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एटीएम चोर सक्रिय 2.24 लाख निकाले

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एटीएम कार्ड बदलकर बैंक खाते से रकम निकालने वाला गिरोह खटीमा में सक्रिय हो गया है। गिरोह ने एक ही दिन में दो खाता धारकों के एटीएम कार्ड बदलकर सात दिनों में खातों से 2.24 लाख की रकम निकाल ली। रकम निकालने की दोनों घटनाओं को साइबर क्राइम से जोड़कर देखा जा रहा है। जिनकी तहरीर पुलिस को दे दी गई है।

गोझरिया पटिया का राम ¨सह बोरा सेवानिवृत सैनिक हैं। 13 मई को उनकी पुत्री कारपोरेशन बैंक के एटीएम से रूपए निकालने पहुंची थी। जहां पहले से मौजूद किसी व्यक्ति ने धोखे से उनका एटीएम बदल दिया। जिसके बाद गैंग के सदस्य ने उनके एटीएम से 13 से 18 मई के बीच 1.45 लाख रूपए निकाल लिए। इतना ही नहीं आरोपी ने उसके खाते में दो अन्य लोगों से क्रमश:40 व 24 हजार रूपए डलवाकर उन्हें भी निकाल लिया। इसकी जानकारी फौजी के परिजनों को तब हुई जबकि उसके खाते में रकम डालने वालों ने फोन पर सूचना उसे दी। इसके बाद फौजी ने बैंक आकर खाते का ब्यौरा पता किया तो उसके खाते से 2.09 लाख की नगदी निकलने की जानकारी लगी।

जिसकी सूचना उसने पुलिस को दे दी। दूसरी घटना में प्राथमिक विद्यालय खेतलसंडा खाम में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत मो.हाशिम के साथ घटी। 13 मई को ही उन्होंने कारपोरेशन बैंक के एटीएम से अपने खाते से 15 हजार रूपए निकाले थे। इसी दौरान उनके पीछे लाइन में खड़े व्यक्ति ने हाथ से एटीएम कार्ड गिराकर बदली कर दिया। पैसे निकालने के बाद जब वह घर पहुंचे तो एटीएम कार्ड बदला हुआ मिला। इस पर उन्होंने बैंक में आकर खाते की जानकारी की तो उसमें से 15 हजार और निकाले जा चुके थे। शिक्षक कहना था कि एटीएम कार्ड बदलने वाला व्यक्ति सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने धोखाधड़ी से एटीएम बदलने वाले का पता लगाकर कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में कोतवाल चंचल शर्मा का कहना है कि दोनों ही घटनाओं की जांच कराई जा रही है। जिसके बाद कार्रवाई की जाएगी।

आतंकवाद विरोध दिवस मनाया

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सशस्त्र सीमा बल सीमांत मुख्यालय, रानीखेत में आतंकवाद विरोध दिवस मनाया गया। बल के अधिकारियों व जवानों ने आतंकवाद के खात्मे की शपथ ली।

सीमांत मुख्यालय परिसर में कार्यक्रम में बल के महानिरीक्षक सरवन कुमार ने आतंकवाद से समाज, राष्ट्र व विश्व को होने वाले नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और हिंसा शांति और प्रगति के मार्ग में बाधक है और जो राष्ट्र आतंकवाद का दंश झेल रहे हैं वह तरक्की नहीं कर सकता।

महानिरीक्षक ने अधिकारियों व जवानों से आतंकवाद से निपटने के लिए युवाओं में देशप्रेम की भावना जागृत करने का आह्वान किया। उन्होंने बल के अधिकारियों व जवानों को  आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में बल के कई अधिकारी व जवान मौजूद रहे।

पहाड़ों की सादगी मुझे अपनी ओर खींचती है: भूपेंद्र कैंथोला

न्यूजपोस्ट की इस खास सिरीज़ में हम आपको उन लोगों से रूबरू करा रहे हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, हुनर और लगन से उत्तराखंड को राष्ट्रीय औऱ अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर पहचान दिलाई है।ये लोग उम्र और समाज के हर वर्ग से हैं और इनकी कहानियां न सिर्फ आपको प्रेरणा देंगी बल्कि आपको पहाड़ी होने पर गौरान्वित भी करेंगी।

