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परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर जुलाई में बैठक

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उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर जुलाई में दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की बैठक होगी। इस बैठक में राज्य गठन के बाद से ही परिसंपत्ति बंटवारे के लंबित मुद्दों के सुलझने के आसार है। हालांकि अभी इस बैठक की तिथि तय नहीं है लेकिन इससे पहले एक जुलाई को दोनों प्रदेशों के मुख्यसचिवों के बीच बैठक होनी प्रस्तावित है। इस बैठक में 18 से अधिक विभागों की परिसंपत्ति व देनदारी पर चर्चा की जाएगी।

उत्तराखंड के अलग राज के बाद से ही परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। दरअसल, उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश से अलग कर नया राज्य बनाया गया तो यहां की प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था को चलाने के लिए दोनों के बीच परिसंपत्तियों का बंटवारा हुआ। इस बंटवारे के बाद भी उत्तराखंड के कई विभागों को उनकी पूरी परिसंपत्ति नहीं मिल पाई। इसका कारण दोनों प्रदेशों के बीच विवाद रहा। यहां तक कि कुछ मामले न्यायालय में भी विचाराधीन हैं। प्रदेश में आने वाली कई सरकारों ने इस दिशा में पहल की, लेकिन बात बहुत आगे नहीं बढ़ पाई।

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद अब इस दिशा में सकारात्मक पहल हुई है। इससे दोनों राज्यों के बीच वर्षो से लंबित परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के समाधान की उम्मीद भी जगी है। दरअसल, मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के कुछ समय बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तर प्रदेश गए और वहां के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से मुलाकात की। दोनों के बीच परिसंपत्ति बंटवारे में आ रही दिक्कतों के समाधान को लेकर एक बैठक भी हुई। उसके बाद इस दिशा में सकारात्मक कदम भी उठे। हाल ही में उत्तर प्रदेश ने 33 नहरों व कुछ सरकारी कार्यालयों से अपना कब्जा छोड़ दिया है।

दोनों प्रदेशों के मुख्य सचिवों और फिर मुख्यमंत्रियों के बीच होने वाली बैठक को देखते हुए शासन में इन दिनों तेजी से काम चल रहा है। मुख्य सचिव एस रामस्वामी स्वयं विभागों के साथ एक दौर की बैठक कर चुके हैं। अब सभी विभागों को विवादित परिसंपित्तयों पर अपना पूरा होमवर्क कर दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि बैठक में विवादित बिंदुओं पर प्रदेश सरकार की ओर से पुरजोर पैरवी की जा सके।

विधवा पेंशन लेने को काट रहे दफ्तरों के चक्कर

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गरीब लोगों की आर्थिक रूप से सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई योजनाओं का लाभ लेने के लिए उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसी तरह के मामले में ब्रहमपुरी व लोहियानगर की तीन महिलाएं सरकारी व्यवस्था से पीड़ित हैं। स्थिति यह है कि ये महिलाएं विधवा एवं वृद्धावस्था पेंशन के लिए महीनों से चक्कर काट रही हैं, लेकिन अब तक इनकी पेंशन शुरू नहीं हो पाई हैं। सिर्फ ये तीन ही नहीं, बल्कि दून में फिलहाल ऐसे दो सौ से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जो पेंशन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। ब्रहमपुरी निवासी महेश्वरी देवी ने वृद्धावस्था पेंशन के लिए 15 जनवरी 2016 को आवेदन किया। आवेदन फार्म पर उन्होंने पटवारी, कानूनगो व तहसीलदार से रिपोर्ट भी लगवाई, लेकिन अब तक एसडीएम कार्यालय से आवेदन सत्यापित नहीं हुआ है। इस कारण उनकी पेंशन नहीं लग पाई है।
ऐसे ही लोहियानगर निवासी सुनीता देवी ने विधवा पेंशन के लिए पांच अक्टूबर 2016 को आवेदन किया, लेकिन इस फार्म पर भी एसडीएम के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। महिला ने बताया कि नियमानुसार परिवार की आय चार हजार रुपये तक होनी चाहिए और उनके पास वर्तमान आय इतनी ही है, बावजूद इसके उनकी पेंशन नहीं लग पाई है। इसके अलावा ब्रहमपुरी क्षेत्र निवासी बीना देवी भी आवेदन फार्म लेकर पिछले छह महीने से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही है, लेकिन अब तक उनके हाथ सिर्फ मायूसी के और कुछ नहीं लगा।
जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराघ शंखधर ने कहा कि पेंशन के लिए कुछ औपचारिकताएं जरूरी होती है। जैसे ही आवेदक उक्त औपचारिकताओं को पूरा कर आवेदन लाएंगे, वैसे ही उनकी पेंशन लगा दी जाएगी।

