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आतंकी अलर्ट के बीच कांवड़ मेले के लिए प्रशासन तैयार

तीर्थनगरी ऋषिकेश बम बम भोले कि गूंज से घुजने लगी है। सावन माह में चलने वाली नीलकंठ यात्रा के लिए बड़ी संख्या में शिवभक्त कावड़िए ऋषिकेश का रुख करने लगे है।  जिसके चलते प्रशाशन भी मुस्तीद हो गया है। साथ ही मेले में आतंकी अलर्ट को देखते हुए खास तैयारी की गई है।

9 जुलाई से शुरू हो रही नीलकंठ कावड़ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसला शुरू हो गया है। जिसके लिए टेहरी पुलिस प्रशाशन ने कावड़ ड्यूटी पर तैनात पुलिस कर्मियों की ब्रीफिंग की और सारे पुलिस कर्मियों को दिशा निर्देश दिए। इसी के साथ साथ कांवड़ मेले में आतंकी हमले के अलर्ट को देखते हुए भी तैयारियां की जा रही है, जिसमे एटीएस ओर बोम स्कोँङ की टीमें भी हर वक्त पूरे मेले पर नजर रखेगी। कुछ पुलिस कर्मियों को सादी वर्दी में भी तैनात किया जा रहा है जिससे हर तरह के खतरे से निपटा जा सके ।

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आपको बता दे की नीलकंठ कावड यात्रा शुरू होते ही कावड़िये दिल्ली -हरियाणा -पंजाब -यूपी से गंगा जल लेने लिए हरिद्वार – ऋषिकेश पहुँचते है, यहाँ जल लेकर कांवड़िये नीलकंठ महादेव में सबसे पहले जलाभिसेक करते है, नीलकंठ कावड यात्रा हर साल उत्तराखंड प्रशाशन के लिए एक चुनोती की तरह रहती है।

ड्यूटी पर तैनात पुलिस कृमियों को निर्देशित करते हुए एसएसपी टिहरी ने कहा की प्रत्यक सोमवार को बड़ी संख्या में कावड़िए जलाभिषेक के लिए नीलकंठ महादेव पहुंचेंगे जिसके लिए ट्रैफिक ववस्था, जल पुलिस और सभी संदिग्धो पर निगाह रखी जाएगी। ये चुनौतीपूर्ण काम है जिसको सभी पुलिस कर्मियों को तत्परता से निभाना है।

इस बार की यात्रा में बड़ी संख्या में शिव भक्त नीलखण्ड महादेव के जलाभिषेक के लिए आएंगे जिसके लिए प्रशासन व्यवस्था बनने में जुट गया है। अब देखने लायक बात यह होगी की सावन के इस कावड़ यात्रा में श्रद्धालु को सरकारी दावों के अनुसार इंतजाम और सुरक्षा मिल पाती है या नहीं।

नहीं होगा जिन्दगियों से खिलवाडः हाईकोर्ट

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अब जिन्दगियों से खिलवाड नहीं होगा, जिसकी जैसी योग्यता उसको वैसा कार्य दिया जाएगा। जिस विषय के विशेषज्ञ होंगे उसी विषय के अनुसार जांब भी मिलेगी, ये निर्णय हाईकोर्ट ने लिया जब अस्पतालों में कार्य करने वाली नर्स-पदों पर कला वर्ग के अभ्यर्थियों ने आवेदन दिया था, जिसको लेकर कोर्ट ने साफ कर दिया है कि साईंस के छात्र ही नर्स जैसे कार्य को बेखुबी कर सकते हैं।
कला वर्ग के अभ्यर्थियों की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने एएनएम के पदों पर भर्ती के लिए सिर्फ इंटरमीडिएट पास विज्ञान वर्ग के अभ्यर्थीयों को ही पात्र माना है, कला वर्ग के नहीं। नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को सही ठहराते हुए कला वर्ग के अभ्यर्थियों की ढाई दर्जन विशेष अपीलों को खारिज कर दिया। खंडपीठ के आदेश के बाद राज्य में 440 एएनएम पदों पर नियुक्ति पत्र जारी करने का रास्ता साफ हो गया है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष हरिद्वार निवासी संतोष चंद्र की विशेष अपील पर सुनवाई हुई। विशेष अपील में 11 अप्रैल के एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी। एकल पीठ ने एएनएम भर्ती में सेवा नियमावली-1997 का पालन करने के निर्देश दिए थे। कहा था कि एएनएम के लिए इंटरमीडिएट पास होना अनिवार्य है।

