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रविवार की शाम, पेपर बैग बनाने के नाम!

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अपनी छठी वर्षगांठ के समारोह का समापन करके, देहरादून के शिक्षित छात्रों के संगठन, मेकिंग ऐ डिफ्फेरेंस बाय बीइंग दी डिफ्फेरेंस (मैड) संस्था ने वापस अपनी साप्ताहिक पर्यावरण संरक्षण अभियान पर अमल करने की शुरुआत कर दी है। इसी के अंतर्गत, रविवार को संगठन के सदस्य गांधी पार्क में एकत्र हुए। सभी सदस्यों को कहा गया था की वह पुराने अखबार, इत्यादि अपने साथ लाएं ताकि मैड की पूरी टुकड़ी बैठ कर उनके पेपर बैग सामूहिक रूप में बना सके। अभियान का संचालन कर रहे करन ओबेरॉय ने बताया कि ऐसा सभी दून वासी अपने परिवारों के साथ सप्ताह की छुट्टी के दिन अर्थात रविवार को बैठ कर कर सकते हैं। इस से न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का पुरज़ोर संदेश हम सब के घरों से जायगा बल्कि परिवार में भी साथ बैठ कर अच्छा काम करने की चेष्ठा उत्पन्न होगी।

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मैड के कुछ सदस्यों को तो पेपर बैग बनाना अच्छे से आता है जो पहले से मैड में आते आ रहे हैं। मैदाथन 2017 की धूम के बाद कुछ सदस्य नए भी थे जिन्हें पुराने सदस्यों ने पेपर बैग्स बनते कैसे हैं यह सिखाया। पेपर बैग बनाने के अलावा, मैड के सदस्यों ने अपने द्वारा चलाये गए गन्दी दीवारों के कायाकल्प अभियान की समीक्षा करी और देखा की कहाँ उनके द्वारा बनायी गयी चित्रकलाओं पर फिर गन्दगी हो गयी है। उसको साफ़ कैसे कर सकते हैं इस पर भी मंथन किया गया। इस अभियान में मैड के सदस्य शार्दुल असवाल, शिप्रा, शिवम्,अर्शित, अस्मिता, समृद्धि ने अहम् भूमिका निभाई।

सैलानियों से गुलजार सरोवर नगरी

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वीकेंड पर सरोवर नगरी, नैनीताल  में सैलानियों का सैलाब उमड़ पड़ा। माल रोड समेत अन्य प्रमुख मार्गो पर दिनभर पर्यटकों के वाहन रेंगते रहे। ज्योलीकोट, कालाढूंगी तिराहा, भवाली तिराहा, बल्दियाखान बाइपास पर वाहनों को रोक रोक कर आगे जाने की अनुमति दी गई, जिस कारण पर्यटकों की खासी फजीहत हुई। नगर के सभी पार्किग सैलानियों के वाहनों से पटे हैं तो होटल व गेस्ट हाउस भी फुल हो चुके हैं।

शनिवार को सुबह से ही नैनीताल रोड पर सैलानियों के वाहनों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। हल्द्वानी, भवाली व कालाढूंगी मार्ग से लगातार पहुंच रहे सैलानियों के वाहन से यातायात व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई। डीएसए कार पार्किग, सूखाताल व मेट्रोपोल कार पार्किग सैलानियों के वाहनों से खचाखच पैक हो गए।

कुमांऊ विवि में नये अध्यादेश से छात्रों को राहत

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कुमाऊं विवि विद्यालय परिषद, नैनीताल की बैठक में 2016-17 में पहली बार स्नातक स्तर पर लागू सेमेस्टर परीक्षा के लिए प्रभावी अध्यादेश को मंजूर कर लिया गया है। इसके बाद स्नातक प्रथम के हजारों छात्रों की संशय की स्थिति खत्म हो गई। विद्या परिषद ने विभिन्न संकायों में अध्ययनरत स्नातक स्तर के छात्रों के लिए अध्यादेशों में एकरूपता लाने के लिए 2017-18 से प्रभावी नए अध्यादेशों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। ऑर्डिनेंस के अनुसार 2016-17 में स्नातक प्रथम में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी पर पुराने अध्यादेश ही प्रभावी होंगे। एकेडेमिक काउंसिल ने ऑनलाइन एडमिशन को भी हरी झंडी दे दी है।

