Page 735

गांव में निकला 8 फीट लंबा किंग कोबरा

0

पिथौरागढ़ के गांव आमबाग में मंडी समिति में किंग कोबरा दिखने से हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने आठ फिट लंबे किंग कोबरा को पकड़कर जंगल में छोड़ दिया।

king_cobra

गुरुवार को सायं पांच बजे आमबाग मंडी समिति में संजय अग्रवाल के गोदाम में सांप निकलने से कार्य कर रहे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे वन विभाग के सांप पकड़ने में माहिर कर्मी विजय वेंशन ने सांप को पकड़ लिया। उन्होंने बताया कि सांप ब्लैक कोबरा है। यह बहुत ही खतरनाक तथा जहरीला होता है। विजय अब तक 150 से अधिक सांप पकड़ चुके हैं। विजय ने बताया कि उन्होंने सांप पकड़ने की कला डिस्कवरी चैनल को देखकर सीखी है।

हाई कोर्ट ने लगाई शिक्षा विभाग पर एसी, गाड़ियां खरीदने पर रोक

0

प्राथमिक विद्यालयों में गिरते शैक्षणिक स्तर के मामले में हाई कोर्ट ने आदेशों का अनुपालन नहीं होने पर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को फिर से शिक्षा सचिव व वित्त सचिव को व्यक्तिगत तौर पर अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं। साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लग्जरी सामान जैसे कार, एसी, वाटर प्यूरीफायर आदि सामान की खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी।

देहरादून निवासी दीपक राणा ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा का स्तर निचले स्तर तक पहुंच गया है। विद्यालयों में पठन-पाठन सामग्री का अभाव है। शिक्षकों की कमी है। विद्यालय भवन जीर्णशीर्ण हालत में हैं। शौचालय हैं न बैठने के लिए कुर्सी मेज। कोर्ट ने पूर्व में इन कमियों को दूर करने के लिए सरकार को दस बिन्दुओं की गाइडलाइन जारी की थी। आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अधिवक्ता ललित मिगलानी द्वारा कोर्ट में हलफनामा पेश किया गया। जिस पर सुनवाई करते हुए शिक्षा सचिव को कोर्ट में तलब किया गया था। गुरुवार को शिक्षा सचिव चंद्रशेखर भट्ट कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने प्राथमिक शिक्षा में सुधार के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा प्रस्तुत किया। कोर्ट ने सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर शुक्रवार को फिर से शिक्षा सचिव के साथ ही वित्त सचिव को तलब कर लिया। साथ ही शिक्षा विभाग में लग्जरी सामान की खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी। मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ में हुई।

एनएच घोटाले की जांच उलझी लाॅकर में

0

भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले की जांच डबल लॉक में रखी गयी फाईलों के चलते उलझ गई है। शासन से अनुमति न मिल पाने के कारण जहां जांच प्रभावित हो रही है वहीं शासन की अनुमति ही जांच की रफ्तार दे सकती है। अनुमति न मिलने तक एसआइटी की जांच भी प्रभावित होगी।

एन एच घोटाले का जिन्न बाहर आते ही तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन ने मुआवजे से संबंधित फाइलों को उप कोषागार के डबल लॉक में सुरक्षित रखवा दिए गए थे। दस्तावेज डबल लॉक में सुरक्षित रखवाने के आदेश के बाद से ही भूमि अधिग्रहण संबंधित मुआवजे का सारा काम ठप पड़ गया। इसके चलते किसान भी मुआवजे के लिए परेशान घूम रहे हैं। बीते दिनों काशीपुर से गायब फाइलों के जसपुर से बरामद होने के बाद एसआइटी जांच ने जब अपनी रफ्तार पकड़ी तो मामला एक बार फिर गर्मा गया। इस प्रकरण में एसआइटी पूर्व एलएलएओ सहित एनएनएआइ के अफसरों व काश्तकारों के बयान दर्ज कर चुकी है। एसआइटी द्वारा बयान दर्ज करने के बाद उनकी सत्यता को परखने के लिए अधिग्रहण संबंधित दस्तावेजों की जरूरत पड़ने लगी है। लेकिन डबल लॉक में बंद दस्तावेज प्रमुख सचिव के आदेश के बिना बाहर निकालना संभव नहीं है। जिसके चलते एसएवपी डा. सदानंद एस दाते ने जिलाधिकारी को पत्र लिख दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए लिखा था। जिसे शासन की अनुमति के लिए देहरादून भेज दिया गया है। लेकिन अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। दस्तावेजों के बिना एसआइटी की जांच के प्रभावित होने की संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता है।

