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आइये इतिहास के वो पन्ने पलटे जिन्होने विश्व को भारतीय योग से रूबरू कराया 

विश्व भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र महर्षि महेश योगी का चौरासी कुटिया का आश्रम उत्तराखंड में एक ऐसी धरोहर है।विदेशीयो की जुबान पर ऋषिकेश के बीटल्स आश्रम का नाम एक आम बात है, यही वो जगह है जिसने पुरे विश्व को भारतीय योग से परिचित कराया। पश्चिम योग की धरा से रूबरू होकर इसको आत्मसाध कर आज यूएनओ ने भारतीय योग को जरुरी मानकर, 21 जून को इंटर नेशनल योगा डे के रूप में मान्यता दी, इसका श्रेय भी ऋषिकेश को जाता है।

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भावातीत योग धयानम के गुरु महर्षि महेश योगी ने भारतीय योग को विदेशियो से रूबरू करवाया और ऋषिकेश के गंगा तट पर 60 के दशक में एक प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति की मिसाल का एक नगर बसाया। शकराचार्य नगर, जिसमे गोल गुम्बदाकार, 84 कुटिया का निर्माण किया जो आज भी अपनी अद्भुत कारीगरी का अनूठा मेल है। दीवाने इसकी एक झलक पाने के लिए आज भी सात समंदर पार से ऋषिकेश में स्थित चौरासी  कुटिया  का रुख करते है और ध्यान करते है। अब राजा जी टाईगर रिजर्व पार्क 30 साल बाद विश्व भर के योग प्रेमियों के लिये महर्षि महेश योगी के आश्रम को खोलने दिया है

60 और 70 के दशक में मशहूर बैंड बीटल ने ऋषिकेश का रुख किया, ये वो समय था जब पश्चिम को भारतीय योग और आध्यात्म के बारे में पता  चला, विदेशी जानकार बताते है कि यही जो समय था जब ईस्ट मीट वेस्ट का मिलन हुआ था। बीटल्स कि देखा देखि विदेशी भी भारत का रुख करने लगे और यहाँ से भारतीय योग पूरी दुनिया में तेज़ी से फैलने लगा। विदेशियो में आज भी इस आश्रम को देखने का बड़ा क्रेज है और  बताते  है जब वे 80 के दौर में आये थे तब से आज तक यहाँ का आध्यात्मिक वातावरण की बात ही कुछ और थी जो आज भी वैसे ही है कल-कल गंगा और नेचर नयी ऊर्जा का संचार करती है।

60 के दशक में जहा पूरा विश्व बीटल्स के पीछे भाग रहा था और बीटल्स ऋषिकेश के गंगा के तट पर महर्षि महेश योगी के आश्रम में नयी  धुनों को तैयार रहे थे यही वो समय जब ईस्ट मीट वेस्ट की धूम विश्व में मच गयी और बड़ी संख्या में विदेशी ऋषिकेश का रुख करने लगे और भारतीय योग दुनिया के सर चढ़ कर बोलने लगा

योग दिवस में शामिल होने के लिए स्विजरलैंड की नताली पहुंचीं पिथौरागढ़

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अंतराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए स्विजरलैंड की 35 वर्षीय नताली ईजो पिथौरागढ़ पहुंच कर योगा का अभ्यास किया। नताली स्विजरलैंड के लोजान शहर की रहने वाली हैं। वे योग से प्रभावित होकर योगा दिवस में भाग लेना चाहती है। योग दिवस पर आयोजित नगरपालिका सभागार में लोगों को योग का प्रशिक्षण देंगी। नताली का कहना है उनके जीवन में योग का बहुत महत्व है। योग का ही देन है कि जीवन आज खुशहाल है। इसलिये उन्हें भारत में रहना अच्छा लगता है।


नताली 20 साल की उम्र में स्लिप डिस्क की बीमीरी से ग्रसित हो गई थी और उन्होंने इस परेशानी से निजात पाने के लिए काफी इलाज कराया लेकिन कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने नियमित योग किया और बीमारी ठीक हो गई। इसके बाद वह ऋषिकेश आ गई और डॉक्टर विनोद कुमार से योग की शिक्षा हासिल की।

