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4 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

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उत्तराखण्ड चारधाम यात्रा वाले क्षेत्र में अगले 48 घंटे तेज हवाओं के साथ बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। पिथौरागढ़, नैनीताल, चमोली, रुद्रप्रयाग के लिए खासतौर पर चेतावनी जारी की गई है। 39 डिग्री पार पहुंचे पारे ने लोगों के खूब पसीने छुड़ाए। सोमवार को भी गर्मी से राहत नहीं मिली।

दो दिन से गर्मी प्रचंड रूप दिखा रही है। रविवार को को अधिकतम तापमान 39.9 डिग्री सेल्सियस रहा था, जो तब तक का सर्वाधिक था। सोमवार को धूप असहनीय होने लगी और सड़कों पर सन्नाटा सा पसरा नजर आया। लोगों ने गर्मी से बचने के लिए घर में रहना ही मुफीद समझा। हालांकि, गर्मी से राहत पाने के लिए सहस्रधारा, गुच्चूपानी, लच्छीवाला में पर्यटकों के साथ-साथ दूनवासियों की काफी आमद रही। शाम को गर्मी के साथ उमस से भी लोग परेशान रहे।

सोमवार को अधिकतम तापमान 39.8 और न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री सेल्सियस रहा। शनिवार के मुकाबले न्यूनतम तापमान भी तीन डिग्री सेल्सियस अधिक था। मौसम विभाग के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि अभी तापमान 39 से 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही रहेगा लेकिन, मंगलवार से मौसम बदलेगा। छह और सात जून को अच्छी बारिश की संभावना है।

विदित रहे कि पिछले दिनों लगातार हल्की बारिश होने के चलते देहरादून का तापमान सामान्य से कम था। जिससे लोगों ने राहत महसूस की। रविवार को तापमान में अचानक वृद्धि होने से दोपहर में लोग घरों से बाहर जरूरी काम के लिए ही निकले। छुट्टि का दिन होने के कारण भी कई लोगों ने राहत की सांस ली। डॉक्टरों की सलाह है कि गर्मी बढ़ने पर अगर बाहर निकलना हो तो शरीर ढककर निकलने, बाहर जाने से पहले पानी जरूर पीये। बाहर की बने हुए खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।

पहले माना जाता था कि दिन में 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंचने पर शाम को बारिश जरूर होती थी और लोग सकून महसूस करते थे। लेकिन अब शहर के बीच के बागों पर लगातार आरियां चलते से यहां पारिस्थितिकी में बड़ा बदलाव आ गया है। जिस दून घाटी को लोग गर्मियों के लिए स्वर्ग मानते थे, उसमें दिन में बाहर निकला मुश्किल होता जा रहा है।

वुमेन क्रिकेट वर्ल्डकप में एकता फिरकी तो मानसी दिखांएगी स्विंग का जादू

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अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेटर एकता बिष्ट और मानसी जोशी महिला विश्वकप में फिरकी व स्विंग का जादू दिखाने के लिए तैयार हैं। दोनों का सपना है कि इस बार महिला विश्वकप भारत जीते।

इंग्लैंड में 24 जून से 23 जुलाई तक आइसीसी महिला विश्वकप होना है। इसके लिए चुनी गई भारतीय महिला टीम में उत्तराखंड की एकता बिष्ट और मानसी जोशी जगह बनाने में सफल रही है। हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में हुई चार देशों की सीरीज में विजेता रही भारतीय टीम में शामिल इन उत्तराखंड की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया। अब एकता व मानसी पांच जून से मुंबई में शुरू हो रहे ट्रेनिंग कैंप में शामिल होंगी। वहां से 11 जून को भारतीय टीम इंग्लैंड के लिए रवाना होगी। 19 जून को भारतीय टीम न्यूजीलैंड के साथ वार्मअप मैच खेलेगी।

विश्व कप जीतने से बदलेगा नजरिया

मूलरूप से खंजाची मोहल्ला अल्मोड़ा निवासी एकता बिष्ट ने 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। वह 2013 महिला विश्वकप, 2016 में हुए टी-20 विश्वकप और एशिया कप टी-20 में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। दाएं हाथ की फिरकी गेंदबाज एकता ने अपनी घुमावदार गेंदों से टीम को जीत दिलाई।

