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रानीचौरी कृषि मौसम केंद्र दे रहा आठ जिलों को सेवाएं

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औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के रानीचौरी परिसर स्थित ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केंद्र का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्र वर्तमान में उत्तराखंड के आठ जिलों को सेवाएं प्रदान कर रहा है। इसके तहत 49 हजार काश्तकारों को मौसम से जुड़ी जानकारी एसएमएस के माध्यम से दी जा रही है।

मौसम विज्ञान केंद्र ने जुलाई 2014 में जब इस सेवा की शुरुआत की, तब सौ के आसपास काश्तकार इससे जुड़े थे। धीरे-धीरे काश्तकारों को सेवा से जोड़ा गया और उनके मोबाइल नंबर केंद्र में फीड किए गए। नतीजा, आज यह संख्या बढ़कर 49 हजार पहुंच गई है। विदित हो कि परिसर में मौसम विज्ञान केंद्र तो पहले से ही काम कर रहा था, लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा था। इसी को देखते हुए केंद्र ने एसएमएस सेवा की शुरुआत की। ताकि किसान मौसम के हिसाब से खेती से संबंधित कार्य निष्पादित कर सकें।

प्रगतिशील काश्तकार मंगलानंद डबराल, कुशाल ङ्क्षसह आदि का कहना है कि केंद्र से मोबाइल पर जो एसएमएस मिलता है, उससे हमारे लिए खेती करना सुविधाजनक हो गया है। अब मौसम केंद्र की सूचना के हिसाब से हम रोपाई करने या फसल काटने की प्लानिंग करते हैं।

ऐसे दी जाती है जानकारीः मौसम विज्ञान केंद्र आने वाले सप्ताह के मौसम का पूर्वानुमान एसएमएस के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराता है। मसलन हल्की, मध्यम या तेज बारिश होगी अथवा धूप या बादल रहेंगे। तापमान कितना रहेगा वगैरह-वगैरह। साथ ही ये बताया जाता है कि संबंधित मौसम के हिसाब से कौन सी खेती उपयोगी होगी।

इन जिलों को मिल रही सेवाः टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ व चंपावत।

किसान को मौसम के पूर्वानुमान को लेकर  मिल जा रही है सटीक जानकारीः इस संबंध में ग्रामीण मौसम कृषि सेवा केंद्र के तकनीकी अधिकारी प्रकाश नेगी का कहना है कि पहले किसान मौसम को लेकर अंदाजा लगाया करते थे, लेकिन अब उन्हें मौसम के पूर्वानुमान को लेकर सटीक जानकारी मिल जा रही है। आने वाले समय में इस सेवा से और काश्तकार जोड़े जाएंगे। ताकि वे किसी भी परिस्थिति के लिए अपडेट रहें।

 

पहाड़ी संगीत को नया जीवन दे रहे हैं शाश्वत जे पंडित

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उत्तराखंड मे प्रतिभा का भरमार है, चाहें वह कोई भी क्षेत्र हो, हर तरह की प्रतिभा आपको देखने को मिलेगी। ऐसे ही एक प्रतिभावान संगीतकार हैं देवप्रयाग के 29 साल के शाश्वत जे पंडित। यूं तो यह गाते बहुत अच्छा हैं लेकिन पढ़ाई में भी यह किसी से कम नहीं। बायोटेक्नालाजी में एमएसई और एम.फिल, और उसके बाद वोकल्स में प्रभाकर किया है शाश्वत ने।

परिवार में दो जुड़वा बहनें जिनकी शादी हो चुकी हैं और मां हैं। पिताजी का दो साल पहले देहांत हो गया था। एक संगीतकार की हाबी वैसे पूछने की बात है लेकिन शाश्वत ने बताया कि उन्हें नए तरह का संगीत खोजना पसंद हैं, इसके अलावा इंटरनेट सर्फिंग करना, बैडमिंटन खेलना आदि पसंद हैं लेकिन सबसे ज्यादा समय वह अपने म्यूजिक प्रोडक्शन को देते हैं। शाश्वत क्रिएटिविटी में विश्वास रखते हैं इसलिए वह अपना ज्यादा समय क्रिएटिव कामों में देते हैं।शाश्वत ने अपने घर में अपना म्यूजिक स्टूडियों बनाया है जिसपर बैठकर वह घंटों तक तरह-तरह के म्यूजिक को बनाते हैं।

