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जीआईसी नंदप्रयाग को भूस्खलन से खतरा, खिसक रहा है मलबा

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जनपद चमोली के राजकीय इंटर काॅलेज नंदप्रयाग के निचले हिस्से में भूस्खलन सक्रिय हो गया है। भूस्खलन से बदरीनाथ हाईवे को भी खतरा बना हुआ है। सोमवार को सुबह से ही हाईवे पर मलबा गिर रहा है, जिससे यहां वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल से हो पा रही है।

इन दिनों क्षेत्र में रुक-रुक कर हुई भारी बारिश से नंदप्रयाग में झूलाबगड़ नामक स्थान पर चट्टान से भूस्खलन हो रहा है। वर्ष 2012 में यहां पर भूस्खलन शुरु हुआ था। तब नंदाकिनी संघर्ष समिति के पदाधिकारियों और जीआईसी नंदप्रयाग के पीटीए पदाधिकारियों ने प्रशासन से शीघ्र भूस्खलन क्षेत्र के ट्रीटमेंट की मांग उठाई थी, लेकिन आज तक भी यहां भूस्खलन का ट्रीटमेंट कार्य नहीं हो पाया है। बरसात में प्रतिवर्ष यहां भूस्खलन होता रहता है। बीते रविवार रात को हुई भारी बारिश से यहां भूस्खलन तेज हो गया है, चट्टान से मलबा हाईवे पर आ रहा है।

मंगरोली के प्रधान तेजवीर कंडेरी का कहना हैं, ‘कि भूस्खलन क्षेत्र का ट्रीटमेंट न होने से यहां जीआईसी के साथ ही आवासीय भवनों को खतरा बना हुआ है। जीआईसी तक जाने का पैदल रास्ता भी भूस्खलन की चपेट में आ गया है।’ उनका कहना है कि, ‘यदि शीघ्र भूस्खलन की रोकथाम नहीं की गई तो जीआईसी के भवनों को भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।’

इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी का कहना है कि, ‘भूस्खलन क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। इसके ट्रीटमेंट के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।’

एटीएम कर्मचारी ने 870 रुपये के चक्कर में गंवाए 42 लाख

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bank atm

हरिद्वार में लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है जिसके चलते बैंक को 42 लाख की चपत लग गई। दरअसल हरिद्वार में पुलिस पिकेट से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित आईसीआईसीआई बैंक शाखा से ठगों ने दिनदहाड़े 42 लाख रुपये उड़ा लिए। एटीएम में कैश डालने वाली कंपनी का एक कर्मचारी बैंक से कैश ले जाकर बगल के एटीएम में डाल रहा था। तभी टप्पेबाजों ने उसे अपने झांसे में फंसाया और नगदी से भरा बैग उड़ाकर भाग गया। चंद्राचार्य चौक के पास आईसीआईसीआई बैंक में लगे एटीएम में कैश डालने वाली एसआईपीएल कंपनी का कर्मचारी सुनील मंगलवार दोपहर करीब दो बजे बैंक शाखा से 87 लाख रुपये कैश निकालकर बगल के एटीएम में डालने पहुंचा। सुनील के मुताबिक एक बैग में 42 लाख और दूसरे बैग में 45 लाख रुपये थे। इसी बीच एक युवक सुनील के पास पहुंचा और उसे बताया कि बाहर कुछ रुपये गिर गए हैं। सुनील ने पलटकर देखा तो सचमुच कुछ नगदी पड़ी थी। जैसे ही सुनील पैसे उठाने गया, युवक पलक झपकते ही 42 लाख रुपये से भरा बैग ले उड़ा। सुनील को इस बात का पता कुछ देर बाद पता चला जब वो बैग उटाने के लिये मुड़ा। आनन फानन में पुलिस को सूचित किया गया। वहां सीसीटीवी लगे होने के कारण चोर कैमरे की जद में आ गये। फुटेज में बाहर तीन लोग बैग लेकर जाते नजर आए हैं।

