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”नाइट वाॅक टू मसूरी” में नहीं रही वो बात

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लगभग 160 देहरादून निवासी जब अपने घरों से निकलकर देहरादून से मसूरी तक की पैदल यात्रा में भाग लेने के लिए निकले तो शायद उन्होंने सोचा भी नहीं था कि उन्हें यह सब देखने को मिलेगा।जी हां, रात को 12 बजे यह सोच के निकले थे कि इस वाॅक को अपने जीवन का एक अनुभव बनाना चाहते थे, लेकिन जो देखने को मिला वह खुशी से बहद दूर था।

मसूरी की सड़के रात को 12 बजे के बाद भी गाडियों से खचाखच भरी हुई थी और इतना ही नहीं गाड़ियों में तेज आवाज़ में संगीत के साथ गाड़ी में बैठे लोग सड़क पर यहां-वहां कचरा भी फेंक रहे थे।हम बात कर रहे हैं ग्रुप ”बिन देयर दून दैट” की, जो दूनाइट्स को अलग-अलग अनुभव देने के लिए जाना जाता है। लेकिन दून टू मसूरी की यह वाॅक शायद लोगों के लिए उतनी अच्छी साबित नहीं हुई जितनी अच्छी सोचकर वह अपने घरों से निकले थे।

traffic in mussoorie

लोकेश ओहरी जो बीटीडीटी के फाउंडर हैं और इस वाॅक के लीडर हैं उनसे न्यूज़पोस्ट से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि, ‘हम काफी समय से लगभग हर रविवार इस वाॅक का आयोजन करते हैं।’ उन्होंने बताया कि इस वाॅक में वह दून से ऋषिकेश,मसूरी,सहस्त्रधारा और ऐसी जगह पर जाते हैं जहां आम लोगों ने यह सोच कर जाना छोड़ दिया है कि यह जगह दूर है या यहां पर भीड़-भाड़ ज्यादा होती है। उन्होंने कहा ,कि’ इस वाॅक के जरिए लोगों को यह बताना चाहते हैं कि यह जगह हमारी हैरिटेज है जिनको छोड़ना हमारी किसी समस्या का समाधान नहीं है।’ हालांकि पिछली वाॅक में जो हुआ उससे खुद लोकेश भी स्तब्ध थे कि रात के 12 बजे जब सड़के खाली होनी चाहिए थी ऐसे में पूरी सड़क बड़ी गाडियों और उनमें बजने वाले तेज आवाज के गानों से गूंज रही थी।

आपको बतादें कि देहरादून से मसूरी केवल 35-36 किलोमीटर की दूरी पर है और इस दौरान किसी तरह की कोइ चेकिंग नहीं होती।शनिवार और रविवार को तो मसूरी की तरफ जाने वाली सड़क गाड़ियों से भरी रहती हैं लेकिन अब आलम यह है कि हफ्ते के सारे दिन मसूरी लगभग गाड़ियों से भरी रहती है।

garbage in mussoorie

लोकेश ने बताया कि इस वाॅक के दौरान उन्होंने देखा कि कभी साफ सुथरी रहने वाली मसूरी कूड़े से भरी हुई है। गौरतलब है कि कहने के लिए मसूरी पहाड़ों की रानी है जिसकी खुबसूरती दुनियाभर में मशहूर है लेकिन इस भीड़-भाड़ ने मसूरी की उस खुबसूरती पर दाग लगा दिया है।

देहरादून से मसूरी तक होने वाले इस वाॅक से इतना तो पता चल गया है कि रात के 12 बजे भी मसूरी अपने पर्यटकों से भरी रहती है और पर्यटकों का दिल खोल के स्वागत करने वाली मसूरी को बदले में मिलता है सड़कों पर कचड़ा अौर ध्वनि प्रदूषण।

हालांकि लोकेश जैसे लोग अपनी विरासत को बचाने के लिए आए दिन नए प्रयास करते रहते हैं लेकिन यह प्रयास तब तक सफल नहीं होगा जबतक सब एकजुट होकर इनके बारे में नहीं सोचेंगे।

