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करीना कपूर के जोड़ीदार होंगे सुमीत व्यास

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टीवी सीरियलों में काम करने वाले एक्टर सुमीत व्यास को फिल्म ‘वीरा दी वैडिंग’ में करीना कपूर के जोड़ीदार के रोल में चुना गया है। ये फिल्म अनिल कपूर की छोटी बेटी और सोनम कपूर की बहन रेहा कपूर के साथ बालाजी की एकता कपूर मिलकर बनाने जा रही हैं। इस फिल्म से करीना कपूर की मां बनने के बाद परदे पर वापसी होने स्जा रही है।

फिल्म में करीना के साथ पहली बार परदे पर सोनम कपूर होंगी। इन दोनों के अलावा इस महिला प्रधान फिल्म में स्वारा भास्कर और शिखा तुलस्यान को भी शामिल किया गया है। स्वारा भास्कर और सोनम ने फिल्म ‘रांझणा’ में साथ काम किया था। फिल्म का निर्देशन शशांक कर रहे हैं, जो इससे पहले सोनम कपूर की फिल्म ‘आयशा’ का निर्देशन कर चुके हैं। 

इस फिल्म की शूटिंग पहले अप्रैल से होनी थी, लेकिन करीना उस वक्त बेटे को जन्म देने वाली थी, इसलिए शूटिंग को अगस्त तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। फिल्म का पहला शेड्यूल अगस्त में मुंबई में होने जा रहा है, जिसके लिए तैयारियां अंतिम चरण में पंहुच गई हैं। खुद सोनम कपूर इन दिनों अमेरिका के न्यूयार्क में राजकुमार हीरानी की फिल्म की शूटिंग के लिए गई हैं, जिसमें वे रणबीर कपूर की हीरोइन हैं। वहां से लौटकर सोनम अपनी बहन की फिल्म की शूटिंग का हिस्सा बनेंगी। 

बागेश्वर की मनीषा उडीसा में दिखायेगी जौहर

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हौसले अगर बुलंद हों तो कोई भी कठिनाई आपका रास्ता नहीं रोक सकती, दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना और खेल के प्रति मनीषा के जूनून के आगे परेशानियां भी छोटी पड गयी और बुलंद हौसलों से आज मनीषा ने राष्ट्रीय फुटबाल प्रतियोगिता में अपनी जगह बना ली है।

मनीषा कपकोट तहसील के चलकाना गांव की रहने वाली है। उसके पिता मदन मेहता किसान है और माता गृहणी है। वर्तमान में वह जिला मुख्यालय स्थित ठाकुरद्वारा में रहती है। मनीषा के फुटबाल कोच नीरज पांडे ने बताया कि, ‘यह जिले के लिए गौरव की बात है। मनीषा पहली खिलाड़ी है जो राष्ट्रीय स्तर पर फुटबाल खेलेगी। संसाधनों के अभाव में उसकी यह उपलब्धि किसी मील के पत्थर से कम नही है। वह युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।’

कोटद्वार में 342 टिन अवैध लीसा जब्त

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जनपद पौड़ी गढ़वाल के कोतवाली कोटद्वार में 342 टिन लीसा पकड़ा गया। कोतवाली कोटद्वार से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोतवाली थाना क्षेत्र के अन्तर्गत कोडिया चेक पोस्ट पर कल देर शाम पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक ट्रक को रोका तो ट्रक भागने का प्रयास करने लगा जिस पर पुलिस ने ट्रक को तो पकड लिया लेकिन अंधेरे का फायदा उठाते हुए चालक फरार हो गया लेकिन परिचालक पकडा गया है। ट्रक में 342 टीन अवैध लीसा भरा हुआ था जिसकी कीमत लगभग 11 लाख रूपये है।पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर वन अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर लिया है। कोटद्वार कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक उत्तम सिंह जिम्मीवाल के अनुसार कल देर शाम पुलिस ने कोडिया चेक पोस्ट पर एक ट्रक से 342 कनस्तर अवैध लीसा सहित ट्रक के परिचालक विनोद कुमार नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है जो मूल रूप से नेपाल का रहने वाला है, जो ये लीसा बरामद हुआ है इसी परिपेक्ष में वन अधिनियम में अभियुक्त पंजीकृत किया गया है | इसमें ट्रक के ड्राइवर और मालिक की तलाश की जा रही है। बताते चले कि इससे पहले भी इस ट्रक में 2015 में 209 टीन अवैध लीसा बरामद हुआ था |