प्रदेशभर के स्कूलों का समय बदला

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स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नए सत्र की तैयारी शुरू हो गई है। शिक्षा विभाग ने भी अपनी ओर से कार्य आरंभ कर दिया है। इसी क्रम में बुधवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रदेश के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में बच्चों के आवागमन में सुविधा को देखते हुए समय बदले जाने का निर्णय लिया गया।

बुधवार को शिक्षा निदेशालय में शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिसमें स्कूलों के संचालन व नए सत्र से जुड़े तैयारियों आदि पर विचार विमर्श किया गया। इस दौरान स्कूलों के संचालन समय में बदलाव किए जाने के प्रस्ताव भी रखे गए। जिसके बाद छात्र—छात्राओं की सहूलियत को देखते हुए समय को बदलने का निर्णय लिया गया। विभाग ने ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन सत्र के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया है। निदेशक प्राथमिक शिक्षा आरके कुंवर ने बताया कि बैठक में समय को लेकर बातचीत की गई। स्कूलों को एक जुलाई से विभाग द्वारा निर्धारित किए गए नए समय अनुसार ही कक्षाओं का संचालन करना होगा।
उन्होंने बताया कि प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को ग्रीष्मकालीन सत्र में सुबह आठ बजे से एक बजे तक और शीत कालीन सत्र में सुबह साढ़े नौ बजे से साढ़े तीन बजे तक कक्षाएं संचालित करनी होंगी। उन्होंने बताया कि इसे लेकर सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भेजे जा चुके हैं। एक जुलाई से सभी स्कूलों को निर्देशों का पालन करना होगा।

उत्तराखंड के मंत्री अधिकारी पहुंचेंगे आप के घर

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अब जिला और तहसील स्तर पर जनता को सुशासन का अहसास कराया जाएगा। जिलों में हर महीने के पहले मंगलवार को तहसील दिवस आयोजित किए जाएंगे। जिलाधिकारी हर सोमवार को दो घंटे अपने कार्यालय में अनिवार्य रूप से जन समस्याओं की सुनवाई करेंगे। राज्य मंत्रिमंडल ने इन फैसलों के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को तोहफा दिया। उन्हें पोती और नातिन की शादी के लिए दी जाने वाली धनराशि चार हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये की गई है।

मंत्रिमंडल की बैठक में सुशासन को केंद्र में रखकर कई फैसलों पर मुहर लगाई गई।मुख्यमंत्री के पास राज्य स्तर के बजाए जिलों और तहसील स्तर की समस्याएं भी पहुंच रही हैं। इसे देखते हुए तहसील स्तर पर जनता की समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था करने का निर्णय हुआ। अब जिलों के प्रभारी मंत्रियों को प्रत्येक डेढ़ महीने में एक बार अनिवार्य रूप से संबंधित जिलों में डेरा डालना होगा। इससे जिला स्तरों पर नई योजनाओं का खाका खींचने, उनके क्रियान्वयन और उसे लेकर जनता के फीडबैक पर खुद प्रभारी मंत्री बारीकी से नजर रख सकेंगे।

सात जिलाधिकारियों को अब हर सोमवार को सुबह दस बजे से दोपहर 12 बजे तक अपने कार्यालयों में जन समस्याओं का निराकरण करना होगा। इस व्यवस्था को भी अनिवार्य किया गया है।

उच्च व चिकित्सा शिक्षा की तर्ज पर आयुष शिक्षा में कार्यरत शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष की गई है। महिलाओं को पाबंदी के साथ रियायत बढ़ाई गई है। महिलाओं को 20 लाख के बजाए अब 25 लाख तक अचल संपत्ति की खरीद पर स्टांप शुल्क में 25 फीसद की छूट मिलेगी, लेकिन ये छूट जीवनकाल में सिर्फ दो बार ही अनुमन्य होगी।

कैबिनेट के प्रमुख फैसले:

-स्वतंत्रता सेनानियों को तोहफा, पोती-नातिन की शादी को 50 हजार रुपये

-सुशासन का अहसास निचले स्तर पर कराने को हर माह पहले मंगलवार को तहसील दिवस

-प्रभारी मंत्री हर डेढ़ माह में जिलों में अनिवार्य रूप से डालेंगे डेरा

-डीएम प्रत्येक सोमवार सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक करेंगे जन समस्याओं का निराकरण

