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इस गांव में एक शिक्षक के भरोसे हैं क्लास 6-8 के 82 छात्र

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कालसी विकासखंड के ग्राम जिसऊ का ठाकरासाधार मजरा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा छह से लेकर आठ तक के 82 छात्र-छात्राओं को शिक्षित करने की जिम्मेदारी एक शिक्षक पर हैं, जो क्लर्क का भी कार्य देखते है, साथ ही स्कूल के प्रधानाध्यापक और शिक्षक और प्रशासनिक अभिलेखों को पूरा करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास।

स्थिति यहा कि शिक्षक का अधिकांश समय पढ़ाई के बजाए अन्य कार्यों में बीत जाता है जिससे 82 बच्चों का भविष्य अंधकार में जाता दिख रहा है। मामले में स्थानीय लोगों ने डीएम से इसकी शिकायत भी की है। दो साल पहले तक इस स्कूल में चार शिक्षकों का स्टॉफ कार्यरत था। इनमें से डेढ़ साल पहले तीन शिक्षकों का अन्य स्थानों पर तबादला कर दिया गया। जिसके बाद विद्यालय में सिर्फ एक प्रधानाध्यापक बच गए। प्रधानाध्यापक भी 31 मार्च 2017 को सेवानिवृत्त हो गए। जब विद्यालय में शिक्षक व अन्य स्टॉफ के नाम पर कोई न बचा तो विभाग ने प्राथमिक विद्यालय सुरेऊ से एक शिक्षक की व्यवस्था कर इस स्कूल में भेजा। चूंकि, विद्यालय में कोई लिपिक भी नहीं है तो इस शिक्षक का अधिकांश समय पढ़ाई के बजाए विद्यालयों के प्रशासनिक अभिलेखों का कार्य निपटाने में गुजर जाता है। इस कारण बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है।

मामले में ग्रामीण पिछले एक साल से विभाग के अधिकारियों से लेकर निदेशक तक लिखित व मौखिक शिकायत कर चुके हैं। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने शिक्षा मंत्री को भी पत्र भेजकर इस स्कूल में जरुरत के मुताबिक स्टॉफ की तैनाती करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। विद्यायल प्रबंध समिति के पूर्व अध्यक्ष तुलसीराम शर्मा ने बताया कि स्कूल में फिलहाल 82 बच्चों के दाखिले हैं। शिक्षक न होने के कारण उनका भविष्य अंधकार में जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कई बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन, अब तक यहां पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती नहीं की गई। उन्होंने कहा कि अगर हालात यही रहें तो ग्रामीणों को मजबूरन सड़क पर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़नी पड़ेगी।

जीएसटी समस्याओं को दूर करेंगे ये अफसर

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उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल में वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) से जुड़े व्यापारियों के समस्याओं के निस्तारण के लिए पांच अधिकारी को इस काम में लगाया गया है। प्रदेश में जीएसटी को लागू हुए पांच दिन हो गए हैं।कई मामलों में व्यापारी अभी भी भ्रमित हैं जो रोजाना दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राज्य कर कार्यालय अल्मोड़ा के तीन अधिकारियों के अतिरिक्त ज्वाइंट कमिश्नर हल्द्वानी और एडीशनल कमिश्नर कुमाऊं के सामने भी व्यापारी अपनी समस्या रख अपनी परेशनियों को आसानी से समझ सकते है। इस कार्य की मानीटरिंग राज्य कर उपायुक्त अधिकारी करेंगे। 


अल्मोड़ा कार्यालय में ही प्रतिदिन 50 से अधिक फोन कॉल जीएसटी की जानकारी के लिए आ रहें हैं। व्यापारियों को सही और त्वरित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए वाणिज्य कर प्रभाग हल्द्वानी ने अल्मोड़ा कार्यालय में हेल्प डेस्क का दायरा बढ़ा दिया है। सहायक आयुक्त कमल किशोर जोशी, डॉ. प्रियंका और राज्यकर अधिकारी चन्द्र बल्लभ को हेल्प डेस्क में तैनात किया गया है। इसके अलावा समस्या के निस्तारण के लिए ज्वाइंट कमिश्नर हल्द्वानी आर के. टंडन और एडीशन कमिश्नर कुमाऊं बीएस नगन्याल को हेल्प डेस्क में शामिल किया गया है।

