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बद्रीनाथ हाई वे खुला, य़ात्रियों की आवाजाही हुई शुरू

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24 घंटों से ज्यादा की मेहनत कके बाद आखिरकार हनुमान पर्वत पर भूस्खलन से बंद हुए रास्ते को कोल लिया गया है। इस समय इस रास्ते से पुलिस ऐस्कार्ट लगाकर हल्के और चोटे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि कुछ समय में बड़े और भारी वाहनों के लिये भी रास्ता कोल दिया जायेगा।

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शुक्रवार को चट्टान खिसकने से बंद हुए मार्ग को खोलने और याक्त्रियों की सुविधा के लिये :

  • प्रशासन ने भूस्खलन स्थल पर मार्ग के पूर्ण रुप से खुल जाने तक बधित मार्ग के दोनों ओर ट्रांसशिपमेंट के लिए 15 छोटे और 10 बड़े वाहनों की व्यवस्था की और एसडीआरएफ टीम लोगों को भूस्खलन क्षेत्र पार करने में मदद की ।
  • जिला प्रशासन ने राहत शिविर राजकीय इंटर कालेज जोशीमठ,विष्णु प्रयाग और अलग-अलग धर्मशालाओं और आश्रमों में लगभग 2500 यात्रियों के रुकने का प्रबन्ध किया।
  • इसके अलावा बद्री केदार मंदिर समिती ने बद्रीनाथ में लगभग 500 लोगों के गोविन्द घाट में गुरुद्वारा में बद्रीनाथ में लगभग 2 हजार यात्रियों के रुकने और खाने पीने की व्यवस्था भी की गई।
  • देहरादून, हरिद्वार व ऋषिकेश रेलवे स्टेशनों में हैल्प डैस्क व्यवस्था स्थापित करवाई गई है तथा भूस्खलन के कारण पूर्व में करवाये गये आरक्षण का लाभ न उठा सकने वाले यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई।
  • भूस्खलन की वजह से बंद रास्ते को खोलने के लिए बी.आर.ओ से संपर्क कर 3 पोकलैंड मशीन,1 डोजर,1 आर.ओ.सी और 2 एयर कम्प्रेशर की व्यवस्था की गई और रात में भी सड़क खोलने का काम किए जाने के लिए 3 आसका लाइट लगाई गई।

इस दौरान सभी यात्री सुरक्षित रहे और जहां मार्ग बंद था उसके पास से लगभग 2 कि.मी पैदल मार्ग द्वारा यात्रा संचालित की गई। यात्रियों की सुविधा के लिए पैदल मार्ग पर पुलिस व एस.डी.आर.एफ के जवानों के अतिरिक्त मेडिकल टीम तैनात की गई तथा दोनों तरफ वाहनों की व्यवस्था की गयी। 

यात्रा व्यवस्थाओं पर तेज हुई राजनीति

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2017 चार धाम यात्रा सीजन की पहली मुश्किल क्या आई सरकार और विपक्ष में राजनीतिक नंबर बनाने की रस्सा कस्सी भी शुरू हो गई है। शुक्रवार को जोशीमठ के हाथीपर्वत पर चट्टान खिसकने से बद्रीनाथ मोटर मार्ग बाधित हो गया है। इसके चलते यात्रियों को आवाजाही में दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिये उसके पास पर्याप्त संसाधन हैं। और वो सभी इस समय जोशीमठ और आसपास के इलाकों में फंसे हुए यात्रियों की मदद के लिये लगाये गये हैं। इसके साथ ही सरकार, प्रशासन और बीआरओ के अधिकारी और कर्मचारी पूरी मेहनत कर रास्ते को जल्द से जल्द खोलने के लिये कार्य कर रहे हैं। सरकार ने ये भी कहा है कि मीडिया में हजारों यात्रियों के फंसे और यात्रा रुकने की खबरें भी गलत हैं। सरकार की तरफ से जारी बयानों के मुताबिक करीबन 1800 यात्रियों को अलग अलग जगहों पर रोका गया है। इसके साथ उनके रहने और खाने पीने की पूरी व्यवस्थाऐं की जा रही हैं।

