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दून की भीड़ में खोया हुआ एक ”टिल्टेड मंदिर”

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रोमांच और खुशनुमा मौसम के लिए मशहूर देहरादून शायद एक ऐसा शहर है जिसके आसपास कुछ ऐसी जगह है जो पल भर में आपको भीड़-भाड़ और ट्रेफिक से दूर कर देती है और शांति के बीच ले जाता है।

एक ऐसी ही जगह है देहरादून की ओल्ड मसूरी रोड पर स्थित। ओल्ड मसूरी रोड पर लगभग 200मीटर आगे आपकी बाईं तरफ एक बहुत ही पुराना मंदिर दिखता है। देखने में नया दिखने वाला यह पीला गुलाबी मंदिर 1800 शताब्दी में अंग्रेजों द्वारा राजपुर के ओल्ड मसूरी रोड पर काम करते हुए दोबारा ढ़ूंढा गया था। इस मंदिर की खास बात है इसका टेढ़ापन, जी हां यह मंदिर टेढ़ा है। इस मंदिर के बारे में ना तो गूगल पर कुछ है ना ही किसी को इसके बारे में ज्यादा जानकारी है। लेकिन बहुत खोज करने पर जो थोड़ा बहुत मिला वह इस प्रकार है।

ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर बहुत साल पहले किसी लैंडस्लाईड में दब चुका था लेकिन भगवान में श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालुओं ने इसे दोबारा ढ़ूंढा और इस मंदिर की मरम्मत करा अाज भी इसमें भगवान की पूजा पाठ होती हैं।

मंदिर में पूजा करता श्रद्धालु
मंदिर में पूजा करता श्रद्धालु

प्राचीन समय का यह मंदिर उस समय एक खाली जगह पर बना हुआ भजन स्थल था जहां आसपास की औरतें मिलकर भजन गाया करती थी। समय बीतने के साथ इस जगह पर भगवान शिव की मूर्ति की स्थापना कर दी गई और आसपास के लोगों के अनुसार बारिश,पानी और मौसम के बदलाव को देखते हुए दिल्ली की एक महिला टूरिस्ट ने इसपर छत डलवा दी। तब से आज तक यह मंदिर अभी भी बरकरार है। एक औरत हर रोज इस मंदिर की सफाई करती है और इसमें ज्योत जलाई है, पुजारी जी सुबह से शाम तक यहाँ बैठे रहते है। मसूरी रोड पर सफर करने वाले लोग इस मंदिर को अक्सर देखते होंगे लेकिन शायद ही किसी को यह सब पता होगा।

इस मंदिर की यह बनावट कहीं ना कहीं यह दर्शाता है कि प्रकृति की शक्ति से बढ़कर भी एक शक्ति है जिसने भारी लैंडस्लाईड के बाद भी इस मंदिर को ज्यों का त्यों खड़ा रखा है। एक और बात जो खास है इसको बनाने वाले यानि की उसकी प्राचीन संरचना जिसमें इतनी ताकत थी कि मंदिर टेढ़ा हो गया लेकिर ढ़हा नहीं।

बावड़ी
बावड़ी

मंदिर के सामने गांव वालों से पूछने पर पता चला कि वह लोग इस मदिर को ”शिव बावड़ी मंदिर” कहते हैं क्योंकि मंदिर के पीछे एक पुरानी बावड़ी है। मंदिर में शिव जी की प्रतिमा के साथ ही, मां दुर्गा, हनुमान जी और भी देवी देवाताओं की मूर्ति है। मानने वाले आज भी इस मंदिर में बैठ कर पूजा-पाठ,भजन अर्चना करते हैं।

तो अब जब आप अगली बार ओल्ड मसूरी रोड से गुजरे तो इस मंदिर की तरफ देखें तो एक बार मथ्था टेक कर जरुर जाएं।

पहाडों पर पीने के लिए पानी का हाहाकार

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बीते दो दिनों में हुई भारी वर्षा के बाद चरमराई अल्मोड़ा नगर की जलापूर्ति व्यवस्था। गत दिवस कोसी में गाद आने से बंद हुए पंप कल सुबह चल सके। इससे नगर में आंशिक जलापूर्ति हुई। दो दिन से मोहल्लों में बारी-बारी से पानी मिल रहा है। ऐसे में लोग पेयजल किल्लत का सामना कर रहे हैं।