जबकि इस मामले में एसएसपी सदानन्द दाते ने बताया कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए दस्तावेज हासिल करना जरूरी है। डबल लॉक में बंद दस्तावेज हासिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है। जरूरत पड़ने पर इसमें पुलिस महानिदेशक स्तर पर भी सहयोग से पीछे नहीं हटा जाएगा। जिससे जल्द दस्तावेज हासिल कर जांच को और गतिशील किया जा सके।

उत्तराखंड के सभी स्कूलों में लागू हो सकती है एनसीआरटी की किताबें

0

उत्तराखंड ने स्कूलों में शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबों को सभी स्कूलों में चाहे वह एफिलियेटेड हो या ना हो हर जगह अनिवार्य करने की योजना बनाई है। इसके जरिए शिक्षा में एकरूपता लाने और निजी स्कूलों और प्रकाशकों की गठजोड़ को खत्म करने में सरकार को काफी मदद मिलेगी।

अगर यह योजना सफल होती है तो अगले शैक्षणिक सत्र से एनसीईआरटी किताबें कक्षा 3 से 12 के लिए शुरु कर दी जाऐंगी। सरकार ने उत्तराखंड में किताबें प्रकाशित करने की योजना के लिए एनसीईआरटी अधिकारियों से बातचीत करना शुरु कर दिया है।

एनसीईआरटी अधिकारियों के साथ बैठक के बाद, स्कूल शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने इन पुस्तकों को राज्य में प्रकाशित करने और उन डीलरों को आपूर्ति करने के लिए मंजूरी दी जो इसके बाद उन्हें स्कूलों में डिस्ट्रीब्यूट करेंगे।

वर्तमान में, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (यूबीएसई) से संबद्ध स्कूल एनसीईआरटी किताबों का पालन करते हैं। लेकिन इस आदर्श का उपवाद निजी स्कूल हैं जिनमें से अधिकांश भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा (सीआईएससीई) के लिए आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध रखते हैं।

पांडे ने बताया, ’हमने किताबें प्रकाशित करने के लिए एनसीईआरटी अधिकारियों की सहमति ली है।हमारी यह योजना है कि सभी बोर्ड उसी किताबों (एनसीआरटी) को अपनाए। इससे प्राईवेट प्रकाशकों की जांच करने में मदद मिलेगी और साथ ही उनकी भी जो निजी स्कूलों के छात्रों को महंगी किताबें बेच रहे हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा “।

राज्य सरकार हर साल किताबों को प्रकाशित करने में लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च करती है। इस फंड में पाठ्यक्रम, शोध और अन्य विवरणों के पुन: मूल्यांकन की लागत शामिल है। यदि सभी स्कूलों द्वारा एनसीईआरटी पुस्तकों को स्वीकार किया जाता है, तो सरकार प्रकाशन के लिए और राज्य स्तर के अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए इस व्यय को खत्म करने में सक्षम हो जाएगी।

प्राइवेट स्कूल अपने महंगे पाठ्यपुस्तकों को निर्धारित करने के बदले निजी प्रकाशकों को हाई कमीशन पर तैयार करते हैं जो एक सच्ची बात है। सूत्रों का दावा है कि कुछ बड़े निजी स्कूलों इस कारोबार से 5 करोड़ रुपये सालाना कमाते हैं।

पांडे ने अपने स्तर पर एनसीईआरटी पुस्तकों को स्कूलों में शुरु करने के लिए कुछ निजी स्कूलों के साथ बातचीत की है। दून के बाला हिसार अकादमी के प्रिंसिपल माधुलिक संधू ने कहा कि एनसीईआरटी की किताबें विज्ञान और गणित के लिए अच्छी हैं लेकिन अंग्रेजी पुस्तकों को अपग्रेड करने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि “मैंने व्यक्तिगत रूप से एनसीईआरटी पुस्तकों में गलतियां पाई हैं। एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम प्रतियोगिताओं के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन लैंग्वेज और विशेष रूप से अंग्रेजी को अपग्रेड करने की आवश्यकता है।”

“सीआईएससीई के संयोजक, देहरादून, पीएस कालरा ने कहा कि यह फैसला “सीआईएससीई की केंद्रीय इकाई का है बाकी हम यहां केवल परीक्षा करवाने के लिए बाध्य हैं। साथ ही, सरकार स्कूलों में ‘बुक बैंक’ को बढ़ावा देगी। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए, स्कूल के पाठ्यक्रम को बदलने के लिए निर्धारित अंतर कम से कम पांच साल होगा। यह, स्कूल विभाग के सूत्रों का कहना है कि, गरीब और जरूरतमंद छात्रों की मदद के लिए आएंगे जो पुरानी दान वाली किताबों का उपयोग कर सकते हैं।