बहरहाल मामला यात्रा की तैयारियों का हो और उस पर राजनीति न हो ये तो मुश्किल है। सो इस बहस में कांग्रेस भी कूद पड़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा है कि इस बार यात्राओं की तैयारी के लिये त्रिवेंद्र सरकार ने:

  • यात्रा शुरू होने से पहले बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति भंग कर दी
  • हवाई सेवाओॆं के लिये दिया गया टेंडर रद्द कर दिया।
  • धाम में खाने की थालियां महंगी कर दी
  • केदारनाथ में वैकल्पिक मार्ग बनाने के लिये पैसे रोक दिये

रावत का आरोप है कि सरकार ने यात्रा की तैयारियों के नाम पर महज कांग्रेस सरकार के किये कामों को रोका है। बहरहाल उम्मीद यही है कि इन सभी आरोप प्रत्यारोपों के बीच चारधाम यात्रा के लिये पहुंच रहे लाखों श्रद्धालुओं के लिये आने वाले दिन सुखद और सुगम यात्रा के होंगे।

अब चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ावों पर दिखेंगे एलईडी डिसप्ले

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चारधाम यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों पर एलईडी डिसप्ले बोर्ड लगाये जायेंगे। इनके माध्यम से यात्रियों, पर्यटकों को मौसम, सड़क बंद होने, क्या करे, क्या न करें, बुनियादी सुविधाओं आदि की जानकारी दी जायेगी। अभी एसएमएस व अन्य माध्यमों से जानकारी दी जा रही है। आपको बतादें कि चारधाम यात्रा के दौरान होने वाले प्राकृतिक रुकावटों जैसे की मौसम खराब होना,बारिश आदि पर नजर रखने के लिए और यात्रियों की सुविधा के लिए एलईडी डिसप्ले स्क्रीन लगाए जाऐंगे।

गौरतलब है कि यात्रा सीजन के दौरान होने वाले सड़क दुर्घटनाओं को ध्यान में रखकर इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा जिससे यात्रा करने वाले यात्रियों को मौसम और सड़क के बारे में जानकारी मिल सकें और आने वाली परेशानी से निपटने के उपाय भी पता चल सकें।

मुख्य सचिव एस.रामास्वामी ने सचिवालय में भारतीय मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की।मुलाकात में उन्हें बताया गया कि मसूरी और सुरकंडा देवी में एक्स बैंड डॉप्लर राडार स्थापित करने के लिए जगह का निरीक्षण कर लिया गया हैं। नैनीताल और पिथौरागढ़ में भी जगह फाइनल कर लिये गये हैं और भरोसा दिलाया कि अगले चरण में काम्पैक्ट माइक्रो रेन राडार लगाये जायेंगे।

बैठक में बताया गया कि चारधाम यात्रा मार्ग पर क्षेत्रफल के हिसाब प्रति घंटे मौसम का अनुमान जारी किया जा रहा है। तय किया गया कि यह जानकारी पुलिस, एसडीआरएफ, पर्यटन विभाग को भी दी जायेगी। आटोमेटेड वेदर स्टेशन स्थापित होने के बारे में मौसम विभाग ने टेक्निकल सपोर्ट देने का आश्वासन दिया। चार अतिरिक्त सचल आटोमेटेड वेदर स्टेशन भी स्थापित किये जोयेंगे।

बैठक में बताया गया कि भारतीय मौसम विभाग के विशेषज्ञ उत्तराखंड के विभागीय अधिकारियों को वर्कशाप के माध्यम से मौसम विभाग अनुमान के क्रियान्वयन के बारे में जानकारी देंगे। बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन अमित सिंह नेगी, उप महानिदेशक भारतीय मौसम विभाग डॉ देवेन्द्र प्रधान, यूएआईडी के प्रमुख के.सी.साई कृष्णन, निदेशक मौसम केन्द्र देहरादून डॉ विक्रम सिंह, अधिशासी निदेशक डीएमएमसी डॉ पीयूष रौंतेला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सरकारी उदासीनता के चलते फल-फूल रहा है अवैध राफ्टिंग का कारोबार