नगर की पेयजल आपूर्ति लगभग 12 किमी दूर कोसी से बनी पंपिंग पेयजल योजना पर निर्भर है। जलापूर्ति गत बुधवार से तब प्रभावित हो चली, जब बुधवार अपराह्न अचानक मौसम ने करवट बदली और क्षेत्र में जबर्दस्त बारिश हुई। भारी वर्षा से कोसी नदी का जलस्तर बढ़ चला और बड़ी मात्रा में बहकर सिल्ट आई। यह सिल्ट कोसी स्थित पंप गृह के पंपों में घुसने लगी, जिससे पंपों को खतरा पैदा हो गया और कोसी में लगे तीनों पंप बंद करने पड़े। इसी बात की पुनरावृत्ति गुरुवार अपराह्न भारी वर्षा से हो गई। पिछले दो दिनों में पंपिंग मशीनें पूरी रात ठप रही। इससे नगर में स्थित तीन जलाशयों में पानी उपलब्ध नहीं हो सका। गुरुवार को सुबह छह बजे से अपराह्न दो बजे तक ही पंप चले। इस अवधि में जलाशयों में कुछ पानी उपलब्ध हुआ, तो चंद मोहल्लों में उसकी आंशिक आपूर्ति की गई। इसी तरह शुक्रवार को भी सुबह से पंप चले। ज्यों-ज्यों जलाशयों में पेयजल उपलब्ध होता रहा।

वैसे ही पहले दिन वंचित मोहल्लों में बारी-बारी से जलापूर्ति हुई, मगर यह भी अपर्याप्त व अनियमित रही। शुक्रवार अपराह्न बाजार क्षेत्र, धारानौला क्षेत्र व मालरोड इलाके में आपूर्ति की गई, मगर जिन मोहल्लों में गुरुवार को आंशिक आपूर्ति हुई, उनकी बारी नहीं आ सकी। नगरवासी दो दिन से पेयजल के लिए मुश्किल झेल रहे हैं। घर में एकत्रित पानी व आसपास मौजूद स्रोतों व नौलों की शरण ले रहे हैं।

कोसी पंपिंग पेयजल योजना नगर व उससे लगे चंद गांवों की करीब 1.25 लाख की आबादी की पेयजल का आधार है। इसके लिए नगर में करीब 8580 जल संयोजन और 40 जल स्तंभ हैं। महज बरसात में ही दिक्कत नहीं है, बल्कि मांग तो पहले से ही अधूरी है। इतनी आबादी के लिए 14 एमएलडी पेयजल की मांग है, मगर सामान्य स्थिति में भी योजना 6 से 8 एमएलडी (मिलीयन लीटर प्रतिदिन) ही आपूर्ति हो रही है। बरसात में इतनी भी नहीं हो पाती। इसकी वजह से योजना का आवश्यकता के अनुसार पुनर्गठन नहीं होना और घिसी-पिटी व्यवस्था के सहारे बैठे रहना। इसके अलावा राइजिंग मेन के लीकेज तक दूर नहीं हो पा रहे हैं। ये हालात व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं।

बारिश में कोसी में सिल्ट आना और जलापूर्ति बंद होने का यह सिलसिला पुराना है। इसे लोग व्यवस्था की कमजोरी मान रहे हैं। दो दिन भारी वर्षा हुई, तो दोनों ही दिन जलापूर्ति व्यवस्था चरमरा गई। शुक्रवार अपराह्न भी आसमान बादलों से पट गया। जिससे बारिश के आसार बने रहे। स्थिति ये है कि बारिश होने की संभावना से ही पेयजल संकट की चिंता सताने लग रही है। गत वर्ष भी बरसात में ऐसा ही रोना आए दिन लोगों ने झेला।

ईई जल संस्थान नंदकिशोर नदी में बताया कि सिल्ट आने से दिक्कत आ रही है। पंपों के संचालन में खलल से जलापूर्ति में बाधा आई है। फिर भी आपूर्ति करने के पूरे प्रयास हो रहे हैं और पंप संचालन में दिक्कत नहीं आने की दशा में पेयजलापूर्ति नियमित ढंग से चलती रहेगी।

