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विवाह के जश्न में सौदेबाजी का खलल

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टेंट के तय किराए से अधिक की रकम वसूलने का विरोध करने पर टेंट स्वामी ने कुछ लोगों की मदद से दूल्हे के पिता को बुरी तरह पीट दिया। आरोप है कि हमलावर दुल्हन के जेवरात भी लूटकर ले गए। पीड़ित ने इसकी तहरीर पुलिस को सौंपकर न्याय की गुहार की है।

पीलीभीत रोड ,साल बोझी नंबर तीन, के श्याम लाल ने पुलिस को तहरीर सौंपते हुए कहा कि उसके पुत्र का विवाह था। जिसमें टेंट, डीजे और लाईट की व्यवस्था एक टेंट हाऊस से की गई थी। जिसका किराया नौ हजार रुपये तय था। उन्होंने आरोप लगाया कि रविवार को टेंट हाऊस स्वामी अपने कर्मचारियों व सात अन्य लोगों को साथ लेकर उसके घर में घुस आए।

टेंट स्वामी ने किराए के पंद्रह हजार रुपये और देने को कहा। इस पर एतराज जताने पर उन लोगों ने मारपीट कर दी। जिसमें उसके सिर में गंभीर चोट आई। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि वह पुत्रवधु के नाक व कान के करीब 22 हजार मूल्य के सोने के आभूषण लूटकर धमकी देते हुए चले गए। पीड़ित की तहरीर लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। कोतवाल चंचल शर्मा ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है।

रसोई में लटका मिला महिला का शव

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वेलेजली लॉज,हल्द्वानी के निकट एक घर की रसोई में महिला का शव फांसी पर लटकता मिला। इस मामले को संदिग्ध मानते हुए पुलिस ने महिला के पति को हिरासत में ले लिया।

वेलेजली लॉज निवासी राजकुमार त्यागी के घर पर विक्रम त्रिपाठी किराये पर रहता है। विक्रम मंडी बाईपास पर हर्षित रेस्टोरेंट पर काम करता है। रोज की तरह विक्रम काम पर गया था, घर पर उसकी मां भारती त्रिपाठी, पत्नी सीमा और चार साल का बेटा देव थे।

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सीमा बृज लाल हॉस्पिटल में आया का काम करती थी। करीब आठ बजे वह घर पर पहुंची और खाना बनाने रसोई में चली गई। कुछ देर बाद सास भारती रसोई पर गई तो सीमा को उसने रसोई के रोशनदान पर दुपट्टे के सहारे लटके देखा। इस पर उसने हल्ला मचाया तो आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। इसी दौरान विक्रम भी घर पर पहुंचा। दुपट्टा काटकर सीमा को परिजन ओर आसपास के लोग बेस अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। चौकी प्रभारी ने बताया कि सीमा की शादी चार साल पहले हुई थी। उसका मायका उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में है। शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है। पति को हिरासत में लिया गया है।

पर्यटक उठा रहे हैं रिवर राफ्टिंग के अंतिम दिनों का मजा

रिवर राफ्टिंग ने ऋषिकेश की पहचान देश-विदेश में बनायीं है, लेकिन पिछले कुछ सालो से यहाँ के राफ्टिंग जोन में हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे है।  बीते कुछ सालो में इस साहसिक खेल पर हादसों का ऐसा धब्बा लग गया है जिस में मोजमस्ती के लिए आया पर्यटक अपनी जान तक गवा चुके है लेकिन हादसे है की रुकने के नाम नहीं ले रहे है, फिर भी पर्यटक  पहुंचकर राफ्टिंग का मजा ले रहे है।
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उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन  की पहचान बन गयी  रिवर राफ्टिंग अब नयी उचाईयो को छूने लगी है, अभी तक आपने अगर रिवर राफ्टिंग का मजा नहीं लिया है तो चले आईये ऋषिकेश क्योकि अब रिवर राफ्टिंग के कुछ ही दिन बाकि बचे है। आम तोर पर गंगा का जलस्तर बढ़ते ही 25 जून के आस पास रिवर राफ्टिंग सीजन का समापन हो जाता है, पर्यटक लगातार वीकेंड पर वाइट रिवर राफ्टिंग का ऋषिकेश में मजा ले रहे है। 
उत्तराखंड में रीवर राफ्टिंग पर्यटन का मुख्य आधार है जिस ने विश्व के नक़्शे पर ऋषीकेश की पहचान बनायीं है। गंगा के रेपिड पूरे विश्व में अपने रोमांच के कारण जाने जाते है। लहरों कि सवारी का ये अहसास जिदगी भर उनको रोमांच कि अनुभूति करता रहता है, लेकिन मुनाफे का ये सौदा अब धीरे धीरे पर्यटकों की जान पर भरी पड़ता जा रहा है, आंकड़ों की तरफ देखा जाये तो पिछले पांच सालों में गंगा में डूबने से 140 पर्यटकों की जान गयी है।