जरूरत 12वीं पास की, लाइन में बीटेक-एमटेक

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दून के शनुल शर्मा बीटेक पास हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने कई जगह नौकरी की तलाश की, लेकिन काबिलियत के अनुरुप नौकरी नहीं मिली। बेरोजगारी के कारण अब उन्हें अपने शिक्षा क्षेत्र तो छोड़ों किसी भी क्षेत्र में नौकरी की तलाश है। इसी तलाश को पूरा करने के लिए शनुल सोमवार को क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय में पल्स इंटरनेशनल दून कंपनी की ओर से मार्केटिंग विभाग में निकली रिक्तियां पर आयोजित साक्षात्कार में भाग लेने पहुंचे, जिसके लिए न्यूनतम शिक्षा सिर्फ 12वीं पास रखी गई थी। सिर्फ शनुल ही नहीं, सैंकड़ों ऐसे युवा यहां साक्षात्कार देने पहुंचे थे ।
स्नातक पास थे या फिर परास्नातक।


पल्स इंटरनेशनल कंपनी की ओर से मार्केटिंग कार्य के लिए मैनेजर, असिस्टेंट मैनेजर व ब्रांच मैनेजर के लिए 50 पदों पर इंटरव्यू लिए गए। इसके लिए वेतन साढ़े आठ से दस हजार रुपये प्रतिमाह तय किया गया। अब आवेदकों की प्रोफाइल पर गौर करें तो इंटरव्यू देने वाले 152 आवेदकों में मात्र 37 युवा ऐसे थे जो 12वीं पास थे। जबकि, 59 आवेदकों ने स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली है। सात एमबीए करने के बाद बेरोजगार हैं, दो आवेदक बीटेक, एक एमटेक करने के बाद यहां इंटरव्यू देने पहुंचे। जबकि, 46 आवेदकों ने परास्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली है।
13 युवाओं को मिली नौकरी

सेवायोजन कार्यालय में आयोजित रोजगार मेले में 13 बेरोजगार युवाओं को मार्केटिंग क्षेत्र में नौकरी मिली है। चयनित युवाओं को प्रतिमाह दस हजार रुपये मासिक वेतन प्रदान किया जाएगा। कुल प्राप्त अंकों की प्रतिशत और अनुभव के आधार पर 22 युवाओं का चयन किया गया। इसमें मात्र 13 युवा ही ग्रुप डिस्कशन और साक्षात्कार में सफलता पा सके। इस दौरान चार युवाओं को मैनेजर व नौ का सहायक मैनेजर के पद पर किया गया। क्षेत्रीय सेवायोजन अधिकारी अजय सिंह ने बताया कि जो अभ्यर्थी सफल नहीं हो पाए हैं उन्हें अगले रोजगार मेले में कंपनी अवसर देगी।

