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लम्बे सियासी दांवपेंच के बाद 28 अधिवक्ता सरकारी

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लंबे विचार विमर्श व सियासी दांवपेंच के बाद भाजपा सरकार ने 28 अधिवक्ताओं को सरकारी अधिवक्ता नियुक्त कर दिया है। सूची में ऐसे भी अधिवक्ता हैं, जो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सरकारी अधिवक्ता नियुक्त हुए। जिनको लेकर भाजपा संगठन में नाराजगी है। माना जा रहा है कि जल्द सरकार स्टैंडिंग काउंसिल व ब्रीफ होल्डर की सूची भी जारी कर देगी। जिसको लेकर जोड़तोड़ तेज हो गई है।

भाजपा सरकार अब तक नैनीताल हाई कोर्ट में महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर की ही नियुक्ति कर सकी थी। हाल ही में सरकार द्वारा कांग्रेस कार्यकाल में नियुक्त तीन दर्जन अधिवक्ताओं को हटा दिया गया था। अपर सचिव न्याय महेश चंद्र के हस्ताक्षरों से तथा संयुक्त सचिव रितेश कुमार श्रीवास्तव की ओर से जारी सूची में 28 अधिवक्ता शामिल हैं।

सूची में वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन चंद्र पांडे, वरिष्ठ अधिवक्ता जेपी जोशी, वरिष्ठ अधिवक्ता बीडी उपाध्याय को अपर महाधिवक्ता, अधिवक्ता व भाजपा नेता बिन्देश कुमार गुप्ता, मोहन चंद्र तिवारी, ममता बिष्ट, हर्षमणि रतूड़ी, संदीप टंडन, सुभाष त्यागी, कौस्तुभानंद जोशी, अमित भट्ट, विनोद कुमार जैमिनी, पंकज पुरोहित, सुधीर कुमार चौधरी, शैलेंद्र सिंह चौहान, सुनील खेड़ा, भाजपा विधि प्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक तेज सिंह बिष्ट, नाथी सिंह पुंडीर, विनोद कुमार नौटियाल समेत कुल 16 अधिवक्ताओं को उप महाधिवक्ता, अनिल कुमार जोशी, योगेश कुमार पांडे, चंद्रशेखर रावत को अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता, गजेंद्र सिंह संधू को शासकीय अधिवक्ता, प्रेम सिंह बोहरा, शेर सिंह अधिकारी, टेकचंद्र अग्रवाल, जगजीत सिंह विर्क तथा प्रतिरूप पांडे को सहायक शासकीय अधिवक्ता नियुक्त किया गया है।

आदेश में यह भी साफ किया गया है कि सरकार की ओर से की गई आबद्धता व्यावसायिक है, सिविल पद पर नियुक्ति नहीं है। सरकार को छूट है कि किसी भी समय बिना पूर्व सूचना के आबद्धता समाप्त की जा सकती है जबकि अधिवक्ता लिखित सूचना देकर आबद्धता खुद भी खत्म कर सकते हैं।

बैंक मैनेजर को किया गिरफ्तार

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बाल विकास परियोजना जसपुर,  के अधिकारी (सीडीपीओ) के खाते से 20.50 लाख रुपये निकालने के मामले में पुलिस ने मुरादाबाद स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा के ब्रांच व ज्वाइंट मैनेजर को गिरफ्तार किया है।

दो फरवरी 2017 को कान्हा इंटरप्राइजेज संस्था के नाम से बने चेक का मुरादाबाद स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा(बीओबी) से भुगतान किया गया था। चेक के जरिये सीडीपीओ जसपुर के खाते से 20.50 लाख रुपये की रकम निकाली गई थी। सूचना मिलने पर सीडीपीओ लक्ष्मी टम्टा ने 23 मार्च को अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

पुलिस जांच में पता चला कि चेक एवं संस्था दोनों फर्जी थे। मामले की जांच कर रहे सब इंस्पेक्टर एनसी जुर्राल ने शनिवार को पूछताछ के बहाने मुरादाबाद सिविल लाइन स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा के प्रबंधक वीके सक्सेना तथा संयुक्त प्रबंधक अंकिता रोहतगी को जसपुर कोतवाली बुलाया।