कुछ समय पहले प्रतिष्ठित फिल्म और टेलीवीजन इन्सटीट्यूट आॅफ इंडिया (एफटीआईआई) देश भर में चर्चा का मुद्दा बना हुआ था। कारण था केंद्र सरकार द्वारा एक्टर गजेंद्र चौहान की एफटीआईआई के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति। इस नियुक्ति का छात्रों ने पुरजोर विरोध किया। लेकिन बहुत कम लोग शायद जानते होंगे कि एफटीआईआई के वर्तमान निदेशक भूपेंद्र कैंथोला पौड़ी जिले के पाबौ ब्लाॅक के हैं। भूपेंद्र ने 3 मई 2016 को इस संस्थान के निदेशक का कार्यभार संभाला।

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15 मार्च 1966 को हावङा में जन्मे भूपेंद्र ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जाॅन बैपटिस्ट स्कूल, थाने से पूरी की और इसके बाद मुंबई युनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में गोल्ड मेडल हासिल किया। अपने परिवार और दोस्तों के बीच भूपी के नाम से जाने वाले भूपेंद्र के पिता स्वर्गीय सर्वेशवर दत्त कैंथोला और माता कमला देवी हैं।

1989 में इंडियन इन्फोर्मेशन सर्विस पास करने के बाद से भूपेंद्र ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वो कहते हैं कि ” पुणे अाने से पहले मैने दूरदर्शन मुख्यालय दिल्ली में एडिश्नल डायरेक्टर जेनरल के पद पर काम किया।” इसके अलावा भूपेंद्र निदेशक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, और लोकसभा टीवी के एक्सीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर काम कर चुके हैं। भूपेंद्र के करीब 30 साल लंबे करियर के ये कुछ मील के पत्थर रहे हैं।

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भूपेंद्र को काम के चलते खाली समय मिलना मुश्किल ही रहता है लेकिन फुर्सत के कुछ पल मिलते ही, आप उन्हें पहाड़ों की हसीन वादियों में मिल सकते हैं। उन्हें पहाड़ों में घूमना, ट्रैकिंग, योगा या गंगा के किनारे सैर करना बहुत पसंद है।वो कहते हैं कि “उत्तराखंड में ट्रैकिंग, घ्यान, योग, योगियों की जीवनिया पढ़ना और पुराने हिंदी गाने खास तौर पर हेंमत कुमार के गाने सुनने से उन्हें नई ऊर्जा मिलती है।”

कई सालों से भूपेंद्र हर साल अगस्त में अपने गांव जाते हैं और अपने पिता के नाम पर राजकीय इंटर काॅलेज में कक्षा 6-12 तक में अवव्ल आने वाली छात्राओं को स्काॅलरशिप देते हैं। वो कहते हैं कि “इस स्कूल में उनके पिता जी पढ़ें है और इस तरह वो अपनी मिट्टी का कर्ज उतारने की छोटी ही सही लेकिन कोशिश करते हैं।”

पहाड़ों के लिये भूपेंद्र के इस प्यार को देख कर आप उनके रिटायरमेंट प्लान का भी अंदाजा लगा सकते हैं। वो कहते हैं ” मैं अपने गांव में एक शांत और सादगी भरी जिंदगी जीना चाहता हूं। पहाड़ों में स्कूल के बच्चों को पढ़ाना चाहता हूं और यहीं जीवन के अाखिरी दिन गुजारने की तमन्ना है”।