नैनी झील के गिरते जल स्तर के कारण और उपाय के लिए राज्यपाल ने बुलाया सेमिनार

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नैनीताल झील के गिरते जल स्तर पर लगातार चिंता जताने तथा नैनीताल प्रशासन से संज्ञान लेने के बाद झील संरक्षण की दिशा में राज्यपाल डाॅ कृष्ण कांत पाल ने एक और अहम कदम आज उठाया। राज्यपाल ने राजभवन में पर्यावरण विशेषज्ञों व वैज्ञानिकों का एक सेमिनार बुलाया।
राज्यपाल ने नैनीताल झील को पयर्टन व राजस्व का मुख्य स्त्रोत बताते हुए सभी विशेषज्ञों व प्रशासनिक अधिकारियों से इसके जल स्तर को बढ़ाने व नैनीताल में पानी की समस्या का निदान करने के लिए सुझाव आमंत्रित किये। सभी ने एकमत से स्वीकारा कि मुख्य रूप से नैनीताल झील में जो भूमिगत जल स्त्रोतों से पानी का रिसाव झील में होता है वह स्त्रोत नैनीताल में होने वाले निर्माण कार्याे के कारण दब गये हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि इन वाटर सिर्सोसेज को पुनर्जीवित किया जाना होगा।
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नैनीताल में ट्रैफिक के दबाव, ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव, सर्दी के मौसम में होने वाली वर्षा की मात्रा में कमी आना, समय समय पर आने वाले भुकम्प व लैण्ड स्लाइड भी झील के प्राकृति स्त्रोतों को बंद कर रहे हैं। जिस कारण झील के जल स्तर में कमी आ रही है। विशेषज्ञों ने कहा कि शहर की आबादी पयर्टकों का दबाव बढ़ने के कारण झील से पहले की अपेक्षा अधिक मात्रा में जल पम्पिंग के जरिये निकाला जा रहा है जबकि उस अनुपात में पानी झील में पहुँच नहीं पा रहा जिस कारण झील का जल स्तर कम हो रहा है।
झील का जल स्तर सुधारने के लिए विशेषज्ञों ने वर्षा जल को नागरिकों द्वारा सीवेज में बहाने के बजाय झील में पहुँचाए जाने की व्यवस्था किये जाने की जरूरत बतायी। राज्यपाल ने वर्षा जल संरक्षण की मुहिम को जन-जन तक पहुँचाने तथा इसके लिए लोगों को उत्साहित किये जाने का काम स्थानीय प्रशासन को सौंपा। वैज्ञानिकों ने सुझाव देते हुए कहा कि शहर में यातायात को नियंत्रित किया जाये, स्थानीय नागरिकों के लिए प्रति व्यक्ति जल उपभोग की सीमा निर्धारित कर जल की रेशनिंग की जाये, पूरे शहर में किसी भी कारणोें से हो रही पानी लीकेज को तुरंत बंद करने, वर्षा जल को संरक्षण करने तथा इसके लिए लोगों के प्रोत्साहित किये जाने के सुझाव राज्यपाल को दिये।
विशेषज्ञों ने झीलों के जल संवर्धन व संरक्षण हेतु राज्य में सरोवर विज्ञान विभाग आवश्यकता सामुहिक रूप से जतायी। राज्यपाल ने अधिकारियों से कहा कि वर्षा जल संरक्षण करने वाले नागरिकों, होटल संचालकों आदि को पुरस्कृत किए जाने की योजना बनाई जाये ताकि लोग जल संरक्षण के लिए प्रेरित हों। राज्यपाल ने कमिश्नर कुमाऊं मंडल श्री भट्ट की अध्यक्षता में झील निगरानी समिति का गठन किये जाने की भी बात कही।

बागेश्वर के किसान का बेटा साइकिल यात्रा पर विश्व रिकार्ड बनाने निकला

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Cycle track in Noida-Express Photo by Gajendra Yadav,11/07/2016

बागेश्वर के गरुर शहर से 18 वर्षीय साइकिल चालक प्रदीप राणा, की आँखें विश्व रिकॉर्ड पर हैं। देहरादून में ग्राफिक एरा में बीएससी (आईटी) के छात्र राणा, अपने दो पहियों पर पूरे देश में 20,000 किलोमीटर तक कवर करने की योजना बना रहे है। ऐसा करने से, वह महाराष्ट्र के संतोष होली द्वारा बनाए रिकार्ड को तोड़ने की योजना बना रहे है, जो पूरे देश में 15,222 किलोमीटर पर साइकिल चला चुके है।

नौजवान ने 23 मई को अपनी यात्रा शुरू की और असम से गोगामुख पहुंच गया। 3,000 किमी की दूरी तय करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और अरुणाचल प्रदेश का दायरा पूरा कर लिया है।अब वह नागालैंड, मेघालय और उड़ीसा की यात्रा करेंगे और दक्षिण की ओर कन्याकुमारी जाएंगे। राणा तब महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और जम्मू और कश्मीर के पास जाएंगे।

