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अन्नपूर्णा रोटी बैंक पाल रहा है गरीबों का पेट

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समाज सेवा की ललक जिसके मन में लग जाती है वह महान होता है। यह सूक्ति भले हो पर वास्तव में उन लोगों पर चरितार्थ होती है जो समाज के लिए तन, मन, धन न्योछावर करते हैं। भूखे को अन्न, प्यासे को पानी देना, विशेष सेवा है। इसी प्रकार की सेवा अन्नपूर्णा रोटी बैंके माध्यम से 20 वर्षीय युवा हर्ष चौहान कर रहे हैं। हर्ष चौहान ने बताया कि सड़क पर एक-एक रुपये के लिए लोगों के सामने हाथ पसारते बच्चे भी हमारा भावी भविष्य हैं, लेकिन समाज की ओर से उनके लिए विशेष चिन्तन नहीं होता। इसीलिए उन्होंने पैसे देने के बजाय इन बच्चों की क्षुधा पूर्ति के लिए अन्नपूर्णा रोटी बैंक की स्थापना की है।

हर्ष कहते है कि उनकी संस्था का नारा है ‘रोटी बैंक का यही सपना, भूखा न सोए अपना’। इसलिए हर्ष चौहान, निवासी पित्थूवाला अपने सहयोगियों के साथ प्रत्येक परिवार से रोटी, अचार लेते हैं तथा सब्जी स्वयं बनवाकर उन लोगों को बांटते हैं जो सड़कों पर गलियों में इधर-उधर रोटी के तलाश में घूमते हैं। उन्होंने कहा कि विगत दस दिन पूर्व इस संस्था का गठन किया है। रोटी सब्जी आदि के लिए आर्थिक राशि के बारे में जानकारी देते हुए उनका कहना है कि इसके लिए उन्होंने अपने परिचितों से व्यक्तिगत आर्थिक मदद ली है और रसीदें भी छपवा रखी है ताकि कोई दानदाता रसीद लेकर आर्थिक मदद कर सकता है।

डीएवी कॉलेज के प्रथम वर्ष के छात्र हर्ष चौहान ने शुक्रवार को दोपहर आईएसबीटी रेलवे स्टेशन घंटाघर, गांधी पार्क, परेड ग्रांउड तमाम स्थानों पर भूखे लोगों को खिलाने के लिए भोजन के छह सौ पैकेट तथा पानी बांटा ताकि लोग अपनी भूख शांत कर सकें। देखने में यह पहल भले छोटी है, लेकिन आम आदमी को, विशेषकर उन्हें जो गलि-सड़कों में हाथ फैलाते फिरते हैं, थोड़ी बहुत राहत जरुर देगा।

हिमालयी जड़ी बूटियों पर मंडराया खतरा

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दुनियाभर में अपनी जीवनरक्षक जड़ी बूटियों के लिए प्रसिद्ध हिमालयी राज्य उत्तराखंड को जड़ी-बूटी प्रदेश बनाने की कवायद अब ठंडी पड़ती जा रही है। इसके चलते, राज्य गठन से पहले उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पैदा हो रही आधा दर्जन जड़ी-बूटियां खतरे की जद में आ गई है। हालात यह है कि जंगलों में स्वतः पैदा होने वाली जड़ी-बूटियों को तस्कर खत्म कर रहे हैं। नाप भूमि पर हो रही छोटी-मोटी कवायद से ही जड़ी-बूटियों का अस्तित्व बचा हुआ है। यूं तो प्रदेश के पहाड़ी और मैदानी जिलों में जड़ी-बूटी पैदा होती है, लेकिन उच्च हिमालयी क्षेत्र में पैदा होने वाली जड़ी-बूटी किसी अन्य क्षेत्र में तैयार नहीं हो सकती है।


