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हेमकुंड साहिब में भी बजेगा ट्रिन-ट्रिन

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अब तक संचार सुविधा से महरूम श्री हेमकुंड साहिब में एक हफ्ते के भीतर लोगों को मोबाइल सेवा का लाभ मिलने लगेगा। बीएसएनएल ने घांघरिया में टावर लगाने के लिए भूमि तलाश कर वहां तैयारियां शुरू कर दी हैं। टावर के लिए सभी सामान गोविंदघाट पहुंच चुका है।

श्री हेमकुंड साहिब व फूलों की घाटी क्षेत्र में दूरसंचार सेवा नहीं है। हेमकुंड साहिब के 19 किमी लंबे पैदल मार्ग पर गोविंदघाट से दो किमी आगे पुलना गांव तक ही मोबाइल सेवा है। इसके बाद यहां किसी प्रकार की कनेक्टिविटी नहीं है। हर साल हेमकुंड साहिब व फूलों की घाटी लाखों श्रद्धालु व पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन, संचार क्रांति के इस युग में भी वे यात्रा के दौरान दो दिन तक देश-दुनिया से कटे रहते हैं। स्थानीय लोगों व व्यापारियों की स्थिति यह है कि उनकी महीनों तक अपनों के साथ बातचीत नहीं हो पाती।

संचार सुविधा न होने के कारण 2013 की आपदा के दौरान यात्रियों के जगह-जगह फंसने से सरकार की खासी किरकिरी हुई थी। इसी को देखते हुए तब यहां संचार सेवाएं हर हाल में उपलब्ध कराए जाने की रणनीति बनी थी। लेकिन, यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। अब भारत संचार निगम घांघरिया में मोबाइल सेवा शुरू करने जा रहा है। इसके लिए भूमि का चयन भी हो चुका है। गुरुद्वारा घांघरिया में हेमकुंड यात्रा ट्रस्ट ने मोबाइल टावर लगाने को भूमि उपलब्ध कराई है। इस टावर से पुलना गांव व हेमकुंड तक छह किमी क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी मिलने लगेगी।

दूरसंचार महाप्रबंधक (श्रीनगर) मुसद्दी लाल ने बताया कि मोबाइल टावर का सामान गोविंदघाट पहुंच चुका है और उम्मीद है कि एक हफ्ते के भीतर मोबाइल सेवा शुरू हो जाएगी। उधर, गुरुद्वारा गोविंदघाट के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह का कहना है कि बीएसएनएल की सेवा हेमकुंड रूट पर 14 किमी क्षेत्र में मिलेगी। इससे यात्रियों सहित आम लोगों का भी फायदा होगा। उन्होंने यात्रियों से साथ में बीएसएनएल का सिम लाने की अपील की है।

रिलायंस ने भी लगाए थे टावः वर्ष 2006-07 में रिलायंस ने भी घांघरिया में मोबाइल टावर लगाया था। इस पर जनरेटर व बैटरियां भी लगा दी गई थीं, लेकिन टावर आज तक शुरू नहीं हो पाया। नतीजा, निजी भवन पर लगा यह टावर शो-पीस बना हुआ है।

 

राज्य में 3 दिन भारी बारिश की चेतावनी

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उत्तराखंड में रविवार से मौसम तीखे तेवर अपना सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों में राज्य में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना है। उत्तरकाशी, चमोली, रुदप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल व पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर 28 से 30 मई तक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है।

इसे देखते हुए चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। इस बीच शनिवार शाम पिथौरागढ़ तहसील के गौरीहाट क्षेत्र में बादल फटने से कई घरों में पानी घुस गया, जबकि खेत मलबे से अट गए और पेयजल लाइन व संपर्क मार्ग बह गए। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा है।

वहीं, बदरीनाथ राजमार्ग पर लामबगड़ के पास शुक्रवार देर शाम पत्थर गिरने पर प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर यात्रियों को गोविंदघाट और पांडुकेश्वर में रोक लिया था। शनिवार सुबह मार्ग खुलने पर उन्हें आगे जाने की इजाजत दी गई।

