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फिल्म अभिनेता व निर्देशक राकेश रोशन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

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बॉलीवुड एक्टर और डायरेक्टर राकेश रोशन के खिलाफ डालनवाला कोतवाली पुलिस ने कहानी चुराने के मामले में न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। उन पर देहरादून के लेखक रूप नारायण सोनकर ने अपने उपन्यास ‘सूअरदान’ की कहानी का ‘कृष-थ्री’ फिल्म में उपयोग करने का आरोप लगाया था।

बतादें कि राकेश रोशन के खिलाफ पिछले साल मई में डालनवाला पुलिस में एफआईआर दर्ज की थी। देहरादून के स्थानीय लेखक रूपनारायण सोंनकर ने उन पर साल 2013 में आए उनके उपन्यास ‘सूअरदान’ से कहानी चुराने का आरोप लगाया था। जिसका रोशन पर हिट फिल्म ‘कृष-थ्री’ में उपयोग करने का आरोप लगाया था। देहरादून के डालनवाला पुलिस स्टेशन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने उनके खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई। चार्जशीट में ये दावा किया गया है कि निर्देशक के खिलाफ उपनयास की कहानी का फिल्म में इस्तेमाल करने के पूरे सबूत हैं। लेखक के वकील ने कोर्ट से आग्रह किया है कि राकेश रोशन को कोर्ट में उपस्थित होने का समन भेजा जाए।
डालनवाला के इंस्पेक्टर यशपाल बिष्ट ने चार्जशीट दाखिल करने की पुष्टि करते हुए बताया कि उपन्यास को पढ़ने और कहानी का फिल्म का कथानक से मिलान कराने के बाद यह कदम उठाया गया है। इस मामले में कुछ महीने पहले पुलिस की एक टीम राकेश रोशन से मिलने मुम्बई भी गई थी, वहां उनसे इस मामले में पूछताछ भी गई थी।

भाजपा राज्य को पहाड़-मैदान में बांट रहीः दिवाकर

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भाजपा सरकार ने प्रदेश को पहाड़ और मैदान में बांट कर रख दिया है। उक्रांद के प्रदेश अध्यक्ष दिवाकर भट्ट ने को शनिवार को मुखानी स्थित जिला कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 100 दिन में डबल इंजन की सरकार फेल ही नजर आई है।

दिवाकर भट्ट ने कहा कि हाल में पिथौरागढ़ व खटीमा में दो किसानों ने कर्ज के चलते आत्महत्या कर ली। खटीमा में जहां किसान को सरकार की ओर से पांच लाख और विधायक की ओर से एक लाख का मुआवजा दिया, वहीं पिथौरागढ़ में काश्तकार के परिजनों को सिर्फ 20 हजार दिया गया है। सरकार को चाहिए कि प्रदेश में सभी किसानों का कर्ज माफ करे। उन्होंने कहा कि पलायन रोकने के लिए सरकार में जो आयोग गठित किया है, वह महज एक नाटक भर है। यह पहली सरकार है जो घर-घर तक शराब पहुचाने के लिए मोबाइल वैन चला रही है। पहाड़ की भावनाओ के साथ भाजपा को खिलवाड़ बंद करे, अन्यथा आंदोलन किया जाएगा। इसके उपरांत उन्होंने कार्यकर्ताओं की बैठक भी ली। इसमें वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी, पुष्पेश त्रिपाठी, त्रिवेंद्र पवार, विजय रतूड़ी, श्याम नारायण आदि मौजूद रहे

अपने रंगों से बेजान चीजों को जान देते हैं ये युवक

आज के कमर तोड़ मुकाबले के जमाने में शायद ही कोई स्कूल ड्राॅपआउट बच्चों को किसी काबिल माने। लेकिन मसूरी के उज्जवल नेगी और अभिषेक यादव से मिलने के बाद शकीनन आप अपना नजरिया बदलने पर मजबूर होंगे। “इवोल्यूशन” टीम  के ये दोनो सदस्य स्कूल पूरी नहीं कर सके हैं लेकिन इन्होने अपने पेंटिंग के हुनर को ही अपना रोजगार का जरिया भी बना लिया है। वहीं इस ग्रुप का तीस्रा सदस्य अायुष परमार अभी भी पढ़ाई कर रहा है और साथ साथ अपना पेंटिंग पैशन साथ साथ चला रहा हैं।