करीब दस हजार से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में पैदा होने वाली इन जड़ी बूटियों के लिए हिमपात के साथ ही मौसम में ठंडक जरूरी है। राज्य गठन से पहले उच्च हिमालयी क्षेत्र में अच्छी खासी बसावट थी। इन गांवों में रहने वाले लोग तमाम बहुमूल्य जड़ी-बूटी पैदा करते थे, लेकिन राज्य गठन के बाद जिस तेजी से पलायन बढ़ा है, इससे उच्च हिमालयी क्षेत्र के कई गांव खाली हो गए है और इसका सीधा असर जड़ी-बूटी उत्पादन पर पड़ा है। दूसरा बड़ा कारण उच्च हिमालयी क्षेत्र के बुग्यालों में लगनी वाली आग भी है। पिछले दस वर्षो से जिले के बुग्याल आग की चपेट में आ रहे हैं। आग लगने के पीछे शिकारियों की सक्रियता को भी एक बड़ा कारण माना जाता है। बुग्यालों में आग से भी जड़ी बूटी का उत्पादन सिकुड़ रहा है।

दस वर्ष पहले तक वन विभाग उच्च हिमालयी क्षेत्र की इन जड़ी-बूटियों की निकासी के लिए अनुमति पत्र (रमन्ना)जारी करता था, लेकिन खतरे में आई इन जड़ी-बूटियों के विदोहन के लिए अब अनुमति नहीं दी जाती है। इन जड़ी-बूटियों को रेड बुक में शामिल कर लिया गया है। रेड बुक में शामिल जड़ी बूटियों में अतीस, कूटी, सालम पंजा, जटामासी, अतिवसा, गरुड़ पंजा आदि के नाम शामिल हैं।

हालांकि, प्रदेश सरकारों ने जड़ी बूटी उत्पादन के लिए तमाम दावे किए। भेषज विकास इकाई, जड़ी-बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर, सगंध पौध केंद्र सेलाकुई और वन विभाग जड़ी-बूटी उत्पादन के लिऐ कार्य करते हैं, इसके बावजूद खतरे में आई उच्च हिमालयी क्षेत्र की जड़ी बूटियों को बचाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो पा रही है। भेषज संघ के जिला पर्यवेक्षक राजेन्द्र जोशी ने कहा कि सरकारी प्रयासों से कम ऊंचाई वाले इलाकों में जड़ी बूटी का उत्पादन बढ़ रहा है। तमाम काश्तकार तेजपत्ता और बड़ी इलाइची का अच्छा उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन उच्च हिमालयी क्षेत्र की जड़ी बूटियों का उत्पादन बढ़ाने के लिए पलायन रोकने के साथ ही बुग्यालों को आग से बचाने के इंतजाम भी करने होंगे।

‘सफेदहाथी’ बनकर न रह जाए दून यूनिवर्सिटी

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दून यूनिवर्सिटी की नींव राज्य की प्रतिभा को संवारने और जेएनयू की तरह अलग पहचान देने के लिए रखी गई थी, लेकिन जिस सपने के साथ यूनिवर्सिटी की नींव रखी गई थी वह अब तक अधूरा ही दिखाई दे रहा है।साल 2009 में शुरू हुई यूनिवर्सिटी को कोर्सेज के लिए छात्र तो पहले ही ढूंढे़ नहीं मिल रहे थे, अब सरकार की अनदेखी के चलते एडमिशन लेने वाले छात्रों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की भी भारी कमी है।

आलम यह है कि यूनिवर्सिटी में शिक्षकों के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। उत्तराखंड में तमाम यूनिवर्सिटीज की भीड़ में जेएनयू की तर्ज पर शुरू हुई दून यूनिवर्सिटी अब ‘सफेद हाथी’ साबित हो रही है। यूनिवर्सिटी की बुनियाद के समय जेएनयू की तर्ज पर यूनिवर्सिटी को नए आयाम देने का सपना हर साल अधूरा रह जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण सरकार की अनदेखी है। हालात यह हैं कि सात साल के भीतर यूनिवर्सिटी के आठ स्कूलों में प्रोफेशनल और ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर बेहतर करियर प्रदान करने में सहायक 26 कोर्सेज शुरू होने के बाद भी यहां छात्र रुझान नहीं ले रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण सरकार की ओर से की जा रही लापरवाही है।