मौसम विभाग ने चारधाम यात्रियों को दी सावधानी बरतने की सलाह

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उत्तराखंड में सोमवार को कई जगह हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है। चूंकि चारधाम रूट पर पहले से ही बारिश हो रही है, इसलिए मौसम विभाग ने यात्रियों को पूरी तैयारी के साथ ही यात्रा पर जाने की नसीहत दी है।

देहरादून मौसम केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के मुताबिक सोमवार को प्रदेश में कई स्थानों पर गरज–चमक के साथ बारिश हो सकती है। इसके बाद मंगलवार, बुधवार को भी अधिक ऊंचाई वाले जिलों में छिटपुट बारिश की संभावना है।बिक्रम सिंह के मुताबिक चारधाम यात्रा मार्ग पर रुक–रुक कर बारिश हो रही है, इससे कई जगह अचानक भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। इसलिए यात्री स्थानीय प्रशासन के साथ तालमेल बनाए रहें, साथ ही गरम कपड़े और जरूरी तैयारी के साथ ही यात्रा पर निकलें। इधर, शनिवारको दून का अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 36.8 डिग्री दर्ज किया गया।

देहरादून अौर अास पास में रविवार को बारिश हुई, जिस कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

गंगा के ‘जीवित व्यक्ति’ दर्जे को चुनौती देगी उत्तराखंड सरकार

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गंगा और यमुना को ‘जीवित व्यक्ति’ का दर्जा दिए जाने के राज्य हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने इसके पीछे ‘तकनीकी, भौगोलिक और प्रशासनिक’ कारणों का हवाला दिया है। राज्य सरकार का कहना है कि हाई कोर्ट के फैसले को लागू करना मुश्किल है क्योंकि ये नदियां पांच राज्यों से होकर गुजरती हैं।

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र से सुप्रीम कोर्ट जाने की सहमति मांगते हुए पत्र लिखा है। इस साल 20 मार्च को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट ने भारत की दो सबसे पवित्र माने जाने वाली नदियों गंगा और यमुना को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया था।

कौशिक ने बताया, ‘मैं यह साफ कर दूं कि हम दो पवित्र नदियों गंगा और यमुना को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिए जाने के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन गंगा और यमुना को जीवित व्यक्ति का दर्जा देते हुए हाई कोर्ट ने उत्तराखंड के प्रमुख सचिव, नमामि गंगे के निदेशक और राज्य के ऐडवोकेट जनरल को दोनों नदियों का कानूनी अभिभावक नियुक्त कर दिया है।’ उन्होंने कहा, ‘अगर गंगा और यमुना यूपी, बिहार या बंगाल में प्रदूषित होती हैं तो इसमें राज्य के प्रमुख सचिव कैसे जिम्मेदार हो सकते हैं? हम केवल अपने विचार सुप्रीम कोर्ट में रखना चाहते हैं।’

इसके साथ ही उत्तराखंड के पीसीसी चीफ प्रीतम सिंह ने कहा कि करोड़ो रुपये से केंद्र सरकार ने नमामि गंगा और स्वच्छ गंगा अभियान शुरु किया और अब जब हाईकोर्ट ने गंगा को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया तो इससे और भी तेजी आएगी गंगा के अस्तित्व को बचाने में, लेकिन अब एक बार फिर बीजेपी सरकार इस फैसले को चुनौती दे रही, तो मुझे समझ में नहीं आ रहा सरकार आखिर चाहती क्या है?

एटीएम चोर सक्रिय 2.24 लाख निकाले

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एटीएम कार्ड बदलकर बैंक खाते से रकम निकालने वाला गिरोह खटीमा में सक्रिय हो गया है। गिरोह ने एक ही दिन में दो खाता धारकों के एटीएम कार्ड बदलकर सात दिनों में खातों से 2.24 लाख की रकम निकाल ली। रकम निकालने की दोनों घटनाओं को साइबर क्राइम से जोड़कर देखा जा रहा है। जिनकी तहरीर पुलिस को दे दी गई है।