श्रेयस तलपड़े की पत्नी को स्वाइन फ्लू

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हिंदी और मराठी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता श्रेयस तलपड़े की पत्नी दीप्ति तलपड़े भी स्वाइन फ्लू का शिकार हो गई हैं और उनको हाल ही में मुंबई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। श्रेयस तलपड़े ने सोशल मीडिया पर ये जानकारी शेयर की।

इन दिनों सनी देओल और बाबी देओल को लेकर बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म ‘पोस्टर ब्वाय’ का निर्देशन कर रहे श्रेयस तलपड़े ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में लिखा कि प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहा हूं। बतौर निर्देशक फिल्म ‘पोस्टर ब्वायज’ के अलावा श्रेयस बतौर एक्टर इन दिनों रोहित शेट्टी की फिल्म गोलमाल की चौथी सीरिज में भी काम कर रहे हैं। 

श्रेयस ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में लिखा है कि, ‘मैं इस वक्त ज्यादा से ज्यादा समय अपनी पत्नी के साथ रहना चाहता हूं, लेकिन मुझे गोलमाल 4 की शूटिंग भी पूरी करनी है और ‘पोस्टर ब्वायज’ के ट्रेलर का काम भी पूरा करना है। ये सब एडजेस्ट करना आसान तो नहीं है, लेकिन मेरे पास कोई विकल्प भी नहीं है।’ श्रेयस की पत्नी दीप्ति ‘पोस्टर ब्वायज’ के प्रोडक्शन में अपने पति की हमेशा मदद करती हैं, इसलिए श्रेयस पर दोहरा दबाव आ गया है। जानकारी मिली है कि एक सप्ताह में श्रेया की पत्नी को अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। 

कांवड़ मेले में दुर्घटनाओं का सबब बन रहा नशा

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कांवड़ मेले के दौरान तीर्थनगरी में बम-बम भोले के जयकारों के साथ हरिद्वार और ऋषिकेश इन दिनों शिवभक्ति के रंग में रंगे हैं, लेकिन भक्ति के इस अनूठे संगम में रोजाना कई शिवभक्त अपनी जान गंवा रहे हैं। कभी गंगा में डूबकर तो कभी ट्रेन की छत पर बैठकर, कभी खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाकर तो कभी पुलिसकर्मियों से भिड़कर, इस सभी हादसों की जो वजह सामने आई है वह है नशे की प्रवृत्ति। जानकारी के अनुसार, जितने लोग भी इन हादसों और मामलों में सामने आये हैं वह ज्यादातार नशे की हालत में ही पाये गए हैं। हरिद्वार-ऋषिकेश में इस कांवड़ मेले में करोड़ों रुपये के नशे का कारोबार हो रहा है।

कांवड़ मेले में लाखों शिव भक्त गंगा जल लेकर सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर हरिद्वार-ऋषिकेश पहुंचते हैं लेकिन भक्ति और श्रद्धा के इस विशाल मेले में आस्था के नाम पर चल रहा है काले सोने यानि चरस का काला कारोबार। अवैध रूप से कांवड़ मेले में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं चरस, गांजे जैसे मादक पदार्थ। कांवड़िये इन दिनों इनका खुलकर उपयोग कर रहे हैं और प्रशासन इस पर कोई रोक नहीं लगा पा रहा है।
हरिद्वार नगरी में कांवड़ियों को चरस-गांजे के दम लगाते हुए देखा जा सकता है। सिगरेट और चिलम में दम लगाते हुए और धुंआ उड़ाते हुए कांवड़ियों की टोली कांवड़ मेले में जगह-जगह देखी जा सकती है। कहने को तो सभी जगह सुल्फा, चरस व गांजे जैसे नशे के पदार्थों की बिक्री और उनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध है पर कांवड़ मेले में इनका उपयोग आम है और वह भी पुलिस की नाक के नीचे।
कांवड़िये यात्रा के दौरान सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पैदल ही पूरी करते हैं। कांवड़ियों का मानना है कि लगातार लम्बी यात्रा के दौरान थकावट आदि से बचने के लिए ही वह इसका सेवन करते हैं। कांवड़िये सुल्फे, चरस को भोले शिव की बूटी कहते हैं। वह कहते हैं कि ये तो भोले का प्रसाद है। इसके सेवन से ये सफर कैसे कट जाता है इसका पता ही नहीं चलता है। भले ही कांवड़िये इसे भोले का प्रसाद मानकर इसका सेवन करते हों, किन्तु भोले जैसा आचरण कोई नहीं करता।
कांवड़ियों का कहना है कि सुल्फा या चरस का सेवन करने के बाद उनपर मस्ती का खुमार छा जाता है और फिर तो वो पूरी तरह से भोले की मस्ती में मस्त होकर चलते रहते हैं।
उधर, पुलिस नशे के इस काले धंधे को रोक पाने में पूरी तरह नाकाम रही है। हालांकि पुलिस अधिकारी लगातार दावे कर रहे हैं कि वह इन पर निगाह रखे हुए हैं। ड्रग माफिया चरस को काला सोना के नाम से पुकारते हैं। काले सोने का कारोबार कांवड़ के इन 15 दिनों में खूब फलता-फूलता है। हालांकि, पुलिस ने हर साल बढ़ रहे इस नशे के प्रचलन को देखते हुए साधू-संतों से भी अपील की है कि वह शिव भक्तों को समझाएं कि वह ऐसा ना करें साथ ही ये सब बेचने वाले पर भी कड़ी निगरानी से नजर भी रखे हुए हैं। 