प्रेमी अब भी फरार

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घर से भागने की योजना बनाने के बाद परिजनों को जहर देने की घटना का आरोपी अभी फरार है। पुलिस ने युवती से पूछताछ करने के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। मामले में युवती के ताऊ ने प्रेमी युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। चिकित्सकों  द्वारा तीन लोगों का अभी भी उपचार किया जा रहा है, जबकि दो लोगों की छुट्टी कर दी है।

रविवार को मोहल्ला चैहानान निवासी राजेश कुमार ने रिपोर्ट दर्ज करा कर कहा था कि शनिवार की साय सात बजे मौहल्ला जोशियान निवासी मुनेश जोशी पुत्र भोलू जोशी उनके मकान की छत पर आया था। उसने उसकी भतीजी को बहला-फुसलाकर अपने प्रेम जाल में फास लिया और उसे जहर देकर कहा कि यह नींद की गोलिया पिसी हुई हैं इन्हें कोल्ड ड्रिंक अथवा चाय में डालकर अपने परिवार के सभी सदस्यों को पिला देना। कुछ समय बाद वह सब सो जाएंगे और हम भाग जाएंगे। आठ माह पूर्व भी वह उसकी भतीजी को भगाकर ले गया था। उस समय परिवार की इज्जत के कारण उन्होंने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की थी। मुनेश जोशी के जाने के बाद उसकी भतीजी ने दादी जयवती 80, पिता डालीराम 50, माता सरला देवी 45, भाई जितेंद्र 15, मनोज 13 वर्ष को कोल्ड ड्रिंक में उसका दिया हुआ सफेद पाउडर मिलाकर पिला दिया। हालत बिगड़ने पर उन्हें प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराया। उपचार कर रहे डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि किशोरी के भाई जितेंद्र कश्यप एवं मनोज कश्यप को छुट्टी दे दी गई है, लेकिन डालीराम, सरला देवी और जयवती को उपचाराधीन रखा गया है। सभी की हालत खतरे से बाहर है। सीओ राजेश भट्ट ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया है। मामले की विवेचना की जा रही है। जाच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

केदारनाथ क्षेत्र की जनता के लिये खुशखबरी

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एमएलए मनोज रावत की पहल से अाज बिजली की समस्याओं को देखते हुए चंद्रापुरी में 33 KVA के सब स्टेशन को वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति मिल गयी है। लगभग 1 साल में यह स्टेशन बन कर तैयार हो जाएगा, इस स्टेशन के बनने से क्योंजा घाटी बसुकेदार तहसील, भीरी व परकंडी क्षेत्र की पावर ड्राप की समस्या और बार-बार विजली जाने की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।

ये काम रिकॉर्ड 9 दिनों में हुअा। 11 जुलाई 2017 को प्रधान प्रतिनिधि भटवारी सुनार हरीश गुसाईं ने भूमि हेतु अनापत्ति दी, उसी दिन अधिशासी अभियंता मनोज गुसाईं ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ व्हाटसअप से पत्र भेजकर फ़ाइल एईं दीवान सिंह खाती को भेजा। सभी औपचारिकताओं को पूरी कर फ़ाइल देहरादून लाईं गईं, जंहा एमएलए मनोज रावत ने 19 जुलाई को सीएमङी बी सी के मिश्रा से भेंट कर 20 जुलाई से स्वीकृति करा दी। शायद पहली बार नीचे से पूरी प्रक्रिया शुरू करने के बाद 33KVA का स्टेशन को 9 दिनों प्रशासनिक ओर वित्तीय स्वीकृति मिल पाई हो।

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इस पावर स्टेशन से मद्यमहेश्वर गंगा प्रोजेक्ट से पैदा होने वाली 15 MW बिजली को बांटने का सर्किट तो मिलेगा ही , बची हुई बिजली को श्रीनगर ओर कर्णप्रयाग के 220 KVA स्टेशन जाने के लिए भी तकनीकी रास्ता मिलेगा।