कम उम्र में ही इन लङकों की जोड़ी ने बहुत पहले ही समझ लिया कि उन्हें कुछ अलग और हटकर करना है। पिछले 2 सालों से अपने पैलेट, ब्रश और रंगों से वे लगातार अपने परिवेश में रंग जोड़ते अा रहे हैं। हमारी उनसे मसूरी के टैवर्न कैफे में मुलाकात हुई जहां कैफे की फीकी दीवारों को इन लोगों ने एक आर्ट गैलरी में बदल दिया।

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उज्ज्वल हमें बताते है, ‘मेरे पिता एक पेशेवर चित्रकार थे लेकिन इसे वे रोजगार से नहीं जोड़ पाये, इसलिए उन्होंने इसे छोड़, नौकरी करना पड़ी। जब मैंने स्कूल छोड़ कर अपने जुनून को अपना प्रोफेशन बनाने कि सोची तो मेरा परिवार नाखुश था, लेकिन मेरे सालों की मेहनत से आज मेरे माता-पिता को मुझ पर गर्व है।’

हालांकि इन युवाओं ने खुद अपनी कला को तराशा है, लेकिन वह यूट्यूब के बहुत शुक्रगुजार है। अभिषेक ने अपना एनिमेशन कोर्स छोड़ कर अपनी हाॅबी पर काम किया, ग्राफिटी आर्ट, एयर ब्रश पेंटिंग, बाइकों पर काम करना, गाड़ियों पर काम करना, कैफे की दिवारों पर पेंटिंग, मुंबई, रांची से दिल्ली और देहरादून तक इन्होंने अपनी पहचान बनायी हैं।अभिषेक का कहना है कि, “यह हमारे भावनाओं को लोगों तक पहुंचाने का माध्यम है और हमें अपने काम से बहुत संतुष्टी मिलती है।”

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इस साल के शुरुआत में डिस्कवरी चैनल मे प्रसारित ‘इंडिया माय वे’ मे दोनों कलाकारों को फीचर किया गया जिससे उन्हें नाम अौर प्रोत्साहन मिला है।अाज कल, उज्जवाल, अायुष और अभिषेक नवंबर में गोवा में होने वाले भारतीय बाइक वीक में भाग लेंने वाली दो बाइकों पर अपना हुनर दिखा रहे हैं। न्यूज़ पोस्ट टीम उनके ‘पहियों पर कैनवास’ के प्रदर्शन के लिये उनको शुभकामनायें देती हैं।

केन्द्र सरकार पर हमला, जीएसटी पर जश्न गलत:हरीश रावत

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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि स्वतंत्रता के साथ जीएसटी का जश्न जिस तरह से भाजपा सरकार मना रही है यह कहीं से भी उचित नहीं लगता। शनिवार को कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में हरीश रावत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जीएसटी ही नहीं किसी भी जश्न की तुलना स्वतंत्रता से करना कहीं से अच्छा नहीं लगता है। लेकिन भाजपा सरकार इसकी तुलना कर अपनी सोच को दर्शा रही है।
उन्होंने केन्द्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर वार करते हुए कहा कि कांग्रेस की योजनाओं का नाम बदल कर भाजपा सरकार वाहवाही बटोर रही, लेकिन कांग्रेस योजनाओं को बताने में कतरा रही है।
हरीश रावत ने उत्तराखंड के कारोबारियों के लिए जीएसटी में तीन मुख्य छूट की मांग करते हुए कहा कि राज्य में 50 लाख तक का सालाना कारोबार करने वाले कारोबारियों को जीएसटी से छूट दी जाए। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री को मिल रही टैक्स में छूट को लेकर केंद्र और राज्य सरकार स्थिति स्पष्ट करे। साथ ही डिफाल्टर होने की स्थिति में कारोबारियों को एक साल के लिए छूट दी जाए।

राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में कैम्प लगाकर स्वास्थ्य सेवायें देने की अपील

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राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पाल ने डाॅ. दिवस के अवसर पर इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा कैलाश हाॅस्पिटल जोगीवाला में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए।

राज्यपाल ने भारत रत्न डाॅ0 विधान चन्द्र राॅय की स्मृति में उनके जन्म दिवस को डाॅ.दिवस के रूप में मनाने के अवसर पर समस्त चिकित्सकों को शुभकामनायें दी अौर कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि श्री राॅय भारतीय चिकित्सा संस्थान के अग्रेता थे। उन्होंने भारतीय चिकित्सा परिषद, भारतीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, संक्रामक रोग अस्पताल और कोलकाता के पहले स्नातकोत्तर मेडिकल काॅलेज की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। एक राजनीतिज्ञ होने के बावजूद उन्होेंने अपने चिकित्सा पेशे को कभी नहीं छोड़ा और समाज सेवा करते हुए उन्होंने निरन्तर निःशुल्क चिकित्सा सेवा जारी रखी।

