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हाई मेरिट मुश्किल करेगी दाखिले की डगर

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राज्य के सभी महाविद्यालयों में दाखिले को लेकर इस बार छात्रों को काफी जद्दोजहद से गुजरना होगा। साल 2014 में हाईकोर्ट के अनुमन्य सीट्स पर दाखिले के अंतरिम आदेशों ने पहले ही राज्य के छात्रों के लिए कॉलेजों की राह मुश्किल की दी थी, उस पर मेरिट से दाखिला होने के कारण इस बार भी छात्रों के लिए कॉलेजों में दाखिला हासिल करना टेढ़ी खीर साबित होगा।

शहर के सभी डिग्री कॉलेजों में मिशन एडमिशन स्टार्ट हो चुका है। डीएवी, डीबीएस, एकेपी और एसजीआरआर पीजी कॉलेज में इस साल एडमिशन की राह बीते साल की तुलना में ज्यादा मुश्किल देखाई दे रही है। दरअसल तीन साल पहले हाईकोर्ट के अनुमन्य सीटों पर दाखिले के आदेश ने जहां डीएवी जैसे कॉलेज के लिए छात्र संख्या पर लगाम लगाने की चुनौती खड़ी की, वहीं अनुमन्य सीटों पर प्रवेश होने के छात्र-छात्राओं के लिए सीटों का संकट भी ला दिया। अनुमन्य सीटों और मेरिट के आधार पर दाखिला होने के कारण बीते साल भी संस्थानों में मेरिट का ग्राफ काफी हाई रहा था। जहां डीबीएस जैसे कॉलेज में पहले ही करीब 70 प्रतिशत से ऊपर कटऑफ रुकती है। इस बार अकेले बीए पाठ्क्रम में मेरिट 98 से शुरू होकर 73. 60 प्रतिशत पर आकर रूकी। एमकेपी और एसजीआरआर में भी कटऑफ हर साल अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़ रही है।

एसजीआरआर पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनय आनंद बोड़ाई ने बताया कि, ‘पिछले साल जहां 79 प्रतिशत मेरिट रही थी वहीं इस साल यह करीब 80 प्रतिशत को भी पार करने की संभावना है। लगातार बोर्ड का रिजल्ट सुधर रहा है। ऐसे में अनुमन्य सीटों पर दाखिले के लिए प्रतिस्पर्धा में भी इजाफा हो रहा है। इस स्थिति में 60 प्रतिशत वाले में भी दाखिले की दौड़ से बाहर हो जाएंगे।’

राजधानी को नए कॉलेजों की दरकार
राज्य के सबसे बड़े कॉलेज डीएवी पीजी कॉलेज के प्राचार्य का कहना है कि हाई कोर्ट के फैसले से पहले संस्थान में 35 हजार छात्र संख्या थी, जबकि कॉलेज में केवल 12,450 सीट ही अनुमन्य हैं। यही स्थिति बाकी कॉलेजों की भी थी। छात्र संख्या का बढ़ने का बड़ा कारण यह भी है कि यहां उच्च शिक्षा संस्थानों की कमी है। सरकार को चाहिए कि राजधानी में नए कॉलेज खोले, इससे मेरिट में न आने वाले छात्रों के पास किसी अन्य संस्थान में दाखिले का विकल्प होगा। अभी जो मेरिट में नहीं आ पाते वे मजबूरन दूरस्थ शिक्षा का सहारा लेकर अपनी शिक्षा आगे बढ़ा रहे हैं।

देहरादून के पांच प्राकृतिक स्त्रोतों पर बनेगी झील

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लगातार सूख रहे प्राकृतिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए झीलों का सहारा लिया जाएगा। पहले चरण में जिले के पांच प्राकृतिक जलस्रोतों पर झीलें तैयार की जाएगी, यह जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी गई है। पेयजल निगम को उम्मीद है कि झीलों के निर्माण के बाद इन स्रोतों से 50 एमएलडी पानी उपलब्ध होगा।