पूरी वारदात को देखते हुए पुलिस  का कहना है कि ये किसा सुनियोजित प्यलैनिंग का नतीजा है। इन लोगों ने कई दिन रैकी करने के बाद घटना को अंजाम दिया है। यह भी संभव है कि वह लगातार बैंक में आते जाते रहे हों। संदिग्धों को चिन्हित करने के लिए पुलिस पिछले कई दिनों की सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है।

सिल्ट आने से उत्तराखंड की चार परियोजनाएं बंद

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लगातार हो रही बारिश के कारण भगीरथी समेत सभी नदियों में सिल्ट की मात्रा बढ़ जाने से प्रदेश की चार परियोजनाएं बंद हो गई हैं। इनमें मनेरी भाली प्रथम, द्वितीय, छिबरों व खोदरी परियोजनाओं से विद्युत उत्पादन पर रोक लग गई है।ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता एवं मीडिया प्रभारी एके सिंह के अनुसार, मनेरी भाली प्रथम व द्वितीय सोमवार की रात्रि से बंद है। जबकि छिबरों व खोदी जल विद्युत गृह मंगलवार दोपहर से बंद हो गये। निगम के मुताबिक, परियोजनाओं के बंद होने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। मनेरी बैराज के ईई हरीश डपोला ने बताया कि रविवार से उत्तरकाशी में रुक-रुककर बारिश हो रही है। बारिश से भगीरथी नदी समेत अन्य सहायक नदियां और नाले उफान पर हैं। भगीरथी में सिल्ट की मात्रा बढ़ने से मनेरी भाली प्रथम परियोजना के बैराज से वाटर डिस्चार्ज 406 तथा सिल्ट की मात्रा 4600 पार्टिकल पर मिलियन (पीपीएम) पर पहुंचने पर विद्युत उत्पादन बंद करना पड़ा।रविवार रात 10 बजे से लेकर मंगलवार शाम पांच बजे तक इस परियोजना में उत्पादन पूरी तरह से ठप रहा है। बीते सोमवार की शाम छह बजे केवल दो घंटे के लिए सुचारु हुआ था। सोमवार की रात को बारिश होने से सिल्ट बढ़ गई थी। इस परियोजना की उत्पादन क्षमता 90 मेगावाट है। वहीं सिल्ट के कारण मनेरी भाली द्वितीय परियोजना में सोमवार रात 11 बजे विद्युत उत्पादन बंद कर दिया गया। इस परियोजना की क्षमता 304 मेगावाट की है। जोशियाड़ा बैराज से वाटर डिस्चार्ज 555.13 तथा सिल्ट की की मात्रा 4800 पार्टिकल पर मिलियन (पीपीएम) पर पहुंचने पर विद्युत उत्पादन बंद करना पड़ा। इस परियोजना में करीब 19 घंटे तक उत्पादन ठप रहा।

बाक्सिंग छात्रावास का सीएम ने किया लोकार्पण

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चंपावत-टनकपुर के बनबसा में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 224.73 लाख रुपए से निर्मित बालिका बॉक्सिंग छात्रावास का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि इससे बालिकाओं को खेल के क्षेत्र में सहूलियत मिलेगी और वो इसमें आगे आएंगी। इस मौके पर जहां मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चंपावत में बॉक्सिंग छात्रावास का लोकार्पण किया साथ ही जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं भी सुनी।

इसके बाद सीएम रावत आरएसएस के प्रांत प्रचारक महेंद्र सिंह के आवास पर पहुंचे और उनके पिता के निधन पर दुख जताते हुए परिजनों को सांत्वना दी। महेंद्र सिंह के आवास से वापस लौटाने के बाद सीएम ने स्टेडियम में जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी और उनके जल्द निस्तारण का आश्वासन दिया।

यशराज की नई फिल्म ‘कैदी बैंड’ 25 अगस्त को होगी रिलीज

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यशराज की ओर से मंगलवार को एक और नई फिल्म की अधिकारिक घोषणा कर दी गई, जिसका टाइटल ‘कैदी बैंड’ रखा गया है। इस फिल्म का निर्देशन हबीब फैसल ने किया है, जो इससे पहले यशराज के लिए ‘दो दूनी चार’ और ‘इश्कजादे’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। आदित्य चोपड़ा निर्माता हैं और आगामी 25 अगस्त को फिल्म रिलीज होगी।