बिना जांच किए इतनी अधिक रकम का चेक पास करने, असली नकली की पहचान न करने, फर्जी संस्था का खाता खोलने और दो लाख रुपये से अधिक का चेक होने पर स्थानीय बैंक शाखा से जानकारी न करने आदि सवालों का संतोषजनक उत्तर न देने पर पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने बैंक के उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी ।

जांच अधिकारी ने बताया कि दोनों बैंक अधिकारी गिरोह के अन्य सदस्यों से मिले थे। चेक तथा संस्था की जानकारी किए बिना इतनी बड़ी रकम खाते में ट्रांसफर करना इस बात के प्रमाण हैं। उधर, दोनों बैंक अधिकारियों ने कहा कि पुलिस के कहने पर वह जसपुर कोतवाली में मामले में सहयोग के लिए आए थे। रूटीन में चेक पास किया गया था। उन्हें फंसाया जा रहा है।

इस मामले में पुलिस काशीपुर की एक फाइनेंस कंपनी के शाखा प्रबंधक ऋतुराज शर्मा पुत्र तथा फराज खान को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।  एसआइ एनसी जुर्राल ने बताया कि फराज खान ने ही अवनीश कुमार निवासी सिविल लाइंस मुरादाबाद के नाम से फर्जी संस्था कान्हा इंटरप्राइजेज का प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत खाता खुलवाया था। इसी संस्था को बैंक ने नौ लाख रुपये का लोन भी दिया था। 20.50 लाख रुपये का संस्था के नाम चेक जमा होने पर बैंक ने लोन के रुपये जमा कर लिए थे।

हेमकुंड साहिब में भी बजेगा ट्रिन-ट्रिन

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अब तक संचार सुविधा से महरूम श्री हेमकुंड साहिब में एक हफ्ते के भीतर लोगों को मोबाइल सेवा का लाभ मिलने लगेगा। बीएसएनएल ने घांघरिया में टावर लगाने के लिए भूमि तलाश कर वहां तैयारियां शुरू कर दी हैं। टावर के लिए सभी सामान गोविंदघाट पहुंच चुका है।

श्री हेमकुंड साहिब व फूलों की घाटी क्षेत्र में दूरसंचार सेवा नहीं है। हेमकुंड साहिब के 19 किमी लंबे पैदल मार्ग पर गोविंदघाट से दो किमी आगे पुलना गांव तक ही मोबाइल सेवा है। इसके बाद यहां किसी प्रकार की कनेक्टिविटी नहीं है। हर साल हेमकुंड साहिब व फूलों की घाटी लाखों श्रद्धालु व पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन, संचार क्रांति के इस युग में भी वे यात्रा के दौरान दो दिन तक देश-दुनिया से कटे रहते हैं। स्थानीय लोगों व व्यापारियों की स्थिति यह है कि उनकी महीनों तक अपनों के साथ बातचीत नहीं हो पाती।

संचार सुविधा न होने के कारण 2013 की आपदा के दौरान यात्रियों के जगह-जगह फंसने से सरकार की खासी किरकिरी हुई थी। इसी को देखते हुए तब यहां संचार सेवाएं हर हाल में उपलब्ध कराए जाने की रणनीति बनी थी। लेकिन, यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। अब भारत संचार निगम घांघरिया में मोबाइल सेवा शुरू करने जा रहा है। इसके लिए भूमि का चयन भी हो चुका है। गुरुद्वारा घांघरिया में हेमकुंड यात्रा ट्रस्ट ने मोबाइल टावर लगाने को भूमि उपलब्ध कराई है। इस टावर से पुलना गांव व हेमकुंड तक छह किमी क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी मिलने लगेगी।