शुक्रवार को भूगर्भ विभाग सभागार में कुलपति प्रो. डीके नौडि़याल की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभागों की ओर से पाठ्यक्रम समिति की सिफारिशों को भी मंजूरी प्रदान की गई। किसी विभाग ने पाठ्यक्रम में संशोधन अथवा नए कोर्स आरंभ करने का प्रस्ताव नहीं रखा। इस दौरान संकायाध्यक्षों ने विभागों से संबंधित प्रस्ताव रखे। इसमें वह प्रस्ताव शामिल थे, जो कुलपति ने विशेषाधिकार के तहत शामिल किए थे व जिनका विद्या परिषद में अनुमोदन जरूरी था। बैठक में कुलसचिव प्रो. डीसी पांडे, डीन वाणिज्य एवं प्रबंधन अध्ययन प्रो. पीसी कविदयाल, डीन आर्ट प्रो. भगवान बिष्ट, डीन लॉ प्रो. डीके भट्ट, डीन साइंस प्रो. संतोष कुमार, प्रो. एके शर्मा, प्रो. सीसी पंत, प्रो. एसपीएस मेहता, प्रो. आरएस पथनी, प्राचार्य डॉ चंदन सिंह मेहता आदि मौजूद थे।

यह होगा बदलाव

नए ऑडिनेंस के अनुसार स्नातक के विद्यार्थी को बीएससी में तीन विषयों में से दो विषयों के हर पेपर में पास होना पड़ेगा। न्यूनतम उत्तीर्ण प्रतिशत 33 निर्धारित हैं। छात्रों को थ्योरी व प्रेक्टिकल में अलग-अलग उत्तीर्ण होना होगा। अब प्रथम सेमेस्टर की बैक तीसरे में, दूसरे की बेक चौथे में तथा पांचवें व छठे के लिए ही स्पेशल बैक का प्रावधान है। फाइनल सेमेस्टर के परिणाम के एक माह के भीतर स्पेशल बैक होगी।

बॉलीवुड में चमकने को तैयार उत्तराखंड का सितारा ”आशीष बिष्ट”

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सपने देखना आसान है पर सपनों को पूरा करना बहुत मुश्किल। इन्हीं मुश्किलों को पार करके जो आगे बढ़ गया वह केवल फिल्मों में ही नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी ”हीरो” बन जाता है।

आज के हमारे उभरते सितारे आशीष बिष्ट भी कुछ ऐसे ही हैं। मेहनत और लगन से आज उन्होंने वो मुकाम पाया जिसे वह हमेशा पाना चाहते थे।उत्तराखंड के पहाड़ों में पैदा हुए और फिर दिल्ली में शिफ्ट हुए लेकिन दिल तो हमेशा पहाड़ में ही रहा। जी हां, 27 साल के ग्रेजुएट आशीष बिष्ट अल्मोड़ा के छोटी सी जगह भिकियासैंण से हैं।आशीष का परिवार दिल्ली में रहता है।कुछ समय दिल्ली में नौकरी करने के बाद आशीष मुंबई में शिफ्ट हुए और काम की तलाश करने लगे। आशीष को गाने सुनना,क्रिकेट खलना और स्विमिंग करना पसंद है।खाली समय में वर्कआउट करना भी आशीष का पसंदीदा काम है।

आशीष के लाईमलाइट में आने की वजह है उनकी आने वाली फिल्म ”शब” जिसमें वह लीड यानि की मुख्य भूमिका में नजर आऐंगें । इस फिल्म में उनके साथ अनुभवी अदाकारा ”रवीना टंडन और अर्पिता चैर्टजी” हैं। फिल्म शब का ट्रेलर लाँच हो चुका है साथ ही फिल्म को दो गानें ”हमसफर और ओ साथी” भी अपनी जगह चार्टबस्टर में बना चुके हैं।भविष्य में आशीष एक और फिल्म में नजर आऐंगे जिसके बारे में उन्होंने फिलहाल ज्यादा नहीं बताया है।