एमएलए मनोज रावत का कहना है कि, ‘आधुनिक समय में जीवन और पर्यटन के लिए विजली बहुत आवश्यक है। मैंने 1 महीना और कामों के साथ विजली की समस्याओं को देने का निश्चय किया है। हम अपने लक्चयों को समय से पहले पूरा कर रहे हैं। ये सब जन प्रतिनिधियो और अधिकारियों के सहयोग के साथ भगवान और लोगों के आशीर्वाद से ही संभव हुअा है।’

अब सोनप्रयाग के 33KVA स्टेशन और रुद्रपुर या आस-पास 220 KVA स्टेशन को भूमि दिलवानी की पहल की है, जिससे केदारनाथ विधानसभा में आने वाले 20 साल तक बिजली की कमी नही होगी। जल्दी ही चोपता-तुंगनाथ, कार्तिक स्वामी आदि स्थानों पर बिजली पंहुचाने का बेङा अौर साथ ही साथ केदारनाथ के लिए अंडर ग्राउंड लाइन का काम भी जल्दी शुरु हो ने वाला हैं। केदारनाथ और गोण्डार के उरेङा पावर हाउस पर भी काम शुरु होगा।

डबल लाक से घोटाले की फाईल बाहर

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उधम सिंह नगर में हुए हाइवे चौड़ीकरण में मुआवजा घोटाले से जुडी फाइलें डबल लॉक से लंबे इंतजार के बाद बाहर निकल आईं। इस दौरान सीसीटीवी कैमरे में पूरी कार्यवाही रिकॉर्ड हुई। साथ ही सुरक्षा के इंतजाम भी कड़े किए गए थे। आपको बतादे एनएच-74 भूमि अधिग्रहण घोटाले के सामने आने के बाद मूल दस्तावेजों के साथ हो रही छेड़छाड़ को देखते हुए भूमि अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन ने कोषागार स्थित डबल लॉक में इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे।

दस्तावेज डबल लॉक में तो सुरक्षित हो गए, लेकिन प्रशासनिक कार्य इससे प्रभावित होने लगे। दस्तावेज न होने की दशा में तहसील व उप जिलाधिकारी कार्यालय के कार्य प्रभावित हो रहे थे। भूमि अधिग्रहण घोटाले की जांच कर रही एसआइटी का काम भी दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण अटक रहा था। इसके चलते जरूरत महसूस हुई तो शासन में पैरवी की गई। शासन स्तर पर हुए मंथन के बाद मूल दस्तावेजों को डबल लॉक में ही सुरक्षित रखते हुए उनकी प्रमाणित फोटो कॉपी संबंधित विभाग के साथ ही एसआइटी को दिए जाने की अनुमति दे दी गई। आज भूमियाध्यापित अधिकारी सहित एसआईटी की टीम ने फाइलों को डबल लोक से बाहर निकाला।

उत्तराखंड के सरकारी ”रेस्ट हाउस” में अब फिल्म य़ूनिट को मिलेगी ’50 प्रतिशत’ की छूट

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पहाड़ी राज्य में फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने पर नजर रखने के साथ-साथ उत्तराखंड सरकार ने पर्यटन विभाग के होटलों के कमरों के टैरिफ में फिल्म यूनिट को 50 प्रतिशत छूट देने का फैसला किया है।

उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड (यूटीडीबी) के सीईओ मीनाक्षी सुंदरम ने पिछले सप्ताह गढ़वाल और कुमाऊं मंडल विकास निगम को एक पत्र जारी किया जिसमे,kmvn rest house सुंदरम ने कहा कि, ‘राज्य में फिल्म पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए कलाकारों, कास्ट और क्रू (फिल्म यूनिट) के लिए आवास सुविधाओं में इस तरह की छूट प्रदान करना महत्वपूर्ण है’। इसके अलावा सुंदरम ने दोनों कार्पोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर को यह निर्देश दिया है कि यह छूट वह अपने अपने क्षेत्रों में लागू कर दें।

