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पुलिस की तत्परता से दो नाबालिक लड़किया कुछ घंटो में बरामद

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मधु थापा,  निवासी ग्राम खाबड़वाला, थाना कैण्ट, देहरादून ने सूचना अंकित कराई कि मेरी व मेरी बेटी व पड़ोसन की बेटी जिनकी उम्र 14 वर्ष है व दोनों कन्या विद्यालय कैण्ट जाने के लिए सुबह स्कूल के लिए निकली थी देर शाम तक घर नहीं आये। जिसके आधार पर थाना कैण्ट में मु.अ.सं NIL / 17 मानव गुमशुदगी दर्ज की गई ।

प्रभारी निरीक्षक महोदय थाना कैण्ट के निर्देशन में गुमशुदा नाबालिक लड़कियों की तलाश के लिये अलग-अलग टीम गठित की गई तथा जगह – जगह तलाश किया गया । जिसमें SSI श्री मुकेश त्यागी के नेतृत्व में SOG देहरादून व थाना कैण्ट पुलिस टीम ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर उक्त दोनों नाबालिक लड़कियों को लखनऊ चार बाग स्टेशन से बरामद कर सकुशल उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया ।

गुमशुदा बालिकाओं द्वारा बताया गया कि वे बिना बताये लखनऊ अपनी मौसी के यहां जा रहे थे। पुलिस टीम की कार्यवाही से प्रसन्न होकर ग्राम प्रधान हरियालाखुर्द, नैन सिंह पंवार ने पुलिस टीम को 2100 / – रूपये ईनाम देने की घोषणा की व ग्रामवासियों ने पुलिस टीम की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई ।

फेसबुक फ्रेंड लूट कर चली गयी

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हल्द्वानी- फेसबुक पर सोच समझकर करें दोस्ती नहीं तो झांसे में आकर आपके साथ भी हो सकता है धोखा,क्योंकि अपनी खुबसूरती का जाल बिछाकर युवकों को फंसाने वाली हसिनाएं फेसबुक पर एक्टिव है और लडकों को फंसाकर उनसे मोटी रकम एंठ लेती है। जिसके बाद लड़के महज हाथ मलते रह जाते हैं। कुछ एसा ही मामला सामने आया है हल्द्वानी में। जहां
फेसबुक पर दोस्ती के बाद एक कथित डॉक्टर ने सीतापुर उत्तरप्रदेश में रहने वाले युवक को मिलने के लिए हल्द्वानी बुला लिया। यहां कथित डॉक्टर डॉ. सुशीला तिवारी में मिली और तीन हजार रुपये व स्मार्ट मोबाइल मांगकर बैंक ड्राफ्ट बनाकर मिलने का झांसा देकर फरार हो गई। घंटों तक युवती नहीं लौटी तो परेशान युवक ने मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस में घटना की तहरीर दी है। पुलिस ने युवती की तलाश शुरू कर दी है।

उत्तरप्रदेश के दाड़ी सिदौली निवासी सिद्धार्थ मिश्रा एमसीए का छात्र है। पुलिस के मुताबिक करीब एक माह पहले सिद्धार्थ की फेसबुक पर डॉ. सुशीला तिवारी हल्द्वानी की कथित चिकित्सक निधि मिश्रा नाम की युवती से दोस्ती हो गई। चैटिंग से हुई शुरुआत के बाद दोनों की फोन पर बातें भी शुरू हो गई। गुरुवार को कथित चिकित्सक निधि ने सिद्धार्थ को फोन किया और मिलने के लिए हल्द्वानी बुला लिया। सिद्धार्थ शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे एसटीएच में उससे मिलने पहुंचा। एसटीएच में युवती उसे चिकित्सक के वेश में मिली और प्रतीक्षालय में ले गई। युवती ने सिद्धार्थ से कहा कि उसे जरूरी काम से एक बैंक ड्राफ्ट बनाना है और इंटरनेट पर कुछ काम भी करना है। बैंक ड्राफ्ट बनाने व नेट का काम करने के बहाने युवती ने सिद्धार्थ से तीन हजार रुपये और उसका मोबाइल मांगा और कुछ देर बाद काम निपटाकर आने पर लौटाने का झांसा दिया। इसके बाद युवती फरार हो गई। घंटों इंतजार के बाद सिद्धार्थ ने फोन किया तो कथित डॉक्टर मां की तबियत खराब होने के कारण अचानक बरेली जाने की बात कहने लगी। युवती ने सिद्धार्थ से बरेली आकर अपना मोबाइल व रुपये ले जाने का झांसा दिया। ठगी का अहसास होने पर सिद्धार्थ ने मेडिकल कॉलेज चौकी पहुंचकर घटना की शिकायत की है। चौकी प्रभारी विजय मेहता ने बताया कि सिद्धार्थ की तहरीर पर कथित चिकित्सक की तलाश शुरू कर दी गई है।