पांडेय ने कहा कि “एक वर्ष के बाद, किताबें बर्बाद हो जाती हैं।अगर हर बोर्ड के पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी पुस्तकों का इस्तेमाल होने लगेगा तो एक साल के बाद, हम ज़रूरतमंद छात्रों के लिए पुरानी किताबें रख सकते हैं। इसके साथ, हम पेपर के इस्तेमाल में कमी लाऐंगे और एक स्वस्थ ईकोसिस्टम में योगदान कर पाऐगे।”

तो ये है उत्तारखंड के 8 मुख्यमंत्रियों की घोषणाओं का रिपोर्ट कार्ड

0

हल्द्वानी के एक कार्यकर्ता द्वारा दायर आरटीआई के एक प्रश्न के उत्तर में पता चला है कि पिछले 17 सालों में राज्य के 8 मुख्यमंत्रियों द्वारा किए गए कुल 7,888 घोषणाओं में से केवल 3,128 पूर्ण हुए है जो, केवल 40 प्रतिशत है।

वादे करके पूरे ना करने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लिस्ट में पदों की सूची में सबसे ऊपर हैं, जिन्होंने अपने ढाई साल के दौरान किए गए 3,814 घोषणाओं के साथ सबसे ज्यादा घोषणा की थी, जिसमें से केवल 1300 से ज्यादा कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। उनके पहले विजय बहुगुणा ने 1340 घोषणाएं कीं जिनमें से 678 पूरे हुए । मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल में द्वारा किए गए 1140 घोषणाएं हुईं जिनमें से 450 को पूरा किया गया। एनडी तिवारी, राज्य के एकमात्र मुख्यमंत्री, जिन्होंने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया और उस दौरान, 895 घोषणाएं हुई जिसमें से केवल 311 घोषणा पूरी हुई।

आरटीआई उत्तर के अनुसार, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बीसी खंडूरी ने अपने 2 बार मुख्यमंत्री पद के दौरान 617 घोषणाएं कीं, जिनमें से 336 को लागू किया गया। राज्य के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी और उनके उत्तराधिकारी भगत सिंह कोश्यारी ने सबसे कम घोषणाएं की (33 और 11), जिनमें से कोई भी घोषणा सफल नहीं हुई। वर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अब तक के अपने कार्यकाल के में आज तक 38 घोषणाएं की हैं, जिनमें से 10 पर काम हुआ है ।

गुरविंदर चढ्ढा, एक एक्टिविस्ट है जिन्होंने आरटीआई में सवाल दायर किया था, उन्होंने कहा, “आंकड़े खुद के लिए बोलते हैं और साथ ही यह भी दर्शाते हैं कि एक से एक घोषणा करने वाले मुख्यमंत्री कितनी गंभीरता से अपनी घोषणाओं पर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि, ‘राज्य सरकार द्वारा प्राप्त उत्तर के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्रियों द्वारा कुल 7,888 घोषणाएं की गईं, जिनमें से 2,477 घोषणाओं पर अभी भी काम चल रहा हैं।’

डेटा पर प्रतिक्रिया देते हुए नैनीताल के एक कार्यकर्ता अजय सिंह रावत ने कहा, “हमारे सार्वजनिक कर्मचारियों यानि की नेताओं को लोगों के प्रति अपनी कर्तव्य का पालन करना चाहिए। झूठे वादों का निर्माण करना एक बुरा उदाहरण और राजनीतिक नेताओं में लोगों के भरोसे को ठेस पहुंचाता है। लोकलुभावनें वादों के बजाय ऐसे वादे करने चाहिए जो आसानी से पूरे किए जा सकें।

इस बीच, कांग्रेस के राज्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने मुख्यमंत्रीयों द्वारा कि गई घोषणाओं को सही ठहराया है।उन्होंने कहा कि “ऐसे कई अवसर आते हैं जब एक मुख्यमंत्री को स्थानीय लोगों की मांग या स्थानीय लोक प्रतिनिधियों के अनुरोध पर घोषणा करनी ही होती है।” उन्होंने कहा कि, “सीएम द्वारा किए गए सभी घोषणाओं के 100 प्रतिशत पूरा होने की उम्मीद नहीं की जा सकती क्योंकि कुछ परियोजनाएं और योजनाएं पूरा होने में कई साल लगते हैं।”

