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23 लाख के पुराने नोट पकडे़

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एक हजार व पांच सौ के पुराने नोट बदलने की फिराक में घूम रहे तीन युवक एनआरआइ के झांसे में फंस गए। उन्होंने एसओजी कर्मी को एनआरआइ समझकर पुराने नोट बदलने की गलती की। इससे तीनों पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पकड़े गए युवकों में से दो के पास से करीब 23 लाख रूपये पुरानी करेंसी बरामद हुई है। यह घटना काशीपुर की है।

सूत्रों के मुताबिक मुरादाबाद (उप्र) जिले के ठाकुरद्वारा, ग्राम बैलजुड़ी व मिस्सरवाला के तीन युवक पुराने नोट बदलने के चक्कर में पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पकड़े गए दो युवकों से करीब 23 लाख की पुरानी करेंसी बरामद हुई है।

रिजर्व बैंक ने एनआरआइ लोगों को पुरानी करेंसी बदलने के लिए 31 जुलाई तक समय दिया है। इसलिए दोनों युवक किसी एनआरआइ की तलाश में थे। सूत्रों के मुताबिक एक एसओजी कर्मी इनमें से एक युवक से एनआरआइ बनकर मिला। इस पर उसने एसओजी कर्मी को अपने साथियों से भेंट कराई। जब उन्होंने एनआरआइ को पुराने नोट बदलने के लिए दिए तो पुलिस ने तीनों को उठा लिया।

पुलिस ने युवकों को गंगे बाबा रोड स्थित एक मकान से पकड़ा है। सीओ राजेश भट्ट का कहना है कि इस तरह के केस में आरबीआइ एक्ट के तहत सेक्शन चार और पांच में कार्रवाई की जाती है। अभी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से संपर्क किया गया है। उनको कैश दे दिया जाएगा। साथ ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की सलाह के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

एएनएम नियुक्ति का रास्ता साफ

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हाई कोर्ट ने एएनएम भर्ती मामले प्रकरण पर सरकार की ओर से जारी नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही तीन पद रिक्त रखने को कहा है। हरिद्वार निवासी अर्चना व अन्य ने विशेष अपील दायर कर एकलपीठ के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सिर्फ विज्ञान वर्ग के अभ्यर्थियों का ही एएनएम पदों पर चयन करने के आदेश दिए थे। जबकि अपीलकर्ता का कहना था वह भी उत्तराखंड नर्सेज एंड मिडवाइफ काउंसिल में पंजीकृत है।

याचिका का विरोध करते हुए मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी कहा कि एएनएम सेवा नियमावली-1997 में उल्लेख है कि विज्ञान संवर्ग से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण ही एएनएम पदों के लिए योग्य होंगे। इसलिए राज्य सरकार की कार्रवाई वैधानिक है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद तीन पद रिक्त रखते हुए नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने का आदेश पारित किया। यहां उल्लेखनीय कि राज्य में एएनएम के 440 पदों पर नियुक्तियां होनी हैं।

खनन पट्टों को निरस्त करने का आदेश खारिज

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कांग्रेस सरकार में चार जिलों में जारी खनन पट्टों को निरस्त करने के भाजपा सरकार के शासनादेश को हाई कोर्ट, नैनीताल ने रद कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने इस शासनादेश को पूरे राज्य में प्रभावी बनाने संबंधी शासनादेश के क्रियान्वयन पर रोक भी लगा दी है। कोर्ट के इस निर्णय से सरकार को करारा झटका लगा है।

सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय में हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल व ऊधमसिंह नगर में खनन व भंडारण के लाइसेंस को निरस्त करने के साथ ही चुनाव आचार संहिता से 15 दिन पहले जारी 44 खनन पट्टों को निरस्त कर दिया था। एमएस इंटरप्राइजेज की ओर से याचिका दायर कर कहा गया है कि सरकार द्वारा पहली मई को खनन, भंडारण के लाइसेंस निरस्त कर दिए, जबकि नौ मई को शासन द्वारा समस्त पट्टों को स्थगित कर दिया।

याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार का फैसला असंवैधानिक और राजनीति से प्रेरित है। बिना सुनवाई का मौका दिए पट्टे निरस्त किए गए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व महाधिवक्ता वीबीएस नेगी ने जबकि सरकार की ओर महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर द्वारा पैरवी की गई। न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद पहली मई को जारी शासनादेश निरस्त कर दिया।

चीन के करीब पुहंचा भारत

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पिथौरागढ़ जिले का सीमांत गांव दुक्तू। शीतकाल के चार महीने बर्फ से लकदक रहने वाले इस गांव के लोग ठंड शुरू होते ही परिवार, राशन और मवेशियों को लेकर 78 किमी नीचे धारचूला घाटी आ जाते हैं। गर्मियां शुरू होते फिर शुरू होता है इनका माइग्रेशन। ये वापस आकर गांव को फिर गुलजार कर देते हैं, लेकिन भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के जवान दुक्तू गांव के अपने कैंपों में ही डटे रहते हैं।

ग्रामीण हों या जवान उन्हें अभी पखवाड़ा भर पहले तक यहां पहुंचने के लिए सोबला से पहाड़ की पगडंडियों पर 46 किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती थी, लेकिन अब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे इस गांव तक सड़क पहुंच गई है। यह गांव चीन की ज्ञानिमा मंडी के करीब है।

न्यू सोबला-दारमा मार्ग का निर्माण कठिन चुनौती रही है पर भारतीय इंजीनियरों के हौसले ने देश को सामरिक दृष्टि से बड़ी कामयाबी दिला दी है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तिब्बती मंडी ताकलाकोट के बाद चीन ने अपना दूसरा बड़ा सामरिक ठिकाना ज्ञानिमा मंडी के पास बना रखा है।

न्यूजपोस्ट टीम जब दुक्तू गांव पहुंची तो ग्रामीण खुशी से झूम उठे। वजह बड़ी दिलचस्प है। ग्रामीणों के अपने नाते-रिश्तेदारों के अलावा अभी तक यहां आइटीबीपी व सेना के जवान ही पहुंचते देखे हैं। शायद बाहरी दुनियां(इनके क्षेत्र के बाहर के लोग) से पहली बार कोई पहुंचा। इसकी झलक बातचीत में क्षेत्र पंचायत सदस्य मनोज नगन्याल के उत्साह ने भी दे दिया। वे बोल पड़े। यहां सड़क पहुंची तो देश की खुशबू भी पहुंचेगी इसका आभास हो गया। आज आप लोग आए हैं तो कल पर्यटक भी आएंगे। जवानों को साजो सामान कंधों पर ढोकर पैदल नहीं आना पड़ेगा। कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग से पहले इस मार्ग का निर्माण हो जाने से भारत की चीन सीमा तक दोतरफा पहुंच हो गई है।

इस क्षेत्र का अंतिम गांव है बिदांग। अब जनशून्य हो गया है। आबादी इससे पहले के गांव दांतू, तिदांग, मार्चा और सीपू में रहती है। यहां तक रोड कटिंग में भारतीय इंजीनियरों की मेहनत देखने लायक है। दावा है कि 20 से 25 दिनों में वाहन जाने लायक कच्ची सड़क बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगी। कम चुनौतियां नहीं थीं यहां तक पहुंचने में।

इस सड़क का निर्माण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अधीन है, जिसने 2013 की आपदा की कठिन चुनौती के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। 2005 में दारमा घाटी के रास्ते चीन सीमा तक सड़क का सपना देखा गया था। 2011 में काम शुरू हुआ। 2013 की आपदा में दो वर्ष तक काम बंद करना पड़ा। फिर 2015 के अंतिम तीन महीने से निर्माण कार्य ने गति पकड़ी।

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सिराज अहमद के मुताबिक अभी सीमांत गांव दुक्तू स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के कैंप तक कच्ची सड़क पूरी हो गई है।  फेज एक में सड़क कटिंग का कार्य जल्द पूरा हो जाएगा। 2018 तक इस सड़क पर बड़े वाहनों की आवाजाही हो सकेगी, लेकिन पक्की सड़क तैयार होने में अभी और वक्त लग सकता है।

