इंश्योरेंस के पैसों के लिए पत्नी की हत्या
नहीं थम रहा गुलदार का आतंक,वन दरोगा को ही बनाया निवाला
ऋषिकेश के रायवाला में राजाजी पार्क की मोतीचूर रेंज में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिन प्रतिदिन गुलदार के हमले बढ़ते जा रहे हैं। इस बार गुलदार ने अपना निवाला चीला रेंज में तैनात आनंद सिंह को बनाया है। गुरुवार देर रात करीब 9:00 बजे वन दरोगा आनंद सिंह ड्यूटी के बाद अपने घर सत्यनारायण कॉलोनी में आये, उसके बाद वो किसी काम के लिए घर से बाहर गए लेकिन जब काफी देर तक घर वापस नही आये तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की,बाद में पुराने सौग नदी के पास अानन्द सिंह का क्षत विक्षत शव मिला जिसके बाद वन विभाग ने इसकी सूचना उनके परिजनों को दी, घटना से पूरा परिवार स्तब्ध है। आनंद पवार के घर में उनकी पत्नी उनका एक बेटा और एक बेटी है। बेटी की इसी साल नवम्बर में शादी होनी थी। पिता के मृत्यु की खबर मिलने के बाद से ही परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है और वो मांग कर रहे है की गुलदार को जल्द से जल्द पकड़ना चाहिए।
गौरतलब है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से आदमखोर गुलदार सक्रिय है जो अब तक कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है। जहां एक तरफ ग्रामीणों में गुलदार को लेकर काफी ज्यादा आक्रोश है, तो वही राजाजी नेशनल पार्क के डायरेक्टर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और कहा कि जल्द ही वन विभाग इस आदमखोर गुलदार को पकड़ने के लिए कार्यवाही करेगा और हमले में मारे गए वन दरोगा इसका उचित मुआवजा दिया जाएगा।
राजाजी पार्क से सटे हुए इस क्षेत्र में पिछले दो सालो से गुलदार का आतंक बना हुआ है । दो सालो में तीन गुलदार भी वन महकमे द्वारा अपने पिंजड़े में कैद किये जा चुके है मगर उसके बावजूद भी अब तक कई लोग गुलदार के हमले में मारे जा चुके है। बावजूद इसके पार्क महकमा अब तक महज पेट्रोलिंग के दावे कर हाथ पे हाथ धरे हुए बैठा हुआ है। यहाँ सवाल यह भी खड़ा उठता है की जब गुलदार के हमलों से विभाग खुद अपने लोगों की सुरक्षा नहीं कर पा रहा तो स्थानीय लोग उनसे क्या उम्मीद करें।
ले.जनरल बीएस नेगी ने सीमांत क्षेत्र का किया दौरा
सेना की मध्य कमान के प्रमुख ले.जनरल बीएस नेगी ने गुरुवार को सीमांत क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने सेना अधिकारियों से पिथौरागढ़ क्षेत्र में की गई आपरेशनल एवं प्रशासनिक तैयारियों की जानकारियां ली। उन्होंने सीमा पर तैनात जवानों का हौसला बढ़ाया। सीमांत क्षेत्र में पहुंचे ले.जनरल बीएस नेगी का सेना के अधिकारियों ने स्वागत किया।
ले.जनरल नेगी ने सीमा क्षेत्र में तैनात जवानों से मुलाकात की और राष्ट्र के लिए उनके समर्पण भाव की सराहना करते हुए संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए हर वक्त तैयार रहने को कहा।गौरतलब है कि उत्तराखंड के अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को देखते हुए केंद्र सरकार और सेना के लिये राज्य अहम हो गया है। सरकार सीमा पर अपनी पकड़ मजबूत करने के इरादे से सीमाओं के आसपास के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा मे काम कर रही है।