बातचीत में एकता ने कहा कि इस समय भारतीय टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है। दक्षिण अफ्रीका दौरे का फायदा इंग्लैंड में मिलेगा। भारतीय रेलवे में कार्यरत एकता उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह कहती हैं कि भारतीय टीम ने पिछली कुछ सीरीज में बेहतर प्रदर्शन किया।

हालांकि महिला क्रिकेट को इतनी तवज्जो नहीं दी जाती। विश्वकप में अगर भारतीय टीम खिताब जीतने में सफल रहती है तो यह महिला क्रिकेट की तस्वीर बदलने में सहायक होगा।

विश्वकप खेलने का ख्वाब पूरा

मूलरूप से टिहरी निवासी मानसी जोशी ने अपनी धारदार स्विंग गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया है। अक्टूबर 2016 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वालीं मानसी का सपना विश्वकप खेलने का रहा जो पूरा होने जा रहा है।

मानसी कहती हैं कि दक्षिण अफ्रीका दौरे ने उनके लिए विश्वकप के द्वार खोले हैं। फरवरी में श्रीलंका में हुए विश्वकप क्वालीफायर में मानसी की स्विंग गेंद की आइसीसी ने भी तारीफ की थी। मानसी कहती हैं कि इंग्लैंड की उछाल भरी और तेज पिचों में उन्हें स्विंग कराने में सहायता मिलेगी। भारतीय टीम इस समय काफी मजबूत है। जितने भी मैच खेलने को मिले उसमें अपनी गेंदबाजी से टीम को जीत दिलाने का प्रयास करुंगी।

चारा वाला पत्ता अब बनाएगा रेशम

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मूल रूप से खर्सू चारा प्रजाति का पेड़ है, जिसकी चौड़ी पत्ति्तयां जानवरों को खूब भाती हैं। जानवरों के लिए इन पत्ति्तयों का चारा सबसे पौष्टिक माना जाता है। पशुपालकों के अनुसार खर्सू की पत्तियों का चारा खिलाने से दुधारू जानवरों का दूध बढ़ जाता है। जंगलों में काफी अधिक संख्या में पाए जाने वाले इस वृक्ष की लकड़ी जलाने के काम आती है। इसके कोयले भी बनाए जाते हैं। जिनका प्रयोग ऊंचाई पर रहने वाले लोग शीतकाल में आग सेंकने के प्रयोग में लाते हैं। जिस कारण इनका कटान भी काफी होता है।

इस खर्सू के दिन अब फिरने जा रहे हैं। शोध के बाद शहतूत और बांज की पत्तियों की तरह रेशम पैदा होने की पुष्टि हुई । जिसे देखते हुए अब अब खर्सू से रेशम पैदा करने की कवायद चल चुकी है। सर्वप्रथम तो खर्चू जंगलों में काफी अधिक होता है। इसके लिए अलग से जंगल तैयार करने की आवश्यकता नहीं हैं। मुनस्यारी के ऊंचाई वाले कालामुनि, बिटलीधार से लेकर मुनस्यारी के आसपास के जंगलों में यह बहुतायत में है। अब तक जानवरों के लिए पौष्टिक आहार मानी जाने वाली पत्तियों को रेशम के कीट भी अपना आहार बनाने जा रहे हैं। आने वाले दिनों में स्थानीय लोगों के लिए खर्सू आमदनी का प्रमुख साधन बनने जा रहा है। खर्सू की पत्ति्तयां खाकर कीट टसर बनाएगा।

डेढ़ लाख कीट पहुंचे

मुनस्यारी: खर्सू की पत्ति्तयो से रेशम उत्पादन के लिए मुनस्यारी में ग्रामीण विकास समिति डेढ़ लाख रेशम के कीट ला चुकी है। जिन्हें खर्सू के पेड़ों पर छोड़ा जा रहा है। इसके विशेषज्ञ बलवंत सिंह कोरंगा का कहना है कि खर्सू की प्रचुरता के चलते यहां पर रेशम उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। इस समय दर्जनों युवा और युवतियां इससे जुड़ चुकी हैं। आने वाले समय में मुनस्यारी में व्यापक रेशम उत्पादन होगा।

प्रदेशभर में कांग्रेस ने सरकार के विरोध में फूंका बीजेपी का पुतला

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एनएच-74 घोटाले की जांच में लीपापोती किये जाने तथा आम आदमी पर महंगाई का बोझ डालने के विरोध में प्रदेश कांग्रेस द्वारा प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन के साथ केन्द्र व राज्य सरकार का पुतला दहन किया गया तथा जिलाधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रेषित किये गये।