सेंसर बोर्ड के अधिकार कम करने के मसौदे पर काम शुरू

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सेंसर बोर्ड के साथ फिल्मों के लगातार बढ़ते जा रहे विवादों को देखते हुए अब केंद्र सरकार हरकत में आई है और सरकारी स्तर पर संकेत मिल रहे हैं कि सेंसर बोर्ड के अधिकारों को कम करने के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय सिनेमाटोग्राफी एक्ट में बदलाव के लिए मसौदा तैयार कर रहा है, जिसमें सेंसर बोर्ड के अधिकारों को फिर से तय किया जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि इस मसौदे में सेंसर बोर्ड को सिर्फ इतना ही अधिकार होगा कि तय नियमानुसार फिल्मों को सार्टिफिकेट जारी करें। कहा जा रहा है कि सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्मों के सीनों और संवादों में कुछ भी कट करने के अधिकार को समाप्त किया जा सकता है। सेंसर बोर्ड में इस बदलाव की गूंज इस खबर के साथ अहम हो जाती है कि पहलाज निहलानी के नेतृत्व वाले सेंसर बोर्ड ने केंद्र सरकार और भाजपा के काफी करीबी माने जाने वाले मधुर भंडारकर की फिल्म ‘इंदु सरकार’ को 17 कट्स दिए, जिससे मधुर निराश और दुखी हुए और उन्होंने इन कटस को लेकर सेंसर का आदेश मानने से मना कर दिया।

सूत्र बता रहे हैं कि मधुर ने उनकी फिल्म को लेकर सेंसर के रवैये की शिकायत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से की, जिनके दखल के बाद सूचना प्रसारण मंत्रालय को इस मसौदे पर काम करने को कहा गया है। केंद्र सरकार ने कुछ समय पहले बॉलीवुड के वरिष्ठ फिल्मकार श्याम बेनेगल के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में सरकार से सेंसर के अधिकारों और कार्यशैली की समीक्षा करने का सुझाव दिया था। सरकार ने इस कमेटी की रिपोर्ट को भी गंभीरता से लिया है। इस कमेटी का मानना है कि सेंसर की जिम्मेदारी कैटेगिरी के हिसाब से फिल्मों को सार्टिफिकेट जारी करने तक सीमित होनी चाहिए।

पहलाज निहलानी के सेंसर बोर्ड के साथ हाल ही में मधुर भंडारकर की फिल्म ‘इंदु सरकार’ के अलावा शाहरुख खान की फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’, प्रकाश झा की फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ और रामगोपाल वर्मा की ‘सरकार 3’ के विवाद मीडिया में छाए रहे। पहलाज निहलानी ने सेंसर बोर्ड के अधिकारों में कटौती को लेकर कोई प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है।

 

