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जाॅर्ज ऐवरस्ट के घर को बचाने आगे आये उनके रिश्तेदार

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अपने आप को सर जाॅर्ज ऐवरस्ट का रिश्तेदार बताने वाले लंदन के व्यापारी चार्ली गार्टन जोन्स ने मसूरी स्थित ऐवरस्ट के घर का जीर्णोधार करने की पेशकश की है। इसके साथ ही उन्होने इस घर को एक संग्राहलय बनाने के लिये सर एवरेस्ट के जीवनकाल में प्रयोग किये गये उपकरणों को भी देने की बात कही है। ये वो उपकरण हैं जो सर ऐवरस्ट ने ब्रिटिश राज की सीमाऐं नापने और पहाड़ों की ऊंचाई नापने के लिये किये गये सर्वे में इस्तेमाल किये थे।
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गौरतलब है कि सर ऐवरस्ट 19वीं सदी के पहले भाग में करीब एक दशक के लिये मसूरी में रहे थे। 1832 से 1843 के बीच अपनी रिहाईश के दौरान वो पार्क एस्टेट नाम के बंगले में रहे थे जो कि मसूरी के हाथीपांव इलाके में है। लेकिन सालो से बंगला सरकारी उदासीनता की मार झेल रहा है। हांलाकि राज्य सरकार ने इस बंगले का कब्जा ले लिया है लेकिन इस धरोहर को बचाने के लिये कुछ खास नहीं किया गया।
गार्टन जोन्स कहते हैं कि बंगले की हालात के बारे में उन्हें खबरों से पता चला, इसके बाद उन्होने मसूरी में अपने दोस्त और इतिहासकार गोपाल भारद्वाज को लिखा कि वो इस धरोहर को बचाना चाहेंगे। गोपाल भारद्वाज ने गार्टन का ये प्रस्ताव राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से साझा किया। सतपाल महाराज ने भी इस बाबत प्रस्ताव मिलने की बात मानी और कहा कि सरकार को खुशी होगी अगर लोग आगे आकर ऐसी धरोहरों को बचाने का बीड़ा उठाये। उन्होने कहा कि जाॅर्ज ऐवरेस्ट के जीवन को समर्पित एक प्रदर्शनी,  4 जुलाई जो कि इस महान पर्वतारोही का 227 वां जन्मदिन है मसूरी में लगाई जा रही है।
भारद्वाज के मुताबिक गार्टन तो 4 जुलाई के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकेंगे लेकिन उन्होने कहा है कि वो आधिकारिक रूप से सरकार के पत्र का इंतजार करेंगे, जिसके बाद जाॅर्ज ऐवरस्ट के इस घर और राज्य की इस अमूल्य धरोहर को बचाने का काम शुरू किया जा सके।

नीदरलैंड के छात्रों को टिप्स देंगे इस प्राइमरी स्कूल के छात्र

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सरकारी स्कूलों की बदहाली की चर्चाओं के बीच एक सुखद खबर दस्तक दे रही है। हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र के टाटवाला गांव में एक ऐसा भी प्राइमरी स्कूल है, जिसमें नीदरलैंड के छात्र कुछ सीखने और सिखाने आ रहे हैं। विदेशी छात्रों के दो दल इसी महीने श्यामपुर के टाटवाला प्राइमरी स्कूल में रहेंगे। इस दौरान नीदरलैंड और भारतीय छात्र एक दूसरे की संस्कृति से रूबरू होंगे। साथ ही पढ़ाई को लेकर अपने-अपने अनुभव भी साझा करेंगे। स्कूल में विदेशी मेहमानों के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
नीदरलैंड में पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप के तौर पर बच्चों को आरामदायक जीवन से अलग ग्रास रूट लेवल पर व्यवहारिक जानकारियां दी जाती हैं। ग्लोबल कल्चर एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत छात्रों के दो अलग अलग दल 21 जुलाई और 25 जुलाई को श्यामपुर के टाटवाला स्थित राजकीय प्राइमरी स्कूल पहुंचेंगे। खास बात यह है कि प्रवास के दौरान नीदरलैंड के छात्र स्कूल में ही रुकेंगे और विभिन्न खर्चों में कटौती कर जमा हुई राशि को विद्यालय विकास में खर्च किया जाएगा। दूसरी खास बात यह है कि बच्चे स्कूल में श्रमदान भी करेंगे।

गांव में पौधरोपण, स्वच्छता और गंगा स्वच्छता को लेकर जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। विद्यालय स्टाफ और छात्र छात्राएं विदेशी छात्रों के आगमन को लेकर काफी उत्साहित हैं। प्रधानाध्यापक घनश्याम सिंह का कहना है कि स्थानीय और विदेशी बच्चों का यह साझा अभियान विद्यालय और गांव के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

क्यों अपनी साख खो रहा है हरिद्वार का ये स्कूल?