हेल्प डेस्क वाणिज्य कर विभाग में करदाता व्यापारियों की समस्याओं के निस्तारण के लिए बनाई गई, हेल्प डेस्क पूरे जुलाई माह तक काम करेगी। इस हेल्प लाइन की मदद से कराधान संबंधी समस्याओं के अलावा भविष्य में लगने वाली कार्यशालाओं की जानकारी भी ले सकते हैं।
अल्मोड़ा कार्यालय के लिए
1- निशिकांत सिंह- उपायुक्त राज्य कर कार्यालय अल्मोड़ा-7055602728
2- कमल किशोर जोशी सहायक आयुक्त अल्मोड़ा- 94113335333-
3-डॉ. प्रियंका सहायक आयुक्त अल्मोड़ा- 95686147314-
4-चन्द्र बल्लभ राज्य कर अधिकारी -9012669416

हल्द्वानी कार्यालय के लिए
1- आर के टंडन- ज्वांइट कमिश्नर हल्द्वानी- 98373648162
2- बीएस नगन्याल- एडीनशल कमिश्नर कुमाऊं- 7055602802
जीएसटी के संबंध में व्यापारियों की समस्या को लेकर विभाग प्रतिबद्ध है, करदाताओं की समस्या के निराकरण के लिए हेल्प डेस्क बनाया गया है। सहायक आयुक्त वाणिज्य कर विभाग अल्मोड़ा कमल किशोर जोशी ने बताया कि व्यापारियों को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए भविष्य में भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जायेंगे। इस कार्यक्रम में सभी को जीएसटी के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

प्राइवेट बिल्डरों की मनमानी पर लगाम की तैयारी

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फ्लैट और अपार्टमेंट को लेकर बिल्डरों की मनमानी अब नहीं चलेगी। राज्य सरकार प्राइवेट बिल्डर्स की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए कड़े कदम उठाने जा रही है। प्राइवेट कॉलोनी बनाने वाले बिल्डरों को अब मकानों की संख्या बताने के साथ ही उसकी कीमत का रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा। शहरों में लगातार कॉलोनियों और प्राइवेट फ्लैट की संख्या बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं घर लेने के सपने को पूरा करने का दावा करने वाले कई बड़े बिल्डर अपनी मनमानी चलाकर लोगों को परेशान भी करते हैं। जिससे प्राइवेट बिल्डर्स के काम करने के तरीकों पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। साथ ही कई मामलों में इस तरह की ठगी, धोखाधड़ी के मामले भी सामने आते रहते हैं। लेकिन अब राज्य सरकार प्राइवेट बिल्डर्स की इस तरह की मनमानी को रोकने के लिए सख्त हो गई है।
शहरी विकास मंत्री का कहना है कि अब जो बिल्डर अपनी कॉलोनी बनाएगा वह बनाए जाने वाले मकानों की संख्या और उसकी कीमत का पंजीकरण कराएगा, जिसे प्राधिकरण द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा की पंजीकरण संबंधी सभी सुविधाएं सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से दी जाएंगी। ताकि किसी को भी किसी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
इधर दून रेजीडेंस वेलफेयर के अध्यक्ष डॉ. महेश भंडारी का दावा है कि अब देहरादून में फ्लैट सस्ते हो जाएंगे। भंडारी का कहना है कि अभी तक बिल्डर लगातार मनमानी कर रहे थे। इतना ही नहीं बिल्डर बिना रजिस्ट्रेशन के ही प्लॉट बेचने का विज्ञापन जारी करने के साथ ही प्रोजेक्ट शुरू कर देते थे। जिससे कई बार आम लोगों के साथ धोखा भी हो जाता था। लेकिन, अब बिल्डरों की मनमानी पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी। बिल्डर को अब अपने प्रोजेक्ट को पहले रजिस्टर कराना होगा। साथ ही ग्राहक को निर्धारित समय में घर भी देना होगा। ऐसा न करने पर ग्राहक बिल्डर से जुर्माना भी ले सकता है।

