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जीएसटी लागू होने के चार दिन बाद भी व्यापारी व ग्राहकों में असमंजस

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देशभर में जीएसटी लागू होने के तीन दिन बाद भी दून के बाजारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, इससे जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है। कुछ सुपर मार्केट को छोड़कर अधिकतर व्यापारी सामानों का बिल देने में असमर्थता जता रहे हैं। कीमतों को लेकर भी व्यापारी से लेकर ग्राहक तक दुविधा में है। एक जुलाई से देशभर में ‘एक देश, एक कर’ व्यवस्था लागू कर दी गई लेकिन, बाजारों में व्यापारियों के बीच दुविधा की स्थिति बनी हुई है। कुछ ने तो अब तक जीएसटी नंबर ही नहीं लिया, जो एक जुलाई से पहले लिया जाना था। वहीं, जीएसटी को लागू नहीं किए जाने जैसी अफवाहों के चलते व्यापारी भ्रमित हो गए। इतना ही नहीं इसे लेकर राजनीति भी जमकर हुई। इसमें कपड़ा व्यापारियों को तो यह तक आश्वासन दिया गया कि इस कारोबार को जीएसटी से बाहर करने की बात चल रही है। इसी कारण इन व्यापारियों ने अपने सिस्टम को अपडेट नहीं कराया और अब परेशानी झेलने को मजबूर है।
अब स्थिति यह है कि व्यापारी ग्राहकों को बिल नहीं दे पा रहे और खुद भी टैक्स भरने को लेकर दुविधा में है। हालांकि, अभी विशेषज्ञ भी इसके नफा-नुकसान का आंकलन करने में जुटे हुए हैं। जीएसटी को लेकर कुछ चीजों पर सीधा असर पड़ रहा है। खासकर वह उत्पाद या सेवाएं जो अभी तक राज्य व केंद्र सरकारों के करों के दायरे के विभाजन से बाहर थी। जैसे भवन निर्माण सामग्री। इसे लेकर इसलिए भी ज्यादा असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि यह दो राज्यों के राजस्व का मामला है। अभी जीएसटी के निर्धारण व जीएसटी नंबर न लिए जाने से यह सप्लाई पूरी तरंह से ठप पड़ी हुई है।
अगर दून के मुख्य बाजारों की बात करें तो अधिकतर व्यापरियों को अपने व्यवसाय की जीएसटी के अनुसार नई टैक्स दर की पूरी तरह से जानकारी नहीं है। दिनभर व्यापारी अपने व्यवसाय से जुड़े लोगों को फोन पर संपर्क कर आंकड़े जुटाने में लगे है। कुछ गलत अफवाहें भी बाजार में फैलाई जा रही हैं। पलटन बाजार में 40 साल से कपड़े का व्यापार कर रहे संजीव अरोड़ा का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि सरकार इस व्यवसाय को जीएसटी से बाहर रखेगी, लेकिन अब जीएसटी नंबर के लिए आवेदन करना ही पड़ा। अब भी किस आधार पर कितना टैक्स लगाकर बिल बनाया जाए यह साफ नहीं हो पा रहा है।
धामावाला में जनरल स्टोर मालिक बलदेव सिंह का मानना है कि जीएसटी निश्चित रूप से लोगों के लिए फायदेमंद सबित होगा, लेकिन अभी इसके लागू होने के बाद कुछ परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डिस्पेंसरी रोड पर इलेक्ट्रॉनिक की दुकान चलाने वाले व्यापारी अनिल गोयल का कहना है कि जीएसटी को लेकर जितने भ्रम की स्थिति में व्यापारी हैं, उतने ही ग्राहक भी परेशान है। इसका कारण यह है कि कुछ सामानों का दाम जो कम होना बताया जा रहा है, किन्हीं कारणों से जीएसटी के बाद वह मंहगा हो गया है। अब ग्राहक दुकानदार से जिरह कर रहे हैं कि बिल दो। ग्राहक भी इस नई टैक्स व्यवस्था को लेकर जानकारी के आभाव में व्यापरियों से भिड़ने पर आमादा है।

