Page 770

केदारनाथ में यात्रियों को झेलनी पड़ रही खाने और रहने की किल्लत

0

केदारनाथ में यात्रियों की संख्या बढ़ने से धीरे-धीरे व्यवस्थाएं पटरी से उतरने लगी हैं। धाम में रसोई गैस, खाद्यान्न व सब्जियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में यात्रियों को भोजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बावजूद इसके गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) पर्याप्त मात्रा राशन उपलब्ध होने का दावा कर रहा है।

केदारनाथ धाम पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या अब प्रतिदिन 12 हजार के आसपास हो गई है। इसके अलावा धाम में प्रशासन, पुलिस, अन्य विभागों के कर्मचारी, स्थानीय व्यापारी व तीर्थ पुरोहितों को मिलाकर 15 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। जबकि, व्यवस्थाएं यात्रियों की भीड़ के आगे लगातार सिमटती जा रही हैं।

केदार सभा के अध्यक्ष एवं व्यापारी विनोद शुक्ला का कहना है कि केदारनाथ में राशन के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी पैदा हो गई है। सरकार ने इस बार भी राशन की कोई नई दुकान नहीं खोली, जिससे स्थानीय व्यापारियों के सामने दिक्कतें पेश आ रही हैं।

राशन की जो दुकान खुली भी थी, यात्रियों की भीड़ के सामने वह भी फीकी पड़ गई। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है और उन्हें भोजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

व्यापार संघ गौरीकुंड के अध्यक्ष महेश बगवाड़ी ने भी प्रशासन से यात्रियों की भीड़ को देखते हुए यात्रा मार्ग पर तत्काल राशन उपलब्ध कराने को कहा है। उधर, जीएमवीएन का दावा है कि उसके पास पर्याप्त राशन उपलब्ध है, लेकिन निगम अधिक से अधिक ढाई से तीन हजार लोगों को ही खाना खिला सकता है। जबकि, केदारनाथ में लगभग आठ हजार यात्री रोजाना भोजन कर रहे हैं।

  • इस बार सरकार ने नहीं भेजा राशन

आपदा से पूर्व सरकार यात्रा मार्ग पर खाद्यान्न उपलब्ध कराती थी। साथ ही व्यापारियों के लिए अलग से यात्रा कोटा भी रखा जाता था। इसमें मिट्टी तेल भी शामिल था। लेकिन, आपदा के बाद यह व्यवस्था ठप पड़ गई। इस बार केदारपुरी समेत यात्रा पड़ावों पर स्थानीय लोग बड़ी संख्या में दुकानें संचालित कर रहे हैं, लेकिन उन्हें राशन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। ऐसे में यात्रा बढऩे पर समस्या गहराने लगी है।

  • लगातार रखी जा रही नजर 

रुद्रप्रयाग के जिला पूर्ति अधिकारी किशोरी लाल के मुताबिक सरकारी राशन महंगा पड़ने से राशन यात्रा मार्गों पर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। केदारनाथ व अन्य पड़ावों में राशन की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वहां स्थानीय स्तर पर भी राशन की दुकानें खुली हैं।

  • पर्याप्त राशन का दावा 

जीएमवीएन के क्षेत्रीय अधिकारी डीएस नेगी के अनुसार गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के पास पर्याप्त मात्रा में राशन उपलब्ध है। प्रतिदिन ढाई हजार से अधिक यात्रियों को निगम भोजन करा रहा है।

वहीं केदारनाथ क्षेत्र के विधायक मनोज रावत यात्रा व्यवस्था का जायजा लेने,रात के 2 बजे गौरीकुण्ड पहुँचे। उन्हें मार्ग में भारी अव्यवस्था दिखी। यात्री ठन्ड व बारिश में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर, घोड़े खच्चर प्रीपेड काउन्टर में भारी अनियमितताएं मौजूद।इसकी वजह से यात्रीयों को भारी परेशानी उठानी पड रही है । साथ ही रास्तो में प्’ लाईट नहीं, पशु डॉक्टर नहीं, जिससे स्थानीय लोगों को हो रही परेशानी ।मनोज रावत ने कहा कि”सरकार डबल ईन्जन की उपलब्धि प्रदेश में दारू बेचने तक ही सीमित रह गयी है”।