इसी कार्यक्रम के तहत देहरादून में जिला कांग्रेस कमेटी देहरादून, महानगर कांग्रेस कमेटी देहरादून एवं जिला कांग्रेस कमेटी ऋषिकेश के संयुक्त तत्वावधान में तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में विशाल धरना-प्रदर्शन के उपरान्त महानगर अध्यक्ष पृथ्वीराज चौहान, जिलाध्यक्ष यामीन अंसारी, जयेन्द्र रमोला द्वारा उपजिलाधिकारी देहरादून को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उत्तराखण्ड राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार गठन को दो माह से अधिक समय व्यतीत हो चुका है। भाजपा सरकार द्वारा अपने दो माह के कार्यकाल में कई जन विरोधी निर्णय लिये गये है। भ्रष्टाचार पर जीरो टाॅलिरेंस का दावा करने वाली उत्तराखण्ड सरकार द्वारा एनएच-74 घोटाले की जांच सीबीआई से कराने के लिए केन्द्र सरकार को सिफारिश भेजी गई परन्तु अभी तक केन्द्र सरकार से मामले की सीबीआई जांच की अनुमति नहीं मिल पाई है। लोकतंत्र के इतिहास में यह भी पहला अवसर है जब प्रदेश सरकार द्वारा सीबीआई जांच के अनुरोध के बावजूद सम्बन्धित विभाग के केन्द्रीय मंत्री एवं वरिष्ट भाजपा नेता द्वारा यह कहते हुए कि सीबीआई जांच से अधिकारियों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पडे़गा, मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपना फैसला वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि केन्द्र सरकार एनएच-74 मामले के दोषियों को बचाने का काम कर रही है।
प्रीतम सिह ने कहा कि नेशनल हाईवे एनएच-74 में हुए घोटाले की जांच के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा मामले के संज्ञान में आते ही एसआईटी का गठन कर निष्पक्ष जांच कराने का फैसला लिया गया था तथा सम्बन्धित जांच एजेंसी ने इस दिशा में काम करना भी शुरू कर दिया था परन्तु भाजपा सरकार द्वारा मामले को जनता के संज्ञान मे लाने वाले अधिकारी का तबादला कर इस मामले में लीपापोती करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे यह भी साबित होता है कि सरकार एनएच-74 में हुए घोटाले में संलिप्तों को बचाना चाहती है। अतः केन्द्र सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसा कौनसा दबाव है जिसके चलते वह मामले की सीबीआई जांच कराने से कतरा रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जनता को अच्छे दिनों का झांसा देने वाली केन्द्र सरकार द्वारा पहले ही उत्तराखण्ड के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा था। परन्तु अब राज्य में भी भाजपा की प्रचण्ड बहुमत वाली सरकार ने बिजली, पानी, सीवर के दाम बढ़ाकर पहले से महंगाई की मार झेल रही गरीब जनता की जेब पर ड़ाका डालने का काम किया है। सत्ता मे आने से पूर्व सस्ती बिजली, पानी देने का वादा करने वाली भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही विद्युत, पेयजल और सीवर टैक्स बढ़ाकर जनता के हितों पर कुठाराघात किया है। भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार ने उत्तराखण्ड की जनता को पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के शासन में सस्ते गल्ले के माध्यम से मिलने वाले गेहूॅ एवं चावल के दामों में दोगुनी वृद्धि कर गरीब आदमी के पेट पर लात मारने का काम किया है। राज्य में पूर्ववती कांग्रेस सरकार द्वारा संचालित राज्य खाद्य्य योजना की राशन की मात्रा में भी कमी कर दी गई है जिससे कई परिवारों के सामने भरण-पोषण का संकट पैदा हो गया है। यही नहीं केन्द्र सरकार द्वारा सस्ते गल्ले के माध्यम से वितरित की जाने वाली चीनी और मिट्टी के तेल पर मिलने वाली सब्सिडी को बन्द कर गरीब जनता के साथ छलावा किया गया है।
प्रीतम सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश मे लागू वर्तमान शराब नीति के कारण सम्पूर्ण राज्य की मातृ शक्ति सड़कों पर है। भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव के दौरान उत्तराखण्ड की जनता से वायदा किया था कि यदि भाजपा सत्ता में आई तो हम प्रदेश में पूर्ण शराब बन्दी लागू की जायेगी, परन्तु इसके विपरीत मातृशक्ति का अपमान करते हुए जिस शराब नीति को प्रदेश में लागू किया गया है उससे निश्चित रूप से राज्य में शराब माफिया और शराब की तस्करी को बल मिलेगा। प्रदेश में लागू शराब नीति से राज्य सरकार ने जनभावनाओं के विपरीत शराब माफिया को संरक्षण देने का काम किया है। कांग्रेस ने कहा कि राज्य में चल रही चारधाम यात्रा में संचालित हैली सेवा के टिकटों की ब्लैक मेलिंग का मामला सामने आने से देवभूमि उत्तराखण्ड की गरिमा को भारी ठेस पहुंची है।