चकमा देने में नाकाम रहे शराब माफिया

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मुर्गी दाने के नीचे ट्रॉली में छिपाई गई साढ़े चार लाख की अंग्रेजी शराब बरामद हुई है। आबकारी विभाग पता लगाने में लगा है कि शराब कहां ले जाने की तैयारी थी।

खेड़ा में सड़क किनारे खड़ी ट्रॉली में किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि इस तरह खुले में अंग्रेजी शराब रखी जा सकती है। आबकारी विभाग ने सूचना पर छापा मारा तो आंखें खुली की खुली रह गई। ट्रॉली में ऊपर मुर्गी दाना भरा था और उसके नीचे अंग्रेजी शराब की इतनी बड़ी खेप भरी थी जब पेटियों को बाहर निकाला गया तो ट्रॉली के अंदर महंगे ब्रांड की शराब भरी थी। ट्रॉली से आबकारी विभाग ने 75 पेटी शराब बरामद की हैं। आबकारी विभाग की सफलता पर आबकारी आयुक्त ने पांच हजार के पुरस्कार का ऐलान किया है। आबकारी विभाग द्वारा की छापामारी उप आबकारी आयुक्त प्रदीप कुमार की देख रेख में की गई थी। आबकारी विभाग द्वारा बरामद शराब पिछले वित्तीय वर्ष की थी। संभवत: जारी कराए जाने के बाद शराब बचने की स्थिति में उसे रखना मजबूरी बन जाती है। समय मिलने पर उसे कहीं खपा दिया जाता। ऐसा अक्सर होता रहता है लेकिन इस बार मौका नहीं लग पाया और किसी ने मुखबिरी कर दी जिससे माल पकड़ा गया। आबकारी विभाग यदि ध्यान दे तो निश्चित ऐसे मामले हर महीने पकड़े जा सकते हैं। ऐसा सिर्फ पिछले वर्ष की ही नहीं वर्तमान की भी कुछ दुकानों का माल हर माह इधर से उधर किया जाता है।

उर्वशी रौतेला ने किया अपना ऑफिशियल “ऐप” लाँच

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बॉलीवुड की अभिनेत्री उर्वशी रौतेला अब आलिया भट्ट, सलमान खान, किम करदाशियां, केंडल जेनर के ‘ऐप क्लब’ मेंं शामिल होने जा रही हैं। जी हां, अब आपकी चहेती अभिनेत्री पूर्व मिस यूनिवर्स इंडिया, उर्वशी रौतेला अपना एक आधिकारिक “ऐप” जारी करने जा रही है, जिसके द्वारा आप इस हसीना से सीधा संवाद कर सकेंगे। पिछले वर्ष सौ विश्व सुंदरियों में सबसे कम उम्र की सर्वश्रेष्ठ सुंदरी बनने का सौभाय प्राप्त करने वाली के ऐप में वह सब कुछ रहेगा जो आप देखना, सुनना, जानना चाहते हैं।

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“सारा ज़माना हसीनों का दीवाना…” पर दिलफरेब डांस कर आपको अपना दीवाना बनाने वाली उर्वशी के ऑफिशियल ऐप में क्या-क्या होगा ? वह सब कुछ जो आप चाहते हैं। उस पर कन्नड़ फिल्म “मि. ऐरावत” के लिये मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान का समारोह कार्यक्रम फिर से देख सकेंगे अौर वो सब कुछ जो अाप उर्वशी के बारे में जानना चाहते है।

अगर किसी पत्रकार से, किसी कलाकार से, फिल्मकार से या फिर किसी से भी चाहे किसी दरकार से उर्वशी रौतेला बात करेंगी तो वह इस ऐप पर आपको देखने-सुनने को निश्चित रूप से मिलेगा। वर्कआउट वीडियो हो या फिर डिजायनर की ड्रेस पहनकर रैंप पर, फोटोग्राफी हो या दुनिया की सैर, सब दिखेगा उर्वशी के ऐप पर । एनड्रॉयड फोन और फिर आई.ओ.एस प्लेटफार्म पर आप ये सब देख सकेंगे उर्वशी रौतेला के आधिकारिक “ऐप” पर।

