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शराब की दुकान के विरोध में धरने पर बैठे बीजेपी विधायक

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शराब का ठेका खोले जाने के विरोध में स्थानीय विधायक प्रदीप बत्रा और भाजपाई गांधी वाटिका मार्केट में धरने पर बैठ गए हालांकि, प्रशासन ने ठेके को बंद करा दिया।

मंगलवार को चंद्रशेखर चौक के पास गांधी वाटिका मार्केट में भाजपा के मंडल कार्यालय के नीचे गांधी वाटिका में अंग्रेजी शराब के विरोध में मंगलवार को भाजपाईयों ने ठेके के बाहर धरना प्रदर्शन करते हुए ठेके को बंद कराने की मांग की। भाजपाइयों ने सिविल लाइंस कोतवाली दारोगा से ठेका बंद कराने को कहा जिस दारोगा ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला बताया। भाजपाइयों की सेल्स मैनों और दारोगा से तीखी झड़प हो गयी।

 विरोध कर रहे भाजपाई सड़क के बीचों-बीच पहुंच गए और जाम लगाने की कोशिश की। कुछ पदाधिकारियों के समझाने पर वह वापस लौट आए। इस दौरान सड़क पर हंगामे के चलते जाम की स्थिति बनी रही। 

खबरदारः दून में 90 प्रतिशत पानी का सैंपल पाया गया दूषित

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मंगलवार को देहरादून स्थित एक संगठन ने दावा किया है कि गुणवत्ता विश्लेषण के लिए इकट्ठा किए गए 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी के नमूने जिनमें वीआईपी क्षेत्रों से लिए गए सैंपल भी है वह दूषित पाए गए हैं।

गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट शहर के सभी 60 नगरपालिका वार्डों से एकत्र किए गए 76 नमूनों पर आधारित है।इसमें झुग्गी,क्लस्टरों और कम से कम चार वीआईपी क्षेत्रों को भी शामिल किया गया हैं, जिनमें एक क्षेत्र में राज्य मंत्री का आवास है, एक विधायक आवास वाला क्षेत्र, एक जिला मजिस्ट्रेट का क्षेत्र और एक जिला न्यायाधीश का क्षेत्र भी शामिल हैं।

लेकिन जल संस्थान, सरकार की जल आपूर्ति इकाई, ने रिपोर्ट के निष्कर्षों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।”जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक एस के गुप्ता ने कहा कि “हम न तो रिपोर्ट के दावों को पहचानते हैं और न ही प्रयोगशाला जहां परीक्षण किया गया था। यह (रिपोर्ट) केवल भ्रामक नहीं है बल्कि चीजों को सनसनीखेज बनाने का भी प्रयास है। हम जो पानी उपलब्ध कराते हैं वह बिल्कुल साफ और स्वच्छ है।

गैर-सरकारी संगठन ‘सोसाइटी ऑफ पोल्यूशन एंड एनवायरनमेंट कंज़र्वेशन साइंटिस्ट्स’ (एसपीईसीएस) द्वारा जारी किए गए देहरादून की जल रिपोर्ट गुणवत्ता स्थिति के अनुसार अधिकांश नमूने में अतिरिक्त क्लोरीन या फिकल कॉलिफॉर्म (बैक्टीरिया जो जल प्रदूषण के संकेत देता है) पाया गया है। दो नमूनों में तेल और ग्रीस के निशान भी पाए गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां अतिरिक्त क्लोरीन त्वचा और बालों लिए हानिकारक माना जाता है और इसके प्रयोग से अल्सर का डर भी होता है।पीने के पानी में फीकल कोलीफाॅर पाए जाने से फेफड़े के रोग के साथ अन्य रोगों जैसे डायरिया, दस्त और गैस्ट्रोएन्ट्रोएनटाइटिस जैसे बीमारियां पैदा हो सकती है। । रिपोर्ट के अनुसार, एसपीईसीएस द्वारा अध्ययन किए गए कुल 76 नमूनों में से 74 नमूने को पीने के लिए सही नहीं पाया गया है और इनमें विभिन्न संदूषण भी मौजूद हैं।

