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उत्तराखंड में तीन वरिष्ठ आईएएस के तबादले

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उत्तराखंड शासन ने आज शाम अल्मोडा जिले के जिलाअधिकारी सहित तीन वरिष्ठ आईएएस के तबादले कर दिए गए। राज्य के गृह सचिव विनोद शर्मा ने बताया कि जिलाअधिकारी सविन बंसल को अपर सचिव उच्च शिक्षा बनाया गया है, जबकि उनके स्थान पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पर्यटन इवा श्रीवास्तव को नियुक्त किया गया है। श्रीमती इवा श्रीवास्तव के स्थान पर अपर सचिव उच्च शिक्षा राधा को स्थानान्तरित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि अल्मोडा के सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र की विधायक और राज्य की महिला एवं बाल कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्या से जिला अधिकारी सविन बंसल का शीत युद्ध चल रहा था। जिला अधिकारी बंसल को हटाए जाने के लिए राज्यमंत्री के अतिरिक्त, राज्य के 17 विधायकों ने पूर्व में मुख्यमंत्री से संस्तुति भी की थी। वहीं राघव लांगर से उच्च शिक्षा हटाया गया आौर पेयजल,नमामि गंगे विभाग दिया गया।

टिहरी विस्थापितों की भूमि पर अवैध कब्जा, सरकार स्थिति करे साफ

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हाईकोर्ट ने टिहरी बांध विस्थापितों के सरकारी भूमि पर कब्जा करने सबंधित जनहित याचिका में सुनवाई के बाद सरकार से 31 जुलाई तक स्थिति साफ करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी। नई टिहरी निवासी भवान सिंह ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि, ‘सरकार ने टिहरी डैम बनने के बाद वहां पर रह रहे लोगो को नई टिहरी विस्थापित कर दिया था। इन विस्थापित लोगों द्वारा विस्थापित जमीन के अलावा सरकार की भूमि पर भी कब्जा कर लिया गया।’

पूर्व में सन 2016 में 71 लोगो के खिलाफ सरकारी जमीन कब्जाने की भी पुष्टि की गई। इनके खिलाफ फरवरी 2016 में कार्रवाई की जानी थी, लेकिन सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण कोई कार्रवाई नही की गई। इसकी शिकायत सरकार से भी की गई, लेकिन कोई भी कार्रवाई नहीं हो सकी। इसे लेकर याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश केएम जोसफ व न्यायधीश आलोक सिंह की खंडपीठ में हुई।

जाली प्रमाण पत्र बनाने वाले हिरासत में 

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अगर आपको कोई भी दस्तावेज बनाना हो तो किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने की जरुरत नहीं बल्कि काशीपुर के एक एसे सक्श से मिल सकते हैं जो किसी भी प्रकार का दस्तावेज या प्रमाम पत्र जाली तरीके से आसानी से बना लेता है, यही नहीं इनके पास सभी तरह की मोहरे भी है।

डीएम से लेकर एसडीएम और अन्य कई विभागों की नकली मोहरे भी इनके पास है जी हां काशीपुर पुलिस ने एेसे दो नटवरलालों को हिरासत में लिया है जिनके द्वारा सरकारी दस्तावेज जाली तरीके से बनाये जाते हैं। फर्जी दस्तावेज बनाने वाले शातिर गिरोह का काशीपुर पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए इसके पास से कई दर्जन मोहरे, और दस्तावेज जब्त किये हैं, इनके द्वारा किसी भी प्रकार के प्रमाण पत्र, लाईसेंस,आरसी, निर्वाचन आयोग के पहचान पत्र, मार्कशील, फिटनेस के जाली दस्तावेज बनाये जाते थे। जिसकी ऊची फीस भी इनके द्वारा ली जाती थी।

वहीं पुलिस ने इस गिरोह को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया है।बताया जा रहा है कि नेटवर्क में कई लोग शामिल है जो लोगों से आसानी से काम कराने के लिए फंसाते थे और फिर जाली दस्वावेज बनाकर असली रुप में देकर मनमानी फीस वसूलते थे, पुलिस ने बताया कि इन दो के अलावा भी जो भी लोग इस नेटवर्क से जुडे हैं सभी को पकडा जाएगा।

