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नैनीझील में स्कूली बच्चों ने चलाया अभियान

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विश्व पर्यावरण दिवस पर, नैनीताल में रैली समेत अनेक कार्यक्रम हुए। स्कूली बच्चों ने तल्लीताल से मल्लीताल तक रैली निकाली। स्कूली बच्चों ने झील किनारे मानव श्रृंखला बनाकर झील संरक्षण का संदेश दिया, साथ ही कार सेवा कर झील से मलबा भी साफ किया।

मल्लीताल में निरंकारी फाउंडेशन की ओर से आयोजित सफाई अभियान का शुभारंभ डीएम दीपेंद्र चौधरी ने किया। साथ चिल्ड्रन पार्क में पौधरोपण किया। लोगों को प्रकर्ति से जुड़ने और संरक्षण की शपथ दिलाई।

वन विभाग की ओर से भी रैली निकाली गई। रैली में डीएफओ धर्म सिंह मीणा,  मुख्य शिक्षा अधिकारी केके गुप्ता, सीडीओ प्रकाश चंद्र, तहसलिदार प्रियंका रानी, ईओ रोहिताश शर्मा समेत अन्य थे। चिड़ियाघर में स्कूली बच्चों को मुफ्त में वन्य जीवों का दीदार कराया।

विश्व पर्यावरण दिवस पर पीसीसी चीफ प्रीतम सिंह ने किया वृक्षारोपण

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उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री प्रीतम सिंह ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गांधी पार्क में वृक्षारोपण कर प्रदेशवासियों को पर्यावरण दिवस की बधाई देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति  का दायित्व बन जाता है कि राज्य को हराभरा बनाने के लिए आज के दिन वृक्षारोपण करना चाहिए। आज विश्व में पर्यावरण संतुलन के लिए अनेक प्रकार के शोध किये जा रहे है। वृक्षारोपण करना महान कार्य है, इस कार्य को करने से न केवल हम पर्यावरण संतुलन में अपना योगदान देते है बल्कि समाज को भी वृक्षारोपण कार्य से जोडते है।

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श्री प्रीतम सिंह ने कहा उत्तराखण्ड विश्व में सबसे अधिक पर्यावरण संरक्षण का काम करता है। हमारे प्रदेश में 67 प्रतिशत वन एवं 18 प्रतिशत हिमछादित क्षेत्र है। सबसे अधिक जल संरक्षण का काम भी देवभूमि उत्तराखण्ड ही करती है। वन एवं हिमखण्डों को सुरक्षित रखना हम सबका धर्म है। श्री प्रीतम सिंह ने प्रदेश की जनता का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा एवं भूगर्भजल स्रोतों को संरक्षित करने में अपना योगदान दें, ताकि प्रदेश अधिक से अधिक पर्यावरण की रक्षा में अपना योगदान दे सके।

 

मेडिकल माउंटेनियर दल ने सबसे ऊंचे ”सतोपंथ शिखर” पर फहराया तिरंगा

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इंडियन मेडिकल पर्वतारोही दल ने गंगोत्री हिमालय क्षेत्र के सबसे ऊंचे सतोपंथ शिखर (7075 मीटर) पर तिरंगा फहराकर अपने जोश एवं जज्बे का परिचय दिया। लौटते हुए इस दल ने वासुकी ताल से लेकर भोजवासा तक नमामि गंगे के तहत स्वच्छता अभियान भी चलाया।

आइएमएफ (इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन) युवा अभियान और केंद्रीय खेल मंत्रालय की ओर से आयोजित मेडिकल पर्वतारोही अभियान के 17 सदस्यीय दल को केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने नौ मई को झंडी दिखाकर गंगोत्री के लिए रवाना किया था। 11 मई को यह दल गंगोत्री से सतोपंथ के लिए रवाना हुआ।

हार्डिंग मेडिकल कॉलेज नई दिल्ली के प्रोफेसर अनिल गुत्तू के नेतृत्व में पर्वतारोही दल ने 29 मई को सतोपंथ शिखर का आरोहण किया और वहां तिरंगा फहराया। इस दौरान मेडिकल दल ने अध्ययन किया कि अभियान में नॉन-मेडिकल पर्वतारोही कैसे सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा ट्रेकर्स को प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण, अधिकतम ऊंचाई पर दवा का इस्तेमाल, नेतृत्व व सफल पर्वतारोहण जैसे बिंदुओं पर भी अध्ययन किया गया।