दूरसंचार महाप्रबंधक (श्रीनगर) मुसद्दी लाल ने बताया कि मोबाइल टावर का सामान गोविंदघाट पहुंच चुका है और उम्मीद है कि एक हफ्ते के भीतर मोबाइल सेवा शुरू हो जाएगी। उधर, गुरुद्वारा गोविंदघाट के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह का कहना है कि बीएसएनएल की सेवा हेमकुंड रूट पर 14 किमी क्षेत्र में मिलेगी। इससे यात्रियों सहित आम लोगों का भी फायदा होगा। उन्होंने यात्रियों से साथ में बीएसएनएल का सिम लाने की अपील की है।

रिलायंस ने भी लगाए थे टावः वर्ष 2006-07 में रिलायंस ने भी घांघरिया में मोबाइल टावर लगाया था। इस पर जनरेटर व बैटरियां भी लगा दी गई थीं, लेकिन टावर आज तक शुरू नहीं हो पाया। नतीजा, निजी भवन पर लगा यह टावर शो-पीस बना हुआ है।

 

राज्य में 3 दिन भारी बारिश की चेतावनी

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उत्तराखंड में रविवार से मौसम तीखे तेवर अपना सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटों में राज्य में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना है। उत्तरकाशी, चमोली, रुदप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल व पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर 28 से 30 मई तक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है।

इसे देखते हुए चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। इस बीच शनिवार शाम पिथौरागढ़ तहसील के गौरीहाट क्षेत्र में बादल फटने से कई घरों में पानी घुस गया, जबकि खेत मलबे से अट गए और पेयजल लाइन व संपर्क मार्ग बह गए। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा है।

वहीं, बदरीनाथ राजमार्ग पर लामबगड़ के पास शुक्रवार देर शाम पत्थर गिरने पर प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर यात्रियों को गोविंदघाट और पांडुकेश्वर में रोक लिया था। शनिवार सुबह मार्ग खुलने पर उन्हें आगे जाने की इजाजत दी गई।

राज्य में इन दिनों गाहे-बगाहे हो रही बारिश, ओलावृष्टि व अंधड़ का सिलसिला जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक विक्रम सिंह के मुताबिक रविवार से यह और तेज होगा। ऐसे में चारधाम यात्रा मार्गों पर संवेदनशील स्थलों पर भूस्खलन व सड़क बाधित होने के अंदेशे से इनकार नहीं किया जा सकता। लिहाजा, यात्रियों के साथ ही प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। उधर, राज्य आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र के अधिशासी निदेशक डॉ.पीयूष रौतेला ने बताया कि मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर संबंधित जिलाधिकारियों को अलर्ट रहने को कहा गया है।

इस बीच, शनिवार को भी पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा। पिथौरागढ़ तहसील के गौरीहाट क्षेत्र में शाम के वक्त बादल फटने से झूलाघाट मार्ग तीन जगह बाधित हो गया। जिले के मुनाकोट व कनालीछीना क्षेत्रों में एक घंटे तक ओलावृष्टि से फसलों को खासी क्षति पहुंची है।

चमोली जिले में भी कुछ स्थानों पर जोरदार बारिश हुई, जबकि जिले की ऊंची चोटियों पर दोपहर बाद हल्की बर्फ भी पड़ी। टिहरी जिले में शुक्रवार शाम हुई बारिश और अंधड़ के चलते गुल हुई डेढ़ सौ गांवों की बिजली अभी तक बहाल नहीं हो पाई है। इनमें जौनपुर ब्लाक के 100 गांव भी शामिल हैं। धनोल्टी क्षेत्र में भी पेड़ गिरने से विद्युत लाइनें अस्तव्यस्त हो गईं थीं।

 

केदारधाम के यात्रियों को ठंड से राहत देगा ये ”इलेक्ट्रानिक ब्लैंकेट”

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केदारनाथ में यात्रियों की भीड़ बढ़ने से दर्शनों को उनका इंतजार भी बढ़ता जा रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद उन्हें अपनी बारी के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। यहां तक कि बारिश होने पर भी वह इस डर से लाइन नहीं छोड़ते कि कहीं नंबर न कट जाए। ऐसे में कई यात्रियों की तबीयत भी बिगड़ रही है। इसे देखते हुए प्रशासन अब लाइन में खड़े यात्रियों को छाता उपलब्ध कराएगा। साथ ही उन यात्रियों के लिए इलेक्ट्रिक कंबल भी मंगवाए जा रहे हैं, जिनकी ठंड लगने से तबीयत नासाज हो गई हो।

जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि धाम में दर्शनों के लिए यात्रियों को लाइन में घंटों खड़ा रहना पड़ रहा है। जिससे उनकी तबीयत बिगड़ने की आशंका है। इसी को देखते हुए प्रशासन तीन हजार छाते मंगवा रहा है, जो लाइन में खड़े यात्रियों को बांटे जाएंगे। दर्शनों के बाद इन्हें वापस ले लिया जाएगा।

इसके साथ ही केदारनाथ में ठंड लगने से यात्रियों की तबीयत बिगड़ने के मामलों को देखते हुए इलेक्ट्रिक कंबल भी मंगाए जा रहे हैं। जिन यात्रियों की ठंड लगने से तबीयत बिगड़ेगी, उन्हें ये कंबल उपलब्ध कराए जायेंगे। डीएम ने बताया कि केदारनाथ मंदिर के सामने पूरे मार्ग पर सरस्वती नदी तक टिन शेड बनाने का प्रस्ताव है।

हालांकि, इसके निर्माण में अभी समय लगेगा। बताया कि यात्रा पर लगे सभी सेक्टर मजिस्ट्रेट रोजाना शाम को रिपोर्ट दे रहे हैं। यात्रियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझा जा रहा है और उनके निदान का प्रयास भी हो रहा है। बताया कि हेलीपैड पर मौजूद नोडल अधिकारी पूरी तरह हेली कंपनियों पर नजर रखे हुए हैं। प्रशासन की पूरी कोशिश है कि यात्रियों की सुविधाओं का हरसंभव ध्यान रखा जाए।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के लिये सरकार ने तय की समय सीमाऐं

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सूबे की बीजेपी सरकार ने ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन को घरातल पर लाने के लिये कमर कस ली है। इसके लिये मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को सचिवालय में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के कामों से जुड़े मसलों पर मीटिंग ली। बैठक में तय हुआ कि:

  • ऋषिकेश में प्रस्तावित रेल पुल के लिए यूपीसीएल, पिटकुल और जल संस्थान को तय समय सीमा के अंदर विद्युत और पेयजल लाइन शिफ्ट करने के निर्देश दिए। 
  • रेल पुल के फाउंडेशन कार्य के लिए जगह वन विभाग 3 दिन में खाली कर देगा और बाकी जमीन 30 दिन में खाली कर देगा। अभी वहाँ वन विभाग का फॉरेस्ट रेंज ऑफिस है। 
  • पशासनिक खर्चं के लिये कुल 5 करोड़ रुपए चमोली, पौड़ी, टिहरी और रूद्रप्रयाग जिलों में उनकी भागीदारी के लिये बाँटा जाएगा। 
  • चारों जिलों में भू-अधिग्रहण के लिए जरूरी पुनर्वास और विस्थापन नीति(Rehabilitation and Resettlement Policy) को जल्द बनाने के निर्देश दिए गए। चमोली 01 जून, पौड़ी 10 जून, रुद्रप्रयाग और टिहरी 05 जून तक ड्राफ्ट नीति तैयार कर लेंगे।
  • आंकड़ो के अनुसार चारों जनपदो में 47 गांवों में, 411 भवन रेल लाइन की जद में आएँगे। 
  • चमोली जिले में अक्टूबर तक और अन्य तीन जिलों में दिसम्बर तक मुआवजा घोषित करने का लक्ष्य रखा गया है। 

बैठक में ऋषिकेश-कर्ण प्रयाग प्रोजेक्ट को नैशनल प्रोजेक्ट घोषित करने के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा वो स्वयं प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस हेतु अनुरोध करेंगे। 