निर्देशक अमोल गुप्ते की नई फिल्म स्निफ का ट्रेलर रिलीज

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आमिर खान की प्रोडक्शन में बनी फिल्म, ‘तारे जमीं पे’  के अलावा ‘स्टेनली का डिब्बा’ और ‘हवा हवाई’ जैसी बच्चों की फिल्मों के बाद निर्देशक अमोल गुप्ते की नई फिल्म ‘स्निफ’ रिलीज के लिए तैयार है। फिल्म का ट्रेलर आज सोशल मीडिया पर लांच किया गया। ये फिल्म आगामी 25 अगस्त को रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म को बच्चों के लिए बनी सुपर हीरो वाली फिल्म माना जा रहा है, जो एक असली घटना के प्रेरित बताई जाती है।

इस फिल्म में पंजाब के बाल कलाकार खुश्मित गिल ने सुपर हीरो की मुख्य भूमिका निभाई है। फिल्म का ये मुख्य किरदार अपने साथियों के साथ जासूसी करके कई बड़े केस हल करने में मदद करता है। फिल्म का टाइटल ‘स्निफ’ इसलिए रखा गया है, क्योंकि खुश्मित के किरदार को चीजों को सूंघकर असलियत पता लगाने का वरदान मिला हुआ है।

अमोल गुप्ते निर्देशक के अलावा कलाकार के तौर पर भी बिजी रहते हैं। ‘स्टेनली का डिब्बा’ में उन्होंने स्कूल टीचर की भूमिका निभाई थी, जिसे बच्चों के टिफिन बाक्स से खाना खाने का शौक है। अपनी फिल्म के अलावा ‘सिंहम 2’ और ‘फंस गए रे ओबामा’ फिल्मों में उनके किरदार को काफी तारीफ मिली। अभी ये नहीं पता चला है कि क्या अपनी इस नई फिल्म में निर्देशन के साथ उन्होने कोई किरदार भी निभाया है।

आपातकालीन 108 एम्बुलेंस सेवा को मिलेगी ‘संजीवनी’

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लंबे वक्त से बुरे हालातों से गुजर रही 108 आपातकालीन सेवा को जल्द ही संजीवनी मिलने जा रही है। सेवा का संचालन करने वाली संस्था जल्द ही पुरानी एंबुलेंस को रिटायर कर नई हाईटेक 108 एंबुलेंस वाहनों को शामिल करेगी। संस्थान प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 63 नई एंबुलेंस खरीदने जा रहा है।

स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन एनआरएचएम के तहत 108 एंबुलेंस सेवा शुरू की गई है। इसके संचालन के लिए 80 प्रतिशत राज्य सरकार व 20 प्रतिशत केंद्र सरकार खर्च देती है। योजना के तहत करीब 22 करोड़ रुपये का बजट सालाना तय है, लेकिन आपातकालीन स्थिति में मरीज को तुरंत सेवा प्रदान कर अस्पताल पहुंचाने वाली जीवनदायिनी 108 एंबुलेंस बीते काफी वक्त से बुरे दौर से गुजर रही थी। बजट की कमी के कारण कभी ईंधन तो कभी वाहनों के खस्ताहाल होने के कारण परेशानियां बढ़ती जा रही थी। अब आपात सेवा के अच्छे दिन आने को हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 108 सेवा के लिए 63 नई एंबुलेंस खरीदने का फैसला किया है।
राज्य में साल 2008 में राज्य में कुल 90 एंबुलेंस थी, जो साल 2010 में बढ़कर 108 पहुंच गई। प्रदेश में आज 108 सेवा की तकरीबन 139 एंबुलेंस संचालित हैं लेकिन इनमें अधिकतर वाहन खस्ताहाली की कगार पर पहुंच गए हैं। दरअसल एक एंबुलेंस प्रतिदिन करीब 130 से 150 किलोमीटर का सफर तय करती है। इस दूरी के मुताबिक महीने में इन सभी एंबुलेंस में 5.5 से छह लाख के ईंधन की खपत होती है। ऐसे में वाहनों के लगातार चलने से उनके इंजन आदि पर भी काफी प्रभाव पड़ा। कुछ वाहनों की स्थिति तो बेहतद खराब हो चुकी थी। इसी को देखते हुए अब नई एंबुलेंस लेने का निर्णय लिया गया है ताकि मरीज को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न झेलनी पड़े।
स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. डीएस रावत ने बताया कि इस बार 108 सेवा के लिए सभी सुविधाओं से लैस वाहन नहीं खरीदे जाएंगे। इसके स्थान पर केवल एंबुलेंस के लिए वाहन खरीदकर उसे सुविधाओं से लैस किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पूरी तरह से तैयार एंबुलेंस काफी महंगी पड़ती है। जबकि बाहर से वाहन को सभी सुविधाओं से लैस करना आसान व कम खर्चीला है। 63 नए वाहन आने से आपातकालीन सेवा को काफी मजबूती मिलेगी। 