गैंरसैण के परफेक्ट राजधानी बनने तक नहीं होगा गैंरसैण में कोई सत्र

0

देहरादून में प्रेस वार्ता करते हुए अजय भट्ट ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, कांग्रेस की मंशा गैरसैंण को राजधानी बनाने में नहीं थी बल्कि गैरसैंण प्रेम कांग्रेस का ढ़ोंग था। कांग्रेस गैरसैंण को सिर्फ चुनाव में कैश करना चाहती थी।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि जब तक गैरसैंण परफैक्ट राजधानी के रूप में विकसित नहीं हो जाती तब तक गैरसैंण मे सरकार विधानसभा सत्र नहीं करेगी।

वहीं भट्ट ने कहा कि, कांग्रेस सरकार ने गैरसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन करा कर सिर्फ पैसे का दुरुपयोग किया जो कि राज्यहित में ठीक नहीं है।

बहरहाल असल बात ये है कि जो लोग अब गैरसैंण को परफैक्ट राजधानी बनने के बाद ही सत्र के आयोजन की बात कर रहे हैं वो आंदोलनकारी नेता क्यों उन नारों को भूल गए हैं जो उन्होंने अलग राज्य आंदोलन की लड़ाई में लगाए थे। “कोदा झंगोरा खांएगे उत्तराखंड बनाएंगे ”

सवाल ये भी है कि गैरसैंण को परफैक्ट राजधानी बनने तक कोई सत्र आयोजित न करने की नसीहत देने वाले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, अपनी सरकार को ये सलाह भी दे पांएगे कि जब तक राजधानी पक्की तय नहीं हो जाती तब तक देहरादून में राजधानी के नाम पर कोई पैसा नहीं बहाया जाएगा।

झिलमिल कंजर्वेशन रिजर्व के बारहसिंघों पर लगेंगे रेडियो कॉलर

0

केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने उत्तराखंड में बारहसिंघों (स्वैंप डीयर) के एकमात्र वासस्थल झिलमिल कंजर्वेशन रिजर्व में बारहसिंघों पर रेडियो कॉलर लगाने की इजाजत दे दी है। प्रथम चरण में चार बारहसिंघों पर ये कॉलर लगाए जाएंगे, जिनके जरिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के वैज्ञानिक इनके आचार-व्यवहार, माइग्रेशन, आनुवांशिकी, बीमारी समेत अन्य पहलुओं पर अध्ययन करेगें। इसमें सामने आने वाले नतीजों के आधार पर बारहसिंघों के संरक्षण को न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि उत्‍त प्रदेश की सीमा में भी प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

हरिद्वार वन प्रभाग की चिड़ियापुर रेंज में गंगा नदी के किनारे 37.84 वर्ग किमी में फैला है झिलझिल कंजर्वेशन रिजर्व। राज्य में सिर्फ इसी दलदली क्षेत्र में पाए जाते हैं बारहसिंघे। यहां इनकी संख्या 320 के आसपास है, लेकिन मानवीय दखल से इनके स्वछंद विचरण पर भी असर पड़ा है। यही कारण भी है कि झिलमिल से निकलकर ये उत्तर प्रदेश की सीमा तक चले जा रहे हैं। जाहिर है, इससे उनके लिए खतरा भी पैदा हो गया है।

ऐसे में वन महकमे ने भारतीय वन्यजीव संस्थान से इनके वासस्थल, व्यवहार, माइग्रेशन आदि के कारणों की पड़ताल का निर्णय लिया। प्रमुख वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डीवीएस खाती के मुताबिक इस सिलसिले में बारहसिंघों पर रेडियो कॉलर लगाने के लिए विभाग के प्रस्ताव को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने चार बारहसिंघों पर रेडियो कॉलर लगाने की मंजूरी दे दी है। अगले माह की शुरुआत में इन्हें लगाकर वन्यजीव संस्थान अध्ययन शुरू कर देगा। जरूरत पड़ने पर अगले चरण में अन्य बारहसिंघों पर भी रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति के लिए आवेदन किया जाएगा।

जौलासाल से मिट चुके हैं बारहसिंघेः एक दौर में उत्तराखंड में जौलासाल (तराई पूर्वी वन प्रभाग) में भी बारहसिंघों का बसेरा था। जौलासाल में इनकी बहुलता को देखते इसे बाकायदा अभयारण्य तक का दर्जा दिया गया। 60 के दशक में यहां बसागत कराने के साथ ही एग्जॉटिक फॉरेस्ट्री (दूसरे देशों की प्रजातियों के पौधरोपण) के तहत जौलासाल के दलदली क्षेत्र व घास के मैदानों में पौधरोपण हुआ। नतीजतन, धीरे- धीरे बारहसिंघों का वासस्थल खत्म होने लगा और इसी के साथ जौलासाल में ये इतिहास के पन्नों में सिमट गए।