इंश्योरेंस के पैसों के लिए पत्नी की हत्या

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 कर्ज में डूबे युवक ने पत्नी के बीमे की रकम हड़पने के लिए अपने साथी के साथ मिलकर जीवनसंगिनी को ही मौत के घाट उतार दिया। शातिर दिमाग युवक ने घटना को हादसे का रूप देने के लिए शव को जीने के नीचे डाल दिया। शुरुआती पूछताछ में ही पुलिस ने घटना का खुलासा कर दोनों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर खून से सना अंगोछा और लोहे का सब्बल बरामद कर लिया। मृतका के पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। जिला रामपुर (यूपी) के गांव जुलूस नगर, के सुरेश यादव ने दो साल पहले यहां मुंडिया पिस्तौर देहात में मकान बनाया था। वह यहां परिवार सहित रहता है और पास ही स्थित एक्सरे टेक्नीशियन के यहां नौकरी करता है। बुधवार को वह ड्यूटी पर और बच्चे स्कूल गए थे, घर में उसकी पत्नी गीता यादव (32) अकेली थी। दोपहर 12 बजे बाद जब बच्चे स्कूल से लौटे तो मकान का दरवाजा अंदर से बंद था।
काफी देर खटखटाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो उन्होंने पड़ोसियों को बताया। किसी ने पड़ोस के मकान के पीछे से कूदकर अंदर जाकर देखा तो गीता का खून से लथपथ शव बाथरूम के पास जीने के नीचे फर्श पर पड़ा था। लोगों ने उसके पति को बुलाया और पुलिस भी पहुंच गई। मौका देखकर यही माना जा रहा था कि सीढ़ियों से गिरकर ही गीता की मौत हुई है। एसओजी, पुलिस और फोरेंसिक टीम इंचार्ज डा. दयाल शरण शर्मा ने मौके की पड़ताल की तो मामला कुछ और लगा। डा. शर्मा ने बताया कि सिर पर भारी वस्तु मारकर महिला की हत्या की गई  है। पति से पूछताछ में बयान संदिग्ध लगने लगे तो पुलिस उसे कोतवाली ले आई। इस बीच एसएसपी डा. सदानंद दाते, एएसपी डा. जगदीश चंद यहां पहुंच गए। शुरुआती पूछताछ में ही सुरेश टूट गया और उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।
एएसपी डा. जगदीश चंद ने बताया कि बुधवार साढे़ 11 बजे सुरेश यादव चकरपुर निवासी दोस्त अजीत के साथ दुकान से घर गया।  इस दौरान पत्नी गीता यादव से पैसों को लेकर उसका विवाद हो गया। योजना के तहत सुरेश के साथी अजीत ने दुपट्टे से गीता का गला दबाने की कोशिश की। इस पर गीता और सुरेश के बीच हाथापाई भी हुई। कब्जे मेें नहीं आने पर सुरेश ने गीता के सिर पर लोहे के सब्बल से वार कर दिया। गीता वहीं ढेर हो गई। उसके बाद सुरेश और अजीत ने गीता पर कई वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। लोग इसे हादसा मानें, इसके लिए शव को जीने के नीचे डाल दिया। उसके बाद सुरेश और अजीत पीछे दीवार कूदकर चले गए। सुरेश फिर दुकान पर पहुंच गया।
पुलिस ने मकान के पीछे दूसरे मकान स्वामी के सीसी कैमरे के फुटेज खंगाले तो उसमें घर से दो व्यक्ति जाते हुए देखे गए हैं। सीसीटीवी फुटेज से ही पता चला कि सुरेश सुबह को जो शर्ट और पैंट पहने था, दोपहर में उससे अलग ही पहने हुए था। सुरेश ने दुकान में अपने दोस्त अजीत के साथ टांडा रामपुर जाने की बात कही थी, यह बात भी गलत साबित हो गई, क्योंकि वह दोस्त के साथ घर आया था। कड़ी पूछताछ में सुरेश और अजीत ने घटना को कबूल कर लिया।
पुलिस का कहना है कि अपने भाई के इलाज में सुरेश करीब 12 लाख रुपये का कर्जदार हो गया था। सुरेश की पत्नी की करीब 50 लाख रुपये की बीमा पॉलिसी है। पॉलिसी हड़पने और कर्ज उतारने के लिए उसने यह कदम उठाया। देर रात 11 बजे पुलिस ने मृतका के पिता महेश यादव की तहरीर पर सुरेश और अजीत के खिलाफ धारा 302 और 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