तो अब जैकी दादा देगें उत्तराखंड आने का न्यौता
केदारनाथ में हेलीकाप्टर हादसा टला
केदारनाथ जाने वाले यात्रियों की सेवा में लगे इंडो काॅप्टर कम्पनी के हेलीकाॅप्टर में इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान आग की चिंगारियां निकली। लैंडिंग के दौरान यात्रियों की जान बाल-बाल बची। मौके पर दमकल दस्ते के साथ मौजूद रेसक्यू टीम ने यात्रियों का सुरक्षित बाहर निकाला।
आपको बता दें केदारनाथ यात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए अगस्त्यमुनि से केदारनाथ हेलीकाॅप्टर से आने-जाने की सुविधा है। इस समय कई हेली कम्पनियों के हेलीकाॅप्टर हर रोज केदारनाथ के लिए उड़ान भरते हैं। उन्हीं में एक इंडो काॅप्टर कम्पनी भी है जिसके हेलीकाॅप्टर ने दोपहर बाद अचानक तकनीकी खामी के चलते इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
जानकरी के अनुसार हेलीकाॅप्टर में पांच यात्री सवार थे। गनीमत रही कि यात्रियों को किसी तरह का नुकसान होने से पहले बचा लिया गया। देखने वालों का कहना है कि हेलीकाॅप्टर ने जैसे ही लैंडिंग की, उससे चिंगारियां निकलती हुई दिखाई दी, जिसे देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। यात्रियों ने जान बचाने की गुहार लगाई। उन्हें तुरन्त हेलीकाॅप्टर से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। हेलीपैड पर तैनात दमकल दस्ता भी मौके पर पहुंच गया।
2013 में केदारनाथ आपदा के दौरान हुई हेलीकाॅप्टर दुर्घटना को लोग अभी भूले नहीं हैं। जिसमें आईटीबीपी के 20 जवान शहीद हो गये थे। इस आपदा में उन्होंने सैकड़ों लोगों को जिन्दगी दी थी, लेकिन खुद अपनी जान गंवा बैठे। आज एक बार फिर उनकी याद ताजा हो गई।
83 साल के हुए रस्किन “रस्टी” बाॅंड
19 मई मसूरी के लिये खास दिन रहा। मशहूर लेखक रस्किन बाॅंड 83 सला के हो गये और अपने जन्मदिन की खुशियां उन्होने अपने घर और शहर के लोगों के साथ मनाई।कहते हैं कि एक लेखक अपने काम से कभी रिटायर नहीं हो सकता और बाॅंड इसका जीता जागता सबूत हैं।
19 मई, हर साल एक ऐसा दिन होता है जिस दिन मसूरी में हर कोई अपना रुख टेढ़ी-मेढ़ी संकरी गलियों से होते हुए लैंडोर कैंटोंनमेंट की तरफ कर लेता है। यहां है रस्किन बाॅंड का घर जो कि शहर भर में “आईवी काॅटेज” के नाम से जाना जाता है । ये घर मसूरी में किसी पर्यटक स्थल से कम नही है। हर उम्र के बच्चों से लेकर, मीडिया कर्मी, विधायक ,शहर के मेयर, रस्किन बाॅंड के फैन, उनको पढ़ने वाले पाठक और उन्हें एडमायर करने वाला हर एक इंसान रस्किन बाॅंड को उनके 83 साल पूरे करने पर शुभकामनाएं देने सुबह से पहुंचने लगा।

न्यूज़पोस्ट टीम से खास बातचीत पर उनसे यह पूछने पर कि कैसा लगता है उन्हें 83 साल के होने पर रस्किन का जवाब बहुत ही अलग था। आंखों में चमक व होंठो पर मुस्कान के साथ उन्होंने कहा “चलती का नाम गाड़ी”