राज्य में इन दिनों गाहे-बगाहे हो रही बारिश, ओलावृष्टि व अंधड़ का सिलसिला जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक विक्रम सिंह के मुताबिक रविवार से यह और तेज होगा। ऐसे में चारधाम यात्रा मार्गों पर संवेदनशील स्थलों पर भूस्खलन व सड़क बाधित होने के अंदेशे से इनकार नहीं किया जा सकता। लिहाजा, यात्रियों के साथ ही प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। उधर, राज्य आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र के अधिशासी निदेशक डॉ.पीयूष रौतेला ने बताया कि मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर संबंधित जिलाधिकारियों को अलर्ट रहने को कहा गया है।

इस बीच, शनिवार को भी पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। पिथौरागढ़ तहसील के गौरीहाट क्षेत्र में शाम के वक्त बादल फटने से झूलाघाट मार्ग तीन जगह बाधित हो गया। जिले के मुनाकोट व कनालीछीना क्षेत्रों में एक घंटे तक ओलावृष्टि से फसलों को खासी क्षति पहुंची है।

चमोली जिले में भी कुछ स्थानों पर जोरदार बारिश हुई, जबकि जिले की ऊंची चोटियों पर दोपहर बाद हल्की बर्फ भी पड़ी। टिहरी जिले में शुक्रवार शाम हुई बारिश और अंधड़ के चलते गुल हुई डेढ़ सौ गांवों की बिजली अभी तक बहाल नहीं हो पाई है। इनमें जौनपुर ब्लाक के 100 गांव भी शामिल हैं। धनोल्टी क्षेत्र में भी पेड़ गिरने से विद्युत लाइनें अस्तव्यस्त हो गईं थीं।

 

केदारधाम के यात्रियों को ठंड से राहत देगा ये ”इलेक्ट्रानिक ब्लैंकेट”

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केदारनाथ में यात्रियों की भीड़ बढ़ने से दर्शनों को उनका इंतजार भी बढ़ता जा रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद उन्हें अपनी बारी के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। यहां तक कि बारिश होने पर भी वह इस डर से लाइन नहीं छोड़ते कि कहीं नंबर न कट जाए। ऐसे में कई यात्रियों की तबीयत भी बिगड़ रही है। इसे देखते हुए प्रशासन अब लाइन में खड़े यात्रियों को छाता उपलब्ध कराएगा। साथ ही उन यात्रियों के लिए इलेक्ट्रिक कंबल भी मंगवाए जा रहे हैं, जिनकी ठंड लगने से तबीयत नासाज हो गई हो।

जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि धाम में दर्शनों के लिए यात्रियों को लाइन में घंटों खड़ा रहना पड़ रहा है। जिससे उनकी तबीयत बिगड़ने की आशंका है। इसी को देखते हुए प्रशासन तीन हजार छाते मंगवा रहा है, जो लाइन में खड़े यात्रियों को बांटे जाएंगे। दर्शनों के बाद इन्हें वापस ले लिया जाएगा।

इसके साथ ही केदारनाथ में ठंड लगने से यात्रियों की तबीयत बिगड़ने के मामलों को देखते हुए इलेक्ट्रिक कंबल भी मंगाए जा रहे हैं। जिन यात्रियों की ठंड लगने से तबीयत बिगड़ेगी, उन्हें ये कंबल उपलब्ध कराए जायेंगे। डीएम ने बताया कि केदारनाथ मंदिर के सामने पूरे मार्ग पर सरस्वती नदी तक टिन शेड बनाने का प्रस्ताव है।

हालांकि, इसके निर्माण में अभी समय लगेगा। बताया कि यात्रा पर लगे सभी सेक्टर मजिस्ट्रेट रोजाना शाम को रिपोर्ट दे रहे हैं। यात्रियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझा जा रहा है और उनके निदान का प्रयास भी हो रहा है। बताया कि हेलीपैड पर मौजूद नोडल अधिकारी पूरी तरह हेली कंपनियों पर नजर रखे हुए हैं। प्रशासन की पूरी कोशिश है कि यात्रियों की सुविधाओं का हरसंभव ध्यान रखा जाए।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के लिये सरकार ने तय की समय सीमाऐं

