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‘संसाधनों, भौगोलिक विषमताओं के हिसाब से नीति बनाने की जरूरत’

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पूरे देश को विकास के एक ही चश्मे से देखना उचित नहीं है। खासकर उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों के लिए उनके संसाधनों और भौगोलिक विषमताओं के हिसाब से अलग नीति बनाने की जरूरत है। यही वजह है कि दिल्ली से देश के लिए चलने वाली एक जैसी योजनाएं हिमालयी राज्यों में आकर फेल हो जाती हैं। ऐसे राज्यों के लिए जल्द अलग नीति व उसके अनुरूप योजनाएं तैयार की जाएंगी। यह बात देहरादून स्थित वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह में नीति आयोग के सदस्य व डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन) के पूर्व सचिव डॉ. वीके सारस्वत ने कही।

डॉ. सारस्वत ने कहा कि हिमालयी राज्यों के लिए अलग नीति बनाने के लिए आयोग हर राज्य में दौरा कर रहा है। इस कड़ी में जल्द उत्तराखंड का दौरा कर ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल पर मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बैठक की जाएगी।
उत्तराखंड के मौजूदा हालात पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सारस्वत ने कहा कि यहां चीड़ की पत्तियां जंगलों में आग का कारण बन रही है, जबकि इनका इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन में किया जा सकता है। बायोमास गैसिफिकेशन या बायो मिथेनाइजेशन के माध्यम से इस तरह के जैव संसाधनों का प्रयोग ऊर्जा तैयार करने में किया जा सकता है।
इसके अलावा उत्तराखंड में इकोटूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं और जरूरत इस बात की है कि टूरिज्म को इकोफ्रेंडली टूरिज्म से जोड़ा जा सके। राज्य के निचले हिस्सों में फसल उगाने व ऊंचाई वाले हिस्सों में हॉर्टिकल्चर व फ्लोरीकल्चर की संभावनाओं को तलाशा जा सकता है। उत्तराखंड जैसे राज्य में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए दोहरी शिक्षा व्यवस्था लागू किए जाने की जरूरत है, जिसमें वोकेशनल कोर्स भी साथ-साथ चलते रहे हैं।
उद्योग सेक्टर के लिहाज से भी उत्तराखंड में आमूलचूल परिवर्तन किए जाने की जरूरत है, यहां फार्मा इंडस्ट्री की जगह आइटी पर फोकस किए जाने की जरूरत है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल की बैठक में इन्हीं तमाम संभावनाओं को लेकर विस्तृत मंथन किया जाएगा। बैठक में नीति आयोग की तरफ से तय किए गए तीन, पांच और सात साल के विजन डॉक्यूमेंट पर भी बात होगी। हालांकि इसको लेकर सभी राज्यों के मुख्य सचिव से नियमित तौर पर भी बात की जाती है।

एम्स छात्रा की मौत के मामले में सीबीआई जांच के आदेश

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हाईकोर्ट ने एम्स ऋषिकेश में छात्रा की मौत के मामले में सीबीआई जांच करने के आदेश दिये हैं। मामले के अनुसार 24 जून 2014 कुमारी युक्ति (नर्सिंग प्रथम ) एम्स की छात्रा थी जिसकी मौत एम्स में ही पंखे पर लटकर हुई थी। जिसकी रिपोर्ट उसके पिता द्वारा ऋषिकेश थाने में लिखायी गई थी किन्तु पुलिस द्वारा उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। न ही उनकी एफआईआर लिखी गई।

नौ महीने के बाद मृतका के पिता ने कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 156(3) में प्रथर्नापत्र दिया जिस पर कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर लिखने के आदेश दिए। जिस पर जांच अधिकारी द्वारा जांच की गई। इस जांच से असंतुष्ट होकर जांच सीबीसीआईडी को सौप दी। इनकी भी जांच से असंतुष्ट होकर सीबीसीआईडी ने मामले को बन्द कर दिया। 

मृतका के पिता ने कोर्ट से इस मामले में सीबीआई से जांच करने की मांग की गई परन्तु सीबीआई ने जांच करने से मना इस आधार पर कर दिया गया कि उनके पास काम का बोझ बहुत अधिक है इसलिए इसकी जांच नही कर सकते है। जिसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में सीबीआई से जांच कराने के लिए याचिका दायर की। मामले को सुनने के बाद न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने मामले की जांच सीबीआई से करने के आदेश दिए।