-आयुर्वेदिक शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष

-महिलाओं को 25 लाख तक अचल संपत्ति खरीद पर स्टांप ड्यूटी में छूट, जीवनकाल में सिर्फ दो बार ही रियायत

बेरोजगारों की राजधानी बन रहा देहरादून

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केंद्र सरकार लगातार बेरोजगारी मिटाने के लिए स्टार्टअप इंडिया जैसी तमाम योजनाओं का आगाज किया गया।प्रदेश स्तर पर सरकारों ने रोजगार को लेकर वादे तो किए, लेकिन उन्हें अंजाम तक नहीं पहुंचाया। यही कारण है कि आज प्रदेश की राजधानी बेरोजगार युवाओं की भीड़ से भरी पड़ी है। आलम यह है कि बीते दस सालों में प्रदेश में बेरोजगारों की फौज दोगुनी हो गई।

सरकारों के तमाम वादों की पोल एक आरटीआई के तहत मिली सूचना ने खोल कर रख दी। हालत ये है कि पिछले दस सालों में राज्य में बेरोजगारों की संख्या दोगुनी हो गई। राजधानी की बात करें तो यहां बेरोजगारों की संख्या राज्य में सबसे ज्यादा है। ये सारे आंकड़े आरटीआई के जरिये मांगी गई जानकारी से सामने आए हैं। डायरेक्टोरेट ऑफ ट्रेनिंग एंड एम्पॉयमेंट के मुताबिक अप्रैल 2017 तक राज्य में बेरोजगारों की संख्या 09 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। ये संख्या 9.23 लाख है। जबकि वो बेरोजगार अलग हैं, जिन्होंने एम्पॉयमेंट एक्सचेंज में अपना नाम दर्ज ही नहीं करा रखा है। अगर ऐसे युवाओं को भी बेरोजगारों की सूची में जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा कहीं अधिक हो जाएगा।
बेरोजगारी का आलम यह है कि हर साल संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। यह हम नहीं कह रहे, आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। हालांकि साल 2008 के मुकाबले साल 2009 में बोरोजगारों की संख्या में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई। लेकिन, इसके बाद बेरोजगारी के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। 2008 में राज्य में बेरोजगारों की संख्या 4.89 लाख थी जो 2009 में थोड़ी सी घटकर 4.88 लाख हो गई थी, लेकिन इसके बाद ये संख्या साल दर साल बढ़ती ही चली गई।
आंकड़ों की नजर में बेरोजगार
जिलेवार बेरोजगार
जिले-संख्या
देहरादून- 1,89,708
नैनीताल-99,660
ऊधमसिंह नगर-91,738
हरिद्वार-82,157
टिहरी-75,681
पिथौरागढ़-72,649
अल्मोड़ा-72,215
पौड़ी-64,890
चमोली- 48,119
उत्तरकाशी- 40,839
बागेश्वर-32,560
रुद्रप्रयाग- 27,491
चंपावत-25,658
वर्षवार बेरोजगारों के आंकड़े
वर्ष- संख्या (अप्रैल तक)
2008- 4,89,744
2009-4,88,789
2010-5,65,559
2011- 6,61,642
2012- 7,04,398
2013-7,51,024
2014- 8,62,279
2015-9,22,066
2016- 9,26,308
2017- 9,23,000

उत्तराखंड में बनेगा 803 एकड़ में ग्रीन इंडस्ट्रियल जोन

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उत्तराखंड सरकार को उघमसिंह नगर जिले में केंद्र सरकार की तरफ से 803 एकड़ जमीन मिलने वाली है। इस जमीन का इस्तेमाल तराई के इलाके में औद्योगिक इकाईयों के विकास के लिये किया जायेगा। राज्य सरकार को ये जमीन केंद्र सरकार की पीएसयू नेपा के जरिये मिलेगी। कुछ दिन पहले राज्य में औद्योगिक इकाईयों के विकास के लिये बनी सिडकुल औऱ नेपा के बीच इस के बाबत एक समझौते पर मंजूरी हुई है।

इस समझौते के मुताबिक नेपा अगले एक महीने के अंदर सिडकुल को ये जमीन ट्रास्फर करेगी। इसके लिये सिडकुल 96.67 करोड़ रकम अदा करेगा। नेपा का मुखालय मध्यप्रदेश के बुर्हानपुर में है और काशीपुर के हेमपुर में यह जमीन का मालिकाना हक उसके पास है। इस जमीन पर दशकों ये नेपानगर की पेपर मिल के लिये रिजर्व स्टाॅक के लिये खेती होती थी। मौजूदा समय में आधी जमीन पर यूक्लिपटस के पेड़ हैं।