शाश्वत हमेशा से ही संगीत से जुड़ाव रखते थे शायद इसलिए इतनी पढ़ाई करने के बाद भी उन्होंने अपना पैशन कभी नहीं छोड़ा। पारंपरिक उत्तराखंडी संगीत को ऊचाईंयों तक लेकर जाना शाश्वत का सपना है। अपने सपने को पूरा करने के लिए शाश्वत दिन रात एक कर रहे हैं। एक अच्छा इंसान बनना शायद हर कोई चाहता है लेकिन कुछ हटकर करना केवल गिने चुने लोग ही जानते हैं। इन्हीं कुछ लोगों में शाश्वत ने भी अपनी जगह पहाड़ी लोगों के बीच बना ली है। एक के बाद एक अपने एल्बम कवर के जरिए शाश्वत हर पहाड़ी के पसंदीदा म्यूजिशियन बन चुके हैं। यूट्यूब पर अपने कवर के जरिए शाश्वत अपने प्रशंसकों के साथ जुड़े हुए हैं। आज से कुछ साल बाद शाश्वत पहाड़ी संगीत को एक बहुत ऊंचे मुकाम पर देखना चाहते है और इसके लिए वह अपने स्तर पर काम करना शुरु कर चुके हैं।

आजकल शाश्वत पहाड़ी गानों को रिडिजाईन करके उनके कवर कर रहे हैं,इन कवर गानों को शाश्वत यूट्यूब के माध्यम से लोगों तक पहुंचा रहे हैं इतना ही नहीं इस समय शाश्वत के 1-2 लाख फाॅलोवर हैं जो इनके काम की सराहना करते हैं। इसके अलावा शाश्वत कुछ ऐसा कर रहे हैं जो आज तक के उत्तराखंड इतिहास में पहली बार है वह यूट्यूब के माध्यम से लोगों को गढ़वाली संगीत सिखाने का लेसन देते हैं।आनलाईन गढ़वाली लेसन के माध्यम से शाश्वत लोगों को ज्यादा से ज्यादा पहाड़ी संगीत की तरफ आर्कषित करना चाहते हैं।

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आने वाले समय में शाश्वत के कुछ और गानें आने वाले हैं इसके अलावा उनका खुद का कंपोज किया हुआ म्यूजिक भी श्रोताओं के बीच आने वाला है। अपने सभी गानों को वह अपने यूट्यूब चैनल के जरिए लोगों के बीच लेकर आऐंगे। अपने म्यूजिक के माध्यम से शाश्वत उन युवाओं को यह संदेश देना चाहते हैं जो अपने प्रदेश से बाहर रहते हैं और अपनी भाषा बोलने में हिचकिचाते और शर्माते हैं। शाश्वत अपने संगीत और अपने आनलाईन ट्यूटोरियल के माध्यम से लोगों के बीच पहाड़ी भाषा को एक सम्मानजनक स्थान देना चाहते हैं।

शाश्वत से यह पूछे जाने पर की इतनी पढ़ाई करने के बाद संगीत की तरफ रुख करने की कोई खास वजह इसपर उनका जवाब था कि मैं पढ़ाईं में हमेशा से अच्छा था और थोड़ी और मेहनत के बाद शायद मैं साइंटिसिट भी बन जाता लेकिन साइंटिसिट बनकर शायद मैं केवल एक ही क्षेत्र में आगे बढ़ पाता। फिर शाश्वत ने निर्णय लिया कि वह अपनी क्रिएटिवीटो को व्यर्थ नहीं जाने देंगे और उन्होंने संगीत को ही अपना सब कुछ बना लिया। पिछले चार साल से शाश्वत दून इंटरनेशनल स्कूल में म्यूजिक डिर्पाटमेंट में एचओडी के पद पर काम कर रहे हैं और वह अपने काम से बहुत खुश हैं।