सतोपंथ से लौटते हुए दल के सदस्यों ने वासुकीताल, गोमुख व भोजवासा में फैले कूड़े को एकत्र कर उसे गंगोत्री तक पहुंचाया। दल के कुछ सदस्यों ने भोजवासा से भैरोंघाटी तक निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) के प्रशिक्षक रहे सी.नोरबू की याद में एक्सपेडिशन ट्रेल रेस में भी भाग लिया। उन्होंने यह दौड़ चार घंटे 52 मिनट में पूरी की।

निम पहुंचने पर संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल अजय कोठियाल ने दल के सदस्यों का स्वागत किया। उत्तरकाशी के पीतांबर सिंह पंवार ने बताया कि इस मेडिकल दल ने उत्तरकाशी के हाई लैंड ट्रैक एंड टूर के तत्वाधान में सतोपंथ शिखर का सफल आरोहण किया।

 

मन्नत पूरी होने पर झांसी से चौथी बार पैदल ”बद्रीनाथ” पहुंचा यह व्यक्ति

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इसे भगवान बदरी नारायण के प्रति आस्था ही कहेंगे कि झांसी (उत्तर प्रदेश) का एक बुजुर्ग चौथी बार पैदल ही दर्शनों को बदरीनाथ धाम पहुंच गया। यात्री का कहना है कि जब भी उसकी भगवान बदरी विशाल से मांगी मन्नत पूरी होती है, वह पैदल ही बदरीनाथ धाम पहुंच जाता है।

झांसी जिले के डगरवाहा गांव निवासी 72 वर्षीय अच्छे लाल की भगवान बदरी नारायण पर अटूट आस्था है। वर्ष 2002 में वह लगभग 850 किमी की पैदल यात्रा कर पहली बार बदरीनाथ धाम आए थे और लौटे भी पैदल ही। तब लाल जल संस्थान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे।

कहते हैं, ‘पहली बार मैंने अपने दिव्यांग पुत्र के उज्जवल भविष्य की मनौती मांगी थी। यात्रा सफल रही और पुत्र को सरकारी नौकरी मिल गई। इसके बाद मैंने 2007 व 2009 में बदरीनाथ की पैदल यात्रा की।’ अच्छे लाल ने बताया कि इस बार 45 दिन तक की पैदल चलकर वह बदरीनाथ धाम पहुंचे हैं। उनकी पत्नी शिक्षक हैं, जबकि वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

 

संत निरंकारी मंडल ने ऋषिकेश के गंगा घाटों को किया साफ़

आज विश्व पर्यावरण दिवस है, ऐसे में सभी जगह पर्यावरण को बचाने के लिए तमाम वार्ताए और गोष्ठी हो रही है। आस्था से जुडी गंगा को लेकर तमाम राज्य सरकार और केंद्र सरकार समय समय पर दावे तो करती है लेकिन ये दावे लगातार हवाई साबित हो रहे है, गंगा में प्रदुषण का मुख्य कारण बड़ी आबादी वाले छेत्र से गुजरने वाले नाले हे, जो शहर कि तमाम गंदगी को सीधे गंगा में मिला देते है, ऐसे में संत निरंकारी मंडल ने ऋषिकेश के गंगा घाटों को साफ़ रखने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर सफाई अभियान चलाया जिसमें 1500 लोगों ने हिस्सा लिया।

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गंगा अपने ही घर में मेली है तो दुसरे राज्यों की स्तिति तो और भी भयानक है उत्तराखंड के गढ़वाल छेत्र में गंगा के मुहाने से लेकर हरिद्वार तक कई शहरी और ग्रामीण आबादी वाले नगर पंचायत और पालिका छेत्र है जिन की आबादी और टूरिस्ट डेस्टिनेशन का सारा मल मूत्र सीवर का पानी सीधे गंगा में डाल दिया जाता है क्युकी अभी तक राज्य सरकार उत्तराखंड के गहन आबादी वाले छेत्रो में भी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा पाई है ऐसे में गंगा लगातार मैली होती जा रही है। संत निरंकारी मंडल ने ऋषिकेश के गंगा घाटों की सफाई का बेडा उठाते हुए विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर गंगा घाटों की सफाई की। इस सफाई अभियान में बच्चे-बूढ़े-जवान हर कोई बड़ी संख्या में शामिल हुए और पर्यावरण की सफाई में अपना योगदान देते दिखे ।