संदिग्ध परिस्थितियों में पशु चिकित्सा अधिकारी की मौत

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पशुपालन केन्द्र दुर्गाधार में तैनात पशु चिकित्साधिकारी डाॅ पीके द्विवेदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। हालांकि प्रथम दृष्टिया मौत के कारणों को आत्महत्या बताया जा रहा है। तहसील प्रशासन की ओर से शव का पंचायतनामा भरकर जिला चिकित्सालय पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

दरअसल, पुश चिकित्साधिकारी डाॅ पीके द्विवेदी मुख्यालय के बेलणी में किराये के भवन पर निवास करते थे। उनकी ड्यूटी मुख्यालय से पन्द्रह किमी दूर पशुपालन केन्द्र दुर्गाधार में थी। वे कल सांय को अपने निवास पर आये, जिसके बाद बुधवार की सुबह ग्यारह बजे तक भी उनके कमरे के भीतर से कोई हलचल न होने पर आस-पास के लोगों को शक होने लगा। उन्होंने खिड़की से झांका तो भीतर डाॅ द्विवेदी का सिर बालटी के अंदर था और वे कोई हलचल नहीं कर रहे थे। जब लोगों ने दरवाजा खोलने की कोशिश की तो अंदर से कुंडी लगी थी। इसके बाद मकान मालिक को सूचना दी गई और मकान मालिक द्वारा पुलिस और पशु पालन विभाग को जानकारी दी गई।

मामला राजस्व क्षेत्र का होने के कारण तहसील प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। करीब डेढ़ बजे के करीब तहसील और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में कमरे का दरवाजा तोड़ा गया। जिसके बाद अंदर की स्थिति देखकर हरकोई हैरान रह गया।

डाॅ द्विवेदी के सिर को पीआरडी के जवानों ने बालटी से बाहर निकाला तो डाॅ द्विवेदी के नाक से खून निकलने के साथ ही चेहरे पर सूजन आई हुई थी। शव को बाहर निकालते ही कमरे में बदबू भी फैल गई, जिससे अंदाजा लगाया गया कि डाॅ द्विवेदी की मौत रात को ही हो गई थी। तहसील प्रशासन की टीम द्वारा शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया।

राजाजी टाइगर रिजर्व में  25 साल के  नर हाथी की मौत

 राजाजी पार्क, ऋषिकेश की गोहरी रेंज में  एक 25 साल के  नर हाथी का शव  मिलने से हड़कंप मच गया हालाकि बताया जा रहा है की हाथी की खाई में गिरने से मौत हुई है।  राजाजी पार्क के गौहरी रेंज की लक्ष्मण झूला बीट का यह मामला है, जंगल में घास काटने गयी महिलाओं ने वन विभाग को इसकी जानकारी दी।

मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि दो से तीन दिन पहले हाथी की गड्ढ़े में गिरने से मौत हुई थी, उसकी उम्र लगभग 25 साल होने का अनुमान है।

मारे गए हाथी के दोनों दांत सुरक्षित मिले हैं, इससे उसका शिकार किए जाने की आशंका नहीं है। शव के पोस्टमार्टम के लिए चिकित्सकों के दल को बुलाया गया है. इसके बाद मौत की असली वजह पता चस सकेगी.