‘वीआईपी 2’ में दर्शक को नकारात्मक भूमिका नजर आएंगी काजोल

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‘वीआईपी’ की शानदार सफलता के बाद दर्शकों को अब ‘वेईलाईला पट्टाधरी 2’ का आनंद लेने का मौका मिला है, जिसे ‘वीआईपी 2’ के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। सौंदर्या रजनीकांत द्वारा निर्देशित यह एक कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है और वर्ष 2014 में रिलीज तमिल फिल्म ‘वेराइला पट्टाधरी’ की अगली कड़ी है। फिल्म में धनुष, काजोल के अलावा कई अन्य कलाकार हैं। इस फिल्म को तेलुगू और हिंदी में ‘वीआईपी 2: ललकर’ के रूप में डब किया जाएगा। इस फिल्म की टीम ने दिल्ली में इसका न केवल प्रमोशन किया, बल्कि हिंदी में इसका ट्रेलर भी लॉन्च किया गया।

इस मौके पर फिल्म की कहानी और इसमें उनकी भूमिका के बारे में पूछने पर धनुष ने कहा, ‘वीआईपी 2’ उन बड़ी चुनौतियों के सामना करने की कहानी कहती है, जिनका आप सफलता प्राप्त करने के दौरान और उसके बाद सामना करते हैं। इसके जरिये कॉर्पोरेट जगत की सच्चई को भी उजागर करने की कोशिश की गई है और बताया गया है कि यहां भी राजनीतिक खेल किस तरह चलता है।

प्रसिद्ध परिवार की पृष्ठभूमि से होने के बोनस के बारे में पूछने पर डायरेक्टर सौंदर्या ने कहा ‘यह मायने नहीं रखता कि आपका फैमिली बैकग्राउंड क्या और कैसा है, बल्कि आपके काम के दौरान हमेशा अपपकी प्रतिभा को ही तराजू पर तोला जाता है। काजोल के साथ काम करने के अनुभवों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, काजोल ने फिल्म में बहुत अच्छा काम किया है और वास्तव में उन्होंने अपने तमाम संवाद भी उन्होंने खुद बोले हैं। उन्होंने बहुत ही जल्दी और बड़ी गंभीरता से तमिल भाषा सीखा, जिससे उनका अभिनय और उभर कर सामने आया है। उन्हें हमारी कहानी भी पसंद थी और इसमें उनका किरदार भी। उनके साथ काम करने का आनंद अद्भुत था और वाकई हम बेहद खुश भी हैं।

‘वीआईपी 2’ में काजोल को दर्शक नकारात्मक भूमिका में देखेंगे। इसके अलावा, धनुष और काजोल के बीच की केमिस्ट्री भी फिल्म का मुख्य आकर्षण है। दिलचस्प है कि काजोल दो दशक बाद तमिल फिल्म में नजर आएंगी। काजोल ने इस फिल्म में काम करने के बारे में पूछने पर कहा, ‘मुझे इस फिल्म में काम करके वाकई बहुत मजा आया। इसके अतिरिक्त, धनुष और सौंदर्य ने मुझे बहुत सहयोग किया और मुझे बहुत समर्थन दिया। ‘वीआईपी 2’ जल्द रिलीज होगी।

सेल्फी को लेकर चिन्हित होंगे डेंजर जोन, लगेंगे चेतावनी बोर्ड

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प्रदेश की नदियों, घाटों और पहाड़ी चोटियों पर अब सेल्फी खींचना वर्जित होगा। इतना ही नहीं ऐसे स्थान जहां सेल्फी दुर्घटना का सबब बन सकती है, चिन्हित किए जाएंगे। चिन्हिकरण के बाद इन स्थानों को डेंजर जोन घोषित करते हुए सेल्फी नहीं लेने के निर्देशों के साथ साइन बोर्ड भी लगाए जाएंगे। पुलिस उपमहानिरीक्षक गढवाल परिक्षेत्र पुष्पक ज्योति ने रेंज के सभी जनपदों के प्रभारियों की अपराध समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश दिए।