भवन निर्माण सामग्री पर पड़ा सीधा असर
दून में पहले से ही कीमतों के कारण लोगों की परेशानी का कारण बनी भवन निर्माण सामग्री अब किसी भी कीमत पर नहीं मिल पा रही है। जीएसटी के बाद उत्तराखंड में हालात और भी बदतर हो रहे है। पिछले कुछ माह से एक ओर सरकार को करोड़ो रुपये की राजस्व हानि हुई। वहीं, निर्माण सामग्री में दो से तीन गुना तक बढ़ोत्तरी ने जनता की कमर तोड़ कर रख दी है। पहले अदालत के आदेश के बाद खनन बंद होने से और बाद में ट्रकों पर सामग्री के भार तय करने के बाद से ही दामों में भारी उठाल आया। अब बारिश के कारण नदियों में खनन बंद होने और जीएसटी लागू होने के बाद तो किसी भी दाम में लोगों को निर्माण सामग्री नहीं मिल पा रही है।

प्रदेश के ग्राम प्रधानों ने दिए सामूहिक इस्तीफे

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ग्राम प्रधानों का मानदेय 750 रुपये प्रतिमाह से पांच हजार रुपये प्रतिमाह करने, पंचायतीराज एक्ट लागू करने, ग्राम पंचायत को मिलने वाली राज्य वित्त की धनराशी पूर्व की भांति यथावत करने की मांग को लेकर प्रदेश के प्रधानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।सोमवार को प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर ग्राम प्रधानों ने सामूहिक इस्तीफे सौंपे। ग्राम प्रधान संगठन ने उनकी मांगें न माने जाने पर प्रदेश सरकार के खिलाफ उग्र-आंदोलन की चेतावनी भी दी। प्रदेश सरकार ने यह फैसला केंद्र की ओर से जिला पंचायतों के मद में जारी होने वाली विकास योजनाओं की धनराशि को सीधे ग्राम सभा को देने के निर्णय के बाद लिया है। उधर, राज्य सरकार का कहना है कि यह राजनीति से प्रेरित प्रतिक्रिया है। कांग्रेस से जुड़े प्रधान ही इस्तीफे दे रहे हैं।
प्रदेशभर में ग्राम प्रधान संगठन के बैनर तले लगभग 7850 ग्राम प्रधानों ने जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्राम सभाओं के वित्त में कटौती से नाराज ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारियों को अपने इस्तीफे सौंपे। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गिरीवीर परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य वित्त के आधार पर ग्राम पंचायतों को मिलने वाली धनराशि में 60 प्रतिशत की कटौती की है। ग्राम प्रधान संगठन का आरोप है कि इस कटौती से पंचायत स्तर पर चल रही योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
परमार ने कहा कि वे लंबे समय से ग्राम पंचायत को अधिकार संपन्न बनाए जाने और ग्राम प्रधान का मानदेय को बढ़ाकर पांच हजार किए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट राज्य वित से मिलने वाली धनराशि में कटौती कर दी। संगठन के अध्यक्ष परमार ने कहा कि अगर बजट में हुई कटौती को वापस लेने के साथ ही उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन पहले ब्लाक स्तर पर और उसके बाद प्रदेश स्तर पर आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो राजधानी में डेरा डालकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
वहीं, ग्राम पंचायतों के बजट में हुई कटौती पर जिला पंचायतों का कहना है कि जिला पंचायत के माध्यम से भी ग्राम सभाओं में विकास कार्य किए जाते है। जिला पंचायत देहरादून के अध्यक्ष चमन सिंह ने प्रधान संगठन के इस कदम को अप्रजातांत्रिक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी ही स्थिति जिला पंचायतों के सामने एक वर्ष पूर्व आई थी। इसमें केंद्र सरकार ने जिला पंचायतों को मिलने वाला बजट सीधे ग्राम पंचायतों को देना शुरू कर दिया था लेकिन, जिला पंचायत सदस्यों ने प्रधानों की तरह ऐसे इस्तीफा नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त से विभिन्न योजनाओं का सौ फीसदी बजट भी ग्राम पंचायतों को और राज्य की ओर से जारी होन वाली धनराशि भी अगर सीधे ग्राम सभा को दे दी जाए तो जिला पंचायत की भूमिका क्या रह जाएगी।
उधर, देहरादून में ग्राम प्रधान संगठन से जुड़े ग्राम प्रधान जिला पंचायत राज अधिकारी एवं जिला विकास अधिकारी के कार्यालय पर एकत्रित हुए और प्रदर्शन करते हुए सामूहिक इस्तीफे सौंपे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा कर रही है, जिसे किसी भी दशा में सहन नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि राज्य वित की कटौती को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाएं और उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम 2016 को पूर्ण रूप से सुनिश्चित किया जाए। 73वें संविधान के लिए अधिकार दिए जाएं। 

