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कहीं ”वेन हैरी मेट सैली” की काॅपी तो नहीं शाहरुख अनुष्का की ”जब हैरी मेट सेजल”?

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जब से शाह रुख़ और अनुष्का की फ़िल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ का नाम सामने आया है सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर खूब कमेंट्स किये जा रहे हैं और लोगों को भी लगता है कि यह फ़िल्म साल 1989 की हॉलीवुड फ़िल्म ‘व्हेन हैरी मेट सैली’ की कॉपी है या फिर इस पर आधारित है। आपको बता दें कि ‘व्हेन हैरी मेट सैली’ भी एक रोमांटिक फ़िल्म थी। इस फ़िल्म की फ़ेमस टैग लाइन है – ‘Can Men And Women Ever Just Be Friends?’ यानि, ‘क्या लड़का और लड़की कभी सिर्फ़ दोस्त बन सकते हैं?’

जी हां, यह लाइन आपने शाह रुख़ ख़ान की फ़िल्म ‘कुछ कुछ होता है’ में सुनी थी मगर, यह लाइन उससे पहले भी इस्तेमाल हो चुकी है, ये शायद ही कोई जानता था। तो, इम्तियाज़ अली की फ़िल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ और हॉलीवुड फ़िल्म ‘व्हेन हैरी मेट सैली’ के एक जैसे टायटल के अलावा यह फ़ेमस लाइन भी दोनों फ़िल्मों के बीच ख़ास कनेक्शन का काम कर रही है। दोनों ही फ़िल्मों में ट्रेवलिंग, दुनिया की अलग-अलग लोकेशंस और लीड्स के अचानक मिलने जैसी समानताएं दिख रही हैं।

बॉलीवुड ने कई बार हॉलीवुड फ़िल्मों को कॉपी किया है और क्या अब ‘जब हैरी मेट सेजल’ भी उस लिस्ट में शामिल होगी, यह तो मेकर्स ही जानें…आपको बता दें कि इस फ़िल्म में शाह रुख़ एक टूरिस्ट गाइड का किरदार निभा रहे हैं और अनुष्का गुजरात की लड़की का। यह फ़िल्म इस साल 4 अगस्त को रिलीज़ होगी।

कोतवाली में ही मंत्री जी के भाई ने दिखाई दबंगई

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सत्ता का नशा जब सर जढ कर बोलने लगता है तो मर्यादाओ और नियमों को ताक पर रख कर अपनी हनक दिखाने में कोई भी पिछे नहीं रहता। फिर चाहे किसी वर्दी उतारने का रौब हो या फिर किसी को ट्रांसफर कराने की धमकी आम बात हो जाती है। एेसा ही कुछ हुआ है बाजपुर में जहां मंत्री जी के भतिजे और भाई ने कोतवाली में जमकर कोहराम मचाया और जमकर सत्ता की हनक दिखाते हुए अधिकारियों को गालियां तक सुनाई। पुलिस के अधिकारी और सिपाही मंत्री जी के भाई और भतिजे पर कार्यवाही करने के बजाय उनको पुचकारते रहे और मामला शांत करने के लिए उनकी जी हूजूरी करते रहे। देखिये सत्ता की हनक का नजारा जब मंत्री जी के भतिजे की गाडी से हूटर उतारने को सिपाही ने कहा तो क्या हुआ।।
ये बाजपुर कोतवाली के बाहर हंगामा है कैसा बरपा? कौन है ये शख्स जो पुलिस को दे रहा है गालियां और दिखा रहा है अपना रौंब? क्यो पुलिस कर रही है इस आदमी की जी हूजूरी। और क्यो पुलिस की है बोलती बंद। आखिर क्या वजह है कि कोतवाली में पुलिस की बोलती बंद है और ये शख्स पुलिस को जमकर खरीखोटी सुना रहा है और क्यो पुलिस इस आदमी की जी हूजूरी कर रही है।ये विडियो देख कर आपके जहन में कुछ एसे ही सवाल उठने लाजमी हैं। लेकिन जब आप सुनेंगे हकीकत तो चौंक जाएंगे। क्योकि ये जनाब कोई और नहीं बल्कि प्रदेश के दबंग कैबिनेट मंत्री अरविन्द पाण्डेय के भाई जगदीश पाण्डेय है जो पुलिस को सत्ता की हनक जमकर दिखा रहे हैं।
दरअसल कुछ दिन पहले पुलिस की चैकिंग के दैरान हूटर बजाते हुए एक वाहन को दरोगा ने रोक तो लिया मगर उसमें सवार मंत्री जी के भतिजे अपना रौब दिखाने लगे तो दारोगा ने हूटर उतारने की नसीहत तो दे डाली मगर साहबजादे की शान हूटर उतारने पर कम ना हो जाती। लिहाजा अपने पिता यानी मंत्री जी के भाई को फोन किया गया। बस फिर क्या था तमाशा शुरु। और कोतवाली पहुंचकर जो हुआ वो आपके सामने है। मगर पुलिस बजाय कार्यवाही करने के दबंग मंत्री जी के डर से किसी तरह से मामले को शांत करने में जुट गयी और पुछे जाने पर समझौते की बाहकर ही पल्ला झाड रही है। जबकि कुछ दिन पहले ही मंत्री जी के बेटे द्वारा जिला अस्पताल में हंगामा करने और अधिकारियों को खरीकोटी सुनाने का मामला चर्चाओं में पहले ही बना है।