नहीं थम रहा गुलदार का आतंक,वन दरोगा को ही बनाया निवाला

ऋषिकेश के रायवाला में राजाजी पार्क की मोतीचूर रेंज में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। दिन प्रतिदिन गुलदार के हमले बढ़ते जा रहे हैं। इस बार गुलदार ने अपना निवाला चीला रेंज में तैनात आनंद सिंह को बनाया है। गुरुवार देर रात करीब 9:00 बजे वन दरोगा आनंद सिंह ड्यूटी के बाद अपने घर सत्यनारायण कॉलोनी में आये, उसके बाद वो किसी काम के लिए घर से बाहर गए लेकिन जब काफी देर तक घर वापस नही आये तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की,बाद में पुराने सौग नदी के पास अानन्द सिंह का क्षत विक्षत शव मिला जिसके बाद वन विभाग ने इसकी सूचना उनके परिजनों को दी, घटना से पूरा  परिवार स्तब्ध है। आनंद पवार के घर में उनकी पत्नी उनका एक बेटा और एक बेटी है। बेटी की इसी साल नवम्बर में शादी होनी थी। पिता के मृत्यु की खबर मिलने के बाद से ही परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है और वो मांग कर रहे है की गुलदार को जल्द से जल्द पकड़ना चाहिए।

गौरतलब है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से आदमखोर गुलदार सक्रिय है जो अब तक कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है। जहां एक तरफ ग्रामीणों में गुलदार को लेकर काफी ज्यादा आक्रोश है, तो वही राजाजी नेशनल पार्क के डायरेक्टर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और कहा कि जल्द ही वन विभाग इस आदमखोर गुलदार को पकड़ने के लिए कार्यवाही करेगा और हमले में मारे गए वन दरोगा इसका उचित मुआवजा दिया जाएगा।

राजाजी पार्क से सटे हुए इस क्षेत्र में पिछले दो सालो से गुलदार का आतंक बना हुआ है । दो सालो में तीन गुलदार भी वन महकमे द्वारा अपने पिंजड़े में कैद किये जा चुके है मगर उसके बावजूद भी अब तक कई लोग गुलदार के हमले में मारे जा चुके है। बावजूद इसके पार्क महकमा अब तक महज पेट्रोलिंग के दावे कर हाथ पे हाथ धरे हुए बैठा हुआ है। यहाँ सवाल यह भी खड़ा उठता है की जब गुलदार के हमलों से विभाग खुद अपने लोगों की सुरक्षा नहीं कर पा रहा तो स्थानीय लोग उनसे क्या उम्मीद करें।

ले.जनरल बीएस नेगी ने सीमांत क्षेत्र का किया दौरा

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सेना की मध्य कमान के प्रमुख ले.जनरल बीएस नेगी ने गुरुवार को सीमांत क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने सेना अधिकारियों से पिथौरागढ़ क्षेत्र में की गई आपरेशनल एवं प्रशासनिक तैयारियों की जानकारियां ली। उन्होंने सीमा पर तैनात जवानों का हौसला बढ़ाया। सीमांत क्षेत्र में पहुंचे ले.जनरल बीएस नेगी का सेना के अधिकारियों ने स्वागत किया।

ले.जनरल नेगी ने सीमा क्षेत्र में तैनात जवानों से मुलाकात की और राष्ट्र के लिए उनके समर्पण भाव की सराहना करते हुए संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए हर वक्त तैयार रहने को कहा।गौरतलब है कि उत्तराखंड के अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को देखते हुए केंद्र सरकार और सेना के लिये राज्य अहम हो गया है। सरकार सीमा पर अपनी पकड़ मजबूत करने के इरादे से सीमाओं के आसपास के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा मे काम कर रही है।

