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खस्ताहाल व्यवस्थाओं से बदहाल होती मसूरी

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पहाड़ों की रानी कही जाने वाली मसूरी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के चलते सालों से पर्यटकों को लुभाती आ रही है। जिसके चलते न सिर्फ ये पर्लेयटन का एक केंद्र बना है बल्कि सरकार के लिये भी राजस्व का बड़ा जरिया है। लेकिन पिछले कुछ सालों से मसूरी में आने वाले पर्यटकों की संख्या तो लगातार बड़ रही है लेकिन यहां के होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों की कमाी नहीं। अगर आप छुट्टियों में या वीकेंड पर मसूरी आयें तो शहर पहुंचने से काफी पहले से ही सड़कों के किनारे गाड़ियों की लंबी कतारें आप देख सकते हैं। ये कतारें इस बात को साबित करती हैं कि शहर में भारी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं लेकिन इनकी तुलना में होटलों के कमरे नहीं बुक होते। इसका कारण बताते हुए होटल एंव रेस्टोरंट व्यावसाई संघ के अध्यक्ष संदीप साहनी कहते हैं कि मैं मानता हूं कि मसूरी सरकार के लिये राजस्व का बड़ा केंद्र है, ऐसे में सरकार को यहां के रखरकाव और सुविधाओं के विकास के लिये खास ध्यान देना चाहिये। पर्यटकों को पार्किंग की जगह  होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और बहुत से पर्यटक वापस देहरादून का रुख कर रहे हैं।”

मसूरी में लगभग आधा दर्जन कार पार्किंग हैं, जिसमें होटलों की कार पार्किंग भी हैं जिसकी क्षमता 1 हजार गाड़ियों की है वो भी यहां आ रहे गाड़ियों के रश को संभालने के लिये नाकाफी है। होटल व्यवसायी के नाखुश होने की वजह, एक तरफ कार की पार्किंग सड़कों के किनारे होती है तो दूसरी तरफ होटल के कमर खाली हैं। मसूरी आने वाले पर्यटकों में ज्यादातर लोग वापस जाना पसंद करते हैं चाहें उन्हें रास्ते में 4-5 घंटे का जाम भी क्यों ना मिले। जो लोग वापस नही जाते वो मसूरी के जहॉगह धनौल्टी, काङाताल, चंबा आदि जगहों पर चले जाते हैं जहां पार्किंग की फिलहाल इतनी दिक्कतें नही हैं।

मसूरी के मेयर मनमोहन मल्ला का कहना है कि, “मसूरी के हालात सुधारने के लिये सरकारें संजीदा नहीं हैं। मैसौनिक लॉज पर 25 करोड़ की लागत से एक पार्किंग का प्रावधान है जिसमें तक़रीबन 600-700 गाड़ियाँ आ सकती हैं लेकिन इसकी फ़ाइल पैसों की कमी के चलते रुकी है। वैसे ही लाइब्रेरी एंड पर भी एक पार्किंग बननी है पर ये फ़ाइल भी पर्यटन विभाग के पास पड़ी है।”

आज मसूरी बहुत से पर्यटकों का फेवरेट डेस्टिनेशन है जो उत्तराखंड राज्य की आर्थिक कमाई में मदद करता है। मसूरी की लोकल अर्थव्यवस्था भी यहां आने वले पर्लेयटकों पर निर्भर है लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि होटल व्यावसायी,दुकानदार और आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इटली से देवभूमि आई जार्जिया ने उत्तराकाशी में रची शिव की महिमा

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पश्चिम पर पूरब की लाली छाने लगी है। उत्तरकाशी में भागीरथी के किनारे बनी दीवार पर शिव का सुंदर चित्र यहां आने वालों का ध्यान खींच रहा है। इसे बनाया है कि इटली की जार्जिया बेल्लिग्री ने। पेंटिंग की शौकीन जार्जिया चार माह से भारत भ्रमण कर रही है। जार्जिया कहती है जिंदगी में मेरा लक्ष्य घूमना और पेंटिंग करना है।

मार्च में भारत पहुंची 36 वर्षीय जार्जिया अब तक दक्षिण भारत और मुंबई की सैर कर चुकी हैं। इसी माह वह उत्तराखंड आईं। ऋषिकेश में उनकी मुलाकात मलेशिया के रहने वाले भारतीय मूल के किरन सिंह से हुई। इसके बाद वह 10 जून को किरन के साथ बाइक पर उत्तरकाशी पहुंची।