पहले चरण में सिंचाई विभाग भितरली, सौंग, कारलीगाड़, मालढूंग व सूरीधार जाखन जलस्त्रोत को शामिल किया है। निगम के अनुसार फिलहाल इन सभी जलस्रोतों से प्रतिदिन 25 एमएलडी पानी मिलता है, झीलों का निर्माण करने से भू-जल तो रिचार्ज होगा ही, साथ ही जल संस्थान की उन योजनाओं को भी फायदा पहुंचेगा जो प्राकृतिक जलस्त्रोतों पर निर्भर हैं। जल संस्थान या पेयजल निगम सोलर पंप से इन स्रोतों के जरिये पेयजल योजनाओं का भी निर्माण कर सकते हैं। यह कार्य पूरा होने के बाद इन स्रोतों का डिस्चार्ज दोगुना हो जाएगा। पेयजल निगम के महाप्रबंधक एससी पंत ने बताया कि झील बनाने का काम सिंचाई विभाग कर रहा है, कार्य पूरा होने के बाद बड़ी आबादी को इसका लाभ मिलेगा।

प्रमुख स्रोतों का डिस्चार्ज भी घटा

इसके अलावा मासीफाल, ग्लोगी व बांदल दून के प्रमुख जलस्रोत हैं। जिनसे प्रत्येक दिन जल संस्थान को 21 एमएलडी पानी शहर में उपलब्ध होता है, जिसे उन इलाकों में सप्लाई किया जाता है जहां नलकूप नहीं हैं। पेयजल निगम का कहना है कि इन स्रोतों का भी इसी तरह से संवर्धन किया जाए तो मासीफाल से 14, ग्लोगी से 15 और बांदल से 16 एमएलडी पानी उपलब्ध होगा, इससे बड़ी मात्रा में आबादी को पानी की आपूर्ति की जा सकेगी।

अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला, छह श्रद्धालुओं की मौत

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दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकियों ने श्रीअमरनाथ यात्रियों के काफिले पर सोमवार की देर रात हमला कर दिया। हमले में 6 अमरनाथ यात्रियों की मौत हो गई जबकि 14 घायल हुए हैं जिनमें चार की हालत गंभीर बनी हुई है। इस आतंकी हमले में तीन पुलिस कर्मी भी घायल हुए हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर आतंकियों की धरपकड़ के लिए तलाशी अभियान छेड़ दिया है। इस दौरान जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को भी बंद कर दिया गया है।

यह हमला उस वक्त हुआ जब यात्री बस अमरनाथ यात्रियों को पहलगांव से मीरबाजार की ओर ले जा रही थी। आतंकियों ने यात्रियों की सुरक्षा में लगी पुलिस पार्टी के वाहन सहित श्रद्धालुओं की बस पर भी हमला किया जिसमें 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई जबकि 4 बुरी तरह घायल हो गए। इस हमले में पुलिस के तीन जवान भी घायल हुए हैं। हमले के बाद अनंतनाग जिले में यातायात को रोक दिया गया है। अनन्तनाग में अमर नाथ यात्रियों पर हमले के बाद जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जिस बस पर आतंकी हमला हुआ है, वह अमरनाथ श्राइन बोर्ड में पंजीकृत नहीं थी। इसलिए बस में सवार यात्रियों को सुरक्षा नहीं मिली थी। इस हमले में मारे गए सभी यात्री गुजरात के बताये जा रहे हैं। बताते हैं कि आतंकी बाइक से आए थे। उन्होंने पहले सुरक्षा बल की टुकड़ी पर हमला किया और फिर बाद में यात्रियों की बस पर अटैक किया। आतंकी हमले के बाद घाटी में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है।

हालांकि आतंकी हमले के बाद भी आज सुबह 3 बजे अमरनाथ यात्रियों का नया जत्था पूरी सुरक्षा के बीच रवाना किया जा चुका है।

स्वाइन फ्लू को लेकर अस्पताल अलर्ट

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श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में स्वाइन फ्लू के तीन पाॅजीटिव मामले आने के बाद अस्पताल अलर्ट मोड में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने आपात बैठक आयोजित की। विशेषज्ञों की राय है कि अमूमन अगस्त से मार्च के बीच ही स्वाइन फ्लू के मामले सामने आते हैं। दून में इस बार फरवरी से जुलाई के बीच स्वाइन फ्लू के पाॅजीटिव मामले आना चौंकाने वाला है।