विश्व के नक़्शे पर ऋषिकेश की व्हाइट रिवर राफ्टिंग ने अपना विशेष स्थान बनाया है। लेकिन गंगा में हो रही अवैध राफ्टिंग अब इस उद्योग के लिए खतरा बनती जा रही है। आए दिन होने वाली दुर्घटना के मद्देनज़र उत्तराखंड शासन एक बार फिर हरकत में आ गया है और टिहरी डिएम सोनिका ने कहा कि बीते दिनों राफ्टिंग के दौरान हुई मौत पर कड़े से कड़ा रुख अपनाया जाएगा और यकीन दिलाती हूं की आने वाले दिनों में सभी अवैध राफ्टिंग कंपनियों को हटा कर सभी नियमों को सख्ती के साथ मानने के निर्देश दिए जाऐगें ताकि यहां आने वाले लोगों की जान ना जाएं’। ‘गंगा वैली मैनेजमेंट कमेटी’ भी उनके खिलाफ एक्शन लेगी जिन्होंने नियमों के साथ छेड़छाड़ किया और ऱाफ्ट में कैपेसिटी से ज्यादा लोगों को बिठाया। उत्तराखंड टूरिज्म डवलेपमेंट बोर्ड के एडवेंचर टूरिज्म इंर्चाज प्रदीप नेगी ने बताया कि अवैध राफ्ट आपरेटरों को धरा जाएगा और नियमों का पालन ना करने वालों को भी सजा दी जाएगी।

गंगा में बहती रंग बिरंगी राफ्टें देखने में हर किसी का मन मोह लेती है और ऋषिकेश आने वाला हर पर्यटक रिवर राफ्टिंग करने के लिए लगातार बड़ी संख्या में देश और विदेश से राफ्टिंग कंपनियों के पास पहुँचता है  बिना ये जाने की उसकी जान कितनी सुरक्षित है। वो एक विश्वास के साथ रोमांच के इस खेल में उतर जाता है। वास्तविकता में तो ऊपर से सब कुछ सामान्य सा लगता है लेकिन वीकेंड पर पर्यटकों की भीड़ अवैध और इल्लीगल राफ्टिंग को बढ़ावा देती है।

जरा से मुनाफे की आड़ में  एक राफ्ट मे लाइसेंस वाले संचालक पर्यटकों की जान की परवा न करते हुए अनट्रेंड गाइडों के सहारे 10-10 राफ्टों को गंगा में उतार देते है जिसपर प्रशासन कोई कार्यवाही नही कर पाता। राफ्टिंग के रोमांच का मजा लेने देश विदेश से आने वाला पर्यटक राफ्टिंग संचालकों की हाथ की कठपुतली बन जाता है। राफ्टिंग गाइड को सरकार की ओर से ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट मिला है या नही और राफ्टिंग इक्यूपमेंट सेफ्टी मानकों में खरे उत्तर रहे है या नही, उसे तो बस हर कीमत पर गंगा में राफ्टिंग का मजा लेना होता है।  वीकेंड पर बड़ी संख्या में यहा पर्यटक पहुचते है जिससे राफ्टिंग संचालक सभी नियम ताक पर रख कर थोड़े पैसे के लालच में राफ्टो को ओवर लोड करना शुरू कर देते है। रैपिड पर संतुलन बिगड़ने से ये ओवर लोड राफ्ट पलट जाती है जिसमे सवार पर्यटक उतेजना और डूबने के डर से जान गंवा बैठता है।

 पिछले एक माह में गंगा में डूबने से 6 की मौत आंकड़ों पर एक नजर-

  • 13 मई :-    गंगा में डूबने से सुभाष( 34 )निवासी दिल्ली की मौत
  • 12 मई :-    मुनि की रेती में धर्मपाल भंडारी (26) निवासी शिवपुरी की गंगा में डूबने से मौत
  • 7 मई :-      बैराज रोड क्षेत्र में गंगा में डूबने से बलवंत बिष्ट बिष्ट(30) निवासी मुरादाबाद की मौत
  • 4 मई :-      शिवपुरी में गंगा में नहाते समय डूबने से हरीश नौटियाल (25) निवासी टिहरी गढ़वाल की मौत
  • 23 अप्रैल:-  मुनि की रेती में गंगा में डूबने से वीरेंद्र (42) निवासी यमकेश्वर पौड़ी की मौत
  • 30 अप्रैल :-  शिवपुरी क्षेत्र में डूबने से नीरज (26) निवासी गुरुग्राम फरीदाबाद की मौत