जार्जिया बताती हैं कि “उत्तरकाशी में भागीरथी के तट पर मुझे असीम शांति का एहसास होता है। यहां गंगा, ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मूतियां बार-बार ध्यान आकर्षित करती हैं। वह कहती हैं कि जब-जब वह भागीरथी के किनारे बनी दीवार को देखतीं तो उन्हें लगता यहां पर पेंटिंग बनानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने स्थानीय प्रशासन और गंगा आरती समिति के सदस्यों से संपर्क किया।”

समिति के अध्यक्ष उमेश बहुगुणा ने बताया कि “एक विदेशी के भारतीय संस्कृति के प्रति आकर्षण को देख उन्होंने भी जार्जिया को प्रोत्साहित किया। इस पर जार्जिया ने दो दिन में दीवार पर शिव की पेटिंग उकेरी।”

अपने परिवार के बारे में जार्जिया ने बताया कि वे दो बहने हैं। बड़ी बहन फिल्म निर्देशक है। वेनिस यूनिवर्सिटी से ड्राइंग में स्नातक जार्जिया के लिए भारत आना भी आसान नहीं था। पिता उनकी घुमक्कड़ी की आदत को पसंद नहीं करते। जार्जिया ने बताया कि यहां से वे गंगोत्री और गोमुख की यात्रा करेंगे। इसके बाद नेपाल यात्रा का कार्यक्रम है।

 

ढेंचा बीज घोटाले में त्रिवेंद्र सिंह को मिली क्लीन चिट

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CM to interact directly with people

सत्ता में आने के कुछ ही महीनों में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अपने पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से राहत मिलती दिख रही है। शुक्रवार को विधानसभा में सरकार ने ढेंचा बीज घोटाले में जांच के लिये बनी त्रिपाठी कमीश्न की रिपोर्ट को सदन में पेश कर दिया।इस रिपोर्ट में वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को क्लीन चिट दी गई है।

गौरतलब है कि त्रिपाठी कमीश्न को 2013 में त्तकालीन कांग्रेस सरकार ने गठित किया था। 2010 में ढेंचा बीज की खरीद में धांधली की जांच करने के लिये इस कमीशन का घठन किया गया था। ये कथित धोटाला बीजेपी की सरकार में हुआ था और उस समय त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में कृषि मंत्री थे। इस धोटाले में नाम उछलने के चलते मुख्यमंत्री पद के लिये नाम आने के बाद कांग्रेस ने रावत का पुर्रजोर विरोध किया था।

हांलाकि जिस तरह से ये रिपोर्ट सदन में पेश की गई उससे विपक्ष सरकार की नियत पर सावल खड़े कर रहा है। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रयहेश का कहना है कि “जिस तरह आनन फानन में बिना विपक्षी दल को बताये सदन के कमामकाज में परिवर्तन कर के ये रिपोर्ट पेश की गई है उससे सरकार की नीयत पर शक होना लाजमी है”

वहीं सरकार का पक्ष रखते हुए मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि ” ये रिपोर्ट 2014 में तैयार हो गई थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने इसे सदन में पेश नही किया। इससे साफ है कि सरकार की नियत में खोट था क्योंकि वो जानती थी कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को इस रिपोर्ट में क्लीन चिट मिल गई है।”

इस रिपोर्ट के अलावा ट्रांस्फर एक्ट बिल और लोकायुक्त बिल को भी आनन फानन में सदन में पेश कर दिया गया।

 

ऋषिकेश के पशुलोक में मैदान में लाश मिलने से हड़कंप

शुक्रवार को ऋषिकेश के पशुलोक में लाश मिलने से सनसनी फैल गयी। पशुलोक के फिल्ड में एक डेड बॉडी मिली जिसे आसपास के लोगो ने देखी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गयी। पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला ये बॉडी वही पशुलोक में रहने वाले एक शख्स की है जो पेशे से ठेकदार है।
पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दी, वही मृतक की पत्नी ने बताया की मृतक 2 दिन से लापता था। 2 दिन पहले ही घर में पत्नी से नोंक झोक हुई थी जिस के बाद वो घर से चला गया, फिर 2 दिन तक घर नहीं लौटा और शुक्रवार सुबह एक फिल्ड में उसकी लाश मिली।
वही इस पर पुलिस का कहना है की मृतक शराबी था हो सकता है शराब के नशे में उस की चोट लगी हो बाकि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से पता चलेगा।