देहरादून यूथ फुटबाल लीग में होगी प्रतिभावान खिलाड़ियों की पहचान

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एक बार फिर फुटबाल फीवर लोगों के सिर चढ़ के बोल रहा है। जी हां एक और फुटबाल लीग युवा खिलाड़ियों के जोश को बढ़ा रहा है और उन्हें प्रेरणा दे रहा कि वह आगे अाकर अपनी प्रतिभा को दिखाएं।

राजा राम मोहन राय एकेडमी,क्लेमेंन्टाउन देहरादून में 175 उभरते फुटबालरों ने मैच होने वाले स्थान पर रिर्पोट किया। देहरादून यूथ फुटबाल लीग में लगभग 21 टीमों ने भाग ली जो 4 ग्रुप में बंटे हुए थे- यू10, यू12, यू14, और यू17 जिसे बाईचुंग भूटिया स्कूल ने आयोजित किया।

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इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य इस खेल को लोकप्रिय बनाने के साथ ही सबसे प्रतिभावान खिलाड़ियों की पहचान करके उन्हें विद्यालय की तरफ से प्रशिक्षण छात्रवृत्ति की पेशकश करना है। बीबीएफएस कोच उन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए भी स्काउट करेंगे जो ऑल इंडिया फुटबॉल महासंघ द्वारा आयोजित यू -13, यू -15 और यू -18 आई-लीग प्रतियोगिताओं में अकादमी का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त करेंगे।

कैलाश यात्रा का पहला जत्था पहुंचा गरमपानी

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आदि कैलाश यात्रा के पहले दल के गरमपानी पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। कुछ देर विश्राम के बाद दल अल्मोड़ा के लिए रवाना हो गया।

आदि कैलाश यात्रा का 45 सदस्यीय दल के गरमपानी पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान कोसी घाटी भोले बाबा के जयकारों से गूंज उठी। 45 सदस्यी दल में 11 महिलाएं व 34 पुरुष हैं।

दल में हरियाणा, नई दिल्ली, केरला, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, हैदराबाद व तेलंगाना के सदस्य हैं। कुछ देर विश्राम के बाद दल अल्मोड़ा के लिए रवाना हो गया। यह दल आज अल्मोड़ा में विश्राम करेगा।

हत्यारा आशिक और बेटी गिरफ्तार

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पृथ्वी सिंह हत्याकांड में फरार चल रही बेटी और उसके आशिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। इससे पहले मृतक की पत्नी रेनू को पुलिस हत्या के आरोप में जेल भेजा जा चुका है। मामला विकासनगर, ग्राम फसियापुरा, काशीपुर का है जहां 24 अप्रैल को अपनी जमीन 14 लाख 45 हजार रुपये में बेचकर पृथ्वी सिंह आया था। और उसी की पत्नी और बेटी ने पैसोॆ के लालच में पहले घर में डकैती का प्लान बनाया मगर जब पृथवी सिंह ने विरोध किया तो उसकी हत्या कर दी गयी।