नैनी सैनी हैलीपैड पर उतरेंगे हवाई जहाज,जानिए क्यों

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पिथौरागढ़ की नैनी सैनी हवाई पट्टी पर शीघ्र विमान सेवा शुरू हो जाएगी। तेज रफ्तार वाले विमानों को उतारने के लिए हवाई पट्टी का रन-वे उपयुक्त पाया गया है। इसे रविवार को भारतीय विमान पत्त्तनम प्राधिकरण दिल्ली की ओर से जीपीएस उपग्रह से लैस गियरलेस स्वीडिश वाहन ने परखा।

स्वीडिश वाहन शनिवार को पिथौरागढ़ पहुंचा। रविवार को रन-वे पर हाई स्पीड विमान के उतरने पर होने वाले घर्षण की जांच की गई। वरिष्ठ अधीक्षक विक्रम सिंह, सुपर वाइजर कुलदीप सिंह, वरिष्ठ अधीक्षक धर्मवीर और तकनीकी विशेषज्ञ विनोद कुमार ने सुबह से नैनी सैनी हवाई पट्टी रन-वे में घर्षण परीक्षण को मापने की कवायद प्रारंभ की थी। इस मौके पर 1600 मीटर के रन वे पर 100 से लेकर 150 किमी प्रति घंटा तक के विमानों के उतरने की जांच की गई।

जांच के दौरान विशेषज्ञों ने पट्टी का हाइड्रोलिक प्रेशर एवरेज उपयुक्त बताया है। यह दल अब अपनी रिपोर्ट एयरपोट ऑथारिटी ऑफ इंडिया को सौंपेगा। उन्होंने बताया कि रन वे की घर्षण क्षमता को नापने आए जीपीएस उपग्रह से लैस स्वीडिश वाहन को ट्रॉले में लाया गया था। विशेषज्ञों ने बताया कि देश में अभी तक सभी जगहों पर इस वाहन के चलने योग्य सड़क नहीं होने से ट्राले में लाया जाता है।

 

इन्सानियत के हैवानों की करतूत

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बकरी ने पड़ोसी की घास क्‍या खा ली, इस पर पड़ोसी आग बबूला हो गया। उसने पहले बकरी को मार मार कर अधमरा कर दिया, फिर 12 साल के बच्‍चे को फंदे से लटका दिया। लेकिन तभी बच्‍चे की मां घर आ गई।

जनपद अल्मोड़ा के सल्ट ब्लॉक के ग्राम जक्खल, पोस्ट ऑफिस जामनी, निवासी चिमली देवी की बकरी ने गांव में किसी के घर के बाहर रखी घास को खा लिया। इससे नाराज गांव के ही दो लोगों ने बकरी को मार मार कर अधमरा कर दिया था। चिमली देवी ने उनके घर जाकर बकरी को मारने पर नाराजगी जताई, इस बीच उनमें काफी कहासुनी हो गई।

इसके बाद चिमली देवी घर आकर पानी लेने चली गई। घर में उसका 12 वर्षीय बेटा नरोत्तम पुत्र स्वर्गीय गुणाराम अकेला था। आरोप है कि बकरी को मारने पर विरोध जताने से नाराज दोनों लोग उसके घर आए। यहां नरोत्तम के गले में फंदा डाल उसे फांसी पर लटका दिया।

इसी बीच बच्चे की मां चिमली देवी घर आ गई। इस दोनों आरोपी वहां से भाग गए। चिमली देवी ने बच्चे के गले से फांसी का फंदा निकाला। गांव के प्रधान की मदद से बच्चे को सल्ट देवालय में स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से उसे रामनगर चिकित्सालय लाया गया। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