स्वाइन फ्लू के साथ डेंगू ने भी दी दस्तक

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देहरादून में पहले ही स्वाइन फ्लू का कहर जारी था, अब डेंगू ने भी अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। हिमालय अस्पताल जौलीग्रांट में एक मरीज में डेंगू की पुष्टि हुई है। हालांकि, मरीज बिजनौर से आकर अस्पताल में भर्ती हुआ है। वहीं, दून से भी तीन मरीजों में डेंगू के लक्षण पाए गए हैं। उनके सैंपल दिल्ली स्थित एनसीडीसी भेजे गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा बेहद कम देखने में आया है कि जब स्वाइन फ्लू के साथ डेंगू के भी मामले सामने आए हैं क्योंकि एक गर्मी में होता है और दूसरा सर्दियों में।

स्वास्थ विभाग अभी तक स्वाइन फ्लू के हमले से ही जूझ रहा था। राज्य में अब तक स्वाइन फ्लू की 22 मरीजों में पुष्टि हो चुकी है, जबकि अस्सी सैंपल एनसीडीसी दिल्ली के लिए भेजे गए हैं। कुल सात लोगों की मौत भी स्वाइन फ्लू से हो गई है। अब डेंगू ने भी दोहरा मोर्चा खोल दिया है। इससे स्वास्थ्य विभाग की परेशानियां और बढ़ गई हैं। डेंगू के मामले हाल ही में सामने आए हैं। इनमें एक मरीज हिमालयन अस्पताल में भर्ती है, जबकि दो अन्य संदिग्ध मरीज शहर से हैं। सीएमओ डॉ. टीसी पंत ने बताया कि सभी अस्पतालों को दोनों बीमारियों के लिए अलग-अलग वार्ड बनाने के निर्देश दिये गये है। कोई भी संदिग्ध मामला आने पर तुरंत बताने को बोला गया है। डेंगू से बचाव के लिए शहर में फोगिंग कराई जा रही है ताकि डेंगू रोग की रोकथाम की जा सके। 

अनियंत्रित बस पलटने से कई घायल

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सिडकुल थाना क्षेत्र, हरिद्वार, में एक बस के पलट जाने से कई लोग घायल हो गए। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने घायलों को 108 की मदद से अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार चल रहा है।

बताया जा रहा है कि सिडकुल थाना क्षेत्र, ग्राम खारा टीला में सहारनपुर की एक बस पलट गई। बस में करीब पचास यात्री सवार थे, इन दिनों कांवड़ यात्रा चलने के कारण बस बिहारीगढ़ होकर हरिद्वार आ रही है। सहारनपुर डिपो की यह बस हरिद्वार से शिमला जा रही थी। सुबह बस जैसे ही ग्राम खारा टीला पहुंची तो पुलिया पर अनियंत्रित होकर पलट गई। बस में सवार यात्रियों की चीख पुकार सुनकर लोग मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी पुलिस को दी।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घायलों को बस से निकाला और 108 की मदद से जिला चिकित्सालय भिजवाया। जहां घायलों का उपचार किया जा रहा है। मामूली रूप से घायलों को चिकित्सकों ने उपचार के बाद छुट्टी दे दी।

एसआई मनोज रावत ने बताया कि बस दुर्घटना में कई लोग घायल हुए है। किन्तु सभी को मामूली चोंटें आई है। गंभीर रूप से कोई हताहत नहीं हुआ हैै। बताया कि बस कच्चे रास्ते में उतरने के कारण पलटी। बताया कि दो दर्जन से अधिक लोग दुर्घटना में घायल हुए हैं। 