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आशीष से यह पूछे जाने पर कि उन्होंने फिल्म लाईन क्यों चुनी उनका जवाब था कि ”शुरु से ही लोग मुझे कहते थे कि मैं एक्टिंग यानि फिल्मों में जा सकता हूं लेकिन तब मैं इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचता था”। समय के साथ आशीष अलग-अलग जगह पर सेलेक्ट होते गए और आज बाॅलीवुड में भी अपनी जगह बना ली है। दिल्ली में कुछ समय आशीष ने एक्टिंग के गुण सीखे हैं।आशीष ने बहुत से विज्ञापनों में काम किया है जैसे कि बिंगो यमिटोस,पारले किस-मी,केस्ट्रोल,टाटा डोकोमो आदि।

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आशीष बिष्ट काफी समय से 70 मिमी स्क्रीन में अपने बड़े लांच की प्रतीक्षा में टीवी उद्योग के आसपास रहे हैं। उन्होंने कुछ लोकप्रिय ब्रांडों के लिए कई विज्ञापन किए हैं और विज्ञापन दुनिया में वह काफी प्रसिद्ध चेहरा हैं। इस अभिनेता ने किसी और के साथ नहीं बल्कि हमारी ”ग्लोबल दिवा प्रियंका चोपड़ा” के साथ स्क्रीन स्पेस साझा किया है। विज्ञापन दुनिया में अपने आकर्षण से काफी लोगों को प्रभावित कर चुके आशीष कई लोकप्रिय टीवी विज्ञापनों के लिए चुने गए हैं।

आशीष से यह पूछने पर कि उनको अपने फिल्मी लाईन में सबसे ज्यादा क्या पसंद है। उनका जवाब बहुत हटकर और दिलचस्प था। आशीष ने बताया कि ”फिल्मों में काम करने से कभी बोरियत नहीं होती। आप एक हो लेकिन अलग-अलग कैरेक्टर प्ले करने का मौका आपको फिल्म के ज़रिए मिलता है,जो बहुत मुश्किल काम है। फिल्म लाईन की सबसे खास बात एक इंसान के अलग-अलग रुप जिसे देखकर लोग उसके साथ जुड़ाव महसूस करते हैं। आशीष ने कहा कि ”फिल्म में काम करते हुए मैंने महसूस किया कि इस दौरान आपका कंम्पटिशन अपने आप से होता है कि आपको अपने को प्रूव करना होता है कि आप कितना अच्छा कर सकते हो”।

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आशीष ‘शब’ के साथ अपनी बड़ी स्क्रीन की शुरुआत कर रहे हैं,और अपने इसी आकर्षण और सादगी के लिए युवा अभिनेता ”ओनीर” द्वारा इस फिल्म के लिए चुने गए हैं। ”ओनीर की फिल्म शब” में आशीष अजफ़ार की भूमिका में दिखेंगे। इस फिल्म में उनका चरित्र एक मॉडल का है जो ग्लैमर की दुनिया में करियर बनाने और अपने सपने को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। वह एक ड्रीमर है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है।

आशीष के लिए उनका कभी ना भूलने वाला पल था उनको शब में लीड कैरेक्टर का रोल मिलना। आशीष बताते हैं कि ”इस फिल्म की शूटिंग पिछले 2 साल से चल रही थी और शूटिंग के आखिरी दिन मैं यह सोचकर भावुक था कि आखिरकार मुझे वो मिल गया जिसकी तलाश मुझे सालों से थी”। आशीष बताते हैं कि ”पहले प्रोजेक्ट के पूरे होने की असली खुशी मुझे प्रोजेक्ट खत्म होने पर पता चली और शायद वो आशीष  की जिंदगी का वो पल बन गया जो वह कभी नहीं भूलेंगे”।

आशीष उत्तराखंड से खासा जुड़ाव महसूस करते हैं इसलिए उन्होंने अपने सभी पहाड़वासियों से गुज़ारिश की है जो लोग फिल्मी लाईन में अपना करियर बनाना चाहते हैं वह खूब मेहनत करें और कोशिश करते रहें।आशीष ने कहा कि बाॅलीवुड को अच्छा काम करने वाले और अच्छा दिखने वालों की बहुत जरुरत है। आशीष ने अपनी आने वाली फिल्म के लिए सबसे सर्पोट और सबका साथ मांगा है।

कहीं ”वेन हैरी मेट सैली” की काॅपी तो नहीं शाहरुख अनुष्का की ”जब हैरी मेट सेजल”?