30 मई को नहीं मिलेंगी बाजार में दवाएं

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देश भर के दवा कारोबारियों को दवा व्यापार के लिए तय केंद्र सरकार के नए मानक रास नहीं आ रहे हैं। दवा विक्रेता केंद्र के नए कायदे कानून को अपने व्यापार की कसौटी पर परख रहे हैं। लिहाजा सरकार के नियमों का रसायन उनके धंधे के लिटमस टेस्ट में फेल हो रहा है।

ऐसे में पूरे देश के दवा विक्रेता सामूहिक विरोध जताते हुए 30 मई को अपनी दवा की दुकान बंद रखेंगे। अखिल भारतीय औषधि महासंघ के आह्वान पर उत्तराखंड औषधि महासंघ ने भी फैसले की हिमायत करते हुए बंद का ऐलान किया है। दून औषधि महासंघ के अध्यक्ष टी.एस. अग्रवाल कहना है कि होलसेल के कारोबार के लिए फार्मसिस्ट की जरूरत नहीं है लेकिन नए नियमों के मुताबिक फार्मसिस्ट को रखना जरूरी होगा।

वहीं उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि दवा की खरीद और बिक्री का रेकार्ड पोर्टल पर अपडेट किया जाए। इसके लिए कारोबारियों को स्टॉफ बढ़ाना पड़ेगा। इससे दवा व्यापारी पर कर्मचारी की पगार का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा।

तय है कि अगर तीन दिनों में सरकार कोई फैसला नहीं ले पाई तो 30 मई को कई मरीजों की जान पर बन आएगी। लिहाजा जरूरत है वैकल्पिक व्यवस्था कि ताकि लोकतंत्र भी जिंदा रहे और दवा के जरूरतमंद मरीज भी।

पहाड़ों पर आफत की बारिश, 32% हुई सामान्य से ज्यादा बारिश

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मौसम विभाग ने उत्तराखंड में 29 मई से वर्षा की संभावना जताई थी और पहाड़ में मौसम का मिजाज बिगड़ गया है। इसके चलते पहाड़ों में  मार्च से अब तक करीब 32 प्रतिशत प्री माॅनसून की बारिश ज्यादा हुई है। इससे राज्य में सामान्य से अच्छे मानसून की उम्मीद बन गई है। मानसून के राज्य में 20 जून के आसपास दस्तक देने की उम्मीद है।

ये आंकड़ें पिछले साल के मुकाबले में बेहतर हैं। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में राज्य में मानसून के अच्छे होने की उम्मीद की जा सकती है। हांलाकि बे मौसम हुई इस बरसात से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। राज्यभर मे कियानों को बारिश और ओलो की वजह से काफी नुकसान उठाना पड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक राज्यभर में अब तक करीब 100 करोड़ की फसल को नुकसान पहुंचा है।

मौसम विभाग के मुताबिक अभी सूबे में आंशिक रूप से लेकर आमतौर पर बादल रहेंगे और कुछ स्थानों में हल्की से मध्यम वर्षा अथवा गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

छ: बार एवरेस्ट फतह करने वाले पहले भारतीय बने लवराज

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बीएसएफ के सहायक सेनानी लवराज धर्मशक्तू ने छठी बार एवरेस्ट फतह किया है। दुनिया की इस सबसे ऊंची चोटी पर छह बार चढ़ने वाले वह भारत के पहले पर्वतारोही हैं। वह मुनस्यारी के बौना गांव के रहने वाले हैं।पद्मश्री लवराज इस बार तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ओएनजीसी) द्वारा प्रायोजित एवरेस्ट अभियान दल में शामिल थे। उनके नेतृत्व में गए इस दल में धारचूला निवासी ओएनजीसी में इंजीनियर योगेश गब्र्याल समेत उत्तराखंड के चार पर्वतारोही थे। 

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस दल को गत 28 मार्च को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। लवराज ने फोन पर बताया कि इस दल ने शनिवार सुबह एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ने में सफलता प्राप्त की। लवराज धर्मशक्तू ने 1998 में पहली बार एवरेस्ट फतह किया था। इसके बाद बीएसएफ में जाने के बाद वर्ष 2006, 2009, 2012, 2013 और अब 27 मई 2017 को छठी बार एवरेस्ट फतह करने में सफलता हासिल की है।