”हसीना पार्कर” में नज़र आऐंगे दून के हीरो ”चरणप्रीत सिंह”

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”झुक सकता है आसमां भी अगर तबियत से पत्थर उछाले कोई और हो सकती है मुश्किले आसान अगर दिल से दुआ मांगे कोई” जी हां कुछ ऐसे ही अपने मंजिल तक पहुंचे है देहरादून के युवा चरणप्रीत सिंह।

उत्तराखंड यूं तो देवभूमि के नाम से मशहूर है लेकिन प्रतिभाओं में भी उत्तराखंड का कोई जवाब नहीं है।देवभूमि ने हिंदी सिनेमा को एक से एक अदाकार दिए हैं। इसी कड़ी में हमारी आज की कहानी है बालीवुड के एक ऐसे सितारे की जिनको आपने बहुत सी सुपरहिट फिल्मों में देखा होगा।

न्यूज़पोस्ट टीम से खास बातचीत में चरणप्रीत ने अपने जीवन के अहम पहलूओं पर काफी कुछ बताया है। आज के हमारे एक्टर हैं 30 साल के चरणप्रीत सिंह। चरणप्रीत टिहरी गढ़वाल में पले-बड़े है और शुरुआती पढ़ाई भी टिहरी से पूरी की है। इसके बाद परिवार देहरादून में बस गया, परिवार में माता पिता और एक छोटा भाई है।

चरणप्रीत एक मिलनसार व्यवहार के मालिक होने के साथ बचपन से ही एक्टिंग करने को अपने शौक में गिनते है।इसके अलावा उन्हें फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना,फोटोग्राफी, आर्किटेक्चर,पेंटिंग और सभी क्रिएटिव काम करने का शौक है।

हमेशा अपने काम में मशगूल रहने वाले चरणप्रीत के जिंदगी का लक्ष्य एक सिंपल जिंदगी जीना है और अपने एक्टिंग में हमेशा अच्छा करना है।चरण कहते हैं कि, ‘एक आर्टिस्ट का मुख्य काम है अपनी कला को हर मौके पर तराशना ।’

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भविष्य में उनके आने वाले प्रोजेक्टस में हसीना पार्कर फिल्म मुख्य है। चरण हसीना पार्कर फिल्म में अहम भूमिका में है जो 18 अगस्त को रिलीज़ होने वाली है। आजकल चरण अपनी डायरेक्शन की पहली फिल्म पर जी जान से काम कर रहे हैं। चरण बताते हैं कि इस फिल्म की शूटिंग इस साल आने वाली सर्दियों में उत्तराखंड में ही की जाएगी।इस फिल्म के लिए चरणप्रीत सिंह बहुत उत्साहित है क्योंकि एक तो यह फिल्म बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म है दूसरा इस फिल्म के कैमरामैन फ्रेंच है। चरण कहते हैं कि, ‘इस फिल्म के कास्ट से एक बात पक्की है कि अगले साल यह फिल्म कैंन्स फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाएगी।’

चरणप्रीत सिंह की एक के बाद एक बहुत सी फिल्में आई हैं और हर फिल्म में उन्होंने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं हैं। चरण की कुछ फिल्में हम सब ने देखी भी है और फिल्मों को सराहा भी है, दि ट्रेन, ऊंगली, साहेब बिबी और गैंग्स्टर रिर्टन, सरबजीत और जल्द ही आने वाली उनकी फिल्म हसीना पार्कर उनकी बड़ी फिल्मों में से एक है।

चरण से यह पूछने पर कि उन्होंने फिल्मी दुनिया को अपनी करियर क्यों चुना इसपर उनका जवाब काफी हटकर था।उन्होंने बताया कि, ‘मुझे बचपन से अलग-अलग स्टाईल और कैरेक्टर में तैयार होना बहुत पसंद था, इसके अलावा हमेशा अलग रोल प्ले करना पसंद करता था।’ इसी सोच के साथ उन्होंने अपने शौक को अपनी जूनुन बना लिया और आज वह अपने करियर में अच्छा काम कर रहे हैं।

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अपने काम को करने में चरण को सबसे ज्यादा एनर्जी और एक्साइटमेंट कहां से मिलती है इसपर उनका जवाब था कि अलग-अलग अभिनय करना, बेस्ट टेक्निशियन और आर्टिस्ट के साथ काम करना, नई जगहों पर शूटिंग करना, नई कहानियों की लिए खुद को वैसा बनाना।चरण का कहना है कि, ‘यह दुनिया का एक ऐसा प्रोफेशन है जिसमें किसी के बोर होने का कोई चांस नहीं है जैसे दूसरी 9-5 की नौकरियों में होता है।’