हरप्रीत सिंह का पृथ्वी सिंह की बेटी के साथ प्रेम-प्रसंग चल रहा था। पृथ्वी सिंह अपनी बेटी के प्रेम प्रसंग से नाखुश था मगर उसकी पत्नी दौलत की लालची होने के कारण बेटी के नाजायज सम्बन्धो से गुरेज नहीं रखती थी और बेटी के आशिक के साथ मिलकर ही डकैती और हत्या का पुरा प्लान रच डाला।  25 अप्रैल की रात  हरप्रीत को फोन पर बताया था कि बेची गई जमीन के रुपये घर में हैं। वह घर का मुख्य दरवाजा और कमरे का दरवाजा खुला छोड़ देगी। इस दौरान आकर रकम ले जाना। अधिक रात होने पर मां रेनू और पिता पृथ्वी सिंह कमरे का अंदर से दरवाजा बंद कर सो गए जब हरप्रीत ने कुंडा खटखटाया तो पृथ्वी ने दरवाजा खोला। हरप्रीत को देखकर वह आगबबूला हो गया। इस बीच दोनों में हाथापाई हुई। धक्का लगने से पृथ्वी का सिर फोल्डिंग में लग गया जिससे वह अचेत हो गया। इस दौरान उसकी मौत हो गई। रेनू ने रुपयों को बिस्तर के नीचे छिपा दिया।

घटना के बाद बेटी व हरप्रीत फरार हो गए। जबकि, मां को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को डॉ. एएसपी जगदीश चंद्र व सीओ राजेश भट्ट ने बताया कि करीब 45 दिन बाद हत्यारोपी बेटी और उसके प्रेमी हरप्रीत को आठ जून को रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी हरप्रीत को काशीपुर कोर्ट में और बेटी को रुद्रपुर किशोर बोर्ड में पेश किया।

सावधान!! कहीं चावल की जगह प्लास्टिक तो नहीं खा रहे आप?

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सावधान! अगर आप खाने में चावल खाना पसंद करते हैं तो हो जाईये सावधान क्योकि अब बाजार में धड़ल्ले से प्लास्टिक का चावल बिक रहा है और इसकी पहचान करना भी बेहद मुश्किल है क्योकि इसे देखकर आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि ये चावल प्लास्टिक का है या असली है। ब्रेंडेड पैकेट में अच्छी खासी कीमत पर ये प्लास्टिक का चावल बाजार में बिक रहा है और लोगों की जिन्दगी से खिलवाड हो रहा है।

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काशीपुर में ताजा मामला तब सामने आया जब काशीपुर की घास मंडी निवासी एक परिवार खाने बैठा तो चावल प्लास्टिक के निकल आए। इससे परिवार में हड़कंप मच गया। मामले की सूचना पर व्यापारियों का जमावड़ा लग गया और रोष जताया। घास मंडी निवासी, राधा वर्मा ने शनिवार को भगौने में चावल डालकर गैस पर रख दिया। बाद में उन्होंने भगौने में देखा तो चावल हलवे की तरह हो गए। उन्होंने चावल को खराब समझकर भगौने से माड़ निकाल कर एक किनारे रख दिया और रोटी बनाने लग गई। करीब 20 मिनट बाद उन्होंने भगौने में देखा तो चावल बिखरे व सुंदर दिखे। इसे देख वह हैरत में पड़ गई। इसके बाद उन्होंने पति सियाराम, देवर परशुराम और बेटे श्रीनाथ वर्मा को रोटी के साथ चावल परोस दिए। सियाराम व परशुराम चावल खाने लगे तो चावल का अजीब स्वाद लगा। शक होने पर श्रीनाथ ने चावल की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करते हुए चावल का लड्डू बनाकर जमीन पर पटका तो लड्डू रबड़ की गेंद की तरह उछल गया। इस पर परिजनों ने प्लास्टिक के चावल होने की आशंका जताते हुए खाना छोड़ दिया। इस पर व्यापारी व आसपास के लोग मौके पर एकत्र हो गए। उन्होंने एसडीएम दयानंद सरस्वती से प्लास्टिक के चावल होने की आशंका जताते हुए जांच कराने की मांग की।