कहर बरपा रही बारिश

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पिथौरागढ़ जनपद में चार दिनों से थमी वर्षा ने सोमवार को कहर बरपाया। सवा घंटे की जोरदार बारिश में जनजीवन थम गया। मुनस्यारी के तल्ला जोहार में हरड़िया नाले से आए मलबे ने सदावाहिनी रामगंगा नदी का प्रवाह थाम दिया। नदी में विशाल झील बन गई। इससे तटवर्ती लोगों में हड़कंप मच गया, शुक्र रहा कि कुछ ही देर बाद नदी का प्रवाह खुल गया वरना बड़ी तबाही की आशंका बन गई थी।

पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय पर आधा दर्जन से अधिक पेड़ उखड़ गए। जिनकी चपेट में आने से एक मकान, एंबुलेंस सहित पांच वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। आसमान आधे घंटे तक और बरसता तो पिथौरागढ़ नगर में ही भारी तबाही हो जाती। आधा दर्जन स्थानों वृक्ष गिरने से नगर की सड़कों पर यातायात बंद हो गया है।

पिथौरागढ़-झूलाघाट मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात को बंद हो गया है। भाटकोट रोड, चिमिस्यानौला, पुराना बाजार आदि क्षेत्रों में नालियों का पानी सड़कों पर आ गया। नगर की सड़कें पानी से लबालब भर गईं।  डॉट पुल के पास जलभराव हो गया। जिस कारण यहां पर वाहन फंसे रहे। अफसर कालोनी को जाने वाले भाटकोट रोड में नाला बन गया। रई में एक मकान पर पेड़ गिर गया। रई नाला ऊफान पर आने से नाला किनारे के मकानों में रहने वाले लोगों ने मकान छोड़ दिया।

नाचनी बाजार में सभी मकानों और गोदामों में मलबा घुस गया है। नाचनी से एक किमी दूर सिमगड़ा गांव में तबाही मच गई। कई मकान मलबे और पानी से भर गए। परिवारों ने घरों से बाहर दौड़ लगा दी। थल-मुनस्यारी मार्ग में जगह-जगह मलबा आ गया है। बारिश और अंधंड़ से किसी तरह की जन और पशु हानि की कोई सूचना नहीं है। भारी मलबा आने से नाचनी-बांसबगड़ और लोध मार्ग बंद हो गए हैं। मार्ग बंद होने से एक दर्जन से अधिक वाहन फंसे हैं। लोग पैदल अपने गांवों को जा रहे हैं।

वह भूतिया गांव जिसने चीड़ के पेड़ों को बचाया

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एक छोटे से हरे रंग की परिदृश्य में, पहाड़ी के पास नुना गांव अपने खूबसूरत, घने हरियाली वाले पेड़ों के लिए जाना जाता है। यह एक हिमालयी ओक का जंगल है जिसे कई दशकों तक ग्रामीणों द्वारा उगाया और विकसित किया गया है।

नूना, अल्मोड़ा जिले के उन गांवों में से एक हैं जहां बारहमासी पानी का श्रोत बहता है। जब पड़ोसी गांव के श्रोत गर्मियों में सूख जाते हैं तब नुना, तक लोग पानी भरने अाते है। नुना वन पंचायत के पूर्व सरपंच 72 साल के देवी दत्त, का कहना है कि इस गांव ने तस्करों, ठेकेदारों और व्यवसायियों से जंगलों को दूर रखने के लिए बहुत लड़ाई लड़ी है। आज, भी गांव के बड़े-बुजुर्ग इसका ध्यान रख रहे हैं।

लेकिन नूना के खूबसूरत जंगल यहां के जवान यानि नई पीढ़ी को रोकने में नाकामयाब रहा हैं। यह उत्तराखंड के उन गांवों में से है जो भूतिया गांवों की श्रेणी में आता हैं। जर्जर और खाली टूटते मकान के मालिक अच्छी जिंदगी और शिक्षा के लिए अपने गांवों से दूर शहर में बस गए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में वन पंचायत वो समुदाय हैं जो जंगल के प्रबंधन वाले वन संस्थान हैं। दत्त ने बताया कि उन्होंने बढ़ती उम्र की वजह से वन सरपंच के पद से इस्तीफा दे दिया क्योंकि जंगलों को बचाने के लिए बहुत भागदौड़ और बहुत एलर्ट रहने की आवश्यकता होती है।

