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चार धाम यात्रा में क्यों हो रहीं गिरावट?

इस साल शुरुवात से ही चार धाम यात्रा जोर पकड़ने लगी है, पहले दिन से ही देश दुनिआ के हजारों तीर्थ यात्री चार धाम यात्रा के लिए उत्तराखंड का रुख कर रहे है। लेकिन मानसून के दस्तक ने यात्रा पर ब्रेकर का काम किया है, लगातार बारिश के चलते यात्रा पर आने वाले यात्रियों की संख्या में भरी गिरावट देखी जा रही है और पर्यटन पिछले कुछ दिनों पहले से पहाड़ों पर हो रही बारिश के चलते कहीं कहीं पर यात्रा प्रभाविभाग द्वारा यात्रियों को मौसम की पल पल की अपडेट दी जा रही है।

2017 की चार धाम यात्रा अभी तक कई सालों के मुकाबले अच्छी रही है, देश विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा के लिए देवभूमि पहुंचे है लेकिन एक बार फिर मानसून ने यात्रा पर खलल डाला है। आंकड़ों की तरफ देखे तो अभी तक यमनोत्री धाम में 3 लाख 04 हजार यात्री , तो यमनोत्री धाम में 2 लाख 56 हजार यात्री, केदारनाथ धाम में 4 लाख 50 हजार और बद्रीनाथ धाम में 4 लाख 20 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच चूके है। अब मानसून के दस्तक के साथ ही चार धाम यात्रा पर इसका असर देखने को मिल रहा है। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के कारण संख्या में भी थोड़ी बहुत गिरावट देखी जा रही है। हालाकि बायोमेट्रिक अधिकारी प्रेमानंद का कहना है की इस साल की यात्रा अभी तक काफी बेहतरीन रही है मगर बारिश के कारण अब श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आयी है लेकिन सितम्बर से एक बार फिर यात्रा तेजी पकड़नी शुरू कर देगी।

2013 की आपदा के निशान अभी यात्रा मार्गो पर बिखरे पड़े है, ऐसे में पहाड़ों पर मानसून की बारिश ने एक बार फिर यात्रा को प्रभावित किया है। बावजूद इसके आस्था की इस यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों का उत्साह लगातार बना हुआ है। यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को पर्यटन विभाग द्वारा मौसम और सड़कों की लगातार जानकारी मेसेज से दी जारी है और जहाँ भी यात्रा मार्ग प्रभावित हो रहे है उन्हें जल्द से जल्द खोला जा रहा है।

मसूरी, कम्पनी गार्डन रोड में भूस्खलन

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मसूरी कम्पनी गार्डन रोड में भूस्खलन होने से मार्ग बंद हो गया है जिस कारण आने जाने वाले लोगो को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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अाज सुबह अचानक लाल बहादूर प्रशासनिक अकादमी के पास एक बडा पुश्ता ढहने के कारण रोड बंद हो गयी, अासपास के लोगों ने बताया कि यह पुश्ता केवल चार महीने पुराना हैं, जिसे सी पी डब्लू डी ने बनाया था। वही रोड बंद होने की सूचना मसूरी के स्थानीय प्रशासन को दी गई जिसपर तत्काल काम करते हुए एसडीएम मसूरी मिनाक्षी पटवाल के द्वारा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को जेसीबी के साथ मौके पर पहुचेने के निर्देश दिये गयें अौर मार्ग को यातायात के लिये सुचारू करना गया जिससे लोगो को दिक्कता ना आये।

चेन चुराने वाली महिला चोर गिरफ्तार

ऋषिकेश-रायवाला छेत्र में दिनदहाड़े एक महिला के गले से सोने की चैन चुराने वाली शातिर महिला चोर को आखिरकार पुलिस ने धर दबोचा है।आपको बता दे की ऋषिकेश-रायवाला चैत्र में आये दिन चेन चोरी की घटनाएं सामने आती थी जिस कारण पुलिस प्रशाशन पर भी सवाल खड़े हो रहे थे लेकिन इस बार पुलिस ने महिला चोर को पकड़ लिया। महिला के पास से चुराए सोने के चेन बरामद हुए है।