गुम हो रही है ढोल वादन की महत्वपूर्ण कला

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उत्तराखंड के वाद्य यंत्रों में जहां बांसुरी, नफीरी, खंजड़ी जैसे वाद्ययंत्र आम प्रचलन में हैं। वहीं ढोल दमाऊ पर्वतीय सांस्कृति की विरासत के रूप में जाने जाते हैं। इनके बिना कोई शुभ काम जीवन में पूरे नहीं होते। त्योहार तो उनके बिना त्योहार तो अधूरे रहते हैं। ढोल और दमाऊ दोनों हर्ष, उल्लास और खुशी के प्रतीक हैं।

ढोल के प्रमुख वादक सूरतू राम कहते हैं कि, ‘ढोल भारतीय संस्कृति के लिए विशेषकर पहाड़ी संस्कृति के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। यह उत्तराखंडी संस्कृति का संवाहक व सामाजिक समरसता का अग्रदूत है।’ उन्होंने बताया कि, ‘ढोल सुरों का सरताज हैं। एक ढोल से 600 से 1000 तक ताल निकलते हैं जबकि तबले पर 300 ही बज पाते हैं। कलाधर्मिता और उचित प्रशिक्षण के अभाव में सालों-साल यह पौराणिक विरासत लुप्त होने की कगार पर है।’

हालांकि सरकार में संस्कृति विभाग नाम का एक विभाग है जिसका काम ही संस्कृति का संरक्षण है, लेकिन यह विभाग भी ढापोर शंखी घोषणाओं के माध्यम से कला संस्कृति के संरक्षण का दावा तो करता है, लेकिन यह सच नहीं है। जिसके कारण कला और कलाधर्मिता दोनों गुम हो रही है। उत्तराखंड में इसी कला को बचाने के लिए ढोल सागर जैसी रचना हुई थी, लेकिन अब ढोली, औजी तथा ढोल सांस्कृतिक रचनाओं से जुड़े कलाकार धीरे-धीरे इनसे विमुख होते जा रहे हैं इसका कारण ढोल तथा दमाऊ बजाने में उतना आर्थिक लाभ न होना है।

संस्कृति विभाग के सूत्र बताते हैं कि देहरादून में 6 अगस्त से 10 अगस्त तक पांच दिवसीय ढोल-दमाऊं की बृहद कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा, जिसमें उत्तराखंड के लोक पारम्परिक कलाकार जो ढोल दमाऊं वादन में दक्ष हो और जिनकी अधिकतम आयु 62 वर्ष हो इस कार्यशाला में भाग ले सकते हैं। ढोल वादन से जुड़ी लोकसंस्कृति कर्मी माधुरी बत्रवाल कहतीं हैं कि, ‘ढोल हमारी लोकसंस्कृति का अहम हिस्सा है। ढोल हमारे लोक जीवन में इस कदर रचा-बसा है की इसके बिना शुभ कार्य की कल्पना तक नहीं की जा सकती है। जहां लोग विदेशों से ढोल सागर सीखने उत्तराखंड आ रहे हैं, वहीं हम अपनी इस पौराणिक विरासत को खोते जा रहे हैं। ऐसे में हमें इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए आगे आना होगा। इसलिए ढोल सागर को जानने वाले कलाकारों के लिए ये एक बेहतरीन अवसर है। अपनी कला को पहचान दिलाने के लिए। आशा है कि काफी संख्या में लोग जरूर इस आयोजन में शरीक होंगे। वास्तव मे ढोल दमाऊं बरसों से हमारी लोकसंस्कृति का द्योतक रहा है।’

हेमवंती नंदन गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लोकसंस्कृति एवं निष्पांदन कला केंद्र के निदेशक डॉक्टर दाताराम पुरोहित ने तो कई ढोल कलाकारों की कला को लिपिबद्ध और रिकॉर्डिंग की है, यदि हमारे ढोल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तरों पर नई पहचान दिलाई जानी हैं तो इस तरह के प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए।