चरण ने यू तों बहुत से अच्छे फिल्मों में काम किया है लेकिन उनके कभी ना भूलने वाले पल हैं उनका शाहरुख,सलमान,ऐश्वर्या राय बच्चन और रणदीप हुड्डा के साथ काम करना।इसके अलावा टाईगर श्राफ,जैकलिन फर्नानडेज,अर्जुन कपूर को ट्रेनिंग देना भी उनके लिए यादगार पल रहेंगे।चरण का मानना है कि इस करियर में समय के साथ नई यादें जोड़ते जाते हो और आपकी जिंदगी के कभी ना भूलने वाले पल बन जाते हैं।

चरणप्रीत से आखिरी सवाल पूछने पर कि क्या वह रस्किन बांड पर कोई फिल्म बना रहें हैं उनका जवाब था आफिशियली इसपर कोई निर्णय नहीं लिया गया हैं लेकिन भविष्य में उन्हें अगर मौका मिलेगा तो वह जरुर इसपर काम करेंगे।

न्यूज़पोस्ट डेस्क की तरफ से चरणप्रीत सिंह को उनकी आने वाली फिल्म हसीना पार्कर के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।

सफाई के मामले में पहले नंबर पर रहा दून रेलवे स्टेशन

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देहरादून का रेलवे स्टेशन 150 उन रेलवे स्टेश्नों में सफाई व्यवस्था में अव्वल रहा है, जिन 150 रलवे स्टेशनो का निरीक्षण रेलवे की पैसेंजर सर्विस कमेटी कर चुकी है। रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करने पहुंची पैसेंजर सर्विस कमेटी ने देहरादून रेलवे स्टेशन को सफाई के मामले में उन रेलवे स्टेशन में सबसे स्वच्छ माना है।

इसके अलावा कमेटी ने निरीक्षण के दौरान देहरादून रेलवे स्टेशन पर विकालांगो के लिए अलग से शौचालय बनने के भी निर्देश दिए है, साथ ही देहरादून, हरिद्धार और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को धार्मिक महत्व के चलते वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने के लिए भी निर्देश दिए है।

आपको बतादे कि 10 सदसीय पैसेंजर सर्विसस कमेटी ने कई रेलवे स्टेशनो का निरीक्षण करने के बाद उत्तराखंड पहुंची है।कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व सांसद लाल बिहारी तिवारी भी थे जिनके नेतृत्व में देहरादून और हरिद्धार रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाओ का निरीक्षण किया जा चुका है। कमेटी के निरीक्षण करने के बाद और देहरादून रेलवे स्टेशन को सफाई के मामले में नम्बर एक स्थान दिए जाने से देहरादून रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों का जहां हौसला बढा है, वहीं कहा जा सकता है कि देहादून का रेलवे स्टेशन प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार कर रहा है।

वहीं देहरादून के स्टेशन सुप्रीटेंडेंट करतार सिंह ने कहा कि “गुरुवार को आई निरिक्षण टीम ने देहरदून को सफाई में पहला स्थान दिया है।उन्होंने कहा कि इस बात से मुझे बहुत खुशी है क्योंकि इस जगह पर पहुंचने के लिए हमने बहुत कोशिश की है और निरंतर रहे है।इसके अलावा जब आप कोई प्रयास करते हो तो उसका रिर्वाड आपको जरुर मिलता है।”

 

ओडीएफ घोषित उधमसिंह नगर के दावे फेल

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ऊधमसिंह नगर में एनएच मुआवजा घोटाले के बाद अब शौचालय निर्माण में बड़ा घोटाला सामने आया है। स्वच्छ भारत अभियान और मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आधे-अधूरे शौचालय बनाकर लाखों-करोड़ों रुपये का गोलमाल किया गया है। इन गांवों में ग्रामीण अब भी खुले में शौच कर रहे हैं। जबकि यूएस नगर और उत्तराखंड को ओडीएफ भी घोषित कर दिया गया है।