बेटी की पर्फोरमेंस पर पिता के बोल

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पिता कुंदन सिंह बोले पाकिस्तान के खिलाफ बेटी अपने देश को जीत दिलाएगी, ये तो विश्वास था। मगर अब तक का बेहतरीन प्रदर्शन करेगी, ये सोचा भी ना था, पिता कुंदन सिंह बोले, ‘एकता ने आज चैंपियंस ट्रॉफी में पुरुष टीम की हार का बदला ले लिया। और पाकिस्तान को जवाब दे दिया की भारत की महिलाए भी कम नहीं है।’

सांस्कृतिक नगरी, अल्मोड़ा की गलियों में कुछ साल पहले तक अपनी गुगली से मोहल्ले के लड़कों को क्लीन बोल्ड करने वाली एकता बिष्ट ने पाकिस्तान के खिलाफ अब तक का बेहतरीन प्रदर्शन कर भारतीय पुरुष टीम की हार का भी बदला ले लिया। जैसे-जैसे एकता पाकिस्तानी टीम के खिलाड़ियों की गिल्ली बिखेरती रही परिजनों के चेहरों पर खुशी की बढ़ती रही।

खजांची मोहल्ला (अल्मोड़ा) में रहने वाली एकता ने पांच वर्ष पहले भारतीय महिला टीम में जगह बनाई थी। शुरूआत बेशक संघर्षपूर्ण रही पर पिछले दो वर्षों से एकता ने अपनी गेंदबाजी के बूते खुद को स्थापित करने में सफलता हासिल की। रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए रोमांचक मुकाबले में एकता ने पांच विकेट झटके तो अल्मोड़ा खुशी से झूम उठा। खासकर उसके मोहल्ले के उन युवाओं में जबर्दस्त खुशी थी जिनके साथ कभी भारतीय महिला टीम की यह स्टार तंग गली में खुद को कुशल बनाने में जुटी थी।

रिटायर्ड फौजी पिता कुंदन सिंह बिष्ट व माता तारा देवी बिष्ट हों या उसका बड़ा भाई विनीत और दीदी श्वेता, मैच खत्म होने तक सभी टेलीविजन से चिपके रहे। मैच खत्म हुआ और एकता मैन ऑफ द मैच बनी तो खुशी का कोई ठिकाना ना था। लोग घरों से बाहर निकल हुक्का क्लब तक आतिशबाजी करने लगे।

जाॅर्ज ऐवरस्ट के घर को बचाने आगे आये उनके रिश्तेदार

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अपने आप को सर जाॅर्ज ऐवरस्ट का रिश्तेदार बताने वाले लंदन के व्यापारी चार्ली गार्टन जोन्स ने मसूरी स्थित ऐवरस्ट के घर का जीर्णोधार करने की पेशकश की है। इसके साथ ही उन्होने इस घर को एक संग्राहलय बनाने के लिये सर एवरेस्ट के जीवनकाल में प्रयोग किये गये उपकरणों को भी देने की बात कही है। ये वो उपकरण हैं जो सर ऐवरस्ट ने ब्रिटिश राज की सीमाऐं नापने और पहाड़ों की ऊंचाई नापने के लिये किये गये सर्वे में इस्तेमाल किये थे।
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गौरतलब है कि सर ऐवरस्ट 19वीं सदी के पहले भाग में करीब एक दशक के लिये मसूरी में रहे थे। 1832 से 1843 के बीच अपनी रिहाईश के दौरान वो पार्क एस्टेट नाम के बंगले में रहे थे जो कि मसूरी के हाथीपांव इलाके में है। लेकिन सालो से बंगला सरकारी उदासीनता की मार झेल रहा है। हांलाकि राज्य सरकार ने इस बंगले का कब्जा ले लिया है लेकिन इस धरोहर को बचाने के लिये कुछ खास नहीं किया गया।
गार्टन जोन्स कहते हैं कि बंगले की हालात के बारे में उन्हें खबरों से पता चला, इसके बाद उन्होने मसूरी में अपने दोस्त और इतिहासकार गोपाल भारद्वाज को लिखा कि वो इस धरोहर को बचाना चाहेंगे। गोपाल भारद्वाज ने गार्टन का ये प्रस्ताव राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से साझा किया। सतपाल महाराज ने भी इस बाबत प्रस्ताव मिलने की बात मानी और कहा कि सरकार को खुशी होगी अगर लोग आगे आकर ऐसी धरोहरों को बचाने का बीड़ा उठाये। उन्होने कहा कि जाॅर्ज ऐवरेस्ट के जीवन को समर्पित एक प्रदर्शनी,  4 जुलाई जो कि इस महान पर्वतारोही का 227 वां जन्मदिन है मसूरी में लगाई जा रही है।
भारद्वाज के मुताबिक गार्टन तो 4 जुलाई के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकेंगे लेकिन उन्होने कहा है कि वो आधिकारिक रूप से सरकार के पत्र का इंतजार करेंगे, जिसके बाद जाॅर्ज ऐवरस्ट के इस घर और राज्य की इस अमूल्य धरोहर को बचाने का काम शुरू किया जा सके।