जानकारी के अनुसार रविवार को रायवाला थाना छेत्र में एक महिला ने आकर पुलिस को सूचना दी कि वो अपने रिश्तेदार के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए रायवाला से विक्रम में बैठकर देहरादून जा रही थी । रास्ते से एक अन्य महिला विक्रम में सवार हुई और उसके बगल में बैठ गई। जब श्रीमती विमला देवी नेपाली तिराहे पर पहुंची तो देखा कि उनके गले से उनकी करीब 2 तोले की सोने की चेन गायब थी।

जिसके बाद उन्होंने पुलिस को इस बारे में जानकारी दी और पुलिस ने महिला चोर को पकड़ने के लिए चेकिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है की महिला उत्तरप्रदेश की रहने वाली है और उस की पहचान वंदना सिंह हु है।  फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज करके महिला चोर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है और इस बात की छान बीन चल रही है की महिला चोर का नेटवर्क कहाँ कहाँ तक फैला हुआ है। पुलिस को उम्मीद है की इस महिला के तार अंतरराज्य गिरोह के साथ जुड़े हुए है जो लगातार उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश में टप्पेबाजी की घटना को अंजाम दे रहे है।

 

गुटों के बीच हुई झड़प में दो घायल

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दो गुटों के बीच मामूली बात को लेकर हुई झड़प ने देखते ही देखते गंभीर रूप ले लिया।झड़प में दो युवक घायल हो गए जिन्हें इलाज के लिए सिनर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया।बताया जा रहा है कि रेसकोर्स में रविवार की देर रात दो लोगो में किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। यहां एक पक्ष ने दूसरे पर चेन छीनने और मारपीट करने का आरोप लगाते हुए डालनवाला कोतवाली के आराघर चौकी पर तहरीर दी। मगर इसके कुछ देर बाद ही दोनों गुटों के लोगो का बसन्त विहार में आमना-सामना हो गया। यहां भी दोनों तरफ से आए युवकों में मारपीट हो गई। थानाध्यक्ष बसन्त विहार संजय मिश्रा ने बताया कि एक पक्ष के लोग थाने आए थे। तहरीर लेकर जांच शुरू कर दी गई है। घायलो को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। मारपीट किस बात को लेकर हुई, अभी इसका पता नहीं चल सका है। चर्चा है कि घायलो में से एक पंजाब के किसी नेता का पुत्र है। फिलहाल पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

आखिर क्यों छेड़ दी है इस विधायक ने बीएसएनएल के खिलाफ जंग

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अपनी सर्विस और काम की तरफ रवैये को लेकर सरकारी कंपनियां हमेशा ही आम लोगों को परेशान करती रही हैं। उत्तराखंड के बारे में बात करें तो पहाड़ों में संचार व्यवस्था दुरुस्त होना यहां की सुविधा नहीं जरूरत है। ये और महत्वपूर्ण तब हो जाती है जबकि राज्य में इस समय बारिशों का मौसम आ गया है और चारधाम यात्रा भी चल रही है। यात्रा शुरू होने के समय सभी कंपनियों ने पहाड़ों में मोबाइल नेटवर्क होने के दावे तो बहुत किये लेकिन हकीकत में ये दावे सच्चाई से कोसों दूर साबित हो रहे हैं।

अब केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है। रावत ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट डाला और कहा कि न सिर्फ पहाड़ों में मोबाइल कवरेज के कंपनी के दावे झूठे हैं बल्कि कंमपनी और उसके अधिकारी सरकारी होने के बावजूद खुद सरकार के नुमाइंदो की नहीं सुनते हैं। इसके बारे में रावत कहते हैं कि “कुछ समय पहले पौड़ी से सांसद भुवनचंद्र खंडूरी ने इलाके में विकास के कामों की समीक्षा बैठक बुलाई ती जिसमें बीएसएनएल के अधिकारियों ने आना जरूरी नही समझा।”

रावत ने कहा है कि बीएसएनएल की जवाबदेही तय करना उनकी जिम्मेदारी है। और इसलके लिये उन्होने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों को कंपनी के सेलयूलर नेटवर्क से जुडी शिकायते और सुझाव उनको भेजने के लिये कहा है। इसके बाद रावत इन शिकायतों को लेकर कंपनी के आला अधिकारियों से दो दो हाथ करने के मूड में हैं।