एकलपीठ के खिलाफ दायर विशेष अपील में कहा गया था कि उनका एएनएम डिप्लोमा भारतीय नर्सिंग काउंसिल से मान्य है। इसलिए उन्हें इस पद के लिए अयोग्य नहीं माना जा सकता, भले ही उन्होंने 12वीं पास कला वर्ग से किया हो।  सरकार की ओर से सीएससी परेश त्रिपाठी ने कहा कि एएनएम की सेवा नियमावली-1997 में साफ उल्लेख है कि विज्ञान वर्ग से 12वीं पास व एएनएम की ट्रेनिंग पूरी कर चुके ही इस पद के लिए योग्य माने जाएंगे।

उनका कहना था कि एएनएम का मुख्य काम अस्पताल तथा हेल्थ सेंटर में है। एएनएम को प्रसव जैसे अहम कार्य में तक ड्यूटी देनी पड़ती है, ऐसे में उसका विज्ञान वर्ग से 12वीं उत्तीर्ण होना जरूरी है। खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद विशेष अपील खारिज कर दी।

किसानों की मौत पर कांग्रेस के घडियाली आंसू

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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भ्रष्ट्राचार फैलाकर राज्य सरकार का खजाना खाली कर दिया था। अवैध खनन पर अंकुश लगाकर भाजपा सरकार ने उसकी भरपाई की है, कहा कि राज्य सरकार ने तीन माह में तीन जिलों में अवैध खनन पर अंकुश लगाकर 47 करोड़ का राजस्व वसूल चुकी है। कहा कि सरकार से जनता को जो उम्मीदें थीं, उन पर राज्य सरकार खरा उतरने का पूरा प्रयास कर रही है।

प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए राज्य की जनता ने भाजपा को बहुमत से विस चुनाव जिताया है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि हाल में हुई किसानों की मौत की घटनाओं पर कांग्रेसी नेता हाथ सेंक रहे हैं। जबकि कांग्रेस के 10 वर्ष के कार्यकाल में डेढ़ लाख से भी अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं, लेकिन ये आंकड़े कांग्रसियों को दिखाई नहीं दे रहे हैं। कहा कि जिन कांग्रेसियों ने किसानों की जमीनों को कब्जा कर उनका दमन किया है, वह आज जगह-जगह धरना प्रदर्शन कर किसानों के रहनुमा बनने की कोशिश रहे हैं। उन्होंने कहा कांग्रेस की नीतियों को किसान समझ चुका है। कांग्रेस के इस दोहरे चरित्र में किसान फंसने वाला नहीं है।

भट्ट ने कहा भाजपा की सफलता से कांग्रेस के पेट में दर्द शुरू हो गया है। कांग्रेस आज सिर्फ लोगों को बरगलाने का काम कर रही है। पहाड़ों से पलायन के रोकने पर उन्होंने कहा कि पलायन को रोकने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठन किया जा चुका है। जो कि पहाड़ में रोजगार उत्पन्न करने की रणनीति तैयार करेगी।

कांस्टेबल प्रमोद राणा को राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

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थाना नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में मृत हेड कांस्टेबल प्रमोद राणा के पार्थिव शरीर को शनिवार को पुलिस लाइन देहरादून में पूरे राजकीय सम्मान के साथ शोक सलामी दी गई। इस दौरान पुलिस महानिदेशक ने वहां पर मौजूद मृतक के परिजनों को सांत्वना देते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में पूरा पुलिस परिवार आपके साथ है।