राणा ने बताया, “मेरा लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करना है।” “इस यात्रा को कवर करने में 5 से 6 महीने लगेंगे। मैं मैदानी क्षेत्रों में लगभग 140 किलोमीटर प्रति दिन और पहाड़ी इलाकों में लगभग 90 किमी की साइकलिंग कर रहा हूं।” राणा ने कहा कि इस यात्रा के दौरान वह लोगों को जीवन के विभिन्न पहलुओं को जान रहे हैं और रास्ते में अनूठे अनुभव भी कर रहे हैं। राणा ने कहा, “मैं ट्रक के ढाबों, युवा क्लबों, अजनबियों और परिचित लोगों के घरों में रह रहा हूं। मैं भी एक छोटा तम्बू रखता हूं जहां मैं सोता हूं”।

पिछले साल राणा ने काठमांडू में साइकिल चलाई थी। उन्होंने कहा, “काठमांडू की यात्रा ने मुझे पूरे भारत में यात्रा करने को प्रोत्साहित किया।” राणा ने कहा कि यह उनके पिता किशन, एक किसान हैं, जिन्होंने इसे अपने सपनों को पूरा करना संभव बना दिया है। राणा ने कहा, “मेरे पिता ने जमीन का एक टुकड़ा बेच दिया, ताकि मुझे यात्रा करने के लिए कुछ पैसे मिल सके।”

किशन राणा ने कहा, “मेरा मानना है कि हर माता-पिता को अपने बच्चों के सपनों का समर्थन करना चाहिए। मेरे बच्चे का सपना बड़ा जरुर है, पर मैं उसके सपने के लिए जो कुछ भी कर सकता हूं।”

बाघों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर न हों शेयर: एनटीसीए

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सोशल मीडिया और खासतौर पर फेसबुक और वाॅट्स एप्प पर बाघों की तस्वीरों के लगातार वाइरल होने पर नेशनल टाइगर कंनसर्वेशन एथोरिटी (एनटीसीए) ने आपत्ति जताई है। पिछले कुछ सालों में बाघों की तस्वीरों को सोशल साइट्स पर शेयर करने का चलन बढ़ा है।  इस पर ध्यान देते हुए बाघों की सुरक्षा के लिये काम कर रही सर्वोच्च संस्थान एनटीसीए ने देशभर के सभी चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डनों को पत्र लिखकर अपने इलाकों में खासतौर पर अपने स्टाफ को इस तरह की तस्वीरों को शेयर करने से मना करने को कहा है।पत्र में एनटीसीए ने कहा है कि इस पिछले कुछ समय से बाघों की जंगलों में तस्वीरें और कैमरा ट्रेप में कैद तस्वीरें सोशल मीडिया में शेयर करती देखी गई हैं। ये बाघों की सुरक्षा के लिये हानिकारक है क्योंकि इनसे शिकारियों को बाघों की लोकेशन का अंदाजा लग सकता है।

एनटीसीए के इस कदम से वाइलड लाइफ से जुड़े जानकार भी सहमत हैं। उत्तराखंड के पूर्व चीफ वाइलड लाइफ वाॅर्डन श्रीकांत चंदोला कहते हैं कि “तस्वीरों के जरिये बागों की निशानदेही करना शिकारियों के लिये आसान हो जाता है। एनटीसीए की एडवाइसरी सही दिशा में है।” साथ ही चंदोला ये भई कहते हैं कि “इस तरह की पहल के साथ साथ ये भी जरूरी है कि शिकार रोकने के लिये और तकनीक का इस्तेमाल किया जाये। जैसे कि ड्रोन की मदद से निगरानी रखना और साथ ही जमीन पर गश्त करने के लिये और कर्मियों की तैनाती की जाये”

बाघों के संरक्षण और बचाव को लिये लंबे समय से काम चल रहा है। इस काम में सोशल मीडिया ने भी लोगों को जागरूक करने में बड़ी भूमिका निभाई है।। लेकिन अब उन्हीं बाघों को बचाने के लिये सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का एनटीसीए का फैसला सही हो सकता है मगर इतना तय है कि सही मायनों में बाघों को बचाने के लिये अबी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

 