अवशिष्ट क्लोरीन 24 स्थानों पर पाया गया था, जिसमें से 22 नमूनों में ‘सुपर (या उच्च) क्लोरिनेशन’ स्तर बताए गए थे जो खतरनाक माना जाता है। अवशिष्ट क्लोरीन के लिए मानक मूल्य 0.2 एमजी/लीटर है, लेकिन यह रीटा मंडी, राजपुर रोड और सय्यद मोहल्ला में 1 एमजी/लीटर के बराबर है।

कुल कॉलीफॉर्म – जिनकी मानक मूल्य पीने योग्य पानी में 10 एमपीएन/100 एमएल से अधिक नहीं होना चाहिए – उनको 39 नमूनों में पाया गया। उच्चतम जीएमएस रोड (68 एमपीएन/100 एमएल) में था। इसी तरह, पीले रंग का पानी – जो पीने योग्य पानी होना नहीं चाहिए – शिलाब बाग में सबसे अधिक 32 एमपीएन/100 मिलीलीटर के साथ, 39 नमूनों में मौजूद था।

वहीं एसपीईसीएस के सेक्रेटरी बृज मोहन शर्मा का कहना है कि हमारा एनजीओ पिछले 18 सालों से देहरादून के पानी की जांच कर रहा है।पिछले सालों में पानी की गुणवत्ता खराब हुई है इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन परेशानी की बात यह है कि इसपर जल संस्थान कोई ठास कदम उठाने को तैयार नहीं है।बृज मोहन शर्मा ने कहा कि अगर जल संस्थान को लगता है कि पानी साफ और स्वच्छ है तो जल संस्थान और हर डिर्पाटमेंट में फिल्टर लगाने का क्या मतलब है।शर्मा ने कहा कि हम पिछले 18 साल से बरसात के मौसम में अपनी रिपोर्ट निकालते है और आज तक जल संस्थान की तरफ से कभी भी दोबारा जांच नहीं कि गई है।शहर में बढ़ते डायरिया,पेट की बीमारियों का कारण भी प्रदूषित पानी ही है।

अधिकारियों को उचित कार्रवाई करने के लिए आग्रह करते हुए शर्मा ने कहा कि उप-मानक जल आपूर्ति में लघु और दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव दोनों हैं। शर्मा ने दावा किया कि “इस वर्ष, हमने 41% से अधिक दून के निवासियों को ऐसा पानी प्राप्त करते देखा है जो राष्ट्रीय जल गुणवत्ता मानकों से नीचे स्तर पर है”, उन्होंने दावा किया कि यह “पानी की आपूर्ति प्रणाली में लीकेज” और पानी की आपूर्ति के साथ गंदे पानी मिलावट भी इसका एक बड़ कारण हो सकता है।

फिर ना हो रोपवे से दुर्घटना: मनोज रावत

उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से ना केवल लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा बल्कि आए दिन होने वाले दुर्घटनाओं से भी रुबरु होना पड़ रहा है। ऐसी घटना फिर ना हों जिसके लिये केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने उत्तराखंड सरकार का ध्यान विजयनगर-अगस्त्यमुनि निमार्णधीन पुल की अोर आकर्षित किया है।

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इस पत्र के माध्यम से ना केवल पुल के हालात बयां की है बल्कि इसकी वजह से होने वाली लोगों को परेशानी उजागर की है। रावत ने पत्र में स्पष्ट किया है कि पुल के दोनों तरफ लगी रोपवे ट्रालियों से स्कूल खुलने और बंद होने के समय काफी भीड़ होती है और इसकी वजह से पूर्व में कई घटनाएं  बारिश के मौसम में हो चुकी है।