 

दून पुलिस ने पकड़ी देसी शराब की पेटियां

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एसएसपी देहरादून के निर्देशन में जनपद पुलिस द्वारा नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक नगर एवं क्षेत्राधिकारी सदर/ नगर महोदय के नेतृत्व में बुधवार 05/07/17 को थाना कैंट पुलिस एवं एस0ओ0जी0 की संयुक्त टीम द्वारा किशन नगर चौक के पास से एक मैक्स पिकअप यूपी0 12 टी0 1785 में 50 पेटी अवैध देसी मसालेदार शराब बरामद की गई। चालक मौके से गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। परिचालक की सीट पर बैठे व्यक्ति सुनील पुत्र जगन्नाथ निवासी 194 गांधीग्राम, कावली रोड, थाना कोतवाली नगर देहरादून को वाहन के साथ हिरासत मे लिया गया। उपरोक्त संबंध में थाना कैंट में धारा 60/72 आबकारी अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया। फरार अभियुक्त के संबंध में जानकारी प्राप्त कर गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

नाम पता गिरफ्तार अभियुक्तगण:-

  • सुनील पुत्र जगन्नाथ निवासी- 194 गांधीग्राम, कांवली रोड, थाना कोतवाली नगर, देहरादून।
  • बरामदगी:- 50 पेटी देसी शराब।

पुलिस टीम :-

  •  शंकर सिंह बिष्ट, प्रभारी निरीक्षक कैंट।
  • शंभू सिंह, चौकी प्रभारी बिंदाल।
  •  कॉन्स्टेबल अमित परमार, धनपाल।

एस0ओ0जी0 टीम :-

  • पी0डी0 भट्ट, एस0ओ0जी0 प्रभारी देहरादून।
  • कांस्टेबल प्रमोद कुमार,
  • कांस्टेबल चालक विपिन राणा।

अल्मोड़ा की बेटियों में कुछ बात तो है

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महिला वर्ड कप हो या फिर अदाओ का हूनर अल्मोडा की बेटियों ने हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रखा है… पहले एकता बिष्ट की कामयाबी से अल्मोडा गौरवांवित था तो वहीं अब रोशनी की चमक से भी अल्मोडा जमगा रहा है, रोशनी ने अपने जलवे रैम्प पर इस कदर बिखरे की उसके सामने सभी फिके नजर आये, मुंबई में 26 से 30 जून के मध्य आयोजित डैलीवुड मिस्टर एंड मिस इंडिया-2017 प्रतियोगिता में अल्मोड़ा की रोशनी बिष्ट स्टेट विनर रहीं। वह मिस उत्तराखंड चुनी गई। उन्हें मोस्ट इंटरनेशनल लुक के टाइटिल से भी नवाजा गया। उनकी इस उपलब्धि पर लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

इस प्रतियोगिता के लिए उनका चयन पिछले दिनों रुद्रपुर में हुए ऑडिशन के आधार पर हुआ। मुंबई में हुई प्रतियोगिता में वह मिस उत्तराखंड चुने जाने के साथ ही टॉप-15 फाइनेलिस्ट मिस इंडिया में शामिल हैं। इस प्रतियोगिता में रोशनी को मोस्ट इंटरनेशनल लुक के टाइटिल से भी नवाजा गया। रोशनी का पैतृक गांव विकास खंड धौलादेवी अंतर्गत गुरुड़ाबाज है। वर्तमान में वह दुगालखोला कस्बे में रहती हैं। उनके पिता धन सिंह बिष्ट क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा माता गीता बिष्ट भैसियाछाना में बाल विकास परियोजना अधिकारी हैं। रोशनी की इस उपलब्धि पर नगर समेत गुरुड़ाबांज के ग्रामीणों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

