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इन बहनों के सपनों की सच्चाई है “दयो-दि आॅर्गेनिक फार्म”

कहते हैं कि सपने जितने ऊंचे देखोगे आपकी उड़ान उतनी ही ऊंची होगी। इस कहावत को सच किया है दो बहनों ने जिन्होने अपनी मेहनत की बदौलत अपने बचपन के सपने को कम उम्र मे ही पूरा कर लिया। कुशिका और कनिका ने एक सपना बचपन में देखा था वो आज एक खूबसूरत सच में बदल चुका है कुशिका और कनिका शर्मा ने किन्ही आम मेघावी छात्राओं की तरह अपनी पढ़ाई पूरी की जिसमें छोटी बहन कुशिका के पास एमबीए की डिग्री है और बड़ी कनिका के पास ह्यूमन राईट की पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री के साथसाथ आईएसबी हैदराबाद में एंटरप्रिन्योरशिप की स्कालरशिप भी है।

15747798_1312200015509002_8739134393590425325_nइसके बाद अगला पढ़ाव था शहरों में बढ़ी कंपनियों में ऊंची इमारतों में बंद कमरों में भागती दौड़ती जिंदगी की शुरुआत। लेकिन किस्मत ने इन दोनों बहनों के लिये कुछ और ही तय कर रखा था। शहरों में बड़ी नौकरियों को अलविदा कहकर इन दोनों ने दो साल पहले अपने सपनों को साकार करने का मन बना लिया। और इस तरह साकार हुआ इनका ड्रीम प्रोजेक्ट दयोदि आर्गेनिक फार्म” आज 5 कमरे का यह रिर्जाटदयो’ नाम से प्रसिद्ध है जिसका संस्कृत में मतलब है स्वर्ग’।

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उत्तराखंड के मुक्तेश्वर जिले में 25 एकड़ फार्म लैंड पर यह रेजार्ट चारो तरफ से हरे भरे बागानों ने घिरा है कुशिका अपना बचपन याद करते हुए कहती हैं कि “जब हम छोटे थे तो बड़ी संख्या में लोगों को अच्छी जिंदगी के लिए पहाड़ छोड़ कर जाते देख कर हमें बुरा लगता था इसके बाद हमने सोचा आर्गेनिक खेती को बेहतर हास्पिटालिटी के साथ जोड़े जो सबके लिए फायदेमंद साबित हो सके उसके बाद हमने आर्गेनिक फार्मिंग रेजार्ट को प्रमोट करने की ठानी जो केवल एक डेस्टिनेशन से ज्यादा था लोगों के लिए।”

दो साल में इन दोनों ने मिलकर ना सिर्फ इस रिजार्ट को चलाया बल्कि दुनिया के हर कोने से अपने उपभोक्ता बनाएं कनिश्का कहती हैं कि “दयो दिल्ली से लगभग 350 किमी दूर है, और नैनीताल से केवल 60 किमी जिसके WhatsApp Image 2017-05-13 at 09.59.34 (4)सबसे पास काठगोदाम है 63 किमी पर है जो भी हमारे रिजार्ट में आता है उसे यह जगह पसंद आती है और वह अपनी छुट्टियां बढ़ा कर ही जाता है और यहां और दिन बिता कर जाता है इससे ज्यादा खुशी की बात क्या हो सकती है।”

एक ऐसी जगह जहां लगभग 20 के आसपास लोग काम करते है, यह सब मिलकर इस रिजार्ट को चलाते है इसके अलावा दोनों बहनें आस पास के लोगों को खासकर लड़कियों को यह मौका देती हैं कि वह उनके रिजार्ट आएं और अलगअलग व्यंजन बनाना सीखें

दयोआर्गेनिक परिवार वालों के बीच काफी लोकप्रिय है खासकर उनके लिए जिन्हें पहाड़ की ठंडी वादियों में एक सुविधाजनक वेकेशन से कुछ ज्यादा चाहिए इस रिजार्ट में हर किसी के लिए कुछ ना कुछ है चाहें वो आपकी पसंद के फल, सब्जियां और हर्बल चीजें पाली हाउस से लेना और यहां मौजूद शेफ के द्वारा उसको स्वादिष्ट खाने में परिवर्तन करना क्यों ना हों। खूबसूरती और आर्गेनिक फूड के साथ यह एक मिसाल भी पेश करता है कि अगर मन में विश्वास हो तो आप एपनी मंज़िल पा ही लेते हैं।