शाश्वत एक साइंस बेकग्राउंड के छात्र हैं लेकिन फिर भी म्यूजिक में उनकी जान बसती हैं।वह हर रोज नया करने के लिए तैयार रहते हैं, और काम भी अपने पसंदीदा क्षेत्र म्यूजिक में ही कर रहे तो भविष्य की चिंता शाश्वत करते भी नहीं। उनका मुख्य काम है नए म्यूजिक को ढूंढ़ना।

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आपको बतादें कि शाश्वत ने इंडियान आयडल 6 में टाप 25 गायकों में अपनी जगह बनाई थी और शाश्वता का पहला गाना ”बोल चिठ्ठी किलै नी भेजी” लोगों के बीच इतना वायरल हुआ कि आज इस गाने को पसंद करने की संख्या ओरिजिनल चिठ्ठी गाने से ज्यादा है। इसके अलावा शाश्वत को उनके काम यानि की पहाड़ की संस्कृति को बचाने और उसे लोगों तक पहुचाने के लिए ”उत्तराखंड श्री अवार्ड से साल 2016” में पूर्व सीएम हरीश रावत के हाथों से नवाजा गया है।यह पल ऐसे हैं कि शाश्वत वह अपनी जिंदगी में कभी नही भूल सकते। शाश्नवत की चाह हैं कि अपनी संस्कृति और अपनी परंपरा के लिए वह इतना काम करें कि राज्य में एक और पद्मश्री अवार्ड आए और उसके लिए काम करना उन्होंने शुरु कर दिया है।

टीम न्यूज़पोस्ट की तरफ से शाश्वत को उनके आने वाल कवर एल्बम के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।

विभाग ने सड़ा दिये 50 क्विंटल आलू

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रानीखेत उद्यान विभाग का हाल भी अजब है। अबकी बेहतर उत्पादन के लिए विभाग ने तराई से आलू बीज तो मंगा लिया। मगर किसानों को प्रोत्साहित किए बगैर डिमांड से अधिक स्टॉक कर दिया गया। नतीजतन सब्जी उत्पादक मजखाली क्षेत्र का 50 क्विंटल बीज गोदाम में ही पड़े पडे़ सड़ रहा है। किसानों का तर्क है कि समय पर काफी देरी से बीज भेजे जाने के कारण लगा पाना संभव नहीं था।

अबकी पर्वतीय अंचल के आलू उत्पादक गांवों के लिए रुद्रपुर स्थित फार्म से बीज मंगाया गया था। इसका खरीद मूल्य 1400 रुपये प्रति क्विंटल थी। उद्यान विभाग की ओर से मजखाली स्थित सचल दल केंद्र में 60 क्विंटल बीज भेजा गया। मगर इसमें से किसानों ने मात्र 10 क्विंटल ही खरीदा, और अधिक न खरीदने के पीछे देरी बताई गई।

इधर केंद्र प्रभारी पान सिंह राणा कहते हैं अप्रैल में 20 क्विंटल आलू बीज की डिंमाड भेजी गई थी। मगर 27 अप्रैल को 40 क्विंटल अतिरिक्त बीज भेज दिया गया। ऐसे में शेष 50 कुंतल गोदाम में डंप हो गया है। उधर डीएचओ भावना जोशी ने स्पष्ट किया कि मांग के अनुरूप ही बीज भेजा गया। अब उसे वापस नहीं लिया जाएगा।

गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

आलू उत्पादक मजखाली क्षेत्र के काश्तकारों ने रुद्रपुर के बीज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पहले तो समय पर बीज नहीं मिला। भेजा भी गया तो उत्पादकता बहुत कम है। द्वारसौं, उरोली, बबुरखोला, तुस्यारी समेत कई गांव में आलू की खेती की जाती है। बताया कि विभाग के गुणवत्ताविहीन बीजों के कारण खेती से मोह भंग होने लगा है। यह भी बताया कि बाजार से खरीदे गए आलू बीज अच्छा उत्पादन दे रहा।

भावना जोशी, जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि ‘डिमांड से अधिक कैसे भेजा जा सकता है। बीज की गुणवत्ता ठीक है। केंद्र से 60 क्विंटल की ही मांग भेजी गई थी। बीज नहीं बांटा जा सका है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रभारी की है। हम बीज वापस नहीं लेंगे।