इस बारे में बताते हुए सिडकुल के एमडी आर राजेश कुमार ने कहा कि “केंद्र सरकार से औद्योगिक विकास के लिये मदद के लिये राज्य के पास जमीन होना जरूरी होता है। इसमें ये जमीन मददगार रहेगी। इस जमीन को तराई क्षेत्र में ग्रीन इंडस्ट्रियल जोन बनाने में इस्तेमाल किया जायेगा।”

हांलाकि ये सब कम से कम एक महीने बाद होगा जब नेपा से जमीन सिडकुल को मिलेगी। इसके बाद यहां तमाम तरह की स्टडी की जायेंगी ताकी केंद्र और राज्य सरकार के नियमों का पालन किया जा सके।

बोलेरो राइका पौंटी के पास खाई में गिरी, छह की मौत

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उत्तराखंड के बडकोट से मोल्डा गाँव जा रही बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर राइका पौंटी के पास खाई में गिरा, जिसमें 6 ग्रामीणों की मौत हो गई है। एक बच्चा लापता बताया जा रहा है। मृतकों में तीन ग्रामीण मोल्डा गाँव के हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार की देर शाम बडकोट से मोल्डा गाँव जा रहा बोलेरो वाहन राइका पौंटी के पास अनियंत्रित हुई तथा 200 मीटर गहरी खाई गिरी। जिसमें चार लोग की मौके ही मौत हुई है। जबकि दो की मौत अस्पताल ले जाते समय हुई। घटना में एक बच्चा लापता बताया जा रहा है। मृतकों में चालक सरदार सिंह चौहान पुत्र फुलक सिंह (47) निवासी मोल्डा नौगांव, लोकेन्द्र सिंह चौहान (18) पुत्र सरद सिंह निवासी मोल्डा , शूरवीर सिंह (60) निवासी डांडा गांव ,जगत सिंह (40) पुत्र तेग सिंह निवासी मोल्डा की मौत हुई। दो की अभी शिनाख्त नहीं हो पाई है। जिन दो लोगों की शिनाख्त नहीं हुई है वे दिल्ली के बताए जा रहे हैं तथा ये अपने रिश्तेदारों के घर मोल्डा जा रहे थे।

राजधानी में भारी बारिश से लोगों के घरों में भरा पानी

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राजधानी में भारी बारिश अब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बनने लगी है। विभागीय अनदेखी के चलते आम लोगों को न सिर्फ जलभराव का सामना करना पड़ रहा है बल्कि सड़कों पर गड्ढे और भारी जलभराव के चलते घरों में भी घुसने लगा है। घरों में पानी आने से लोगों के बीच खासा आक्रोश है।

मौसम विभाग ने बीते रोज राजधानी में अगले 48 घंटे तक भारी बारिश की चेतावनी दी थी। मंगलवार देर रात से ही बारिश शुरू हो गई। बुधवार को भी लगातार बारिश का सिलसिला जारी रहा। जिसके बाद राजधानी में नालों और विभागीय तैयारियों की पोल खुल गई। आलम यह रहा के कई इलाकों में निकासी न होने के कारण जलभराव होने से घरों तक में पानी घुस गया।

देर रात अचानक हुई तेज बारिश के बाद नेमी रोड से पूरण बस्ती में को होता हुआ रिस्पना नदी का पानी कई घरों में घुस गया जिससे कई घरों का घरेलु सामान तक बर्बाद हो गया। बारिश के चलते संजय कॉलोनी के लगभग एक दर्जन से अधिक परिवार इससे प्रभावित हुए। लोगो का कहना था कि विभागीय लापरवाही के चलते ऐसा हुआ है। जिसके चलते स्थानीय लोगों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिला।

जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे पूर्व विधायक राजकुमार ने तत्काल जिलाधिकारी और तहसीलदार को अवगत कराने के साथ नगर निगम के अधिकारियों से बात की। उन्होंने विभाग की टीम को मौके पर बुलाकर मुआयना कराया। साथ ही क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया। 

वर्षा ने गर्मी से दी लोगों को राहत, धान की फसल चौपट

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बुधवार की प्रातः से ऋषिकेश सहित आसपास के क्षेत्रों में हो रही झमाझम वर्षा से जहां पिछले कई दिनों से पड़ रही चिलचिलाती गर्मी से लोगों को राहत मिली है| वहीं वर्षा ने किसानों की लगी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।