मौके पर पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड एमए गणपति, अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, पुलिस महानिरीक्षक अभिसूचना एपी अंशुमन, पुलिस महानिरीक्षक गढवाल परिक्षेत्र पुष्पक ज्योति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून निवेदिता कुकरेती कुमार व उपस्थित अन्य अधिकारी/ कर्मचारियों ने दिवंगत प्रमोद राणा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभिनि श्रद्धांजलि दी। 

हेलमेट और सीट बेल्ट ना लगाने पर होगी ”स्पेशल क्लासेस”

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परिवहन विभाग अब सभी 13 जिलों में वाहनों की सुरक्षा के लिए सीट बेल्ट और हेलमेट पहने बिना पहचाने गए वाहन चालकों के लिए विशेष ‘कक्षाएं’ आयोजित करेगा। हाल में यहां आयोजित एक बैठक में परिवहन आयुक्त डी.सेंथिल पांडियन ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित करे कि यातायात नियम उल्लंघनकर्ता सभी जिलों में अनिवार्य वर्गों में भाग ले। देहरादून जिले में पहले से ही कक्षाएं चल रही हैं, और अब यह सत्र अन्य जिलों में बढ़ाए जाएंगे।

पंडियन ने कहा, “सभी लोगों को हेलमेट और सीट बेल्ट पहनने के लिए दंडित करने से पहले संबंधित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों में दो घंटे तक अनिवार्य कक्षाओं में भाग लेना होगा उसके बाद दंड का भुगतान करना होगा और अंत में जाना होगा।” सत्रों के दौरान सड़क सुरक्षा पर युक्तियां दी जाएंगी। लेकिन स्थानीय लोगों को मानना है कि शायद ही इस तरह की कक्षाएं सड़क सुरक्षा में सुधार करने में मददगार साबित होंगी। लोगों का मानना है कि ज्यादातर नियम उल्लंघनकर्ता शायद ही इन कक्षाओं को गंभीरता से लें।

क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, कुल 1,327 उल्लंघनकर्ताओं में से केवल 607 जो संख्या में आधे से भी कम है उन्होंने दिसंबर 2015 में जब कक्षाएं शुरू हुई थीं तब आरटीओ में इस कक्षा में भाग लिया गया था। हेलमेट नहीं पहने हुए कुल 899 दोपहिया सवारों को दंडित किया गया जबकि दिसंबर 2015 से जून 2017 तक सीट बेल्ट नहीं पहनने वाले वाहन चालकों की संख्या 428 थी।

आरटीओ के एक अधिकारी ने कहा, “बड़ी संख्या में उल्लंघन करने वालों ने दंड का भुगतान नहीं करने का फैसला किया और कक्षाएं छोड़ दीं,” एक आरटीओ अधिकारी ने कहा, इस श्रेणी में सड़क सुरक्षा नियमों और जोखिम और दुर्घटना में कमी के सुझावों के महत्व पर लघु फिल्मों की स्क्रीनिंग शामिल थी।

वहीं दून निवासी कल्याण मोर्चा के अध्यक्ष महेश भंडारी ने कहा कि युवाओं को थकाऊ स्पीच के लिए बैठाकर,अगली बार उन्हें यातायात नियमों का पालन करने के लिए आवश्यक रूप से प्रेरित नहीं किया जा सकता। चूंकि सीट बेल्ट और हेल्मेट पहनने से मृत्यु दर बहुत कम हो सकता है, इसलिए सरकार को नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए कड़े नियम जैसे वाहनों की उसी समय जब्ती या ड्राइवरों के लाइसेंस के निलंबन की तरह के प्रावधान बनाने चाहिए।

आपकों बतादें कि सड़क सुरक्षा ड्राइव के अंतगर्त देहरादून एसएसपी भी आए दिन कुछ ना कुछ पाॅजिटीव करती रहती है जिससे सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में लोगों को काफी जागरुता मिल रही है।

शरणार्थी बनने के लिए जेल में बंद रूसी नागरिक अनशन पर

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उत्तराखंड की टिहरी जेल में बंद रूसी नागरिक ने पिछले एक सप्ताह से अनशन पर है। हालात बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल टिहरी में भर्ती कराया गया है। उसने एक जिद पकड़ रखी है जिसे पूरा कराने के लिए पानी छोड़ने की चेतावनी भी दे चुका है।