आईये चलें उत्तराखंड के पहले प्राईवेट नेचर रिर्जव में

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पहाड़ों की रानी मसूरी अपनी खूबसूरती के लिए दुनियाभर में मशहूर है, अौर इस खूबसूरती में चार-चांद लगा रहा है “दि जबरखेत नेचर रिर्जव’’। यह नेचर रिर्जव उत्तराकंड का पहला प्राइवेट नेचर रिजर्व है। लगभग 110 एकड़ में फैला हुआ द जबरखेत अपनी तरह का पहला नेचर रिर्जव है जो पहाड़ी क्षेत्र में एडवेंचर को बढ़ावा देता है। इसमें

  • 3 किलोमीटर का हाईकिंग ट्रेल,
  • नेचर वाक,
  • बर्ड वाचिंग के साथ
  • ट्रायल मैप और फ्लोरा और फोना की पाकेट साईज का नेचर गाईड भी मौजूद है

इस रिर्जव का पहला लक्ष्य अपने प्राकृतिक खजाने को सुरक्षित रखते हुए स्थानीय लोगों के लिए आजीविका पैदा करना है।जबरखेत नेचर की मैनेजिंग डायरेक्टर सेज़ल वोहरा ने बताया कि “विकास का मतलब केवल बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें बनाना नहीं होता, विकास के क्षेत्र में काम करने के लिये हम प्रकृति का विकास भी कर सकते हैं। इस नेचुरल रिर्जव के माध्यम से हमने प्रकृति को विकसित किया है। इस क्षेत्र के माध्यम से हमने क्षेत्रीय लोगों के जीवनयापन का ज़रिया तैयार किया है, साथ ही शिक्षा के लिए साधन,रोजगार के साधन और टूरिज्म का मौका देने के साथ हमने प्रकृति का संरक्षण भी किया है।”

इस मार्डन दौर में जब मशहूर हिल स्टेशन में छोटी-छोटी जगह में लोग मकान या दुकान बना रहें है, यह अनूठी पहल काबिले तारीफ है। मसूरी आने वाले पर्यटक भी कहते हैं कि मसूरी के लिए ये रिजर्व अलग चार्म है। “हम प्रकृति को देखने के लिए पहाड़ों पर आते हैं। अगर मसूरी आकर हम केवल भीड़-भाड़ वाले माल रोड पर घूम कर निकल जाएं तो मसूरी आने का क्या फायदा?”

तो अब आप अगली बार जब मसूरी आएं तो जबरखेत नेचर रिर्जव आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए।अगर आप सच में पहाड़ की हवाओं में खोना चाहते हैं तो यह रिर्जव आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है।

रविवार की शाम, पेपर बैग बनाने के नाम!

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अपनी छठी वर्षगांठ के समारोह का समापन करके, देहरादून के शिक्षित छात्रों के संगठन, मेकिंग ऐ डिफ्फेरेंस बाय बीइंग दी डिफ्फेरेंस (मैड) संस्था ने वापस अपनी साप्ताहिक पर्यावरण संरक्षण अभियान पर अमल करने की शुरुआत कर दी है। इसी के अंतर्गत, रविवार को संगठन के सदस्य गांधी पार्क में एकत्र हुए। सभी सदस्यों को कहा गया था की वह पुराने अखबार, इत्यादि अपने साथ लाएं ताकि मैड की पूरी टुकड़ी बैठ कर उनके पेपर बैग सामूहिक रूप में बना सके। अभियान का संचालन कर रहे करन ओबेरॉय ने बताया कि ऐसा सभी दून वासी अपने परिवारों के साथ सप्ताह की छुट्टी के दिन अर्थात रविवार को बैठ कर कर सकते हैं। इस से न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का पुरज़ोर संदेश हम सब के घरों से जायगा बल्कि परिवार में भी साथ बैठ कर अच्छा काम करने की चेष्ठा उत्पन्न होगी।

