एक प्राचीन मान्यता अक्षय तृतीया को यहाँ की १०८ परिक्रमा करके भगवान बदरीनाथ के दर्शन के समान पुन्य मिलता है। यही कारण है की अक्षय तृतीया के दिन सुबह से ही यहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगती है। मान्यता है कि जो लोग भगवान बदरीनाथ के दर्शन नहीं कर पाते वो आज के दिन ऋषीकेश नारायण की परिक्रमा करके वहा के सामान पुन्य लाभ अर्जित करते है।
ऋषीकेश के इस मंदिर पर लगातार मुगलों का आक्रमण होता रहा, मुगलों ने यहाँ की मूर्तियों को खंडित भी किया, शंकराचार्य ने इस मंदिर की पुनह प्राण प्रतिष्ठा कर यहाँ मूर्ति स्थापित की, यहाँ की ऋषीकेश नारायण की मूर्ति और बदरीनाथ भगवान की मूर्ति दोनों ही एक पाषणशिला से निर्मित है। आज के दिन देश के कोने-२ से आकर श्रद्धालु यहाँ परिक्रमा लेते है और भगवान् बदरीनाथ के दर्शनों  का पुन्य प्राप्त करते है।

माओवादियों की गतिविधि फिर हुई तेज

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हिंसा के लिए उकसाने वाले पोस्टर व भड़काऊ स्लोगन से माओवादी बाज नहीं आ रहे। शराब विरोधी आंदोलन से सुलग रहे द्वाराहाट ब्लॉक क्षेत्र का मामला अभी सुर्खियों में चल ही रहा था कि अब अल्मोड़ा के भैंसियाछाना विकासखंड के पेटशाल इलाके में माओवादियों की दस्तक से हडकंप मच गया। हालांकि दोपहर तक स्थानीय लोगों ने भड़काऊ पोस्टर फाड़ दिए। वहीं आरएफसी गोदाम व एक विद्यालय की दीवारें लाल रंग से पुती पड़ी हैं।

द्वाराहाट के बाद माओवादियों ने भैंसियाछाना विकासखंड में गुपचुप कदम रखे हैं। जिला मुख्यालय से कुछ दूर पेटशाल क्षेत्र में आरएफसी के गोदाम व एक विद्यालय की दीवारों पर शराब के विरोध को समर्थन का एलान तथा मदिरालयों को आग के हवाले करने की अपील करते स्लोगन लिखे गए हैं। माना जा रहा है कि बीती देर रात्रि माओवादियों ने दीवारें रंगी। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ स्थानों पर पोस्टर भी लगायें गए थे, जिन्हें गुरुवार को फाड़ दिया गया। इधर राजस्व टीम ने मौका मुआयना कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी है।

बताते चलें कि बीती 23 अप्रैल की देर रात्रि द्वाराहाट विकासखंड के बिंता, कामा, बग्वालीपोखर आदि क्षेत्रों में भी माओवादियों ने भड़काऊ पोस्टर चस्पा कर दीवारें लाल रंग से हिंसा के लिए उकसाते स्लोगनों से पोत दिया था। तभी से पुलिस प्रशासन व खुफिया तंत्र सतर्क हो गया है।

राजस्व उपनिरीक्षक पेटशाल युगल किशोर पांडे का कहना है कि आरएफसी गोदाम व एक विद्यालय की दीवार में लाल रंग की मिट्टी से शराब विरोधी नारे लिखे गए हैं। सूचना मिलने पर मौका मुआयना कर जिलाधिकारी को मामले की रिपोर्ट भेज दी गई है।

टंकी में चढ़े छात्र,कॉलेज परिसर में मची अफरा-तफरी

ऋषिकेश के पी.जी ऑटोनोमस कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष अमित पंवार व पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष संदीप शर्मा पानी की डिगी में चढ़ गये, जिससे पूरे कॉलेज में अफरा तफरी का माहौल बन गया। दोनों का कहना हैं कि कॉलेज का कल होने वाले वार्षिक छात्रसंघ समारोह नही होना चाहिए। छात्र नेताओं का कहना हैं कि एक ओर सीमा पर जवान शहीद हो रहे हैं दूसरी और कॉलेज उत्सव की तैयारी कर रहा हैं। जिसके विरोध में वो टंकी पर चढ़ गए।

फिलहाल पुलिस मौके पर पहुँच गयी हैं और छात्र नेताओं को मानाने की कोशिश की जा रही है। गौरतलब है की सुखमा में मारे गए जवानों को आधार बनाकर ये छात्र मांग कर रहे है की कॉलेज का वार्षिक छात्रसंघ समारोह पर रोक लगाई जाये और जो पैसा नाच-गाने में खर्च होना है उस पैसे को कॉलेज के विकास कार्यों और पुस्तकालय में किताबों पर खर्च किया जाये जिससे देश के शहीदों को सच्ची श्रंद्धाली दी जा सके।