नीदरलैंड के छात्रों को टिप्स देंगे इस प्राइमरी स्कूल के छात्र

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सरकारी स्कूलों की बदहाली की चर्चाओं के बीच एक सुखद खबर दस्तक दे रही है। हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र के टाटवाला गांव में एक ऐसा भी प्राइमरी स्कूल है, जिसमें नीदरलैंड के छात्र कुछ सीखने और सिखाने आ रहे हैं। विदेशी छात्रों के दो दल इसी महीने श्यामपुर के टाटवाला प्राइमरी स्कूल में रहेंगे। इस दौरान नीदरलैंड और भारतीय छात्र एक दूसरे की संस्कृति से रूबरू होंगे। साथ ही पढ़ाई को लेकर अपने-अपने अनुभव भी साझा करेंगे। स्कूल में विदेशी मेहमानों के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
नीदरलैंड में पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप के तौर पर बच्चों को आरामदायक जीवन से अलग ग्रास रूट लेवल पर व्यवहारिक जानकारियां दी जाती हैं। ग्लोबल कल्चर एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत छात्रों के दो अलग अलग दल 21 जुलाई और 25 जुलाई को श्यामपुर के टाटवाला स्थित राजकीय प्राइमरी स्कूल पहुंचेंगे। खास बात यह है कि प्रवास के दौरान नीदरलैंड के छात्र स्कूल में ही रुकेंगे और विभिन्न खर्चों में कटौती कर जमा हुई राशि को विद्यालय विकास में खर्च किया जाएगा। दूसरी खास बात यह है कि बच्चे स्कूल में श्रमदान भी करेंगे।

गांव में पौधरोपण, स्वच्छता और गंगा स्वच्छता को लेकर जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। विद्यालय स्टाफ और छात्र छात्राएं विदेशी छात्रों के आगमन को लेकर काफी उत्साहित हैं। प्रधानाध्यापक घनश्याम सिंह का कहना है कि स्थानीय और विदेशी बच्चों का यह साझा अभियान विद्यालय और गांव के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

क्यों अपनी साख खो रहा है हरिद्वार का ये स्कूल?

आधुनिकता के इस दौर में हम अपने सामाजिक मूल्यों को दिन प्रतिदिन कितनी तेजी से खोते जा रहे हैं अनेकों ऐसे उदाहरण हमें अपने आसपास खूब देखने को मिलते हैं। हम हर रोज नई सामाजिक संरचना की ओर एक कदम बढ़ाते हैं। हमारी जिम्मेदारी तब और अधिक बढ़ जाती है की जब यह प्रश्न विचारनीय होता है कि हमारी पूर्व की पीढ़ियों ने हमें कैसा समाज दिया था और हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसा समाज छोड़कर जा रहे हैं।