चिकित्सकों को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि समाज में चिकित्सक की भूमिका चिकित्सालय के बाहर भी महत्वपूर्ण होती है। राज्यपाल ने कहा कि एलौपेथी के साथ-साथ भारतीय आयुष चिकित्सा पद्वती को विशेषकर उत्तराखण्ड में प्रोत्साहन मिलन चाहिए। उत्तराखण्ड औषधीय वन सम्पदा से भरपूर राज्य है जहां आयुष पद्धती के परिणाम निश्चित ही सकारात्मक आयेंगे। चिकित्सा के साथ-साथ रोगों से पूर्व बचाव भी समाधान बन सकता है। जरूरी है कि सामुदायिक स्वास्थ्य रक्षा। इसके लिए हैल्थ और म्युनिसिपल अथाॅरिटी एकसाथ मिलकर प्रभावी ढंग से कार्य करें। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान की संकल्पना के पीछे स्वस्थ भारत की संकल्पना निहित है इसमें सभी सहयोगी बनें। स्वास्थ्य रक्षा  और स्वच्छ पेयजल इसमें मुख्य कारक हैं।

19 जुलाई को प्रदेश होगा वृक्षारोपण

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सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में आयोजित बैठक के दौरान निर्देश दिए कि 19 जुलाई को वृक्षारोपण को पूरे प्रदेश में अभियान के रुप में क्रियान्वित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण हेतु समस्त जनपदों एवं राज्य स्तर पर जन सहभागिता के अतिरिक्त सरकारी एवं गैर सरकारी विभागों को भी शामिल कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने नदियों के किनारों पर वृक्षारोपण, साथ-साथ वनाग्नि सुरक्षा पर भी बल दिया।
हिमालय दिवस पर विशेषज्ञों की टीम से परिचर्चा का कार्यक्रम बना लिया जाए जिसमें पर्यावरणीय बिंदुओं को प्रमुखता से उठाया जाए, बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न नदियों के पुनर्जीवित करने के प्रयास पर बल दिया। उत्तराखंड के क्षतिपूरक वनीकरण कार्य में तेजी लाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न योजनाओं के लिये भूमि हस्तांतरण के बाद दोगुना वृक्षारोपण किया जाए।
योजना के थर्ड पार्टी जांच के रूप में एफ.आर.आई. का उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मीटिंग ना हो सके, तो उपाध्यक्ष के रूप में वन मंत्री की अध्यक्षता में बैठक करा ली जाए, ताकि नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जा सकें। बैठक में कैबिनेट मंत्री श्री प्रकाश पंत ने योजना के लेखा-जोखा, मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम पर बल देते हुए कहा कि योजना का नियमित ऑडिट किया जाए। वन मंत्री डाॅ.हरक सिंह रावत ने कहा कि केंद्र सरकार की योजना में योजना की स्वीकृति के अधिकार राज्य को दिये जाने हेतु केन्द्र से पत्राचार किया जा रहा है, इससे राज्य की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य अपनी सुविधा अनुसार योजना स्वीकृत कर सकेगा।
इस योजना में 1900 करोड़ रूपये की निधि केन्द्र सरकार के पास उत्तराखण्ड राज्य में योजना को लागू करने के लिये रखी गई है।

इस भारतीय क्रिकेटर का परिवार रह रहा है मुफलिसी में

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भारतीय क्रिकेट टीम में तेज़ गेंदबाज़ी में फलक पर चमकने वाले जसप्रीत बुमराह को कौन नहीं जानता। हर फोरमेट में अपनी तेज गेंदबाजी से बल्लेबाज को क्लीन बोल्ड करने वाले जसप्रीत बुमराह के परिवार की हकीकत सुनकर आप भी रह जाएंगे दंग। वक्त की मार से परिवार किस मुफलिसी के दौर से गुजर रहा है ये देख कर आप भी कहने को हो जाएंगे मजबूर की वक्त जब बदलता है तो राजा भी रंक बन जाता है। जसप्रीत बुमराह के दादा संतोख सिंह उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के छोटे से कस्बे किच्छा में आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। किराये के टूटे फूटे कमरे में रह कर वो टैम्पू चलवाकर कर अपनी और अपने छोटे अपाहिज बेटे के साथ आजीविका चला रहे है। पेश है एक रिपोर्ट।