मनोज रावत ने स्पष्ट किया है कि मंदाकिनी नदी तट क्षेत्र में एक बस की आवश्यकता है लोगों को अार पार ले जाने के लिये और अगर सरकार चाहें तो इस क्षेत्र में सीएसआईआर के लिए काम करने वाली कंपनियों से बस की मदद ले सकती है। इसके अलावा मनोज रावत ने कहा कि अगर सरकार के पास इसका बजट नहीं हो तो वह अपने विधायक निधि से इसका बजट देंगे।

इसके अलावा रावत ने कहा कि विजयनगर में सुबह-शाम मंदाकिनी के पार चाका, गदनु, जाखिनयल गाओं, अम्रपुरी से लगभग 250 स्कूली बच्चों के लिये रोप-वे से समय पर आना जाना संभव नही है, इसलिये 2 महीनों के लिये बस लगानी पड़ेगी अावा जाहीं के लिये।

देखना यह है क्या सरकार विधायक मनोज रावत की इस चिट्ठी से हरकत में आती है या  फिर किसी अनहोनी का इंतजार करती है।यह केवल अगस्त्यमुनि क्षेत्र के हालात नहीं उत्तराखंड के बहुत से दुर्गम क्षेत्रों में रोपवे ट्रालियों का उपयोग नदी पार करने के लिए किया जाता है।

दून के शंकर थापा का दक्षिण अफ्रीका में धमाल

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दक्षिण अफ्रीका में आयोजित हुई आयरन मैन प्रतियोगिता में आयरन मैन का खिताब जीत चुके शंकर थापा अब मलेशिया में होने वाली आयरन मैन प्रतियोगिता की तैयारी में है। यह एक ऐसी प्रतियोगिता है जिसमें शारीरिक शक्ति के साथ मानसिक शक्ति की भी परीक्षा होती है। स्विमिंग, साइकिलिंग और मैराथन दौड़ के मिश्रण वाली इस प्रतियोगिता में शंकर थापा ने वेटरन वर्ग में पहला स्थान हासिल किया था।

दून के पंडितवाड़ी निवासी शंकर थापा ने पोर्ट एलिजाबेथ दक्षिण अफ्रीका में आयरन मैन प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व किया। इसमें भारत से 14 लोगों ने भाग लिया था। प्रतियोगिता 3.8 किमी स्विमिंग से शुरू होकर 180 किमी साइकिलिंग दौड़ और 42.2 किमी मैराथन के बाद समाप्त होती है।

45 प्लस आयु वर्ग में शंकर थापा ने कुल 226 किमी की इस स्पर्धा को 13.55 घंटे में पूरा करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। शुरू से ही कुशल तैराक रहे शंकर थापा मुंबई में गहरे समुद्र में गोतखोरी का कार्य करते हैं। शंकर थापा ने बताया कि पांच साल पहले उन्हें मैराथन दौड़ में भाग लेने शुरू किया। धीरे-धीरे वह इसमें भी निपुण हो गए।

आयरन मैन की तैयारी के लिए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले कई प्रतियोगिता में भाग लिया। आयरन मैन की लंबी और थकान भरी स्पर्धा में जब आयरन मैन का खिताब जीता तो खुशी की लहर दौड़ गई। अब वह नवंबर में मलेशिया के लकांवी में होने वाली आयरन मैन प्रतियोगिता में भाग लेंगे। इसके लिए वह तैयारी में जुटे हैं।

टिहरी के कई गांवों में डायरिया का प्रकोप

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टिहरी झील में जलस्तर बढ़ने से झील से सटे ग्रामीण इलाके में डेंगू, मलेरिया और डायरिया के बढ़ते प्रभाव से ग्रामीण चिंतित हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीमारी के रोकथाम के लिए दवाइयां बांटी जा रही हैं।

झील से सटे थौलधार और प्रतापनगर के कई गांवों में इन दिनों डायरिया का प्रकोप चल रहा है, जिसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांवों में दवाइयां बंटवाई जा रही हैं। स्वास्थ्य महकमे ने लोगों से साफ पानी पीने की अपील भी की है, ताकि बीमारी से बचाव किया जा सके।