काशीपुर से महज 17 किलोमीटर दूर कुंडेश्वरी न्याय पंचायत में एक गांव पड़ता है गुलजारपुर। इस गांव के अंतर्गत आने वाली जगतपुर राज कॉलोनी में करीब 40 परिवारों के पिछले छह महीने में शौचालय बनवाए गए हैं। लेकिन, अब तक किसी भी व्यक्ति का शौचालय शुरू नहीं हुआ है। खानापूर्ति के नाम पर सिर्फ दीवारें खड़ी कर टॉयलेट सीट लगा दी गई हैं। न ही गटर बनाये गए हैं, न ही कनेक्शन शुरू किये गए हैं। यही हाल गुलजारपुर गांव के अंतर्गत आने वाली सेमलपुरी कॉलोनी का है। यहां तो हालत और भी बदतर हैं। चार-पांच महीने पहले खड़ी की गई शौचालय की दीवारें आंधी-तूफान में ही गिर गई। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने रेत में मानक के मुताबिक सीमेंट ही नहीं मिलाया इससे दीवार भरभराकर गिर गई।

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जगतपुर राज कॉलोनी के मंगली सिंह ने बताया कि करीब छह महीने पहले गांव में कुछ लोग आए। खुद को सरकारी अधिकारी बताकर शौचालय बनाने के लिए कहा। हमने जगह दिखाई और कुछ ही घंटे में उन्होंने शौचालय की दीवार खड़ी कर दी। मंगली ने बताया कि ठेकेदार ने गटर के नाम पर गड्ढा भी मात्र दो फीट खोदा। कनेक्शन भी चालू नहीं किया। उनका परिवार अब भी खुले में शौच करने को मजबूर है। मंगली के ही भाई प्रेम सिंह के यहां भी ठेकेदार ने शौचालय के नाम पर दीवार खड़ी कर दी। इसमें भी कनेक्शन नहीं हुआ। और तो और गटर भी नहीं बनवाया। जगतपुर कॉलोनी के रामकिशोर, हेतराम के यहां भी ऐसे ही शौचालय की दीवार खड़ी की गई है। रामकिशोर ने बताया कि ठेकेदार ने एक दिन में ही गांव के पांच-पांच लोगों के शौचालय बना दिये। लेकिन, चालू किसी का भी नहीं हुआ।

सेमलपुरी निवासी मेघा सिंह के यहां भी चार महीने पहले शौचालय बनाया गया। लेकिन, शौचालय चालू नहीं हुआ। दीवार भी लगता है मानो बिना सीमेंट की बनाई। एक आंधी में ही दीवार टूट गई। बाद में शौचालय सीट खुद ही उन्होंने हटा ली।

सेमलपुरी की ही अतरकली ने बताया कि चार महीने पहले सरकारी मदद के नाम पर एक ठेकेदार ने दीवार खड़ी कर दी। आरोप है कि नींव ही नहीं खोदी। इससे दस दिन में ही दीवार गिर गई। गटर नहीं बनाए जाने के कारण कनेक्शन शुरू ही नहीं हो सका। अब तो दीवारें भी नहीं रह गईं। अतरकली ने बताया कि उसकी छह बेटियां हैं। वो कई बार अधिकारियों और नेताओं को शौचालय के लिए बोल चुकी है। लेकिन, कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जिला पंचायत सदस्य जितेन्द्र सिंह ने आरोप लगाया है कि शौचालय निर्माण में बड़ा घोटाला हुआ है। उन्होंने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए सरकार से 12000 रुपये का अनुदान मिला था। लेकिन, मौके पर जिस तरह सिर्फ दीवार खड़ी की गई है उसमें 3000 रुपये से अधिक की लागत नहीं आई है। लिहाजा साफ है प्रत्येक शौचालय में 9000 रुपये का गबन किया गया है। पूरे जिले में अगर ऐसा ही हुआ है तो यह घोटाला करोड़ों रुपये में पहुंचेगा।

जिला प्रशासन यूएस नगर को अखबारों और टीवी चैनलों में खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) घोषित दिखा चुका है। यहीं नहीं राष्ट्रीय रिकॉर्ड बताकर अधिकारी अपने नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज करवा चुके हैं। 13 अक्तूबर 2016 को तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी  डॉ.आशीष श्रीवास्तव को भी सर्टिफिकेट से नवाजा गया था। अब सोचने का विषय है कि क्या अधिकारियों ने बिना जांच किये ही आंख बंदकर जिले को ओडीएफ मान लिया था।