साइबर क्राइम के बारे में एसपी ने दी बच्चों को जानकारी

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चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर के राबाइका में एसपी चमोली तृप्ति भट्ट ने छात्राओं को साइबर क्राइम के बारे में जानकारी दी, उन्होंने कहा कि यदि सोशल मीडिया को सकारात्मक ढंग से लिया जाए तो बच्चे उसके माध्यम से अपना करियर निर्माण भी कर सकते हैं।

राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, गोपेश्वर में पुलिस द्वारा बच्चों के मध्य एक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें साइबर क्राइम के बारे में जानकारी दी गई। एसपी ने छात्राओं को बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से कई भ्रामक पोस्ट डाली जाती है जो एक क्राइम है। कहा कि आज का अधिकांश युवा सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ है, यदि वह इसे अपने जीवन में सकारात्मक रूप से लेता है तो वह इसके माध्यम करियर को भी बना सकता है और यदि गलत ढंग से इसका प्रयोग किया जाए तो वह भटकाव की ओर भी जा सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने साथ ही अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए ताकि साइबर क्राइम को रोका जा सके।

इस मौके पर एसपी ने विद्यालय की छात्राओं व अध्यापिकों के साथ मिलकर पौधरोपण भी किया। वहीं दूसरी ओर गोपेश्वर थानाध्यक्ष कुंदन राम द्वारा मंडल घाटी के सिरोली में ग्रामीणों के साथ एक गोष्ठी कर साइबर क्राइम की जानकारी दी गई। 

कावड़ मेले के अंतिम चरण में चरमराई व्यवस्थाएं

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धर्म नगरी,हरिद्वार में कांवड़ मेला अब समापन की ओर है।लगभग 10 दिनों से चल रहे कांवड़ मेले का समापन हो जाएगा। हरिद्वार के आस पास के क्षेत्र के थोड़े बहुत कांवड़िये शुक्रवार तक अपने गंतव्य की ओर कूच कर जाएंगे। अपने अंतिम चरण में पहुंचने पर भी तीर्थनगरी में कांवड़ियों का अपार समूह उमड़ा है। जल भरकर कांवड़िए अपने गंतव्य की ओर तेजी से कूच कर रहे हैं। अंतिम चरण तक पहुंचते-पहुंचते पुलिस प्रशासन के सभी इंतजामों को कांवड़ियों की भीड़ ने ध्वस्त कर दिया है।

शुक्रवार को भगवान शिव का जलाभिषेक होना है। बुधवार के दिन भी करीब एक करोड़ कांवड़ियों ने जल भरकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया था, वहीं सिलसिला गुरुवार भी जारी है। कांवड़ियों की भीड़ के कारण सम्पूर्ण तीर्थनगरी भगवा रंग में रंगी हुई नजर आ रही है। तीर्थनगरी से कहीं घूंघरूओं की छन-छन तो कहीं बम भोले व हर-हर महादेव के नारे सुनाई दे रहे हैं। वहीं डीजे की आ रही आवाजों से भी तीर्थनगरी गुंजायमान है। भीड़ के कारण पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए सभी इंजताम गुरुवार ध्वस्त नजर आए। जिन स्थानों पर कांवड़ियों के जाने पर रोक थी उन स्थानों पर भी कांवड़ियों का हुजुम दिखाई दिया।

तीर्थनगरी की प्रत्येक सड़क पर कांवड़ियों का राज देखने को मिला। मार्ग बंद किए जाने के कारण कई स्थानों पर पुलिस व कांवड़ियों के बीच नोकझोंक भी देखने को मिली जिसे पुलिस प्रशासन ने सूझबूझ से निपटाया। वहीं गंतव्य की ओर तेजी से जाने के कारण कई डाक कांवड़ियों के घायल होने का भी समाचार प्राप्त हुआ है। व्यवस्थाओं को बनाने के लिए मेला व्यवस्थाओं की कमान स्वंय एसएसपी कृष्ण कुमार वीके ने संभाली है। देर रात तक एसएसपी व्यवस्थाएं बनाने में जुटे दिखाई दिए।