आंचल पांधी की मौत से जल्द उठेगा पर्दा

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हाई कोर्ट, नैनीताल ने देहरादून के हाईप्रोफाइल आंचल पांधी मौत मामले की सीबीआइ जांच की मांग करती याचिका पर सुनवाई करते हुए 11 मई तक जांच की प्रगति की रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने जांच अधिकारी की निष्पक्षता की सराहना की है।

उल्लेखनीय है वैलेंटाइन डे (14 फरवरी) को देहरादून में विवाहिता आंचल पांधी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मृतका के पिता अनिल कोहली, निवासी रेसकोर्स रोड, देहरादून ने मौत को हत्या बताते हुए सीबीआइ जांच की मांग करते हुए याचिका दायर की। इधर हाल ही में इस मामले की जांच एसपी देहात श्वेता चौबे को हस्तांतरित की गई।

मृतका के पति, राहुल पांधी के मोबाइल की कॉल डिटेल में पता चला कि उनकी प्रेमिका से बात होती थी। इसके बाद जांच अधिकारी ने पति के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया। 22 अप्रैल को मृतका के पति को दिल्ली से गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेशी के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

इधर बुधवार को वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी.के. बिष्ट की एकलपीठ के समक्ष विवेचक व एसपी देहात श्वेता चौबे द्वारा हलफनामा दाखिल किया गया। एकलपीठ ने जांच अधिकारी की निष्पक्षता की सराहना करते हुए जांच रिपोर्ट अगली सुनवाई 11 मई तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट ने गंगा नदी से साथ राज्य से मांगा जवाब

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नैनीताल हाई कोर्ट ने गंगा पर एक और ऐतिहासिक फैसला देते हुए गंगा उसे जीवित मानकर नदी को जीवित आदमी के बराबर अधिकार देने के बाद आज पहली बार लीगल नोटिस जारी किया है । हाई कोर्ट ने गंगा नदी के साथ राज्य सरकार, पर्यावरण बोर्ड, नगर पालिका ऋषिकेश और केन्द्रीय पयार्वरण बोर्ड को भी नोटिस जारी कर जवाब माँगा है । ऋषिकेश के खादा खड़क माफ़ नामक गॉव में बन रहे ट्रेन्चिंग ग्राउंड का था मामला । मामले की अगली सुनवाई 8 मई को होगी ।

बेजुबानों को गर्मी से राहत के लिए दि जा रही मल्टीविटामिन

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गर्मी और उमस से मनुष्य ही नहीं, बेजुबान भी त्रस्त हैं। देहरादून जू (मालसी डीयर पार्क) भी इससे अछूता नहीं हैं। भरी दुपहरी में बेजुबान गर्मी से हांफते नजर आते हैं। गर्मी व उमस जानवरों के लिए परेशानी का सबब न बने, इसके लिए जू प्रशासन उन्हें मल्टी विटामिन दे रहा है। साथ ही इनके आहार में भी बदलाव किया गया है। गुलदारों को चिकन दिया जा रहा तो शाकाहारी जीवों को हरी घास और परिंदों को हरी सब्जियां परोसी जा रही हैं। यही नहीं, उनके लिए पानी का भी पर्याप्त इंतजाम किया गया है।1देहरादून वन प्रभाग की मालसी रेंज में मसूरी मार्ग पर स्थित देहरादून जू में रह रहे जानवरों व परिंदों को गर्मी सता रही है। इसे देखते हुए जू प्रशासन ने इनके खान- पान में बदलाव किया है। जू के निदेशक एवं डीएफओ देहरादून पीके पात्रों के मुताबिक यहां मौजूद दो गुलदारों को इन दिनों मुर्गाें का मांस दिया जा रहा है, ताकि उसे पचाने में दिक्कत न हो। अन्य जानवरों के भोजन में भी बदलाव किया गया है। परिंदों को सूरजमुखी का बीज देना बंद कर दिया गया है और उन्हें पत्तागोभी, पालक, मूली व राई की पत्तियां समेत अन्य हरी सब्जियां दी जा रही हैं। शाकाहारी जीवों की डाइट में हरी घास की मात्र बढ़ाई गई है। भोजन के साथ जू के सभी जीवों को मल्टी विटामिन भी दिए जा रहे हैं, ताकि इन्हें गर्मी व उमस से कोई दिक्कत न हो।