हिमालय से ऊंचें हौंसले को सलाम

अपने हौंसले के बल पर 68 साल की उम्र में 20 हजार फीट उंचे श्रीकांत पर्वत और हिमालय के चोटियों पर फ़तह करने वाली चंद्रप्रभा ऐंतवाल को मसूरी लिट्रेचर फ़ेस्टीवल में सम्मानित किया गया। मसूरी माउंटेन फेस्टिवल के पहले दिन 76 साल की चंद्रप्रभा ऐंतवाल जो एक पर्वतारोही हैं  को सम्मानित किया गया । चंद्रप्रभा माउंटेनियर के क्षेत्र की एक पायनियर हैं और बहुत से पर्वतों पर फतह कर चुकी हैं जैसे नंदा देवी, कंचनजंगा, त्रिशुल और माउंट जाओन्ली। 2010 में अर्जुन अर्वाड से नवाजा गया और 1990 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मीडिया के सवाल जवाब से दूर रहने वाली चंद्रप्रभा ने पुरस्कार लेने के बाद बहुत ही प्यार और धैर्य के साथ लोगों से बात कीय़ इसका काररण है उनका अपनी जन्मभूमि पहाड़ के लिए प्यार और लगाव जो बचपन से लेकर आज तक उनका घर रहा है।

न्यूज़पोस्ट टीम से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि “मैं बचपन से ही थोड़ी टेढ़ी थी,और हमारे जमाने में तो हम जानते भी नहीं थे कि माउंटेयरिंग क्या है,हम बाहर नहीं जाते थे और ना ही टीवी या ऐसा कुछ प्रचार-प्रसार था जैसे आज है।” उन्होंने बताया कि फिर एक दिन सन् 1969 में एनआईएमएच से एक सर्रकुलर आया जिसे देख कर उन्होंने एप्लाई किया और फिर 1972 में उन्हें एनआईएचएम बुलाया गया।अपने अनुभव के बारे में बताते हुए चंद्रप्रभा जी कहती हैं कि “पहले दिन जब मै पहली बार घर से निकली तो मैंने गढ़वाल देखा और गंगा को छुआ और महसूस किया और सोचा कि मैं कहा थी कि मैने यह पहले क्यों नहीं किया।”

चंद्रप्रभा बहुत साल एनआईएचएम अनुभव करने के बाद बताती हैं कि “मेरी पढ़ाई नगर पालिका के स्कूल से हुई तो इंग्लिश के बारे में ज्यादा नहीं जानती, एनआईएचएम में पहली ट्रेनिंग में कुछ समझ नहीं आया लेकिन जैसे ही प्रक्टिकल ट्रेनिंग शुरु हुई तो चीजें समझ आने लगी।”

अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद प्रभा ने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और एक के बाद एक उन्होंने पर्वतों को फतह करने का सिलसिला शुरु किया और आज भी उनका जज्ब़ा और हौसला देखते बनता है।

आज चंद्रप्रभा उत्तरकाशी में अपने आशियाने में अपने अनुभव आने वाली भावी पीढ़ी के साथ बांटती हैं और उनका उत्साह बढ़ाती हैं।

 

अवमानना के मामले में फंसे टीएचडीसी निदेशक

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हाई कोर्ट ने टिहरी हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन के निदेशक पर अदालत के आदेश की अवमानना करने पर अवमानना आरोप तय कर दिए। निदेशक जीएस तोमर को आरोपों का 31 मई तक जवाब दाखिल करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसी मामले में कोर्ट ने निदेशक के साथ ही उत्तराखंड तकनीकी विवि के कुलपति प्रो पीके गर्ग को 31 मई को कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

टीएचडीसी हाइड्रो पावर इंजीनियरिंग फेकल्टी एसोसिएशन की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई गई है। इसमें कहा गया है कि पहली दिसंबर 2015 को उच्च न्यायालय ने आदेश में याचिकाकर्ताओं को नियमित करने व वेतन भुगतान करने के आदेश पारित किए थे, मगर टीएचडीसी हाइड्रोपावर व उत्तराखंड तकनीकी विवि द्वारा अदालत के आदेश का अनुपालन नही किया गया।