आज लगातार बढ़ते प्रदुषण के कारण गंगा भी अपनी निर्मलता को खोती जा रही है, केंद्र सरकार ने गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नमामि गंगे की शुरुवात की ,लेकिन गंगा को लेकर अभी तक कोई पोसिटिव रिपोर्ट सामने नहीं आयी है बल्कि गंगा का पानी आज आचमन योग्य भी नहीं बचा है। कार्यक्रम के संयोजक हरीश बागा का कहना है की जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सफाई के लिए आगे आते है वैसे ही हम सबको सफाई अभियान से जुड़ना चाहिए तभी जाकर गंगा नदी और हमारा देश स्वचछ और साफ़ हो सकेगा। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आज देश भर में सफाई अभियान चलाया जा रहा है लेकिन जरुरत है तो रोजाना इस दिन को मनाने की तब जाकर गंगा और गंगा से सटे इलाकों को साफ़ बनाया जा सकेगा।

विश्व पर्यावरण दिवस पर राज्यपाल ने लगाये पौधे 

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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आज प्रातः राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पाल ने राजभवन उद्यान परिसर में पौधारोपण किया।राज्यपाल ने मुख्यतः नार्थईस्ट में पाये जाने वाले ’अगर’ तथा स्वास्थ्य और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्व रखने वाले ’बेलपत्री’ के पौधे राजभवन में लगाये। अगर का पौधा विशेष रूप से एरोमेटिक उत्पाद बनाने में काम आता है।

इसकी लकड़ी भी उत्तम क्वालिटी की मानी जाती है। अगर की लकड़ी और पुष्पों का प्रयोग मुख्यतः एसेन्शियल तेल, परफ्यूम तथा अगरबत्ती बनाने के लिए किया जाता है। वहीं औषधीय गुणों से युक्त बेलपत्री भगवान शिव की आराधना प्रयोग किये जाने के कारण हिन्दू धर्म एक विशेष स्थान रखता है। बेल का फल शरीर को स्वस्थ बनाने की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी माना गया है।

मसूरी में शूटिंग करेंगे जाॅन अब्राहम

पहाड़ो की रानी मसूरी केवल पर्यटकों की ही नहीं बल्कि फिल्मी सितारों की भी पहली पसंद है।आए दिए किसी ना किसी फिल्म की शूटिंग मसूरी में होती ही रहती है। बहुत सी फिल्मों की शूटिंग के बाद एक बार फिर मसूरी तैयार है कैमरे में कैद होने के लिए। जी हां, जाॅन अब्राहम की अगली फिल्म की शूटिंग मसूरी और उसके आसपास के इलाकों में होनी है। एक हफ्ते की यह शूटिंग 6 जून से शुरु होगी। जाॅन की यह फिल्म जाॅन अब्राहम इंटरटेन्मेंट प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनने जा रही है।

यह फिल्म पोखरन में हुए भारत के परमाणु परीक्षण पर आधारित है। इस फिल्म के खास सीन मसूरी में शूट किए जाऐंगे और इस फिल्म में जाॅन अब्राहम मुख्य किरादार में है,  फिल्म की हीरोईन का नाम अभी मीङिया मे उजागर नहीं किया गया है।

आपको बता दें कि इससे पहले भी बहुत सी हाॅलीवुड फिल्में जैसे कि देवभूमि, बेस्ट चांस, अमेरिकन डाक्यूमेंट्री, एट लिंब्स योगा और सत्याग्रह, आस्ट्रेलियन टेवीविजन फिल्म डेस्टिनेशन इंडिया, उत्तराखंड में शूट हुई हैं। मसूरी में 2016 में अजय देवगन ने अपनी फिल्म शिवाय की शूटिंग 4-5 हफ्तों के लिये मसूरी और आस पास के इलाकों में की थी।