रूसी नागरिक उत्तरकाशी में बिना वीजा और पासपोर्ट के पिछले एक माह से रह रहा था। उसने संयुक्त राष्ट्र को मेल भेजकर भारत में शरणार्थी बनकर रहने की इजाजत मांगी है। उत्तरकाशी अभिसूचना इकाई और पुरोला पुलिस ने एक जुलाई को डामटा से उसे गिरफ्तार किया था।

यह नागरिक सालों से बिना वीजा और पासपोर्ट के रह रहा था। पुलिस ने फॉरेन अधिनियम के तहत उसके खिलाफ मामला दर्ज कर तीन जुलाई को टिहरी जेल भेजा, लेकिन उसने गिरफ्तार होने के दिन से खाना त्याग दिया है। इस समय वह चिकित्सकों निगरानी में है।

पुलिस लाईन में लगा हैल्थ कैम्प

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पुलिस लाईन देहरादून में पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड श्री एम.ए. गणपति ने मैक्स हास्पिटल द्वारा उत्तराखण्ड पुलिस कर्मियों के लिए आयोजित किए जा रहे 2 दिन के मेडिकल कैम्प का शुभारम्भ किया। मेडिकल कैम्प के दौरान अपने सम्बोधन में महानिदेशक महोदय ने बताया कि पुलिस कर्मियों की दिनचर्या अनियमित होती है, जिस कारण वह अक्सर बीमारी से ग्रस्त हो जाते है। इस तरह के मेडिकल कैम्पों से वह लाभ उठा सकते है। भविष्य में भी पुलिस कर्मियों के लिए इस तरह के कैम्प आयोजित किये जायेंगे। उनके द्वारा मेडिकल कैम्प आयोजित करने के लिए मैक्स हास्पिटल के प्रबन्धकों का आभार प्रकट किया गया।

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मेडिकल हैल्थ कैम्प में पुलिस कर्मियों के हार्ट, हड्डी में कैल्शियम की मात्रा, शुगर, ब्लडप्रेशर, ई.सी.जी., डी.एम.डी. आदि की जाँचे की जायेगी। आज उक्त कैम्प में उत्तराखंड पुलिस के सभी जनपदों में नियुक्त खिलाड़ियों की जाँचे की जा रही है।

उक्त मेडिकल कैम्प के दौरान पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन, पुलिस महानिरीक्षक अभिसूचना, पुलिस उप महानिरीक्षक गढवाल परिक्षेत्र, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून तथा मैक्स हास्पिटल से डा. गौरव गुप्ता आर्थो फिजिशियन, डा. आनन्दिता जर्नल फिजीशियन,डा. सन्दीप तनवर वाईस प्रेसिडेंट आपरेशन् मौजूद रहे।

ड्राईवर ने ट्रांसपोर्टर को मारी गोली

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रुद्रपुर में गाड़ी की चाबी खो जाने के मामूली विवाद पर एक स्कूल बस के ड्राइवर ने स्कूल के ही ट्रांसपोर्ट इंचार्ज को गोली मार दी। स्कूल परिसर में हुई फायरिंग से वहां अफरा-तफरी मच गई। घायल ट्रांसपोर्ट इंचार्ज को आनन-फानन में एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है। जहा से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना के बाद ड्राइवर फरार हो गया।
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स्कूल के एमडी ने पुलिस को मामले की तहरीर दी है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई है। मॉडल कालोनी स्थित स्कूल में दूधिया नगर निवासी हरीश स्कूल बस का ड्राइवर है। हरीश से बस की बीती शाम चाबी कहीं खो गई। इस पर हरीश ने ट्रांसपोर्ट इंचार्ज गांधी कालोनी निवासी कैलाश से बस की चाबी खो जाने की बात कहते हुए दूसरी चाबी मांगी। इस पर ट्रांसपोर्ट इंचार्ज कैलाश ने चाबी खो जाने का एक प्रार्थनापत्र स्कूल के नाम देने के बाद ही नई चाबी मिलने की बात कही गई, इस पर हरीश की कैलाश से तीखी नोंकझोंक हो गई। उस समय तो हरीश वहां से चला गया, लेकिन थोड़ी देर बाद ही बसों के पास खड़े ट्रांसपोर्ट इंचार्ज कैलाश को तमंचा निकालकर सीधे गोली मार दी।
उधमसिंह नगर के एएसपी देवेंद्र पींचा ने बताया कि स्कूल बस के ड्राइवर और स्कूल के ही ट्रांसपोर्ट इंचार्ज के बीच चाबी खो जाने को लेकर विवाद हो गया था। जिसमें ड्राइवर ने अपने तमंचे से इंचार्ज पर जानलेवा हमला बोल दिया। इस हमले में इंचार्ज घायल हो गया। जिसे पहले निजी अस्पताल और बाद में जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। घायल ट्रांसपोर्ट इंचार्ज की हालत में सुधार है। उन्होंने बताया आरोपी की तलाश की जा रही है।