इस संदर्भ में कुलपति प्रो. पीके गर्ग हाई कोर्ट में स्पष्टीकरण दिया कि हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक को याचिकाकर्ताओं को नियमित करने व उनके पहली दिसंबर 2015 से 22 सितंबर 2016 तक का वेतन भुगतान करने को कहा गया था। इस आदेश का अनुपालन निदेशक स्तर से होना था।

टीएचडीसी निदेशक जीएस तोमर हाई कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं को नियमित करने का अधिकार उन्हें प्राप्त नही है। इसके अलावा यूटीयू के कुलपति का 11मई 2017 का आदेश ई-मेल से 14 मई को प्राप्त हुआ। इसमें याचिकाकर्ताओं के वेतन भुगतान का आदेश किया गया था। इस आदेश का पालन करते हुए उनके द्वारा कुछ भुगतान की राशि एडवांस जारी कर दी। शेष राशि का जल्द भुगतान कर दिया जाएगा।

कोर्ट ने उनकी सफाई के बाद आरोप तय किया कि पहली दिसंबर 2015 से 15 सितंबर 2016 तक अदालत का आदेश नही मानना अवमानना मानते हुए आरोपित किया। साथ ही आरोप का उत्तर देने के लिए 31 मई तक का समय दिया है। मामले की सुनवाई न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ में हुई।

यात्रा मार्ग में हाथीपर्वत पर चट्टान खिसकी, सभी यात्री सुरक्षित

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चार धाम यात्रा पर बारिश ने खलल डालना शुरू कर दिया है । पहाड़ों में हो रही लगातार बारिश ने यात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। वहीं लगातार हो रही बारिश अब यात्रियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। बारिश के कारण जनपद चमोली के विष्णुप्रयाग के पास हाथी पर्वत में पहाड़ी दरकने से बदरीनाथ हाईवे बंद हो गया। मार्ग बंद होने से दोनों ओर यात्रियों को रोक दिया गया है।

कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि भूस्खलन से बाधित मार्ग के शनिवार दोपहर से पहले खुलने की पूरी सम्भावना है। मुख्यमंत्री ने भी सचिव अमित नेगी को लगातार मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। सरकार के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है और यात्रियों को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। चारधाम यात्रा निर्बाध चल रही है। जिलाधिकारी, एसएसपी और बीआरओ के अधिकारी मौके पर पहुँचे गये है। भूस्खलन साइट के दोनों तरफ यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। बद्रीनाथ, जोशीमठ और पांडूकेश्वर में यात्रियों के रुकने की पर्याप्त व्यवस्था है। यात्रियों के लिये सभी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। दोनो हाई स्थानों पर स्वास्थ्य सुविधा, रहने और खाने की पूरी सुविधा है। बीआरओ के अधिकारियों का कहना है कि मार्ग शनिवार 12 बजे से पहले खोल दिये जायेंगे। कमीश्नर गढ़वाल विनोद शर्मा भी मौके पर पहुंचने के लिये शुक्रवार रात निकल गये थे।

शुक्रवार को दिन में तीन बजे के करीब हाथी पर्वत से अचानक चट्टान टूटकर गिरने के बाद हाईवे का 50 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हाथी पर्वत में दोनों तरफ  वाहन रुके हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और यात्रियों की परेशानी को देखते हुए बद्रीनाथ धाम में फंसे यात्रियों को फिलहाल वहीं रुकने के लिए कहा है, जबकि बदरीनाथ धाम जाने वाले यात्रियों को जोशीमठ, पीपलकोटी, चमोली आदि यात्रा पड़ावों पर रोका गया है।

अबाकारी नीति पर सरकार पर जमकर बरसी इंदिरा हृदयेश

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सरकार की नई आबकारी नीति पर शुक्रवार को कांग्रेस की नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हदयेश ने प्रेस वार्ता कर जमकर हमला बोला। बता दें कि नई आबकारी नीति के तहत पहाड़ी जिलों में शराब के ठेकों को सुबह 12 बजे से सांय 6 बजे तक खोलने के आदेश दिये गये है। जिस पर आज इंदिरा ह्रदयेश ने इसका विरोध करते हुए सरकार को अपने इस फैसले को बदलने के लिए कहा है।

