फ्लैट और अपार्टमेंट को लेकर बिल्डरों की मनमानी अब नहीं चलेगी। राज्य सरकार प्राइवेट बिल्डर्स की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए कड़े कदम उठाने जा रही है। प्राइवेट कॉलोनी बनाने वाले बिल्डरों को अब मकानों की संख्या बताने के साथ ही उसकी कीमत का रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा। शहरों में लगातार कॉलोनियों और प्राइवेट फ्लैट की संख्या बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं घर लेने के सपने को पूरा करने का दावा करने वाले कई बड़े बिल्डर अपनी मनमानी चलाकर लोगों को परेशान भी करते हैं। जिससे प्राइवेट बिल्डर्स के काम करने के तरीकों पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। साथ ही कई मामलों में इस तरह की ठगी, धोखाधड़ी के मामले भी सामने आते रहते हैं। लेकिन अब राज्य सरकार प्राइवेट बिल्डर्स की इस तरह की मनमानी को रोकने के लिए सख्त हो गई है।
शहरी विकास मंत्री का कहना है कि अब जो बिल्डर अपनी कॉलोनी बनाएगा वह बनाए जाने वाले मकानों की संख्या और उसकी कीमत का पंजीकरण कराएगा, जिसे प्राधिकरण द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा की पंजीकरण संबंधी सभी सुविधाएं सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से दी जाएंगी। ताकि किसी को भी किसी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
इधर दून रेजीडेंस वेलफेयर के अध्यक्ष डॉ. महेश भंडारी का दावा है कि अब देहरादून में फ्लैट सस्ते हो जाएंगे। भंडारी का कहना है कि अभी तक बिल्डर लगातार मनमानी कर रहे थे। इतना ही नहीं बिल्डर बिना रजिस्ट्रेशन के ही प्लॉट बेचने का विज्ञापन जारी करने के साथ ही प्रोजेक्ट शुरू कर देते थे। जिससे कई बार आम लोगों के साथ धोखा भी हो जाता था। लेकिन, अब बिल्डरों की मनमानी पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। बिल्डर को अब अपने प्रोजेक्ट को पहले रजिस्टर कराना होगा। साथ ही ग्राहक को निर्धारित समय में घर भी देना होगा। ऐसा न करने पर ग्राहक बिल्डर से जुर्माना भी ले सकता है।
प्राइवेट बिल्डरों की मनमानी पर लगाम की तैयारी
संदिग्ध परिस्थितियों में पशु चिकित्सा अधिकारी की मौत
पशुपालन केन्द्र दुर्गाधार में तैनात पशु चिकित्साधिकारी डाॅ पीके द्विवेदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। हालांकि प्रथम दृष्टिया मौत के कारणों को आत्महत्या बताया जा रहा है। तहसील प्रशासन की ओर से शव का पंचायतनामा भरकर जिला चिकित्सालय पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
दरअसल, पुश चिकित्साधिकारी डाॅ पीके द्विवेदी मुख्यालय के बेलणी में किराये के भवन पर निवास करते थे। उनकी ड्यूटी मुख्यालय से पन्द्रह किमी दूर पशुपालन केन्द्र दुर्गाधार में थी। वे कल सांय को अपने निवास पर आये, जिसके बाद बुधवार की सुबह ग्यारह बजे तक भी उनके कमरे के भीतर से कोई हलचल न होने पर आस-पास के लोगों को शक होने लगा। उन्होंने खिड़की से झांका तो भीतर डाॅ द्विवेदी का सिर बालटी के अंदर था और वे कोई हलचल नहीं कर रहे थे। जब लोगों ने दरवाजा खोलने की कोशिश की तो अंदर से कुंडी लगी थी। इसके बाद मकान मालिक को सूचना दी गई और मकान मालिक द्वारा पुलिस और पशु पालन विभाग को जानकारी दी गई।
मामला राजस्व क्षेत्र का होने के कारण तहसील प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। करीब डेढ़ बजे के करीब तहसील और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में कमरे का दरवाजा तोड़ा गया। जिसके बाद अंदर की स्थिति देखकर हरकोई हैरान रह गया।
डाॅ द्विवेदी के सिर को पीआरडी के जवानों ने बालटी से बाहर निकाला तो डाॅ द्विवेदी के नाक से खून निकलने के साथ ही चेहरे पर सूजन आई हुई थी। शव को बाहर निकालते ही कमरे में बदबू भी फैल गई, जिससे अंदाजा लगाया गया कि डाॅ द्विवेदी की मौत रात को ही हो गई थी। तहसील प्रशासन की टीम द्वारा शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया।
राजाजी टाइगर रिजर्व में 25 साल के नर हाथी की मौत
मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि दो से तीन दिन पहले हाथी की गड्ढ़े में गिरने से मौत हुई थी, उसकी उम्र लगभग 25 साल होने का अनुमान है।
मारे गए हाथी के दोनों दांत सुरक्षित मिले हैं, इससे उसका शिकार किए जाने की आशंका नहीं है। शव के पोस्टमार्टम के लिए चिकित्सकों के दल को बुलाया गया है. इसके बाद मौत की असली वजह पता चस सकेगी.
