Page 724

यूजीसी के मानकों पर फेल राज्य के उच्च शिक्षण संस्थान

0

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) अब हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज का रिपोर्ट कार्ड तैयार करेगी। इसके लिए संस्थानों के संसाधनों और सुविधाओं के आधार पर नंबर भी दिए जाएंगे। यह नंबर नैक एक्रिडिटेशन के ग्रेड, साफ-सफाई व अन्य मानकों के आधार पर तय किए जाएंगे. आयोग की ओर से संस्थानों को इसे लेकर निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए हैं। लेकिन, प्रदेशभर के हायर एजुकेशन संस्थानों की बात की जाए तो आयोग के तमाम मानकों की परीक्षाओं में यहां के तकरीबन सभी संस्थान फेल साबित होंगे।
यूजीसी ने समय समय पर मानकों के अनुरूप संस्थानों सं सविधाओं और संसाधनों को लेकर जानकारी मांगता रहता है। इन्हीं बिंदुओं पर यूनिवर्सिटीज और कॉलेज को जानकारी देनी होगी।
अयोग ने विभिन्न मानकों के आधार पर संस्थानों के लिए कुल सौ नंबर तय किए गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा नंबर नैक एक्रिडिटेशन के लिए 20 नंबर तय किए गए हैं। इसके अलावा आयोग के नए नियम के अनुसार संस्थानों को अन्य सुविधाओं और संसाधनों के लिए भी नंबर दिए जाएंगे। अब जो कॉलेज इन नियमों के अंतर्गत खरा नहीं पाया जाएगा, उनको यूजीसी से प्रदान की जाने वाली फंडिंग से भी हाथ धोना पड़ेगा।
सुविधाओं और संसाधानों की बात करें तो राज्य की तमाम यूनिवर्सिटी और अन्य शिक्षण संस्थान अलग-अलग परेशानियां झेल रहे हैं। इनमें परेशानियों से हटकर सबसे बड़ी परेशानी छात्र-शिक्षक अनुपात है। तकरीबन सभी यूनिवर्सिटीज में छात्रों की संख्या में मुताबिक शिक्षक नहीं है। ऐसे में यूजीसी के मानक पूरा करना सभी यूनिवर्सिटी के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा। इसके अलावा वाई फाई कैंपस, स्मार्ट कैंपस आदि मामले में भी यूनिवर्सिटी और कॉलेज फेल साबित होंगे। उत्तराखंड तकनीकि विश्वविद्यालय में जहां वाई फाई कैंपस दूर की कौड़ी है तो वहीं श्री देव सुमन यूनिवर्सिटी के कैंपस का ही कुछ अता पता नहीं। ग्रांट के मामले में भी कई यूनिवर्सिटी पहले ही यूजीसी की फटकार खा चुकी हैं।
राज्य के सबसे बड़े कॉलेज डीएवी पीजी के की बात करें तो यहां तो सुविधाओं के नाम पर छात्राओं के लिए शौचालय तक नहीं हैं, जो हैं वह भी इस हाल में कि उसके बाहर से भी छात्राएं गुजरने से बचती हैं। इसके अलावा कक्षाओं के हालात भी बदतर हालात में हैं। यही वजह है कि विभिन्न छात्र संगठन अव्यवस्थाओं को लेकर आए दिन आंदोलनरत रहते है। ऐसे में यूजीसी के तय मानकों की परीक्षा से गुजरते हुए यह सभी संस्थान कैसे अपना रिपोर्ट कार्ड बेहतर करेंगे यह समझ आसान है।
इस आधार पर आयोग देता है नंबर
– यूनिवर्सिटी व कॉलेजेज को नैक का एक्रिडिटेशन।
– यूनिवर्सिटी और कॉलेज में साफ-सफाई की व्यवस्था।
– संस्थानों में छात्रों की संख्या, शिक्षकों की संख्या और योग्यता।
– संस्थानों में छात्राओं के लिए पीने के लिए आरओ वाटर की व्यवस्था व एटीएम सुविधा।
– यूनिवर्सिटी और कॉलेजेज में फ्री वाई-फाई फेसिलिटी।
– संस्थानों की दीवारों पर छात्रों को प्रेरित करने वाले संदेश की व्यवस्था।
डा. उदय सिंह रावत, वाइस चांसलर, देव सुमन यूनिवर्सिटी ने बताया कि शिक्षा और गुणवत्ता को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने यह व्यवस्था की है। नंबर हासिल करने के लिए मानकों के मुताबिक सभी पायदान पार करने होंगे। हमारे पास अभी यूनिवर्सिटी कैंपस ही नहीं है। सुविधाओं और संसाधन के मामले में जो संस्थान बेहतर होंगे उन्हीं को फंडिंग होगी।