डाॅक्टरों की राय में स्वाइन फ्लू 30 डिग्री से नीचे के तापमान में ही फैलता है। देहरादून में स्वाइन फ्लू की आहट के मद्देनजर श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल प्रबंधन ने एहतियातन पहल की है। अस्पताल में 12 बैडेड एक वार्ड स्वाइन फ्लू रोगियों के लिए आरक्षित कर लिया गया है। मेडिसिन विभाग के डाॅ. योगेश ढांढ को स्वाइन फ्लू नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। संदिग्ध मामलों की देखरेख और उपचार के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा विशेष गाइडलाइन जारी की गई है। अस्पताल के अपर चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. वीके बिहारी ने कहा कि अस्पताल प्रबन्धन ने स्वाइन फ्लू रोगियों के उपचार के लिए एक जनरल वार्ड व एक आईसीयू बैड आरक्षित कर लिया है। आवश्यकता पड़ने पर आईसीयू वार्ड भी तैयार रखा गया है। दो अप्रैल 2017 को सहारनपुर निवासी जाहीरा का स्वाइन फ्लू टेस्ट पाॅजीटिव आया, 22 मई को कौलागढ़ देहरादून निवासी राकेश चंद्रा का स्वाइन फ्लू टेस्ट पाॅजीटिव आया, 6 जुलाई 2017 को देहरादून निवासी बीबी सिंघल का स्वाइन स्वाइन फ्लू टेस्ट पाॅजीटिव आया। ऐसे में इसे लेकेर चिंता बढ़ गई है।
मेडिसिन विभाग के प्रमुख डाॅ. अमित वर्मा ने कहा कि खांसी जुखाम बुखार को मरीज सामान्य श्रेणी का मानकार नज़रअंदाज कर देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वाइन फ्लू के प्रति कोई भ्रांति या डर फैलाने की आवश्यता नहीं है। मरीजों को जागरूक होकर स्वाइन फ्लू के लक्षणों को देखना समझना चाहिए। यदि आवश्यकता महसूस होती है तो डाॅक्टर से परामर्श लें व आवश्यकतानुसार जांच करवाएं। स्वाइन फ्लू लैब के डाॅ. नरोत्तम शर्मा ने कहा कि अस्पताल की मौलीक्यूलर लैब में स्वाइन फ्लू सैंपल परीक्षण लैब संचालित है।
उत्तराखंड व आसपास के राज्यों के अस्पतालों में आने वाले स्वाइन फ्लू के संदिग्ध रोगियों के सैंपलों को उस अस्पताल के प्रतिनिधि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल प्रबंधन से सम्पर्क कर सैंपल लैब तक पहुंचा सकते हैं। अस्पताल की सेंट्रल मोलीक्यूलर रिसर्च लैबोरेटरी डीएनए/आरएनए स्तर की जांच करने वाला राज्य का एकमात्र सर्टिफाइड सेंटर है। जहां 6 से 8 घंटे में ही स्वाइन फ्लू की जांच रिपोर्ट मिल जाती है। लैब को नेशनल सेंटर फाॅर डिज़ीज कंट्रोल (एनसीडीसी) नई दिल्ली और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भी स्वीकृति प्राप्त है। 

गंगा कलश गोमुख यात्रा

गंगा को स्वछ निर्मल बनाने के उदेश्य से ऋषिकेश से गोमुख तक गंगा कलश यात्रा का आयोजन किया जा रहा है जिस में बड़ी संख्या में युवा और संत हिस्सा लेंगे, ये कलश यात्रा ऋषिकेश से गोमुख तक सभी गंगा तटीय छेत्रो में जन जागरूकता अभियान चलाएगी।

आपको बता दें कि यात्रा की शुरुआत 11 जुलाई को ऋषिकेश के प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट से होगी, 11 से 15 जुलाई तक चलने वाले इस यात्रा में गंगा प्रेमी और गंगा संग्रक्षण से जुड़े लोग हिस्सा लेंगे। ऋषिकेश के मुनि की रेती के एक होटल में गंगा कलश यात्रा के आयोजक रवि शास्त्री ने इस बारे में जानकारी दी अौर बताया की यात्रा का उद्देश्य लोगों को गंगा के प्रति जागरुक करना और गंगा संरक्षण के बारे में लोगों को बताना है, उन्होंने बताया कि गोमुख से लाया हुआ पवित्र गंगाजल माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को भेंट किया जाएगा.