किसान मुद्दे पर किशोर उपाध्याय लड़ेंगे अकेले

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लगता है कांग्रेस में ‘एकला-चलो’ का रिवाज बन गया है। पार्टी सिम्बॉल और संगठन को दरकिनार कर वरिष्ठ नेता अपने दम पर मैदान मारना चाहते हैं। इस प्रक्रिया की शुरूआत हरीश रावत से हुई थी, चाहे गैरसैंण के मुद्दे पर धरना प्रदर्शन हो या फिर मध्यप्रदेश में किसानों पर हुई गोलीबारी के खिलाफ हरिद्वार में अनशन, हरीश रावत अकेले नजर आये। अब यही काम किशोर उपाध्याय कर रहे हैं, पिथौरागढ़ में किसान की खुदकुशी के खिलाफ मुखर हुए पार्टी के पूर्व अध्यक्ष इस लड़ाई को अकेले लड़ना चाहते हैं। संगठन और पार्टी नेतृत्व को दरकिनार कर वह चाहते हैं कि अपने बलबूते इस लड़ाई को लड़ा जाए और पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाया जाए। पूर्व अध्यक्ष को यह पता नहीं कि उनके इस प्रयास से संगठन को कितना नुकसान होगा।

कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी कलह सामने आई है। वैसे तो कांग्रेस के पास अभी खोने को कुछ नहीं है और ऐसे समय में दल में बिखराव कांग्रेस को सफाए की तरफ ले जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बाद पार्टी में बिखराव की स्थिति नजर आने लगी है। अभी हाल ही में प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट के नेम प्लेट हटाने के मुददे को भी हवा देने की कोशिश की गई थी और अब किशोर उपाध्याय के बयान ने पार्टी को असहज कर दिया है।

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने किसान आंदोलन के संबंध में पत्रकारों से बातचीत करने के लिए कांग्रेस भवन की जगह सुभाष रोड़ स्थित एक रेस्टोरेंट को चुना। उनसे जब इसकी वजह पूछी गई तो उन्होंने साफ़ कहा कि किसानों का मुद्दा किसी एक दल या वर्ग का नहीं है, इसलिए किसानों के आंदोलन पर मैं कांग्रेस का बिल्ला नहीं लगाना चाहता। जब मैं कांग्रेस के बारे में बात करूंगा तो निश्चित रूप से कांग्रेस भवन में बात करूंगा । उनके इस बयान से साफ़ है की उपाध्याय अपना आंदोलन कांग्रेस के साथ नहीं लड़ना चाहते। सवाल यह है कि जिस किसान को लेकर कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व इतना मुखर है और संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मध्यप्रदेश में धरना प्रदर्शन पर बैठ रहे हैं उसी संगठन का प्रदेश अध्यक्ष रहा एक शख्स यह कहता है कि किसानों की लड़ाई वह पार्टी के सिम्बॉल पर नहीं लड़ना चाहता है। किशोर उपाध्याय के इस विचार को क्या कहेंगे आप? इसका मतलब तो यही हुआ कि किशोर सिर्फ और सिर्फ अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं, उनके लिए संगठन के मायने कुछ नही है।

पंजाब के साथ पावर बैंकिंग पर करार

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उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने पंजाब के साथ पावर बैंकिंग को मंजूरी दे दी है। जून से सितंबर तक उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) पंजाब को 700.8 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली देगा और फिर पंजाब 10 फीसद ज्यादा 778 एमयू बिजली दिसंबर से मार्च तक वापस करेगा।

यूईआरसी सचिव नीरज सती ने बताया कि पंजाब से बिजली लेने के लिए प्रतिदिन शेड्यूल बनेगा। हफ्ते में रिपोर्ट बनेगी कि शेड्यूल से कितनी कम बिजली मिली। कम आई बिजली का बिल केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) के अनशेड्यूल इंटरचेंज (यूआई) चार्ज के अनुसार पंजाब को बिल भेजा जाएगा। अगर किसी दिन कोई बिजली नहीं मिलती है तो बाजार से खरीदी बिजली के दाम के साथ दो रुपये प्रतियूनिट पेनाल्टी के साथ बिल बनेगा। उन्होंने बताया कि पंजाब से वापस मिलने वाली कुल बिजली में अगर 0.5 फीसद की कमी होती है तो चार रुपये और इससे ज्यादा कमी हुई तो पांच रुपये प्रतियूनिट की दर से पंजाब से पैसा लिया जाएगा।
दरअसल, सर्दियों में नदियों का जलस्तर कम होने से बिजली उत्पादन गिरता है, जिससे बाजार से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। बैंकिंग की इस व्यवस्था से उत्तराखंड को सर्दियों में अतिरिक्त बिजली मिलेगी।