कुमाऊं विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर हमला कर रहे अमेरिकी हैकर

0

कुमाऊं विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अमेरिकी हैकर लगातार साइबर हमले कर रहे हैं। दो दिनों में 228 बार साइबर हमला कर वेबसाइट को क्षति पहुंचाने की कोशिश का खुलासा विश्वविद्यालय की तकनीकी टीम ने किया है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन सकते में है। आशंका जताई गई है कि यह एडमिशन की ऑनलाइन प्रक्रिया का विरोध कर रहे लोगों की साजिश हो सकती है।

आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञों की देखरेख में सॉफ्टवेयर तैयार कराने वाले डॉ. महेंद्र राणा ने सोमवार को कुलपति प्रो. डीके नौडियाल को सौंपी रिपोर्ट में बताया है कि एडमिशन वेबसाइट पर 19 जून को अमेरिका से 128 साइबर हमले किए गए थे। पहले दिन इसे किसी हैकर की शरारत मानकर मामले को नजरअंदाज किया गया, लेकिन सोमवार को फिर अमेरिका में बैठे हैकर ने सुबह से दोपहर तक वेबसाइट पर 100 बार हमला कर प्रोग्रामिंग को क्षति पहुंचाने की कोशिश की।

ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया का हो रहा विरोध: विवि प्रशासन ने पहली बार कुमाऊं विवि व संबद्ध परिसरों के लिए ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू कराई है। इसके लिए 15 जून को वेबसाइट लांच की गई थी। कुछ छात्र संगठन इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। चर्चा है कि विवि के कुछ लोग भी नहीं चाहते कि प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन हो। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि पहाड़ के दुर्गम, दूरस्थ क्षेत्र जहां नेटवर्क की सुविधा नहीं है, वहां के छात्रों के लिए यह प्रणाली सिरदर्द है।

मामले में विधिक कार्रवाई भी की जाएगी: कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके नौडियाल ने कहा कि विवि की वेबसाइट पर साइबर अटैक की जानकारी मिली है। सॉफ्टवेयर तैयार करने में पूरी सावधानी बरती गई है। दूरस्थ क्षेत्रों के महाविद्यालयों के प्राचार्यों से साइबर हमलों के चलते पेश आई दिक्कतों के बारे में जानकारी ली जा रही है। इस मामले में विधिक कार्रवाई भी की जाएगी। 4500 ने लिया ऑनलाइन पंजीकरण तमाम विरोध व वेबसाइट पर हैकरों के हमलों के बावजूद अब तक चार हजार पांच सौ छात्रों ने ऑनलाइन एडमिशन के लिए पंजीकरण करा लिया है।

उक्रांद में प्राण फूंकने की तैयारी

0

प्रदेश के विधानसभा चुनाम में बुरी तरह से जनाधार खो चुके उत्तराखण्ड क्रांति दल में प्राण फूंकने के लिए एक बार फिर कवायद शुरू हो गई है। उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट पार्टी के बड़े नेताओं के साथ मिलकर रणनीति पर काम कर रहे हैं। उक्रांद अपने आंदोलन की शुरुआत श्रीयंत्र टापू से करने की रणनीति बना रही है। राज्य आंदोलन के वक्त इसी स्थान से आंदोलन का रुख बदल गया था। उत्तराखंड क्रांति दल का अब केवल राज्य में नाम ही शेष है। कई बार टूट चुकी पार्टी एक बार फिर साथ खड़ी हुई है। केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट पार्टी एक बार फिर दल को पुनर्जीवित करने के लिए ऑक्ससीजन तलाश रहे हैं। पार्टी के अंदर से आ रही खबरों की मानें तो दिवाकर भट्ट एक बड़ी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं। जिससे सरकार के साथ ही प्रदेश की जनता निसंदेह आश्चर्यचकित हो सकती है।