बनने के कुछ ही घंटो में गौरीकुंड हाईवे पर काजवे ढहा

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गौरीकुंड हाईवे पर विजयनगर में निर्माणाधीन काजवे का लेंटर डालने के कुछ घंटे बाद ही टूट कर नीचे गिर गया। इसी बीच विधायक केदारनाथ भी मौके पर पहुंचे और डीएम से उच्चस्तरीय जांच करने को कहा, इस पर डीएम ने एसडीएम रुद्रप्रयाग मुक्ता मिश्र को मौके पर भेजा। एसडीएम ने निर्माण सामग्री के सैंपल ले लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है।

केदारनाथ त्रासदी में गौरीकुंड हाईवे को भारी क्षति पहुंची थी, विजयनगर में 300 मीटर हाईवे पूरी तरह बह गया था। यहां पर अस्थाई रूप से आवाजाही तो हो रही है, लेकिन स्थाई व्यवस्था के लिए निर्माण कार्य चल रहा है। यहां पर बीस मीटर से अधिक ऊंची दीवार लगाई जा रही है, जो सौ से डेढ़ सौ मीटर तक है। यहां पर 42 करोड़ खर्च का किया जा रहा है। इसी में विजयनगर में गदेरे में हाईवे पर काजवे का निर्माण किया जा रहा है, गत देर शाम इस पर एनएच लोनिवि से लेंटर डाला गया था, और कुछ समय बाद ही यह टूट कर नीचे गिर गया। इसकी सूचना पर रविवार सुबह केदारनाथ विधायक मनोज रावत मौके पर पहुंचे, और डीएम से इसकी मजिस्ट्रेटी जांच को कहा, साथ ही एनएच पर घटिया निर्माण करने का आरोप भी लगाया। डीएम मंगेश घिल्डियाल ने एसडीएम सदर मुक्ता मिश्र को मौके पर भेजा, एसडीएम आरईएस के अधिशासी अभियंता के साथ मौके पर पहुंची तथा निर्माण सामग्री का सैंपल लिया है। वहीं एनएच के अधिशासी अभियंता प्रवीन कुमार ने कहा कि लेंटर के दौरान ही ठेकेदार के कच्ची बल्ली लगाने की शिकायत मिल चुकी थी, बल्ली को हटा कर मजबूत बल्ली लगाने को कहा गया था, जिसे वह हटा रहा था, इस बीच लेंटर नीचे गिर गया।

केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने कहा कि विकास कार्यों में भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक ने कहा कि इस संबंध में डीएम से उनकी वार्ता हुई है, और भावनाओं से जिलाधिकारी को अवगत करा दिया है।

1962 के युद्ध के बाद यहां की सैर पर लगा बैन अब हटा लिया गया

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उत्तरकाशी जिले के हर्सिल कस्बे को इन लाइन (आंतरिक सुरक्षा रेखा) से मुक्त कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने 19 जून को इस आशय के आदेश जारी कर दिए। इसी के साथ अब विदेशी सैलानी भी प्रशासन की अनुमति से भारत-चीन सीमा पर स्थित नेलांग घाटी की सैर कर सकेंगे।दरअसल, 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बने हालात के मद्देनजर भारत सरकार ने उत्तरकाशी के इनर लाइन क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया था। लंबे समय से उत्तरकाशी के होटल और ट्रैकिंग संचालक इस प्रतिबंध को हटाने की मांग कर रहे थे। इस पर वर्ष 2014 में गंगोत्री नेशनल पार्क और स्थानीय प्रशासन ने प्रस्ताव बनाकर गृह मंत्रालय को भेजा।

2015 में गृह मंत्रालय ने भारतीयों को नेलांग जाने की अनुमति दे दी। हालांकि विदेशियों पर प्रतिबंध बरकरार रहा। अप्रैल में जिला प्रशासन ने इनर लाइन के संबंध में शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड के मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र भेज हर्षिल को इनर लाइन मुक्त करने का आग्रह किया। इस पर गृह मंत्रालय ने  जिला प्रशासन से हर्षिल के बारे में आवश्यक दस्तावेज मांगे। प्रशासन के दस्तावेज भेजने के बाद आदेश जारी कर दिए गए। आदेश के मुताबिक इनर लाइन अब हर्षिल कस्बे से 50 मीटर दूर होगी। हालांकि इसको स्थानीय प्रशासन ही चिह्नित करेगा।