राज्य भर में जीएमवीएन और केएमवीएन द्वारा संचालित 130 से अधिक पर्यटक रेस्टरुम और बंगले हैं।

हालांकि यह छूट एक कंडीशन के साथ आएगी कि टूरिज्म पीक के महीने जैसे कि मई, जून और अक्टूबर मे लागू नहीं होंगे- जिसके बारे में फिल्म एक्सपर्ट का कहना है कि यह तीन महीनें ही पहाड़ी क्षेत्रों में फिल्मों की शूटिंग के लिए ज्यादा बेहतरीन माने जाते है।एक्सपर्ट का कहना है कि इन महीनो में शूटिंग करने का मुख्य कारण होता है मौसम और लाइटिंग कंडीशन जो फिल्मों के लिए परफेक्ट होती है।

उत्तराखंड स्थित लाइन प्रोड्यूसर संजीव मेहता, जिन्होंने यहां कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग का समन्वय किया है, उनके मुताबिक ‘यदि वास्तव में फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने में अच्छे परिणाम चाहते है, तो सरकार को छूट की अवधि को वर्ष भर में विस्तार करने पर विचार करना चाहिए या कम से कम उन चार महीने यात्रा मार्गों के अलावा सभी रेस्टहाउस में छूट (पीक महीनों के दौरान) देना चाहिए। हर साल छह महीने की लंबी तीर्थयात्रा पहाड़ी राज्य में लाखों पर्यटकों को आकर्षित करती है।

2015 में राज्य की फिल्म नीति को प्रभावी बनाने के बाद 60 से अधिक फिल्में,डाक्यूमेंट्री, टीवी धारावाहिक, वीडियो एल्बम, क्षेत्रीय फिल्मों और विज्ञापन फिल्में की पहाड़ी राज्य में शूटिंग की गईं है। पूरे साल में फिल्म यूनिट को कमरे के किरायें में मिलने वाली रियायत के अलावा, क्षेत्रीय फिल्म निर्माताओं ने भी मांग की है कि इस छूट को 70 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए क्योंकि स्थानीय फिल्म यूनिट आमतौर पर सीमित संसाधनों में काम करती हैं।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उत्तराखंड फिल्म डेवलेपमेंट काउंसिल के डेप्यूटी डायरेक्टर के.एस चौहान ने न्यूज़पोस्ट टीम को बताया कि ”बड़े बजट की फिल्म यूनिट को सब्सिडी से कुछ लेना देना नहीं होता,और उन्हें सब्सिडी की आवश्यकता भी नहीं होती। यह एक अच्छी और सकारात्मक पहल है खासकर छोटे बजट की फिल्म के लिए और क्षेत्रीय फिल्म यूनिट के लिए। चौहान ने कहा कि इस पहल से क्षेत्रीय फिल्मकारों को बहुत मदद मिलेगी और यह उनके लिए अच्छी खबर है।