कभी गुजरात के अहमदाबाद मे बटवा इंडस्ट्रियल स्टेट में संतोख सिंह बुमराह का जलवा हुआ करता था। वो लग्ज़री कारो और प्लेन में सफर किया करते थे। अहमादाबाद में उनकी जेके इण्डस्ट्रीज़, जेके मशीनरी इकोमेंट प्राइवेट लिमिटेड और जेके इकोमेंट नामक फैक्ट्रियां थीं। इसके अल्वा दो सिस्टर कंसर्न गुरुनानक इंजीनियरिंग वर्क्स और अजीत फैब्रीकेटर भी थी। सारा कारोबार क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह के पिता जसवीर सिंह बुमराह संभालते थे। 2001 में बेटे की मौत से संतोख सिंह टूट गए और फैक्ट्रियां भी आर्थिक संकट से घिर गई। बैंको का कर्ज़ा निबटाने के लिये उन्हें तीनो फेक्ट्रियों को बेचना पड़ा। अपनी शानदार ज़िन्दगी का ज़िक्र करते करते संतोख सिंह की आखो में आंसू तैरने लगते हैं।

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चौरासी साल के बुज़ुर्ग संतोख सिंह बुमराह को अपनी मुफलिसी ज़िन्दगी से कोई शिकायत नहीं है,वो इसे सब कुदरत की देन मानते हैं। लेकिन अपने बेटे जसवीर सिंह के बेटे जसप्रीत को भारत की क्रिकेट टीम में तेज़ गेंदबाज़ी करते टीवी स्क्रीन पर देख कर उन्हें अपने खून पर फक्र होता है। संतोख सिंह का कहना है कि जीवन के आखरी पड़ाव में पोते को गले लगा कर प्यार कर सके। उसे आर्शीवाद दे सके। उनका अपाहिज बेटा भी अपने भतीजे से मिलने के लिये बेताब है।

क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह के दादा की आर्थिक संकट की जानकारी मिलने पर एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाकर जानकारी ली और उनको आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया।

वक्त के दिन और रात, वक्त से कल और आज, वक्त की हर शेय गुलाम, वक्त का हर शेय पे राज, वक्त की गर्दिश से है चांद तारो का निजाम, वक्त की ठोकर में है क्या हुकुमत क्या समाज, जी हां एक पुरानी फिल्म का ये गीत जसप्रीत बुमराह के परिवार पर सटीक बैठता है जिन्होने वक्त की मार को करीब से देखा है और उसको महसुस कर रहे हैं…  लेकिन जो भीं हो आज भले संतोख मुफलिसी में हो लेकिन अपने पोते को गेंदबाज़ी करते देख कर उनका दिल जवान हो जाता है। सब कुछ भूल कर वो अपने पोते से मिलने का सपना सजोये हुए है। देखना यह है कि जसप्रीत अपने दादा से मिलने कब आते हैं।

उत्तराखंड के बल्ले से अब क्रिकेटर लगाऐंगे शाॅट

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वह दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड में तैयार बल्ला भी क्रिकेट के खिलाड़ियों के हाथों में नजर आएगा। 127 इको टास्क फोर्स पहाड़ की आर्थिकी संवारने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में विलो ट्री लगा रही है। अब इस मुहिम को ‘कौशल विकास’ से भी जोड़ा जाएगा। ताकि युवाओं को क्रिकेट बैट के निर्माण में भी प्रशिक्षित किया जा सके।

127 इको टास्क फोर्स के गढ़ी कैंट स्थित मुख्यालय पहुंचे वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने विलो के अधिकाधिक रोपण को कार्ययोजना बनाने को कहा। उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध करवाने के लिए, इस प्रजाति के पेड़ की व्यवसायिक खेती करने पर आर्थिक स्थिति मजबूत होने की अपार संभावनाएं हैं। आगे इस मुहिम को कौशल विकास से जोड़ युवाओं को इसकी लकड़ी से उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

रावत ने कहा कि अखरोट, चिलगोजा व अन्य व्यवसायिक प्रजाति के पौधों को क्लस्टर के आधार पर रोपित किया जाए, ताकि इसका व्यवसायिक लाभ ग्रामीणों को मिल सके। बता दें कि क्रिकेट का बैट वाले वाले उद्योगों में विलो की भारी डिमांड है। इसके उत्पादन से पहाड़ के लोगों की आर्थिकी सुदृढ़ की सकती है। प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर के 30 मिलियन क्रिकेट के बल्लों की जरूरत होती है। इस जरूरत को पूरा करने में भारत की अहम भूमिका है।