 

गुलदार की तीन खालों के साथ दो तस्कर गिरफ्तार

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वन विभाग व एसटीएफ की संयुक्त टीम ने गुलदार की तीन खालों के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। तस्करों ने बताया कि वे खाल नेपाल से लाकर यहां बेचने के लिए लाये थे। रविवार को पकड़ी गई इन खालों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 30 लाख रुपये बताई जा रही है।

एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) उत्तराखण्ड देहरादून को गोपनीय रूप से सूचना प्राप्त हुई कि वन्य जीव जन्तुओं के अंगों की तस्करी करने वाले अन्तर्राष्ट्रीय गिरोह के अपराधियों द्वारा उनके अंगों को ऊंचे दामों में बेचा जा रहा है। इस पर तत्परता से कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ रिधिम अग्रवाल ने टीम का गठन किया। एसटीएफ की कुमायूं युनिट की गठित टीम ने जिला उधमसिंह नगर के थाना खटीमा क्षेत्रान्तर्गत सुरागरसी पतारसी के दौरान दो अभियुक्तों शेखर वर्मा उर्फ सन्नी निवासी मीना बाजार, थाना बनबसा, चम्पावत व दलजीत सिंह ग्रेवाल निवासी अशोक फार्म मेलाघाट रोड, खटीमा, थाना-झनकईयां, उधमसिंहनगर को तीन गुलदार की खालों लगभग 6.5 फीट के साथ गिरफ्तार किया है।
यह खाल लगभग छह माह से एक साल पुरानी बतायी जा रही है। जिसकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 30 लाख रुपये है। इस अवैध कार्य में प्रयुक्त किये जा रहे बुलेट वाहन संख्या (यूके 04 यू -9159) को भी सीज किया गया। उक्त अभियुक्तों विरुद्ध थाना खटीमा में वन्य जीव जन्तु संरक्षण अधिनियम एवं मोटर वाहन अधिनियम के अन्तरगत अभियोग पंजीकृत कराया गया।
गिरफ्तार अभियुक्त से पूछताछ पर बताया गया कि वे गुलदार को नेपाल से लाकर टनकपुर, बनबसा, हल्द्वानी क्षेत्रों में उनका व्यापार करते हैं। 

कुमाऊं में पर्यटकों को भा रहा पुराने घरों में ”होमस्टे”

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कुमाऊं की यात्रा करने वाले पर्यटक अब पहाड़ी संस्कृति और व्यंजनों के और अधिक प्रामाणिक अनुभव के लिए होटल को भूल कर घरों में रुकना पसंद कर रहें हैं।  कुमाँऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) के प्रबंध निदेशक धीराज गारबैली ने बताया कि जून में 300 से अधिक ट्रेकर्स ने आदि कुटी और नवी के दूरस्थ गांवों में घरों में रहने का फैसला किया जो गांव पिथौरागढ़ जिले के व्यास घाटी में हैं।

गरबयाल ने कहा कि कुटी में होमस्टे पिछले दो साल से चल रहा है जबकि इस साल केएमवीएन द्वारा नवी में इस अवधारणा की शुरूआत की गई है। उन्होंने बताया कि, “हमें उन यात्रियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है जो इन दूरदराज के गांवों को अपने रुकने के लिए चुनते हैं। रुकने वाले यात्री कहते हैं कि इसके जरिए उन्हें स्थानीय निवासियों के साथ बातचीत करने का मौका मिलता है, साथ ही पहाड़ों की संस्कृति के प्रामाणिक अनुभव और विसर्जन को ज्यादा करीब से समझने का मौका मिलता है।

गरबयाल के अनुसार नवी में 20 परिवारों को केएमवीएन स्टाफ द्वारा आतिथ्य प्रशिक्षण दिया गया है। पर्यटक मौसम के तीन महीनों में यह परिवार 15,000/- रुपये से 20,000/- रुपये तक कमा सकते हैं। हाल ही में नवी में रहने वाले पर्यटक अरविंद जोशी ने कहा कि, “स्थानीय जीवनशैली, परंपरागत कपड़े और अनुष्ठानों के बारे में सीखने में हमें बहुत अच्छा लगा। हमारे समूह के कई यात्रियों ने रूंग जनजाति के पारंपरिक कपड़े पहनने की कोशिश की। “

केएमवीएन पंचचुली पहाड़ों के आधार शिविर के पास दंतू गांव में होमस्टे प्रोग्राम शुरू करने की भी योजना बना रहा है। गरबयाल ने कहा कि, “हम अगस्त 2017 से पहले दंतू गांव में होमस्टेम शुरू करने की उम्मीद कर रहे हैं जब दर्मा घाटी में एक बड़ा मेला आयोजित किया जाना है।” केएमवीएन ने भी पिछले साल अल्मोड़ा जिले के बिन्सर वाईल्डलाईफ में  होमस्टे की शुरूआत की थी।