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जब से शाह रुख़ और अनुष्का की फ़िल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ का नाम सामने आया है सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर खूब कमेंट्स किये जा रहे हैं और लोगों को भी लगता है कि यह फ़िल्म साल 1989 की हॉलीवुड फ़िल्म ‘व्हेन हैरी मेट सैली’ की कॉपी है या फिर इस पर आधारित है। आपको बता दें कि ‘व्हेन हैरी मेट सैली’ भी एक रोमांटिक फ़िल्म थी। इस फ़िल्म की फ़ेमस टैग लाइन है – ‘Can Men And Women Ever Just Be Friends?’ यानि, ‘क्या लड़का और लड़की कभी सिर्फ़ दोस्त बन सकते हैं?’

जी हां, यह लाइन आपने शाह रुख़ ख़ान की फ़िल्म ‘कुछ कुछ होता है’ में सुनी थी मगर, यह लाइन उससे पहले भी इस्तेमाल हो चुकी है, ये शायद ही कोई जानता था। तो, इम्तियाज़ अली की फ़िल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ और हॉलीवुड फ़िल्म ‘व्हेन हैरी मेट सैली’ के एक जैसे टायटल के अलावा यह फ़ेमस लाइन भी दोनों फ़िल्मों के बीच ख़ास कनेक्शन का काम कर रही है। दोनों ही फ़िल्मों में ट्रेवलिंग, दुनिया की अलग-अलग लोकेशंस और लीड्स के अचानक मिलने जैसी समानताएं दिख रही हैं।

बॉलीवुड ने कई बार हॉलीवुड फ़िल्मों को कॉपी किया है और क्या अब ‘जब हैरी मेट सेजल’ भी उस लिस्ट में शामिल होगी, यह तो मेकर्स ही जानें…आपको बता दें कि इस फ़िल्म में शाह रुख़ एक टूरिस्ट गाइड का किरदार निभा रहे हैं और अनुष्का गुजरात की लड़की का। यह फ़िल्म इस साल 4 अगस्त को रिलीज़ होगी।

कोतवाली में ही मंत्री जी के भाई ने दिखाई दबंगई

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सत्ता का नशा जब सर जढ कर बोलने लगता है तो मर्यादाओ और नियमों को ताक पर रख कर अपनी हनक दिखाने में कोई भी पिछे नहीं रहता। फिर चाहे किसी वर्दी उतारने का रौब हो या फिर किसी को ट्रांसफर कराने की धमकी आम बात हो जाती है। एेसा ही कुछ हुआ है बाजपुर में जहां मंत्री जी के भतिजे और भाई ने कोतवाली में जमकर कोहराम मचाया और जमकर सत्ता की हनक दिखाते हुए अधिकारियों को गालियां तक सुनाई। पुलिस के अधिकारी और सिपाही मंत्री जी के भाई और भतिजे पर कार्यवाही करने के बजाय उनको पुचकारते रहे और मामला शांत करने के लिए उनकी जी हूजूरी करते रहे। देखिये सत्ता की हनक का नजारा जब मंत्री जी के भतिजे की गाडी से हूटर उतारने को सिपाही ने कहा तो क्या हुआ।।
ये बाजपुर कोतवाली के बाहर हंगामा है कैसा बरपा? कौन है ये शख्स जो पुलिस को दे रहा है गालियां और दिखा रहा है अपना रौंब? क्यो पुलिस कर रही है इस आदमी की जी हूजूरी। और क्यो पुलिस की है बोलती बंद। आखिर क्या वजह है कि कोतवाली में पुलिस की बोलती बंद है और ये शख्स पुलिस को जमकर खरीखोटी सुना रहा है और क्यो पुलिस इस आदमी की जी हूजूरी कर रही है।ये विडियो देख कर आपके जहन में कुछ एसे ही सवाल उठने लाजमी हैं। लेकिन जब आप सुनेंगे हकीकत तो चौंक जाएंगे। क्योकि ये जनाब कोई और नहीं बल्कि प्रदेश के दबंग कैबिनेट मंत्री अरविन्द पाण्डेय के भाई जगदीश पाण्डेय है जो पुलिस को सत्ता की हनक जमकर दिखा रहे हैं।
दरअसल कुछ दिन पहले पुलिस की चैकिंग के दैरान हूटर बजाते हुए एक वाहन को दरोगा ने रोक तो लिया मगर उसमें सवार मंत्री जी के भतिजे अपना रौब दिखाने लगे तो दारोगा ने हूटर उतारने की नसीहत तो दे डाली मगर साहबजादे की शान हूटर उतारने पर कम ना हो जाती। लिहाजा अपने पिता यानी मंत्री जी के भाई को फोन किया गया। बस फिर क्या था तमाशा शुरु। और कोतवाली पहुंचकर जो हुआ वो आपके सामने है। मगर पुलिस बजाय कार्यवाही करने के दबंग मंत्री जी के डर से किसी तरह से मामले को शांत करने में जुट गयी और पुछे जाने पर समझौते की बाहकर ही पल्ला झाड रही है। जबकि कुछ दिन पहले ही मंत्री जी के बेटे द्वारा जिला अस्पताल में हंगामा करने और अधिकारियों को खरीकोटी सुनाने का मामला चर्चाओं में पहले ही बना है।