तो अब जैकी दादा देगें उत्तराखंड आने का न्यौता

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उत्तराखण्ड में अब पर्यटकों को फिल्म अभिनेता जैकी श्रोफ आमंत्रित करेंगे, जिसके लिए प्रदेश सरकार ने विशेष वेबसाईट बनाकर पर्यटकों को लुभाने के लिए प्रचार प्रसार किया है। रुद्रपुर में एक कार्यक्रम के दौरान जैकी श्रोफ ने बताया कि उत्तराखण्ड उनकी पहले से ही पसंदीदा जगहों मे से रहा है और उनको अब उत्तराखण्ड के लिए काम करने का मौका मिल रहा हो जो उनके लिए काफी अहम है।
अपने फिल्मी अंदाज में जैकी ने जहां कार्यक्रम में चार चांद लगाये वहीं प्रदेश में फिल्मों को बढ़वा देने की भी बात कहीं, वहीं उत्तराखण्ड में पर्यटन को बढावा देने और प्रदेश के पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार प्रसार हो सके इसके लिए सुबे के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि “इस बार रिकाॅर्ड तोड़ जहां चार धाम यात्रा मेंं यात्रियों की संख्या बड़ी है वहीं महत्वपूर्ण पर्यटक स्थलों का प्रचार प्रसार कर विश्वपटल पर उन्हे उतारने के प्रयास किये जाएंगे, जिसके लिए फिल्मी हस्तियों की भी मदद ली जाएगी।”
राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये इस से पहले भी सरकारें मशहूर हसित्यों का सहारा ले चुकी हैं। इसमे प्रमुख हैं अमिताभ बच्चन, विराट कोहली, कैलाश खेर आदि। लेकिन बढ़ा सवाल ये है कि इन सितारों के कहने पर पर्यटक शायद राज्य की तरफ अपना रुख कर भी लें मगर पर्यटकों को अगर यहां आने पर सुविधाऐं नहीं मिली तो शायद इन सितारों की सारी मेहनत बेकार चली जाये। इसलिये सरकार के लिये ये भी ज़रूरी है कि वो प्रचार के साथ साथ पर्यटन से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं के सुधार पर ध्यान दे।

केदारनाथ में हेलीकाप्टर हादसा टला

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केदारनाथ जाने वाले यात्रियों की सेवा में लगे इंडो काॅप्टर कम्पनी के हेलीकाॅप्टर में इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान आग की चिंगारियां निकली। लैंडिंग के दौरान यात्रियों की जान बाल-बाल बची। मौके पर दमकल दस्ते के साथ मौजूद रेसक्यू टीम ने यात्रियों का सुरक्षित बाहर निकाला।

आपको बता दें केदारनाथ यात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए अगस्त्यमुनि से केदारनाथ हेलीकाॅप्टर से आने-जाने की सुविधा है। इस समय कई हेली कम्पनियों के हेलीकाॅप्टर हर रोज केदारनाथ के लिए उड़ान भरते हैं। उन्हीं में एक इंडो काॅप्टर कम्पनी भी है जिसके हेलीकाॅप्टर ने दोपहर बाद अचानक तकनीकी खामी के चलते इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।

जानकरी के अनुसार हेलीकाॅप्टर में पांच यात्री सवार थे। गनीमत रही कि यात्रियों को किसी तरह का नुकसान होने से पहले बचा लिया गया। देखने वालों का कहना है कि हेलीकाॅप्टर ने जैसे ही लैंडिंग की, उससे चिंगारियां निकलती हुई दिखाई दी, जिसे देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। यात्रियों ने जान बचाने की गुहार लगाई। उन्हें तुरन्त हेलीकाॅप्टर से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। हेलीपैड पर तैनात दमकल दस्ता भी मौके पर पहुंच गया।