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सूबे की बीजेपी सरकार ने ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन को घरातल पर लाने के लिये कमर कस ली है। इसके लिये मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को सचिवालय में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के कामों से जुड़े मसलों पर मीटिंग ली। बैठक में तय हुआ कि:

  • ऋषिकेश में प्रस्तावित रेल पुल के लिए यूपीसीएल, पिटकुल और जल संस्थान को तय समय सीमा के अंदर विद्युत और पेयजल लाइन शिफ्ट करने के निर्देश दिए। 
  • रेल पुल के फाउंडेशन कार्य के लिए जगह वन विभाग 3 दिन में खाली कर देगा और बाकी जमीन 30 दिन में खाली कर देगा। अभी वहाँ वन विभाग का फॉरेस्ट रेंज ऑफिस है। 
  • पशासनिक खर्चं के लिये कुल 5 करोड़ रुपए चमोली, पौड़ी, टिहरी और रूद्रप्रयाग जिलों में उनकी भागीदारी के लिये बाँटा जाएगा। 
  • चारों जिलों में भू-अधिग्रहण के लिए जरूरी पुनर्वास और विस्थापन नीति(Rehabilitation and Resettlement Policy) को जल्द बनाने के निर्देश दिए गए। चमोली 01 जून, पौड़ी 10 जून, रुद्रप्रयाग और टिहरी 05 जून तक ड्राफ्ट नीति तैयार कर लेंगे।
  • आंकड़ो के अनुसार चारों जनपदो में 47 गांवों में, 411 भवन रेल लाइन की जद में आएँगे। 
  • चमोली जिले में अक्टूबर तक और अन्य तीन जिलों में दिसम्बर तक मुआवजा घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। 

बैठक में ऋषिकेश-कर्ण प्रयाग प्रोजेक्ट को नैशनल प्रोजेक्ट घोषित करने के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा वो स्वयं प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस हेतु अनुरोध करेंगे। 

30 मई को नहीं मिलेंगी बाजार में दवाएं

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देश भर के दवा कारोबारियों को दवा व्यापार के लिए तय केंद्र सरकार के नए मानक रास नहीं आ रहे हैं। दवा विक्रेता केंद्र के नए कायदे कानून को अपने व्यापार की कसौटी पर परख रहे हैं। लिहाजा सरकार के नियमों का रसायन उनके धंधे के लिटमस टेस्ट में फेल हो रहा है।

ऐसे में पूरे देश के दवा विक्रेता सामूहिक विरोध जताते हुए 30 मई को अपनी दवा की दुकान बंद रखेंगे। अखिल भारतीय औषधि महासंघ के आह्वान पर उत्तराखंड औषधि महासंघ ने भी फैसले की हिमायत करते हुए बंद का ऐलान किया है। दून औषधि महासंघ के अध्यक्ष टी.एस. अग्रवाल कहना है कि होलसेल के कारोबार के लिए फार्मसिस्ट की जरूरत नहीं है लेकिन नए नियमों के मुताबिक फार्मसिस्ट को रखना जरूरी होगा।

वहीं उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि दवा की खरीद और बिक्री का रेकार्ड पोर्टल पर अपडेट किया जाए। इसके लिए कारोबारियों को स्टॉफ बढ़ाना पड़ेगा। इससे दवा व्यापारी पर कर्मचारी की पगार का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।

तय है कि अगर तीन दिनों में सरकार कोई फैसला नहीं ले पाई तो 30 मई को कई मरीजों की जान पर बन आएगी। लिहाजा जरूरत है वैकल्पिक व्यवस्था कि ताकि लोकतंत्र भी जिंदा रहे और दवा के जरूरतमंद मरीज भी।