गोझरिया पटिया का राम ¨सह बोरा सेवानिवृत सैनिक हैं। 13 मई को उनकी पुत्री कारपोरेशन बैंक के एटीएम से रूपए निकालने पहुंची थी। जहां पहले से मौजूद किसी व्यक्ति ने धोखे से उनका एटीएम बदल दिया। जिसके बाद गैंग के सदस्य ने उनके एटीएम से 13 से 18 मई के बीच 1.45 लाख रूपए निकाल लिए। इतना ही नहीं आरोपी ने उसके खाते में दो अन्य लोगों से क्रमश:40 व 24 हजार रूपए डलवाकर उन्हें भी निकाल लिया। इसकी जानकारी फौजी के परिजनों को तब हुई जबकि उसके खाते में रकम डालने वालों ने फोन पर सूचना उसे दी। इसके बाद फौजी ने बैंक आकर खाते का ब्यौरा पता किया तो उसके खाते से 2.09 लाख की नगदी निकलने की जानकारी लगी।

जिसकी सूचना उसने पुलिस को दे दी। दूसरी घटना में प्राथमिक विद्यालय खेतलसंडा खाम में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत मो.हाशिम के साथ घटी। 13 मई को ही उन्होंने कारपोरेशन बैंक के एटीएम से अपने खाते से 15 हजार रूपए निकाले थे। इसी दौरान उनके पीछे लाइन में खड़े व्यक्ति ने हाथ से एटीएम कार्ड गिराकर बदली कर दिया। पैसे निकालने के बाद जब वह घर पहुंचे तो एटीएम कार्ड बदला हुआ मिला। इस पर उन्होंने बैंक में आकर खाते की जानकारी की तो उसमें से 15 हजार और निकाले जा चुके थे। शिक्षक कहना था कि एटीएम कार्ड बदलने वाला व्यक्ति सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने धोखाधड़ी से एटीएम बदलने वाले का पता लगाकर कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में कोतवाल चंचल शर्मा का कहना है कि दोनों ही घटनाओं की जांच कराई जा रही है। जिसके बाद कार्रवाई की जाएगी।

आतंकवाद विरोध दिवस मनाया

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सशस्त्र सीमा बल सीमांत मुख्यालय, रानीखेत में आतंकवाद विरोध दिवस मनाया गया। बल के अधिकारियों व जवानों ने आतंकवाद के खात्मे की शपथ ली।

सीमांत मुख्यालय परिसर में कार्यक्रम में बल के महानिरीक्षक सरवन कुमार ने आतंकवाद से समाज, राष्ट्र व विश्व को होने वाले नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और हिंसा शांति और प्रगति के मार्ग में बाधक है और जो राष्ट्र आतंकवाद का दंश झेल रहे हैं वह तरक्की नहीं कर सकता।

महानिरीक्षक ने अधिकारियों व जवानों से आतंकवाद से निपटने के लिए युवाओं में देशप्रेम की भावना जागृत करने का आह्वान किया। उन्होंने बल के अधिकारियों व जवानों को  आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में बल के कई अधिकारी व जवान मौजूद रहे।

पहाड़ों की सादगी मुझे अपनी ओर खींचती है: भूपेंद्र कैंथोला

न्यूजपोस्ट की इस खास सिरीज़ में हम आपको उन लोगों से रूबरू करा रहे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, हुनर और लगन से उत्तराखंड को राष्ट्रीय औऱ अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर पहचान दिलाई है।ये लोग उम्र और समाज के हर वर्ग से हैं और इनकी कहानियां न सिर्फ आपको प्रेरणा देंगी बल्कि आपको पहाड़ी होने पर गौरान्वित भी करेंगी।

कुछ समय पहले प्रतिष्ठित फिल्म और टेलीवीजन इन्सटीट्यूट आॅफ इंडिया (एफटीआईआई) देश भर में चर्चा का मुद्दा बना हुआ था। कारण था केंद्र सरकार द्वारा एक्टर गजेंद्र चौहान की एफटीआईआई के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति। इस नियुक्ति का छात्रों ने पुरजोर विरोध किया। लेकिन बहुत कम लोग शायद जानते होंगे कि एफटीआईआई के वर्तमान निदेशक भूपेंद्र कैंथोला पौड़ी जिले के पाबौ ब्लाॅक के हैं। भूपेंद्र ने 3 मई 2016 को इस संस्थान के निदेशक का कार्यभार संभाला।