मंगलवार को आयोजित हुई अपराध समीक्षा बैठक में उपमहानिरीक्षक पुष्पक ज्योति ने कई अहम मामलों पर दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहाड़ी चोटियों, नदियों और घाटों के किनारे खासकर युवा वर्ग द्वारा जान जोखिम में डालकर स्नान करने या मोबाइल से सेल्फी लेते समय, कई लोगों की मृत्यु हो रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए सभी जनपद प्रभारियों को अपने-अपने जनपदों में प्रत्येक थाना स्तर पर सेल्फी को लेकर डेंजर जोन से संबंधित साइन बोर्ड लगाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि वर्तमान में बरसात का सीजन चल रहा है, मौसम विभाग द्वारा समय-समय पर मौसम से संबंधित अलर्ट जारी किया जा रहा है। ऐसे में विभागीय स्तर पर आवश्यक है कि अपने-अपने जनपदों में उपलब्ध पुलिस बल, पीएसी, एसडीआरएफ, फायर सर्विस कर्मियों को सजग व सर्तक रखा जाए।

साइबर क्राइम पर तुरंत दर्ज होगा मुकदमा
उपमहानिरीक्षक ने कहा कि बीते कुछ समय से देखा जा रहा है कि प्रदेश में साइबर फ्रॉड की घटनाएं बढ़ गई हैं। ऐसे में घटना घटित होने पर पीड़ित पक्ष की शिकायत पर तत्काल मुकदमा कायम कर साइबर एक्सपर्ट की टीम गठित कर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए। प्रदेश में बढ़ रही नशे की तस्करी पर लगाम लगाने के मकसद से उन्होंने सभी जनपद प्रभारियों को निर्देश दिए कि वे समय-समय पर नशे व ड्रग्स के खिलाफ अभियान चलाएं। नशे के खिलाफ की गई कार्रवाई से बरामद ड्रग्स की सूचना को उपमानिरीक्षक कार्यालय को भी उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए।
हत्या के अपराधों में वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से ठोस साक्ष्य जुटाकर तत्वरित विवेचानात्मक कार्रवाई के साथ ही ऐसे प्रकरण जो अज्ञात में पजींकृत होते हैं, उनका तत्काल आनावरण करने के निर्देश भी बैठक के दौरान दिए गए। इसके अलावा डकैती, लूट और चोरी के अपराधों में अभियुक्तों की गिरफ्तारी और लूटे या चोरी किए गए माल की शत-प्रतिशत बरामदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इतना ही नहीं यातायात व्यवस्था को चाक चोबंद रखने के लिए सड़कों के किनारे फुटपाथ पर लगने वाली रेड़ी व फड़ लगाने वालों पर भी लगाम लगाने को कहा गया। उन्होंने कहा कि रेड़ियों और फड़ आदि लगाने वालों द्वारा कब्जा कर लिया जाता है। ऐसे में फुटपाथ को खाली रखने के लिए अवैध रूप से कब्जा करने वालों के विरुद्ध नियामनुसार वैधानिक कार्रवाई की जाए ताकि पैदल चलने वालों को कोई भी परेशानी का सामना न करना पड़ें व यातायात बाधित न हो।

29 लाख में भी नहीं जली ट्रेफिक लाईटें

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जाम से निजात दिलाने के लिए नगर निगम ने चौक व तिराहे पर ट्रैफिक लाइटें लगाने में 29 लाख खर्च किए, मगर करीब चार साल से लाइटें नहीं जल सकीं। आलम में यह है कि शहर जाम से कराह रहा है और पुलिस प्रशासन ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने में गंभीर नहीं दिख रहा है।वहीं ट्रेफिक लाईटों के सिग्नल की बत्ती कब जलेगी इसके सवाल पर निगम और पुलिस एक दुसरे पर आरोपों का ठिंगरा फोड रहे हैं।