आयुष्मान खुराना और परिणीती चोपड़ा की जोड़ी वाली फिल्म ‘मेरी प्यारी बिंदू’ के बाद यशराज की ये नई फिल्म होगी। इस फिल्म में आदर जैन और अन्या सिंह के नए चेहरों को लॉन्च किया जाएगा। रिश्ते में आदर जैन रणबीर कपूर के कजिन लगते हैं और उनकी बुआ रीमा के बेटे हैं। अन्या सिंह दिल्ली की बताई जाती हैं।

घोषणा के साथ बताया गया है कि ये फिल्म जेल में बंद सात ऐसे लोगों की कहानी है, जो एक म्यूजिकल ग्रुप बनाकर अपनी जिंदगी का रुख बदलने का काम करते हैं। घोषणा के साथ ही फिल्म का ट्रेलर भी लॉन्च कर दिया गया। उम्मीद की जा रही है कि अपने कजिन की लॉन्चिंग फिल्म के प्रमोशन के लिए रणबीर और करीना भी उनका साथ देंगे।

सोहेल खान नहीं चाहते ‘ट्यूबलाइट’ वितरकों को लौटाया जाए पैसा

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सलमान खान द्वारा अपनी फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद इससे जुड़े वितरकों के नुकसान के लिए पैसे लौटाने का मामला उलझता जा रहा है। अब खबर मिल रही है कि ‘ट्यूबलाइट’ में काम करने वाले सलमान के भाई सोहेल खान इस पक्ष में नहीं हैं कि वितरकों को पैसे वापस किए जाए।

सोहेल खान का तर्क है कि सलमान की फिल्मों से इन वितरकों ने करोड़ों की कमाई की है, तब हमने उनके मुनाफे में कोई हिस्सेदारी नहीं मांगी, तो अब एक फिल्म के नुकसान को लेकर उनकी हाय-तौबा का कोई आधार नहीं नजर आता। सोहेल का तर्क है कि कोई जानबूझकर ऐसी फिल्म नहीं बनाता, जो बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिजनेस न करे, लेकिन ये बिजनेस है और बिजनेस को हमेशा रिस्क माना जाता है। उनका कहना है कि जिनको फिल्म से नुकसान हुआ है, उनके साथ मेरी सहानुभूति जरूर है, लेकिन नुकसान की भरपाई चाहने वाले वितरकों को पहले इस बात का भी हिसाब किताब देना चाहिए कि इससे पहले सलमान की फिल्मों में उन्होंने कितनी कमाई की और कितना मुनाफा कमाया।

सोहेल ऐसे वितरकों को मौकापरस्त मानते हैं, जो एक फिल्म के नुकसान की भरपाई चाहते हैं। सलमान के पिता और वितरकों को पैसा लौटाने की योजना के प्रभारी सलीम खान पहले ही कह चुके हैं कि जुलाई अंत तक वितरकों को इंतजार करना होगा। सूत्र बता रहे हैं कि जब तक सिनेमाघरों में ‘ट्यूबलाइट’ बनी रहेगी, तब तक वितरकों को इंतजार करना होगा। ये इंतजार अगस्त तक जा सकता है।

 