‘तानाजी’ के एेतिहासिक किरदार को निभाएंगे अजय देवगन

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छत्रपति शिवाजी महाराज के मुख्य सहायक माने जाने वाले महान योद्धा ‘तानाजी’ पर बनने वाली फिल्म में अजय देवगन मुख्य भूमिका करेंगे। इस फिल्म का निर्देशन ओम राउत करेंगे, फिल्म का टाइटल ‘ताना जी-द अनसंग वरियर’ रखा गया है। अजय देवगन ने सोशल मीडिया पर इस फिल्म के निर्माण की घोषणा की, इसका निर्माण अजय देवगन की प्रोडक्शन कंपनी और वॉयकॉम कंपनी मिलकर करने जा रहे हैं।

तानाजी के बारे में कम लोग जानते होंगे कि इस मराठा सूबेदार तानाजी मालुसरे ने मराठा साम्राज्य की रक्षा करने के लिए मुगल सेना के साथ लोहा लिया और उनके कब्जे में आए दो अहम किलों को फिर से छीनने में कामयाबी पाई थी। तानाजी को छत्रपति शिवाजी के सबसे भरोसेमंद सूबेदारों में से माना जाता था।

अगले साल फिल्म की शूटिंग शुरू होने की उम्मीद है और 2019 में दीवाली के आसपास इसे रिलीज करने की योजना है। इस वक्त अजय देवगन 1 सितम्बर को रिलीज होने जा रही मिलन लथूरिया की फिल्म ‘बादशाहो’ के प्रमोशन में बिजी हैं। इसी साल दीवाली पर उनकी फिल्म ‘गोलमाल’ की चौथी कड़ी भी रिलीज होगी। 

‘डैडी’ का प्रमोशन करेंगे असली डैडी

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‘डैडी’ के नाम से मशहूर मुंबई के अंडरवर्ल्ड सरगना और राजनेता अरुण गवली अपनी जिंदगी पर बनी फिल्म का प्रमोशन करेंगे, जिसे अर्जुन रामपाल ने ‘डैडी’ नाम से बनाया है। अरुण गवली इन दिनों एक केस में जेल में बंद हैं और उनको पेरोल पर रिहा कराने की कोशिश हो रही हैं। गवली के वकीलों की ओर से पैरोल की अर्जी जेल प्रशासन को दी गई है, जिस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन गवली के परिवार से लेकर अर्जुन रामपाल तक सब ये उम्मीद कर रहे हैं कि अरुण गवली को पैरोल मिल जाएगा और जेल से बाहर निकलने के बाद अरुण गवली अपनी फिल्म का प्रमोशन करेगा।

ये फिल्म पहले जुलाई में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अरुण गवली की बेटी गीता के कहने पर फिल्म की रिलीज डेट को बढ़ाकर सितंबर तक किया गया, ताकि रिलीज से पहले अरुण गवली खुद अपनी ये फिल्म देख सके। फिल्म के ठंडे प्रमोशन को देखते हुए अर्जुन रामपाल भी इस बात के लिए सहमत हो गए कि अगर अरुण गवली फिल्म के प्रमोशन से जुड़ते हैं, तो फिल्म की रिलीज को स्थगित करना ठीक रहेगा। 

कहा जा रहा है कि अरुण गवली के पैरोल पर अगले सप्ताह पर कोई फैसला आने की उम्मीद है। अर्जुन रामपाल एक्टिंग के साथ साथ फिल्म के लेखन से भी जु़ड़े हुए हैं और उनका मानना है कि दो महीनों में उन्होंने खुद ही फिल्म की पटकथा लिखकर तैयार की थी। 

कहर बनकर बरसी बरखा, सब कुछ हो गया तबाह

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मालधन में आई बाढ़ ने ग्रामीणों को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है। रात-दिन तिनका-तिनका जोड़कर किसी तरह आशियाना बनाकर जरुरत का सामान जुटाया, लेकिन बाढ़ की उफनाई लहरों ने पल भर में सब कुछ तबाह कर दिया। अब ग्रामीण खुले आसमान के नीचे भूखे-प्यासे रहकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं। साथ ही आसमां में घिर रही काली घटाएं देखकर डर से सहमे हैं।