वॉक फ़ॉर योगा में क़दम बढ़ाये उत्तराखंड पुलिस ने

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अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौक़े पर योग को बढ़ावा देने और लोगों को योग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से रविवार सुबह सात बजे उत्तराखण्ड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तथा पुलिस बल ने पुलिस लाईन रेसकोर्स में “वाॅक फोर योगा” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत सभी ने पुलिस लाईन रेसकोर्स से बन्नू स्कूल के चारों तरफ वांक करते हुए वापस पुलिस लाईन स्टेडियम पहुचे।

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इसके बाद मां योगा आश्रम, तपोवन, ऋषिकेश के योगी श्री अम्रतराज जी द्वारा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तथा कर्मचारियों को योगाभ्यास कराया गया। उत्तराखण्ड पुलिस ने 21 जून को मनाये जाने वाले अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिये एक पहल की और सन्देश दिया कि वर्तमान जीवन शैली में योग का क्या महत्व है।

इस वॉक में डी.जी.पी. एम.ए.गणपति, ए.डी.जी.(प्रशासन) अशोक कुमार, आई.जी.संजय गुंज्याल, आई.जी. दीपम सेठ, आई.जी. इन्ट ए.पी. अंशुमान, एस.एस.पी. देहरादून निवेदिता कुकरेती व अन्य पुलिस अधिकारीगण ने भाग किया।  इस कार्यक्रम में पतंजलि हरिद्वार से भी सदस्यों ने हिस्सा लिया ।

खत्म हो रहा मोदी मैजिक या बाकी नेताओं का वजूद नहीं 

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केंद्र सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाए जाने के लिए आयोजित किया गया मोदी फेस्ट फ्लॉप शो साबित हो रहा है।अल्मोड़ा कार्यक्रम के दूसरे दिन कुछ ही लोग व कार्यकर्ता नजर आए। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष ललित लटवाल ने केंद्र की योजनाओं की जानकारी दी।

मोदी फेस्ट के दूसरे दिन भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कार्यक्रम अचानक निरस्त होने से कार्यक्रम फीका हो गया। एडम्स ग‌र्ल्स इंटर कालेज मैदान में लगे पंडाल में दोपहर एक बजे कुछ कार्यकर्ताओं व आम लोगों की मौजूदगी में भाजपा जिलाध्यक्ष ललित लटवाल ने कमान संभाली, लेकिन वह माहौल पार्टी के पक्ष में बना नहीं सके। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की जो भी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, वह आम लोगों के लिए कल्याणकारी साबित हो रही हैं। चाहे वह जनधन योजना हो या उज्ज्वला गैस योजना। इन सभी का लाभ निचले तबके के लोगों को भरपूर मिल रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की प्रशंसा आज पूरे विश्व में हो रही है। जो देश कभी गरीबी, भ्रष्टाचार के रूप में जाना जाता था, अब वह विकास के लिए जाना जा रहा है। इसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री को जाता है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि मौजूदा समय में विरोधी पार्टियों के पास सरकार की आलोचना के सिवाय कुछ नहीं है, लेकिन जनता मोदी की तरफ से किए जा रहे विकास कार्यो को अपना समर्थन दे चुकी है। जिसका परिणाम है कि प्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बन सकी है।