दरअसल, यूनिवर्सिटी में विभिन्न कोर्सेज के लिए तकरीबन 70 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। लेकिन यहां नियुक्ति के नाम पर इनमें से आधे ही पद भर पाए हैं। मौजूदा स्थिति की बात करें तो यहां केवल 45 शिक्षक ही छात्रों को पढ़ा रहे हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन यानि यूजीसी के मानकों और क्वॉलिटी एजुकेशन प्रदान करने की बात करना भी बेमानी साबित होगा। सरकार से निरंतर गुजारिशें करने के बाद भी यूनिवर्सिटी के रिक्त पदों पर भर्ती नहीं हो पा रही है। यूजीसी लगातार छात्रों के लिए रोजगारपरक कोर्सेज शुरू करने पर जोर दे रही है। इसी के तहत दून यूनिवर्सिटी ने भी बीते दो सालों में कई नए कोर्सेज को शुरू करने की कवायद शुरू की। लेकिन शिक्षकों के अभाव के चलते कवायद पूरी नहीं हुई। यूनिवर्सिटी प्रशासन की बात करें तो मौजूदा सरकार से अब उन्हें कुछ उम्मीदें दिखाई दी हैं।

सरकार द्वारा शिक्षा के सुधार के लिए किए जा रहे कार्यों को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन एक बार फिर व्यवस्था को ढर्रे पर लाने के लिए कोशिशें करने लगा है। इसी क्रम में शासन को नियुक्ति किए जाने के लिए आग्रह भी किया जा रहा है। शिक्षकों की कमी का आलम यह है कि अब पुराने कोर्स भी बंद होने लगे हैं। यूनिवर्सिटी में इस शैक्षणिक सत्र से एमए हिंदी, बैचलर ऑफ लाइब्रेरी एण्ड इनफॉरमेंशन साइंस, मास्टर ऑफ लाइब्रेरी एंड इनफॉरमेंशन साइंस, एमए सोशल वर्क, एमफिल इकॉनोमिक्स, सर्टिफिकेट कोर्स में क्लाउड कंप्यूटिंग में एडमिशन नहीं मिलेगा।

कोर्सेज में मानकों के अनुसार शिक्षक न होने के कारण यूनिवर्सिटी ने इन कोर्सेज में एडमिशन देना बंद कर दिया है। पिछले साल ही इन कोर्सों को शुरू करने की घोषणा की गई थी, लेकिन शिक्षक उपलब्ध न होने के कारण इस साल यूनिवर्सिटी ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। डॉ. बीएम हरबोला, रजिस्ट्रार, दून यूनिवर्सिटी ने बाताया कि यूनिवर्सिटी में शिक्षकों के तकरीबन 70 पद सैंक्शन हैं। इनमें 25 से ज्यादा पद अभी खाली हैं। हमारी ओर से शासन से आग्रह किया जा रहा है कि जल्द से जल्द इन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाए। यूनिवर्सिटी में शिक्षक होंगे तो नए कोर्सेज शुरू करने पर भी विचार किया जाएगा। मौजूदा मैनपावर में यह संभव नहीं हो पा रहा है, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद दून में

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एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी राम नाथ कोविंद सोमवार को देहरादून पहुंचे। कोविंद सुबह 10.30 बजे जौली ग्रांट हवाई अड्डे पहुंचे। जहां उनका मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व अन्य वरिष्ठ नेताओं द्वारा भव्य स्वागत किया। उनके साथ भाजपा मीडिया विभाग के राष्ट्रीय प्रमुख अनिल बलूनी भी हैं। इसके बाद जॉलीग्रांट से वे सड़क मार्ग से देहरादून के लिये रवाना हुए और डोईवाला में भी उनका स्वागत हुआ।