मालधन में बाढ़ ने सबसे ज्यादा रमेश चंद्र, श्यामवती, मोहनवती, राम अवतार, महेंद्र सिंह के घर को नुकसान पहुंचाया। बाढ़ का पानी घर में भरने से अनाज, बर्तन, बिस्तर, टीवी, फ्रिज व अन्य सामान खराब हो गया। प्रभावित परिवारों ने शुक्रवार को पॉलीथिन डालकर खुले आसमां के नीचे दिन गुजारा। खाने-पीने की व्यवस्था नहीं होने की वजह से पड़ोस के लोगों ने प्रभावित परिवारों को भोजन कराया। अब उन्हें रात की चिंता सता रही है। रमेश चंद्र परिवार के आठ सदस्यों को लेकर प्लास्टिक की पन्नी डालकर रह रहे हैं। जो सामान बचा पाए उसे टै्रक्टर ट्रॉली के नीचे रखा हुआ है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि जो राहत राशि दी गई, उससे ढंग से परिवार के सदस्यों के लिए पॉलीथिन भी नहीं खरीदी जा सकेगी। ऐसे में समझ नहीं आ रहा है कि अब आगे जीवन बसर किस तरह हो पाएगा। उन्होंने प्रशासन से उनके रहने के लिए व्यवस्था किए जाने की मांग की है।

नदारद शिक्षकों का काटा वेतन

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कुमाऊं मंडल में कर्इ शिक्षकों पर शिक्षा विभाग की गाज गिरी है। विभाग ने औचक निरीक्षण के दौरान गैर हाजिर पाए गए 39 शिक्षकों का वेतन रोक दिया है। साथ ही उन्होंने जिलों के अधीनस्थ अधिकारियों से इन शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट देने को कहा है। दरअसल कुमाऊं मंडल में एक और तीन जुलाई को मंडल में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्राथमिक से माध्यमिक तक के विद्यालयों में औचक निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान बेसिक स्कूलों में 13, जबकि माध्यमिक स्कूलों के 26 शिक्षक बिना अवकाश के स्कूलों से नदारद मिले। जिसे लेकर अपर शिक्षा निदेशक ने कहा कि पठन-पाठन में किसी तरह की कोताही और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने गैर हाजिर शिक्षकों का वेतन रोकते हुए स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगर गायब शिक्षकों द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता उनका वेतन नहीं लौटाया जाएगा।

एडी कुमाऊं डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि शासन ने अब बेसिक शिक्षकों की चरित्र पंजिका में अनुशासनहीनता का उल्लेख करने का निर्णय लिया है। सरकार की मंजूरी के बाद विभाग में इस नियम को प्रभावी कर दिया गया है। अब तक माध्यमिक शिक्षकों की चरित्र पंजिका में इस तरह की एंट्री की जाती थी। उन्होंने ये भी बताया कि राज्य सरकार ने कुमाऊं मंडल में आवासीय संस्कृत विद्यालय खोलने का निर्णय लिया है। शिक्षा विभाग ने इस पर कार्रवाई करते हुए जमीन चयन की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों से जमीन के चयन को लेकर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

एडीएम और एसडीएम को बनाया बंधक

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राज्य आंदोलनकारियों को सम्मान का दर्जा दिए जाने के मुद्दे पर बात न बनी तो बवाल हो गया। आंदोलनकारियों की दोबारा जांच की बात पर लोग भड़क उठे। उन्होंने एडीएम व एसडीएम को कमरे में कैद कर बंधक बना लिया। डेढ़ घंटे तक अफसरों के बंधक रहने से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा रहा। नगर पंचायत सभागार में पिछले 19 दिनों से सम्मान के मुद्दे पर राज्य आंदोलनकारी अनशन पर बैठे हैं। इस अवधि में चिह्नीकरण को ठोस समाधान तो नहीं निकला। प्रशासन ने एक के बाद दूसरे भूख हड़ताल पर बैठे तीन आंदोलनकारियों को जबरन उठा कर अस्पताल भर्ती करा दिया। इधर कुंदन राम आमरण अनशन पर बैठ गए।

यहां डीएम सविन बंसल ने वार्ता को पहुंचना था। मगर एडीएम केएस टोलिया को भेजा गया। अनशनकारियों को मनाने का दौर शुरू हुआ। हल्की गहमागहमी के बीच बात ठीक ठाक होती रही। तभी एडीएम ने साक्ष्यों के आधार पर राज्य आंदोलनकारियों की जांच दोबारा करने की बात कही। इस पर बखेड़ा खड़ा हो गया। आपा खोए आंदोलनकारियों ने कमरा भीतर से बंद कर उन्हें बंधक बना लिया। इससे बाहर मौजूद तहसीलदार नितेश डागर व पुलिस कर्मी सकते में आ गए। भीतर हो हल्ला मचने पर थाने से पुलिस फोर्स मंगा ली गई। तीसरी मंजिल स्थित कक्ष को घेर लिया गया। रात्रि आठ बजे तक दोनों अधिकारी बंधक बने रहे।