एनएच 74 घोटाले में एसआईटी की लगातार पुछताछ जारी

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एनएच 74 मुआवजा घोटाले में पूर्व पीसीएस अफसर डीपी सिंह से पूछताछ के बाद शनिवार को एसआइटी ने पूर्व एसएलएओ अनिल कुमार शुक्ला से लंबी पूछताछ की। करीब सात घंटे चले सवाल-जवाब में शुक्ला खुद को बेगुनाह बताते रहे। उनका कहना था कि बेवजह उनका नाम घसीटा गया है और घोटाले से उनका कोई लेना-देना नहीं। वह जितने समय भी एसएलएओ रहे न्यायसंगत काम किया। अधिकार क्षेत्र से कभी बाहर नहीं गए। उन्होंने कुछ साक्ष्य भी एसआइटी को उपलब्ध कराए। इसके साथ ही पांच अन्य कर्मचारियों और किसानों के भी एसआइटी ने बयान दर्ज किए।

करोड़ों के मुआवजा घोटाले की जांच ने तेजी पकड़ ली है। अब तक सीआरपीसी की धारा 160 के तहत 90 से अधिक लोगों को नोटिस जारी कर एसआइटी के समक्ष बयान दर्ज कराने को कहा गया है। इनमें 25 लोग बयान दर्ज करा चुके हैं। पूर्व एसएलएओ डीपी ¨सह भी इसमें शामिल हैं। शुक्रवार को उनसे सात घंटे पूछताछ के बाद शनिवार को एसएलएओ रहे अनिल कुमार शुक्ला से पूछताछ का सिलसिला चला। शुक्ला फिलहाल निलंबित चल रहे हैं। करीब सात घंटे वह एसआइटी के सामने सवालों का जवाब देते रहे। बताते चलें कि शुक्ला एसएलएओ रहने के साथ ही एसडीएम रुद्रपुर और सितारगंज भी रहे।

पूरी पूछताछ में वह इस घोटाले से किनारा करते रहे। उनका कहना था कि न तो एसएलएओ रहते और न ही एसडीएम के अपने कार्यकाल में कोई गड़बड़ी हुई है। जो 143 की गई है, वह ठीक है और बैक डेट में उन्हें दर्ज करने जैसी कोई बात नहीं है। शुक्ला ने कुछ साक्ष्य भी टीम को उपलब्ध कराए। बता दें कि शुक्ला शुक्रवार को भी अपने बयान दर्ज कराने पुलिस कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन उन्हें शनिवार का समय दिया गया था। शुक्ला निर्धारित समय पर एसआइटी के सामने हाजिर हुए। उनके अलावा पांच अन्य कर्मचारियों और किसानों के बयान दर्ज किए गए हैं।

योग नगरी ऋषिकेश में मनाया जायेगा योग दिवस

ऋषिकेश को अंतराष्ट्रीय योग नगरी के रूप में जाना जाता है, इसलिए आने वाले अंतराष्ट्रीय  योग दिवस की तैयारियां ऋषिकेश में शुरु हो गई है। अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर बड़े पैमाने पर योग किया जायेगा जिसमे विशेष  तौर पर वरिष्ठ नागरिक और स्कूली बच्चों को योगाभ्यास कराया जायेगा।
 
चाइना में योग केंद्र चलाने वाले योगी संजय नौटियाल ने बताया की योग नगरी ऋषिकेश में ध्यान और योग की एक अलग वाइब्रेशन है और पूरी दुनिया का कोई भी योग साधक या योग गुरु अपने जीवन में कम से कम एक बार ऋषिकेश आकर योगअभ्यास करने का सपना देखता है।
यंहा का बच्चा बच्चा जन्मजात अपने आप में योग साधक होता है। योगिराज कर्णपाल ने प्रेस को जानकारी दी की ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट, आईडीपीएल, चंदेश्वर मंदिर, शिव गंगा धाम और कुंआ वाला में योगाभ्यास कराया जायेगा और साथ ही निरोग रहने की भी टिप्स दी जाएँगी।

रोमांच का दूसरा नाम है मसूरी का जिपलाईन

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पहाड़ों की रानी मसूरी यूं तो पर्यटकों के बीच हमेशा से लोकप्रिय रही है लेकिन अब मसूरी युवाओं के लिए भी फेवरेट डेस्टिनेशन बन चुका है। युवा पर्यटकों के दिलों दिमाग में जगह बना चुका एडवेंचर अब उन्हें मसूरी की तरफ खींचता है। वर्तमान समय में यह हिल-स्टेशन धीरे-धीरे अपनी जगह एक हाॅलिडे डेस्टिनेशन के साथ-साथ एडवेंचर मैप में भी अपनी जगह बना चुका है। एडवेंचर के लिए मसूरी में साइकलिंग, रैपलिंग, क्वोड बाइक्स, रेंट पर मिलने वाले सी-वे और उसके साथ साथ अब एक और एडवेंचर.. ज़िप लाईन भी इस लिस्ट में जुड़ गया है।