सीएमओ का कहना है कि टीएचडीसी द्वारा झील के किनारे कीटनाशक का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है, जिससे कई तरह की बीमारी फैलने का खतरा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीमारी के प्रकोप में आये गांवों में दवा वितरित की जा रही है।

यशराज की नई फिल्म ‘सुई धागा’ में वरुण व अनुष्का की जोड़ी

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यशराज में एक और नई फिल्म की घोषणा की गई है, जिसकी प्रमुख भूमिकाएं निभाने के लिए वरुण धवन और अनुष्का शर्मा का चयन किया गया है। फिल्म का टाइटल ‘सुई धागा- मेड इन इंडिया’ रखा गया है। यशराज में बनने वाली इस फिल्म के निर्माता मनीष शर्मा और निर्देशक शरत कटारिया होंगे। मनीष शर्मा और शरत कटारिया की टीम इससे पहले यशराज के लिए ‘दम लगाके हईंसा’ बना चुकी है, जिसकी प्रमुख भूमिकाएं आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर ने निभाई थी और बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म काफी सफल साबित हुई थी।

वरुण धवन और अनुष्का शर्मा ने दिलचस्प अंदाज में सोशल मीडिया पर इस फिल्म के निर्माण की औपचारिक घोषणा की। वरुण धवन और अनुष्का की जोड़ी पहली बार किसी फिल्म में काम करने जा रही है। इस फिल्म के साथ ही वरुण पहली बार यशराज में एंट्री करने जा रहे हैं। इस फिल्म को लेकर वरुण धवन का कहना है कि इस फिल्म की कहानी देसी कारोबार की जरूरत और महत्व पर फोकस करेगी, साथ ही दर्शकों का मनोरंजन भी करेगी। इस फिल्म को लेकर यशराज की ओर से जारी मीडिया बयान में कहा गया है कि ये फिल्म देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेड इन इंडिया अभियान’ को समर्पित की जाएगी।
बयान में कहा गया है कि ये फिल्म अगले साल जनवरी में शुरू होगी और 2018 में महात्मा गांधी की जयंती पर 2 अक्टूबर को इसे रिलीज कर दिया जाएगा। वरुण धवन इन दिनों सितम्बर में रिलीज होने जा रही अपने पापा की फिल्म ‘जुड़वां 2’ की शूटिंग निपटाने में बिजी हैं, तो अनुष्का इन दिनों शाहरुख के साथ अपनी दो फिल्मों को लेकर बिजी हैं।
चार अगस्त को रिलीज होने जा रही शाहरुख-अनुष्का की जोड़ी वाली फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ का प्रमोशन शुरू हो गया है और आनद एल राय की फिल्म की शूटिंग शुरू हो रही है, जिसमें शाहरुख और अनुष्का के अलावा कटरीना कैफ हैं। इन दो फिल्मों के अलावा अनुष्का की एक और फिल्म ‘परी’ शुरू हुई है। अपनी पहली फिल्म ‘रब ने बना दी जोड़ी’ के बाद अनुष्का शर्मा ने यशराज की ‘लेडीज वर्सेज रिकी बहल’, ‘बैंड बाजा बरात’, ‘जब तक है जान’ और सलमान के साथ ‘सुलतान’ फिल्मों में काम किया है।

‘हाउसफुल 4’ से अलग हुए अक्षय कुमार

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अब ये लगभग साफ हो गया है कि फिल्म हाउसफुल की चौथी कड़ी का अक्षय कुमार हिस्सा नहीं होंगे। पिछले साल ‘हाउसफुल 3’ रिलीज हुई थी, जिसमें अक्षय कुमार हिस्सा थे और बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने सौ करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया था।

अक्षय कुमार की ओर से कहा गया है कि वक्त की कमी और दूसरी फिल्मों में व्यस्तता के चलते वे ‘हाउसफुल 4’ का हिस्सा नहीं बना पाएंगे। चौथी कड़ी के निर्देशन के लिए एक बार फिर साजिद खान को लाया गया है, जिन्होंने इस सीरीज की पहली दो फिल्मों का निर्देशन किया था, लेकिन अजय देवगन के साथ ‘हिम्मतवाला’ और सैफ-रितेश के साथ ‘हमशक्ल’ के बॉक्स ऑफिस पर डिब्बागुल होने के बाद तीसरी कड़ी से उनको निर्देशन से हटा दिया गया था।

