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तीन लोगों की मौत का जिम्मेदार पुलिस का डंडा

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पुलिस की लापरवाही और पुलिसिया रौबाव के चलते एक बार फिर उधमसिंहनगर पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा है। वाहन चैकिंग के दौरान बाईक सवारों को डंडे के बल पर रोकने के प्रयास के देर रात जसपुर क्षेत्र में बडा हादसा घटित हो गया जिसमें तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी। आपको बता दें कि पुलिस की चैकिंग के दौरान बाईक को रोकने के चलते किये गये डंडे के प्रयोग से बाईक सवार दो युवक सडक पर गिर गये पीछे तेजी से आते हुए ट्रक की चपेट में आने से दोनों बाईक सवारों की मौके पर मौत हो गयी जबकी दोनों बाईक सवारों को बचाने के चक्कर में ट्रक पलट गया और ट्रक चालक की भी मौके पर ही मौत हो गयी।

जसपुर कोतवाली क्षेत्र में हुई घटना के बाद क्षेत्र के लोग मौके पर पहुंच गये और पुलिस के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया, वहीं गुस्साये ग्रामीणों ने पुलिस पर जमकर पथराव किया। जिसमें कुछ सिपाही मामुली घायल हुए है जबकि पुलिस के कई वाहनों पर भी तोडफोड की गयी। दुर्घटना के बाद मचे इस कोहराम के चलते परिजनों ने शव को नेशनल हाईवे पर रखकर आरोपी  पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग करते हुए जाम लगाया वहीं भीड को तितर बितर करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठीयां भी भांजनी पडी। वहीं एसएसपी के मौके पर पहुंचने पर ग्रामीणों को कार्यवाही का आश्वासन देने के बाद किसी तरह से जाम खुलवाया गया, वहीं तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है।

एसएसपी ने बताया कि आरोपी सिपाही और थाना इन्चार्ज को फिलहाल सस्पेंड कर दिया गया है वहीं मामले की मजिस्ट्रियल जांच के लिए जिलाधिकारी से वार्ती की गयी है। जबकि इससे पूर्व भी पुलिस हिरासत में पुछताथ के लिए लाए गये युवक की संदिग्ध मौत के मामले में पहले ही पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में है, वहीं अब इस हादसे के बाद लोगों में पुलिस को लेकर आक्रोश बना हुआ है।

डोईवाला एडवेंचर ट्रेनिंग में 23 महिला अधिकारी भी शामिल

ग्वालियर के प्रशिक्षु अधिकारी प्रशिक्षणार्थियों को साहसिक जोखिम तथा आपदाओं से निपटने का प्रशिक्षण बीएसएफ इंस्टिट्यूट ऑफ  एडवेंचर एंड एडवांस ट्रेनिंग  डोईवाला में दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को व्हाइट वाटर राफ्टिंग, ट्रैकिंग रिवर क्रॉसिंग ,रॉक ,क्लाइंबिंग कॉन्फिडेंस जंप, बॉडी सर्फिंग ,पैराग्लाइडिंग बेसिक ,स्लिद रिंग ,माउंटेन बाइकिंग की ट्रेनिंग दी जा रही है ।

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डोईवाला स्थित बीएसएफ  इंस्टीट्यूट ऑफ एडवेंचर एवं एडवांस ट्रेनिंग में एसटीसी बी एस एफ बेंगलुरु के 111 प्रशिक्षु अधीनस्थ अधिकारी  प्रशिक्षणार्थियों को  साहसिक जोखिम तथा आपदा से निपटने  की ट्रेनिंग दी गई  साहसिक और जोखिम भरी इस एडवेंचर ट्रेनिंग में 23 महिला अधीनस्थ  अधिकारी भी शामिल   रही । बीएसएफ कमांडेंट आर के नेगी ने बताया की  डोईवाला के बीएसएफ ट्रेनिंग संस्थान में टेकनपुर के 788 और अन्य मुख्यालयों से आये 1755 प्रशिक्षु अधिकारी को  यह संस्थान साहसिक प्रशिक्षण की ट्रेनिंग दे चुका है संस्थान के अंतर्गत बी एस एफ के  प्रशिशु  जवानो को देश में होने वाली किसी भी  प्रकार की कठिन से कठिन चुनोतियो से निपटने ,किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा ,भीषण भूकंप जेसी त्ररासदियों से लोगो की जान बचाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