अब पीपीपी मोड पर उठेगा घरों का कूड़ा

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नगर निगम की विभागीय समीक्षा बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में निगम के कई फैसलों के धरातल पर उतरने से दूनवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। बैठक में कई योजनाओं पर पीपीपी मोड पर देने को लेकर भी सहमति बनी। अब तक शहर के डोर टू डोर कूड़ा उठाने को लेकर जहां नगर निगम को विरोध झेलना पड़ रहा था। वहीं अब निगम बाहरी एजेंसी के साथ इसे लेकर अनुबंध करेगा। इस योजना की स्वीकृति के लिए निगम शासन को प्रस्ताव भेजेगा। 31 जुलाई तक सहस्त्रधारा ट्रंचिंग ग्राउंड का कूड़ा शीशमबाड़ा में हर हालत में शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए मेयर ने सभी वाहनों व सफाई कर्मचारियों व डीपीआर की सूची अधिकारियों को उपलब्ध कराने को निर्देशित किया है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि व्यापारी, ठेली, सब्जी विक्रेताओं को निगम की ओर से सड़क पर कूड़ा न बिखेरने को लेकर सूचित किया जाएगा। यदि किसी विक्रेता की दुकान पर कूड़ेदान नहीं पाया जाता है तो उसे मोटा जुर्माना वसूला जाएगा। जुर्माने के रूप में निगम पांच सौ से पांच हजार तक की राशि वसूलेगा। इसके अलावा समीक्षा बैठक में यह भी तय किया गया कि निगम पलटन बाजार, धामावाला, गांधी रोड पर अवैध ठेलियों के खिलाफ अभियान चलाएगा। यदि नियम के विरुद्ध कोई ठेली रेहड़ी लगाते हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, तय वेंडर जोन पर ही ठेलियों को लगाने की अनुमति दी जाएगी।
बैठक में यह भी फैसला हुआ कि होटल, मॉल, रेजिडेंसी, ढाबा, हॉस्टल आदि से यदि एक दिन में सौ किलो से अधिक का कूड़ा निकलता है तो उन्हें कूड़े का निस्तारण खुद करना होगाय़ यदि निरीक्षण के दौरान कोई पकड़ में आता है। तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जिन स्थानों पर रात्रि को नियमित कूड़ा डाला जाएगा उन स्थानों पर सीपी विन्स लगाए जाएंगे ताकि कूड़ा जमीन पर न बिखरे।

प्रॉपर्टी का टैक्स होगा ऑनलाइन
अभी तक प्रापर्टी टैक्स जमा करने के लिए कोई अतिरिक्त व्यवस्थित नहीं थी लेकिन, अब निगम द्वारा आॅनलाइन मोड में भुगतान करने की सुविधा दी जाएगी। इसके साथ निगम ने टैक्स कलेक्शन का कार्य भी पीपीपी मोड पर किए जाने का शासन को प्रस्ताव भेजा है।
रवनीत चीमा, मुख्य नगर आयुक्त ने बताया कि दूनवासियों को समस्या से जल्द बाहर निकालने को लेकर समीक्षा बैठक की गई जिसमें अहम फैसले लिये गए। जल्द योजना को धरातल पर उतारा जाएगा।

बाढ़ से निपटने को हरिद्वार डीएम सख्त

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जिले में बारिश व बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए अब जिलाधिकारी ने सख्त रुख अख्तियार किया है। जिलाधिकारी ने सभी तहसीलों के उपजिलाधिकारियों व तहसीलदारों को चेताया कि उनके तहसील क्षेत्र में बाढ़ व आपदा से निपटने में लापरवाही साबित हुई तो प्रतिकूल प्रविष्टि देंगे।

जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि आपदा से निपटने के लिए धन की कमी कतई आड़े नहीं आएगी। बारिश से संपत्ति के नुकसान पर दोबारा निर्माण के लिए तत्काल धनराशि दी जाएगी। प्राथमिक स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों की छत गिरने पर डेढ़-डेढ़ लाख, एक किलोमीटर तक की सड़क मरम्मत के लिए एक लाख रुपये तत्काल दिए जाएंगे। आपदा से निपटने के लिए सभी तहसीलों में इंतजाम किए हैं। जहां भी उपकरणों की कमी होगी, वहां के उपजिलाधिकारी तीन लाख रुपये तक की खरीददारी बगैर टेंडर निकाले सीधे बाजार से क्रय कर कंट्रोल रूम या बाढ़ चौकी पर रखवा सकते हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन के पास दो करोड़ रुपये हैं। बाद में धन के खर्च करने का सत्यापन भी कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसके बाद भी आपदा से निपटने में लापरवाही हुई तो संबंधित को बख्शेंगे नहीं।उन्होंने कहा कि हम खुद बाढ़ चौकियों का निरीक्षण करेंगे, किसी के अकारण अनुपस्थित रहने पर उस पर कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि जहां भी सड़क टूटी होने या गढ्ढे होने से दुर्घटना में जनधन हानि हुई तो संबंधित विभाग के जिम्मेदार के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराएंगे।