 

चीन को अपने गिरेबां में झांकने की जरूरत

सिक्कम में गहराते सीमा विवाद को लेकर चीन ने समझौते की संभावना से साफ इनकार करके यह साबित कर दिया है कि वह भारत को विभिन्न मोर्चों पर आगे बढ़ते हुए देखना नहीं चाहता है तथा उसकी भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने सहित अन्य मुद्दों के समाधान में कोई दिलचस्पी नहीं है। भारत में चीन के राजदूत द्वारा कहा गया है कि यह भारत सरकार को तय करना है कि किन विकल्पों को अपनाकर गतिरोध खत्म किया जा सकता है। चीन के थिंक टैंक और ऑफिशल मीडिया के हवाले से इस मामले के युद्ध तक पहुंचने की आशंकाओं पर जब राजदूत से पूछा गया तो उनका कहना था कि ऐसे विकल्प, वैसे विकल्प की तमाम बातें हो रही हैं। यह (सैन्य विकल्प) आपकी सरकार की नीतियों पर निर्भर है। हम संकट का शांतिपूर्ण हल चाहते हैं, लेकिन उसके लिए इलाके से भारतीय सैनिकों की वापसी पहली शर्त है। दोनों देशों के बीच वार्ता के लिए यह जरूरी है।
चीन द्वारा इस ढंग से भारत पर दबाव बनाने और उसे युद्ध के लिये भडक़ाने जैसी हरकतें तो चीन द्वारा पहले से ही अंजाम दी जाती रही हैं। चीन भारत को 1962 की जंग के नतीजों की याद भी दिलाता रहता है। ऐसे में चीन को अब यह समझना जरूरी है कि उसके द्वारा 2017 में 1962 की जंग के नतीजों की याद दिलाने का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। अब तो भारत की गिनती भी विश्व के ताकतवर मुल्कों में होने लगी है तथा भारत ने आवश्यकता पड़ऩे पर अपनी ताकत का एहसास भी कराया है। चीन द्वारा अगर भारत को शांति का पाठ पढ़ाने की कोशिश की जाए तो पहले इस संदर्भ में स्वयं चीन को ही आत्मचिंतन और आत्म विश्लेषण करने की सख्त जरूरत है। अगर हालात पर दृष्टिपात किया जाए तो चीन द्वारा विभिन्न भारतीय भूभागों पर जिस ढंग से खुद का दावा किया जा रहा है तथा अपने सैनिकों के माध्यम से आये दिन घुसपैठ व अन्य अवांक्षनीय गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि चीन बिल्कुल ही शांति का हिमायती नहीं है। वह मानवीय मूल्यों और द्विपक्षीय प्रतिबद्धताओं के पालन के प्रति भी ईमानदारी नहीं बरत रहा है।
चीन को वैसे भी सोचना चाहिए कि भारतीय बाजार में उसकी बड़े पैमाने पर पैठ है तथा भारत की बदौलत ही वह करोड़ों-अरबों रुपये का मुनाफा कमा रहा है। ऐसे में चीन द्वारा बेवजह द्विपक्षीय विवादों को बढ़ावा देने तथा भारतीय भूभागों पर आये दिन उसके द्वारा खुद का दावा जताने का कोई औचित्य नहीं है। इससे उसे कुछ भी हासिल होने वाला भी नहीं है। चीन के लिये बेहतर यही होगा कि वह मानवीय मूल्यों और अंतर्राष्ट्रीय मान्य प्रतिबद्धताओं के अनुरू ही आचरण करे। साथ ही खासकर चीन के मामले में भारत सरकार को विवेकहीनता के दलदल से बाहर निकलकर कूटनीतिक परिपक्वता व दूरदर्शिता के साथ काम करने की जरूरत है। पिछले कुछ समय से ऐसा लग रहा है कि नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्र सरकार द्वारा अमेरिका का पिछलग्गू बनने की लगतार कोशिश की जा रही है। ऐसे में चीन का चिढ़ऩा स्वाभाविक है। तो फिर भारत सरकार को चाहिये कि वह चीन को अनावश्यक ढंग से चिढ़ाने की कोशिश भी न करे। क्यों कि अमेरिका की जी हुजूरी से भारत को कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है।
अभी तक के रिकार्ड देखकर यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि अमेरिका ने भारत के प्रति अपनी मित्रवत भूमिका का निर्वहन सही मायने में कभी नहीं किया है। अब भी भारत को अमेरिका से कोई खास उम्मीद नहीं है। तो फिर चीन जैसे देशों के मामले में भारत सरकार द्वारा अमेरिका से अनावश्यक उम्मीदें पालना नासमझी ही तो है। हालांकि सिक्किम से लगी सीमा पर चीन से तनाव के बीच भारत द्वारा साउथ चाइना सी में मुक्त आवाजाही का मुद्दा उठाया गया है, जिसे चीन लगभग पूरी तरह से अपना जल क्षेत्र होने का दावा करता है। भारत को दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आइसान (असोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस) का इस मुद्दे पर साथ भी मिला है। इससे चीन पर दबाव बनाने में काफी हद तक मदद मिल सकती है लेकिन भारत सरकार इस मामले में सफल हो जाएगी, यह भी दावे के साथ नहीं कहा जा सकता, क्यों कि चीन जैसे देशों के प्रति मौजूदा सरकार की कोई स्पष्ट नीति ही नहीं है।