42 करोड का हंगामा है कैसा बरपा

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पिछले कुछ दिनों से 42 करोड की चर्चा शहर के हर नागरिक की जुबां पर थी।क्या था मामला 42 करोड का और क्यों चर्चा में था ये भले ही किसी को पता नहीं था मगर लिखने वाले ने वाट्स्प के एक ग्रुप पर मेसेज भेज कर 42 करोड की चर्चा को आम कर दिया। जिसमें एक व्यापारी का नाम लिखे बगैर ही कहा गया था कि जल्द ही एक व्यापारी द्वारा किया गया 42 करोड का घोटाला खोला जाएगा। इस मैसेज के बाद कई चर्चाएं जोरों पर थी, वहीं मामले का खुलासा तब हुआ जब एक व्यापारी शक्ति अग्रवाल ने विधायक के करीबी माने जाने वाले दुसरे व्यापारी के खिलाफ रंगदारी और जान से मारने की धमकी देने की तहरीर दी। शक्ति ने बताया कि कुछ दिन पूर्व उसके द्वारा एक प्रापर्टी खरीदी गयी थी जिसमें अपनी ऊची रसूक दिखाकर दुसरे व्यापारी द्वारा 35 लाख की मांग की गयी थी, साथ ही दुकान की भी मांग रखी गयी थी, जब इसका विरोध सक्ति द्वारा किया गया तो दुसरे व्यापारी ने जान से मारने की धमकी तक दे डाली। जिसके बाद फोन काल रिकार्डिंग के आधार पर शक्ति ने सुरक्षा की मांग करते हुए पुलिस से कार्यवाही की मांग की है, जबकि दुसरे पक्ष ने भी पुलिस से इस मामले की गम्भीरता से जांच करने के बाद कार्यवाही की बात कहीं है।
विधायक के करीबी पर रंगदारी का आरोप
काशीपुर में दो व्यापारियों की प्रतिष्पर्दा का विवाद इस कदर बढ गया कि मामला पुलिस तक पहुंच गया, जिससे शहर का महौल पूरी तरह से बिगड गया है। जहां एक पक्ष पर रंगदारी और जान से मारने का आरोप लगाया गया है दुसरे पक्ष ने आरोपों को निराधार बताया है। मामला 42 करोड की प्रापर्टी खरीद फरोक्त का है, जिसमें शक्ति अग्रवाल ने प्रापर्टी तो खरीदी मगर विधायक के करीबी माने जाने वाले दुसरे व्यापारी ने शक्ति को धमकाना शुरु कर दिया और प्रापर्टी में दस प्रतिशत की हिस्सेदारी और दुकान की मांग की,  जिसका शक्ति अग्रवाल ने विरोध किया तो विधायक के करीबी माने जाने वाले व्यापारी ने फोन पर जान से मारने की दमकी दी। जिसके बाद शहर के व्यापारियों के साथ एएसपी कार्यालय पहुंकर शक्ति अग्रवाल ने दुसरे व्यापारी के खिलाफ तहरीर देते हुए 35 लाख की रंगदारी और जान से मारने की धमकी देन की बात कहीं है। वहीं ऊंची रसूक रखने वाले विधायक के करीबी व्यापारी ने 35 लाख की मांग करते हुए उसमे और भी कई लोगों के शामिल होने की बात कहीं है। वहीं पुलिस फिलहाल दोनों पक्षों के इस मामले की जांच की बात कह रही है, जबकि इस मामले में देरी से हो रही कार्यवाही के पीछ नेताओं का दबाव माना जा रहा ह.।
पुलिस के सामने  कडी चुनोती
 
मीडिया से जुडा व्यापारी दिलप्रीत सेठी पर उन्ही के पडोसी व्यापारी ने रंगादारी और जान से मारने का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच लम्बे समय से चल रही वार्ता के बाद जब लेनदेन नहीं हो पाया तो उंची रसूक और अपने राजनैतिक कनैक्शन का हवाला देते हुए शक्ति अग्रवाल को दमकाने का प्रयास किया गया, जिसके बाद मामला बढता चला गया और दोनों पक्ष आमने सामने हो गये। अब पुलिस के सामने कडी चुनोती ये है कि एक तरफ पुरा व्यापारी समाज शक्ति अग्रवाल के समर्थन में खडा है तो दुसरी तरफ कुछ मीडियाकर्मियों और विधायक का सहारा लेकर दिलप्रीत सेठी भी खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं, जबकि उनका कहना है कि शक्ति अग्रवाल उनसे व्यापारिक द्वेश रखता है यही कारण है कि वो मेरी छवि धुमिल करने का प्रयास कर रहा है, वहीं पुलिस के सामने भी असमंजस की स्तिथी बनी है।

बद्रीनाथ हाई वे खुला, य़ात्रियों की आवाजाही हुई शुरू

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24 घंटों से ज्यादा की मेहनत कके बाद आखिरकार हनुमान पर्वत पर भूस्खलन से बंद हुए रास्ते को कोल लिया गया है। इस समय इस रास्ते से पुलिस ऐस्कार्ट लगाकर हल्के और चोटे वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि कुछ समय में बड़े और भारी वाहनों के लिये भी रास्ता कोल दिया जायेगा।