आदेश के अनुसार देशी-विदेशी सैलानी नेलांग घाटी जा तो सकेंगे, लेकिन इनर लाइन क्षेत्र में उन्हें रात बिताने की अनुमति नहीं होगी। उत्तरकाशी से 75 किलोमीटर दूर हर्षिल के इनर लाइन से बाहर होने से पर्यटक यहां ठहर सकेंगे।उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि “हालांकि प्रशासन को अभी इस बारे में आदेश नहीं मिला है, लेकिन गृह मंत्रालय को सभी रिपोर्ट भेज दी गईं थीं।” उन्होंने कहा कि आदेश मिलने पर अन्य औपचारिकताएं भी पूरी कर ली जाएंगी।

सराकार के इस कदम का लोग भी स्वागत कर रहे हैं। उत्तराखंड को करीब से देखने वाले गणेश सैली क कहना है कि “ये काम बहुत पहले ही कर देना चाहिये था। सैलानियों पर पाबंदी के कारण इस इलाके में पर्यटन  उद्योग पनप नहीं पा रहा था। हांलाकि अब ये उम्मीद की जा सकती है कि यहां लोगों को रोजगार और कमाई के और साधन मिल सकेंगे”

दूसरे देशों की सीमाओं के नजदीक स्थित वह क्षेत्र, जो सामरिक दृष्टि से महत्व रखता हो, इनर लाइन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में सिर्फ स्थानीय लोग ही प्रवेश कर सकते हैं। उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले के अलावा चमोली व पिथौरागढ़ जिलों में भी चीन सीमा से लगे इनर लाइन क्षेत्र हैं।

नाबार्ड के भरोसे दो लाख लोगों की प्यास

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प्रदेश के दो लाख लोगों की प्यास बुझाने को अब पेयजल निगम नाबार्ड का मुंह ताक रहा है। पांच साल से अधर में लटकी एनआरडीडब्ल्यूपी (राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन) व राज्य सेक्टर के तहत स्वीकृत नौ योजनाओं को बजट का इंतजार है। अब इनको पूरा करने के लिए पेयजल निगम ने नाबार्ड का दरवाजा खटखटाया है। नाबार्ड के तहत इन योजनाओं को पूरा करने के लिए निगम ने शासन को बजट का प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। निगम ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही शासन से स्वीकृति मिल जाएगी, जिसके बाद लंबित पड़ी इन नौ योजनाओं को पूरा कर लिया जाएगा। एनआरडीब्ल्यूपी के तहत पेयजल निगम ने पांच साल पहले प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 192.63 करोड़ रुपये की लागत से नौ योजनाओं का निर्माण शुरू किया था। इन योजनाओं को पूरा करने के लिए पेयजल निगम को 39.53 करोड़ रुपये ही दिया गया। इससे इन योजनाओं को लगभग 10 फीसद ही पूरा किया जा सका। इसके बाद केंद्र की ओर से कोई बजट जारी नहीं किया गया। इसके बाद से योजनाएं अधर में लटकी हैं। योजनाओं के पूरा न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की करीब दो लाख की आबादी पानी का संकट झेल रही है। 

पेयजल निगम इस संबंध में एक दर्जन से ज्यादा पत्र केंद्र को भेज चुका है, लेकिन पैसा जारी नहीं किया गया। चूंकि, अब केंद्र की ओर से एनआरडीडब्ल्यूपी का बजट काफी कम कर दिया है तो फिलहाल इस मद से योजनाओं को पूरा कर पाना संभव नहीं दिख रहा। इस कारण ही निगम ने अब योजनाओं को पूरा करने के लिए 153.10 करोड़ रुपये की नाबार्ड से मांग की है।
जल संस्थान के मुख्य अभियंता प्रभात राज ने बताया कि ये नौ योजनाएं एनआरडीडब्ल्यूपी व राज्य सेक्टर के तहत स्वीकृत हुई थी, लेकिन बजट के अभाव में इन योजनाओं को पूरा नहीं किया जा सका। अब निगम नाबार्ड के तहत योजनाओं का कार्य पूरा करने का प्रयास कर रहा है।

जीएसटी के कारण इस इलाके के लोगों को अंग्रेजों के जमाने के कर से मिली मुक्ति

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जीएसटी लागू होने के साथ ही देहरादून के चकराता वासियों को अंग्रेजों के जमाने के कर से मुक्ति मिल गई है। साथ ही 148 साल पुरानी परंपरा भी खत्म हो गई है। अंग्रेजों के जमाने के कर से मुक्ति मिलने से यहां के लोग खुश हैं। उन्होंने शनिवार को जमकर खुशी मनाई। पूरे भारत में एकमात्र चकराता छावनी ऐसी थी, जहां आजादी के बाद भी चुंगी वसूली जाती थी।