देहरादून यूथ फुटबाल लीग में होगी प्रतिभावान खिलाड़ियों की पहचान

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एक बार फिर फुटबाल फीवर लोगों के सिर चढ़ के बोल रहा है। जी हां एक और फुटबाल लीग युवा खिलाड़ियों के जोश को बढ़ा रहा है और उन्हें प्रेरणा दे रहा कि वह आगे अाकर अपनी प्रतिभा को दिखाएं।

राजा राम मोहन राय एकेडमी,क्लेमेंन्टाउन देहरादून में 175 उभरते फुटबालरों ने मैच होने वाले स्थान पर रिर्पोट किया। देहरादून यूथ फुटबाल लीग में लगभग 21 टीमों ने भाग ली जो 4 ग्रुप में बंटे हुए थे- यू10, यू12, यू14, और यू17 जिसे बाईचुंग भूटिया स्कूल ने आयोजित किया।

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इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य इस खेल को लोकप्रिय बनाने के साथ ही सबसे प्रतिभावान खिलाड़ियों की पहचान करके उन्हें विद्यालय की तरफ से प्रशिक्षण छात्रवृत्ति की पेशकश करना है। बीबीएफएस कोच उन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए भी स्काउट करेंगे जो ऑल इंडिया फुटबॉल महासंघ द्वारा आयोजित यू -13, यू -15 और यू -18 आई-लीग प्रतियोगिताओं में अकादमी का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त करेंगे।

कैलाश यात्रा का पहला जत्था पहुंचा गरमपानी

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आदि कैलाश यात्रा के पहले दल के गरमपानी पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। कुछ देर विश्राम के बाद दल अल्मोड़ा के लिए रवाना हो गया।

आदि कैलाश यात्रा का 45 सदस्यीय दल के गरमपानी पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान कोसी घाटी भोले बाबा के जयकारों से गूंज उठी। 45 सदस्यी दल में 11 महिलाएं व 34 पुरुष हैं।

दल में हरियाणा, नई दिल्ली, केरला, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, हैदराबाद व तेलंगाना के सदस्य हैं। कुछ देर विश्राम के बाद दल अल्मोड़ा के लिए रवाना हो गया। यह दल आज अल्मोड़ा में विश्राम करेगा।

हत्यारा आशिक और बेटी गिरफ्तार

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पृथ्वी सिंह हत्याकांड में फरार चल रही बेटी और उसके आशिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। इससे पहले मृतक की पत्नी रेनू को पुलिस हत्या के आरोप में जेल भेजा जा चुका है। मामला विकासनगर, ग्राम फसियापुरा, काशीपुर का है जहां 24 अप्रैल को अपनी जमीन 14 लाख 45 हजार रुपये में बेचकर पृथ्वी सिंह आया था। और उसी की पत्नी और बेटी ने पैसोॆ के लालच में पहले घर में डकैती का प्लान बनाया मगर जब पृथवी सिंह ने विरोध किया तो उसकी हत्या कर दी गयी।