दून पुलिस ने पकड़ी देसी शराब की पेटियां
एसएसपी देहरादून के निर्देशन में जनपद पुलिस द्वारा नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक नगर एवं क्षेत्राधिकारी सदर/ नगर महोदय के नेतृत्व में बुधवार 05/07/17 को थाना कैंट पुलिस एवं एस0ओ0जी0 की संयुक्त टीम द्वारा किशन नगर चौक के पास से एक मैक्स पिकअप यूपी0 12 टी0 1785 में 50 पेटी अवैध देसी मसालेदार शराब बरामद की गई। चालक मौके से गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। परिचालक की सीट पर बैठे व्यक्ति सुनील पुत्र जगन्नाथ निवासी 194 गांधीग्राम, कावली रोड, थाना कोतवाली नगर देहरादून को वाहन के साथ हिरासत मे लिया गया। उपरोक्त संबंध में थाना कैंट में धारा 60/72 आबकारी अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया। फरार अभियुक्त के संबंध में जानकारी प्राप्त कर गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
नाम पता गिरफ्तार अभियुक्तगण:-
- सुनील पुत्र जगन्नाथ निवासी- 194 गांधीग्राम, कांवली रोड, थाना कोतवाली नगर, देहरादून।
- बरामदगी:- 50 पेटी देसी शराब।
पुलिस टीम :-
- शंकर सिंह बिष्ट, प्रभारी निरीक्षक कैंट।
- शंभू सिंह, चौकी प्रभारी बिंदाल।
- कॉन्स्टेबल अमित परमार, धनपाल।
एस0ओ0जी0 टीम :-
- पी0डी0 भट्ट, एस0ओ0जी0 प्रभारी देहरादून।
- कांस्टेबल प्रमोद कुमार,
- कांस्टेबल चालक विपिन राणा।
अल्मोड़ा की बेटियों में कुछ बात तो है
महिला वर्ड कप हो या फिर अदाओ का हूनर अल्मोडा की बेटियों ने हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रखा है… पहले एकता बिष्ट की कामयाबी से अल्मोडा गौरवांवित था तो वहीं अब रोशनी की चमक से भी अल्मोडा जमगा रहा है, रोशनी ने अपने जलवे रैम्प पर इस कदर बिखरे की उसके सामने सभी फिके नजर आये, मुंबई में 26 से 30 जून के मध्य आयोजित डैलीवुड मिस्टर एंड मिस इंडिया-2017 प्रतियोगिता में अल्मोड़ा की रोशनी बिष्ट स्टेट विनर रहीं। वह मिस उत्तराखंड चुनी गई। उन्हें मोस्ट इंटरनेशनल लुक के टाइटिल से भी नवाजा गया। उनकी इस उपलब्धि पर लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
इस प्रतियोगिता के लिए उनका चयन पिछले दिनों रुद्रपुर में हुए ऑडिशन के आधार पर हुआ। मुंबई में हुई प्रतियोगिता में वह मिस उत्तराखंड चुने जाने के साथ ही टॉप-15 फाइनेलिस्ट मिस इंडिया में शामिल हैं। इस प्रतियोगिता में रोशनी को मोस्ट इंटरनेशनल लुक के टाइटिल से भी नवाजा गया। रोशनी का पैतृक गांव विकास खंड धौलादेवी अंतर्गत गुरुड़ाबाज है। वर्तमान में वह दुगालखोला कस्बे में रहती हैं। उनके पिता धन सिंह बिष्ट क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा माता गीता बिष्ट भैसियाछाना में बाल विकास परियोजना अधिकारी हैं। रोशनी की इस उपलब्धि पर नगर समेत गुरुड़ाबांज के ग्रामीणों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
अब पीपीपी मोड पर उठेगा घरों का कूड़ा