रस्किन कहते हैं कि “मुझे अपने जन्मदिन से डर लगता है – क्योंकि क्या पता कौन आ जाए।” उनका कमरा फूलों के गुलदस्ते, गिफ्ट, और तरह तरह के केक से भरा रहता है। यह सारे तोहफे उनके लंबी लिस्ट में भी ना आने वाले उनके प्रशंसकों की तरफ से है। इनमें से कुछ लोगों और उनके तोहफों सो तो कभी-कभी बाॅंड बिलकुल अंजान होते हैं।
बातचीत में रस्किन बांड कहते हैं कि “वह इस साल अपने जन्मदिन पर कुछ अलग और हटकर करना चाहते हैं, जैसे कि अपना पिकनिक बास्केट पैक करके, अपने बहुत ही खास लोगों के साथ, कहीं दूर सड़कों पर निकलकर यह दिन यादगार बनाना चाहते हैं।”
रस्किन अपने लेखन से न सिर्फ बच्चों के चहेते रहे हैं वो लंबे समय से बाॅलिवुड को भी प्रभावित करते रहे हैं।
- 1978 में भारतीय आजादी की पहली लड़ाई पर श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी फिल्म “जुनून” रस्किन के उपन्यास ए ‘फ्लाइट आॅप पीजन्स’ पर आधारित थी।
- रस्किन की “द रस्टी स्टोरीज” को हम सभी दूरदर्शन पर एक था रस्टी के रूप में देख चुके हैं।
- 2005 में विशाल भारद्वाज ने रस्किन के नौवल ‘द ब्लू अम्ब्रेला’ पर फिल्म बनाई जिसे सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला
- 2011 में विसाल भारद्वाज की फिल्म सात खून माफ में रस्किन ने अपनी ही लिखी कहानी “सुसेनास सेवन हस्बैंड” में एक छेटा सा किरदार भी निभाया था।
न्यूज़पोस्ट की टीम तहे दिल से रस्किन बाॅंड को शुभकामनाएं देती है और इस मशहुर लेखक की कलम को और लिखने की ताकत मिले यह कामना करती है।
मुख्यमंत्री ने भी माना कि राज्य में “कागज़ों पर है हरियाली”
गुरुवार को वन विभाग की समीक्षा बैठक करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अधिकारियों से खासे नाराज़ दिखाई दिये।बैठक में मुख्वयमंत्री ने पूछा कि चरागाह विकास, वृक्षारोपण की योजनाओं को मॉनिटर कैसे किया जा रहा है ? इस पर जवाब से असंतुष्ट रावत ने कहा कि ‘‘कागजों में हरियाली और मौके पर कोई काम नहीं’’ ये स्थिति स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों से पूछा कि मैन ऐनिमल काॅनफ्लिक्ट को रोकने के लिये क्या किया जा रहा है?
वन राजस्व के हालात पर भी मुख्यमंत्री ने लीसा चोरी के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए पूछा कि “यदि वन विभाग के डिपो से बिक्री नहीं हो रही तो लीसा की 100 से अधिक फैक्टरियां कैसे चल रही है। उनके द्वारा किये जाने वाला उत्पादन और वहां खपत हो रहे लीसे को को कौन क्रॉस चेक कर रहा है? मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि वन विभाग के सभी डिपों में एकत्र लीसे को पारदर्शी तरीके से नीलाम किया जाय। नीलामी प्रक्रिया को एक उच्च स्तरीय अधिकारियों की समिति द्वारा माॅनिटर किया जाय।इसके साथ साकत मुख्यमंत्री ने अवैध खनन को रोकने के लिये भी वन अधिकारियों को और चुस्ती दिखाने की हिदायत दी।साथ ही जंगलों में आग पर जल्द स् जल्द काबू पाने औप आग से बचाव के कारगर उपाये करने को कहा।
गौरतलब है कि राज्य के वन मंत्री हरक सिंह रावत हैं जो कुछ दिन पहले ही अपने बयानों से राज्य की बीजेपी सरकार और नेताओं के लिये परेशानी का सबब बन चुके हैं। ऐसे में हरक सिंह के ही विभाग के अधिकारियों पर मुख्यमंत्री की नाराजगी को राजनीतिक चश्मे से भी देखा जा रहा है।