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15 मार्च 1966 को हावङा में जन्मे भूपेंद्र ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जाॅन बैपटिस्ट स्कूल, थाने से पूरी की और इसके बाद मुंबई युनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में गोल्ड मेडल हासिल किया। अपने परिवार और दोस्तों के बीच भूपी के नाम से जाने वाले भूपेंद्र के पिता स्वर्गीय सर्वेशवर दत्त कैंथोला और माता कमला देवी हैं।

1989 में इंडियन इन्फोर्मेशन सर्विस पास करने के बाद से भूपेंद्र ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वो कहते हैं कि ” पुणे अाने से पहले मैने दूरदर्शन मुख्यालय दिल्ली में एडिश्नल डायरेक्टर जेनरल के पद पर काम किया।” इसके अलावा भूपेंद्र निदेशक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, और लोकसभा टीवी के एक्सीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर काम कर चुके हैं। भूपेंद्र के करीब 30 साल लंबे करियर के ये कुछ मील के पत्थर रहे हैं।

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भूपेंद्र को काम के चलते खाली समय मिलना मुश्किल ही रहता है लेकिन फुर्सत के कुछ पल मिलते ही, आप उन्हें पहाड़ों की हसीन वादियों में मिल सकते हैं। उन्हें पहाड़ों में घूमना, ट्रैकिंग, योगा या गंगा के किनारे सैर करना बहुत पसंद है।वो कहते हैं कि “उत्तराखंड में ट्रैकिंग, घ्यान, योग, योगियों की जीवनिया पढ़ना और पुराने हिंदी गाने खास तौर पर हेंमत कुमार के गाने सुनने से उन्हें नई ऊर्जा मिलती है।”

कई सालों से भूपेंद्र हर साल अगस्त में अपने गांव जाते हैं और अपने पिता के नाम पर राजकीय इंटर काॅलेज में कक्षा 6-12 तक में अवव्ल आने वाली छात्राओं को स्काॅलरशिप देते हैं। वो कहते हैं कि “इस स्कूल में उनके पिता जी पढ़ें है और इस तरह वो अपनी मिट्टी का कर्ज उतारने की छोटी ही सही लेकिन कोशिश करते हैं।”

पहाड़ों के लिये भूपेंद्र के इस प्यार को देख कर आप उनके रिटायरमेंट प्लान का भी अंदाजा लगा सकते हैं। वो कहते हैं ” मैं अपने गांव में एक शांत और सादगी भरी जिंदगी जीना चाहता हूं। पहाड़ों में स्कूल के बच्चों को पढ़ाना चाहता हूं और यहीं जीवन के अाखिरी दिन गुजारने की तमन्ना है”।