सियाराम वर्मा ने बताया कि शुक्रवार को ही मोहल्ले की दुकान से पांच किलोग्राम बासमती चावल का कट्टा 580 रुपये में खरीद कर लाया था। करीब डेढ़ साल वह यही चावल खा रहे हैं। कभी इस तरह चावल में स्वाद नहीं आया था।

अनशन में बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद  को पुलिस ने जबरन उठाया

उत्तराखंड के जोशीमठ पूर्णागिरि मंदिर में  विधिवत पूजा अर्चना और मंदिर में नहीं जाने देने  को लेकर पिछले 4 दिनों से अनशन में बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद को पुलिस ने जबरन अनशन से उठा के ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया जबरन पुलिस के उठने और उन के साथियो पर लाठी चार्ज पर स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद ने कहां कि पुलिस अपने बल का प्रयोग कर रही है।
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साथ ही उनका कहना था की हमारी बस इतनी मांग है की हम को जोशीमठ में जो ज्योति मठ है उसमे जाने दिया जाये, हम सन्यासी है और हमको ही वह जाने से रोका जा रहा है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद ने सरकार से अपील की है हम संन्यसियो की मदद की जाये और जो लोग हमको ज्योति मठ में जाने से रोक रहे है उनको समझाया जाये और हम को ज्योति मठ जाने दिया जाये।

टिहरी सांसद ने देहरादून महाराजा प्रदुम्मन शाह की समाधि का किया निरीक्षण

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टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह, ने देहरादून के महाराजा प्रदुम्मन शाह की समाधि का निरीक्षण किया। इस अवसर पर श्रीमती शाह ने गंगा जल से समाधि की सफाई की और महाराजा प्रदुम्मन शाह की तस्वीर पर माल्यार्पण किया । महाराजा प्रदुम्मन शाह स्मारक निर्माण समिति के अध्यक्ष शीशपाल गुसाईं ने सांसद को प्रदुम्मन शाह के वीरता का इतिहास बताया और जीर्ण-शीर्ण समाधि स्थल भवन को नया रूप देने की आवशयकता बतायी। सांसद ने जीर्णोंधार के एक हिस्से के लिए समिति को पांच लाख रूपये देने की मौके पर घोषणा की, साथ ही कहा कि और पांच लाख रूपये इसके खर्च करने के बाद दिये जायेंगे।
सांसद ने कहा कि इस समाधि स्थल को प्राचीन वास्तुकला के हिसाब से बनाया जाय और इसके बन जाने से लोग सैर सपाटे करने आयेंगे ही साथ ही ऐतिहासिक स्थल देखने को मिलेगा। सांसद ने कहा कि महाराजा प्रदुम्मन षाह से सम्बन्धित पाठ्यक्रम किताबों में शामिल कर स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिये।
टिहरी सांसद ने कहा कि गढ़वाल के 54वें प्रतापी महाराजा प्रदुम्मन शाह के प्रति मेरा पूर्ण रूप से सम्मान व आदर है। 14 मई, 1804 को खुड़बुडा़, देहरादून में वे वीरगति को प्राप्त हुए थे तथा शहीद हो गये थे।  महाराजा प्रदुम्मन शाह के पुत्र टिहरी के प्रथम महाराजा श्री सुदर्शन शाह ने यह समाधि आज से 200 साल पहले बनाई थी। यह समाधि एक ऐतिहासिक जगह है। आने वाले दिनों में लोग देहरादून न सिर्फ सैर सपाटे के लिए आयेंगे बल्कि इस जगह पर जाकर एक गौरवशिली इतिहास का अध्ययन करेंगे।
यहां इतना साहित्य उपलब्ध हो कि तमाम स्कूलों को यह साहित्य दिया जा सके। महाराजा प्रदुम्मन शाह गढ़वाल के ही नहीं, कुमाऊं के भी महाराजा रहे। उन्होंने अपनी जमीन बचाने के लिए युद्ध किया और अन्तिम समय तक वे धरती तक चिपके रहे। मैं मांग करती हूॅ कि खुड़बुड़ा गेट, देहरादून में समाधि स्थल के जीर्णोधार के साथ-साथ लैन्सडाउन चैक में खाली नगर निगम की भूमि में महाराजा प्रदुम्मन शाह की बड़ी मूर्ति लगे।