देशविरोधी नारेबाजी करने वाला कश्मीरी छात्र निलंबित

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कश्मीरी छात्रों द्वारा राजधानी में एक बार फिर देश् विरोधी नारे लगाए जाने का मामला सामने आया है। देहरादून के एक निजी संस्थान के छात्र ने बीते रोज देश विरोधी नारे लगाए। मामले को वीडियो भी वायरल हो गया। जिसके बाद दून के स्थानीय छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया है। इसी क्रम में गुरुवार को एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित छात्रों को निलंबित करने की मांग की। मामले में कार्रवाई करते हुए संस्थान ने एक छात्र को निलंबित कर दिया।
गुरुवार को डीएवी पीजी कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष राहुल कुमार के नेतृत्व में छात्रों ने आईटीम संस्थान क घेराव किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि संस्थान में पढ़ाई कर रहे कश्मीरी छात्र मो. शफी मिर देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त है। छात्रों ने कहा कि बीते दिनों संस्थान के छात्रों का वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें छात्रों ने देश के खिलाफ नारेबाजी करने के साथ ही भारतीय सेना के खिलाफ गलत बयानबाजी भी की।
सोशल मीडिया पर अपलोड की गई इस वीडियो को लेकर छात्रों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज की जा चुकी है। छात्रों ने कहा कि कश्मीरी छात्र राजधानी में इस प्रकार की गलत बयानबाजी राजनीतिक संरक्षण के चलते कर रहे है। उन्होंने शासन से भी इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ दशद्रोह के मकदमे दर्ज किए जाने की मांग की।
छात्रों ने मांग की कि राजधानी व आसपास देश की सुरक्षा से जुड़े कई संस्थान हैं। इसके अलावा केंद्रीय संस्थान व राजकीय संस्थान भी मौजूद हैं। ऐसी गतिविधियां इन संस्थानों की सुरक्षा के लिए भी हानिकारक है। उन्होंनें मांग की कि इस प्रकार के मामलों को गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई की जाए।
मामले में संस्थान की ओर से छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके अलावा मुख्त आरोपी छात्र मो. शफी मिर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। 

बलूनी को उपचार के लिए दिल्ली भेजने की मांग

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उत्तराखंड कांग्रेस के मुख्य प्रचार समन्वयक एवं पूर्व राज्य मंत्री, धीरेन्द्र प्रताप ने उत्तराखंड आन्दोलन की स्तंभ रही एवं आन्दोलनकारी बोर्ड की पूर्व चेयरमैन सुशीला बलूनी को उपचार हेतु तत्काल एयरलिफ्ट कर दिल्ली भेजने की मांग की है।

गुरुवार को धीरेन्द्र प्रताप ने पूर्व राज्य मंत्री मनीष नागपाल के साथ मैक्स अस्पताल जाकर वहां ईलाज करा रही सुशीला बलूनी और प्रसिद्व लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का हालचाल जाना तथा उनके परिजनों से भेंट की। धीरेन्द्र प्रताप ने सुशीला बलूनी और नरेन्द्र सिंह नेगी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि जहां नरेन्द्र सिंह नेगी में हुए आंशिक सूधार पर उनके शुभचिन्कों ने सन्तोष व्यक्त किया वहीं सुशीला बलूनी की बिगड़ती स्थिति पर दु़ख व्यक्त करते हुए उनकी जान बचाने के लिए सर्वश्रेष्ठ इलाज हेतु उन्हें दिल्ली भेजने की मुख्यमंत्री से मांग की है।

प्रेमी जोड़े ने खाया जहर, युवती की मौत

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ज्यूला ग्वालाकोट के निवासी हरीश चन्द्र आर्य (26) और कमला आर्या ग्राम विरलवा अधुरिया (23) वर्षीय युवती ने पैखाम के जंगल में विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया। युवती की मौके पर ही मौत हो गयी। मामला प्रेम प्रसंग का बताया जा रहा है।

थानाध्यक्ष विजेन्द्र साह ने बताया बताया कि सुबह 5:30 पर फोन पर जानकारी मिली कि पैखाम के पास जंगल मे युवक ओर युवती जहरीला पदार्थ खाकर पड़े रहने की सूचना मिली। शीघ्र मौके पर पुलिस पहुंची शीघ्रता से 108 वाहन से दोनों युगल प्रेमियों को सोमेश्वर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया। जहां युवती की घटना स्थल पर ही मृत्यु हो चुकी थी।हरीश चन्द्र का डा. आनन्द तिवारी और डा. दीपिका रानी ने उपचार किया। हालात गम्भीर देखते हुए शीघ्र बेस अस्पताल अल्मोड़ा रेफर कर दिया। युवती मिनी आंगनवाड़ी ग्राम पंचायत अधुरिया में कार्य करती थी। कुछ माह पूर्व ही दोनों ने प्रेम विवाह किया था। लेकिन दोनों के संबंधों बीते कुछ वक्त से ठीक नहीं थे।