42 करोड का हंगामा है कैसा बरपा

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पिछले कुछ दिनों से 42 करोड की चर्चा शहर के हर नागरिक की जुबां पर थी।क्या था मामला 42 करोड का और क्यों चर्चा में था ये भले ही किसी को पता नहीं था मगर लिखने वाले ने वाट्स्प के एक ग्रुप पर मेसेज भेज कर 42 करोड की चर्चा को आम कर दिया। जिसमें एक व्यापारी का नाम लिखे बगैर ही कहा गया था कि जल्द ही एक व्यापारी द्वारा किया गया 42 करोड का घोटाला खोला जाएगा। इस मैसेज के बाद कई चर्चाएं जोरों पर थी, वहीं मामले का खुलासा तब हुआ जब एक व्यापारी शक्ति अग्रवाल ने विधायक के करीबी माने जाने वाले दुसरे व्यापारी के खिलाफ रंगदारी और जान से मारने की धमकी देने की तहरीर दी। शक्ति ने बताया कि कुछ दिन पूर्व उसके द्वारा एक प्रापर्टी खरीदी गयी थी जिसमें अपनी ऊची रसूक दिखाकर दुसरे व्यापारी द्वारा 35 लाख की मांग की गयी थी, साथ ही दुकान की भी मांग रखी गयी थी, जब इसका विरोध सक्ति द्वारा किया गया तो दुसरे व्यापारी ने जान से मारने की धमकी तक दे डाली। जिसके बाद फोन काल रिकार्डिंग के आधार पर शक्ति ने सुरक्षा की मांग करते हुए पुलिस से कार्यवाही की मांग की है, जबकि दुसरे पक्ष ने भी पुलिस से इस मामले की गम्भीरता से जांच करने के बाद कार्यवाही की बात कहीं है।
विधायक के करीबी पर रंगदारी का आरोप
काशीपुर में दो व्यापारियों की प्रतिष्पर्दा का विवाद इस कदर बढ गया कि मामला पुलिस तक पहुंच गया, जिससे शहर का महौल पूरी तरह से बिगड गया है। जहां एक पक्ष पर रंगदारी और जान से मारने का आरोप लगाया गया है दुसरे पक्ष ने आरोपों को निराधार बताया है। मामला 42 करोड की प्रापर्टी खरीद फरोक्त का है, जिसमें शक्ति अग्रवाल ने प्रापर्टी तो खरीदी मगर विधायक के करीबी माने जाने वाले दुसरे व्यापारी ने शक्ति को धमकाना शुरु कर दिया और प्रापर्टी में दस प्रतिशत की हिस्सेदारी और दुकान की मांग की,  जिसका शक्ति अग्रवाल ने विरोध किया तो विधायक के करीबी माने जाने वाले व्यापारी ने फोन पर जान से मारने की दमकी दी। जिसके बाद शहर के व्यापारियों के साथ एएसपी कार्यालय पहुंकर शक्ति अग्रवाल ने दुसरे व्यापारी के खिलाफ तहरीर देते हुए 35 लाख की रंगदारी और जान से मारने की धमकी देन की बात कहीं है। वहीं ऊंची रसूक रखने वाले विधायक के करीबी व्यापारी ने 35 लाख की मांग करते हुए उसमे और भी कई लोगों के शामिल होने की बात कहीं है। वहीं पुलिस फिलहाल दोनों पक्षों के इस मामले की जांच की बात कह रही है, जबकि इस मामले में देरी से हो रही कार्यवाही के पीछ नेताओं का दबाव माना जा रहा ह.।
पुलिस के सामने  कडी चुनोती
 
मीडिया से जुडा व्यापारी दिलप्रीत सेठी पर उन्ही के पडोसी व्यापारी ने रंगादारी और जान से मारने का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच लम्बे समय से चल रही वार्ता के बाद जब लेनदेन नहीं हो पाया तो उंची रसूक और अपने राजनैतिक कनैक्शन का हवाला देते हुए शक्ति अग्रवाल को दमकाने का प्रयास किया गया, जिसके बाद मामला बढता चला गया और दोनों पक्ष आमने सामने हो गये। अब पुलिस के सामने कडी चुनोती ये है कि एक तरफ पुरा व्यापारी समाज शक्ति अग्रवाल के समर्थन में खडा है तो दुसरी तरफ कुछ मीडियाकर्मियों और विधायक का सहारा लेकर दिलप्रीत सेठी भी खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं, जबकि उनका कहना है कि शक्ति अग्रवाल उनसे व्यापारिक द्वेश रखता है यही कारण है कि वो मेरी छवि धुमिल करने का प्रयास कर रहा है, वहीं पुलिस के सामने भी असमंजस की स्तिथी बनी है।

बद्रीनाथ हाई वे खुला, य़ात्रियों की आवाजाही हुई शुरू

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24 घंटों से ज्यादा की मेहनत कके बाद आखिरकार हनुमान पर्वत पर भूस्खलन से बंद हुए रास्ते को कोल लिया गया है। इस समय इस रास्ते से पुलिस ऐस्कार्ट लगाकर हल्के और चोटे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि कुछ समय में बड़े और भारी वाहनों के लिये भी रास्ता कोल दिया जायेगा।

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शुक्रवार को चट्टान खिसकने से बंद हुए मार्ग को खोलने और याक्त्रियों की सुविधा के लिये :