मछली पालन बना पहाड़ में आजीविका का साधन

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भले ही पहले पहाड़ में मछली पालन आजीविका का साधन नहीं रहा हो, मगर अब धीरे धीरे शासन व मत्स्य विभाग के प्रयास रंग लाने लगे हैं। मत्स्य पालन योजना के तहत पिछले कुछ सालों से कृषकों को प्रोत्साहित करने का काम चल रहा है। चंद साल पूर्व गिने-चुने किसानों ने मत्स्य पालन को रोजगार का साधन बनाना आरंभ किया। अब कुमाऊं क्षेत्र के अल्मोडा जिले में बड़ी संख्या में ग्रामीण मत्स्य पालन का रोजगार करने लगे हैं। जिनकी संख्या साल दर साल बढ़ते जा रही है। अकेले अल्मोड़ा जिले में ही मत्स्य पालन से जुड़े किसानों की संख्या करीब डेढ़ सौ पार कर चुकी है।
इसी बार जिले के विभिन्न ब्लाकों में इन किसानों को तीन लाख मत्स्य बीजों की आपूर्ति मत्स्य विभाग कर रहा है। यह आपूर्ति इसी बीच हुई है। जो किसानों के निजी तालाबों में हुई है। इन मत्स्य बीजों में ग्रास, कामन, सिलवर प्रजाति के मत्स्य बीज शामिल हैं। मत्स्य पालन व्यवसाय बढ़ने से किसान काफी मुनाफा कमाएंगे। निजी तालाबों के अतिरिक्त कुछ स्थानीय नदियों में भी मत्स्य बीज डाले गए हैं। मत्स्य संरक्षण एवं संव‌र्द्धन के उद्देश्य से विभाग द्वारा नदियों, जलाशयों व झीलों में डायनामाइट व विषैले पदाथों का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की जा रही है और किसानों को मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

जिले में मत्स्य बीज आपूर्ति ताड़ीखेत – 18,000, द्वाराहाट – 62,000, भिकियासैंण- 10,000, चौखुटिया – 91,000, सल्ट – 19,000 है  रितेश चंद्र, सहायक निदेशक मत्स्य ने बताया कि मतस्य पालन को ग्रामीणों की आय का मुख्य जरिया बनाने का लक्ष्य है। जिले में इस कार्य को बढ़ाने के पूरे प्रयास चल रहे हैं, ताकि ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करने में मत्स्य पालन रोजगार प्रमुख भूमिका निभा सके।

फूड प्वाजनिंग से 70 लोग बीमार

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अल्मोडा, द्वाराहाट, विकासखंड के मल्ली मिरई ग्राम पंचायत के तोक डाना मिरई में बराती-घराती फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आ गए। सभी ने विवाह की रस्म के बीच मिठाई खाई, बाद में भोजन किया। कुछ ही समय बाद सिर चकराने के साथ ही उनका पेट चलने लगा।

एकाध बच्चों को खून की उल्टी आने से विवाह समारोह में अफरातफरी मच गई। देर सायं तक 70 बराती-घरातियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। हालत गंभीर देख 36 लोगों को भर्ती कर लिया गया। निदेशक स्वास्थ्य (कुमाऊं) डॉ. एलएम उप्रेती ने मुख्य चिकित्साधिकारी को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

गगास घाटी स्थित, ऐराड़ी गांव के कुंदन सिंह के पुत्र प्रकाश सिंह की बरात गुरुवार को उमेद सिंह के यहां गई थी। दोपहर बाद विवाह की रस्म के दौरान मुंह मीठा कराने के लिए मिठाई दी गई। इसके बाद सभी के लिए पंडाल में भोजन लगा। कुछ ही देर बाद तमाम बरातियों को चक्कर आने लगे। देखते ही देखते उल्टी-दस्त शुरू हो गए। इससे हडकंप मच गया।