सोमवार को हुई पत्रकार वार्ता में दिवाकर भट्ट ने इसके संकेत तो दिए। लेकिन अपनी रणनीति बताने से परहेज किया। उन्होंने आगाह किया कि जिस तरह से उत्तराखंड आंदोलन के दौरान श्रीयंत्र घटना की किसी को भनक नहीं थी, लेकिन उस घटना ने राज्य के आंदोलन का रुख ही बदल दिया था उसी तरह अब उक्रांद फिर से राज्य की समस्याओं को लेकर आंदोलन खड़ी करने की तैयारी में है। राजधानी गैरसैंण, शराब बंदी, परिसंपत्ति बंटवारा, किसानों के ऋण माफ़ी और खनन में स्थानीय लोगों की भागेदारी जैसे कई मुद्दों को लेकर उक्रांद मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों की मानें तो जिलों के बाद केंद्रीय संगठन के पुनर्गठन होते ही गैरसैण से उक्रांद बिगुल फूंकने की तैयारी कर रहा है। ज़िलों की कार्यकारिणी गठन के बाद केंद्रीय संगठन बनते ही गैरसैंण में महामंथन या महारैली के साथ ही आंदोलन का आगाज हो सकता है।


पार्टी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व का गठन 25 जुलाई तक हो सकता है। पार्टी अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने राज्य को पांच लोकसभा क्षेत्रों में बांट कर पार्टी के बड़े नेताओं को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। अल्मोड़ा की जिम्मेदारी काशी सिंह ऐरी, नैनीताल डॉ. नारायण सिंह जंतवाल, पौड़ी शक्ति शैल कपरुवाण, टिहरी त्रिवेंद्र पंवार तो हरिद्वार बीड़ी रतूड़ी संभालेंगे।

हिमाचल के मुख्यमंत्री ने सपरिवार बद्रीनाथ ​के किये दर्शन

0

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सपरिवार मंगलवार को सुबह भगवान बद्रीनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना किये। इस दौरान बद्री-केदार मंदिर समिति की ओर से मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
मंगलवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह राज्य सरकार के हेलीकाॅप्टर से सुबह सवा दस बजे के करीब बद्रीनाथ पहुंचे। सीएम के साथ उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह सहित परिवार के पांच अन्य सदस्य थे। दर्शन के पश्चात सीएम अतिथि गृह पहुंच कर जलपान किया। हिमाचल से पहुंचे तीर्थयात्रियों ने अपने राज्य के मुख्यमंत्री और उनके परिवार जनों का स्वागत किया

अली अब्बास की अगली फिल्म में होंगे सलमान

0

सलमान खान अपनी नई फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ के साथ जहां ईद की खुशियां मना रहे हैं, वहीं उनके नाम एक और नई फिल्म की खबर आई है। खबर ये है कि ‘सुल्तान’ के निर्देशक अली अब्बास जाफर के साथ सलमान की एक और फिल्म की योजना बन रही है, जिसका निर्माण सलमान के बड़े बहनोई अतुल अग्निहोत्री करेंगे।