हरीश रावत ने “काफल पार्टी” के ज़रिये जोड़े पहाड़ से तार

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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने कैम्प कार्यालय राजपुर रोड़, देहरादून में उत्तराखण्ड की परम्परा व संस्कृति को जोड़ते हुए काफल पार्टी का आयोजन किया। जिसमें पत्रकार, समाजसेवा से जुड़े लोग व कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ काफल व चाट का आनन्द लिया। उन्होंने इस अवसर पर बोलते हुए कहा काफल फल ही नहीं है यह हमारी संस्कृति, परम्परा व बेटी के अपने मायके से रिश्ते का प्रतिक है। उन्होंने कुछ पत्रकारों के इसके राजनैतिक निहर्ताथ के सवाल पर कहा कि मैं तो यह चाहता हॅू कि इस परम्परा से जुड़े और इस परम्परा को आगे भी बढ़ायें। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि मेरी इस काफल पार्टी में बढ़चड़ कर सिरकत की, मुझे विश्वास है कि उनके द्वारा पर्वतीय क्षेत्र की विकास जो योजनाऐं, गांव के विकास का जो ऐंजडा मैंने बनाया था, मेरा मडुवा, कोदो, झंगोरा फोकस में रहेगा व मेरा उत्तराखण्ड व गैरसैंण का एजेंडा मजबूत होगा।

हर गांव का विकास सरकार का केन्द्र बिन्दु बनेगा। पर्वतीय क्षेत्र का दुर्गम विकट जीवन को राहत पहुंचाने वाला उनका रोड़ मैप से कोई हटा नहीं पायेगा। इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस केमटी के राष्ट्रीय सचिव एवं विधायक काजी निजामुद्दीन, महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अनुपमा रावत, पूर्व मुख्यमंत्री के मुख्य प्रवक्ता, सुरेन्द्र कुमार, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी, प्रवक्ता आर0पी0 रतूड़ी, गरिमा दसौनी, संजय भट्ट, शोभा राम, स्टेट यूनियन नेता रवि पचैरी, आर0ए0 खान, उपाध्यक्ष, मदरसा बोर्ड, इकबाल सिद्वक्की, प्रदेश सचिव, कमल रावत, सय्यद मोहम्मद कासिम, कमल शर्मा, साधना तिवारी कई समाज सेवी एवं कांग्रेस नेता आदि उपस्थित थे।

जिला अस्पताल चमोली में करा सकते हैं आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन

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सूचना तकनीक के इस्तेमाल से मरीजों को मिलने वाले सेलॉवाओं में सुधार के इरादे से चल रही योजनाओं में अब उत्तराखंड के चमोली ने भी अपना नाम दर्ज करा लिया है। चमोली जिले के राजकीय जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में अब आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। इसके चलते मरीजों को ओपीडी में अपना इलाज करवाने के लिये अस्पताल आकर अपना नाम दर्ज कराने की जरूरत नही है। मरीज घर बैठे ही आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इस से  उन्हें अस्पताल जाकर रजिस्ट्रेशन की लाइन में लगने से राहत मिल सकेगी। एम्स, ऋषिकेश के बाद चमोली का जिला अस्पताल राज्य का पहला ऐसा अस्पताल बना है जहां आॅनलाइ रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

इस प्रोजेक्मट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस सुव्रिधा से न सिर्फ मरीजों को सुविधा होगी बल्कि अस्पताल के डाॅक्टर और स्टाफ मरीजों के आने से पहले उनके इलाज और उपचार से जुड़े कागजात और कुछ केस में दवाई भी तैयार रख सकते हैं। इससे मरीजों के इलाज में तेजडीभी आयेगी और डाॅक्टरों पर भी भार कम हो सकेगा। इस सुविधा का लाब उठाने के लिये मरीज ors.gov.in पर जाकर अपना पंजीकरण और रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।