 बताया जा रहा है कि आत्महत्या करने वाले युवक हरीश चन्द्र का विवाह पूर्व मे फल्याटी की एकता आर्या के साथ हुआ उसका एक पुत्र भी है जो अपने पिता के साथ फरीदाबाद में रहती है। थानाध्यक्ष विजेन्द्र साह ने बताया कि युवती का शव परिवार के सामने पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिये अल्मोड़ा भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच में लगी है। 

अलर्ट के बावजूद गंगा तटों पर बस्तियों में रह रहे लोग

पिछले 48 घंटों से प्रदेश में हो रही लगातार बारिश से एक बार फिर गंगा का जल स्तर बढने लगा है, ऐसे में नदी किनारे रहने वालो में एक बार फिर देहशत का माहोल है। मानसून के आते ही बाढ़ जैसे हालात ऋषिकेश के चन्द्रभागा और शीशमझाड़ी इलाकों में देखने को मिलती है जहाँ बारिश से सबसे ज्यादा नुक्सान होता है, लेकिन इस से बचाव के लिए प्रशाशन ने अभी तक कोई योजना नहीं बनाई है।

ऋषिकेश के गंगा तट बाड की त्रासदी से संभले भी नहीं थे की एक बार फिर पहाड़ो की बारिश ने यहाँ के लोगो की नीदं उडा दी है मायाकुंड, त्रिवेणी घाट, शीशम झाडी और चन्द्र भागा बस्ती में बड़ी संख्या में लोग रहते है लेकिन प्रशासन अभी तक बाढ़ से निपटने के लिए कोई प्लान तैयार नही किया है। आपको बतादे कि चन्द्रभागा और शीशमझाड़ी में हर साल मॉनसून के आते ही बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है, लेकिन हर बार की तरह प्रशासन आखिरी मौके पर इंतेज़ाम करता है। वहीं यहां रहने वाले लोगों को मॉनसून के दस्तक के साथ ही डर के साये में जीना पड़ रहा है।

अब एक बार फिर मानसून की शुरुवात होने जा रही है, अब देखना ये है की प्रशासन इस बार कैसे बरसात के आने वाले खतरों से कैसे निपटता है? मानसून के चलते अब उत्तराखंड के पहाड़ी छेत्र में भूस्खलन की समस्या बढ़ती जा रही है, उत्तराखंड के पहाड़ विकास की कीमत चूका रहे है। ऐसा में पहाड़ों में होने वाले भूस्खलन से पहाड़ों से सटे शहर भी प्रभावित होते है। बात करें ऋषिकेश की तो यहाँ भी हर साल मानसून की वजय से बड़ी तबाही देखने को मिलती है, वहीं पूर्व पीसीसी अद्यक्ष किशोर उपाध्याय ने प्रदेश सरकार की तैयारियों पर सवाल खड़े किए है, उनका कहना है कि भारी बरसात से होने वाले नुकसान के लिए राज्य सरकार बिल्कुल भी तैयार नही है।

 

आकाशवाणी पर सुनाई देगी उत्तराखंड की क्षेत्रीय भाषाएं

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केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने गुरुवार को राजधानी देहरादून में दूरदर्शन केंद्र के नए भवन के लोकार्पण के साथ ही आकाशवाणी केंद्र का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आकाशवाणी केंद्र से क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।

 उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से यहां आकाशवाणी केंद्र की मांग चली आ रही थी। जब निशंक मुख्यमंत्री थे, तब इसके लिए भूमि का आवंटन हो गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से आकाशवाणी की शुरुआत नहीं हो पायी थी। अब लोगो की ये मांग पूरी हो गयी है।

 खास बात है कि आकाशवाणी पर लोंगो के लिए गढ़वाली, कुमाऊनी व जौनसारी समेत तमाम क्षेत्रीय भाषाओं में कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने क्षेत्रीय भाषा को आगे बढाने पर बल दिया। उनके साथ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद रमेश पोखरलियाल निशंक, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, सांसद राज्य लक्ष्मी शाह भी मौजूद रहे।