अतुल इससे पहले सलमान की फिल्म ‘बॉडीगार्ड’ के निर्माता रह चुके हैं। अली अब्बास जाफर के साथ सलमान की फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ इन दिनों निर्माणाधीन है। यशराज की फिल्म ‘एक था टाइगर’ की सीक्वल के तौर पर बन रही इस फिल्म में सलमान और कटरीना कैफ की जोड़ी को दोहराया जा रहा है।
अतुल अग्निहोत्री के प्रोडक्शन में बनने जा रही ये फिल्म भी ‘बॉडीगार्ड’ की तरह एक तेलुगू फिल्म का रीमेक बताया गया है, जिसमें सलमान के साथ कटरीना की जोड़ी ही काम करेगी। इसका संकेत अतुल ने देते हुए कहा है कि वे अपने निर्देशन में भी एक कहानी पर काम कर रहे हैं, जिसमें वे सलमान को कास्ट करना चाहते हैं, लेकिन ये फिल्म बाद में शुरू होगी।
अतुल ने खुद के फिल्म में काम करने की संभावना से मना किया है और कहा है कि वे सिर्फ प्रोडक्शन तक ही रहेंगे। इस बीच ‘दबंग-3’ को लेकर भी खबर आ रही है कि प्रभुदेवा ने इसका निर्देशन करने की पेशकश को मंजूर कर लिया है।
फिल्म ‘वॉन्टेड’ में सलमान को निर्देशित कर चुके प्रभुदेवा इसे भी अपनी एक तमिल फिल्म के रीमेक के तौर पर बनाएंगे और इस बार कहानी में कई बड़े बदलाव होंगे, जिनमें मक्खी (अरबाज) और रज्जो (सोनाक्षी सिन्हा) के किरदारों को नहीं रखा जाएगा। अरबाज फिल्म के निर्माता रहेंगे, जिन्होंने ‘दबंग-2’ का निर्देशन किया था।

विद्या बालन की ‘कहानी 2’ को लेकर कानूनी विवाद

0

पिछले साल दिसम्बर में रिलीज हुई विद्या बालन की फिल्म ‘कहानी 2’ एक नए कानूनी विवाद में फंस गई है, हालांकि विद्या बालन का सीधे तौर पर इस विवाद के साथ कोई लेना-देना नहीं है। यह विवाद फिल्म के निर्माण से जुड़ी कंपनियों और इसके डिजिटल अधिकार पाने वाली कंपनी के सेरा सेरा के बीच बताया जाता है।

विद्या बालन और अर्जुन रामपाल की प्रमुख भूमिकाओं वाली इस सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म का निर्माण जयंती लाल गाड़ा की कंपनी पैन और फिल्म के निर्देशक सुजाय घोष की प्रोडक्शन कंपनी ने मिलकर किया था और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसे रिलीज करने के अधिकार के सेरा सेरा को बेचे गए थे। के सेरा सेरा की ओर से कांपिटिशन कमिश्नर ऑफ इंडिया (सीसीआई) के यहां शिकायत दर्ज की गई कि ‘कहानी 2’ के निर्माता उनको फिल्म को डिजिटल फॉरमेट में रिलीज नहीं करने दे रहे हैं।

सीसीआई ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनते हुए अपने फैसले में के सेरा सेरा की दलीलों को रद्द करते हुए निर्माताओं के पक्ष में फैसला दिया। निर्माताओं की ओर से पेश दलील में कहा गया कि के सेरा सेरा के खिलाफ वायकॉम 18 की ओर से फिल्म ‘फोर्स 2’ को पाइरेटेड तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाने का केस चल रहा है।
इस केस का नतीजा आने तक उनके लिए के सेरा सेरा की मांग को मानना गैरकानूनी होगा। सीसीआई ने इस तर्क को मानते हुए के सेरा सेरा की दलीलों को खारिज कर दिया। अब सुना गया है कि के सेरा सेरा इस मामले को मुंबई हाईकोर्ट में ले जाने पर विचार कर रहा है।

किसान राम अवतार के परिवार को सीएम दी पांच लाख की सहायता

0

उधमसिंह नगर जिले के खटीमा तहसील के ग्राम कंचनपुरी के किसान राम अवतार पुत्र राम प्रसाद ने बीते रविवार को आत्महत्या कर ली। मंगलवार को मुख्यमंत्री की ओर से किसान के परिवार को सांत्वना व मदद का भरोषा देने विधायक खटीमा पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व मे एक प्रतिनिधि मण्डल मृतक के गांव कंचनपुरी पहुंचा।
प्रतिनिधि मण्डल में विधायक खटीमा के साथ-साथ रूद्रपुर के विधायक राजकुमार ठुकराल, नानकमत्ता के विधायक प्रेम सिंह राणा आदि लोग उपस्थित थे। धामी ने कहा इस दुख की घड़ी में हम किसान परिवार के साथ है।इस दौरान विधायक ने स्व. रामअवतार की पत्नी से मुख्यमंत्री की दूरभाष पर बात कराई गई। मुख्यमंत्री ने मृतक परिवार को पांच लाख रूपये एवं विधायक पुष्कर सिंह धामी ने एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।धामी ने कहा मृतक की विधवा को शीघ्र विधवा पेंशन स्वीकृत कराई जायेगी एवं तीनो विधायकों ने मृतक की पुत्रियों के विवाह एवं पुत्र के शिक्षा सम्बन्धी हर सहायता देने की भी बात कही।