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मैड के कुछ सदस्यों को तो पेपर बैग बनाना अच्छे से आता है जो पहले से मैड में आते आ रहे हैं। मैदाथन 2017 की धूम के बाद कुछ सदस्य नए भी थे जिन्हें पुराने सदस्यों ने पेपर बैग्स बनते कैसे हैं यह सिखाया। पेपर बैग बनाने के अलावा, मैड के सदस्यों ने अपने द्वारा चलाये गए गन्दी दीवारों के कायाकल्प अभियान की समीक्षा करी और देखा की कहाँ उनके द्वारा बनायी गयी चित्रकलाओं पर फिर गन्दगी हो गयी है। उसको साफ़ कैसे कर सकते हैं इस पर भी मंथन किया गया। इस अभियान में मैड के सदस्य शार्दुल असवाल, शिप्रा, शिवम्,अर्शित, अस्मिता, समृद्धि ने अहम् भूमिका निभाई।

सैलानियों से गुलजार सरोवर नगरी

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वीकेंड पर सरोवर नगरी, नैनीताल  में सैलानियों का सैलाब उमड़ पड़ा। माल रोड समेत अन्य प्रमुख मार्गो पर दिनभर पर्यटकों के वाहन रेंगते रहे। ज्योलीकोट, कालाढूंगी तिराहा, भवाली तिराहा, बल्दियाखान बाइपास पर वाहनों को रोक रोक कर आगे जाने की अनुमति दी गई, जिस कारण पर्यटकों की खासी फजीहत हुई। नगर के सभी पार्किग सैलानियों के वाहनों से पटे हैं तो होटल व गेस्ट हाउस भी फुल हो चुके हैं।

शनिवार को सुबह से ही नैनीताल रोड पर सैलानियों के वाहनों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। हल्द्वानी, भवाली व कालाढूंगी मार्ग से लगातार पहुंच रहे सैलानियों के वाहन से यातायात व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई। डीएसए कार पार्किग, सूखाताल व मेट्रोपोल कार पार्किग सैलानियों के वाहनों से खचाखच पैक हो गए।

कुमांऊ विवि में नये अध्यादेश से छात्रों को राहत

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कुमाऊं विवि विद्यालय परिषद, नैनीताल की बैठक में 2016-17 में पहली बार स्नातक स्तर पर लागू सेमेस्टर परीक्षा के लिए प्रभावी अध्यादेश को मंजूर कर लिया गया है। इसके बाद स्नातक प्रथम के हजारों छात्रों की संशय की स्थिति खत्म हो गई। विद्या परिषद ने विभिन्न संकायों में अध्ययनरत स्नातक स्तर के छात्रों के लिए अध्यादेशों में एकरूपता लाने के लिए 2017-18 से प्रभावी नए अध्यादेशों को भी स्वीकृति प्रदान की गई। ऑर्डिनेंस के अनुसार 2016-17 में स्नातक प्रथम में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी पर पुराने अध्यादेश ही प्रभावी होंगे। एकेडेमिक काउंसिल ने ऑनलाइन एडमिशन को भी हरी झंडी दे दी है।

शुक्रवार को भूगर्भ विभाग सभागार में कुलपति प्रो. डीके नौडि़याल की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभागों की ओर से पाठ्यक्रम समिति की सिफारिशों को भी मंजूरी प्रदान की गई। किसी विभाग ने पाठ्यक्रम में संशोधन अथवा नए कोर्स आरंभ करने का प्रस्ताव नहीं रखा। इस दौरान संकायाध्यक्षों ने विभागों से संबंधित प्रस्ताव रखे। इसमें वह प्रस्ताव शामिल थे, जो कुलपति ने विशेषाधिकार के तहत शामिल किए थे व जिनका विद्या परिषद में अनुमोदन जरूरी था। बैठक में कुलसचिव प्रो. डीसी पांडे, डीन वाणिज्य एवं प्रबंधन अध्ययन प्रो. पीसी कविदयाल, डीन आर्ट प्रो. भगवान बिष्ट, डीन लॉ प्रो. डीके भट्ट, डीन साइंस प्रो. संतोष कुमार, प्रो. एके शर्मा, प्रो. सीसी पंत, प्रो. एसपीएस मेहता, प्रो. आरएस पथनी, प्राचार्य डॉ चंदन सिंह मेहता आदि मौजूद थे।