पहाड़ों पर आफत की बारिश, 32% हुई सामान्य से ज्यादा बारिश

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मौसम विभाग ने उत्तराखंड में 29 मई से वर्षा की संभावना जताई थी और पहाड़ में मौसम का मिजाज बिगड़ गया है। इसके चलते पहाड़ों में  मार्च से अब तक करीब 32 प्रतिशत प्री माॅनसून की बारिश ज्यादा हुई है। इससे राज्य में सामान्य से अच्छे मानसून की उम्मीद बन गई है। मानसून के राज्य में 20 जून के आसपास दस्तक देने की उम्मीद है।

ये आंकड़ें पिछले साल के मुकाबले में बेहतर हैं। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में राज्य में मानसून के अच्छे होने की उम्मीद की जा सकती है। हांलाकि बे मौसम हुई इस बरसात से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। राज्यभर मे कियानों को बारिश और ओलो की वजह से काफी नुकसान उठाना पड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक राज्यभर में अब तक करीब 100 करोड़ की फसल को नुकसान पहुंचा है।

मौसम विभाग के मुताबिक अभी सूबे में आंशिक रूप से लेकर आमतौर पर बादल रहेंगे और कुछ स्थानों में हल्की से मध्यम वर्षा अथवा गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

छ: बार एवरेस्ट फतह करने वाले पहले भारतीय बने लवराज

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बीएसएफ के सहायक सेनानी लवराज धर्मशक्तू ने छठी बार एवरेस्ट फतह किया है। दुनिया की इस सबसे ऊंची चोटी पर छह बार चढ़ने वाले वह भारत के पहले पर्वतारोही हैं। वह मुनस्यारी के बौना गांव के रहने वाले हैं।पद्मश्री लवराज इस बार तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ओएनजीसी) द्वारा प्रायोजित एवरेस्ट अभियान दल में शामिल थे। उनके नेतृत्व में गए इस दल में धारचूला निवासी ओएनजीसी में इंजीनियर योगेश गब्र्याल समेत उत्तराखंड के चार पर्वतारोही थे। 

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस दल को गत 28 मार्च को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। लवराज ने फोन पर बताया कि इस दल ने शनिवार सुबह एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ने में सफलता प्राप्त की। लवराज धर्मशक्तू ने 1998 में पहली बार एवरेस्ट फतह किया था। इसके बाद बीएसएफ में जाने के बाद वर्ष 2006, 2009, 2012, 2013 और अब 27 मई 2017 को छठी बार एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की है।

लाईट,कैमरा,एक्शन हमेशा से है पहला प्यार

उत्तराखंड का कुमाऊं क्षेत्र अपनी खूबसूरती के लिए तो मशहूर है ही, साथ ही इस क्षेत्र ने छोटे पर्दे को भी कलाकारों से नवाज़ा है। ऐसे ही एक कलाकार हैं पिथौरागढ़ के पास रैतोली गांव की प्रियंका जोशी। यूं तो प्रियंका आजकल मुंबई में अपने काम में मशगूल रहती हैं, लेकिन उनका छोटा सा परिवार जिसे कहीं ना कहीं यह आशा थी कि आने वाले समय में प्रियंका सफलता की सीढ़िया चढेंगी। आगे चलकर हुआ भी कुछ ऐसा ही, प्रियंका की मां, भारती जोशी जो पेशे से अध्यापिका वो कहती हैं कि मुझे अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था कि वह स्टार बनेगी।

प्रियंका की मां कहती हैं कि मैंने अपनी बेटी के अंदर स्टेज पर काम करने वाली प्रतिभा पहले ही देख ली थी। भारती कहती हैं कि मुझे अपनी बेटी को एक्टिंग करते हुए देखाना बहुत पसंद था और एक्टिंग के दौरान उसका कांफिडेंस भी बेहतरीन होता था। मैंने उसको उड़ीसी डांस सीखने के लिए कहा और फिर उसको उसके सपने पूरे करने के लिए मुंबई भेजा, और आज उसने अपनी मेहनत से जो मुकाम हासिल किया हैं मुझे उस पर गर्व है। प्रियंका जोशी को अपनी लाईफ का पहला ब्रेक 22 साल की उम्र में मिला।

 