लोहाघाट और चम्पावत के लिए सीएम ने दिए 10 करोड़

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चम्पावत जिले के एक दिवसीय भ्रमण के दौरान मंगलवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने टनकपुर में जन संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोहाघाट एवं चम्पावत विधानसभा की सड़कों के रख-रखाव व निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।
उन्होंने लोहाघाट क्षेत्र के लिए पाटी, देवीधुरा, रीठासाहिब नगरीय क्षेत्र में हाईटेक शौचालय, रीठासाहिब में कार पार्किंग, देवीधुरा व वालिक में टूरिस्ट हट, मायावती में टूरिस्ट हट, एबटमाउण्ट में प्लान के अनुसार पर्यटन स्थल विकास के लिए अवशेष धनराशि का आवंटन, बाणासुर किले के लिए ट्रेकिंग मार्ग का विकास, लोहाघाट नगरपंचायत का उच्चीकरण, लोहाघाट नगर के विकास के लिए मास्टर प्लान लागू करने के साथ लोहाघाट में पार्किंग, मायावती में अवस्थापना विकास करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने चम्पावत विधानसभा क्षेत्र के लिए कहा कि टनकपुर रोडवेज वर्कशाप को केन्द्रीय वर्कशाप का दर्जा देने, नरियालगांव में नस्ल सुधार हेतु योजना को अपगे्रड किये जाने, पूर्णागिरि टनकपुर सड़क के दोनों ओर जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए सुरक्षा कार्य तथा पूर्णागिरी में पेयजल, रास्ता एवं शौचालय आदि अवस्थापना निमार्ण कार्य की व्यवस्था, पूर्णागिरि मेला क्षेत्र में अवस्थापना विकास तथा रोपवे का निर्माण आदि कार्य पूर्ण कराया जायेगा।
पूर्णागिरि मेले के संचालन के लिए विकास प्राधिकरण की स्थापना, विधानसभा क्षेत्र टनकपुर व चम्पावत में पार्किंग, हाईटेक शौचालय एवं चम्पावत में बस अड्डे का निर्माण, चम्पावत क्वैराला पंपिंग योजना में गति लाने, कठवापाती में सिडकुल की स्थापना के साथ गैडाखाली में हनुमान मंदिर के पास पुल का निर्माण करने की घोषणा की। उन्होंने जनपद में नजूल भूमि फ्री होल्ड करने हेतु समय सीमा बढ़ाने की घोषणा की।
इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने लोगों से प्रत्येक परिवार द्वारा ‘एक व्यक्ति एक पेड़’ लगाकर प्रदेश को हराभरा करने के लिए संकल्प लेने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में फैशन डिजाईन, प्लास्टिक इंजिनियरिंग संस्थान, हाॅस्पिटैलिटी संस्थान इसी वित्तीय वर्ष से स्थापित किये जा रहे है, जिसमें शत-प्रतिशत रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि पंचेश्वर बांध के निर्माण से एनएचपीसी द्वारा पूरे देश में पैदा की जा रही बिजली से अधिक बिजली पैदा होगी साथ ही विकास के नये आयाम स्थापित होंगे, पर्यटन गतिविधियों में इजाफा होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि बांध के निर्माण से कुछ परेशानियां होंगी लेकिन उन्हें दूर किया जायेगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि विभागों का पुर्नगठन कर कम से कम 33 विभागों तक रखे जायेंगे। सरकार बेरोजगार नौजवानों तथा समाज के गरीब तबके के प्रति संवेदनशील है और लोगों के बेहतर जीवन स्तर के लिए प्रयासरत है। उन्होंने बेरोजगार नौजवानों से धैर्य बनाये रखने के साथ सावधानी के साथ लक्ष्य प्राप्त करने का आह्वान किया।
टनकपुर स्टेडियम में जन संवाद से पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी ने रूपये 224.73 लाख से निर्मित महिला बाक्सिंग छात्रावास का लोकार्पण किया। इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रान्त प्रचारक महेन्द्र सिंह के आवास पर जाकर शोक संवेदना व्यक्त की और परिजनों से मिले उन्हें सांत्वना दी और उनके आंगन में पौधारोपण भी किया।

उत्तराखंड के जंगल क्यों हैं खत्म होने की कगार पर

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उत्तराखंड में जंगल भले ही सरकार की प्राथमिकता वाला क्षेत्र न बन पाए हों, लेकिन यहां की आर्थिकी संवारने में ये अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देने के साथ ही जंगल पारिस्थितिकी को महफूज रखे हुए हैं। वनों से साल का लगभग 350 करोड़ का राजस्व सरकार के खाते में जा रहा तो 107 बिलियन रुपये से अधिक की पर्यावरणीय सेवाएं भी मिल रही। इसके बावजूद वन हाशिये पर हैं तो विशेषज्ञों का चिंतित होना लाजिमी है। उनका कहना है कि वन और जन के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित कर वनों को पनपाने के लिए सरकार को ठोस और गंभीर पहल करनी होगी।