अब तक अतिरिक्त बिजली लौटाता था निगम
बिजली की कमी को पूरा करने के लिए उत्तराखंड पावर कार्पाेरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) बैंकिंग करता रहा है। पिछले चार साल से सर्दियों में हरियाणा से बिजली ली जाती रही और फिर गर्मी में पांच फीसद अधिक लौटाई गई। लेकिन, पिछले एक साल में तीन गैस आधारित परियोजनाओं से लंबी अवधि का करार होने के बाद यूईआरसी ने निर्देश दिए थे कि बैंकिंग में पहले बिजली दी जाए, जिससे ज्यादा बिजली मिले।

मकान पर पुश्ता गिरा, पाँच घायल

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आज सुबह देहरादून में कुछ ही घंटो की मूसलाधार बारिश ने राजपुर थाना के सुमन नगर, रस्तोगी गली, में बचन लाल के मकान में किराए पर रहने वाले परिवार के लोग, जिसमें दो महिलाएं तीन बच्चे निवास करते थे। उनके मकान के पीछे की दीवार का पुश्ता उनके छत पर गिर गया, जिसमे उसमें रहने वाले नवीन, अमन, निर्मला, आशा पत्नी बचन सिंह अौर श्रीमती प्रीती घायल हो गए थे।

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घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने उन्हें निकाल कर उपचार के लिये दून चिकित्सालय भेजा, जिनका अभी उपचार चल रहा है।

हाईवे पर झूलते तार दुर्घटना का बने सबब

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उप्र सीमा पर रुद्रपुर के पास हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से कंटेनर में आग लग गई। दुर्घटना के बाद चालक घबराकर कंटेनर छोड़कर फरार हो गया। दमकल वाहनों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान रामपुर मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

कंटेनर के चालक ने रामपुर मार्ग पर रेलवे क्रासिंग के पास सड़क किनारे कंटेनर लगाने का प्रयास किया तो वंहा ऊपर से जा रही हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। देखते ही देखते ट्रक के टायर के साथ कंटेनर ने आग पकड़ ली। सूचना मिलने पर दमकल वाहन मौके पर पहुंच गए। कड़ी मशक्कत के बाद कर्मियों ने आग पर काबू पाया। इस दौरान सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लगनी शुरू हो गई जब तक दमकल वाहनों ने आग पर काबू पाया तब तक रामपुर रोड पर जाम लग चुका था। कंटेनर की आग बुझाने के बाद दमकल वाहनों के किनारे होने के बाद धीरे-धीरे यातायात सुचारु हो पाया। इस दौरान कंटेनर के चालक का कुछ पता नहीं लग पाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चालक घबरा कर भाग खड़ा हुआ था।

कंटेनर में आग लगने की सूचना रुद्रपुर के साथ ही बिलासपुर को भी दी गई थी जिसके चलते रुद्रपुर के दो व बिलासपुर के तीन दमकल वाहन मौके पर पहुंच गए थे। अग्निश्मन अधिकारी हरीश गिरी ने बताया कि ट्रकों में आग की सूचना पर तुंरत ही वाहनों को रवाना कर दिया गया था। समय से दमकल वाहन के पहुंच जाने से कंटेनर में अधिक नुकसान होने से बच गया।

हाईवे पर झूलते तार लगातार दुर्घटनाओं को निमंत्रण दे रहे हैं। अप्रैल में दिल्ली से हल्द्वानी जा रहे कंटेनर में भी ठीक इसी तरह आग लग गई थी। वहीं गदरपुर मार्ग पर चल रहे हाईवे निर्माण के दौरान भी झूलते तारों की चपेट में ट्रक के आने से चालक की जान पर बन आई थी।