नगर निगम की विभागीय समीक्षा बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में निगम के कई फैसलों के धरातल पर उतरने से दूनवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। बैठक में कई योजनाओं पर पीपीपी मोड पर देने को लेकर भी सहमति बनी। अब तक शहर के डोर टू डोर कूड़ा उठाने को लेकर जहां नगर निगम को विरोध झेलना पड़ रहा था। वहीं अब निगम बाहरी एजेंसी के साथ इसे लेकर अनुबंध करेगा। इस योजना की स्वीकृति के लिए निगम शासन को प्रस्ताव भेजेगा। 31 जुलाई तक सहस्त्रधारा ट्रंचिंग ग्राउंड का कूड़ा शीशमबाड़ा में हर हालत में शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए मेयर ने सभी वाहनों व सफाई कर्मचारियों व डीपीआर की सूची अधिकारियों को उपलब्ध कराने को निर्देशित किया है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि व्यापारी, ठेली, सब्जी विक्रेताओं को निगम की ओर से सड़क पर कूड़ा न बिखेरने को लेकर सूचित किया जाएगा। यदि किसी विक्रेता की दुकान पर कूड़ेदान नहीं पाया जाता है तो उसे मोटा जुर्माना वसूला जाएगा। जुर्माने के रूप में निगम पांच सौ से पांच हजार तक की राशि वसूलेगा। इसके अलावा समीक्षा बैठक में यह भी तय किया गया कि निगम पलटन बाजार, धामावाला, गांधी रोड पर अवैध ठेलियों के खिलाफ अभियान चलाएगा। यदि नियम के विरुद्ध कोई ठेली रेहड़ी लगाते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, तय वेंडर जोन पर ही ठेलियों को लगाने की अनुमति दी जाएगी।
बैठक में यह भी फैसला हुआ कि होटल, मॉल, रेजिडेंसी, ढाबा, हॉस्टल आदि से यदि एक दिन में सौ किलो से अधिक का कूड़ा निकलता है तो उन्हें कूड़े का निस्तारण खुद करना होगाय़ यदि निरीक्षण के दौरान कोई पकड़ में आता है। तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जिन स्थानों पर रात्रि को नियमित कूड़ा डाला जाएगा उन स्थानों पर सीपी विन्स लगाए जाएंगे ताकि कूड़ा जमीन पर न बिखरे।
प्रॉपर्टी का टैक्स होगा ऑनलाइन
अभी तक प्रापर्टी टैक्स जमा करने के लिए कोई अतिरिक्त व्यवस्थित नहीं थी लेकिन, अब निगम द्वारा आॅनलाइन मोड में भुगतान करने की सुविधा दी जाएगी। इसके साथ निगम ने टैक्स कलेक्शन का कार्य भी पीपीपी मोड पर किए जाने का शासन को प्रस्ताव भेजा है।
रवनीत चीमा, मुख्य नगर आयुक्त ने बताया कि दूनवासियों को समस्या से जल्द बाहर निकालने को लेकर समीक्षा बैठक की गई जिसमें अहम फैसले लिये गए। जल्द योजना को धरातल पर उतारा जाएगा।
बाढ़ से निपटने को हरिद्वार डीएम सख्त
जिले में बारिश व बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए अब जिलाधिकारी ने सख्त रुख अख्तियार किया है। जिलाधिकारी ने सभी तहसीलों के उपजिलाधिकारियों व तहसीलदारों को चेताया कि उनके तहसील क्षेत्र में बाढ़ व आपदा से निपटने में लापरवाही साबित हुई तो प्रतिकूल प्रविष्टि देंगे।
जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि आपदा से निपटने के लिए धन की कमी कतई आड़े नहीं आएगी। बारिश से संपत्ति के नुकसान पर दोबारा निर्माण के लिए तत्काल धनराशि दी जाएगी। प्राथमिक स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों की छत गिरने पर डेढ़-डेढ़ लाख, एक किलोमीटर तक की सड़क मरम्मत के लिए एक लाख रुपये तत्काल दिए जाएंगे। आपदा से निपटने के लिए सभी तहसीलों में इंतजाम किए हैं। जहां भी उपकरणों की कमी होगी, वहां के उपजिलाधिकारी तीन लाख रुपये तक की खरीददारी बगैर टेंडर निकाले सीधे बाजार से क्रय कर कंट्रोल रूम या बाढ़ चौकी पर रखवा सकते हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन के पास दो करोड़ रुपये हैं। बाद में धन के खर्च करने का सत्यापन भी कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसके बाद भी आपदा से निपटने में लापरवाही हुई तो संबंधित को बख्शेंगे नहीं।उन्होंने कहा कि हम खुद बाढ़ चौकियों का निरीक्षण करेंगे, किसी के अकारण अनुपस्थित रहने पर उस पर कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि जहां भी सड़क टूटी होने या गढ्ढे होने से दुर्घटना में जनधन हानि हुई तो संबंधित विभाग के जिम्मेदार के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराएंगे।
सरकार की मंशा पर अफसरों की लेटलतीफी
सरकार भले ही लोगों को एक मंच पर समस्याओं के समाधान देने के लिए तहसील दिवस आयोजित करने को लेकर गंभीरता दिखा रही हो, लेकिन अधिकारी इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। नई सरकार के पहले तहसील दिवस में ही अफसरों की लेटलतीफी नजर आई। दो-चार विभागों को छोड़कर बाकी के अफसर साढ़े दस बजे शुरू होने वाले तहसील दिवस में ग्यारह बजे के बाद हाथ हिलाते हुए पहुंचे और खानापूर्ति कर पल्ला झाड़कर निकल लिए।
सुबह साढ़े दस बजे उपजिलाधिकारी प्रत्युष सिंह व तहसीलदार एमसी रमोला की अध्यक्षता में तहसील दिवस शुरू हुआ, तब तक परिसर में सिर्फ कृषि, आरडब्ल्यूडी, सेवायोजन व समाज कल्याण विभाग के अधिकारी मौजूद थे। इसके बाद धीरे-धीरे अधिकारियों का आना शुरू हुआ और दो बजे तक चलने वाले कार्यक्रम में पौने बारह बजे तक तक रायपुर ब्लॉक, सहकारिता, लोनिवि, जिला प्रोबेशन, जल निगम, जिला पूर्ति, जल संस्थान, उद्योग, बाल विकास, मुख्य उद्यान अधिकारी, उद्यान सचल, आयुर्वेद, सूचना व आर्येश के अधिकारी पहुंचे। जबकि, सिंचाई, लघु सिंचाई, स्वजल, शिक्षा विभाग व एमडीडीए के अधिकारी तो 12 बजे के बाद पहुंचे।
अधिकांश अफसर जहां तहसील दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देरी से पहुंचे वहीं 12 विभाग तो ऐसे हैं, जिनके अधिकारियों ने तहसील दिवस में आना भी जरुरी नहीं समझा। जबकि, तहसील प्रशासन की ओर से उक्त विभागों को पहले ही इस संबंध में सूचित किया जा चुका था। तहसील दिवस में आने वाले विभागों में कृषि विभाग, आरडब्ल्यूडी, सेवायोजन, समाज कल्याण, रायपुर ब्लाक, सहकारिता, लोनिवि, जिला प्रोबेशन, जल निगम, जिला पूर्ति, जल संस्थान, उद्योग, बाल विकास, उद्यान विभाग, उद्यान सचल दल केंद्र, आयुर्वेद, आर्येश, राजस्व विभाग, जिला सूचना, सिंचाई, लोनिवि, लघु सिंचाई, पुलिस, स्वजल, शिक्षा विभाग, एमडीडीए शामिल थे, जबकि पशुपालन, अल्पसंख्यक कल्याण, स्वास्थ्य विभाग, बंदोबस्त विभाग, परिवहन, गन्ना विभाग, वन विभाग, यूपीसीएल, बाढ़ नियंत्रण, डीआरडीए, डीआईसीडी, नगर निगम के अधिकारी इस मौके पर नहीं पहुंचे।