  • प्रशासन ने भूस्खलन स्थल पर मार्ग के पूर्ण रुप से खुल जाने तक बधित मार्ग के दोनों ओर ट्रांसशिपमेंट के लिए 15 छोटे और 10 बड़े वाहनों की व्यवस्था की और एसडीआरएफ टीम लोगों को भूस्खलन क्षेत्र पार करने में मदद की ।
  • जिला प्रशासन ने राहत शिविर राजकीय इंटर कालेज जोशीमठ,विष्णु प्रयाग और अलग-अलग धर्मशालाओं और आश्रमों में लगभग 2500 यात्रियों के रुकने का प्रबन्ध किया।
  • इसके अलावा बद्री केदार मंदिर समिती ने बद्रीनाथ में लगभग 500 लोगों के गोविन्द घाट में गुरुद्वारा में बद्रीनाथ में लगभग 2 हजार यात्रियों के रुकने और खाने पीने की व्यवस्था भी की गई।
  • देहरादून, हरिद्वार व ऋषिकेश रेलवे स्टेशनों में हैल्प डैस्क व्यवस्था स्थापित करवाई गई है तथा भूस्खलन के कारण पूर्व में करवाये गये आरक्षण का लाभ न उठा सकने वाले यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई।
  • भूस्खलन की वजह से बंद रास्ते को खोलने के लिए बी.आर.ओ से संपर्क कर 3 पोकलैंड मशीन,1 डोजर,1 आर.ओ.सी और 2 एयर कम्प्रेशर की व्यवस्था की गई और रात में भी सड़क खोलने का काम किए जाने के लिए 3 आसका लाइट लगाई गई।

इस दौरान सभी यात्री सुरक्षित रहे और जहां मार्ग बंद था उसके पास से लगभग 2 कि.मी पैदल मार्ग द्वारा यात्रा संचालित की गई। यात्रियों की सुविधा के लिए पैदल मार्ग पर पुलिस व एस.डी.आर.एफ के जवानों के अतिरिक्त मेडिकल टीम तैनात की गई तथा दोनों तरफ वाहनों की व्यवस्था की गयी। 

यात्रा व्यवस्थाओं पर तेज हुई राजनीति

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2017 चार धाम यात्रा सीजन की पहली मुश्किल क्या आई सरकार और विपक्ष में राजनीतिक नंबर बनाने की रस्सा कस्सी भी शुरू हो गई है। शुक्रवार को जोशीमठ के हाथीपर्वत पर चट्टान खिसकने से बद्रीनाथ मोटर मार्ग बाधित हो गया है। इसके चलते यात्रियों को आवाजाही में दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिये उसके पास पर्याप्त संसाधन हैं। और वो सभी इस समय जोशीमठ और आसपास के इलाकों में फंसे हुए यात्रियों की मदद के लिये लगाये गये हैं। इसके साथ ही सरकार, प्रशासन और बीआरओ के अधिकारी और कर्मचारी पूरी मेहनत कर रास्ते को जल्द से जल्द खोलने के लिये कार्य कर रहे हैं। सरकार ने ये भी कहा है कि मीडिया में हजारों यात्रियों के फंसे और यात्रा रुकने की खबरें भी गलत हैं। सरकार की तरफ से जारी बयानों के मुताबिक करीबन 1800 यात्रियों को अलग अलग जगहों पर रोका गया है। इसके साथ उनके रहने और खाने पीने की पूरी व्यवस्थाऐं की जा रही हैं।

बहरहाल मामला यात्रा की तैयारियों का हो और उस पर राजनीति न हो ये तो मुश्किल है। सो इस बहस में कांग्रेस भी कूद पड़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा है कि इस बार यात्राओं की तैयारी के लिये त्रिवेंद्र सरकार ने:

  • यात्रा शुरू होने से पहले बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति भंग कर दी
  • हवाई सेवाओॆं के लिये दिया गया टेंडर रद्द कर दिया।
  • धाम में खाने की थालियां महंगी कर दी
  • केदारनाथ में वैकल्पिक मार्ग बनाने के लिये पैसे रोक दिये

रावत का आरोप है कि सरकार ने यात्रा की तैयारियों के नाम पर महज कांग्रेस सरकार के किये कामों को रोका है। बहरहाल उम्मीद यही है कि इन सभी आरोप प्रत्यारोपों के बीच चारधाम यात्रा के लिये पहुंच रहे लाखों श्रद्धालुओं के लिये आने वाले दिन सुखद और सुगम यात्रा के होंगे।