जंगल एक ऐसा विषय है, जो पारिस्थितिकी के साथ ही जीवन के आधार से जुड़ा है। यानी वन हैं तो हवा, पानी, मिट्टी सबकुछ ठीक है, अन्यथा बिना वन के सब सून। 71 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में देखें तो इस हिमालयी राज्य में भी वन और जन के बीच गहरा अपनापन रहा है।

ये अलग बात है कि वन कानूनों के अस्तित्व में आने के बाद वनों से पूरी होने वाली जरूरतों पर अंकुश लगा तो इस रिश्ते में खटास आई है। बावजूद इसके, यहां जंगल बचे हुए हैं और राज्य की आर्थिकी संवारने में अहम योगदान देते आ रहे हैं।

वन विभाग और वन विकास निगम के करीब 10 हजार कार्मिकों की तनख्वाह वनों से ही निकल रही है तो सरकार के खाते में राजस्व के रूप में बड़ी रकम भी जा रही है। यही नहीं, लीसा टिपान, इको टूरिज्म, वनीकरण, वन मार्गों की मरम्मत, राष्ट्रीय पार्कों में पर्यटन, इको टूरिज्म, वानिकी से जुड़े कार्य, चारापत्ती व जलौनी लकड़ी, खनन आदि से भी हजारों की संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है।

इतनी अहम भागीदारी के बावजूद वनों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। जानकारों की मानें तो वन कानूनों को विकास में अवरोधक की अवधारणा ने अधिक दिक्कतें खड़ी की हैं, जबकि यह ऐसा विषय नहीं है कि इसका समाधान न हो। जंगल और विकास में बेहतर सामंजस्य हो तो कोई दिक्कत आएगी ही नहीं।

उपयोगी जंगल

  • 230 करोड़ प्रति वर्ष लकड़ी से मिलता है राजस्व
  • 120 करोड़ की आय लीसा टिपान, इको टूरिज्म, खनन आदि से होती है
  • 30 हजार घन मीटर प्रतिवर्ष हक-हकूक देने का है प्रावधान
  • 42460 घन मीटर औसतन प्रतिवर्ष मिलती है जलौनी लकड़ी
  • 116.88 टन प्रति हेक्टेयर कार्बन संचय करते हैं यहां के जंगल
  • 6903 है वन विभाग के कार्मिकों की मौजूदा संख्या
  • 3000 है वन विकास निगम के कार्मिकों की संख्या

सरकार के कैशलेस अभियान को ठेंगा दिखा रहे दून के निजी स्कूल

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देहरादून के निजी स्कूल केंद्र सरकार की कैशलेस योजना को ठेंगा दिखाने का काम कर रहे हैं। स्कूलों ने अभी तक कैशलेस मोड में फीस जमा करने की प्रक्रिया को नहीं अपनाया है। अधिकतर अभिभावक स्कूलों के काउंटर और बैंकों की लाइनोें में लगकर फीस जमा करने को मजबूर हैं।

सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने देशभर के स्कूलों को काफी पहले कैशलेस योजना को आगे बढ़ाते हुए आॅनलाइन मोड में पैसे का लेन-देन किए जाने के निर्देश दिए थे। इतना ही नहीं शिक्षकों के वेतन से लेकर बच्चों की फीस आदि को भी आॅनलाइन माध्यम से जमा किए जाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। लेकिन, इसके बाद भी स्कूल निर्देशों की जमकर नाफरमानी कर रहे हैं। आलम यह है कि दून के दर्जनों स्कूलों में अभी तक फीस जमा करने की आॅनलाइन व्यवस्था नहीं की गई।
निजी स्कूल खुद को भले ही कितना भी हाईटेक कहें, लेकिन तकनीकि के उपयोग में सरकारी स्कूल इनसे कहीं आगे दिखाई दे रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ओर जहां सुविधा संपन्न हाईप्रोफाइल निजी स्कूलों में अब तक आॅनलाइन फीस जमा करने की व्यवस्था तक नहीं है, वहीं, केंद्रीय विद्यालयों सहित कई अन्य सहायता प्राप्त स्कूलों में यह सुविधा साल की शुरुआत से प्रदान की जा रही है। केविएस से जुड़े सभी स्कूलों को संगठन ने पूरी तरह से कैशलेस बना दिया है। अब इन स्कूलों में अभिभावक घर बैठे बच्चों की फीस जमा कर पा रहे हैं।