 

उत्तराखंड में एडवेंचर स्पोर्टस का नया पता: गरुड़ा कैंप

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मनीष जोशी वो नाम है जिसने छोटी सी उम्र में बहुत से रिकार्ड अपने नाम कर लिए हैं। उत्तराखंड के पौड़ी जिले के एक छोटे से गाव से संबंध रखने वाले मनीष ने ना केवल अपना नाम बल्कि अपने क्षेत्र का नाम भी रौशन किया है।

दून स्कूल में पढ़ने वाले मनीष जब मात्र 14 साल के थे तो इन्होंने एक एयरक्राफ्ट का निर्माण किया जिसमें दो लोगों के साथ एक पायलट के बैठने की जगह थी। इस शानदार निर्माण के लिए मनीष का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में आ गया और इस खोज के बाद मनीष ने अपनी जिंदगी में कभी पीछे मुड़ कर नही देखा। एडवेंचर के क्षेत्र में हमेशा नए-नए चीजें करना मनीष का पहला पैशन था। स्पोर्टस बैकग्राउंड होने की वजह से खेल-कूद और एडवेंचर स्पोर्टस में हमेशा सबसे आगे रहने वाले मनीष ने इसको ही अपना कैरियर बना लिया और इसको ही जीने लगे। मनीष को अपने परिवार का साथ और प्यार मिला जिससे वह आगे बढ़ते रहे।

आए दिन नई सोच और नई खोज के साथ मनीष ने अपने गांव की भी तस्वीर बदलने का मन बनाया। लगभग 2 साल पहले अपनी इस सोच को आकार भी दिया। मनीष ने अपने गांव में एक विलेज एडवेंचर कैंप शुरु किया। नाम रखा ‘गरुड़ा एडवेंचर कैंप’। गरुड़ चिड़िया मनीष के कैंप का खास आकर्षण है।

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अगर मनीष के परिवार की बात करें तो उनके पिता मोहन जोशी को गढ़वाल का पहला उद्योगपति कहा जाता हैं क्योंकि सन् 1970 में अपनी बीएचईएल की नौकरी छोड़ कर वह अपने गांव वापस आ गए। उस वक्त शायद ही कोई टरपेनटाईन तेल को जानता हो। तब उन्होंने तारपीन के तेल की फैक्ट्री शुरु की। इस हिसाब से देखा जाए तो मनीष की प्रेरणा उनके पिता जी ही थे। मनीष कहते हैं “शायद रिस्क लेना हमारे परिवार के खून में ही था पहले पिता जी ने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ी और मैंने खुद एडवेंचर करने के लिए अपनी जिंदगी पहाड़ में ही निकाल दी।”

विलेज एडवेंचर कैंपः

2 साल पहले मनीष ने पौड़ी से लगभग 20 किमी दूर अपना विलेज एडवेंचर कैंप शुरु किया जिसमें वह आने वाले टूरिस्ट को बहुत से नए अनुभव कराते हैं। इनमे कैंपिंग, विलेज एडवेंचर, बर्ड वाचिंग, एनिमल स्पाटिंग, पैराग्लाइडिंग, और काफी कुछ शामिल है। मनीष का मानना है कि “अंग्रजों के जाने के बाद उत्तराखंड में किसी भी नए हिल स्टेशन का नाम शायद ही सामने आया होगा, लेकिन यह जगह हिल स्टेशन के लिहाज से बेहद खूबसबरत है। उत्तराखंड के टूरिज्म डिर्पाटमेंट से कोई मदद ना मिलने की वजह से यह जगह अभी भी पर्यटकों के लिये दूर है।”

यह कैंप, दिल्ली से 7 घंटे दूर है और एक तरफ पौड़ी की खूबसूरती दूसरी तरफ लैंसडाउन की शांति के बीचों बीच है। इन दोनों जगहों के बीच बसा यह कैंप लोगों के लिए एक शांत और सुंदर माहौल देता है। मनीष का गरुणा एडवेंचर कैंप अपने यहां आने वाले पर्यटकों को ना केवल रोमाचक यादें देता हैं बल्कि आने वाले लोग यहां से नए रिश्ते भी लेकर जाते हैं।आसपास के गांव के लोगों ने भी इस कैंप में अलग अलग एक्टिविटी करके अपने लिये आमदनी का जरिया ढू़ढ लिया है। इनमे स्टोरी टेलिग, आर्ट एंड क्राफ्ट, ट्रेडिशनल म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाना आदि शामिल है। 