आधुनिकता के इस दौर में हम अपने सामाजिक मूल्यों को दिन प्रतिदिन कितनी तेजी से खोते जा रहे हैं अनेकों ऐसे उदाहरण हमें अपने आसपास खूब देखने को मिलते हैं। हम हर रोज नई सामाजिक संरचना की ओर एक कदम बढ़ाते हैं। हमारी जिम्मेदारी तब और अधिक बढ़ जाती है की जब यह प्रश्न विचारनीय होता है कि हमारी पूर्व की पीढ़ियों ने हमें कैसा समाज दिया था और हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसा समाज छोड़कर जा रहे हैं।

पौराणिक काल से ही गुरु-शिष्य की परंपरा आदरणीय, पूजनीय, सम्मानीय रही है। सेंट मेरी स्कूल, ज्वालापुर, हरिद्वार की चर्चा आजकल विवादों के कारण ही हो रही है, विवादों के कारण अखाड़ा बन चुका ये शिक्षा का मंदिर ऐसा स्वरूप भी रखता है जोकि अन्य शिक्षण संस्थाओं में देखने को नहीं मिलता, सेंट मेरी वेलफेयर सोसाइटी का गठन सेंट मैरी स्कूल के अधिकांश शिक्षक शिक्षिकाओं के द्वारा किया गया था।

इस वेलफेयर सोसाइटी का गठन भले ही स्कूल मैनेजमेंट की आंखों की किरकरी  बना हो परंतु इस वेलफेयर सोसाइटी के द्वारा किए गए अभी तक के कुछ महत्वपूर्ण कार्य दूसरी शिक्षण संस्थाओं के लिए एक नजीर बनकर सार्थक उदाहरण पेश कर रहे हैं। चारु पाहवा, हिना पाहवा को दो दो वर्षों तक स्कूल की फीस के रूप में वित्तीय सहायता दी गई, मनोज कुमार का  बैंक में अकाउंट खुलवा कर वित्तीय सहायता दी गई, सरवीना जोकि सेंट मेरी स्कूल की ही शिक्षिका है उनका ऐसे समय पर सहयोग किया गया जब उनके पति कैंसर की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे।

उन्हें 85000 रुपए की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई जैसे न जाने कितने उदाहरण है जिनकी सहायता चाहे वह आर्थिक रूप से रही हो या शैक्षणिक रूप से रही हो इस सोसाइटी के सदस्यों व पदाधिकारियों द्वारा की गई है. ईसाई मिशनरी की इस संस्था के मूल्य उद्देश्य व गुरु शिष्य परंपरा को चरितार्थ करने वाले शिक्षक साधुवाद व सम्मान के पात्र हैं लेकिन वक्त का खेल देखिए सेंट मैरी स्कूल का नाम रोशन करने वाले निस्वार्थ सेवा भाव अपनी सेवा देने वाले शिक्षक आज सेंट मेरी स्कूल मैनेजमेंट को साजिशकर्ता व अयोग्य नजर आ रहे हैं.

चार धाम यात्रा में क्यों हो रहीं गिरावट?

इस साल शुरुवात से ही चार धाम यात्रा जोर पकड़ने लगी है, पहले दिन से ही देश दुनिआ के हजारों तीर्थ यात्री चार धाम यात्रा के लिए उत्तराखंड का रुख कर रहे है। लेकिन मानसून के दस्तक ने यात्रा पर ब्रेकर का काम किया है, लगातार बारिश के चलते यात्रा पर आने वाले यात्रियों की संख्या में भरी गिरावट देखी जा रही है और पर्यटन पिछले कुछ दिनों पहले से पहाड़ों पर हो रही बारिश के चलते कहीं कहीं पर यात्रा प्रभाविभाग द्वारा यात्रियों को मौसम की पल पल की अपडेट दी जा रही है।