मसूरी झील हमेशा पर्यटकों से लकदक रहने वाला मशहूर डेस्टिनेशन रहा है । ज़िपलाईन अपने टूरिस्ट को 600 मीटर तक लेकर जाता है। जिपलाईन सुबह 9 बजे से 7 बजे तक साल के 365 दिन चलता है, और बहुत बड़े ग्रुप के लिए इनके पास अलग-अलग आॅफर भी हैं। किसी भी दिन मसूरी की तरफ जाते हुए बहुत से पर्यटक लाईन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आ जाऐंगे। जिपलाईन एक सुरक्षित एडवेंचर हैं जिसमे पूरी बाॅडी हारनस दी जाती है, साथ में डबल लेयर ब्रेकिग सिस्टम है जिसमे गलती होने का चांस ना के बराबर है।

हमारा गाइड, देव हमें बताते है, ‘हम कुल 6 लोग हैं, जिन्होंने मार्च के महीने में क्रैश कोर्स किया था और 8 अप्रैल के बाद से व्यावसायिक रूप से काम कर रहे हैं। केवल 4 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोग और 90 किग्रा से कम वजन के लोगों के लिए हम साहसिक पर वास्तविक एडवेंचर को महसूस करने के लिए उन्हें डाउन दि लाईन भेजते हैं।”

सुधांशु रावत, इस रोमांच के पीछे की बात बताते हैं , ‘इस प्लान को सफल बनाने में हमें एक साल 3 महीने लगे और आज इस मुकाम पर पहुचें है। सुधांशु कहते हैं कि “हमारे पास हर तरह के लोग जिप करने आते हैं, सबसे ज्यादा उम्र के आदमी जो हमारे साथ ज़िप गया था वह 75 साल के थे और सबसे कम उम्र का साढ़े 5 साल की लड़की थी। यह काफी दिलचस्प है कि पुरुषों की बजाय हमारे पास जिप के लिए अधिक महिलाएं आती हैं।”

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बातचीत के दौरान हम हैदराबाद की निलानजना सिंहरॉय ज़िपलाईन पर मिली, 10 साल की यह साहसी लङकी कहती है, ‘मुझे थोड़ा डर लग रहा है लेकिन फिर भी मैं उत्साहित है,  यह मेरा पहली बार जिपलाइन अनुभव है।’ दोबारा जब हम निलानजना से मसूरी झील पर नीचे मिले, जहां यह ज़िपलाईन समाप्त होती है, वह सबसे रोमांचित पल था और उसकी उपलब्धि लेने पर एक गर्व महसूस हो रहा था, क्योंकि यह हमेशा नहीं होता कि आप 600 मीटर पलक झपकते में तय कर ले।

 

164 प्राथमिक शिक्षकों की नौकरी पर मंडराया खतरा

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तथ्यों को छुपाकर 2012 के बाद  केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा पास राज्य के 164 प्राथमिक शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। नैनीताल, हाईकोर्ट ने इन शिक्षकों की नियुक्तियों को चुनौती देती विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए शिक्षकों को नोटिस जारी किए हैं।

शिक्षा विभाग ने नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजुकेशन द्वारा 2012 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत शिक्षक बनने को टीईटी अनिवार्य कर दिया था। राज्य सरकार द्वारा 1200 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था।

इन पदों के लिए बीएड व सीपीएड डिग्रीधारकों द्वारा भी आवेदन किया गया, जो टीईटी पास नहीं थे, उन्हें भी नियम विरुद्ध तरीके से नियुक्ति दे दी। इसी बीच मामला हाई कोर्ट में पहुंचा तो एकलपीठ ने सरकार से ऐसे अभ्यर्थियों की सूची मांगी थी, जिनके द्वारा 2012 के बाद सी-टेट पास किया गया था। एकलपीठ ने सरकार से इन शिक्षकों की पात्रता चेक करने को कहा था मगर सरकार द्वारा अर्हता चेक किए बिना ही नियुक्ति दे दी गई।