रामनगर में प्रेमियों की हुई पिटाई

0

रामनगर के गिरिजा देवी मंदिर गये समुदाय विशेष के युवक युवतियों स्थानीय लोगों ने जमकर पीटा। परिसर क्षेत्र में अशलील हरकत करने का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने युवक युवतियों पर जमकर हाथ भी साफ किया। बजाय पुलिस के हवाले करने के स्थानीय लोगों ने पुछताछ शुरु कर दी और जिसका मन आया हाथ साफ करता नजर आया। कानून व्यवस्था की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए जहां स्थानीय लोगों ने युवक युवतियों की पिटाई की वहीं पुलिस को पुरे मामले की जानकारी ना होना बताया जा रहा है। वहीं वायरल विडियो में पुलिस साफ देखी जा सकती है,  जिसके सामने ही लोग पीटाई कर रहे हैं।

दरअसल गिरिजा देवी मंदिर क्षेत्र में अश्लील हरकत करते तीन युवक-युवतियों को लोगों ने पकड़ लिया। युवकों की जमकर धुनाई लगाई। दोबारा मंदिर न आने व माफी मांगने के बाद छोड़ दिया गया। हालांकि माफी मांगने वाला वीडियो लोगों ने व्हाटसएप पर वायरल कर दिया।

काशीपुर निवासी तीन युवतियां अपने दोस्तों के साथ गिरिजा देवी मंदिर आई थी। इस दौरान युवक-युवतियों से आपत्तिजनक हरकतें करने लगे। यह देखकर लोगों का पारा चढ़ गया। उन्होंने आसपास के लोगों को जानकारी दी। कुछ ही देर में मौके पर पहुंचकर युवकों को पकड़ लिया। गिरिजा क्षेत्र में अश्लील हरकत करने से नाराज लोगों ने युवकों पर जमकर हाथ साफ किए। इसके बाद युवतियों को भी खरीखोटी सुनाई। उन्हें पकड़कर मंदिर समिति के कार्यालय लाया गया। जहां लोगों ने उनसे काफी देर तक पूछताछ की। युवक लोगों से माफी मांगते रहे। युवक व युवतियों ने दोबारा गिरिजा नहीं आने की बात कही। आवश्यक चेतावनी देने के बाद लोगों ने उन्हें छोड़ दिया। इस मामले की जानकारी गिरिजा देवी पुलिस चौकी को नहीं दी गई।

महाभारत का मैदान बना अस्पताल

0

काशीपुर के अस्पताल में उस समय माहौल महाभारत के मैदान जैसा हो गया जब वहां मौजूद दो पक्षों के लोगों में हाथापाई शुरू हो गई।दोनों पक्षों के विवाद का मामला सरकारी अस्पताल में खूनी संघर्ष में बदल गया।जहां दोनों पक्ष पहले ही चोटिल होकर इलाज के लिए पहुंचे थे वहीं दोनों पक्षों में अस्पताल में विवाद शुरु हो गया। जिसके चलते दोनों पक्ष एक दूसरे को बुरी तरह से पीटने लगे। किसी तरह से अस्पताल के कर्मचारियों ने दोनों पक्षों को अलग किया और दोनों को ही इलाज के लिए दूसरी जगह भेज दिया।

वहीं घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को खाली हाथ ही लौटना पडा। आप देख सकते हैं अस्पताल में दोनों पक्षों के बीच हुई हाथापाई की एक्सक्लूसिव तस्वीरें। बताया जा रहा है कि दोनों ही पक्षों में पहले विवाद हो गया था जिसमें दो लोग गम्भीर रुप से घायल हो गये थे। दोनों पक्ष इलाज के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचे मगर दोनों के समर्थक आपस में भीड़ गये।

दोनों पक्षों के बीच हुई हाथापाई का एक्सक्लूसिव विडियोः

आखिर क्यों मांग रहा यह परिवार इच्छा मृत्यु??