तहसील दिवस में शिकायतों की स्थिति पर गौर करें तो राजस्व विभाग की कुल 53 शिकायतें आई और इनमे से 51 का निस्तारण कर दिया गया। समाज कल्याण विभाग की सभी 25 शिकायतें निस्तारित की गई। विकास विभाग और पुलिस विभाग के एक-एक मामले आए और निस्तारित किए गए।
शराब की दुकान के विरोध में धरने पर बैठे बीजेपी विधायक
शराब का ठेका खोले जाने के विरोध में स्थानीय विधायक प्रदीप बत्रा और भाजपाई गांधी वाटिका मार्केट में धरने पर बैठ गए हालांकि, प्रशासन ने ठेके को बंद करा दिया।
मंगलवार को चंद्रशेखर चौक के पास गांधी वाटिका मार्केट में भाजपा के मंडल कार्यालय के नीचे गांधी वाटिका में अंग्रेजी शराब के विरोध में मंगलवार को भाजपाईयों ने ठेके के बाहर धरना प्रदर्शन करते हुए ठेके को बंद कराने की मांग की। भाजपाइयों ने सिविल लाइंस कोतवाली दारोगा से ठेका बंद कराने को कहा जिस दारोगा ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला बताया। भाजपाइयों की सेल्स मैनों और दारोगा से तीखी झड़प हो गयी।
विरोध कर रहे भाजपाई सड़क के बीचों-बीच पहुंच गए और जाम लगाने की कोशिश की। कुछ पदाधिकारियों के समझाने पर वह वापस लौट आए। इस दौरान सड़क पर हंगामे के चलते जाम की स्थिति बनी रही।
खबरदारः दून में 90 प्रतिशत पानी का सैंपल पाया गया दूषित
मंगलवार को देहरादून स्थित एक संगठन ने दावा किया है कि गुणवत्ता विश्लेषण के लिए इकट्ठा किए गए 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी के नमूने जिनमें वीआईपी क्षेत्रों से लिए गए सैंपल भी है वह दूषित पाए गए हैं।
गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट शहर के सभी 60 नगरपालिका वार्डों से एकत्र किए गए 76 नमूनों पर आधारित है।इसमें झुग्गी,क्लस्टरों और कम से कम चार वीआईपी क्षेत्रों को भी शामिल किया गया हैं, जिनमें एक क्षेत्र में राज्य मंत्री का आवास है, एक विधायक आवास वाला क्षेत्र, एक जिला मजिस्ट्रेट का क्षेत्र और एक जिला न्यायाधीश का क्षेत्र भी शामिल हैं।
लेकिन जल संस्थान, सरकार की जल आपूर्ति इकाई, ने रिपोर्ट के निष्कर्षों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।”जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एस के गुप्ता ने कहा कि “हम न तो रिपोर्ट के दावों को पहचानते हैं और न ही प्रयोगशाला जहां परीक्षण किया गया था। यह (रिपोर्ट) केवल भ्रामक नहीं है बल्कि चीजों को सनसनीखेज बनाने का भी प्रयास है। हम जो पानी उपलब्ध कराते हैं वह बिल्कुल साफ और स्वच्छ है।