मर्डर की ये तस्वीर देख दहल जायेंगे आप

0

नैनीताल जिले के रामनगर में भारत गैस एंजेसी मालिक विशाल गोयल की उसके ही कर्मचारी ने हत्या कर दी । हत्या की खबर से व्यापारियों में रोष देखने को मिला । रामनगर के मुख्य बाजार में सन्नाटा छा गया है । गौरतलब है की रामनगर के व्यापारी विशाल गोयल का अपने ही कर्मचारी नरेंद्र कड़ाकोटी से सैलरी को लेकर विवाद चल रहा था, जिसके चलते गैस एजेंसी डीलर विशाल ने उसे दो दिन पूर्व नौकरी से निकाल दिया था। गैस एजेंसी मालिक विशाल आज सुबह जब गैस एजेंसी पहुंचा तो अचानक आरोपी नरेंद्र वहां आ धमका और अपनी सैलरी को लेकर पूर्व मालिक से झगड़ने लगा । आरोपी नरेंद्र ने अचानक चाकू निकाल लिया और उसपर वार करने लगा । जिससे बचने की भी उसने भरपूर कोशिश की । विशाल ने ताबड़तोड़ वार से बचने के लिए एजेंसी कार्यालय से बाहर दौड लगा दी। लेकिन आरोपी भी उसके पीछे भागा और कई हमले कर दिये। जिससे विशाल गंभीर रुप से घायल हो गया। विशाल को नगर के ही एक चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे काशीपुर रैफर कर दिया गया। बाद में काशीपुर में व्यापारी विशाल गोयल ने दम तोड दिया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ जारी है। 

मालसी डियर पार्क में जू एक्वेरियम एवं 3डी थियेटर का लोकार्पण

0
‘मालसी डियर पार्क, देहरादून को होने वाली आय का 50 प्रतिशत यहां रहने वाले प्राणियों के कल्याण के लिए व्यय किया जाएगा,’ यह घोषणा मुख्यमंत्री रावत ने मालसी डियर पार्क में निर्मित देहरादनू जू एक्वेरियम एवं 3डी थियेटर का लोकार्पण के अवसर पर किया। पूर्व में यह 20 प्रतिशत था।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि आज अत्यन्त शुभ दिन है जहाॅं एक ओर खूबसूरत व प्राकृतिक वातावरण में बने, मालसी डियर पार्क में जू एक्वेरियम एवं 3डी थियेटर का लोकापर्ण किया गया वहीं राज्य के ग्रामीण क्षेत्र को खुले में शौच की प्रथा से भी मुक्त घोषित किया गया है। ‘हमने संकल्प लिया है कि चालू वितीय वर्ष में राज्य के नगरीय क्षेत्र को भी ओडीएफ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से मालसी डियर पार्क में जू विकसित किया गया है वह प्रशंसनीय है। इससे निश्चित रूप से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बढे़गी।’
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री हरक सिंह रावत, विधायक श्री गणेश जोशी, श्री उमेश शर्मा काऊ आदि भी उपस्थित थे।

सतोपंथ एक्सपेडिशन का फ्लैग-इन प्रोग्राम

0

पुलिस लाईन देहरादून में सतोपंथ expedition का फ्लैग-इन प्रोग्राम आयोजित किया गया जिसमें मुख्य अतिथि श्री एम.ए. गणपति, ङीजीपी उत्तराखण्ड रहे। राज्य में हिमालय क्षेत्रों में होने वाली किसी भी दुर्घटना, खोज, एवं बचाव अभियानों के दौरान होने वाली मानव क्षति न्यूनीकरण की सफलता की दर को बढाने एवं तकनीकी कार्यशैली एवं कार्यक्षमता बढाये जाने के दृष्टिगत एस.डी.आर.एफ की 17 सदस्यीय माउण्टेनियरिंग टीम को उच्च तुगंता क्षेत्रों में प्रशिक्षण के लिये 18 मई को ङीजीपी उत्तराखण्ड ने पुलिस मुख्यालय से सतोपंथ पर्वत (उचाई 23263 फीट) अभियान के लिये फ्लैग-आफ किया गया था। 

10.06.2017 को  एस.डी.आर.एफ टीम ने विषम परिस्थितियों में 23263 फीट ऊची चोटी संतोपंथ का आरोहण किया। 5 जून  को वासुकीताल से 8 किमी आगे करीब 5200 मीटर की ऊंचाई पर 6 सदस्यी पर्वतारोही दल के एक पर्वतारोही  प्रयांग चौधरी के एडवांस बैस कैम्प व कैम्प 1 के बीच मौजूद सुराले ग्लेशियर में 50 फीट गहरे कैरावास में गिर जाने पर एस.डी.आर.एफ. की हाई एल्टिट्यूड रेस्क्यू टीम (एचएआरटी) द्वारा विषम भौगोलिक परिस्थिति में भी साहस का परिचय देते हुयें 50 फीट गहरे कैरावास से चोटिल पर्वतारोही को निकाला गया व मौके पर प्राथमिक उपचार प्रदान किया गया।