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शुक्रवार को चट्टान खिसकने से बंद हुए मार्ग को खोलने और याक्त्रियों की सुविधा के लिये :

  • प्रशासन ने भूस्खलन स्थल पर मार्ग के पूर्ण रुप से खुल जाने तक बधित मार्ग के दोनों ओर ट्रांसशिपमेंट के लिए 15 छोटे और 10 बड़े वाहनों की व्यवस्था की और एसडीआरएफ टीम लोगों को भूस्खलन क्षेत्र पार करने में मदद की ।
  • जिला प्रशासन ने राहत शिविर राजकीय इंटर कालेज जोशीमठ,विष्णु प्रयाग और अलग-अलग धर्मशालाओं और आश्रमों में लगभग 2500 यात्रियों के रुकने का प्रबन्ध किया।
  • इसके अलावा बद्री केदार मंदिर समिती ने बद्रीनाथ में लगभग 500 लोगों के गोविन्द घाट में गुरुद्वारा में बद्रीनाथ में लगभग 2 हजार यात्रियों के रुकने और खाने पीने की व्यवस्था भी की गई।
  • देहरादून, हरिद्वार व ऋषिकेश रेलवे स्टेशनों में हैल्प डैस्क व्यवस्था स्थापित करवाई गई है तथा भूस्खलन के कारण पूर्व में करवाये गये आरक्षण का लाभ न उठा सकने वाले यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई।
  • भूस्खलन की वजह से बंद रास्ते को खोलने के लिए बी.आर.ओ से संपर्क कर 3 पोकलैंड मशीन,1 डोजर,1 आर.ओ.सी और 2 एयर कम्प्रेशर की व्यवस्था की गई और रात में भी सड़क खोलने का काम किए जाने के लिए 3 आसका लाइट लगाई गई।

इस दौरान सभी यात्री सुरक्षित रहे और जहां मार्ग बंद था उसके पास से लगभग 2 कि.मी पैदल मार्ग द्वारा यात्रा संचालित की गई। यात्रियों की सुविधा के लिए पैदल मार्ग पर पुलिस व एस.डी.आर.एफ के जवानों के अतिरिक्त मेडिकल टीम तैनात की गई तथा दोनों तरफ वाहनों की व्यवस्था की गयी। 

यात्रा व्यवस्थाओं पर तेज हुई राजनीति

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2017 चार धाम यात्रा सीजन की पहली मुश्किल क्या आई सरकार और विपक्ष में राजनीतिक नंबर बनाने की रस्सा कस्सी भी शुरू हो गई है। शुक्रवार को जोशीमठ के हाथीपर्वत पर चट्टान खिसकने से बद्रीनाथ मोटर मार्ग बाधित हो गया है। इसके चलते यात्रियों को आवाजाही में दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिये उसके पास पर्याप्त संसाधन हैं। और वो सभी इस समय जोशीमठ और आसपास के इलाकों में फंसे हुए यात्रियों की मदद के लिये लगाये गये हैं। इसके साथ ही सरकार, प्रशासन और बीआरओ के अधिकारी और कर्मचारी पूरी मेहनत कर रास्ते को जल्द से जल्द खोलने के लिये कार्य कर रहे हैं। सरकार ने ये भी कहा है कि मीडिया में हजारों यात्रियों के फंसे और यात्रा रुकने की खबरें भी गलत हैं। सरकार की तरफ से जारी बयानों के मुताबिक करीबन 1800 यात्रियों को अलग अलग जगहों पर रोका गया है। इसके साथ उनके रहने और खाने पीने की पूरी व्यवस्थाऐं की जा रही हैं।

बहरहाल मामला यात्रा की तैयारियों का हो और उस पर राजनीति न हो ये तो मुश्किल है। सो इस बहस में कांग्रेस भी कूद पड़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा है कि इस बार यात्राओं की तैयारी के लिये त्रिवेंद्र सरकार ने:

  • यात्रा शुरू होने से पहले बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति भंग कर दी
  • हवाई सेवाओॆं के लिये दिया गया टेंडर रद्द कर दिया।
  • धाम में खाने की थालियां महंगी कर दी
  • केदारनाथ में वैकल्पिक मार्ग बनाने के लिये पैसे रोक दिये