यह होगा बदलाव

नए ऑडिनेंस के अनुसार स्नातक के विद्यार्थी को बीएससी में तीन विषयों में से दो विषयों के हर पेपर में पास होना पड़ेगा। न्यूनतम उत्तीर्ण प्रतिशत 33 निर्धारित हैं। छात्रों को थ्योरी व प्रेक्टिकल में अलग-अलग उत्तीर्ण होना होगा। अब प्रथम सेमेस्टर की बैक तीसरे में, दूसरे की बेक चौथे में तथा पांचवें व छठे के लिए ही स्पेशल बैक का प्रावधान है। फाइनल सेमेस्टर के परिणाम के एक माह के भीतर स्पेशल बैक होगी।

बॉलीवुड में चमकने को तैयार उत्तराखंड का सितारा ”आशीष बिष्ट”

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सपने देखना आसान है पर सपनों को पूरा करना बहुत मुश्किल। इन्हीं मुश्किलों को पार करके जो आगे बढ़ गया वह केवल फिल्मों में ही नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी ”हीरो” बन जाता है।

आज के हमारे उभरते सितारे आशीष बिष्ट भी कुछ ऐसे ही हैं। मेहनत और लगन से आज उन्होंने वो मुकाम पाया जिसे वह हमेशा पाना चाहते थे।उत्तराखंड के पहाड़ों में पैदा हुए और फिर दिल्ली में शिफ्ट हुए लेकिन दिल तो हमेशा पहाड़ में ही रहा। जी हां, 27 साल के ग्रेजुएट आशीष बिष्ट अल्मोड़ा के छोटी सी जगह भिकियासैंण से हैं।आशीष का परिवार दिल्ली में रहता है।कुछ समय दिल्ली में नौकरी करने के बाद आशीष मुंबई में शिफ्ट हुए और काम की तलाश करने लगे। आशीष को गाने सुनना,क्रिकेट खलना और स्विमिंग करना पसंद है।खाली समय में वर्कआउट करना भी आशीष का पसंदीदा काम है।

आशीष के लाईमलाइट में आने की वजह है उनकी आने वाली फिल्म ”शब” जिसमें वह लीड यानि की मुख्य भूमिका में नजर आऐंगें । इस फिल्म में उनके साथ अनुभवी अदाकारा ”रवीना टंडन और अर्पिता चैर्टजी” हैं। फिल्म शब का ट्रेलर लाँच हो चुका है साथ ही फिल्म को दो गानें ”हमसफर और ओ साथी” भी अपनी जगह चार्टबस्टर में बना चुके हैं।भविष्य में आशीष एक और फिल्म में नजर आऐंगे जिसके बारे में उन्होंने फिलहाल ज्यादा नहीं बताया है।

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आशीष से यह पूछे जाने पर कि उन्होंने फिल्म लाईन क्यों चुनी उनका जवाब था कि ”शुरु से ही लोग मुझे कहते थे कि मैं एक्टिंग यानि फिल्मों में जा सकता हूं लेकिन तब मैं इसके बारे में ज्यादा नहीं सोचता था”। समय के साथ आशीष अलग-अलग जगह पर सेलेक्ट होते गए और आज बाॅलीवुड में भी अपनी जगह बना ली है। दिल्ली में कुछ समय आशीष ने एक्टिंग के गुण सीखे हैं।आशीष ने बहुत से विज्ञापनों में काम किया है जैसे कि बिंगो यमिटोस,पारले किस-मी,केस्ट्रोल,टाटा डोकोमो आदि।

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आशीष बिष्ट काफी समय से 70 मिमी स्क्रीन में अपने बड़े लांच की प्रतीक्षा में टीवी उद्योग के आसपास रहे हैं। उन्होंने कुछ लोकप्रिय ब्रांडों के लिए कई विज्ञापन किए हैं और विज्ञापन दुनिया में वह काफी प्रसिद्ध चेहरा हैं। इस अभिनेता ने किसी और के साथ नहीं बल्कि हमारी ”ग्लोबल दिवा प्रियंका चोपड़ा” के साथ स्क्रीन स्पेस साझा किया है। विज्ञापन दुनिया में अपने आकर्षण से काफी लोगों को प्रभावित कर चुके आशीष कई लोकप्रिय टीवी विज्ञापनों के लिए चुने गए हैं।