आयोजन के दौरान मुख्य अतिथि श्री गणपति द्वारा माउण्टेनियरिंग दल के सभी सदस्यों को प्रशस्ति पत्र दिये गयें  व एसडीआरएफ के कार्यो के सराहना की एवं बताया कि भविष्य में भी एसडीआरएफ माउन्टेनिंग टीम के द्वारा इसी प्रकार के एक्सपेडिशन किये जायेगे जिससे उच्च तुगंता क्षेत्रों में रेस्क्यू कार्यो को मजबूती प्रदान हो सके।।

रानीगंज खदान कांड पर बनने वाली फिल्म में अजय देवगन

0

सरगढ़ी के युद्ध पर ‘संस ऑफ सरदार’ (सन ऑफ सरदार पार्ट 2) बनाने की घोषणा के बाद अजय देवगन एक और बायोपिक फिल्म बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं।
अक्षय कुमार की फिल्म ‘रुस्तम’ का निर्देशन करने वाले टीनू सुरेश देसाई की नई फिल्म में अजय प्रमुख भूमिका में नजर आएंगे। बताया जाता है कि इस फिल्म की कहानी 1989 के रानीगंज में कोयला खदान के बचाव में आगे आए एक एडीशनल माइनिंग इंजीनियर जे एस गिल की जिंदगी पर होगी, जिन्होंने अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर खदान में फंसे 64 मजदूरों की जिंदगी बचाने का साहसिक काम किया था। देश भर में चर्चित हुए इस कांड में छह मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
कहा जाता है कि देसाई ने पहले इस फिल्म में अक्षय कुमार को कास्ट करने की कोशिश की थी, लेकिन दूसरी फिल्मों में बिजी होने के कारण अक्षय ने इसमें काम करने से मना कर दिया, तो उन्होंने अजय देवगन से संपर्क किया और अजय ने इस फिल्म में काम करने के लिए सहमति दे दी। खबर के अनुसार, इस फिल्म का निर्माण अभिनव शुक्ला और अजय देवगन मिलकर करेंगे। इसकी पटकथा पर काम शुरू हो चुका है। इस साल के आखिर तक इस फिल्म के सेट पर जाने की उम्मीद है। अजय इस साल एक सितम्बर को रिलीज होने जा रही मिलन लथूरिया की फिल्म बादशाहो में नजर आएंगे और फिर दीवाली पर रोहित शेट्टी के साथ उनकी फिल्म ‘गोलमाल 4’ रिलीज होगी।

शराबबंदी को लेकर अब सामुहिक आत्मदाह की चेतावनी

0

शराब की दुकानों को लेकर महिलाों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है लगातार हो रहे दुकान कुलने के विरोेध के चलते शराब व्यापारियों में जहां हडकम्प है वहीं एक दुसरे को देख हर जगह आंदोलन की चिंगारियां जल रही है। हरिनगर से शराब की दुकान नहीं हटने से आक्रोशित महिलाएं उग्र होने लगी हैं। महिलाओं ने एसडीएम एपी वाजपेयी और एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव से मिलकर शराब की दुकान हटाने की मांग की। साथ ही 36 घंटे में कार्रवाई नहीं होने पर सामूहिक आत्मदाह और आमरण अनशन शुरू करने का एलान किया है।

ब्लॉक प्रमुख भोला दत्त भट्ट, ग्राम प्रधान माया तिवारी व ग्रामीण व्यापार मंडल अध्यक्ष भुवन भट्ट के नेतृत्व में दोनों अफसरों से मिलने पहुंचीं महिलाओं का कहना है कि हरिनगर में शराब की दुकान हर हाल में बंद कराकर रहेंगे। दुकान के आगे आंदोलन करते-करते एक पखवाड़े से अधिक समय बीत गया है। एसडीएम, जिला आबकारी अधिकारी के साथ ही जिलाधिकारी से गुहार लगा चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन जनभावनाओं की सुध नहीं ले रहा है। क्षेत्रवासियों ने 36 घंटे के भीतर शराब की दुकान नहीं हटने पर सड़क जाम, तोड़फोड़ व सामूहिक आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। इसके बाद दोनों अफसरों को ज्ञापन भी सौंपा गया।