पिछले कई दिनों से चिलचिलाती धूप के कारण गर्मी से लोगों में काफी अकुलाहट पैदा हो गई थी लेकिन बुधवार को हुई झमाझम मूसलाधार वर्षा के कारण लोगों ने गर्मी से राहत की सांस ली| आम जनजीवन भी प्रभावित हो गया है जिसके कारण ऋषिकेश, बद्रीनाथ मार्ग पर निर्गुंडी के पास हुए भूस्खलन से जहां मार्ग दो घंटे तक अवरुद्ध रहा वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की धान की फसल पानी में पूरी तरह डूब जाने से खराब हो गई|

सॉन्ग नदी के किनारे वर्षा का पानी कई घरों में घुस गया जिससे घरों का सामान खराब हो गया है| तहसील प्रशासन ने घरों में घुसा पानी का आंकलन कर शीघ्र पीड़ितों को राहत देने का आश्वासन दिया है| वर्षा के कारण तापमान में भी काफी गिरावट देखी जा रही है| तहसीलदार रेखा आर्य ने बताया कि वर्षा से होने वाले नुकसान को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और आपदा राहत दल को भी सचेत करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्राचार्य पद के लिए यूजीसी नेट पास करना अनिवार्य

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शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े संस्थान में प्राचार्य पद पर आसीन होने का सपना रखने वालों को यूजीसी की राष्ट्रीयता पात्रता परीक्षा (नेट) परीक्षा पास करनी ही होगी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने रेगुलेशन 2014 में परिवर्तन कर प्राचार्य पद के लिए यूजीसी नेट को अनिवार्य कर दिया है।

बीते कुछ वक्त में संस्थानों की शिक्षा प्रणाली का स्तर और गुणवत्ता में गिरावट का प्रमुख कारण उन संस्थानों में प्रशिक्षित शिक्षकों और प्राचार्य पदों पर अनुभवी व्यक्ति का अभाव होना है। इसी को देखते हुए एनसीटीई ने अधिसूचना जारी कर प्राचार्य पद पर नियुक्ति के लिए एक नई शर्त जोड़ी हैं जिससे शिक्षा महाविद्यालयों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नए मापदंड के मुताबिक अब प्राचार्य बनने के लिए पीएचडी व शिक्षा में पांच साल के अनुभव के साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) पास करना अनिवार्य है। परिष्द ने न्यूनतम मानक को ध्यान में रखते हुए साल 2009 के अनुसार पीएचडी उपाधि ग्रहण करने वालों को इस शर्त से छूट की बात भी कही है।

एनसीटीई ने प्राचार्य पद में नियुक्ति के लिए एक ओर जहां यूजीसी नेट को अनिवार्य किया है वहीं आठ साल के अनुभव को घटाकर पांच साल कर दिया है। उत्तराखंड की बात करें तो पूरे प्रदेश में कॉलेजों में प्राचार्य पद खाली पड़े हैं। कई संस्थानों का जिम्मा प्रभारी प्राचार्य संभाल रहे हैं। नए नियम से गुणवतता में सुधार तो होगा ही साथ ही नई पीढ़ी के अनुभवी और योग्य शिक्षकोंं को बेहतर विकल्प भी मिलेंगे।

एसोसिएशन आॅफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट्स के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल का कहना है कि परिष्द का यह फैसला शिक्षा की बुणवत्ता केा बढ़ाने का कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि बीएड संस्थानों की बात की जाए तो फिलहाल प्रदेश में 110 प्राइवेट, 16 सेल्फ फाइनेंस सरकारी संस्थान और तकरीबन 12 सरकारी बीएड संस्थान हैं। इसके अलावा उच्च शिक्षा के 450 संस्थान होने के बाद भी गुणवत्ता के मानकों पर प्रदेश फेल हो रहा था। यह नियम सभी संस्थानों पर लागू होने से वहां योग्य और अनुभवी शिक्षक और प्राचार्य छात्रों का मार्गदर्शन करने का कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि प्राचार्य नियुक्ति को लेकर यूजीसी नेट को अनिवार्य करना अच्छी पहल है।

इसपर दून यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. वीके जैन का कहना है कि ‘प्रदेश के अधिकांश संस्थाओं में प्राचार्य के पद रिक्त हैं। पीएचडी की अनिवार्यता के कारण दिक्कत होती थी, अब नेट के चलते रास्ता कठिन भी होगा। लेकिन, इसके दूसरे पहलू पर गौर करें तो इससे शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक असर भी दिखाई देंगे।’