पौराणिक काल से ही गुरु-शिष्य की परंपरा आदरणीय, पूजनीय, सम्मानीय रही है। सेंट मेरी स्कूल, ज्वालापुर, हरिद्वार की चर्चा आजकल विवादों के कारण ही हो रही है, विवादों के कारण अखाड़ा बन चुका ये शिक्षा का मंदिर ऐसा स्वरूप भी रखता है जोकि अन्य शिक्षण संस्थाओं में देखने को नहीं मिलता, सेंट मेरी वेलफेयर सोसाइटी का गठन सेंट मैरी स्कूल के अधिकांश शिक्षक शिक्षिकाओं के द्वारा किया गया था।

इस वेलफेयर सोसाइटी का गठन भले ही स्कूल मैनेजमेंट की आंखों की किरकरी  बना हो परंतु इस वेलफेयर सोसाइटी के द्वारा किए गए अभी तक के कुछ महत्वपूर्ण कार्य दूसरी शिक्षण संस्थाओं के लिए एक नजीर बनकर सार्थक उदाहरण पेश कर रहे हैं। चारु पाहवा, हिना पाहवा को दो दो वर्षों तक स्कूल की फीस के रूप में वित्तीय सहायता दी गई, मनोज कुमार का  बैंक में अकाउंट खुलवा कर वित्तीय सहायता दी गई, सरवीना जोकि सेंट मेरी स्कूल की ही शिक्षिका है उनका ऐसे समय पर सहयोग किया गया जब उनके पति कैंसर की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे।

उन्हें 85000 रुपए की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई जैसे न जाने कितने उदाहरण है जिनकी सहायता चाहे वह आर्थिक रूप से रही हो या शैक्षणिक रूप से रही हो इस सोसाइटी के सदस्यों व पदाधिकारियों द्वारा की गई है. ईसाई मिशनरी की इस संस्था के मूल्य उद्देश्य व गुरु शिष्य परंपरा को चरितार्थ करने वाले शिक्षक साधुवाद व सम्मान के पात्र हैं लेकिन वक्त का खेल देखिए सेंट मैरी स्कूल का नाम रोशन करने वाले निस्वार्थ सेवा भाव अपनी सेवा देने वाले शिक्षक आज सेंट मेरी स्कूल मैनेजमेंट को साजिशकर्ता व अयोग्य नजर आ रहे हैं.

चार धाम यात्रा में क्यों हो रहीं गिरावट?

इस साल शुरुवात से ही चार धाम यात्रा जोर पकड़ने लगी है, पहले दिन से ही देश दुनिआ के हजारों तीर्थ यात्री चार धाम यात्रा के लिए उत्तराखंड का रुख कर रहे है। लेकिन मानसून के दस्तक ने यात्रा पर ब्रेकर का काम किया है, लगातार बारिश के चलते यात्रा पर आने वाले यात्रियों की संख्या में भरी गिरावट देखी जा रही है और पर्यटन पिछले कुछ दिनों पहले से पहाड़ों पर हो रही बारिश के चलते कहीं कहीं पर यात्रा प्रभाविभाग द्वारा यात्रियों को मौसम की पल पल की अपडेट दी जा रही है।

2017 की चार धाम यात्रा अभी तक कई सालों के मुकाबले अच्छी रही है, देश विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा के लिए देवभूमि पहुंचे है लेकिन एक बार फिर मानसून ने यात्रा पर खलल डाला है। आंकड़ों की तरफ देखे तो अभी तक यमनोत्री धाम में 3 लाख 04 हजार यात्री , तो यमनोत्री धाम में 2 लाख 56 हजार यात्री, केदारनाथ धाम में 4 लाख 50 हजार और बद्रीनाथ धाम में 4 लाख 20 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच चूके है। अब मानसून के दस्तक के साथ ही चार धाम यात्रा पर इसका असर देखने को मिल रहा है। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के कारण संख्या में भी थोड़ी बहुत गिरावट देखी जा रही है। हालाकि बायोमेट्रिक अधिकारी प्रेमानंद का कहना है की इस साल की यात्रा अभी तक काफी बेहतरीन रही है मगर बारिश के कारण अब श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आयी है लेकिन सितम्बर से एक बार फिर यात्रा तेजी पकड़नी शुरू कर देगी।

2013 की आपदा के निशान अभी यात्रा मार्गो पर बिखरे पड़े है, ऐसे में पहाड़ों पर मानसून की बारिश ने एक बार फिर यात्रा को प्रभावित किया है। बावजूद इसके आस्था की इस यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों का उत्साह लगातार बना हुआ है। यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को पर्यटन विभाग द्वारा मौसम और सड़कों की लगातार जानकारी मेसेज से दी जारी है और जहाँ भी यात्रा मार्ग प्रभावित हो रहे है उन्हें जल्द से जल्द खोला जा रहा है।