रावत का आरोप है कि सरकार ने यात्रा की तैयारियों के नाम पर महज कांग्रेस सरकार के किये कामों को रोका है। बहरहाल उम्मीद यही है कि इन सभी आरोप प्रत्यारोपों के बीच चारधाम यात्रा के लिये पहुंच रहे लाखों श्रद्धालुओं के लिये आने वाले दिन सुखद और सुगम यात्रा के होंगे।

अब चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ावों पर दिखेंगे एलईडी डिसप्ले

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चारधाम यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ावों पर एलईडी डिसप्ले बोर्ड लगाये जायेंगे। इनके माध्यम से यात्रियों, पर्यटकों को मौसम, सड़क बंद होने, क्या करे, क्या न करें, बुनियादी सुविधाओं आदि की जानकारी दी जायेगी। अभी एसएमएस व अन्य माध्यमों से जानकारी दी जा रही है। आपको बतादें कि चारधाम यात्रा के दौरान होने वाले प्राकृतिक रुकावटों जैसे की मौसम खराब होना,बारिश आदि पर नजर रखने के लिए और यात्रियों की सुविधा के लिए एलईडी डिसप्ले स्क्रीन लगाए जाऐंगे।

गौरतलब है कि यात्रा सीजन के दौरान होने वाले सड़क दुर्घटनाओं को ध्यान में रखकर इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा जिससे यात्रा करने वाले यात्रियों को मौसम और सड़क के बारे में जानकारी मिल सकें और आने वाली परेशानी से निपटने के उपाय भी पता चल सकें।

मुख्य सचिव एस.रामास्वामी ने सचिवालय में भारतीय मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की।मुलाकात में उन्हें बताया गया कि मसूरी और सुरकंडा देवी में एक्स बैंड डॉप्लर राडार स्थापित करने के लिए जगह का निरीक्षण कर लिया गया हैं। नैनीताल और पिथौरागढ़ में भी जगह फाइनल कर लिये गये हैं और भरोसा दिलाया कि अगले चरण में काम्पैक्ट माइक्रो रेन राडार लगाये जायेंगे।

बैठक में बताया गया कि चारधाम यात्रा मार्ग पर क्षेत्रफल के हिसाब प्रति घंटे मौसम का अनुमान जारी किया जा रहा है। तय किया गया कि यह जानकारी पुलिस, एसडीआरएफ, पर्यटन विभाग को भी दी जायेगी। आटोमेटेड वेदर स्टेशन स्थापित होने के बारे में मौसम विभाग ने टेक्निकल सपोर्ट देने का आश्वासन दिया। चार अतिरिक्त सचल आटोमेटेड वेदर स्टेशन भी स्थापित किये जोयेंगे।

बैठक में बताया गया कि भारतीय मौसम विभाग के विशेषज्ञ उत्तराखंड के विभागीय अधिकारियों को वर्कशाप के माध्यम से मौसम विभाग अनुमान के क्रियान्वयन के बारे में जानकारी देंगे। बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन अमित सिंह नेगी, उप महानिदेशक भारतीय मौसम विभाग डॉ देवेन्द्र प्रधान, यूएआईडी के प्रमुख के.सी.साई कृष्णन, निदेशक मौसम केन्द्र देहरादून डॉ विक्रम सिंह, अधिशासी निदेशक डीएमएमसी डॉ पीयूष रौंतेला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सरकारी उदासीनता के चलते फल-फूल रहा है अवैध राफ्टिंग का कारोबार

विश्व के नक़्शे पर ऋषिकेश की व्हाइट रिवर राफ्टिंग ने अपना विशेष स्थान बनाया है। लेकिन गंगा में हो रही अवैध राफ्टिंग अब इस उद्योग के लिए खतरा बनती जा रही है। आए दिन होने वाली दुर्घटना के मद्देनज़र उत्तराखंड शासन एक बार फिर हरकत में आ गया है और टिहरी डिएम सोनिका ने कहा कि बीते दिनों राफ्टिंग के दौरान हुई मौत पर कड़े से कड़ा रुख अपनाया जाएगा और यकीन दिलाती हूं की आने वाले दिनों में सभी अवैध राफ्टिंग कंपनियों को हटा कर सभी नियमों को सख्ती के साथ मानने के निर्देश दिए जाऐगें ताकि यहां आने वाले लोगों की जान ना जाएं’। ‘गंगा वैली मैनेजमेंट कमेटी’ भी उनके खिलाफ एक्शन लेगी जिन्होंने नियमों के साथ छेड़छाड़ किया और ऱाफ्ट में कैपेसिटी से ज्यादा लोगों को बिठाया। उत्तराखंड टूरिज्म डवलेपमेंट बोर्ड के एडवेंचर टूरिज्म इंर्चाज प्रदीप नेगी ने बताया कि अवैध राफ्ट आपरेटरों को धरा जाएगा और नियमों का पालन ना करने वालों को भी सजा दी जाएगी।