हरिद्वार के अन्नू ने फ्रांस में जीता रजत पदक

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अंतरराष्ट्रीय फलक पर उत्तराखंड के सितारे इन दिनों खूब चमक बिखेर रहे हैं। इंटरनेशनल स्कूल फेडरेशन की ओर से फ्रांस के नैन्सी शहर में हुई आइएसएफ विश्व स्कूल गेम्स में हरिद्वार के पथरी क्षेत्र के धनपुरा गांव के एथलीट अन्नू कुमार ने 800 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर देश और उत्तराखंड का नाम रोशन किया।

फ्रांस से गांव लौटने पर अन्नू का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। अन्नू के पिता महिपाल ज्वालापुर स्थित एक गैस एजेंसी में डिलीवरी मैन हैं। विश्व स्कूल गेम्स में प्रतिनिधित्व करते हुए अन्नू ने 800 मीटर दौड़ को एक मिनट और 53 सेकंड में पूरा कर द्वितीय स्थान हासिल किया। अन्नू के रजत पदक जीतने की जानकारी मिलने के बाद से धनपुरा गांव के साथ ही आसपास के क्षेत्र में लोगों की जुबां पर अन्नू का ही नाम है। उसके गांव पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उसकी आगवानी को जमा हो गए।
ग्रामीणों ने ढोल की थाप के बीच अन्नू को फूल मालाओं से उसका स्वागत कर हौंसला बढ़ाया। इस मौके पर पूर्व ग्राम प्रधान सलीम अहमद ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। बेहतर मंच मिलने पर वे इसे साबित भी करते हैं और अन्नू इसका उदाहरण है।
अन्नू के कोच लोकेश कुमार ने बताया कि इस दौड़ के लिए उसने कड़ी मेहनत की थी। महाराणा प्रताप स्पोर्टस कॉलेज देहरादून के छात्र अन्नू ने इस साल हाईस्कूल की परीक्षा द्वितीय श्रेणी में पास की है।

तबाही का सामान लिए बैठे है कई दर्जन गांव

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कई शहर और गांवों की तबाही का सामान है यहां जमीन के अंदर। सालों से पांच सौ से अधिक स्क्रैप मिसाइलें जिस जमीन में दफ्न है वहां के लोग रोज यही दुआ करते है कि स्क्रैप मिसाईलों को जल्द निकाला जाए, मगर तेरह सालों से खौफ की जद में जीने वाले ग्रामीणों की तो दूर प्रशासन और पुलिस की भी उच्च स्तर पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई हैं।

जिला उधमसिंहनगर की जसपुर तहसील से तीन किलोमीटर दूरी पर बसे पतरामपुर में आज भी 555 छोटी और बड़ी स्क्रैप मिसाइलें दफन हैं। बताया जाता है कि 21 दिसंबर 2004 को क्षेत्र की एक स्टील फैक्ट्री में स्क्रेप के साथ बड़ी तादाद में मिसाइलें आ गई थीं। मिसाइलों की खेप में विस्फोट से एक कर्मचारी की मौत और कई लोग घायल हो गए थे। इस हादसे के बाद 22 दिसंबर 2004 को जब पुलिस ने पूरे फैक्ट्री परिसर की तलाशी ली तो को फैक्ट्री परिसर से 67 बड़ी और 488 छोटी विस्फोटक सामान मिला, जिसके बाद पूरे पुलिस प्रशासन सहित राजधानी देहरादून तक इस घटना ने चौका दिया था।

उस दौरान एनएसजी की टीम के निर्देश पर पुलिस ने सभी विस्फोटक सामान को पतरामपुर क्षेत्र में एक बड़ा गड्डा खोदकर रेत में दफन कर दिया था। तब से आज तक यह सामान यहां दफ्न है,  सुरक्षा के लिए पतरामपुर में पुलिस की एक पिकेट तैनात भी की गयी थी ताकि इनके साथ कोई छेड़छाड़ न कर सके, लेकिन अब वो भी हटा दी गयी है। पतरामपुर ग्रामसभा के अंतर्गत पांच गांव पतरामपुर, निवार मंडी, सीपका, कल्याणपुर और भोगपुर डैम के लोग भारी तादात में मिसाइलें दफन होने की चर्चा भर से सिहर उठते हैं।