खंडूरी सरकार का हवाला देकर इंदिरा ह्रदयेश ने कहा कि खंडूरी सरकार में भी शराब के ठेकों पर समय निर्धारित किया गया था लेकिन भारी विरोध के कारण उन्हें ये फैसला बदलना पड़ा। इसी तरह त्रिवेंद्र सरकार को भी अपना ये फैसला बदलना होगा। उन्होनें आगे कहा कि सरकार के इस फैसले से जहां एक ओर तस्करी बढ़ जाएगी, वही दूसरी ओर आर्थिक रूप से भी पहाड़ के लोगों पर बोझ पड़ेगा।

वहीं एनएच- 74 घोटाले में इंदिरा ह्रदयेश ने त्रिवेंद्र सरकार पर बड़े लोगों को बचाने का आरोप लगाया। उन्होनें अब तक सीबीआई द्वारा एनएच – 74 की जांच शुरू न की जाने को लेकर भी सरकार की नीयत को कटघडे में खड़ा किया।

अब देखना होगा कि विपक्ष के इन आरोपों के बाद क्या सराकार अपनी आबकारी नीति में पुन:मंथन कर कोई संशोधन करेगी ?

 

19 मई से दून में शुरु हुआ तीन दिवसीय देवभूमि मास्टर बैडमिंटन लीग

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जेपी बैडमिंटन एकेडमी, बंजारावाला, देहरादून मेें आज देवभूमि क्लब और जे.पी. बेडमिंटन एकेडमी ने 19 मई से शुरु होकर 21 मई 2017 तक आयोजित होने वाली मास्टर लीग प्रतियोगिता का शुभारम्भ शहरी विकास मंत्री, मदन कौशिक के हाथों से किया गया। उदघाटन समारोह की अध्यक्षता उत्तरांचल बैडमिंटन एशोसियेशन के प्रदेशाध्यक्ष ए.डी.जी अशोक कुमार ने की।

प्रतियोगिता में देश की आठ टीमें भाग ले रही हैं, जिनमेें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल, चण्डीगढ के अलावा तीन टीमें उत्तराखण्ड से हैं। इस प्रतियोगिता में अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी हरजीत सिंह, विक्रम भसीन, रामलखन, एस.के. पटेल सहित कई खिलाड़ी भी भाग ले रहे हैं जो कि देश का नाम बैडमिंटन में रोशन कर चुके हैं। यह मास्टर लीग चण्डीगढ़ के बाद अब उत्तराखण्ड में आयोजित की जा रही है। इस प्रतियोगिता के दौरान उभरते हुए खिलाड़ियों को नयी -नयी तकनीक के हैड्स देखने को मिलेंगे और नया हुनर सीखने को मिलेगा।

बताया गया कि इस प्रतियोगिता को कराने का मुख्य उद्देश्य बैडमिंटन की ग्रोथ को बढ़ाना है तथा उम्मीद जताई कि अगर इस प्रयोग में सफल रहे तो भविष्य में भी इस तरह की प्रतियोगिता कराई जायेगी।

प्रतियोगिता का पहला मैच डबल्स टीम में पंजाब और उत्तराखण्ड(ए) की टीम के बीच खेला गया, जिसमें पंजाब की टीम उत्तराखंड (ए) की टीम को 6-1 से हराकर विजेता रही। दूसरा मैच चंडीगढ़ तथा उत्तराखंड(बी) के बीच खेला गया जिसमें उत्तराखंड की टीम चंडीगढ़ को 4-3 से हराकर विजेता रही।

इस अवसर पर देहरादून जिला बैडमिंटन एशोसियेशन के अध्यक्ष एस.सी. विमरमानी, आयोजक सचिव, वरिष्ठ अधिवक्ता  कमल विरमानी,  राजेश निझावन, धर्मेन्द्र जुनेजा, जिला बैडमिंटन एशोेसियेशन के कार्यकारी अध्यक्ष संजय गुप्ता, कोषाध्यक्ष दिनेश सहगल व जे.पी. बैडमिंटन एकेडमी के डायरेक्टर रतन लाल शर्मा आदि मौजूद रहे।