ग्रामीण बीमार लोगों को लेकर सीएचसी पहुंचे। हालत नाजुक देखते हुए 36 लोग भर्ती कर लिए गए। देर सायं तक उल्टी-दस्त का शिकार लोगों का सीएचसी पहुंचना जारी था और यह संख्या 70 पहुंच गई जिनमें 20 घराती भी शामिल थे। भोजन के तुरंत बाद जो बराती ऐराड़ी के लिए रवाना हो गए थे, उनकी भी तबियत बिगड़ने पर रानीखेत नागरिक चिकित्सालय ले जाने की चर्चा है। चिकित्साधिकारी डॉ. वीपी सिंह के अनुसार विषाक्त मिठाई के सेवन से ही बराती फूड प्वायजनिंग की चपेट में आए हैं। प्रभारी थानाध्यक्ष दरबान सिंह ने सीएचसी में भर्ती बरातियों के बयान लिए।

इन बहनों के सपनों की सच्चाई है “दयो-दि आॅर्गेनिक फार्म”

कहते हैं कि सपने जितने ऊंचे देखोगे आपकी उड़ान उतनी ही ऊंची होगी। इस कहावत को सच किया है दो बहनों ने जिन्होने अपनी मेहनत की बदौलत अपने बचपन के सपने को कम उम्र मे ही पूरा कर लिया। कुशिका और कनिका ने एक सपना बचपन में देखा था वो आज एक खूबसूरत सच में बदल चुका है कुशिका और कनिका शर्मा ने किन्ही आम मेघावी छात्राओं की तरह अपनी पढ़ाई पूरी की जिसमें छोटी बहन कुशिका के पास एमबीए की डिग्री है और बड़ी कनिका के पास ह्यूमन राईट की पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री के साथसाथ आईएसबी हैदराबाद में एंटरप्रिन्योरशिप की स्कालरशिप भी है।

15747798_1312200015509002_8739134393590425325_nइसके बाद अगला पढ़ाव था शहरों में बढ़ी कंपनियों में ऊंची इमारतों में बंद कमरों में भागती दौड़ती जिंदगी की शुरुआत। लेकिन किस्मत ने इन दोनों बहनों के लिये कुछ और ही तय कर रखा था। शहरों में बड़ी नौकरियों को अलविदा कहकर इन दोनों ने दो साल पहले अपने सपनों को साकार करने का मन बना लिया। और इस तरह साकार हुआ इनका ड्रीम प्रोजेक्ट दयोदि आर्गेनिक फार्म” आज 5 कमरे का यह रिर्जाटदयो’ नाम से प्रसिद्ध है जिसका संस्कृत में मतलब है स्वर्ग’।

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उत्तराखंड के मुक्तेश्वर जिले में 25 एकड़ फार्म लैंड पर यह रेजार्ट चारो तरफ से हरे भरे बागानों ने घिरा है कुशिका अपना बचपन याद करते हुए कहती हैं कि “जब हम छोटे थे तो बड़ी संख्या में लोगों को अच्छी जिंदगी के लिए पहाड़ छोड़ कर जाते देख कर हमें बुरा लगता था इसके बाद हमने सोचा आर्गेनिक खेती को बेहतर हास्पिटालिटी के साथ जोड़े जो सबके लिए फायदेमंद साबित हो सके उसके बाद हमने आर्गेनिक फार्मिंग रेजार्ट को प्रमोट करने की ठानी जो केवल एक डेस्टिनेशन से ज्यादा था लोगों के लिए।”

दो साल में इन दोनों ने मिलकर ना सिर्फ इस रिजार्ट को चलाया बल्कि दुनिया के हर कोने से अपने उपभोक्ता बनाएं कनिश्का कहती हैं कि “दयो दिल्ली से लगभग 350 किमी दूर है, और नैनीताल से केवल 60 किमी जिसके WhatsApp Image 2017-05-13 at 09.59.34 (4)सबसे पास काठगोदाम है 63 किमी पर है जो भी हमारे रिजार्ट में आता है उसे यह जगह पसंद आती है और वह अपनी छुट्टियां बढ़ा कर ही जाता है और यहां और दिन बिता कर जाता है इससे ज्यादा खुशी की बात क्या हो सकती है।”

एक ऐसी जगह जहां लगभग 20 के आसपास लोग काम करते है, यह सब मिलकर इस रिजार्ट को चलाते है इसके अलावा दोनों बहनें आस पास के लोगों को खासकर लड़कियों को यह मौका देती हैं कि वह उनके रिजार्ट आएं और अलगअलग व्यंजन बनाना सीखें