2017 की चार धाम यात्रा अभी तक कई सालों के मुकाबले अच्छी रही है, देश विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा के लिए देवभूमि पहुंचे है लेकिन एक बार फिर मानसून ने यात्रा पर खलल डाला है। आंकड़ों की तरफ देखे तो अभी तक यमनोत्री धाम में 3 लाख 04 हजार यात्री , तो यमनोत्री धाम में 2 लाख 56 हजार यात्री, केदारनाथ धाम में 4 लाख 50 हजार और बद्रीनाथ धाम में 4 लाख 20 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच चूके है। अब मानसून के दस्तक के साथ ही चार धाम यात्रा पर इसका असर देखने को मिल रहा है। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के कारण संख्या में भी थोड़ी बहुत गिरावट देखी जा रही है। हालाकि बायोमेट्रिक अधिकारी प्रेमानंद का कहना है की इस साल की यात्रा अभी तक काफी बेहतरीन रही है मगर बारिश के कारण अब श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आयी है लेकिन सितम्बर से एक बार फिर यात्रा तेजी पकड़नी शुरू कर देगी।

2013 की आपदा के निशान अभी यात्रा मार्गो पर बिखरे पड़े है, ऐसे में पहाड़ों पर मानसून की बारिश ने एक बार फिर यात्रा को प्रभावित किया है। बावजूद इसके आस्था की इस यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों का उत्साह लगातार बना हुआ है। यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को पर्यटन विभाग द्वारा मौसम और सड़कों की लगातार जानकारी मेसेज से दी जारी है और जहाँ भी यात्रा मार्ग प्रभावित हो रहे है उन्हें जल्द से जल्द खोला जा रहा है।

मसूरी, कम्पनी गार्डन रोड में भूस्खलन

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मसूरी कम्पनी गार्डन रोड में भूस्खलन होने से मार्ग बंद हो गया है जिस कारण आने जाने वाले लोगो को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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अाज सुबह अचानक लाल बहादूर प्रशासनिक अकादमी के पास एक बडा पुश्ता ढहने के कारण रोड बंद हो गयी, अासपास के लोगों ने बताया कि यह पुश्ता केवल चार महीने पुराना हैं, जिसे सी पी डब्लू डी ने बनाया था। वही रोड बंद होने की सूचना मसूरी के स्थानीय प्रशासन को दी गई जिसपर तत्काल काम करते हुए एसडीएम मसूरी मिनाक्षी पटवाल के द्वारा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को जेसीबी के साथ मौके पर पहुचेने के निर्देश दिये गयें अौर मार्ग को यातायात के लिये सुचारू करना गया जिससे लोगो को दिक्कता ना आये।

चेन चुराने वाली महिला चोर गिरफ्तार

ऋषिकेश-रायवाला छेत्र में दिनदहाड़े एक महिला के गले से सोने की चैन चुराने वाली शातिर महिला चोर को आखिरकार पुलिस ने धर दबोचा है।आपको बता दे की ऋषिकेश-रायवाला चैत्र में आये दिन चेन चोरी की घटनाएं सामने आती थी जिस कारण पुलिस प्रशाशन पर भी सवाल खड़े हो रहे थे लेकिन इस बार पुलिस ने महिला चोर को पकड़ लिया। महिला के पास से चुराए सोने के चेन बरामद हुए है।

जानकारी के अनुसार रविवार को रायवाला थाना छेत्र में एक महिला ने आकर पुलिस को सूचना दी कि वो अपने रिश्तेदार के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए रायवाला से विक्रम में बैठकर देहरादून जा रही थी । रास्ते से एक अन्य महिला विक्रम में सवार हुई और उसके बगल में बैठ गई। जब श्रीमती विमला देवी नेपाली तिराहे पर पहुंची तो देखा कि उनके गले से उनकी करीब 2 तोले की सोने की चेन गायब थी।

जिसके बाद उन्होंने पुलिस को इस बारे में जानकारी दी और पुलिस ने महिला चोर को पकड़ने के लिए चेकिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है की महिला उत्तरप्रदेश की रहने वाली है और उस की पहचान वंदना सिंह हु है।  फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज करके महिला चोर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है और इस बात की छान बीन चल रही है की महिला चोर का नेटवर्क कहाँ कहाँ तक फैला हुआ है। पुलिस को उम्मीद है की इस महिला के तार अंतरराज्य गिरोह के साथ जुड़े हुए है जो लगातार उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश में टप्पेबाजी की घटना को अंजाम दे रहे है।

 