काशीपुर कुमाऊं का सबसे पुराना औद्योगिक क्षेत्र है। यहां आबादी के साथ वाहनों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ। इससे सड़कों पर वाहनों का दवाब बढ़ गया है। एमपी चौक, चीमा चौक व टांडा उज्जैन तिराहे पर रोजाना जाम ही लगा रहता है। यदि बाजपुर रोड स्थित रेलवे फाटक बंद हो गया तो फिर जाम में आधा घंटे फंसे रहना पड़ता है। 24 घंटे में करीब 29 बार रेलवे फाटक बंद होता है। जाम से राहत दिलाने के मकसद से नगर निगम ने वर्ष 2013 में करीब 29 लाख रुपये में चीमा, एमपी चौक व टांडा उज्जैन तिराहे पर ट्रैफिक लाइटें लगाई गई। बिजली गुल होने पर भी लाइटें जलती रहें, इसके लिए सोलर सिस्टम भी लगाया गया है। इसमें 26 लाख रुपये खर्च किए गए। विडंबना यह है कि करीब चार साल बाद भी लाइटें नहीं जल सकीं। जबकि सोलर लाइटें जलती रहती हैं। लाइट न जलने से दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। इससे लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आखिर लाइटें कब जलेंगी, इसे लेकर कई बार पुलिस प्रशासन व नगर निगम के बीच वार्ता हो चुकी है, मगर अमल में नहीं लाया जा सका।

खास बात यह है कि निगम कहता है कि ट्रैफिक लाइटें संचालित करने के लिए पुलिस प्रशासन को हैंडओवर कर दिया गया है। इसलिए इसका रखरखाव पुलिस को ही करना चाहिए। जबकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि लिखित रूप में हैंडओवर नहीं किया गया है। निगम व पुलिस प्रशासन की तनातनी में जनता जाम में फंस कर भुगत रही है।

ट्रैफिक लाइटों पर 29 लाख खर्च के बावजूद स्थिति जस की तस आम आजमी के जान से पसीने छूटते हैं तो पुलिस और नगर निगम अपनी कागजी कार्यवाही के कोरम में ही फंस कर रह गया है…पुलिस जहां इन लाईटों को सही तरीके से ना लगने की बात कहता है तो निगम का कहना है कि हमने लाईटें लगा दी संचालित करना पुलिस का काम है.. दोनों के बीच की जंग में 29 लाख बर्वाद हो गये और जनता जाम से कराह रही है…देखना होगी कि आखिर इसका क्या नतीजा निकलता है और जनता को कब जाम से राहत मिलती है।

विकास पर डीएम देंगे सीएम के समक्ष प्रजेंटेशन

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वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करना, शत-प्रतिशत भूमिहीन-आवासहीन परिवारों को आवास उपलब्ध कराना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत पांच लाख बेरोजगार युवाओं, किसानों, महिलाओं को कुशल व दक्ष बनाना, जल संचय एवं जल संवर्द्धन को मिशन रूप में चलाना आदि को राज्य सरकार ने बजट 2017-18 में शामिल किया था।