दुर्लभ प्रजाति की मछली का शिकार पड़ा महँगा, वन विभाग ने किया केस दर्ज

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में 150 किलोग्राम की गौल मछली पकड़ी गई है । दुर्लभप्राय गौल मछली वन्यजीव श्रेणी में शेडयूल एक में रखी गई है । उत्तराखंड की रहस्यमय नदियों में से एक रामगंगा नदी में मिलने वाली इस मछली को पकड़ने के बाद क्षेत्रवासियों ने एक लकड़ी की बल्ली में बांधकर क्षेत्र में घुमाया और सेल्फी खिचवाई,यह सेल्फी उनके लिए आफत का फरमान लेकर आई है,इस संरक्षित गौल मछली की उम्र लगभग 35 वर्ष बताई जा रही है । इस मछली को गुछ और डेविल कैट फिश भी कहते हैं जबकी मछली का बायोलॉजिकल नाम बैगेरियस येरीली है, जो सामान्यतया शर्मीली होती है और कम ही दिखाई जाती है ।
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अल्मोड़ा के सल्ट ब्लाक के अंर्तगत इनोलो गांव के समीप रामगंगा नदी बहती है। नदी में संरक्षित प्रजाति की गोल्डन महाशीर, गौंल सहित अनेक प्रजातियों की मछलियां पाई जाती हैं। बताया जा रहा है कि दो दिन पहले ग्रामीणों ने नदी से गौंल मछली को पकड़ा। विशालकाय मछली को गांव में लाकर नुमाइश की गई और फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की गई। मछली को देखने के लिए ग्रामीणों का सैलाब भी उमड़ा था। गांव लाने तक मछली की सांसें चल रही थी। इतनी विशालकाय मछली को देख ग्रामीण भी भौंचक्के रह गए।
जैसे ही मछली की फोटो सोशल साइट्स में वायरल हुई तो मामला चर्चाओं में आ गया। ज्यादातर लोगों ने मछली के शिकार को लेकर आक्रोश जताया। बरसात के दिनों में मछलियां बहाव के विपरीत तैरते हुए किनारे पर आ जाती हैं। वहीं डीएफओ एस.आर प्रजापति ने कहा कि ओनोलु गांव में यह मछली पकड़ी गई थी, 5 लोगों ने कल यह मछली पकड़ी थी।शेड्यूल एक के अंदर रामगंगा में इस मछली को नहीं पकड़ते हैं। फारेस्ट और पुलिस की ज्वाइंट टीम गठीत की गई है, फिलहाल पांच लोगों को वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972  के तहत गिरफ्तार किया गया है।’

37 सौ करोड़ के घोटालेबाज के खिलाफ कोर्ट ने दिए आदेश

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मित्तल के खिलाफ कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। विजय कुमार की ओर से अधिवक्ता कमल चिलाना ने कोर्ट में केस करके कहा था कि विजय कुमार ने नोएडा की अनुभव मित्तल की कंपनी में 40250 रुपये जमा किए थे, जिसमें से उसे बहुत कम रकम ही वापस मिली। आरोप था कि सोशल साइड के नाम पर उसे आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। जिस पर सिविल जज सीनियर डिवीजन लक्षम्ण सिंह ने सोशल ट्रेड चलाने वाले अनुभव मित्तल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके विवेचना करने के निर्देश दिए हैं।

कौन है अनुभव मित्तल

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स एसएटीएफ ने 37 सौ करोड़ रुपये के घोटालेबाज अनुभव मित्तल के बारे में कई अहम खुलासे किए थे। दो फरवरी को यूपी एसटीएफ ने नोएडा की एक कंपनी के डायरेक्टर अनुभव मित्तल सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। कंपनी के डायरेक्टर और सीईओ पर आरोप है कि सोशल साइट चलाने की आड़ में लाखों लोगों को नुकसान पहुंचाया गया है। यूपी एसटीएफ का कहना है कि एब्लेज इंफो सॉल्यूशंस नाम की कंपनी मेंबर बनाने के नाम पर सोशल नेटवर्किंग साइट पर लोगों को गुमराह करती थी। मेंबर बनाने के बाद कंपनी अपने यूजर्स को एक आईडी और पासवर्ड मुहैया कराती थी, जिस पर कुछ लिंक भेजे जाते थे। हर लाइक पर लोगों को पांच रुपए दिए जाते थे। कुछ दिनों तक तो पैसे मिले पर बाद में पैसे मिलने बंद हो गए।

ऐशोआराम का शौकीन है अनुभव

एक तरफ अनुभव मित्तल आम लोगों को ठग रहा था तो दूसरी तरफ  उसी पैसे का इस्तेमाल अपनी निजी जिंदगी में शानोशौकत दिखाने के लिए करता था। महंगे फिल्मी कलाकारों के साथ पार्टी करना उसके शगल में शामिल था। सनी लियोनी और अमीषा पटेल जैसी फिल्मी अभिनेत्रियां अनुभव मित्तल के जन्म दिन की पार्टी में शरीक हो चुकी हैं।

हापुड़ से नोएडा वाया गाजियाबाद

यूपी के हापुड़ के रहने वाले अनुभव ने 2010 में बीटेक की डिग्री हासिल की थी। बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद उसने साल 2011 में कपनी बना ली। कंपनी बनाने के बाद अनुभव को साल 2012 से लेकर जुलाई 2015 तक मुनाफा नहीं मिल रहा था। अगस्त 2015 में अनुभव ने सोशल ट्रेड डॉट बिज नाम से एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया। जिसमें सदस्यों को जोडऩे के लिए पांच हजार 750 रुपए से लेकर 50 हजार 750 रुपये तक की सीमा निर्धारित की गई।