2013 में केदारनाथ आपदा के दौरान हुई हेलीकाॅप्टर दुर्घटना को लोग अभी भूले नहीं हैं। जिसमें आईटीबीपी के 20 जवान शहीद हो गये थे। इस आपदा में उन्होंने सैकड़ों लोगों को जिन्दगी दी थी, लेकिन खुद अपनी जान गंवा बैठे। आज एक बार फिर उनकी याद ताजा हो गई।

83 साल के हुए रस्किन “रस्टी” बाॅंड

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19 मई मसूरी के लिये खास दिन रहा। मशहूर लेखक रस्किन बाॅंड 83 सला के हो गये और अपने जन्मदिन की खुशियां उन्होने अपने घर और शहर के लोगों के साथ मनाई।कहते हैं कि एक लेखक अपने काम से कभी रिटायर नहीं हो सकता और बाॅंड इसका जीता जागता सबूत हैं।

19 मई, हर साल एक ऐसा दिन होता है जिस दिन मसूरी में हर कोई अपना रुख टेढ़ी-मेढ़ी संकरी गलियों से होते हुए लैंडोर कैंटोंनमेंट की तरफ कर लेता है। यहां है रस्किन बाॅंड का घर जो कि शहर भर में “आईवी काॅटेज” के नाम से जाना जाता है । ये घर मसूरी में किसी पर्यटक स्थल से कम नही है। हर उम्र के बच्चों से लेकर, मीडिया कर्मी, विधायक ,शहर के मेयर, रस्किन बाॅंड के फैन, उनको पढ़ने वाले पाठक और उन्हें एडमायर करने वाला हर एक इंसान रस्किन बाॅंड को उनके 83 साल पूरे करने पर शुभकामनाएं देने सुबह से पहुंचने लगा।

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न्यूज़पोस्ट टीम से खास बातचीत पर उनसे यह पूछने पर कि कैसा लगता है उन्हें 83 साल के होने पर रस्किन का जवाब बहुत ही अलग था। आंखों में चमक व होंठो पर मुस्कान के साथ उन्होंने कहा “चलती का नाम गाड़ी”

रस्किन कहते हैं कि “मुझे अपने जन्मदिन से डर लगता है – क्योंकि क्या पता कौन आ जाए।” उनका कमरा फूलों के गुलदस्ते, गिफ्ट, और तरह तरह के केक से भरा रहता है। यह सारे तोहफे उनके लंबी लिस्ट में भी ना आने वाले उनके प्रशंसकों की तरफ से है। इनमें से कुछ लोगों और उनके तोहफों सो तो कभी-कभी बाॅंड बिलकुल अंजान होते हैं।

बातचीत में रस्किन बांड कहते हैं कि “वह इस साल अपने जन्मदिन पर कुछ अलग और हटकर करना चाहते हैं, जैसे कि अपना पिकनिक बास्केट पैक करके, अपने बहुत ही खास लोगों के साथ, कहीं दूर सड़कों पर निकलकर यह दिन यादगार बनाना चाहते हैं।”

रस्किन अपने लेखन से न सिर्फ बच्चों के चहेते रहे हैं वो लंबे समय से बाॅलिवुड को भी प्रभावित करते रहे हैं।

  • 1978 में भारतीय आजादी की पहली लड़ाई पर श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी फिल्म “जुनून” रस्किन के उपन्यास ए ‘फ्लाइट आॅप पीजन्स’ पर आधारित थी।
  • रस्किन की “द रस्टी स्टोरीज” को हम सभी दूरदर्शन पर एक था रस्टी के रूप में देख चुके हैं।
  • 2005 में विशाल भारद्वाज ने रस्किन के नौवल ‘द ब्लू अम्ब्रेला’ पर फिल्म बनाई जिसे सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला
  • 2011 में विसाल भारद्वाज की फिल्म सात खून माफ में रस्किन ने अपनी ही लिखी कहानी “सुसेनास सेवन हस्बैंड”  में एक छेटा सा किरदार भी निभाया था।

न्यूज़पोस्ट की टीम तहे दिल से रस्किन बाॅंड को शुभकामनाएं देती है और इस मशहुर लेखक की कलम को और लिखने की ताकत मिले यह कामना करती है।