0

पिछले दो साल से दर-बदर की ठोकरे खा रहीं देहरादून निवासी बनिता सिंह केवल एक ही जवाब चाहती हैं।सरकार से भी और भारतीय नौसेना से भी। आखिर क्या हुआ कि उनके पति की मौत अचानक हो गई और उन्हें खबर भी नहीं दी गई? इस सवाल ने बनिता और उनके दोनों बच्चों की रातों की नींद उड़ा दी हैं।

स्वर्गीय रणवीर सिंह

उस एक फोन ने उजाड़ दी बनिता की जिंदगी

बनीता की शादी लगभग 17 साल पहले नौसेना में तैनात अधिकारी रणवीर सिंह से हुई थी। शादी के बाद जीवन अच्छा खासा और खुशी से चल रहा था। अपने काम को लेकर रणवीर अक्सर बाहर जाया करते थे। ऐसे ही एक सफर पर रणवीर साल 2015 के जुलाई महीने में निकले थे और कभी वापस नहीं आए। सफर 45 दिनों का था। लिहाजा परिवार ने भी सोचा कि वो जल्द वापस आ जायेंगे लेकिन 40 दिन बाद अचानक एक फोन ने बनीता की जिंदगी ही बदल दी।

मॉरिशियस में हुई पति रणवीर सिंह की मौत
फोन पर ये कहा गया था कि मॉरिशियस में अचानक उनके पति की तबीयत बिगड़ गई है और उनको अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। नौसेना ने फौरन बनीता को मॉरिशियस भेजने की व्यवस्था की और वो जैसे ही मॉरिशियस पहुंची तो मालूम हुआ कि चार दिन पहले ही उनके पति रणवीर की मौत हो चुकी थी। उनके पति की मौत की खबर किसी ने भी उनको नहीं दी थी।बनीता बताती हैं कि ना केवल उनसे इस बात को छिपाया गया बल्कि उनके पति का पोस्टमार्टम भी रुकवाया गया और उनके पति की लाश को अकेले मॉरिशियस में छोड़ कर जहाज को उसी समय वापिस बम्बई बुला लिया गया।

पति की मौत पर पूछे सवाल का नहीं मिला जवाब

मॉरिशियस  से 4  दिन  बाद  बनिता अकेली अपने पति के लाश को भारत लेकर आई और तबसे आज तक वह अपने पति के मौत का कारण जानने के लिए दर दर भटक रही है। लेकिन उनके सवालों पर नेवी कोई  भी काम करने  के लिए तैयार  नहीं  है।बनिता ने बताया कि बोर्ड आफ ईन्कव्यायरी, पोस्टमार्टम,मौत की वजह और डैथ सार्टीफिकेट हमें कुछ नही दिया गया और हमें  नहीं  पता की मेरे  पति  की मौत कैसे  हुई है। बनीता पिछले दो साल से यह जानने की कोशिश कर रहीं कि आखिरकार घर से सही सलामत निकले उनके पति की मौत अचानक कैसे हो गयी। इसी बात को जानने के लिए वो दिल्ली में धरने पर बैठ चुकी हैं और रक्षा मंत्री से भी मिल चुकी हैं।लेकिन उन्हें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

पहले पति ने की देश की लड़ाई अब इंसाफ के लिए लड़ रही हैं नौसेना अधिकारी की पत्नी
बनीता कहती हैं कि वो तब तक शांत नहीं बैठेंगी जबतक उनको ठोस जवाब नहीं मिल जाएगा। बात यहीं पर खत्म नहीं हुई है बविता जवाब मांगने चिप नेवी भी गई लेकिन वहां उनको दिमागी रुप से बीमार बोलकर अस्पताल जाने को कहा गया। बनिता कहती हैं कि इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े। अगर सरकार उन्हें इंसाफ नहीं दे सकती है तो परिवार के साथ वो इच्छामृत्यु ही दे दी जाये।

ed501ecf-7cd9-47a8-a711-36a6ee8ff16f

रणवीर सिंह के बच्चे भी मांग रहें अपने पापा की मौत के कारण का जवाब
पिता की मौत के बाद रणवीर के बच्चे भी सरकार से अपने पिता की मौत का कारण पूछ रहे हैं। रणवीर की बेटी अक्षिता कहती हैं कि मौत से एक दिन पहले उनसे पापा की बात हुई थी और उन्होंने कहा था कि मारिशियस अच्छी जगह है और वो जल्द घर वापसी के लिए आने वाले थे।अक्षिता अपने पापा की इच्छा अनुसार डॉक्टर बनना चाहती हैं। वहीं, रणवीर के बेटे का कहना है कि पहले तो वो भी अपने पापा की तरह डिफेंस में जाना चाहते थे लेकिन अब वो किसी भी तरह डिफेंस का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं।

रणवीर की मौत के बाद से अबतक उनका परिवार नौसेना के दिए हुए मकान में रहते था लेकिन आने वाले जून महीने में उन्हें वो मकान भी खाली करना है। ऐसे में उनके सामने रहने का संकट भी आ गया है।