आशीष से यह पूछने पर कि उनको अपने फिल्मी लाईन में सबसे ज्यादा क्या पसंद है। उनका जवाब बहुत हटकर और दिलचस्प था। आशीष ने बताया कि ”फिल्मों में काम करने से कभी बोरियत नहीं होती। आप एक हो लेकिन अलग-अलग कैरेक्टर प्ले करने का मौका आपको फिल्म के ज़रिए मिलता है,जो बहुत मुश्किल काम है। फिल्म लाईन की सबसे खास बात एक इंसान के अलग-अलग रुप जिसे देखकर लोग उसके साथ जुड़ाव महसूस करते हैं। आशीष ने कहा कि ”फिल्म में काम करते हुए मैंने महसूस किया कि इस दौरान आपका कंम्पटिशन अपने आप से होता है कि आपको अपने को प्रूव करना होता है कि आप कितना अच्छा कर सकते हो”।

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आशीष ‘शब’ के साथ अपनी बड़ी स्क्रीन की शुरुआत कर रहे हैं,और अपने इसी आकर्षण और सादगी के लिए युवा अभिनेता ”ओनीर” द्वारा इस फिल्म के लिए चुने गए हैं। ”ओनीर की फिल्म शब” में आशीष अजफ़ार की भूमिका में दिखेंगे। इस फिल्म में उनका चरित्र एक मॉडल का है जो ग्लैमर की दुनिया में करियर बनाने और अपने सपने को पूरा करने की कोशिश कर रहा है। वह एक ड्रीमर है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है।

आशीष के लिए उनका कभी ना भूलने वाला पल था उनको शब में लीड कैरेक्टर का रोल मिलना। आशीष बताते हैं कि ”इस फिल्म की शूटिंग पिछले 2 साल से चल रही थी और शूटिंग के आखिरी दिन मैं यह सोचकर भावुक था कि आखिरकार मुझे वो मिल गया जिसकी तलाश मुझे सालों से थी”। आशीष बताते हैं कि ”पहले प्रोजेक्ट के पूरे होने की असली खुशी मुझे प्रोजेक्ट खत्म होने पर पता चली और शायद वो आशीष  की जिंदगी का वो पल बन गया जो वह कभी नहीं भूलेंगे”।

आशीष उत्तराखंड से खासा जुड़ाव महसूस करते हैं इसलिए उन्होंने अपने सभी पहाड़वासियों से गुज़ारिश की है जो लोग फिल्मी लाईन में अपना करियर बनाना चाहते हैं वह खूब मेहनत करें और कोशिश करते रहें।आशीष ने कहा कि बाॅलीवुड को अच्छा काम करने वाले और अच्छा दिखने वालों की बहुत जरुरत है। आशीष ने अपनी आने वाली फिल्म के लिए सबसे सर्पोट और सबका साथ मांगा है।

कहीं ”वेन हैरी मेट सैली” की काॅपी तो नहीं शाहरुख अनुष्का की ”जब हैरी मेट सेजल”?

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जब से शाह रुख़ और अनुष्का की फ़िल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ का नाम सामने आया है सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर खूब कमेंट्स किये जा रहे हैं और लोगों को भी लगता है कि यह फ़िल्म साल 1989 की हॉलीवुड फ़िल्म ‘व्हेन हैरी मेट सैली’ की कॉपी है या फिर इस पर आधारित है। आपको बता दें कि ‘व्हेन हैरी मेट सैली’ भी एक रोमांटिक फ़िल्म थी। इस फ़िल्म की फ़ेमस टैग लाइन है – ‘Can Men And Women Ever Just Be Friends?’ यानि, ‘क्या लड़का और लड़की कभी सिर्फ़ दोस्त बन सकते हैं?’