सरकार की मंशा पर अफसरों की लेटलतीफी

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सरकार भले ही लोगों को एक मंच पर समस्याओं के समाधान देने के लिए तहसील दिवस आयोजित करने को लेकर गंभीरता दिखा रही हो, लेकिन अधिकारी इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। नई सरकार के पहले तहसील दिवस में ही अफसरों की लेटलतीफी नजर आई। दो-चार विभागों को छोड़कर बाकी के अफसर साढ़े दस बजे शुरू होने वाले तहसील दिवस में ग्यारह बजे के बाद हाथ हिलाते हुए पहुंचे और खानापूर्ति कर पल्ला झाड़कर निकल लिए।

सुबह साढ़े दस बजे उपजिलाधिकारी प्रत्युष सिंह व तहसीलदार एमसी रमोला की अध्यक्षता में तहसील दिवस शुरू हुआ, तब तक परिसर में सिर्फ कृषि, आरडब्ल्यूडी, सेवायोजन व समाज कल्याण विभाग के अधिकारी मौजूद थे। इसके बाद धीरे-धीरे अधिकारियों का आना शुरू हुआ और दो बजे तक चलने वाले कार्यक्रम में पौने बारह बजे तक तक रायपुर ब्लॉक, सहकारिता, लोनिवि, जिला प्रोबेशन, जल निगम, जिला पूर्ति, जल संस्थान, उद्योग, बाल विकास, मुख्य उद्यान अधिकारी, उद्यान सचल, आयुर्वेद, सूचना व आर्येश के अधिकारी पहुंचे। जबकि, सिंचाई, लघु सिंचाई, स्वजल, शिक्षा विभाग व एमडीडीए के अधिकारी तो 12 बजे के बाद पहुंचे।

अधिकांश अफसर जहां तहसील दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देरी से पहुंचे वहीं 12 विभाग तो ऐसे हैं, जिनके अधिकारियों ने तहसील दिवस में आना भी जरुरी नहीं समझा। जबकि, तहसील प्रशासन की ओर से उक्त विभागों को पहले ही इस संबंध में सूचित किया जा चुका था। तहसील दिवस में आने वाले विभागों में कृषि विभाग, आरडब्ल्यूडी, सेवायोजन, समाज कल्याण, रायपुर ब्लाक, सहकारिता, लोनिवि, जिला प्रोबेशन, जल निगम, जिला पूर्ति, जल संस्थान, उद्योग, बाल विकास, उद्यान विभाग, उद्यान सचल दल केंद्र, आयुर्वेद, आर्येश, राजस्व विभाग, जिला सूचना, सिंचाई, लोनिवि, लघु सिंचाई, पुलिस, स्वजल, शिक्षा विभाग, एमडीडीए शामिल थे, जबकि पशुपालन, अल्पसंख्यक कल्याण, स्वास्थ्य विभाग, बंदोबस्त विभाग, परिवहन, गन्ना विभाग, वन विभाग, यूपीसीएल, बाढ़ नियंत्रण, डीआरडीए, डीआईसीडी, नगर निगम के अधिकारी इस मौके पर नहीं पहुंचे।

तहसील दिवस में शिकायतों की स्थिति पर गौर करें तो राजस्व विभाग की कुल 53 शिकायतें आई और इनमे से 51 का निस्तारण कर दिया गया। समाज कल्याण विभाग की सभी 25 शिकायतें निस्तारित की गई। विकास विभाग और पुलिस विभाग के एक-एक मामले आए और निस्तारित किए गए।