दत्त बताते हैं कि जब मैं सरपंच था, ठेकेदारों ने मुझसे जंगल के बीच से एक सड़क काटने के लिए 10 लाख रुपये की पेशकश की थी। हमने उन्हें सड़क का रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया। कुछ लोग बिस्किट कारखाने के लिए यहां जमीन चाहते थे, हमने उन्हें भी बाहर निकाल दिया।” दत्त कहते हैं, कि तस्कर रात में आते हैं और वे पेड़ों को काटने के लिए मशीन का उपयोग करते हैं, न कि एक कुल्हाड़ी जिसे आप बहुत दूरी से सुन सकते हैं।”

भारतीय विज्ञान संस्थान के वन-विशेषज्ञ एन एच रविंद्रनाथ के अनुसार, हिमालयी ओक एक देसी प्रजाति है। “यह मिट्टी, कीड़े और स्थानीय जलवायु के लिए अनुकूल है। इसकी नमी बरकरार रहती है और तत्काल पानी की कमी से बचाती है।”

लोक चेतना मंच के अध्यक्ष जोगिंदर बिष्ट कहते हैं कि, “स्थानीय लोग ओक को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि यह बेहतर लकड़ी और चारा देता है, अच्छी गुणवत्ता वाला हयूम्स (कार्बनिक पदार्थ) बनाता है और कटाव को रोकता है।”

पर्यावरण संरक्षण को जीवित करेगी फिल्म ”दि विशिंग ट्री”

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दि विशिंग ट्री (कल्पवृक्ष), एक ऐसी फिल्म है जो लोगों के अंदर एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण की भावाना को जगा देगी, यह फिल्म जल्दी ही सैल्यूलाॅइड यानि की फिल्मी रील पर दिखाई देगी। आपको बतांदे कि पर्यावरण संरक्षण पर बनी यह फिल्म आने वाले 9 जून को रिलीज होगी। इस फिल्म की डायरेक्टर देहरादून की मनिका शर्मा है, और इस फिल्म को यूनियन इंवारनमेंट और फारेस्ट मिनिस्ट्री से भी सहयोग मिला है।

इस फिल्म की अदाकारा अनुभवी अभिनेत्री शबाना आज़मी हैं जो पर्यावरण की भावना के रूप में अभिनय कर रही हैं।भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने इस फिल्म में अपनी आवाज़ दि विशिंग ट्री यानी कल्पवृक्ष को दी है। यह फिल्म, 6000 साल पुरानी कल्पवृक्ष और विशिंग ट्री के चारों ओर घूमती है और इसमें पांच बच्चों का किरदार किस तरह से इस पेड़ से भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ हैं और कैसे यह एकजुट होकर अपने जादुई पेड़ को विनाश से बचाते हैं यह दिखाया गया है।

लेखक-फिल्म निर्माता जिनके माता-पिता देहरादून के रहने वाले हैं उन्होंने कहा कि, “इस फिल्म का विचार मेरे दिमाग में तब आया जब मैं कनाडा में 1000 साल पुराने पेड़ को गले से लगा रही थी। मुझे लगा कि इसमें कुछ तो ऐसा है जो मुझे कुछ हटकर करने पर मजबूर कर रहा और मैं तुरंत इस कहानी को बताने के लिए उत्सुक महसूस करने लगी।”

मेरे रिसर्च के दौरान मुझे बहुत से पुराने पेड़ो के बारें मे पता चला, जिनमें से एक पेड़ 5 हजार साल पुराना है जो अभी भी केलिफाॅर्निया में हैं, मुझे इससे भी फिल्म को बनाने में प्रेरणा मिली। शबाना आजमी के अलावा इस फिल्म में बहुत से नायाब सितारे काम कर रहे जैसे कि मकारांद देशपांडे, सौरभ शुक्ला, रंजीत कपूर और शेरनाज़ पटेल। दुनिया के कुछ बेहतरीन टेक्निशियन ने इस फिल्म में विजुवल इफ्केट दिया है।

फिल्म के निर्देशक ने कहा कि, “यह पेड़ों के लिए मेरी श्रद्धांजलि है और मुझे उम्मीद है कि यह लोगों, विशेषकर बच्चों को एक बार फिर से अपनी जन्मभूमि प्रकृति से जोड़ने का काम करेगा।” आपको बतादें कि इस फिल्म की चर्चा नेटफिल्क्स, इंटरनेट स्ट्रीमींग सर्विस व दुनिया के कोने कोने में लगभग 30 अलग-अलग भाषाओं में चला रहा है।