जी हां, यह लाइन आपने शाह रुख़ ख़ान की फ़िल्म ‘कुछ कुछ होता है’ में सुनी थी मगर, यह लाइन उससे पहले भी इस्तेमाल हो चुकी है, ये शायद ही कोई जानता था। तो, इम्तियाज़ अली की फ़िल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ और हॉलीवुड फ़िल्म ‘व्हेन हैरी मेट सैली’ के एक जैसे टायटल के अलावा यह फ़ेमस लाइन भी दोनों फ़िल्मों के बीच ख़ास कनेक्शन का काम कर रही है। दोनों ही फ़िल्मों में ट्रेवलिंग, दुनिया की अलग-अलग लोकेशंस और लीड्स के अचानक मिलने जैसी समानताएं दिख रही हैं।

बॉलीवुड ने कई बार हॉलीवुड फ़िल्मों को कॉपी किया है और क्या अब ‘जब हैरी मेट सेजल’ भी उस लिस्ट में शामिल होगी, यह तो मेकर्स ही जानें…आपको बता दें कि इस फ़िल्म में शाह रुख़ एक टूरिस्ट गाइड का किरदार निभा रहे हैं और अनुष्का गुजरात की लड़की का। यह फ़िल्म इस साल 4 अगस्त को रिलीज़ होगी।

कोतवाली में ही मंत्री जी के भाई ने दिखाई दबंगई

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सत्ता का नशा जब सर जढ कर बोलने लगता है तो मर्यादाओ और नियमों को ताक पर रख कर अपनी हनक दिखाने में कोई भी पिछे नहीं रहता। फिर चाहे किसी वर्दी उतारने का रौब हो या फिर किसी को ट्रांसफर कराने की धमकी आम बात हो जाती है। एेसा ही कुछ हुआ है बाजपुर में जहां मंत्री जी के भतिजे और भाई ने कोतवाली में जमकर कोहराम मचाया और जमकर सत्ता की हनक दिखाते हुए अधिकारियों को गालियां तक सुनाई। पुलिस के अधिकारी और सिपाही मंत्री जी के भाई और भतिजे पर कार्यवाही करने के बजाय उनको पुचकारते रहे और मामला शांत करने के लिए उनकी जी हूजूरी करते रहे। देखिये सत्ता की हनक का नजारा जब मंत्री जी के भतिजे की गाडी से हूटर उतारने को सिपाही ने कहा तो क्या हुआ।।
ये बाजपुर कोतवाली के बाहर हंगामा है कैसा बरपा? कौन है ये शख्स जो पुलिस को दे रहा है गालियां और दिखा रहा है अपना रौंब? क्यो पुलिस कर रही है इस आदमी की जी हूजूरी। और क्यो पुलिस की है बोलती बंद। आखिर क्या वजह है कि कोतवाली में पुलिस की बोलती बंद है और ये शख्स पुलिस को जमकर खरीखोटी सुना रहा है और क्यो पुलिस इस आदमी की जी हूजूरी कर रही है।ये विडियो देख कर आपके जहन में कुछ एसे ही सवाल उठने लाजमी हैं। लेकिन जब आप सुनेंगे हकीकत तो चौंक जाएंगे। क्योकि ये जनाब कोई और नहीं बल्कि प्रदेश के दबंग कैबिनेट मंत्री अरविन्द पाण्डेय के भाई जगदीश पाण्डेय है जो पुलिस को सत्ता की हनक जमकर दिखा रहे हैं।
दरअसल कुछ दिन पहले पुलिस की चैकिंग के दैरान हूटर बजाते हुए एक वाहन को दरोगा ने रोक तो लिया मगर उसमें सवार मंत्री जी के भतिजे अपना रौब दिखाने लगे तो दारोगा ने हूटर उतारने की नसीहत तो दे डाली मगर साहबजादे की शान हूटर उतारने पर कम ना हो जाती। लिहाजा अपने पिता यानी मंत्री जी के भाई को फोन किया गया। बस फिर क्या था तमाशा शुरु। और कोतवाली पहुंचकर जो हुआ वो आपके सामने है। मगर पुलिस बजाय कार्यवाही करने के दबंग मंत्री जी के डर से किसी तरह से मामले को शांत करने में जुट गयी और पुछे जाने पर समझौते की बाहकर ही पल्ला झाड रही है। जबकि कुछ दिन पहले ही मंत्री जी के बेटे द्वारा जिला अस्पताल में हंगामा करने और अधिकारियों को खरीकोटी सुनाने का मामला चर्चाओं में पहले ही बना है।