दयोआर्गेनिक परिवार वालों के बीच काफी लोकप्रिय है खासकर उनके लिए जिन्हें पहाड़ की ठंडी वादियों में एक सुविधाजनक वेकेशन से कुछ ज्यादा चाहिए इस रिजार्ट में हर किसी के लिए कुछ ना कुछ है चाहें वो आपकी पसंद के फल, सब्जियां और हर्बल चीजें पाली हाउस से लेना और यहां मौजूद शेफ के द्वारा उसको स्वादिष्ट खाने में परिवर्तन करना क्यों ना हों। खूबसूरती और आर्गेनिक फूड के साथ यह एक मिसाल भी पेश करता है कि अगर मन में विश्वास हो तो आप एपनी मंज़िल पा ही लेते हैं।

हिमालय से ऊंचें हौंसले को सलाम

अपने हौंसले के बल पर 68 साल की उम्र में 20 हजार फीट उंचे श्रीकांत पर्वत और हिमालय के चोटियों पर फ़तह करने वाली चंद्रप्रभा ऐंतवाल को मसूरी लिट्रेचर फ़ेस्टीवल में सम्मानित किया गया। मसूरी माउंटेन फेस्टिवल के पहले दिन 76 साल की चंद्रप्रभा ऐंतवाल जो एक पर्वतारोही हैं  को सम्मानित किया गया । चंद्रप्रभा माउंटेनियर के क्षेत्र की एक पायनियर हैं और बहुत से पर्वतों पर फतह कर चुकी हैं जैसे नंदा देवी, कंचनजंगा, त्रिशुल और माउंट जाओन्ली। 2010 में अर्जुन अर्वाड से नवाजा गया और 1990 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मीडिया के सवाल जवाब से दूर रहने वाली चंद्रप्रभा ने पुरस्कार लेने के बाद बहुत ही प्यार और धैर्य के साथ लोगों से बात कीय़ इसका काररण है उनका अपनी जन्मभूमि पहाड़ के लिए प्यार और लगाव जो बचपन से लेकर आज तक उनका घर रहा है।

न्यूज़पोस्ट टीम से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि “मैं बचपन से ही थोड़ी टेढ़ी थी,और हमारे जमाने में तो हम जानते भी नहीं थे कि माउंटेयरिंग क्या है,हम बाहर नहीं जाते थे और ना ही टीवी या ऐसा कुछ प्रचार-प्रसार था जैसे आज है।” उन्होंने बताया कि फिर एक दिन सन् 1969 में एनआईएमएच से एक सर्रकुलर आया जिसे देख कर उन्होंने एप्लाई किया और फिर 1972 में उन्हें एनआईएचएम बुलाया गया।अपने अनुभव के बारे में बताते हुए चंद्रप्रभा जी कहती हैं कि “पहले दिन जब मै पहली बार घर से निकली तो मैंने गढ़वाल देखा और गंगा को छुआ और महसूस किया और सोचा कि मैं कहा थी कि मैने यह पहले क्यों नहीं किया।”

चंद्रप्रभा बहुत साल एनआईएचएम अनुभव करने के बाद बताती हैं कि “मेरी पढ़ाई नगर पालिका के स्कूल से हुई तो इंग्लिश के बारे में ज्यादा नहीं जानती, एनआईएचएम में पहली ट्रेनिंग में कुछ समझ नहीं आया लेकिन जैसे ही प्रक्टिकल ट्रेनिंग शुरु हुई तो चीजें समझ आने लगी।”

अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद प्रभा ने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एक के बाद एक उन्होंने पर्वतों को फतह करने का सिलसिला शुरु किया और आज भी उनका जज्ब़ा और हौसला देखते बनता है।

आज चंद्रप्रभा उत्तरकाशी में अपने आशियाने में अपने अनुभव आने वाली भावी पीढ़ी के साथ बांटती हैं और उनका उत्साह बढ़ाती हैं।

 

अवमानना के मामले में फंसे टीएचडीसी निदेशक

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हाई कोर्ट ने टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन के निदेशक पर अदालत के आदेश की अवमानना करने पर अवमानना आरोप तय कर दिए। निदेशक जीएस तोमर को आरोपों का 31 मई तक जवाब दाखिल करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसी मामले में कोर्ट ने निदेशक के साथ ही उत्तराखंड तकनीकी विवि के कुलपति प्रो पीके गर्ग को 31 मई को कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