शर्मा ने कहा कि, “मैं हमेशा मानती हूं कि सिनेमा को सामाजिक परिवर्तन के लिए एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। पर्यावरण जागरूकता और मानवता की चिंता जैसे सभी मुद्दों के लिए आवाज उठाने के लिए फिल्मों का इस्तेमाल करना चाहिए।”

फिल्म का एक और देहरादून कनेक्शन –

शर्मा ने कहा, “मैं हमेशा देहरादून में आती हूं। यह एक ऐसी जगह जो मुझे बहुत प्रेरित करती है, मैं यहां के वातावरण और यहां के राजसी पेड़ों को धन्यवाद देती हूं। मेरे माता-पिता 2008 में देहरादून आ गए थे और तब से, जब भी मैं विश्राम लेना चाहती थी, मैं हमेशा देहरादून आती हूं।”

गंगा की आवाज को लोगों तक पहुंचा रहीं रिटायर्ड प्रोफेसर अंजली कपिला

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पूज्यनीय मां गंगा को निर्मल एवं स्वच्छ बनाए रखने के लिए लेडी इरविन कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) की सेवानिवृत्त प्रोफेसर अंजली कपिला आगे आई हैं। प्रो. कपिला विश्वविद्यालय की छात्राओं के साथ गोमुख से हरिद्वार तक गंगा की आवाज (बहाव के सुरों) को गीतों के माध्यम से समेटने का प्रयास कर रही हैं। गढ़वाली समेत अन्य भाषाओं में रचित गीतों के माध्यम से वह युवा पीढ़ी को गंगा एवं पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से जोड़ने में जुटी हैं।

शनिवार को हिमालय सेवा संघ की ओर से विश्वनाथ चौक के पास रेडक्रॉस भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रो. अंजली कपिला ने बताया कि गंगा की आवाज को समेटने की मुहिम में हिमालय सेवा संघ, उत्तराखंड जन जागृति संस्थान व हिमालयी पर्यावरण शिक्षा संस्थान के पदाधिकारी उनके साथ जुड़े हैं। इसके अलावा छात्र-छात्राएं, सामाजिक कार्यकर्ता, संस्कृति प्रेमी और स्थानीय लोगों को भी मुहिम से जोड़ा जा रहा है। बताया कि उनका उद्देश्य गोमुख से लेकर गंगा सागर तक गंगा और पर्यावरण को प्रदूषणमुक्त बनाना है।

प्रो. कपिला ने बताया कि उन्होंने लोक भाषाओं में 150 गीत बनाए हैं। इन गीतों को वह गढ़वाली, देवनागरी और अंग्रेजी में लिखती हैं। इन्हें उन्होंने पुस्तिका ‘मेरी आवाज’ में संग्रहीत किया है, जिसका वर्ष 2001 में उत्तराखंड के प्रथम मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी ने विमोचन किया था। बताया कि गंगा और पर्यावरण संरक्षण के लिए उनका अभियान जारी रहेगा। इस मौके पर हिमालयी पर्यावरण शिक्षा संस्थान के सुरेश भाई, मनोज पांडे, अरण्य रंजन, इमला, गरिमा मेंदीरत्ता, हना, ईमली आदि मौजूद थे।

विदेशी बालाओं की चिंता में गंगा

गंगा में बढ़ता प्रदूषण भले ही भारतीयों की चिंता में पूरी तरह शुमार न हो पाया हो, लेकिन विदेशी छात्राओं इससे खासी चिंतित हैं। दिल्ली के लेडी इरविन कॉलेज से स्नातकोत्तर कर रही अमेरिका की दो छात्राएं ईमली और हना भी प्रो. अंजली कपिला के साथ इस मुहिम से जुड़ी हुई हैं। शनिवार को उत्तरकाशी पहुंची इन अमेरिकी छात्राओं ने बताया कि गंगा की आवाज को कैसे समेटा जाता है और उसे प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए क्या करना चाहिए, इस पर वह संस्था के साथ मिलकर अध्ययन कर रही हैं।

उन्हें पहाड़ की हसीन वादियां और यहां की संस्कृति अपनी ओर खींच रही हैं। जिले में तीन सप्ताह के प्रवास के दौरान वह आसपास के गांवों में जाकर ग्रामीणों की समस्याएं जानने का प्रयास करेंगी। यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें गंगा की आवाज मुहिम से जुड़ने का मौका मिला।