साजिद खान के मुताबिक, ‘हाउसफुल 4’ की कहानी बनकर तैयार हो गई है और कास्टिंग पर काम शरू होने जा रहा है। इस बार भी फिल्म की कहानी पिछली तीन फिल्मों की तरह लंदन में केंद्रीत होगी। इस बार भी साजिद नडियाडवाला की प्रोडक्शन कंपनी इसका निर्माण करेगी। अक्षय कुमार की ओर से ये भी कहा गया है कि फिल्म की टीम से उनके मतभेद की खबरें गलत हैं। वे साजिद नडियाडवाला की कंपनी की एक फिल्म में काम करेंगे, जिसका निर्देशन फरहाद समी करेंगे।
फरहाद ने अपने भाई साजिद के साथ मिलकर ‘हाउसफुल 3’ का निर्देशन किया था।

इसी टीम ने अक्षय कुमार की फिल्म ‘एंटरटेनमेंट’ का भी निर्देशन किया था। ये टीम बतौर लेखकर रोहित शेट्टी की सभी फिल्मों का लेखन करती आई है, लेकिन अब दोनों भाईयो के रास्ते अलग-अलग हो रहे हैं। फरहाद की नई फिल्म साजिद नडियाडवाला के बैनर में होगी, तो साजिद की फिल्म का निर्माण अजय देवगन की कंपनी में होगा।

देहरादून से लखनऊ के लिए एयर इंडिया की सीधी उड़ान

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून अपने निवासियों को हर बेहतर सेवा देने की कोशिश कर रहा है।इसी कड़ी में एयर इंडिया ने अपनी नई सेवा शुरु की है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से देहरादून के लिए एयर इंडिया की सीधी उड़ान सेवा पांच जुलाई यानि आज से शुरू हो रही है। इन उड़ानों के लिए टिकटों की बुकिंग भी शुरू हो गई है। इससे यात्रियों को काफी लाभ होगा और इससे लखनऊ से देहरादून की यात्रा करने वालों को सहूलियत मिलेगी।

आपको बतादें कि यह उड़ान पांच जुलाई से शुरू हो रही है। इसका किराया, फ्लाइट संख्या, शेड्यूल जारी कर दिया गया है और बुकिंग भी हो रही है। ये फ्लाइट रोजाना होंगी।लखनऊ से देहरादून के लिए सुबह आठ बजे उड़ान होगी।

एयर इंडिया के स्टेशन प्रबंधक देवेंद्र सिंह के मुताबिक,छोटे शहरों के लिए हवाई यात्राएं शुरू करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है। इसके लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि एक घंटे के हवाई सफर वाले शहरों को विमान से जोड़कर यात्रियों को राहत दी जाए और ढाई हजार रुपये तक किराया रखा जाए।

गौरतलब है कि देहरादून से लखनऊ के बीच रेल यात्रा करना लोगों के लिए बहुत बड़ा चैलेंज हैं।ट्रेन की संख्या कम होने की वजह से आए दिन यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।लेकिन एयर इंडिया की इस पहल से ना केवल टूरिस्ट को फायदा होगा बल्कि देहरादून से लखनऊ के बीच की दूरियां भी कम हो जाऐंगी।

तहसील दिवस पर अधिकारियों की गैर मौजूदगी से मायूस लौटे फरियादी

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एक महीने से अपनी समस्याओं के समाधान होने की प्रतिक्षारत फरियादियों को उस समय निराशा हाथ लगी जब महीने में लगने वाले तहसील दिवस में उपजिलाधिकारी सहित जिम्मेदार विभागीय अधिकारी भी मौजूद नहीं रहे।