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अपने काम से कुछ समय निकालकर अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रियंका इस समय दिल्ली में हैं। न्यूज़पोस्ट टीम से खास बातचीत में प्रियंका ने बताया कि मैंने कभी इस क्षेत्र को चुना नहीं, मैं जानती थी मैं इसी क्षेत्र में काम करने के लिए बनी हूं। प्रियकां ने बताया कि मैं हमेशा से स्टेज को इंज्वाय करती थी चाहें वह डांस या एक्टिंग हो। प्रियंका ने उड़ीसी डांस में मास्टर डिग्री ली है और जर्नलिज्म में माॅस कम्यूनिकेशन की डिग्री है।

न्यूज़पोस्ट से बातचीत में प्रियंका ने बताया कि मैने बहुत से प्रोजेक्ट पर काम किया है जैसे कि सब चैनल में ‘डा.मधुमति आॅन ड्यूटी’, दूरदर्शन के ‘एक लक्ष्य’, लाईफ ओके के लिए ‘डर सबको लगता’ है आदि, लेकिन इन सभी रोल में से उनका हाल ही में चला वेब सीरीज़ ‘बेवड़े’ काफी अलग शो था और रोल भी बहुत अलग है। वेब सीरीज़ ले लिये नैचुरल एक्टिंग की जरुरत है और इसके टारगेट आॅडियंस भी काफी अलग हैं।

प्रियंका के लिए एक्टिंग एक लिबरेटिंग अनुभव हैं। वो कहती हैं कि एक जिंदगी में एक से ज्यादा रोल निभाना और उसको जीना अपने आप में एक बड़ा चैलेंज है।

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अपनी शादी को और साथ ही जब उन्होंने खुद को टीवी की स्क्रीन पर पहली बार देखा था, इन दोनों पलों को वह अपने कभी ना भूलने वाले क्षणों में गिनती हैं और कहती हैं कि यह दोनों पल उनके लिए खास हैं। आज अपने परिवार और अपने पति के सपोर्ट से वह अपने कैरियर में और अच्छा करने के लिए प्रेरित होती हैं। अपने घर वालों के साथ छुट्टियां मनाने के बाद वह एक बार फिर लाईट, कैमरा,एक्शन की दुनिया में जाने को बेताब हैं।

 

केदारनाथ में यात्रियों को झेलनी पड़ रही खाने और रहने की किल्लत

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केदारनाथ में यात्रियों की संख्या बढ़ने से धीरे-धीरे व्यवस्थाएं पटरी से उतरने लगी हैं। धाम में रसोई गैस, खाद्यान्न व सब्जियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में यात्रियों को भोजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बावजूद इसके गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) पर्याप्त मात्रा राशन उपलब्ध होने का दावा कर रहा है।

केदारनाथ धाम पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या अब प्रतिदिन 12 हजार के आसपास हो गई है। इसके अलावा धाम में प्रशासन, पुलिस, अन्य विभागों के कर्मचारी, स्थानीय व्यापारी व तीर्थ पुरोहितों को मिलाकर 15 हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। जबकि, व्यवस्थाएं यात्रियों की भीड़ के आगे लगातार सिमटती जा रही हैं।

केदार सभा के अध्यक्ष एवं व्यापारी विनोद शुक्ला का कहना है कि केदारनाथ में राशन के साथ ही रसोई गैस की किल्लत भी पैदा हो गई है। सरकार ने इस बार भी राशन की कोई नई दुकान नहीं खोली, जिससे स्थानीय व्यापारियों के सामने दिक्कतें पेश आ रही हैं।

राशन की जो दुकान खुली भी थी, यात्रियों की भीड़ के सामने वह भी फीकी पड़ गई। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है और उन्हें भोजन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

व्यापार संघ गौरीकुंड के अध्यक्ष महेश बगवाड़ी ने भी प्रशासन से यात्रियों की भीड़ को देखते हुए यात्रा मार्ग पर तत्काल राशन उपलब्ध कराने को कहा है। उधर, जीएमवीएन का दावा है कि उसके पास पर्याप्त राशन उपलब्ध है, लेकिन निगम अधिक से अधिक ढाई से तीन हजार लोगों को ही खाना खिला सकता है। जबकि, केदारनाथ में लगभग आठ हजार यात्री रोजाना भोजन कर रहे हैं।