गंगा में बहती रंग बिरंगी राफ्टें देखने में हर किसी का मन मोह लेती है और ऋषिकेश आने वाला हर पर्यटक रिवर राफ्टिंग करने के लिए लगातार बड़ी संख्या में देश और विदेश से राफ्टिंग कंपनियों के पास पहुँचता है  बिना ये जाने की उसकी जान कितनी सुरक्षित है। वो एक विश्वास के साथ रोमांच के इस खेल में उतर जाता है। वास्तविकता में तो ऊपर से सब कुछ सामान्य सा लगता है लेकिन वीकेंड पर पर्यटकों की भीड़ अवैध और इल्लीगल राफ्टिंग को बढ़ावा देती है।

जरा से मुनाफे की आड़ में  एक राफ्ट मे लाइसेंस वाले संचालक पर्यटकों की जान की परवा न करते हुए अनट्रेंड गाइडों के सहारे 10-10 राफ्टों को गंगा में उतार देते है जिसपर प्रशासन कोई कार्यवाही नही कर पाता। राफ्टिंग के रोमांच का मजा लेने देश विदेश से आने वाला पर्यटक राफ्टिंग संचालकों की हाथ की कठपुतली बन जाता है। राफ्टिंग गाइड को सरकार की ओर से ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट मिला है या नही और राफ्टिंग इक्यूपमेंट सेफ्टी मानकों में खरे उत्तर रहे है या नही, उसे तो बस हर कीमत पर गंगा में राफ्टिंग का मजा लेना होता है।  वीकेंड पर बड़ी संख्या में यहा पर्यटक पहुचते है जिससे राफ्टिंग संचालक सभी नियम ताक पर रख कर थोड़े पैसे के लालच में राफ्टो को ओवर लोड करना शुरू कर देते है। रैपिड पर संतुलन बिगड़ने से ये ओवर लोड राफ्ट पलट जाती है जिसमे सवार पर्यटक उतेजना और डूबने के डर से जान गंवा बैठता है।

 पिछले एक माह में गंगा में डूबने से 6 की मौत आंकड़ों पर एक नजर-

  • 13 मई :-    गंगा में डूबने से सुभाष( 34 )निवासी दिल्ली की मौत
  • 12 मई :-    मुनि की रेती में धर्मपाल भंडारी (26) निवासी शिवपुरी की गंगा में डूबने से मौत
  • 7 मई :-      बैराज रोड क्षेत्र में गंगा में डूबने से बलवंत बिष्ट बिष्ट(30) निवासी मुरादाबाद की मौत
  • 4 मई :-      शिवपुरी में गंगा में नहाते समय डूबने से हरीश नौटियाल (25) निवासी टिहरी गढ़वाल की मौत
  • 23 अप्रैल:-  मुनि की रेती में गंगा में डूबने से वीरेंद्र (42) निवासी यमकेश्वर पौड़ी की मौत
  • 30 अप्रैल :-  शिवपुरी क्षेत्र में डूबने से नीरज (26) निवासी गुरुग्राम फरीदाबाद की मौत