गैर-सरकारी संगठन ‘सोसाइटी ऑफ पोल्यूशन एंड एनवायरनमेंट कंज़र्वेशन साइंटिस्ट्स’ (एसपीईसीएस) द्वारा जारी किए गए देहरादून की जल रिपोर्ट गुणवत्ता स्थिति के अनुसार अधिकांश नमूने में अतिरिक्त क्लोरीन या फिकल कॉलिफॉर्म (बैक्टीरिया जो जल प्रदूषण के संकेत देता है) पाया गया है। दो नमूनों में तेल और ग्रीस के निशान भी पाए गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां अतिरिक्त क्लोरीन त्वचा और बालों लिए हानिकारक माना जाता है और इसके प्रयोग से अल्सर का डर भी होता है।पीने के पानी में फीकल कोलीफाॅर पाए जाने से फेफड़े के रोग के साथ अन्य रोगों जैसे डायरिया, दस्त और गैस्ट्रोएन्ट्रोएनटाइटिस जैसे बीमारियां पैदा हो सकती है। । रिपोर्ट के अनुसार, एसपीईसीएस द्वारा अध्ययन किए गए कुल 76 नमूनों में से 74 नमूने को पीने के लिए सही नहीं पाया गया है और इनमें विभिन्न संदूषण भी मौजूद हैं।
अवशिष्ट क्लोरीन 24 स्थानों पर पाया गया था, जिसमें से 22 नमूनों में ‘सुपर (या उच्च) क्लोरिनेशन’ स्तर बताए गए थे जो खतरनाक माना जाता है। अवशिष्ट क्लोरीन के लिए मानक मूल्य 0.2 एमजी/लीटर है, लेकिन यह रीटा मंडी, राजपुर रोड और सय्यद मोहल्ला में 1 एमजी/लीटर के बराबर है।
कुल कॉलीफॉर्म – जिनकी मानक मूल्य पीने योग्य पानी में 10 एमपीएन/100 एमएल से अधिक नहीं होना चाहिए – उनको 39 नमूनों में पाया गया। उच्चतम जीएमएस रोड (68 एमपीएन/100 एमएल) में था। इसी तरह, पीले रंग का पानी – जो पीने योग्य पानी होना नहीं चाहिए – शिलाब बाग में सबसे अधिक 32 एमपीएन/100 मिलीलीटर के साथ, 39 नमूनों में मौजूद था।
वहीं एसपीईसीएस के सेक्रेटरी बृज मोहन शर्मा का कहना है कि हमारा एनजीओ पिछले 18 सालों से देहरादून के पानी की जांच कर रहा है।पिछले सालों में पानी की गुणवत्ता खराब हुई है इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन परेशानी की बात यह है कि इसपर जल संस्थान कोई ठास कदम उठाने को तैयार नहीं है।बृज मोहन शर्मा ने कहा कि अगर जल संस्थान को लगता है कि पानी साफ और स्वच्छ है तो जल संस्थान और हर डिर्पाटमेंट में फिल्टर लगाने का क्या मतलब है।शर्मा ने कहा कि हम पिछले 18 साल से बरसात के मौसम में अपनी रिपोर्ट निकालते है और आज तक जल संस्थान की तरफ से कभी भी दोबारा जांच नहीं कि गई है।शहर में बढ़ते डायरिया,पेट की बीमारियों का कारण भी प्रदूषित पानी ही है।
अधिकारियों को उचित कार्रवाई करने के लिए आग्रह करते हुए शर्मा ने कहा कि उप-मानक जल आपूर्ति में लघु और दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव दोनों हैं। शर्मा ने दावा किया कि “इस वर्ष, हमने 41% से अधिक दून के निवासियों को ऐसा पानी प्राप्त करते देखा है जो राष्ट्रीय जल गुणवत्ता मानकों से नीचे स्तर पर है”, उन्होंने दावा किया कि यह “पानी की आपूर्ति प्रणाली में लीकेज” और पानी की आपूर्ति के साथ गंदे पानी मिलावट भी इसका एक बड़ कारण हो सकता है।





























