  • इस बार सरकार ने नहीं भेजा राशन

आपदा से पूर्व सरकार यात्रा मार्ग पर खाद्यान्न उपलब्ध कराती थी। साथ ही व्यापारियों के लिए अलग से यात्रा कोटा भी रखा जाता था। इसमें मिट्टी तेल भी शामिल था। लेकिन, आपदा के बाद यह व्यवस्था ठप पड़ गई। इस बार केदारपुरी समेत यात्रा पड़ावों पर स्थानीय लोग बड़ी संख्या में दुकानें संचालित कर रहे हैं, लेकिन उन्हें राशन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। ऐसे में यात्रा बढऩे पर समस्या गहराने लगी है।

  • लगातार रखी जा रही नजर 

रुद्रप्रयाग के जिला पूर्ति अधिकारी किशोरी लाल के मुताबिक सरकारी राशन महंगा पड़ने से राशन यात्रा मार्गों पर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। केदारनाथ व अन्य पड़ावों में राशन की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वहां स्थानीय स्तर पर भी राशन की दुकानें खुली हैं।

  • पर्याप्त राशन का दावा 

जीएमवीएन के क्षेत्रीय अधिकारी डीएस नेगी के अनुसार गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के पास पर्याप्त मात्रा में राशन उपलब्ध है। प्रतिदिन ढाई हजार से अधिक यात्रियों को निगम भोजन करा रहा है।

वहीं केदारनाथ क्षेत्र के विधायक मनोज रावत यात्रा व्यवस्था का जायजा लेने,रात के 2 बजे गौरीकुण्ड पहुँचे। उन्हें मार्ग में भारी अव्यवस्था दिखी। यात्री ठन्ड व बारिश में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर, घोड़े खच्चर प्रीपेड काउन्टर में भारी अनियमितताएं मौजूद।इसकी वजह से यात्रीयों को भारी परेशानी उठानी पड रही है । साथ ही रास्तो में प्’ लाईट नहीं, पशु डॉक्टर नहीं, जिससे स्थानीय लोगों को हो रही परेशानी ।मनोज रावत ने कहा कि”सरकार डबल ईन्जन की उपलब्धि प्रदेश में दारू बेचने तक ही सीमित रह गयी है”।

गैंरसैण के परफेक्ट राजधानी बनने तक नहीं होगा गैंरसैण में कोई सत्र

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देहरादून में प्रेस वार्ता करते हुए अजय भट्ट ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, कांग्रेस की मंशा गैरसैंण को राजधानी बनाने में नहीं थी बल्कि गैरसैंण प्रेम कांग्रेस का ढ़ोंग था। कांग्रेस गैरसैंण को सिर्फ चुनाव में कैश करना चाहती थी।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि जब तक गैरसैंण परफैक्ट राजधानी के रूप में विकसित नहीं हो जाती तब तक गैरसैंण मे सरकार विधानसभा सत्र नहीं करेगी।

वहीं भट्ट ने कहा कि, कांग्रेस सरकार ने गैरसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन करा कर सिर्फ पैसे का दुरुपयोग किया जो कि राज्यहित में ठीक नहीं है।

बहरहाल असल बात ये है कि जो लोग अब गैरसैंण को परफैक्ट राजधानी बनने के बाद ही सत्र के आयोजन की बात कर रहे हैं वो आंदोलनकारी नेता क्यों उन नारों को भूल गए हैं जो उन्होंने अलग राज्य आंदोलन की लड़ाई में लगाए थे। “कोदा झंगोरा खांएगे उत्तराखंड बनाएंगे ”

सवाल ये भी है कि गैरसैंण को परफैक्ट राजधानी बनने तक कोई सत्र आयोजित न करने की नसीहत देने वाले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, अपनी सरकार को ये सलाह भी दे पांएगे कि जब तक राजधानी पक्की तय नहीं हो जाती तब तक देहरादून में राजधानी के नाम पर कोई पैसा नहीं बहाया जाएगा।