टीएचडीसी हाइड्रो पावर इंजीनियरिंग फेकल्टी एसोसिएशन की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई गई है। इसमें कहा गया है कि पहली दिसंबर 2015 को उच्च न्यायालय ने आदेश में याचिकाकर्ताओं को नियमित करने व वेतन भुगतान करने के आदेश पारित किए थे, मगर टीएचडीसी हाइड्रोपावर व उत्तराखंड तकनीकी विवि द्वारा अदालत के आदेश का अनुपालन नही किया गया।

इस संदर्भ में कुलपति प्रो. पीके गर्ग हाई कोर्ट में स्पष्टीकरण दिया कि हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक को याचिकाकर्ताओं को नियमित करने व उनके पहली दिसंबर 2015 से 22 सितंबर 2016 तक का वेतन भुगतान करने को कहा गया था। इस आदेश का अनुपालन निदेशक स्तर से होना था।

टीएचडीसी निदेशक जीएस तोमर हाई कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं को नियमित करने का अधिकार उन्हें प्राप्त नही है। इसके अलावा यूटीयू के कुलपति का 11मई 2017 का आदेश ई-मेल से 14 मई को प्राप्त हुआ। इसमें याचिकाकर्ताओं के वेतन भुगतान का आदेश किया गया था। इस आदेश का पालन करते हुए उनके द्वारा कुछ भुगतान की राशि एडवांस जारी कर दी। शेष राशि का जल्द भुगतान कर दिया जाएगा।

कोर्ट ने उनकी सफाई के बाद आरोप तय किया कि पहली दिसंबर 2015 से 15 सितंबर 2016 तक अदालत का आदेश नही मानना अवमानना मानते हुए आरोपित किया। साथ ही आरोप का उत्तर देने के लिए 31 मई तक का समय दिया है। मामले की सुनवाई न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ में हुई।

यात्रा मार्ग में हाथीपर्वत पर चट्टान खिसकी, सभी यात्री सुरक्षित

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चार धाम यात्रा पर बारिश ने खलल डालना शुरू कर दिया है । पहाड़ों में हो रही लगातार बारिश ने यात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। वहीं लगातार हो रही बारिश अब यात्रियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। बारिश के कारण जनपद चमोली के विष्णुप्रयाग के पास हाथी पर्वत में पहाड़ी दरकने से बदरीनाथ हाईवे बंद हो गया। मार्ग बंद होने से दोनों ओर यात्रियों को रोक दिया गया है।

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि भूस्खलन से बाधित मार्ग के शनिवार दोपहर से पहले खुलने की पूरी सम्भावना है। मुख्यमंत्री ने भी सचिव अमित नेगी को लगातार मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। सरकार के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है और यात्रियों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। चारधाम यात्रा निर्बाध चल रही है। जिलाधिकारी, एसएसपी और बीआरओ के अधिकारी मौके पर पहुँचे गये है। भूस्खलन साइट के दोनों तरफ यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। बद्रीनाथ, जोशीमठ और पांडूकेश्वर में यात्रियों के रुकने की पर्याप्त व्यवस्था है। यात्रियों के लिये सभी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। दोनो हाई स्थानों पर स्वास्थ्य सुविधा, रहने और खाने की पूरी सुविधा है। बीआरओ के अधिकारियों का कहना है कि मार्ग शनिवार 12 बजे से पहले खोल दिये जायेंगे। कमीश्नर गढ़वाल विनोद शर्मा भी मौके पर पहुंचने के लिये शुक्रवार रात निकल गये थे।

शुक्रवार को दिन में तीन बजे के करीब हाथी पर्वत से अचानक चट्टान टूटकर गिरने के बाद हाईवे का 50 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हाथी पर्वत में दोनों तरफ  वाहन रुके हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और यात्रियों की परेशानी को देखते हुए बद्रीनाथ धाम में फंसे यात्रियों को फिलहाल वहीं रुकने के लिए कहा है, जबकि बदरीनाथ धाम जाने वाले यात्रियों को जोशीमठ, पीपलकोटी, चमोली आदि यात्रा पड़ावों पर रोका गया है।