देहरादून स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह शुरू

0

देहरादून से सफर करने वाले और दिल्ली से दून आने वाले टूरिस्ट के लिए एक खुशखबरी है। शनिवार से देहरादून रेलवे स्टेशन से ट्रेनों की सामान्य रूप से आवाजाही शुरू हो गई। इसकी जानकारी देते हुए स्टेशन सुप्रिटेंडेंट करतार सिंह ने बताया कि ”लगभग 36 दिनों के बाद एक बार फिर देहरादून से ट्रेनों की आवाजाही शुरु हो गई है। रेल ट्रैक के मरम्मत कार्य की वजह से सभी देहरादून आने वाली ट्रेनों को हरिद्वार पर डायवर्ट कर दिया गया था।प्लेटफार्म नंबर 3 के लगभग एक महीने के रेनोवेशन के बाद अब सभी 16 ट्रेन यानि की 8 ट्रेन अप एंड डाउन करेंगी।यह ट्रेनें अपने शेड्यूल टाईम से देहरादून रेलवे स्टेशन से चलने लगी है। प्लेटफार्म नंबर तीन अब पूरी तरह से ठीक है और अब ट्रेन की आवाजाही सुचारु रुप से शुरु हो गई है”।

लगभग 36 दिनों से दून स्टेशन के रेलवे ट्रेक की मरम्मत के चलते बहुत सी ट्रेनों को केवल हरिद्वार स्टेशन तक आने की परमिशन थी। 17 अप्रैल से सभी ट्रेन जो देहरादून से चलाई जाती है, उनका आपरेशन हरिद्वार शिफ्ट कर दिय गया था ।

एनएच घोटाले पर कांग्रेस घेरेगी भाजपा सरकार को

0

हल्द्वानी के एनएच-74 घोटाले में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के पत्र ने कांग्रेस को मुद्दा थमा दिया है। अब कांग्रेसी इस मामले में सरकार से लेकर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेसियों ने कहा कि गडकरी के बयान से सीएम की जांच की घोषणा व भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस दोनों की पोल खुल चुकी है। गुरुवार को कांग्रेस नेता हेमंत साहू के नेतृत्व में कार्यकर्ता बुद्ध पार्क में एकत्र हुए और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी व सीएम त्रिवेंद्र रावत के पुतले का दहन किया।

राज्य व केंद्र की नीतियों पर सवाल साधते हुए हेमंत ने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त का नारा देने वाले ही भ्रष्टाचारियों को बचाने में जुटे हैं। करीब 500 करोड़ के एनएच घोटाले पर अफसर ही नहीं कई सफेदपोश भी फंस रहे हैं। इसी वजह से भाजपा यूटर्न ले रही है।

गौरतलब है कि एनएच घोटाले के सीबाआई जांच पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह को एक पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग पर पीछे हटने की बात कही थी। इसके चलते राज्य में घोटालों में महाघोटाला सिद्ध हो चुके एनएच घोटाले में बीजेपी की किरकिरी हो रही है।

कबाड़ के गोदाम में आग

0

किच्छा रोड,रुद्रपुर स्थित द मेडिसिटी हॉस्पिटल के पीछे बने कबाड़ के गोदाम में भीषण आग गई। आग से लाखों का कबाड़ जलकर राख हो गया। अग्निकांड में गोदाम में रखा मैजिक वाहन समेत कुछ सिलेंडर और कोलतार के ड्रम भी जल गए। दिन का समय होने से जानमाल का नुकसान होने से बच गया। आग लगते ही घटनास्थल पर भगदड़ मच गई। आसपास रह रहे लोग अपने घरों को छोड़ सड़क पर आ गए। हॉस्पिटल के भूतल पर काम कर रहे मजदूर भी जान बचाकर भाग गए। सूचना पाकर एक के बाद एक चार दमकल वाहन घटनास्थल पर पहुंचे। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग के दो कारणों पर जांच की जा रही है।