गुटों के बीच हुई झड़प में दो घायल

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दो गुटों के बीच मामूली बात को लेकर हुई झड़प ने देखते ही देखते गंभीर रूप ले लिया।झड़प में दो युवक घायल हो गए जिन्हें इलाज के लिए सिनर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया।बताया जा रहा है कि रेसकोर्स में रविवार की देर रात दो लोगो में किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। यहां एक पक्ष ने दूसरे पर चेन छीनने और मारपीट करने का आरोप लगाते हुए डालनवाला कोतवाली के आराघर चौकी पर तहरीर दी। मगर इसके कुछ देर बाद ही दोनों गुटों के लोगो का बसन्त विहार में आमना-सामना हो गया। यहां भी दोनों तरफ से आए युवकों में मारपीट हो गई। थानाध्यक्ष बसन्त विहार संजय मिश्रा ने बताया कि एक पक्ष के लोग थाने आए थे। तहरीर लेकर जांच शुरू कर दी गई है। घायलो को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। मारपीट किस बात को लेकर हुई, अभी इसका पता नहीं चल सका है। चर्चा है कि घायलो में से एक पंजाब के किसी नेता का पुत्र है। फिलहाल पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

आखिर क्यों छेड़ दी है इस विधायक ने बीएसएनएल के खिलाफ जंग

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अपनी सर्विस और काम की तरफ रवैये को लेकर सरकारी कंपनियां हमेशा ही आम लोगों को परेशान करती रही हैं। उत्तराखंड के बारे में बात करें तो पहाड़ों में संचार व्यवस्था दुरुस्त होना यहां की सुविधा नहीं जरूरत है। ये और महत्वपूर्ण तब हो जाती है जबकि राज्य में इस समय बारिशों का मौसम आ गया है और चारधाम यात्रा भी चल रही है। यात्रा शुरू होने के समय सभी कंपनियों ने पहाड़ों में मोबाइल नेटवर्क होने के दावे तो बहुत किये लेकिन हकीकत में ये दावे सच्चाई से कोसों दूर साबित हो रहे हैं।

अब केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है। रावत ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट डाला और कहा कि न सिर्फ पहाड़ों में मोबाइल कवरेज के कंपनी के दावे झूठे हैं बल्कि कंमपनी और उसके अधिकारी सरकारी होने के बावजूद खुद सरकार के नुमाइंदो की नहीं सुनते हैं। इसके बारे में रावत कहते हैं कि “कुछ समय पहले पौड़ी से सांसद भुवनचंद्र खंडूरी ने इलाके में विकास के कामों की समीक्षा बैठक बुलाई ती जिसमें बीएसएनएल के अधिकारियों ने आना जरूरी नही समझा।”

रावत ने कहा है कि बीएसएनएल की जवाबदेही तय करना उनकी जिम्मेदारी है। और इसलके लिये उन्होने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों को कंपनी के सेलयूलर नेटवर्क से जुडी शिकायते और सुझाव उनको भेजने के लिये कहा है। इसके बाद रावत इन शिकायतों को लेकर कंपनी के आला अधिकारियों से दो दो हाथ करने के मूड में हैं।

बनने के कुछ ही घंटो में गौरीकुंड हाईवे पर काजवे ढहा

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गौरीकुंड हाईवे पर विजयनगर में निर्माणाधीन काजवे का लेंटर डालने के कुछ घंटे बाद ही टूट कर नीचे गिर गया। इसी बीच विधायक केदारनाथ भी मौके पर पहुंचे और डीएम से उच्चस्तरीय जांच करने को कहा, इस पर डीएम ने एसडीएम रुद्रप्रयाग मुक्ता मिश्र को मौके पर भेजा। एसडीएम ने निर्माण सामग्री के सैंपल ले लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है।

केदारनाथ त्रासदी में गौरीकुंड हाईवे को भारी क्षति पहुंची थी, विजयनगर में 300 मीटर हाईवे पूरी तरह बह गया था। यहां पर अस्थाई रूप से आवाजाही तो हो रही है, लेकिन स्थाई व्यवस्था के लिए निर्माण कार्य चल रहा है। यहां पर बीस मीटर से अधिक ऊंची दीवार लगाई जा रही है, जो सौ से डेढ़ सौ मीटर तक है। यहां पर 42 करोड़ खर्च का किया जा रहा है। इसी में विजयनगर में गदेरे में हाईवे पर काजवे का निर्माण किया जा रहा है, गत देर शाम इस पर एनएच लोनिवि से लेंटर डाला गया था, और कुछ समय बाद ही यह टूट कर नीचे गिर गया। इसकी सूचना पर रविवार सुबह केदारनाथ विधायक मनोज रावत मौके पर पहुंचे, और डीएम से इसकी मजिस्ट्रेटी जांच को कहा, साथ ही एनएच पर घटिया निर्माण करने का आरोप भी लगाया। डीएम मंगेश घिल्डियाल ने एसडीएम सदर मुक्ता मिश्र को मौके पर भेजा, एसडीएम आरईएस के अधिशासी अभियंता के साथ मौके पर पहुंची तथा निर्माण सामग्री का सैंपल लिया है। वहीं एनएच के अधिशासी अभियंता प्रवीन कुमार ने कहा कि लेंटर के दौरान ही ठेकेदार के कच्ची बल्ली लगाने की शिकायत मिल चुकी थी, बल्ली को हटा कर मजबूत बल्ली लगाने को कहा गया था, जिसे वह हटा रहा था, इस बीच लेंटर नीचे गिर गया।

केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने कहा कि विकास कार्यों में भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक ने कहा कि इस संबंध में डीएम से उनकी वार्ता हुई है, और भावनाओं से जिलाधिकारी को अवगत करा दिया है।

1962 के युद्ध के बाद यहां की सैर पर लगा बैन अब हटा लिया गया

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उत्तरकाशी जिले के हर्सिल कस्बे को इन लाइन (आंतरिक सुरक्षा रेखा) से मुक्त कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने 19 जून को इस आशय के आदेश जारी कर दिए। इसी के साथ अब विदेशी सैलानी भी प्रशासन की अनुमति से भारत-चीन सीमा पर स्थित नेलांग घाटी की सैर कर सकेंगे।दरअसल, 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बने हालात के मद्देनजर भारत सरकार ने उत्तरकाशी के इनर लाइन क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया था। लंबे समय से उत्तरकाशी के होटल और ट्रैकिंग संचालक इस प्रतिबंध को हटाने की मांग कर रहे थे। इस पर वर्ष 2014 में गंगोत्री नेशनल पार्क और स्थानीय प्रशासन ने प्रस्ताव बनाकर गृह मंत्रालय को भेजा।

2015 में गृह मंत्रालय ने भारतीयों को नेलांग जाने की अनुमति दे दी। हालांकि विदेशियों पर प्रतिबंध बरकरार रहा। अप्रैल में जिला प्रशासन ने इनर लाइन के संबंध में शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड के मुख्य सचिव एस. रामास्वामी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र भेज हर्षिल को इनर लाइन मुक्त करने का आग्रह किया। इस पर गृह मंत्रालय ने  जिला प्रशासन से हर्षिल के बारे में आवश्यक दस्तावेज मांगे। प्रशासन के दस्तावेज भेजने के बाद आदेश जारी कर दिए गए। आदेश के मुताबिक इनर लाइन अब हर्षिल कस्बे से 50 मीटर दूर होगी। हालांकि इसको स्थानीय प्रशासन ही चिह्नित करेगा।

आदेश के अनुसार देशी-विदेशी सैलानी नेलांग घाटी जा तो सकेंगे, लेकिन इनर लाइन क्षेत्र में उन्हें रात बिताने की अनुमति नहीं होगी। उत्तरकाशी से 75 किलोमीटर दूर हर्षिल के इनर लाइन से बाहर होने से पर्यटक यहां ठहर सकेंगे।उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि “हालांकि प्रशासन को अभी इस बारे में आदेश नहीं मिला है, लेकिन गृह मंत्रालय को सभी रिपोर्ट भेज दी गईं थीं।” उन्होंने कहा कि आदेश मिलने पर अन्य औपचारिकताएं भी पूरी कर ली जाएंगी।

सराकार के इस कदम का लोग भी स्वागत कर रहे हैं। उत्तराखंड को करीब से देखने वाले गणेश सैली क कहना है कि “ये काम बहुत पहले ही कर देना चाहिये था। सैलानियों पर पाबंदी के कारण इस इलाके में पर्यटन  उद्योग पनप नहीं पा रहा था। हांलाकि अब ये उम्मीद की जा सकती है कि यहां लोगों को रोजगार और कमाई के और साधन मिल सकेंगे”

दूसरे देशों की सीमाओं के नजदीक स्थित वह क्षेत्र, जो सामरिक दृष्टि से महत्व रखता हो, इनर लाइन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में सिर्फ स्थानीय लोग ही प्रवेश कर सकते हैं। उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले के अलावा चमोली व पिथौरागढ़ जिलों में भी चीन सीमा से लगे इनर लाइन क्षेत्र हैं।