देहरादून जू के वन क्षेत्रधिकारी एमएम बैजवाण बताते हैं कि जू में रह रहे गुलदार राजा व रानी को इन दिनों तीन-तीन किलो चिकन दिया जा रहा है। सामान्य दिनों में इन्हें तीन किलो बीफ दिया जाता था। गर्मी शुरू होने पर आधा बीफ और आधा चिकन दिया गया। वर्तमान में इन्हें केवल मुर्गा का मांस ही दिया जा रहा है।

ये दिए जा रहे विटामिन बी-6, बी-12, ई, कोबाल्ट, कॉपर, मैग्नीज, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, सोडियम आदि।

अक्षय तृतीया पर सजे बाजार

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अक्षय तृतीया पर स्वर्ण व चांदी की खरीदारी को लेकर रुद्रपुर का सर्राफा बाजार गुलजार हो गया। ग्राहकों को लुभाने के लिए सर्राफा व्यापारियों ने अपनी पूरी तैयारियां कर ली है। उनको अक्षय तृतीया पर भारी कारोबार की उम्मीदें जगी हुई है।

अक्षय तृतीया से ठीक पहले पीली धातु में गिरावट के साथ ही सर्राफा व्यापारियों के चेहरे की चमक को बढ़ा दिया है। अक्षय तृतीया के दिन स्वर्ण व चांदी के आभूषणों के साथ ही भगवान की मूर्ति आदि की खरीद को शुभ माना जाता है। जिसके चलते लोग खरीदारी के लिए अक्षय तृतीया का इंतजार करते है। जिससे उनके घर में खुशहाली सदा बनी रही। इसके लिए लोग शुभ मुहूर्त में ही खरीदारी करना पंसद करते है।

सर्राफा व्यापारी भी इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते है। ग्राहकों को लुभाने के लिए व्यापारियों ने न केवल नए आधुनिक डिजाइन की ज्वेलरी तैयार करवाई है। अपितु उनको भारी छूट का लाभ देने की भी तैयारी कर ली गई है। ब्रांडेड ज्वेलरी पर 5 से 25 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही हैं। इसमें सर्वाधिक छूट हीरे के गहनों पर दी जा रही है। जिससे आकर्षित होकर ग्राहक एक बार दुकान की दहलीज पर जरुर खींचा आए। लुभावनी छूट के बीच ग्राहक भी अक्षय तृतीया पर अपने शुभ मुहूर्त पर स्वर्ण, चांदी व हीरे के आभूषण खरीदने की तैयारी में जुटा है। जिससे शुक्रवार को अक्षय तृतीया के दिन सर्राफा बाजार के गुलजार रहने की प्रबल संभावनाएं बनी हुई है।

अल्मोडा मे पानी की कमी से हाहाकार

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गर्मी की तपन बढ़ने के साथ ही स्रोतों पर जलस्तर घटने लगा है। इससे कई स्रोत आधारित पेयजल योजनाएं प्रभावित हो चली हैं। विकास खंड अंतर्गत ऐसा ही कुछ हाल छाम-भगोती-पटलगांव पेयजल योजना का है। पानी की कमी के चलते सप्ताहभर से जौंलचौरा व खज्यूरां में पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी है। ऐसे में गांवों में पीने के पानी का भारी संकट उत्पन्न हो चला है।

जौलचौरा व खज्यूरां समेत आसपास के गांवों के लिए छाम-भगोती-पटलगांव योजना से पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन स्रोत पर पानी की भारी कमी व समुचित देखरेख के अभाव में इन गांवों में बीते एक सप्ताह से पानी नहीं पहुंच रहा है। जौलचौरा गांव में तो पानी का और भी संकट उत्पन्न हो चला है। गांव के करीब 35 परिवार नौले पर निर्भर हैं, लेकिन वह भी सूखने के कगार पर है। घंटों बाद पानी भरने का नंबर आता है।

ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कई बार जल संस्थान के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। पानी की समस्या को लेकर गांव का शिष्ट मंडल क्षेत्रीय विधायक को भी मिल चुका है। प्रधान जगदीश लाल, कुबेर सिंह व नारायण सिंह राणा आदि ने गांव के लिए अलग योजना बनाने की मांग की है।

जौलचौरा व खज्यूरां में सड़क किनारे एक-एक हैंडपंप लगे हैं, लेकिन इनमें एकदम पीला रंग लिए गंदा पानी निकलता है, जो पीने योग्य नहीं है। हैंडपंप से निकलने वाला पानी बर्तनों को भी पीला कर देता है। ग्रामीणों की मांग है कि इनमें फील्टर लगाए जाएं। ताकि आसपास के लोगों को कुछ राहत मिल सके।