फिल्म के क्रू में लगभग 100 लोग होेंगे और सुपरस्टार जाॅन अब्राहम के रुकने की व्यवस्था मसूरी के पास पांच सितारा होटल में करवाई गई है।

चट्टानों से हिम्मत वाले हैं मसूरी के गजय सिंह

“वाटरवाटर ऐव्री वेयर एंड नाॅट ड्राप टू ड्रिंक”, यह अंग्रेजी कविता उत्तराखंड के लिए बिल्कुल सटीक है। भारत की पांच प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल उत्तराखंड आज भी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है और मैदानी क्षेत्र फल ्फूल रहे हैं। कुछ साल पहले तक जो प्राकृतिक जल संसाधन फसल उगाने के लिए इस्तेमाल होते थे जिन खेतखलिहानों के लिए यह राज्य मशहूर था आज वो सब सूख चुका हैं। गांव की औरतों को अपने घर से 3-4 किमी पैदल सफर कर पीने का पानी मिलता है जिसकी वजह से पहाड़ पर पलायन दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है।

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सरकारी योजनाओं और दावों से अलग मसूरी से 15 किमी दूर क्यार्कुली गाँव में रह रहे 70 साल के गजय सिंह ने अपने सपनों को पूरा करने का साथ साथ जहां चाह वहां राह की एक उम्मदा मिसाल पेश की है।  अपने अकेले के दम पर गजय दादाजी ने अपने आसपास के सभी क्षेत्रों को हरियाली से सराबोर कर दिया है। इसका कारण बना प्राकृतिक स्रोत से आने वाले पानी का सही उपयोग। गजय सिंह टीम न्यूजपोस्ट से बातचीत में बताते हैं कि, “पानी जीवन का सबसे महत्तवपूर्ण हिस्सा है,पानी है तो सब कुछ है,पानी सिर्फ इंसानों के लिए नहीं बल्कि पौधों के लिए भी जरुरी है। आज पानी ना होता तो मेरे पौधों का क्या होता, पानी खेतों के लिए, लाईट के लिए है अगर केवल सरकार इसपर ध्यान दे तो हमारे गढ़वाल और दूसरे क्षेत्रों के पलायन को रोका जा सकता है।”

लगभग 12 एकड़ में फैले इस छोटी सी इंडस्ट्री को करीब 10-12 लोग चला रहे हैं। मछली की टंकी, पौली हाउस, सेब, अाङू व अनार के पेड़, ट्रेडिशनल घराट जो 5 किलोवाट की बिजली पैदा करता है,इस फार्म में काम कर रहे हैं। गर्मीयों में अपने पिता से मिलने आई गजय की बेटी लक्ष्मी कहती हैं कि “हमे कभी नहीं लगता था कि पापा ऐसा कुछ कर पाऐंगे, हमें शुरुआत में यह सब बकवास लगता था, लेकिन धीरे-धीरे जब पापा ने यह सब किया तो हमें विश्वास नहीं हुआ कि एक पानी के स्रोत से सबकुछ कर सकते हैं।” 

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लेकिन यह सब एक दिन की मेहनत का नतीजा नही हैं, गजय सिंह को भी यह सब करने के लिए सिस्टम से लड़ाई लड़नी पड़ी। वह बताते है कि कागजों में फाइलें चलती हैं, हमारे चारों तरफ पानी है और हमारी मां बहनें दूर-दूर से बर्तनों में पानी ढोकर ला रहीं है, स्रोत होते हुए भी पानी की कमी है राज्य में, वजह केवल एक है: सारी स्कीम फाइलों में और सरकारी आॅफिस में पड़ी है।

कब हो सकेगी गंगा की सफाई ?