विश्व के 80 फीसद क्रिकेट बैट भारत में ही बनाए जाते हैं। बैट बनाने के उद्योग मेरठ व जालंधर में मौजूद हैं, जिसका कारोबार सालाना 200 करोड़ से अधिक का है। खास बात यह कि इस पौधे की जड़ों में पानी को संचित रखने की क्षमता होती है, जिससे लवण युक्त भूमि की दशा सुधरने में यह प्रजाति उपयुक्त है।

अभी यह पेड़ जम्मू-कश्मीर व हिमाचल प्रदेश में पाए जाते हैं। रावत ने इस दौरान मुख्यालय परिसर में अंजीर का पौधा भी रोपा। कार्यक्रम में इको टूरिज्म डेवलपमेंट कार्पोरेशन के एमडी अनूप मलिक, 127 इको टास्क फोर्स के सीओ कर्नल एचआरएस राणा आदि उपस्थित रहे।

मानवता का परिचय देते हुए सीएम ने हादसे में बेसुध पड़े युवक को पहुंचवाया अस्पताल

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ऐसा रोज नहीं होता जब एक कार्यक्रम में जा रहे सीएम किसी को सड़क पर बेसुध देख कर अपनी गाड़ी रोक दें और अपनी कार्यक्रम से ज्यादा तरजीह किसी के स्वास्थ को दें। लेकिन शनिवार को डोईवाला में सड़क हादसे में कुछ ऐसा ही हुआ । सड़क हादसे में चोट लगने की बजह से सड़क किनारे बेसुध पड़ा युवक की सीएम ने की मदद।

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शनिवार को सहकारिता कार्यक्रम से लौटते वक्त सीएम ने सड़क के किनारे पड़े युवक को देखकर रुकवाई फ्लीट। बेहोश व्यक्ति को खुद सीएम ने उठाया।अपनी कार्मिकों को तुरंत हॉस्पिटल ले जाने के दिए निर्देश।सीएम त्रिवेंद्र ने मानवता का दिया परिचय। इसके बाद पहुंचा प्रशासनिक अमला।

रुद्रप्रयाग के डीएम की पाठशाला

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जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल के निर्देशों के क्रम में शिक्षा विभाग द्वारा 20 से 28 जून तक जनपद के 7 एकल राजकीय प्राथमिक विद्यालय (गडोरा, गंधारी, कलना, कालीमठ, सतेराखाल, सुमाड़ी, कोटी, गढोला) में ग्रीष्म कालीन कैम्प का आयोजन किया जा रहा है।

डीएम धिल्डियाल द्वारा राजकीय प्राथमिक विद्यालय सुमाड़ी के ग्रीष्म कालीन शिविर ‘‘उल्लास‘‘ का उद्घाटन किया।इस अवसर पर उन्होने बच्चों से विभिन्न विषयों के प्रश्न पूछे तथा फल, सब्जी के चित्र बनाये। बच्चों द्वारा अच्छा प्रदर्शन करने पर जिलाधिकारी ने प्रशंसा भी की। डीएम ने देखा कि डाइट के मेन्टर द्वारा पावर प्वांइट के माध्यम से गणित, अंग्रेजी आदि विषयों पर छोटी-छोटी फिल्म के माध्यम से खेल विधि द्वारा विद्यार्थियो को अंग्र्रेजी वर्णमाला, विज्ञान का ज्ञान दिया जाता है। उन्होने संयोजक को कम्प्यूटर, पेंटिग आदि का भी ज्ञान देने को कहा।

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शिविर में कक्षा 1 से 5 तक के विदयार्थियों को प्रात 7:30 बजे से 10:00 बजे तक डाइट के मेन्टर व स्थानीय स्वंय सेवक द्वारा खेल के माध्यम से पाठ्यक्रम की गतिविधियों बच्चों को सीखाई जा रही है। ग्रीष्म कालीन कैम्प में कक्षा 1 व 2 के विद्यार्थियों को फूल व पत्ते दिखाकर रंगो की पहचान, फल, सब्जी के नाम आदि व कक्षा 3,4 व 5 को विभिन्न फल, सब्जी आदि के चित्र रंग सहित बनाना, समाचार पत्र, बाल प्रत्रिकाँए पढना, श्रुतलेख लिखाना आदि गतिविधियां सिखाई जा रही है।

इस अवसर पर ग्राम प्रधान गणेशी देवी, डाइट के प्रवक्ता नरेन्द्र सिंह बिष्ट, विजय चमोला , स्वंय सेविका प्रेरणा बडोनी, ममता बडोनी, आगनबाडी कार्यकत्री सोनी देवी, पपीता देवी, स्वयं सेविका सहित छात्र-छात्रायें उपस्थित थे।