सीएम रावत रोज़ा इफ्तार पार्टी में हुए शामिल

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत शुक्रवार को देहरादून के एक स्थानीय वेडिंग पॉइंट में आयोजित रोजा इफ्तार कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर बधाई देते हुए मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि इस पवित्र मौके पर जून के माह में बिना पानी पिए रह कर अपनी प्रार्थना करते हैं, भगवान उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगे।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि हम सब भारतवासी हैं हम सब लोग एक छत के नीचे रहते हैं। हम सबका परमात्मा एक ही है, भले ही हमारी पूजा पद्धतियां अलग-अलग हैं इसके बावजूद हम सब भारतीय हैं। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि हम 125 करोड़ लोग सब भाई-भाई हैं। हमारा एक ही नारा है सबका साथ सबका विकास।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि यहां पर छोटे-छोटे बच्चों ने रोजा रखा है, यह बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं उनकी शिक्षा का ध्यान रखा जाएगा। जो आगे पढ़ना चाहते हैं। उनको सहयोग दिया जाएगा। मुख्यमंत्री रावत ने घोषणा की कि जो बच्चे अखिल भारतीय परीक्षाओं में शामिल होना चाहते हैं, उनको फ्री कोचिंग दी जाएगी।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, यशपाल आर्य, विधायक हरबंश कपूर, खजान दास सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

कितना तैयार है उत्तराखंड 2013 जैसी आपदा के लिये?

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16 जून 213 उत्तराखंड के इतिहास में कभी न मिटने वाली भयावह यादें दे कर गई है। इस प्राकृतिक आपदा के 4 साल गुजरने के बाद लरकारों और राजनेताओं ने वादे और बातें तो तमाम की हैं लेकिन सवाल ये है कि प्रदेश 2013 जैसी आपदा के लिये वास्तविक तौर पर कितना तैयार है? पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह जिन्हें भारत के ‘वाॅटरमेन’ के नाम से भी जाना जाता है  कहते हैं कि उत्तराखंड 2013 की तरह एक और आपदा की ओर इशारा कर रहा है। केदार बाढ़ की चौथी वर्षगांठ की संध्या पर एक संवाददाता सम्मेलन में  मैगसेसे अवाॅर्राड विजेता सिंह ने कहा कि “मैं यह देख के परेशान हूं कि केदारनाथ त्रासदी से कोई सबक नहीं सीखा गया है। मैंने एक पखवाड़े से भी कुछ समय पहले केदारनाथ बाढ़ की भविष्यवाणी की थी, और मुझे यह चिंता है कि अनियंत्रित शहरी विकास जो बाढ़ का कारण था वह, फिर भी निरंतर जारी है, जो इसी तरह की एक और त्रासदी के लिए रास्ता बना रहा है।”

उन्होंने कहा कि “बाढ़ से 20 दिन पहले, उन्होंने इस क्षेत्र का दौरा किया और पाया कि केदारनाथ से निचले मैदानों तक सभी तरह के सुरंगों का निर्माण किया गया था, जिसके आसपास भारी मात्रा में मलबा जमा हुआ था। जब यहां बारिश शुरू हुई, तो सारा मलबा नदी के पानी के साथ मिल गया जिससे इसकी मात्रा बहुत ज्यादा हो गई जो आपदा का कारण बना,” सिंह कहते हैं कि “मैंने यह दावा किया था कि बाढ़ आएगी, लेकिन मुझे यह बिल्कुल नहीं पता था कि यह इतनी भयावह होगी और इतने बड़े पैमाने पर जान माल के नुकसान का कारण बनेगा।”

केदारनाथ आपदा वास्तव में विकास के मॉडल पर सवाल उठाते हैं जो हमारे शहरों में चल रहे हैं, जो पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए कोई भी विचार नहीं करते हैं। ऐसे मॉडल केवल विनाश, विस्थापन, बाढ़ और सूखे का कारण बन सकते हैं, और कुछ नहीं। भविष्य में आपदाओं को कैसे टाला जा सकता है विषय पर, सिंह ने कहा कि महत्वपूर्ण बात यह सुनिश्चित करना कि बाढ़ के मैदानों में पर्याप्त वनस्पति हो और वहां कोई निर्माण नहीं किया जा रहा हो।