एसडीआरएफ का दल सतोपन्थ पर्वत अभियान के लिय रवाना
उत्तराखण्ड राज्य के हिमालय क्षेत्रों में होने वाली किसी भी दुर्घटना, खोज एवं बचाव अभियानों के दौरान नुकसान को कम कर सफलता पाने और टेक्नीकल कार्यशैली एवं कार्यक्षमता बढ़ाये जाने व एसडीआरएफ माउण्टेनिंयरिग टीम को ऊचाईं वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण को ध्यान में रखते हुए एमए गणपति, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड ने पुलिस मुख्यालय देहरादून से एसडीआरएफ के 17 सदस्यों के दल को सतोपन्थ पर्वत(ऊचाँई-23263 फीट) अभियान के लिय फ्लैगआफ किया। जिसका निर्देशन संजय गुंज्याल, पुलिस महानिरीक्षक, एसडीआरएफ और नेतृत्व नवनीत सिंह भुल्लर करेंगे।

इस प्रशिक्षण में भाग करने वाले सभी एसडीआरएफ अधिकारी/कर्मचारियों ने पहले नेहरु पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) उत्तरकाशी से बेसिक, एडवांस व सर्च रेस्क्यू माउण्टेनिंयरिग ट्रेनिंग ली है।इस अवसर पर अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन, राम सिंह मीणा, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, दीपम सेठ, पुलिस महानिरीक्षक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, संजय गुंज्याल, पुलिस महानिरीक्षक, एसडीआरएफ, अमित सिन्हा, पुलिस महानिरीक्षक, पीएसी/फायर सर्विस, आदि अधिकारी उपस्थित रहे।
तो क्या शाहरुख खान अंग्रेजी में इतने कमजोर थे??
बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान की एक्टिंग का तो हर कोई दिवाना है। साथ ही उनकी फर्राटेदार अंग्रेजी को तो सुनकर हर कोई खुश हो जाता है। अभी हाल ही में टेड टॉक्स शो में शाहरुख की स्पीच सुनकर खूब तालियां भी बजीं थी। मगर क्या आपको पता है कि कॉलेज के समय में उनकी इंग्लिश काफी कमजोर थी।
दरअसल डीयू में अंडरग्रेजुएशन कोर्स के लिए बेस्ट फोर सब्जेक्ट मार्क्स के प्रतिशत के आधार पर ही मेरिट बनती है। उस लिहाज से शाहरुख ने अपने बेस्ट फोर सब्जेक्ट्स में इलैक्ट्रिकल, मैथ्स, फिजिक्स और इंग्लिश के मार्क्स भरे हैं। इसमें बाकी सभी में तो शाहरुख के अंक अच्छे हैं लेकिन शानदार अंग्रेजी बोलने वाले बॉलीवुड के बादशाह को 12वीं क्लास में अंग्रेजी में महज 51 नंबर मिले थे। हालांकि इलैक्ट्रिकल में सर्वाधिक 92 मार्क्स दर्ज हैं और मैक्स एवं फिजिक्स में 78-78 मार्क्स मिलने की बात कही गई है।
जी हां, ऐसा हम नहीं खुद कॉलेज का कहना है। दरअसल, शाहरुख खान का हंस राज कॉलेज का एडमिशन फॉर्म सामने आया है। जिसमें अंग्रेजी में कम नंबर आने की वजह से यह काफी वायरल हो रहा है। शाहरुख को अंग्रेजी में 51 नंबर मिले हैं। शाहरुख खान का यह फॉर्म डीयू टाईम्स के फेसबुक पेज पर शेयर किया गया है।

वहीं, डीयू के ऑनलाइन पोर्टल के हेड- मिल्हाज हुसैन का कहना है कि शाहरुख का यह एडमिशन फॉर्म एकदम सही है। सोशल मीडिया पर इसे इसलिए डाला गया है कि ताकि कम नंबर पाने वाले स्टूडेंट्स इसे देखकर कुछ फायदा उठा सके।




























