इस सामान को निष्क्रिय करने के लिए एनएसजी की टीम ने पुलिस मुख्यालय से सेफ्टी फ्यूज इलेक्ट्रिक डेटोनेटर और एक्सप्लोसिव डाइनेमो सहित 13 उपकरण और सामग्रियों की मांग की थी, लेकिन 13 साल बाद भी पुलिस मुख्यालय एनएसजी की टीम को ये उपकरण और सामग्रियां उपलब्ध नहीं करा पाया। जबकि जिले के कई एसएसपी दबें सामान को निष्क्रिय करने का प्रस्ताव प्रदेश के गृह मंत्रालय को भेज चुके हैं। लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिल पाया है।

एसएसपी दातें का कहना है कि, ‘पहले भी हम उन सामानों को नष्ट करने की बात कह चुके हैं,  हालांकि उनमे से खतरनाक होने की संभावना बहुत कम है लेकिन फिर भी एहतियायत के तैर पर नष्ट करना जरुरी है। नष्ट करने की प्रक्रिया केंद्रीय एजेंसी ही कर सकती है इसलिए विधिवत रुप से नष्ट करने की प्रक्रिया के लिये हमने काम शुरु कर दिया है।’

यूपी-उत्तराखंड परिसंपत्ति मामले में भ्रमित कर रहा सोशल मीडिया: सीएम

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यूपी और उत्तराखंउ के बीच अभी परिसंपत्तियों का बंटवारा नहीं हुआ है, मुख्यमंत्री रावत ने मीडिया अफवाहों पर ध्यान न देने की नसीहत दी है। बता दें कि सोशल मीडिया में यूपी और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर कई तरह की खबरें आ रही हैं, इनमें उत्तराखंड को नुकसान होने का दावा किया जा रहा है।

सीएम ने मीडिया को बताया कि यूपी के साथ परिसंपत्ति के बंटवारे का अंतिम फैसला अभी तक नहीं हुआ है। सीएम ने कहा कि ये सब छोटे दलों का राजनीतिक प्रोपेगेंडा है। पिछले कई दिनों से उत्तराखंड क्रांति दल ने भी यूपी से परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर मांग तेज कर दी है।

यूकेडी का दावा है कि यूपी के साथ परिसंपत्तियों का बंटवारा उनका ही दल कर सकता है। इसके साथ ही सोशल मीडिया में यूपी और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे होने का दावा किया जा रहा है, जिसमें उत्तराखंड को नुकसान होने का दावा किया जा रहा है। इतना ही नहीं सोशल मीडिया में यह भी दावा किया जा रहा है कि हरिद्वार की मेला क्षेत्र की जमीन पर भी उत्तराखंड को नुकसान हुआ है, इन्हीं सभी खबरों को सीएम ने अफवाह करार दिया है।

यूपी उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार आने के बाद से 16 सालों में परिसंपत्तियों के बंटवारे की उम्मीद जगी है, लेकिन उत्तराखंड के अधिकारियों को उच्च स्तरीय बैठक से पहले सही तरह से होमवर्क करने की बड़ी चुनौती सामने हैं। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पहले ही सभी विभागों के अधिकारियों की बैठक कर परिसंपत्तियों के विषय में अपने पक्ष को मजबूत रखने के निर्देश दे चुके हैं। इतना ही नहीं सीएम ने जानकारी जुटाने के लिए सूचना का अधिकार के तहत पूरी जानकारी मांगने को भी कहा हैै। ऐसे में साफ है कि उत्तराखंड के अधिकारियों को अपनी परिसंपत्तियों को पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

बंटवारे में उत्तराखंड को मिलने वाली संपत्तियां
-सिंचाई विभाग को 997 भवन।
-2557.78 हेक्टेयर रिक्त भूमि।
-कुंभ क्षेत्र की 697.578 हेक्टेयर भूमि।
-हरिद्वार की 10 में से 4 नहरें।
-यूएसनगर कि 33 में से 25 नहरों का रखरखाव।
-टीएचडीसी के प्रोजेक्ट पर 25 प्रतिशत सहभागिता।
-कालागढ़ जल विद्युत गृह।
-उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की देनदारी 43.47 करोड़।
-वित्त के अंतर्गत कोषागार एवं उपकोषागारों की वर्ष 2011-12 से 2016-17 तक 2933.13 करोड़ रुपए उत्तर प्रदेश द्वारा उत्तराखंड को दिया जाना है।
-उत्तर प्रदेश वन विभाग के अंतर्गत 173.28 करोड़ रुपए उत्तराखंड वन विकास निगम को भुगतान किया जाना है।