“उत्तराखंड सरकार को पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के बीच तालमेल बिठाना होगा। इसके अलावा प्लास्टिक की मात्रा को प्रतिबंधित करना होगा जो पर्यटक उनके साथ ले आ रहे हैं। प्लास्टिक जो नदियों में फेंक दी जाती है उसकी मात्रा धीरे-धीरे काफी बढ़ जाती है।” सिंह का कहना है कि प्राकृतिक आपदाऐं आगे भी आयेंगी और इन को रोक पाना किसी के लिये मुमकिन नहीं है लेकिन अगर राज्य को इनसे कम से कम नुकसान के लिये तैयार करना है तो राजनीतिक इच्छा शक्ति दिकानी होगी। केवल और केवल प्राथमिकता पर्यावरण को बचाने पर रखनी होगी। जब तक सरकार और आम लोग ये नहीं करते तब तक उत्तराखंड को आपदा के लिहाज से एक टाइम बं मानना चाहिये।

मिलना भागवत से था और बनाया सरकारी कार्यक्रम

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क्या वाकई में मुख्यमंत्री का रुद्रपुर का दौरा सरकारी था या फिर महज औपचारिकता के लिए दौरा सरकारी बनाकर निसाना कहीं और सादना था? जी हां, सूत्रों की माने तो ये चर्चा आम है कि मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यक्रम बनाकर सरसंघ चालक मोहन भागवत से मिलने के लिए ही अपना कार्यक्रम बनाया था, लेकिन सरकारी संसाधनों का उपयोग कर महज संघ केकार्यक्रम में ना जाने की डचन के चलते पहले कार्यकर्ताओं के कार्यक्रम का समय निर्धारित किया गया और फिर अधिकारियों के साथ समिक्षा बैठक की औपचारिकता भी रखी गयी, लेकिन सभी जगह समय इतना कम दिया कि सभी के समझ आ रहा था कि सीएम का रुद्रपुर दौरा आखिर क्यो था।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिलने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को जनता इंटर कालेज में करीब 20 मिनट इंतजार करना पड़ा। क्योंकि भागवत से मिलने का 2:15 का समय निर्धारित था तो कार्यकर्ता सम्मेलन से मुख्यमंत्री बिना खाना खाए ही दौड़ पड़े। जनता इंटर कालेज में उन्होंने 20 मिनट का समय अधिकारियों के साथ मंत्रणा कर गुजारा। इसके बाद करीब 25 मिनट उनकी अकेले में भागवत से वार्ता हुई। इस बीच उन्होंने प्रदेश के हालात पर भागवत से चर्चा की और दिशा-निर्देशन प्राप्त किया।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत यहां राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के चल रहे संघ शिक्षा वर्ग में हिस्सा लेने आए हैं। वह पिछले चार दिनों से जनता इंटर कालेज में ठहरे हैं। वह किसी से मुलाकात नहीं कर रहे हैं। बुधवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भटट को भी उनकी एक झलक पाने के लिए इंतजार करना पड़ा था। गुरुवार को सीएम का भागवत से मिलने का समय 2:15 बजे निर्धारित था। कार्यकर्ता सम्मेलन में मुख्यमंत्री को काफी समय लग गया। इस बीच उनकी नजर घड़ी की ओर गई तो उन्होंने भोजन करने से इंकार कर जनता इंटर कालेज की ओर रवाना हो गए। मुख्यमंत्री का काफिला इंटर कालेज के बाहर ही रुक गया। खुद मुख्यमंत्री वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं के साथ अंदर चले गए। भागवत से मुलाकात को उन्हें करीब 20 मिनट का इंतजार करना पड़ा। इसके बाद भागवत मिले और उनकी करीब 25 मिनट तक सीएम से बात हुई। सूत्रों की मानें तो भागवत ने मुख्यमंत्री से प्रदेश के हालात पर चर्चा की। सीएम उसके बाद लौट गए। इससे पहले उन्होंने संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात की।

सीएम आवास के फूलों की खुशबू पहंचेगी घर-घर

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देहरादून नारी निकेतन की दो मध्यप्रदेश की बालिकाओं को उनके परिवार से 9 वर्षों के बाद मिलवाया जाने की खुशी में दोनों बालिकाएं सीएम से मिली। इस मौक़े पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि नारी निकेतन की स्थिति में सुधार आ रहा है अौर कहा कि सीएम आवास मे उनसे मिलने के लिए आने वाले बहुत से लोग फूलों के बुके लेकर आते हैं, इन फूलों को नारी निकेतन भिजवाए जाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि इनका उपयोग धूप, अगरबत्ती बनाने में किया जा सके।