मसूरी, कम्पनी गार्डन रोड में भूस्खलन

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मसूरी कम्पनी गार्डन रोड में भूस्खलन होने से मार्ग बंद हो गया है जिस कारण आने जाने वाले लोगो को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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अाज सुबह अचानक लाल बहादूर प्रशासनिक अकादमी के पास एक बडा पुश्ता ढहने के कारण रोड बंद हो गयी, अासपास के लोगों ने बताया कि यह पुश्ता केवल चार महीने पुराना हैं, जिसे सी पी डब्लू डी ने बनाया था। वही रोड बंद होने की सूचना मसूरी के स्थानीय प्रशासन को दी गई जिसपर तत्काल काम करते हुए एसडीएम मसूरी मिनाक्षी पटवाल के द्वारा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को जेसीबी के साथ मौके पर पहुचेने के निर्देश दिये गयें अौर मार्ग को यातायात के लिये सुचारू करना गया जिससे लोगो को दिक्कता ना आये।

चेन चुराने वाली महिला चोर गिरफ्तार

ऋषिकेश-रायवाला छेत्र में दिनदहाड़े एक महिला के गले से सोने की चैन चुराने वाली शातिर महिला चोर को आखिरकार पुलिस ने धर दबोचा है।आपको बता दे की ऋषिकेश-रायवाला चैत्र में आये दिन चेन चोरी की घटनाएं सामने आती थी जिस कारण पुलिस प्रशाशन पर भी सवाल खड़े हो रहे थे लेकिन इस बार पुलिस ने महिला चोर को पकड़ लिया। महिला के पास से चुराए सोने के चेन बरामद हुए है।

जानकारी के अनुसार रविवार को रायवाला थाना छेत्र में एक महिला ने आकर पुलिस को सूचना दी कि वो अपने रिश्तेदार के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए रायवाला से विक्रम में बैठकर देहरादून जा रही थी । रास्ते से एक अन्य महिला विक्रम में सवार हुई और उसके बगल में बैठ गई। जब श्रीमती विमला देवी नेपाली तिराहे पर पहुंची तो देखा कि उनके गले से उनकी करीब 2 तोले की सोने की चेन गायब थी।

जिसके बाद उन्होंने पुलिस को इस बारे में जानकारी दी और पुलिस ने महिला चोर को पकड़ने के लिए चेकिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है की महिला उत्तरप्रदेश की रहने वाली है और उस की पहचान वंदना सिंह हु है।  फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज करके महिला चोर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है और इस बात की छान बीन चल रही है की महिला चोर का नेटवर्क कहाँ कहाँ तक फैला हुआ है। पुलिस को उम्मीद है की इस महिला के तार अंतरराज्य गिरोह के साथ जुड़े हुए है जो लगातार उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश में टप्पेबाजी की घटना को अंजाम दे रहे है।

 

गुटों के बीच हुई झड़प में दो घायल

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दो गुटों के बीच मामूली बात को लेकर हुई झड़प ने देखते ही देखते गंभीर रूप ले लिया।झड़प में दो युवक घायल हो गए जिन्हें इलाज के लिए सिनर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया।बताया जा रहा है कि रेसकोर्स में रविवार की देर रात दो लोगो में किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। यहां एक पक्ष ने दूसरे पर चेन छीनने और मारपीट करने का आरोप लगाते हुए डालनवाला कोतवाली के आराघर चौकी पर तहरीर दी। मगर इसके कुछ देर बाद ही दोनों गुटों के लोगो का बसन्त विहार में आमना-सामना हो गया। यहां भी दोनों तरफ से आए युवकों में मारपीट हो गई। थानाध्यक्ष बसन्त विहार संजय मिश्रा ने बताया कि एक पक्ष के लोग थाने आए थे। तहरीर लेकर जांच शुरू कर दी गई है। घायलो को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। मारपीट किस बात को लेकर हुई, अभी इसका पता नहीं चल सका है। चर्चा है कि घायलो में से एक पंजाब के किसी नेता का पुत्र है। फिलहाल पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।