तो अगर आप भी शहरों के शोर शराबे से दूर खूबसूरत और शांत हिमालय के रंगों से भरपूर जगह पर जाने का पॅोग्राम बना रहे हैं तो यह जगह आपको पसंद आएगी।

उत्तराखंड मे खुले में मांस बेचने पर लगेगा प्रतिबंध

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राज्य सरकार ने खुले में मांस बेचने पर प्रतिभंध लगाने का फैसला किया है। इस बाबत रविवार को शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिये।

व्यापार मण्डल और आम जनता की शिकायत पर बुलाई गई बैठक में निर्देश दिये कि शहर में जिनके पास मांस बेचने के लाईसेंस है, उनके लिये खुले में मांस  बेचने पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि “इसके लिये व्यापक अभियान चलाया जायेगा। इससे सम्बंधित जिम्मेदार अधिकारियों के लापरवाही को गम्भीरता से लिया जायेगा।”  कैबिनेट मंत्री ने कहा कि “जो व्यापारी मांस बिक्री की शर्तें पुरी करते हैं, उनके लिये निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए जल्द लाईसेंस जारी किया जायेगा।” इस बारे में उन्होंने अवैध मांस बिक्री को प्रतिबन्धित करने के लिये निर्देश दिये है। 

नगर निगम को निर्देश देते हुए कौशिक ने कहा कि “खुले में मांस बिक्री करने वाले व्यपारियों के लिये गैर विवादित भूमि का चिन्हिकरण किया जाय।” इस चिन्हिकरण में प्रशासन, नगर निगम एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी संयुक्त रूप से सर्वे कर भूमि चयन करने का निर्देश दिया। 

ऋषिकेश पहुंचे जैन धर्म गुरु ज्ञानसागर महाराज

ऋषिकेश पहुंचे जैन धर्म गुरु ज्ञानसागर महाराज इन दिनों अपनी पैदल बद्रीनाथ यात्रा पर है। ऋषिकेश पहुँचकर उन्होंने पत्रकारों से बात की जहाँ  तीन तलाक पर बोलते हुए जैन  गुरु  ज्ञानसागर जी महाराज ने कहा की तीन तलाक समाज के  साथ साथ महिलाओं के लिए अभिशाफ़ है   हमें नारी का सम्मान और संरक्षण करना  चाहिए , जिससे हम एक अच्छे समाज का निर्माण कर सके।

गौरतलब हो की इस वक्त पुरे देश में तीन तलाक को लेकर बहस चल रही है , कई मुस्लिम धर्म गुरु  के पक्ष में है कई लोग इसका विरोध कर रहे है सरकार भी तीन तलाक को ख़त्म करने के पक्ष में है हालाँकि फिलहाल मामले की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट कर रही है।

 

दून में सफाई की तस्वीर बदलने के लिए सरकार चौकस

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देहरादून की स्वच्छता के लिए गम्भीरता से प्रयास प्रारम्भ कर दिए गए हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर सचिव मुख्यमंत्री राधिका झा ने देहरादून के विभिन्न वार्डों में औचक निरीक्षण किया। नगर निगम के 7 वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के काम का आकस्मिक निरीक्षण करते हुए उन्होंने डोर टू डोर कलेक्शन करने वाली गाड़ियों में जीपीएस लगाने के निर्देश दिए। इससे इन गाड़ियों के मूवमेंट पर नजर रखी जा सकेगी। सफाई व्यवस्था में लगे कर्मचारियों को कैप व बेज उपलब्ध करवाए जाएं। सफाई व्यवस्था में कमी पाए जाने पर कुछ सुपरवाईजरों का जवाब तलब किया गया।

सचिव राधिका झा ने नगर निगम के अधिकारियों को अभियान चलाकर रिस्पना व बिंदाल नदियों में से कूड़ा उठाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देहरादून के लिए आवश्यक डस्टबिनों के संबंध में नगर निगम आंकलन करे और इन डस्टबिनों को कहां लगाया जाना है, इसके लिए बिना किसी से प्रभावित हुए प्रशासनिक नजरिए से निर्णय लिया जाए। आईएसबीटी, कचहरी अादि प्रमुख स्थानों से कचरे का उठान दिन में दो बार किया जाए। शहर को अनेक जोन में विभाजित कर इनमें सफाई व्यवस्था का नियमित निरीक्षण किया जाए। प्रत्येक जोन में वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जिम्मेवारी दी जाए। आवश्यकता होने पर अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था की जाए।