बोलेने लगेंगी उत्तराखंड के उजडे़ हुए घरों की दीवारें

0

उत्तराखंड के खाली हो चुके वीरान गांव अपनी दांस्तां खुद बयान करते हैं। खाली पड़े घर, बेतरतीब उग रही झाड़ियां, बंजर पड़े खेत ये सब कहानी बताते हैं अपने बाशिंदों की जो बेहतर जिंदगी की तलाश में पहाड़ों से पलायन कर शहरों की तरफ चले गये। ये उजड़े गांव सबूत है सालों से चली आ रही सरकारी उदासीनता और खोखले वादों की। हर चुनावों में जिस शिद्दत से नेता पलायन को चुनावी मुद्दा बनाते हैं उसी रफ्तार से चुनाव होते ही उसे भूल भी जाते हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने #selfiefrommyvillage नाम से ट्टवीटर पर कैंपेन भी शुरु किया। कदम तो उठाया लेकिन क्या ये कदम पलायन जैसी समस्या से निपटने के लिये सरकार द्वारा लिये जा रहे पहले कदमों में से होना चाहिये था?

वहीं राजनेताओं से अलग कुछ उत्तराखंडी पहाड़ों को अपनी खो रही रौनक लौटाने के लिये अपनी कोशिशों में लगे हुए हैं। ऐसे ही एक उत्तराखंडी हैं दीपक रमोला, पेंटर और स्किल ऐजूकेटर दीपक रमोला अपनी छोटी टीम के साथ उत्तराखंड के पहाड़ों में एक प्रोजेक्ट को अंजाम दे रहे हैं। पहाड़ के वीरान हो रहें गांवों की दीवारों पर पेंटिंग के जरिये कहानियां बना रहे हैं। इसके लिये दीपक ने टिहरी के विरान हो रहे सौर गांव को चुना, जिसमें कभी 62 परिवार रहतें थे अाज यहा सिर्फ 12 परिवार ही रह गये हैं।

deepak ramola1

दीपक की कौर टीम में आठ सदस्य हैं जिनमें हेड आर्टिस्ट पूर्णिमा विश्व ख्याति प्राप्त कलाकार के साथ फ़ोटोग्राफ़र विभोर यादव अौर टाइपोग्रैफी आर्टिस्ट नितेश यादव टीम को बल देते हैं। दीपक इन 12 परिवारों के जीवन को पिछले डेढ़ महीनों से चरितार्थ करने मेें लगे हैं। वह बतातें हैं, ‘पलायन शुरु से ही चिंत्ता का विषय रहा है। सीरिया के रेफ्यूजियों के साथ काम कर के पिछले साल जब मैं वापस आया तो देखा कि उत्तराखंड में पलायन काफ़ी बढ़ी समस्या बन चुका है। मै इसके लिये कुछ ख़ास करना चाहता था। इसलिये हमारी टीम ने राज्य के ख़ाली हो चुके गाँवों मे बचे परिवारों से बात कर उनकी कहानियाँ संग्रह करनी शुरू की। हमारा मक़सद है पहाड़ छोड़ कर जा चुके लोगों के लिये उनकी विरासत को चित्रों के माध्यम से संजो के रखना। इसके साथ ही यहाँ रह कहे लोगों के लिये पर्यटन के माध्यम से रोज़गार के आयाम विकसित करना भी हैं।

अपने आर्ट के बारे में पूर्णिमा बताती हैं कि, “हर पेंटिंग अपनी अलग कहानी बयां करती है। ये तस्वीरें यहाँ के लोगों के जीवन, उनके संघर्ष, ग़म और ख़ुशियों को दर्शाती हैं अौर गाँव के लोगों को उन्हें यह से जोँङ कर रखने का प्रयास करती हैं।

100 प्राकृतिक जलस्रोतों का बचायेगा ‘स्वजल’