कोविंद इसके बाद मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। यहां उन्होने उत्तराखंड के सभी भाजपा सांसदों व विधायकों से भेंट व वार्ता की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भाटी ने कोविंद के देहरादून आगमन पर हर्ष व्यक्त किया है। गौरतलब है कि जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों के लिये कोविंद एनडीए के उम्मीदवार हैं और उनका मुकाबला यूपीए की उम्मीदवार और पूर्व लोक सभा स्पीकर मीरा कुमार से है। 

विदेशी साधकों ने ऋषिकेश के गंगा घाटों पर मनाया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

यूनाइटेट नेशन द्वारा विश्व योग दिवस की घोषणा ने सदियों से चली आ रही भारतीय योग की परम्परा को नया आयाम दे दिया है, ऐसे में योग की नगरी के रूप में विख्यात ऋषिकेश का महत्व भी काफी बड़ जाता है, यहां अंतराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर दूर-दूर से देशी-विदेशी योगप्रेमी योग सिखने यहां पर पहुंचते है – विश्व भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है योग नगरी ऋषिकेश।
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यही वो जगह है जिसने पुरे विश्व को भारतीय योग से परिचित कराया और पश्चिम योग की धरा से रूबरू हो कर इसको आत्मसाध कर दिया। आज यूएनओ ने भारतीय योग को जरुरी मानकर 21 जून को जो इंटरनेशनल योगा डे के रूप में मान्यता दी इसका श्रेय भी ऋषिकेश योग नगरी को ही जाता है। आज यहां हर तरफ योग की पाठशाला चल रही है जिसमें देश के साथ साथ विदेश से आये पर्यटक भी योग करते दिखे।
योग ऋषिकेष से निकलकर आज पूरे विश्व मे फैल चुका है, अौर हर कोई इसकी तरफ आकर्षित होता दिख रहा है, यही कारण है कि अन्तराष्ट्रीय योग दिवस को आज पूरा विश्व धूम-धाम से मना रहा है। तीर्थनगरी ऋषिकेष में योग सीखने पहुँचे विदेशी साधक योग को स्वास्थ्य और एक बेहतर जीवन के लिए बेहद जरूरी मानते है ओर वो सबसे योग के साथ जुड़ने की बात भी कर रहे है।
ऋषिकेष को योगा कैपिटल ले नाम से भी जाना जाता है, ऐसे में अन्तराष्ट्रीय योग दिवस में यहां का महत्व और भी बढ़ जाता है। सात समंदर पार से आये मेहमान भी भारतीय योग की तरफ बढ़ते दिखते है और हर साल आज के दिन गंगा घाटों पर अन्तराष्ट्रीय योग दिवस मनाते है।

करण जौहर की फिल्म से पर्दे पर आएंगी शाहरुख की बेटी?

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शाहरुख खान की बेटी सुहाना को लेकर बॉलीवुड का बाजार गर्म है कि किंग खान की बेटी अगले साल, यानी 2018 में बतौर हीरोइन कैमरे का सामना करने जा रही है। चर्चाओं के मुताबिक, सुहाना को बॉलीवुड में लॉन्च करने के लिए करण जौहर अपनी कंपनी में फिल्म बनाएंगे और ये भी सुना जा रहा है कि इस फिल्म का निर्देशन वे खुद करेंगे।
करण जौहर की कंपनी धर्मा प्रोडक्शन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि, करण ने सुहाना की लॉन्चिंग के लिए दो कहानियों का चयन किया है और दोनों कहानियां शाहरुख और गौरी को भेज दी हैं। शाहरुख और गौरी इनमें से किसी एक कहानी को अपनी बेटी की लॉन्चिंग फिल्म के लिए फाइनल करेंगे। सूत्रों का कहना है कि करण जौहर 2018 में सुहाना की लॉन्चिंग फिल्म को शुरू करना चाहते हैं। ये भी चर्चा है कि इस फिल्म में सुहाना के साथ सैफ अली के बेटे की जोड़ी बनाई जा सकती है।
सूत्रों का कहना है कि शाहरुख और गौरी द्वारा सुहाना की फिल्म को हरी झंडी दिए जाने के बाद सैफ अली से कॉन्टैक्ट किया जाएगा। सैफ की बेटी सारा को भी करण लॉन्च करने वाले थे, लेकिन सारा की मां अमृता सिंह के साथ करण जौहर की प्रोडक्शन टीम के मतभेदों के बाद ये इरादा बदल दिया गया। अब सारा की लॉन्चिंग अभिषेक कपूर की फिल्म ‘केदारनाथ’ में सुशांत सिंह राजपूत की हीरोइन के तौर पर होना तय हुआ है। एकता कपूर की कंपनी बालाजी इस फिल्म को बनाने जा रही है। करण जौहर आने वाले वक्त में श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी को भी लॉन्च करने जा रहे हैं। अभी तक मिली खबरों के अनुसार, उनकी लॉन्चिंग शाहिद के भाई इशान ठक्कर के साथ होगी।