सचिव राधिका झा ने धर्मपुर चौक व एलआईसी भवन के समीप स्थित अंडर ग्राउंड डस्टबिनों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने जाखन काॅलोनी में भी सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। स्थानीय लोगों से भी फीडबैक लिया गया।

सचिव राधिका झा ने कहा कि देहरादून की स्वच्छता के लिए जनसहभागिता आवश्यक है। सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर रोक के लिए बनाए गए एंटी लिटरिंग एंड स्पिंटिंग एक्ट का आगामी 15 दिनों तक व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसके बाद एक्ट के तहत चालान आदि की कार्यवाही प्रारम्भ की जाए। इस अवसर पर जिला प्रशासन व नगर निगम के अधिकारी मौजूद थे।

वेतन मामले पर सरकार को हाईकोर्ट के निर्देश 

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हाई कोर्ट ने राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सकों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार वेतन भत्ते नहीं देने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने सरकार को इस मामले में 24 घंटे में निर्णय लेने का आदेश पारित किया है।

कोर्ट का आदेश मुख्यमंत्री के उस बयान के एक दिन बाद आया है,  जिसमें उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों में तैनाती पर 30 फीसद अतिरिक्त वेतन देने के बाद भी चिकित्सकों द्वारा ज्वाइनिंग नहीं देने का जिक्र किया था।

दूरस्थ क्षेत्र में तैनात डॉ. दर्शन गौड़ ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के रेग्युलेशन 9 (2) डी के अनुसार सुदूरवर्ती क्षेत्रों कार्यरत चिकित्सकों को एक साल की सेवा में दस फीसद, दो साल की सेवा में 20 फीसद व तीन साल की सेवा में 30 फीसद अतिरिक्त वेतन देने को कहा गया है।

इसके बावजूद उत्तराखंड सरकार मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के दिशा-निर्देशों का लाभ नहीं दे रही है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि अन्य राज्य उक्त आदेश का अनुपालन कर रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसेफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार को 24 घंटे में फैसला लेने के आदेश पारित किए।

कैसे बच गये एसडीएम

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विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण शंकर राज की कोर्ट ने कृषि भूमि को अकृषि करने के एवज में 22 हजार रिश्वत लेने के दोषी एसडीएम के पेशकार को सात साल कैद व 30 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में शासन द्वारा अनुमति नहीं देने की वजह से विजिलेंस एसडीएम के खिलाफ अभियोग नहीं चला सका।

24  मई 2012 को जिले के कोशयां कुटोलि तहसील के एसडीएम के पेशकार नरेंद्र दीक्षित के खिलाफ क्षेत्र के ही ललित मोहन सुयाल ने विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई थी। विजिलेंस ने मामला प्रारंभिक जांच में सही पाया तो एसडीएम के पेशकार को 22 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। अदालत में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ट्रायल शुरू हुआ।

संयुक्त निदेशक विधि सोहन चंद्र पांडेय द्वारा आरोप साबित करने को सात गवाह पेश किए गये। इसमें तत्कालीन डीएम शैलेश बगौली शामिल थे। बीते रोज कोर्ट ने पेशकार को भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दिया था। आज कोर्ट ने सजा सुनाई। धारा सात में 5 साल कारावास व 10 हजार जुर्माना और धारा 13(2)में सात साल जुर्माना व 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने किया चारधाम रेल प्रोजेक्ट का शिलान्यास

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डबल इंजन की सरकार का तौहफा अब उत्तराखंड की जनता को मिल चुका है। आज  रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने एक बड़ी सौगात उत्तराखंड की जनता को दे दिया हैं। ये सौगात चारोंधाम को रेल लाइन से जोड़े जाने की है।

जी हां रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बद्रीनाथ धाम पहुंचकर दोपहर साढ़े बारह बजे चार धाम रेल प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। चारधाम रेल प्रोजेक्ट के शिलान्स के इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह,सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत व अन्य नेता भी मौजूद थे। रेलवे विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चारों धामों तक रेल प्रोजेक्ट को पहुंचाने के लिए प्रारंभिक सर्वे पूरा हो चुका है, जिसकी रिपोर्ट केद्र सरकार को भेज दी गई है। केंद्र सरकार से सर्वे को मंजूरी मिल गई है, जिसके लिए रेलवे लाइन के सर्वे के लिए 120 करोड रूपये भी मंजूरी भी केद्र सरकार ने दे दी है।