ऋषीकेश मे गंगा के तट हमेशा ही विदेशियों को अपनी और खींचते हैं। यही कारण है यहाँ साल भर बड़ी संख्या मे देसी-विदेशी सैलानी आते रहते हैं। योग और अध्यात्म मे डूबे इन लोगों पर गंगा के प्रति एक विशेष लगाव देखने को मिलता है। लेकिन लगातार गंगा में बढ़ते प्रदुषण के कारण आज गंगा नदी अपने ही घर में मैली होती जा रही है जिससे लोगों की आस्था पर भी ठेस पहुंच रही है। अब एक बार फिर गंगा को स्वचछ बनाने के लिए गंगा दशहरा के मौके पर पर्यावरण विद, संत-समाज की आवाज उठती दिखाई दे रही है। देवप्रयाग में पहाड़ों से उतरकर गंगा ऋषिकेश में शांत रूप में बहती हुई मैदानों का रूख करती है। अपने इस सफर में कई गंदे नाले और शहर की आबादी का बोझ गंगा के जल पर साफ देखा जा सकता है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि हाईकोर्ट को मां गंगा को बचाने के लिए जीवित मानव का दर्जा देना पड़ा। इसके बाद इसकी सुरक्षा के लिए एक कानून बना, लेकिन जन जागरूकता की कमी लगातार आस्था की इस धारा को अपवित्र करती जा रही है। जिस को एक बार फिर निर्मल और स्वच्छ बनाने के लिए लोगों की आवाज उठनी शुरू हो गयी है।

गंगा दशहरा के मौके पर अनेक धर्मगुरुओं और गंगा प्रेमियों ने लोगों से गंगा के प्रति जागरूक होने की बात कही। भले ही केंद्र सकरार ने गंगा के लिए कई योजनाओं को खड़ा किया हो लेकिन अभी भी गंगा की तस्वीर ज्यूँ की त्यूं  बनी हुयी है। केंद्र सरकार की नमामि गंगे प्रोजेक्ट भी उन्ही योजनाओं में से एक है जिसके अंतर्गत सरकार गंगा को स्वतच्छ और निर्मल बनाये जाने के लिए प्रयास करती जा रही है। तो वहीँ ऋषिकेश पहुचे केंद्रीय स्वच्छता एवं पेयजल मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है की “स्वच्छ गंगा के लिए प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार मिलकर काम कर रही है ,और जल्द ही गंगा के किनारे बसे सारे घाटों को साफ़ और प्रदुषण मुक्त किया जायेगा।”

ऋषिकेश देवभूमि का प्रवेश द्वार है जहां साल भर मां गंगा में स्नान करने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश विदेश से पहुंचते हैं। ऐसे में गंगा में बढ़ते प्रदूषण को लेकर उन सब की आस्था पर भी चोट पहुंचती है। जरूरत है तो समाज में जन जागरूकता फैलाने की जिससे आने वाले दिनों में गंगा स्वच्छ निर्मल होकर बहने लगे।

दून के खस्ताहाल एमएलए हॉस्टल का ख़ामियाज़ा भुगता केदारनाथ विधायक ने

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देहरादून के विधायक आवास के कमरा नं. 51 में शार्ट सर्किट से लगी आग जिसमे केदारनाथ विधायक मनोज रावत का हाथ झूलस गया।

जी हां आपको बता दें कि देहरादून के विधायक आवास के कमरा नंबर 51 में बीते रविवार अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। इस आग के लगने की वजह शार्ट सर्किट बताया जा रहा। कमरा नंबर 51 में केदारनाथ विधायक मनोज रावत रहते हैं।आग लगने पर खुद विधायक मनोज रावत ने बुझाई आग।

इस घटना में किसी जान माल की हानि की सूचना नहीं हैं लेकिन इस तरह की घटना से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य का विधायक आवास भी खस्ताहाल में है।आग लगने के बाद राज्य संपत्ति विभाग से कोई मदद को नहीं आया। बताया जा रहा हैं कि कई बार मदद के लिए पुकारने के बाद भी मदद के लिए कोई सामने नहीं आया।

यह शार्ट सर्किट एसी के केबल में आग लगने की वजह से हुआ जिसकी वजह है विधायक आवास में किसी तरह की मेंटेनेंन्स का ना होना साफ जाहिर करता है। यह हास्टल सालों से रेनोवेशन के इंतजार में हैं लेकिन इसमें किसी प्रकार की मरम्मत नहीं हो रही है, शायद सरकार को इस हास्टल में भी किसी बड़े हादसे का इंतजार है।