 केवि नंबर 1 हाथीबड़कला के प्रधानाचार्य डॉ इंद्रजीत सिंह ने बताया कि केविएस ने एक जनवरी से ‘हाईटेक फीस डिपॉजिट स्कीम’ शुरू कर दी थी। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से इस योजना का लाभ देहरादून संभाग से जुड़े स्कूलों में पहुंचाया जा रहा है। ऑनलाइन शुल्क जमा करने के बाद अभिभावक घर बैठे शुल्क रसीद भी ले सकते हैं। अभिभावकों को हर माह की 15 तारीख तक शुल्क जमा करना होगा, इसके बाद विलंब शुल्क लगेगा। ऑल उत्तराखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के केंद्रीय अध्यक्ष नीरज सिंघल ने बताया कि कई स्कूलों में अभी तक आॅनलाइन फीस जमा करने की व्यवस्था नहीं है। जिस कारण अभिभावकों को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। स्कूलों को हर हाल में यह सुविधा देनी चाहिए। कैशलेस व्यवस्था काले धन को खत्म करने के लिए लागू की गई थी, लेकिन स्कूल इसे मान नहीं रहे। संगठन शिक्षा विभाग और सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय में ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर कार्रवाई की मांग करेगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी एसबी जोशी ने बताया कि स्कूलों को सरकार की इस मुहिम मेें सहयोग देना होगा। हमारी ओर से स्कूलों में आॅनलाइन फीस डिपोजिट सिस्टम अपनाने की बात कही जा रही है। इसके बाद भी यदि कोई स्कूल नाफरमानी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

मंगलवार को 40 लाख कांवड़िये पहुंचे हरिद्वार

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कांवड़ मेले में आस्था का अथाह सैलाब उमड़ पड़ा है। समूचा शहर कांवड़ियों से पैक हो रखा है। मेले में पहुंचने वाले कांवड़ियों की संख्या में काफी इजाफा हो रहा है। अकेले मंगलवार को 40 लाख से अधिक कांवड़िये हरिद्वार पहुंचने का अनुमान पुलिस की ओर से लगाया है। बुधवार को इस संख्या में और इजाफा होने की उम्मीद है। इस प्रकार से मेले के नवें दिन तक यहां पहुंचने वाले कांवड़ियों का आंकड़ा डेढ़ करोड़ पहुंच गया है। बारह दिनों तक चलने वाले कांवड़ मेला अब अपने अंतिम दौर की ओर बढ़ चला है। जैसे-जैसे कांवड़ मेला आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कांवड़ियों की तादाद बेहद तेज गति से बढ़ रही है।

मंगलवार से मेला पूरी लय में आ चुका है। धर्मनगरी के हर कदम पर कांवड़ियों का रैला उमड़ रहा है। हरकी पैड़ी क्षेत्र कांवड़ियों से भरा हुआ है। ब्रह्मकुंड समेत अन्य स्नान घाटों तक पहुंचने के लिए कांवड़ियों को मशक्कत करनी पड़ रही है। हाल यह है कि हरकी पैड़ी तक पहुंचने में घंटों भर का समय लग रहा है। कांवड़ पटरी पर तो कांवड़िये कदमताल करते हुए डग भरते जा रहे हैं। यहां का नजारा भी मन मोह रहा है। नेशनल हाईवे समेत पूरे शहर भी इसी रंग में रंगा हुआ है। मेले में डाक कांवड़ भी भारी संख्या में पहुंच चुकी है। मोटरसाइकिल सवार कांवड़ियों का रंग भी मेले में घुला हुआ है।