0

पहाड़ पर बढ़ते पानी के संकट की आखिर शासन ने भी सुध ले ली है। ‘स्वजल’ को प्रदेश में स्रोत संवर्धन का काम सौंपने के बाद शासन ने प्राकृतिक जलस्रोतों के संवर्धन की भी तैयारी कर ली है। जारी शासनादेश ने पहले चरण में 100 बड़े प्राकृतिक जलस्रोतों का संवर्धन करने के निर्देश दिए, यह कार्य सभी जिलों में जिलाधिकारियों के निर्देशन में संपन्न होगा।

पिछले माह सचिवालय में हुई बैठक में पेयजल मंत्री ने पेयजल योजनाओं का निर्माण कार्य जल निगम, मरम्मत कार्य जल संस्थान और प्राकृतिक स्रोत संवर्धन का कार्य स्वजल को सौंपने का निर्णय लिया था। इसके बाद सचिव पेयजल ने दो दिन पहले स्रोत संवर्धन की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

इस संबंध में उन्होंने कहा कि पहले चरण में स्वजल प्रदेश के सौ प्राकृतिक जलस्रोतों का संवर्धन करेगा। इस अभियान में जल संस्थान और पेयजल निगम की मदद ली जाएगी कि पहले किन स्रोतों का संवर्धन किया जाना है। इस कार्य के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) के तहत बजट की व्यवस्था की जाएगी। शासन से निर्देश जारी होने के बाद स्वजल इन स्रोतों के संवर्धन में आने वाले खर्च व संवर्धन के बाद मिलने वाले पानी की रिपोर्ट तैयार करने में जुट गया है।

दूसरे चरण में चलेगा व्यापक अभियान
सचिव पेयजल अरविंद सिंह ह्रयांकी ने बताया कि पहला चरण पूरा होने के बाद प्रदेश में स्रोत संवर्धन का काम व्यापक स्तर पर किया जाएगा। इसके लिए जल संस्थान व पेयजल निगम के साथ समन्वय बैठाकर कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

‘स्पर्श गंगा अभियान’ की ब्रांड एंबेसडर बनी सुरुषि

0

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं लोकसभा में आश्वासन संबंधी समिति के सभापति डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने सोमवार को जापान के नागानौ शहर में सुरुषि मियाजावा को ‘स्पर्श गंगा अभियान’ का जापान में ब्रैंड एंबेसडर नियुक्त किया। इस अवसर पर ‘स्पर्श गंगा अभियान ‘ पर एक छोटी सी फिल्म भी दिखाई गई।
सुरुषि मियाजावा जापान की प्रसिद्ध हिंदू आध्यात्मिक शख्सियत के रूप में प्रसिद्ध हैं। मियाजावा जापान के लोगों के बीच हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार में पिछले 10 वर्ष से प्रयासरत हैं। अहिंसा, सर्वधर्म समभाव व सहिष्णुता के आधार पर टिके हिंदू धर्म के मूल उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने की कवायद में जुटीं मियाजावा ने गंगा मां से जुड़ने पर प्रसन्नता जताई।
डॉ. निशंक ने वहां उपस्थित जन समुदाय को बताया कि वह हिमालय एवं गंगा के प्रदेश से आए हैं। जापान के लोगों की कर्मठता, उनकी शालीनता और उनके व्यवहार की प्रशंसा करते हुए उन्होंने ने कहा कि विश्वयुद्ध के बाद जापान
ने विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं आर्थिकी में अपने आप को विश्व शक्ति की रुप में स्थापित किया है। अब जापान को पूरे विश्व को शांति और लोक कल्याण की तरफ प्रेरित करना है। निशंक ने ‘स्पर्श गंगा अभियान’ की चर्चा करते हुए कहा कि मां गंगा की अविरलता, स्वच्छता को अक्षुण रखना इस अभियान का उद्देश्य है।
इस अवसर पर जन समुदाय से वार्तालाप करते हुए डॉ. निशंक ने लोगों के हिमालय और गंगा से जुड़े प्रश्नों का भी उत्तर दिया। निशंक ने मियाजावा को अपनी पुस्तकों का सेट भी भेंट किया।