इधर, हरिद्वार के कुलदीप कुमार व अन्य ने विशेष अपील दायर कर इन शिक्षकों की नियुक्तियों को चुनौती दी। जिसमें कहा गया था कि 23 अगस्त 2010 को केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अंतर्गत बीएड पास कर 2012 के बाद सी-टेट पास अभ्यर्थी पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं बन सकते।

इन अभ्यर्थियों द्वारा तथ्यों को छिपाकर नौकरी हासिल की गई है। लिहाजा नियुक्तियां रद की जाएं। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद सी-टेट पास 164 सहायक अध्यापकों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

आयुर्वेद से संभव है माइग्रेन का इलाज: वैद्य बालेंदु प्रकाश

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शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो अपनी जिंदगी में सिर दर्द से परेशान ना हुआ हो। अचानक होने वाला सिरर्दद कई बार घातक एंव जानलेवा भी हो सकता है परन्तु कुछ तरह के सिरर्दद बार बार, लगातार और जीवन पर्यन्त भी होते रहते है। शनिवार को देहरादून में आयोजित सेमिनार में माइग्रेन, इसके कारण और आयुर्वेंद से इसके उपचार पर देशभर के नामी चिक्त्सकों ने विचार किया।

माइग्रेन का बारे में बताते हुए पद्मश्री वैद्य बालेंदु प्रकाश ने बताया कि सरदर्द में लगभग 90 प्रतिशत रोगी माइग्रेन से पीड़ित होते हैं, जिसके लक्षण हैः

  • साल में कम से कम 5 बार या उससे अधिक सिर दर्द की पुनरावृत्ति होना
  • बगैर किसी चिकित्सा के इस सिरदर्द की अवधि कम से कम चार घण्टे और ज्यादा से ज्यादा 72 घण्टे तक होना
  • सिर में एक या दो स्थानों पर ही दर्द का होना, सिर की नसों में धड़कन या हथौडे़ की तरह धक धक महसूस होना, तीव्र या असहनीय दर्द का होना, शारिरिक श्रम से दर्द का और बढ़ना
  • सिर दर्द का आवेग होने पर रोशनी और आवाज का अच्छा ना लगना या जी मिचलाना और उल्टी का होना

माइग्रेन रोग में मूल कारणों को छोड़कर केवल लक्षणों की चिकित्सा करने से उक्त सभी औषधियों का द्धीर्घ काल तक सेवन करना पड़ता है जिससे धीरे-धीरे कई खतरनाक परिणाम हो सकते है।

माइग्रेन में दी जाने वाली औषधियॉं आयुर्वेद के रस शास्त्र पर आधारित हैं जिसके प्रायः सभी घटक कच्ची अवस्था में शरीर के लिए हानिकारक है। किन्तु सही तरीके से निर्माण करने पर यह औषधियॉ हो जाती है। लंबे समय तक अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर परखी गई आयुर्वेदिक दवाईयां माइग्रेन के मरीजों को राहत दिलाने और इस बिमारी का जड़ से इलाज करने में सफल रही हैं।

गोष्ठी में बल दिया गया कि:

  • आयुर्वेदिक दवाईयां माइग्रेन की रोकथाम में प्रभावी है।
  • आयुर्वेदिक दवाईयां एलोपैथी के मुकाबले कम अवधि में अधिक एंव स्थायी लाभ देती है।
  • आयुर्वेदिक दवाईयां पूर्ण लाभ देती है।
  • आयुर्वेदिक दवाईयों का कोई साइड इपेक्ट नहीं होता है।

इस गोष्ठी में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भी हिस्सा लिया। भट्ट ने कहा कि “इस पूरे सेमिनार की विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी जाएगी। ताकी केंद्र सरकार भी आयुष कार्यक्रम में इनका पूरा उपयोग कर सके। इस मौके पर एम्स भुबनेशवर के पूर्व निदेशक डाॅ ए के महापात्रा ने कहा कि “आयुर्वेद से माइग्रेन का इलाज मुमकिन हो सकता है ओर इसलिये आज के समय की जरूरत है कि आयुर्वेद और ऐलोपैथी को साथ लेकर काम किया जाये”। वहीं आॅल इंडिया इंस्टीट्यूट आॅफ आयुर्वेद के निदेशक डाॅ अभिमन्यु कुमार ने कहा कि ” वैद्य बालेंदु के प्रयास काबिले तारीफ हैं”