आप को बात दे कि प्रारंभिक सर्वे में जो प्रस्तावित सर्वे हुआ है, उसके अनुसार कर्णप्रयाग के बाद बद्रीनाथ धाम के लिए जोशीमठ तक रेल लाइन बिछाने का सर्वे होगा। वहीं केदारनाथ धाम के लिए जोशीमठ से पहले रूट सोनप्रयाग के लिए कट जाएगा। वहीं गंगोत्री और यमनोत्री धाम के लिए सर्वे डोईवाला से किया जाएगा।

उत्तरकाशी से पहले बडकोट से गंगोत्रीधाम के लिए मनेरी के लिए रूट कट जाएगा,जबकि यमुनोत्री के लिए बड़कोट से मातली के लिए सर्वे होगा।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेल सर्वे प्रोजेक्ट का किया शिलान्यास। यहां देखेंः

नहीं मिलेगी इस बार दून की लीची कि मिठास

दून घाटी पर मौसम इस मई में गजब ढा रहा है। गर्मी और सूरज की तपिश से जहां लोगों का जीना मुश्किल होता जा रहा है तो वही बागवानो को भी अंधी-तूफ़ान से भारी नुकसान हो रहा है। जिसका सीधा असर दून के रसीले फल लीची की फसल पर पड़ा है। आंधी तूफ़ान और तेज़ गर्मी , मौसम के बदलाव ने इस बार लीची की फसल पर खासा असर डाला है। दून भोपुर-रानीपखरी में लीची ख़राब हो गयी है और इस बार लीची के प्रेमियों को लीची के स्वाद के लिए अभी और इंतज़ार करना पड़ेगा साथ ही इस बार कुछ ज्यादा ही जेब ढीली करनी पड़ सकती है। दून घाटी का जायदातर हिस्सा अपने फलों के बगीचे के लिए जाना जाता है दून घटी अपने रसीले फल लीची के लिए विशेष पहचान रखती है और यहाँ के बागवानो में गर्मियों में मुह में पानी ले आने वाली लीची अपनी खुशबु बिखेरती है।

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डोईवाला -रानीपोखरी और भोगपुर ,डालनवाला ,ये दून घाटी  की  वो जगह है जो लीची बागानों के लिए मशहूर है। इस बार लगातार हो रहे मौसमी बदलाव और गर्मी की तपिश ने बागवानो की पूरी मेहनत पर असर डाला है। जिसके चलते लीची का उत्पादन घटा और इस बार देहरादून की मशहुर लीची को बाज़ार में आने के लिए थोडा और इंतज़ार करना पड़ेगा ,और लीची के स्वाद के कद्रदानो को इसकी थोड़ी ज्यादा कीमत भी चुकानी पड़ेगी। राज्य में कृषि और उद्यान के भारी भरकम विभाग तो है पर किसानो और बागवानो को हो रहे आर्थिक नुकसान के लिए कोई ठोस नीती नहीं है जिस का खामियाजा यहाँ के लोगो को हर साल उठाना पड़ता है। मौसम की मार से हर साल लीची की फसलों को भारी नुकसान होता  है लेकिन सरकार ठोस कृषि निति न होने से कभी भी किसानो और बागवानो की मदद नहीं कर पाती , और वो साल दर साल भारी  नुक्सान उठाते है। फिलहाल किसानों और कास्तकारों को उम्मीद है की आने वाले समय में लीची की फसल सही हो सकेगी।

छोटे राज्य में रोजगार का सबसे आसान तरीका कृषि और बागवानी है जो पलायन  पर कुछ हद तक रोक लगाये हुयी है धीरे -धीरे युवा भी नगदी फसलों के जरिये इस क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे है ऐसे में कृषि मंत्रालय को भी इन के समय-समय हो रहे नुकसान के लिए भी ठोस कदम उठाने चाहिए ,जिससे युवा स्व रोजगार के जरिये अपनी रोज़ी रोटी कम कर पलायान पर अंकुश लगा सकेगे और उत्तराखंड भी हिमाचल की तर्ज़ पर विकास कर सकेगा।