आधर कार्ड बनाने के लिए सीएससी को सशर्त अनुमति

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आधार कार्ड

केंद्र सरकार ने 350 कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) को आधार कार्ड बनाने की सशर्त अनुमति दे दी है। एक जुलाई को यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) की संस्तुति पर केंद्र सरकार ने इन सीएससी पर रोक लगा दी थी।

यूआईडीएआई ने आधार कार्ड बनाने में लापरवाही बरतने की शिकायत की थी। अब केंद्र सरकार इन केंद्रों की जांच कराएगा, अगर लापरवाही पकड़ी गई तो पांच साल के लिए लाइसेंस निरस्त करने के साथ नियमानुसार अन्य कार्रवाई भी की जाएगी।
हालांकि, केंद्रों से रोक हटने के बाद तीन हजार लोगों के आधार के आवेदन डंप होने बच जाएंगे। क्योंकि रोक लगने के बाद इनके आवेदन सा टवेयर में फंस गए थे। साथ ही अभिाभावकों व छात्रों को भी सरकार के इस फैसले से राहत मिली है, क्योंकि वर्तमान में ज्यादातर स्कूलों में प्रवेश के लिए आधार अनिवार्य कर दिया है। बता दें कि उत्तराखंड में 646 सीएससी हैं। 350 सीएससी पर आधार बनने बंद हुए तो शेष पर भारी भीड़ उमड़ रही थी, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही आधार के नाम पर अवैध वसूली का धंधा चल पड़ा था, जिसकी शिकायत कई लोगों ने प्रशासन से भी की थी। देहरादून सीएससी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण अरोरा ने बताया कि सख्ती सीएससी पर आधार कार्ड बनाने के निर्देश मिल चुके हैं।