फालतू फिल्म से लिया था आइडिया

कॉलेज के शुरुआती दिनों में ही अनुभव नेटवर्किंग कंपनी से जुड़ गया था। कमाल तो यह है कि उसे नेटवर्किंग कंपनी बनाने का आयडिया बॉलीवुड फिल्म ‘फालतूÓ देखकर आया था। ये फिल्म उसने अपने कॉलेज के दिनों में देखी थी। अनुभव ने साल 2010 में एब्लेज इंफो सॉल्यूशन नाम की कंपनी बनाई। कंपनी का शुरुआती कामकाज अनुभव ने अपने कॉलेज के हॉस्टल से शुरू किया। रातों रात अमीर बनने के लिए अनुभव ने सोशल मीडिया का सहारा लिया।

हाई प्रोफाइल लोगों तक थी पहुंच

अनुभव की गिरफ्तारी के बाद यह भी खुलासा हुआ है कि उसके बहुत हाई प्रोफाइल संबंध हैं। वह फेसबुक पर नेताओं और फिल्मी अभिनेता और अभिनेत्रियों के साथ फोटो लगाने का भी विशेष शौक रखता था, जिससे कि उसके फॉलोवर को लगे कि वाकई कंपनी मुनाफे में जा रही है। खास बात यह है कि इन कंपनियों के मायाजाल में आम आदमी से लेकर डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, सीएस, वकील और पत्रकार तक शामिल हैं।

फिल्मों में मोबाइल नंबर के प्रयोग को लेकर सेंसर बोर्ड का नया फरमान

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विवादों में घिरे रहे सेंसर बोर्ड की ओर से एक और ऐसा फरमान जारी किया गया है, जिसके विवाद में घिरने की आशंका है। सेंसर बोर्ड ने फरमान जारी किया है कि अब किसी भी फिल्म में अगर किसी व्यक्ति के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल हो सकता है, तो उस व्यक्ति का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट निर्माता की ओर से सेंसर बोर्ड में जमा कराना होगा। इसके बिना फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।

सेंसर बोर्ड का मानना है कि फिल्म में किसी का भी ऐसे ही नंबर दिखा देने से उस व्यक्ति को परेशानी होती है और लोग उसके मोबाइल पर कॉल लगाकर उसे परेशान करते हैं। सेंसर बोर्ड के मुताबिक, इस तरह की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए सेंसर बोर्ड ने ये कदम उठाया है, जिससे अब किसी को परेशानी नहीं होगी। बॉलीवुड में सेंसर बोर्ड के इस नए फरमान की आलोचना भी शुरू हो गई है।

वरिष्ठ निर्माता मुकेश भट्ट ने कहा है कि, ‘सेंसर फिल्म निर्माताओं के लिए परेशानियां बढ़ाता जा रहा है, ये भी संभव है कि सेंसर बोर्ड कल को ये भी फरमान जारी कर दे कि फिल्म में अगर किसी की मकान या दुकान दिखाया गया है, तो उससे भी एनओसी लेना पड़ेगा। ऐसे में फिल्म बनाना मुश्किल हो जाएगा।’

सेंसर बोर्ड पहले ही नियम बना चुका है कि अगर फिल्म में किसी जिंदा व्यक्ति या किसी संस्थान का नाम लिया जाता है, तो उससे एनओसी लेना अनिवार्य होगा। मधुर भंडारकर की नई फिल्म ‘इंदु सरकार’ 1975 के आपातकाल पर है, लेकिन इस फिल्म को इस नियम से छूट दी गई थी। ये अलग बात है कि बाद में सेंसर बोर्ड ने 16 कट्स देकर मधुर की इस फिल्म को संकट में ला खड़ा किया। सेंसर के आदेश को चुनौती देते हुए मधुर ने एपीलेट ट्रिब्यूनल में केस दर्ज किया है।