मेडिसिटी हॉस्पिटल के पीछे मनोज गुप्ता ने अपने मकान के पीछे गोदाम किराए पर दे रखे हैं। यहां मो. सरीफ, मो. फईम व मो. शाहिद के कबाड़ के गोदाम हैं। शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े ग्यारह बजे किच्छा रोड राष्ट्रीय राजमार्ग 74 स्थित मेडिसिटी हॉस्पिटल के पीछे बने कबाड़ के गोदाम में आग लग गई। समय रहते आसपास रह रहे लोग और वहां काम कर रहे मजदूर घटनास्थल से भाग गए। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी मौके पर पहुंच गई। आग की लपटें इतनी भीषण थी कि आग पर काबू पाने के लिए एक वाहन कम पड़ गया। इसके बाद तीन अन्य दमकल वाहनों को घटना स्थल पर बुलाया गया। इससे पूर्व मेडिसिटी हॉस्पिटल की छत से भी गोदाम में पानी डाला गया। साथ ही मजदूरों ने भी आग बुझाने की कोशिश की लेकिन आग बड़ी तेजी से फैल गई।

गोदाम में रखे गैस सिलेंडर, मैजिक वाहन का फ्यूल टैंक और कोलतार के ड्रम बारी-बारी फटने लगे इससे आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। मेडिसिटी हॉस्पिटल की सुरक्षा दीवार से हॉस्पिटल तक आग नहीं पहुंच पायी। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया। अग्निकांड के समय हॉस्पिटल की ओपीडी में काफी संख्या में मरीज और हॉस्पिटल स्टाफ मौजूद था। साथ ही बेसमेंट में मजदूर भी काम कर रहे थे। आग पर काबू पाने में दमकल कर्मियों के पसीने छूट गए, भीषण आग पर काबू पाने के लिए चार दमकल वाहन मौके पर बुलाने पड़े। आग लगने का कारण गोदाम में गैस कटर का इस्तेमाल अथवा सुलगती बीड़ी को बताया जा रहा है।

2.3 करोड़ रुपये वाले इस फोन की होगी हैलिकॉप्टर से डिलिवरी

0

लग़्जरी फोन ब्रांड वर्टू ने एक नया लिमिटेड एडिशन फ़ीचर फोन सिग्नेचर कोबरा पेश किया है। नए वर्टू सिग्नेचर कोबरा लिमिटेड एडिशन की कीमत जानकार आप चौंक जाएंगे। इसकी कीमत 2.47 मिलियन चीनी युआन है जो भारतीय मुद्रा में करीब 2.3 करोड़ रुपये है। इस फ़ीचर फोन को चीनी मार्केट में स्थानीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ज़रिए बेचा जाएगा।

वर्टू सिग्नेचर कोबरा को खरीदने के लिए सबसे पहले 1000 चीनी युआन (करीब 10,000 रुपये) का डाउनपेमेंट करना होगा। इसके बाद इच्छुक ग्राहकों को बाकी राशि फोन पाने से पहले देना होगा। अब जब फोन की कीमत इतनी ज्यादा है तो ग्राहकों के लिए कुछ स्पेशल भी होगा, वर्टू का यह फ़ीचर फोन ग्राहकों तक हैलीकॉप्टर के ज़रिए पहुंचाया जाएगा। कीमत को देखते हुए इसमें कुछ भी चौंकाने वाला नहीं है।

वर्टू सिग्नेचर कोबरा फ़ीचर फोन की सबसे अहम खासियत इसका डिज़ाइन है। इसे फ्रांस के ज्वैलरी ब्रांड बोशरोन द्वारा बनाया गया है। अन्य खासियतों में 439 रुबी हैं जिन्हें कोबरा के डिज़ाइन में लगाया गया है। नाम से ही साफ है कि इस फोन में कोबरा डिज़ाइन है, वो भी फ्रंट पैनल पर। कोबरा के आंखों में दो पन्ना पत्थर लगे हैं। वर्टू फोन में और भी कई रत्न लगे होंगे। डिज़ाइन के मामले में नए वर्टू सिग्नेचर कोबरा लिमिटेड दिखने में कंपनी के ही सिग्नेचर फोन से काफी मेल खाता है।

वर्टू ने जानकारी दी है कि नए सिग्नेचर कोबरा फोन के सिर्फ 8 यूनिट दुनियाभर में उपलब्ध होंगे। गिज़चाइना की रिपोर्ट के मुताबिक,नए वर्टू फोन में 388 अलग पुर्जे हैं और इसे यूनाइटेड किंगडम में एसेंबल किया गया है। जानकारी दी गई है कि इस फोन को हाथों से बनाया गया है। चीन में सिर्फ एक वर्टू सिग्नेचर कोबरा फोन उपलब्ध कराया जाएगा। अफसोस की बात यह है कि इस फ़ीचर फोन के बारे में और कोई जानकारी नहीं उपलब्ध है।