मछली पालन बना पहाड़ में आजीविका का साधन

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भले ही पहले पहाड़ में मछली पालन आजीविका का साधन नहीं रहा हो, मगर अब धीरे धीरे शासन व मत्स्य विभाग के प्रयास रंग लाने लगे हैं। मत्स्य पालन योजना के तहत पिछले कुछ सालों से कृषकों को प्रोत्साहित करने का काम चल रहा है। चंद साल पूर्व गिने-चुने किसानों ने मत्स्य पालन को रोजगार का साधन बनाना आरंभ किया। अब कुमाऊं क्षेत्र के अल्मोडा जिले में बड़ी संख्या में ग्रामीण मत्स्य पालन का रोजगार करने लगे हैं। जिनकी संख्या साल दर साल बढ़ते जा रही है। अकेले अल्मोड़ा जिले में ही मत्स्य पालन से जुड़े किसानों की संख्या करीब डेढ़ सौ पार कर चुकी है।
इसी बार जिले के विभिन्न ब्लाकों में इन किसानों को तीन लाख मत्स्य बीजों की आपूर्ति मत्स्य विभाग कर रहा है। यह आपूर्ति इसी बीच हुई है। जो किसानों के निजी तालाबों में हुई है। इन मत्स्य बीजों में ग्रास, कामन, सिलवर प्रजाति के मत्स्य बीज शामिल हैं। मत्स्य पालन व्यवसाय बढ़ने से किसान काफी मुनाफा कमाएंगे। निजी तालाबों के अतिरिक्त कुछ स्थानीय नदियों में भी मत्स्य बीज डाले गए हैं। मत्स्य संरक्षण एवं संव‌र्द्धन के उद्देश्य से विभाग द्वारा नदियों, जलाशयों व झीलों में डायनामाइट व विषैले पदाथों का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की जा रही है और किसानों को मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

जिले में मत्स्य बीज आपूर्ति ताड़ीखेत – 18,000, द्वाराहाट – 62,000, भिकियासैंण- 10,000, चौखुटिया – 91,000, सल्ट – 19,000 है  रितेश चंद्र, सहायक निदेशक मत्स्य ने बताया कि मतस्य पालन को ग्रामीणों की आय का मुख्य जरिया बनाने का लक्ष्य है। जिले में इस कार्य को बढ़ाने के पूरे प्रयास चल रहे हैं, ताकि ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करने में मत्स्य पालन रोजगार प्रमुख भूमिका निभा सके।

फूड प्वाजनिंग से 70 लोग बीमार

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अल्मोडा, द्वाराहाट, विकासखंड के मल्ली मिरई ग्राम पंचायत के तोक डाना मिरई में बराती-घराती फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आ गए। सभी ने विवाह की रस्म के बीच मिठाई खाई, बाद में भोजन किया। कुछ ही समय बाद सिर चकराने के साथ ही उनका पेट चलने लगा।

एकाध बच्चों को खून की उल्टी आने से विवाह समारोह में अफरातफरी मच गई। देर सायं तक 70 बराती-घरातियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। हालत गंभीर देख 36 लोगों को भर्ती कर लिया गया। निदेशक स्वास्थ्य (कुमाऊं) डॉ. एलएम उप्रेती ने मुख्य चिकित्साधिकारी को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

गगास घाटी स्थित, ऐराड़ी गांव के कुंदन सिंह के पुत्र प्रकाश सिंह की बरात गुरुवार को उमेद सिंह के यहां गई थी। दोपहर बाद विवाह की रस्म के दौरान मुंह मीठा कराने के लिए मिठाई दी गई। इसके बाद सभी के लिए पंडाल में भोजन लगा। कुछ ही देर बाद तमाम बरातियों को चक्कर आने लगे। देखते ही देखते उल्टी-दस्त शुरू हो गए। इससे हडकंप मच गया।

ग्रामीण बीमार लोगों को लेकर सीएचसी पहुंचे। हालत नाजुक देखते हुए 36 लोग भर्ती कर लिए गए। देर सायं तक उल्टी-दस्त का शिकार लोगों का सीएचसी पहुंचना जारी था और यह संख्या 70 पहुंच गई जिनमें 20 घराती भी शामिल थे। भोजन के तुरंत बाद जो बराती ऐराड़ी के लिए रवाना हो गए थे, उनकी भी तबियत बिगड़ने पर रानीखेत नागरिक चिकित्सालय ले जाने की चर्चा है। चिकित्साधिकारी डॉ. वीपी सिंह के अनुसार विषाक्त मिठाई के सेवन से ही बराती फूड प्वायजनिंग की चपेट में आए हैं। प्रभारी थानाध्यक्ष दरबान सिंह ने सीएचसी में भर्ती बरातियों के बयान लिए।