बताते चलें कि महीने के प्रथम सप्ताह में प्रत्येक मंगलवार को उत्तराखंड राज्य में लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार की ओर से तहसील दिवस का आयोजन किया जाता है। आज उस समय फरियादियों को निराशा हाथ लगी जब तहसील दिवस में उप जिलाधिकारी सहित अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद ही नहीं थे।
गौरतलब हो कि यह तहसील दिवस आगामी दिनों में आयोजित होने वाले का कांवड़ यात्रा सहित वर्षा कॉल प्रारंभ होने के कारण से महत्वपूर्ण समझा जा रहा था। जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगे वर्षा के कारण सिंचाई की गुलों के क्षतिग्रस्त होने के साथ सड़क-खड़ंजों व नालियों की मरम्मत के कार्यों को लेकर तहसील दिवस में पहुंचे थे। इस अवसर पर भट्टो वाला के ग्राम प्रधान का कहना था कि तहसील दिवस में अधिकारियों के न होने के कारण अब यह औपचारिक मात्र बन कर रह गया।
तहसील दिवस में मौजूद तहसीलदार रेखा आर्य ने बताया कि उनके माध्यम से जिन समस्याओं का समाधान हो सकता था वह कर दिया गया है तथा अन्य समस्याओं को संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई किए जाने की अनुशंसा के साथ भेजा गया। 

बीमार हालात में ऋषिकेश का सरकारी अस्पताल

उत्तराखंड में चार धाम यात्रा यात्रा के प्रवेश द्वार, ऋषिकेश के एक मात्र सरकारी अस्पताल के हाल सरकार के तमाम वादों की हकीकत बताने के लिए काफी है। यहाँ काफी लंबे समय से डाक्टर की कमी के चलते मरीजों को काफी दिक्केतें हो रही है, तो वहीँ हॉस्पिटल की व्यवस्था की तरफ भी कोई ध्यान देता नहीं दिख रहा है, हालात ये है कि सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में ओपीडी सेवाएं ठप्प हो चुकी है।

साल 2013 की आपदा के जख्म आज भी हर किसी के दिलं में हरे है, स्वस्थ सेवाओं की बदहाली का खामिजाय हमें उस वक्त भी भुगतना पड़ा था, पर अफसोस आपदा के  इतने साल बाद भी हालात जस के तस बने हुए है। पूरे पहाड़ों की स्वस्थ सेवाओं को जोड़ने वाले ऋषिकेश के एक मात्र सरकारी अस्पताल के हाल खराब है। सरकारी अस्पताल में कई विभागों में डॉक्टर्स की काफी कमी चल रही है, कई विभागों के सर्जन नहीं है, यहाँ तक की एमरजैंसी वार्ड में भी डॉक्टर नहीं है। ऐसे में पहाड़ों से बेहतर इलाज के लिए ऋषिकेश आने वाले मरीजों को सरकार की इस नाकामी का खामियाजा उठाना पङता है।

य़हा के लगभग 9 डॉक्टर के तबादले तो कर दिए गए लेकिन उनकी जगह अभी तक कोई डॉक्टर नहीं आया है जिसको लेकर ऋषिकेश की जनता में त्रिवेंद्र सरकार के प्रति गुस्सा है। ऋषिकेश के पहाड़ी जिलों से जुड़े होने के कारण दूर दराज से गांव के लोग इलाज के लिए ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आते है परन्तु सरकारी अस्पताल के हाल यह है। सरकारी अस्पताल के मुख्य अधीक्षक डॉ अशोक कुमार गैरोला का कहना है कि, ‘हमने डॉक्टर की कमी के लिए प्रशसन को कई बार भेजा है पर अभी तक सरकार की ओर से डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पाए है।’

उत्तराखंड बने हुए इतने साल हो गए लेकिन अफसोस यह है की अभी तक प्रदेश में स्वास्थ व्यवस्थाएं अपनी बदहाल स्थिति में है न तो अस्पतालों में डॉक्टर्स है और न ही दवा, ऐसे में प्रदेश में स्वास्थ सुविधाएँ भगवान् भरोसे चल रही है।