लाईट,कैमरा,एक्शन हमेशा से है पहला प्यार

उत्तराखंड का कुमाऊं क्षेत्र अपनी खूबसूरती के लिए तो मशहूर है ही, साथ ही इस क्षेत्र ने छोटे पर्दे को भी कलाकारों से नवाज़ा है। ऐसे ही एक कलाकार हैं पिथौरागढ़ के पास रैतोली गांव की प्रियंका जोशी। यूं तो प्रियंका आजकल मुंबई में अपने काम में मशगूल रहती हैं, लेकिन उनका छोटा सा परिवार जिसे कहीं ना कहीं यह आशा थी कि आने वाले समय में प्रियंका सफलता की सीढ़िया चढेंगी। आगे चलकर हुआ भी कुछ ऐसा ही, प्रियंका की मां, भारती जोशी जो पेशे से अध्यापिका वो कहती हैं कि मुझे अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था कि वह स्टार बनेगी।

प्रियंका की मां कहती हैं कि मैंने अपनी बेटी के अंदर स्टेज पर काम करने वाली प्रतिभा पहले ही देख ली थी। भारती कहती हैं कि मुझे अपनी बेटी को एक्टिंग करते हुए देखाना बहुत पसंद था और एक्टिंग के दौरान उसका कांफिडेंस भी बेहतरीन होता था। मैंने उसको उड़ीसी डांस सीखने के लिए कहा और फिर उसको उसके सपने पूरे करने के लिए मुंबई भेजा, और आज उसने अपनी मेहनत से जो मुकाम हासिल किया हैं मुझे उस पर गर्व है। प्रियंका जोशी को अपनी लाईफ का पहला ब्रेक 22 साल की उम्र में मिला।

 

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अपने काम से कुछ समय निकालकर अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रियंका इस समय दिल्ली में हैं। न्यूज़पोस्ट टीम से खास बातचीत में प्रियंका ने बताया कि मैंने कभी इस क्षेत्र को चुना नहीं, मैं जानती थी मैं इसी क्षेत्र में काम करने के लिए बनी हूं। प्रियकां ने बताया कि मैं हमेशा से स्टेज को इंज्वाय करती थी चाहें वह डांस या एक्टिंग हो। प्रियंका ने उड़ीसी डांस में मास्टर डिग्री ली है और जर्नलिज्म में माॅस कम्यूनिकेशन की डिग्री है।

न्यूज़पोस्ट से बातचीत में प्रियंका ने बताया कि मैने बहुत से प्रोजेक्ट पर काम किया है जैसे कि सब चैनल में ‘डा.मधुमति आॅन ड्यूटी’, दूरदर्शन के ‘एक लक्ष्य’, लाईफ ओके के लिए ‘डर सबको लगता’ है आदि, लेकिन इन सभी रोल में से उनका हाल ही में चला वेब सीरीज़ ‘बेवड़े’ काफी अलग शो था और रोल भी बहुत अलग है। वेब सीरीज़ ले लिये नैचुरल एक्टिंग की जरुरत है और इसके टारगेट आॅडियंस भी काफी अलग हैं।

प्रियंका के लिए एक्टिंग एक लिबरेटिंग अनुभव हैं। वो कहती हैं कि एक जिंदगी में एक से ज्यादा रोल निभाना और उसको जीना अपने आप में एक बड़ा चैलेंज है।

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अपनी शादी को और साथ ही जब उन्होंने खुद को टीवी की स्क्रीन पर पहली बार देखा था, इन दोनों पलों को वह अपने कभी ना भूलने वाले क्षणों में गिनती हैं और कहती हैं कि यह दोनों पल उनके लिए खास हैं। आज अपने परिवार और अपने पति के सपोर्ट से वह अपने कैरियर में और अच्छा करने के लिए प्रेरित होती हैं। अपने घर वालों के साथ छुट्टियां मनाने के बाद वह एक बार फिर लाईट, कैमरा,एक्शन की दुनिया में जाने को बेताब हैं।