‘देवभूमि उत्तराखण्ड’ से शुरू हुई योग की मुहिम पहुंची अन्तर्राष्ट्रीय स्तर परः राज्यपाल

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तृतीय ‘अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस’ पर राजभवन में प्रातः साढे़ छः बजे से योग क्रियाओं/आसनों का अभ्यास शुरू हुआ। राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पाल अौर सचिव राज्यपाल रविनाथ रमन के साथ साथ राजभवन के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के योग प्रशिक्षकों के सानिध्य में विभिन्न यौगिक क्रियायें और आसन किये।
योगाभ्यास के बाद राज्यपाल ने राज्य के सभी नागरिकों को योग दिवस की बधाई देते हुए कहा कि हमें गर्व है कि ‘देवभूमि उत्तराखण्ड’ से शुरू हुई योग की मुहिम आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गयी जिसका श्रेय हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जाता है। सदियों से भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग और स्वस्थ जीवन जीने की  कला योग आज प्रधानमंत्री के प्रयासों से फिर से विश्व में पुर्नस्थापित हो रही है। ‘योग’ पूरे विश्व को भारत द्वारा दिया गया ‘अमूल्य उपहार है। उन्होंने कहा कि योग आसन व्यक्ति की दिनचर्या को संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिसे व्यक्ति मानसिक और शाररिक रूप् से स्वस्थ और एकाग्र बनाता है।

योग है भारत की परंपराः सीएम त्रिवेंद्र

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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 21 जून ’अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के अवसर पर परेड ग्राउंड देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय योग कार्यशाला में भाग लिया। योग कार्यशाला में देहरादून व राज्य के अन्य जनपदों से भारी संख्या में सामान्य जन, विभिन्न योग संस्थाओं के प्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठनों के सदस्य, विद्यालयी छात्र-छात्राएं, एनसीसी कैडेट्स, शासन के उच्चाधिकारी, सचिवालय कार्मिक, पुलिस व अन्य विभागों के अधिकारी/कार्मिक, महिलाएं व बच्चे उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सहित मंच पर उपस्थित अन्य मंत्रीगण तथा सभी प्रतिभागियों ने ओम के उच्चारण के साथ विभिन्न योगासनों का अभ्यास आरंभ किया। अभ्यास के बाद मुख्यमंत्री ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों तथा राज्य वासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की बधाई दी तथा राज्य स्तरीय योग कार्यशाला में भारी संख्या में उत्साह पूर्ण भाग लेते हुए योग कार्यशाला के सफल संचालन के लिए धन्यवाद भी दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में योग की परिकल्पना पतंजलि ने की, आज वह पूरे विश्व में लोकप्रिय हो चुका है। प्राचीन काल से ही हमारे ऋषि-मुनियों ने योग को पूरे विश्व में फैलाने के प्रयास किए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयास से संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की।
कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र ने मीडिया से बातचीत में कहा कि योग भारत की परंपरा है। अच्छे स्वास्थ्य का राज ’योग’ है। योग चित शांति का साधन है। भारतीय परंपरा में विश्वास किया जाता है, कि संसार की परम सत्ता तक पहुंचने का मार्ग योग द्वारा संभव है। योग हमारे शारीरिक विकास के अतिरिक्त आध्यात्मिक विकास भी सुनिश्चित करता है।