नारी निकेतन की दो मध्यप्रदेश की बालिकाओं को उनके परिवार से 9 वर्षों के बाद मिलवाया गया।  दोनों बालिकाएं, रजनी व रेखा ने मुख्यमंत्री रावत से भेंट की। मुख्यमंत्री श्री रावत ने बालिकाओं के अपने घर वापिस लौटने पर खुशी जाहिर करते हुए उन्हें राज्य सरकार की ओर से 25-25 हजार रूपए की आर्थिक सहायता दिए जाने की बात कही। इस अवसर पर सचिव डॉ. भूपिंदर कौर औलख व बालिकाओं के परिजन भी उपस्थित थे।

शक के चलते पहले पत्नी को मारी गोली फिर खुद को

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पत्नी के नाजायज सम्बन्धों की गलतफहमी ने पति को दरिंदा बना दिया और जिसके साथ सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाई थी उसी को मौत के घाट उतारते हुए खुद को भी मौत के हवाले कर दिया। गलतफहमियों से बिगडते रिश्ते और खत्म होते परिवार के संसार की कुछ ऐसी ही दास्तां सामने आयी है। उधमसिंहनगर जिले के गदरपुर में जहां पति ने पहले पत्नी को गोली मार दी और फिर खुद को भी गोली मारकर खुदकुशी कर ली। घटना के बाद से हडकम्प मचा हुआ है।आखिर क्या हुआ था जो पत्नी को मार कर पति ने खुद को गोली मारी।

पत्नी को गोली मारने के बाद युवक ने खुद को भी गोली मार ली। दोनों की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ग्राम मजरा सिला निवासी रेनू पत्नी हरस्वरूप अपने मायके ग्राम राम जीवनपुर नंबर तीन में आई हुई थी। आज प्रातः रेनू का पति हरस्वरूप पुत्र विक्रम सैनी अपने ससुराल पहुंच गया। बताया जा रहा है कि इस बीच रेनू और हरस्वरूप के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। इसके चलते हरस्वरूप ने तमंचे से अपनी पत्नी और खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। गोली की आवाज सुनते ही लोगों का जमावड़ा घर पर लग गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई और जानकारी जुटाने का प्रयास किया। पुलिस ने दोनों शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बताया जाता है कि हरस्वरूप ने अपनी पत्नी को गुरुवार प्रातः किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ बाइक पर जाते देख लिया था। इसके चलते दोनों में काफी कहासुनी हुई थी। जिसके बाद रेनू अपने ससुराल से मायके पहुंच गई थी।

ममता बनी क्रूर और बेटी को फेंक दिया झाडियों में

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क्या मां की ममता क्रूर हो गयी या फिर बेटियों के नाम पर आज भी लोग बेटियों को बोझ समझ कर फेंक देते हैं?  बहरहाल कुछ भी हो मगर ऐसी ही ममता की मूरत ने क्रूरता की सारी सीमाएं पार कर दीं। उसने तीन दिन की नवजात को मरने के लिए झाड़ियों में फेंक दिया, लेकिन उसे नई जिंदगी मिल गई। बच्ची का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। नवजात को सांस लेने में परेशानी हो रही है। एक-दो दिन में बच्ची के स्वस्थ होने की उम्मीद जताई जा रही है।

बुधवार रात एक होटल में काम करने वाला युवक बाजपुर रोड स्थित रेलवे क्रॉसिंग के पास झाडि़यों में शौच के लिए जा रहा था। इसी दौरान उसे बच्चे की रोने की आवाज सुनाई दी। इसकी सूचना उसने कोतवाली पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को एलडी भट्ट अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने उसे हायर सेटर रेफर कर दिया। इसके बाद पुलिस ने बच्ची को रामनगर रोड स्थित एमपी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसका इलाज किया जा रहा है।

बच्ची डेढ़ किलो वजन की है। चिकित्सकों ने बच्ची का नाम एंजिल रखा है। अस्पताल के निदेशक डा. संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि बच्ची को सांस लेने में थोड़ी परेशानी हो रही है। इलाज किया जा रहा है। एक-दो दिन में सुधार हो जाएगा। खतरे की कोई बात नहीं है। बच्ची को गोद लेने के लिए कई फोन आ चुके हैं। बच्ची को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किसी को गोद दिया जा सकता है। उनका कहना है कि बच्ची तीन दिन की है।