आज से छावनी परिषद द्वारा वसूले जाने वाली चुंगी से लोगों को निजात मिल गई है। 1869 में चकराता कैंट में अंग्रेजी हुकूमत छावनी क्षेत्र में आने वाले समान में कर वसूलती थी, 1947 में भारत आजाद हुआ, तो बाकी के छावनी परिषद में चुंगी समाप्त हो गई, लेकिन एक मात्र चकराता ऐसा कैंट रहा जिसमें नमक से लेकर नहीं घरेलू सम्मान तक की कीमत पर 3-5 प्रतिशत कर वसूली की जाती है।

अलग से कर वसूली जाने के कारण चकराता में अन्य स्थानों के अपेक्षा में अधिक दाम हैं। यही नहीं छावनी क्षेत्र में से गुजरने वाले हर वाहन से बहती के रूप में कर लिए जाने के कारण उन्होंने यहां से गुजरना भी बंद कर दिया है। चकराता क्षेत्र में लगने वाली कर की व्यवस्था को समाप्त करने के लिए क्षेत्र के व्यापारी ने कई बार आंदोलन किए, इतना ही नहीं अदालत का दरवाजा भी खटखटाया था।

तीस हजार परिवारों को रसोई गैस का इंतजार

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जीएसटी लागू होने के बाद अभी तक तेल कंपनियों का साफ्टवेयर अपडेट नहीं हो पाया। इसके चलते दून समेत पूरे गढ़वाल मंडल में शनिवार से अभी तक रसोई गैस की आपूर्ति ठप रही। इस दौरान गढ़वाल मंडल में करीब तीस हजार सिलेंडरों की सप्लाई नहीं हो पाई, जिस कारण उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

तेल कंपनियां हरिद्वार स्थित लंढौरा प्लांट से गैस की आपूर्ति करता है। दून में हर दिन जहां 18 हजार सिलेंडर की आपूर्ति की जाती है वहीं, 12 हजार सिलेंडर हर दिन गढ़वाल मंडल के विभिन्न जिलों में आपूर्ति किए जाते हैं। चूंकि, एक जुलाई से जीएसटी लागू हो गया है तो इसी के अनुरूप तेल कंपनियों के साफ्टवेयर भी अपडेट होने हैं लेकिन, शनिवार को कंपनी का साफ्टवेयर अपडेट नहीं हो पाया। जिस कारण गैस एजेंसियों की ओर से कंपनी को भेजे गए गैस के ऑर्डर साफ्टवेयर में दर्ज नहीं हो पाए। ऐसे में एजेंसियों की गैस की गाड़ियां ही लोड नहीं हुई। इस कारण सप्लाई ठप रही।
उधर, गैस के लिए उपभोक्ता सुबह से ही एजेंसियों को फोन लगाने लगे थे, लेकिन एजेंसियों ने शनिवार को गैस भेजने से हाथ खड़े कर दिए हालांकि, कुछ एजेंसियों पर शुक्रवार का स्टॉक बचा था, लेकिन दोपहर से पहले वह भी खत्म हो गया। इसके अलावा भी कई उपभोक्ता गैस लेने के लिए एजेंसियों पर ही पहुंच गए, लेकिन वहां भी गैस न होने के कारण उन्हें मायूस ही लौटना पड़ा। रविवार को छुट्टी रहने के कारण प्लांट बंद रहता है। जिस कारण रविवार को भी गैस की गाड़ियां नहीं भरी जाएगी। इससे गढ़वाल मंडल में रसोई गैस की दिक्कत और बढ़नी तय है। सोमवार को गाड़ियां लोड होने के बाद मंगलवार को ही आपूर्ति हो पाएगी।
दून एलपीजी एसोसिएशन के अध्यक्ष चमन लाल ने बताया कि साफ्टवेयर अपडेट नहीं होने के कारण गाड़ियां नहीं भरी गई। एसोसिएशन लगातार प्लांट से संपर्क कर रही है। जैसे ही साफ्टवेयर अपडेट होता है गैस आनी शुरू हो जाएगी।