हरप्रीत सिंह का पृथ्वी सिंह की बेटी के साथ प्रेम-प्रसंग चल रहा था। पृथ्वी सिंह अपनी बेटी के प्रेम प्रसंग से नाखुश था मगर उसकी पत्नी दौलत की लालची होने के कारण बेटी के नाजायज सम्बन्धो से गुरेज नहीं रखती थी और बेटी के आशिक के साथ मिलकर ही डकैती और हत्या का पुरा प्लान रच डाला।  25 अप्रैल की रात  हरप्रीत को फोन पर बताया था कि बेची गई जमीन के रुपये घर में हैं। वह घर का मुख्य दरवाजा और कमरे का दरवाजा खुला छोड़ देगी। इस दौरान आकर रकम ले जाना। अधिक रात होने पर मां रेनू और पिता पृथ्वी सिंह कमरे का अंदर से दरवाजा बंद कर सो गए जब हरप्रीत ने कुंडा खटखटाया तो पृथ्वी ने दरवाजा खोला। हरप्रीत को देखकर वह आगबबूला हो गया। इस बीच दोनों में हाथापाई हुई। धक्का लगने से पृथ्वी का सिर फोल्डिंग में लग गया जिससे वह अचेत हो गया। इस दौरान उसकी मौत हो गई। रेनू ने रुपयों को बिस्तर के नीचे छिपा दिया।

घटना के बाद बेटी व हरप्रीत फरार हो गए। जबकि, मां को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को डॉ. एएसपी जगदीश चंद्र व सीओ राजेश भट्ट ने बताया कि करीब 45 दिन बाद हत्यारोपी बेटी और उसके प्रेमी हरप्रीत को आठ जून को रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी हरप्रीत को काशीपुर कोर्ट में और बेटी को रुद्रपुर किशोर बोर्ड में पेश किया।

सावधान!! कहीं चावल की जगह प्लास्टिक तो नहीं खा रहे आप?

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सावधान! अगर आप खाने में चावल खाना पसंद करते हैं तो हो जाईये सावधान क्योकि अब बाजार में धड़ल्ले से प्लास्टिक का चावल बिक रहा है और इसकी पहचान करना भी बेहद मुश्किल है क्योकि इसे देखकर आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि ये चावल प्लास्टिक का है या असली है। ब्रेंडेड पैकेट में अच्छी खासी कीमत पर ये प्लास्टिक का चावल बाजार में बिक रहा है और लोगों की जिन्दगी से खिलवाड हो रहा है।

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काशीपुर में ताजा मामला तब सामने आया जब काशीपुर की घास मंडी निवासी एक परिवार खाने बैठा तो चावल प्लास्टिक के निकल आए। इससे परिवार में हड़कंप मच गया। मामले की सूचना पर व्यापारियों का जमावड़ा लग गया और रोष जताया। घास मंडी निवासी, राधा वर्मा ने शनिवार को भगौने में चावल डालकर गैस पर रख दिया। बाद में उन्होंने भगौने में देखा तो चावल हलवे की तरह हो गए। उन्होंने चावल को खराब समझकर भगौने से माड़ निकाल कर एक किनारे रख दिया और रोटी बनाने लग गई। करीब 20 मिनट बाद उन्होंने भगौने में देखा तो चावल बिखरे व सुंदर दिखे। इसे देख वह हैरत में पड़ गई। इसके बाद उन्होंने पति सियाराम, देवर परशुराम और बेटे श्रीनाथ वर्मा को रोटी के साथ चावल परोस दिए। सियाराम व परशुराम चावल खाने लगे तो चावल का अजीब स्वाद लगा। शक होने पर श्रीनाथ ने चावल की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करते हुए चावल का लड्डू बनाकर जमीन पर पटका तो लड्डू रबड़ की गेंद की तरह उछल गया। इस पर परिजनों ने प्लास्टिक के चावल होने की आशंका जताते हुए खाना छोड़ दिया। इस पर व्यापारी व आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए। उन्होंने एसडीएम दयानंद सरस्वती से प्लास्टिक के चावल होने की आशंका जताते हुए जांच कराने की मांग की।

सियाराम वर्मा ने बताया कि शुक्रवार को ही मोहल्ले की दुकान से पांच किलोग्राम बासमती चावल का कट्टा 580 रुपये में खरीद कर लाया था। करीब डेढ़ साल वह यही चावल खा रहे हैं। कभी इस तरह चावल में स्वाद नहीं आया था।