23 लाख के पुराने नोट पकडे़

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एक हजार व पांच सौ के पुराने नोट बदलने की फिराक में घूम रहे तीन युवक एनआरआइ के झांसे में फंस गए। उन्होंने एसओजी कर्मी को एनआरआइ समझकर पुराने नोट बदलने की गलती की। इससे तीनों पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पकड़े गए युवकों में से दो के पास से करीब 23 लाख रूपये पुरानी करेंसी बरामद हुई है। यह घटना काशीपुर की है।

सूत्रों के मुताबिक मुरादाबाद (उप्र) जिले के ठाकुरद्वारा, ग्राम बैलजुड़ी व मिस्सरवाला के तीन युवक पुराने नोट बदलने के चक्कर में पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पकड़े गए दो युवकों से करीब 23 लाख की पुरानी करेंसी बरामद हुई है।

रिजर्व बैंक ने एनआरआइ लोगों को पुरानी करेंसी बदलने के लिए 31 जुलाई तक समय दिया है। इसलिए दोनों युवक किसी एनआरआइ की तलाश में थे। सूत्रों के मुताबिक एक एसओजी कर्मी इनमें से एक युवक से एनआरआइ बनकर मिला। इस पर उसने एसओजी कर्मी को अपने साथियों से भेंट कराई। जब उन्होंने एनआरआइ को पुराने नोट बदलने के लिए दिए तो पुलिस ने तीनों को उठा लिया।

पुलिस ने युवकों को गंगे बाबा रोड स्थित एक मकान से पकड़ा है। सीओ राजेश भट्ट का कहना है कि इस तरह के केस में आरबीआइ एक्ट के तहत सेक्शन चार और पांच में कार्रवाई की जाती है। अभी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से संपर्क किया गया है। उनको कैश दे दिया जाएगा। साथ ही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की सलाह के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

एएनएम नियुक्ति का रास्ता साफ

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हाई कोर्ट ने एएनएम भर्ती मामले प्रकरण पर सरकार की ओर से जारी नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही तीन पद रिक्त रखने को कहा है। हरिद्वार निवासी अर्चना व अन्य ने विशेष अपील दायर कर एकलपीठ के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सिर्फ विज्ञान वर्ग के अभ्यर्थियों का ही एएनएम पदों पर चयन करने के आदेश दिए थे। जबकि अपीलकर्ता का कहना था वह भी उत्तराखंड नर्सेज एंड मिडवाइफ काउंसिल में पंजीकृत है।

याचिका का विरोध करते हुए मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी कहा कि एएनएम सेवा नियमावली-1997 में उल्लेख है कि विज्ञान संवर्ग से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण ही एएनएम पदों के लिए योग्य होंगे। इसलिए राज्य सरकार की कार्रवाई वैधानिक है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद तीन पद रिक्त रखते हुए नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने का आदेश पारित किया। यहां उल्लेखनीय कि राज्य में एएनएम के 440 पदों पर नियुक्तियां होनी हैं।

खनन पट्टों को निरस्त करने का आदेश खारिज

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कांग्रेस सरकार में चार जिलों में जारी खनन पट्टों को निरस्त करने के भाजपा सरकार के शासनादेश को हाई कोर्ट, नैनीताल ने रद कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने इस शासनादेश को पूरे राज्य में प्रभावी बनाने संबंधी शासनादेश के क्रियान्वयन पर रोक भी लगा दी है। कोर्ट के इस निर्णय से सरकार को करारा झटका लगा है।

सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय में हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल व ऊधमसिंह नगर में खनन व भंडारण के लाइसेंस को निरस्त करने के साथ ही चुनाव आचार संहिता से 15 दिन पहले जारी 44 खनन पट्टों को निरस्त कर दिया था। एमएस इंटरप्राइजेज की ओर से याचिका दायर कर कहा गया है कि सरकार द्वारा पहली मई को खनन, भंडारण के लाइसेंस निरस्त कर दिए, जबकि नौ मई को शासन द्वारा समस्त पट्टों को स्थगित कर दिया।

याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार का फैसला असंवैधानिक और राजनीति से प्रेरित है। बिना सुनवाई का मौका दिए पट्टे निरस्त किए गए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व महाधिवक्ता वीबीएस नेगी ने जबकि सरकार की ओर महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर द्वारा पैरवी की गई। न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद पहली मई को जारी शासनादेश निरस्त कर दिया।

चीन के करीब पुहंचा भारत

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पिथौरागढ़ जिले का सीमांत गांव दुक्तू। शीतकाल के चार महीने बर्फ से लकदक रहने वाले इस गांव के लोग ठंड शुरू होते ही परिवार, राशन और मवेशियों को लेकर 78 किमी नीचे धारचूला घाटी आ जाते हैं। गर्मियां शुरू होते फिर शुरू होता है इनका माइग्रेशन। ये वापस आकर गांव को फिर गुलजार कर देते हैं, लेकिन भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के जवान दुक्तू गांव के अपने कैंपों में ही डटे रहते हैं।

ग्रामीण हों या जवान उन्हें अभी पखवाड़ा भर पहले तक यहां पहुंचने के लिए सोबला से पहाड़ की पगडंडियों पर 46 किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती थी, लेकिन अब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे इस गांव तक सड़क पहुंच गई है। यह गांव चीन की ज्ञानिमा मंडी के करीब है।

न्यू सोबला-दारमा मार्ग का निर्माण कठिन चुनौती रही है पर भारतीय इंजीनियरों के हौसले ने देश को सामरिक दृष्टि से बड़ी कामयाबी दिला दी है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तिब्बती मंडी ताकलाकोट के बाद चीन ने अपना दूसरा बड़ा सामरिक ठिकाना ज्ञानिमा मंडी के पास बना रखा है।

न्यूजपोस्ट टीम जब दुक्तू गांव पहुंची तो ग्रामीण खुशी से झूम उठे। वजह बड़ी दिलचस्प है। ग्रामीणों के अपने नाते-रिश्तेदारों के अलावा अभी तक यहां आइटीबीपी व सेना के जवान ही पहुंचते देखे हैं। शायद बाहरी दुनियां(इनके क्षेत्र के बाहर के लोग) से पहली बार कोई पहुंचा। इसकी झलक बातचीत में क्षेत्र पंचायत सदस्य मनोज नगन्याल के उत्साह ने भी दे दिया। वे बोल पड़े। यहां सड़क पहुंची तो देश की खुशबू भी पहुंचेगी इसका आभास हो गया। आज आप लोग आए हैं तो कल पर्यटक भी आएंगे। जवानों को साजो सामान कंधों पर ढोकर पैदल नहीं आना पड़ेगा। कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग से पहले इस मार्ग का निर्माण हो जाने से भारत की चीन सीमा तक दोतरफा पहुंच हो गई है।

इस क्षेत्र का अंतिम गांव है बिदांग। अब जनशून्य हो गया है। आबादी इससे पहले के गांव दांतू, तिदांग, मार्चा और सीपू में रहती है। यहां तक रोड कटिंग में भारतीय इंजीनियरों की मेहनत देखने लायक है। दावा है कि 20 से 25 दिनों में वाहन जाने लायक कच्ची सड़क बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगी। कम चुनौतियां नहीं थीं यहां तक पहुंचने में।

इस सड़क का निर्माण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अधीन है, जिसने 2013 की आपदा की कठिन चुनौती के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। 2005 में दारमा घाटी के रास्ते चीन सीमा तक सड़क का सपना देखा गया था। 2011 में काम शुरू हुआ। 2013 की आपदा में दो वर्ष तक काम बंद करना पड़ा। फिर 2015 के अंतिम तीन महीने से निर्माण कार्य ने गति पकड़ी।

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सिराज अहमद के मुताबिक अभी सीमांत गांव दुक्तू स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के कैंप तक कच्ची सड़क पूरी हो गई है।  फेज एक में सड़क कटिंग का कार्य जल्द पूरा हो जाएगा। 2018 तक इस सड़क पर बड़े वाहनों की आवाजाही हो सकेगी, लेकिन पक्की सड़क तैयार होने में अभी और वक्त लग सकता है।