उत्तराखंड को मिल सकता है सुनहरा मौका

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उत्तराखंड के प्रतिभाओं ने दुनियाभर में अपना डंका बजा रखा है।चाहें वह क्रिकेट हो या बास्केटबाल या बैंडमिंटन। हर खेल में उत्तराखंड के प्रतिभावान खिलाड़ी अपनी जगह बना चुके हैं।शायद इसलिए ही भारतीय ओलंपिक संघ को भी उत्तराखंड पसंद आ गया है।
भारतीय ओलंपिक संघ को उत्तराखंड के पसंद आने से अब राज्य को इसका बड़ा फायदा मिलने की राह आसान हो गई है।उत्तराखंड को 38वें के बजाय 36वें राष्ट्रीय खेल की मेजबानी मिल सकती है।आपको बतादें कि 36वें राष्ट्रीय खेल गोवा में और 37वें छत्तीसगढ़ में होने हैं, लेकिन गोवा में अभी तक तैयारियां पूरी नहीं हुईं हैं।

जबकि, सूत्रों के अनुसार उत्तराखंaड 38वें गेम्स के लिए तैयारियां लगभग पूरी कर चुका है। ऐसे में गोवा और छत्तीसगढ़ से पहले राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी उत्तराखंड को सौंपी जा सकती है। इसके बाद उत्तराखंड में होने वाले 38वें राष्ट्रीय खेल गोवा में आयोजित होंगे।

भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के स्तर से इसके संकेत मिलने के बाद राज्य सरकार ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं।

उत्तराखंड में खुलेंगे तीन नए पासपोर्ट सेवा केंद्र

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देहरादून, 17 जून (हि.स.)। राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को पासपोर्ट बनाने के लिए अब अधिक समय तक देहरादून की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। विदेश मंत्रालय ने राज्य में रुड़की, पौड़ी व रुद्रपुर में नए पासपोर्ट सेवा केंद्र खोलने की अनुमति दी है। यह सेवा केंद्र संबंधित क्षेत्रों के मुख्य डाकघर में खोले जाएंगे।
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ऋषि अंगरा के मुताबिक विदेश मंत्रालय में हुई बैठक में देशभर में 149 नए पासपोर्ट सेवा केंद्र खोलने का निर्णय लिया गया है। इनमें तीन केंद्र उत्तराखंड में खोले जाएंगे। मंत्रालय की अनुमति के बाद मुख्य डाकघर में केंद्र के लिए स्थान देखने की शीघ्र कवायद शुरू की जाएगी। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी अंगरा ने बताया कि यह स्वीकृति फेज-दो की है, जबकि फेज एक में अल्मोड़ा, नैनीताल व हल्द्वानी में पहले ही एक-एक केंद्र की स्वीकृति मिल चुकी है। पूर्व में स्वीकृत केंद्रों के लिए स्थान भी चयनित कर लिया गया है और जल्द केंद्रों की स्थापना कर दी जाएगी।
अभी तक राज्य में एकमात्र परसपोर्ट सेवा केंद्र देहरादून में ही स्थापित है। प्रदेशभर के लोगों को पासपोर्ट के लिए ऑश्रलाइन आवेदन के बाद दून में ही अपॉइंटमेंट के लिए आना पड़ता है। इससे दून स्थित केंद्र पर दबाव भी बढ़ गया है और नियत तिथि व समय पर अपॉइंटमेंट मिलने के बाद भी लोगों को काफी इंतजार करना पड़ जाता है।