राज्य के विकास में अहम कृषि, शिक्षा, पेयजल, साक्षरता जैसे क्षेत्रों पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का फोकस किया है। इसी प्रकार से वर्ष 2019 तक शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य रखा गया है। इन तमाम लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिव मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को एकीकृत कार्ययोजना के अनुसार क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए गए।
मंगलवार को प्रदेश के सभी जिला अधिकारियों जारी आदेश के बाद सचिव मुख्यमंत्री अमित नेगी ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को इस कार्ययोजना के अनुसार कार्यवाही करते हुए तीन सप्ताह के अन्दर मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुतीकरण देना होगा। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारियों को विशेष रूप से वर्ष 2022 तक कृषकों की आय दोगुनी करने पर फोकस करना है। इसके लिए निर्देश दिए गए हैं कि कम से कम 10 कलस्टर आधारित कृषि विकास अवधारणाओं को अपनाते हुए कृषि, उद्यान, पशुपालन, दुग्ध, मत्स्य, सिंचाई, लघु सिंचाई एवं सहकारिता की एकीकृत योजना पर जोर दिया जाए। कृषि से संबंधित प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से जुड़े विभागों के साथ समन्वय बैठके एवं होमवर्क किया जाए। ग्रामीण सड़कें, ड्रेनेज, ठोस एवं तरल कूड़ा प्रबंधन, ग्रामीण स्ट्रीट लाइटें, पंचायत घर, आंनगबाड़ी केन्द्र, प्राथमिक स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, ग्रामीण हाट, ग्रामीण कम्प्यूटरीकरण इत्यादि के तहत विभिन्न मदों में 14वें वित्त आयोग से प्राप्त होने वाली धनराशि से ग्रामीण अवस्थापना से संबंधित योजनाओं के नियोजन एवं क्रियान्वयन किया जाए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 तक शत-प्रतिशत भूमिहीन-आवासहीन परिवारों को आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य सरकार के बजट भाषण में रखा गया है। इस दिशा में जिलाधिकारी कार्यवाही करते हुए संबंधित विभागों के साथ समन्वय बैठकें कर रिपोर्ट शासन को भेजें। वर्ष 2022 तक प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अन्तर्गत पांच लाख बेरोजगार युवाओं, किसानों, महिलाओं को कुशल व दक्ष बनाना है।
इसके लिए जिलाधिकारी वर्षवार-सेक्टरवार लक्ष्य निर्धारित करते हुए कार्ययोजना तैयार करें। वर्ष 2022 तक जल संचय एवं जल संवर्द्धन मिशन के अन्तर्गत पारम्परिक स्रोतो को रिचार्ज कर चार-पांच दशक पूर्व की जल उपलब्धता को पुनस्र्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रत्येक जिलाधिकारी अपने जिले में एक-एक रेनफेड रीवर का चयन करते हुए पुनरुद्धार की कार्ययोजना तैयार करें।
स्वच्छ भारत अभियान (शहरी) का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए शहरी आबादी में शत-प्रतिशत शौचालय के साथ-साथ ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन हेतु वैज्ञानिक तकनीक का उपयोग सुनिश्चित किया जाए। साथ ही समस्त नगरीय/अर्द्धनगरीय क्षेत्रों में शौचालय निर्माण, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, सीवरेज ढांचा एवं नाला टैपिंग इत्यादि से संबंधित निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित योजनाओं की गहन समीक्षा कर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उत्तराखण्ड बनने के बाद से वर्तमान तिथि तक व्यक्तिगत लाभार्थियों की पंचायतवार सूची तैयार की जाए ताकि व्यक्तिगत/लाभार्थीवार विभिन्न कार्यान्वित योजनाओं जैसे अनुदान, पेंशन व अन्य जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं से मिले लाभ के सापेक्ष कार्यान्वित योजनाओं की सफलता का परीक्षण किया जा सके।
उन्होंने कहा कि कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों के लिए पंजीकृत महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आंगनबाड़ी केन्द्रों में आपूर्ति कराई जाए और टेक होम राशन की आपूर्ति महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कराने की कार्ययोजना तैयार की जाए। वर्ष 2019 तक शत-प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य हासिल करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। इन सब बिन्दुओं के अतिरिक्त प्रत्येक जिलाधिकारी द्वारा अपने क्षेत्र से संबंधित पांच समस्या क्षेत्रों का चिह्निकरण करते हुए उनके समाधान के लिए विभिन्न आयामों पर कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजे।

ऑल इंडिया सीनियर डबल्स बैडमिंटन टूर्नामेंट शुरू

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उत्तराचंल स्टेट बैडमिंटन एसोसिएशन के तत्वाधान में हरिद्वार जिला बैडमिंटन संघ के सहयोग से सत्यपाल कुमार मैमोरियल आॅल इंडिया बैडमिंटन टूर्नामेंट का शुभारम्भ फाईग मैचों के साथ शुरू हुआ।

उत्तराचंल स्टेट बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष आईपीएस अशोक कुमार के निर्देशन में चार दिवसीय आॅल इंडिया बैडमिंटन टूर्नामेंट का आयोजन हरिद्वार में भल्ला काॅलेज के पास स्थित इनडोर स्टेडियम में हुआ। इस टर्नामेंट में देशभर के रैकिंग बैडमिंटन खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। उत्तराचंल स्टेट बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव बीएस मनकोटी ने जानकारी देते हुए बताया कि, ‘इस टूर्नामेंट में 250 रैकिंग खिलाड़ी भाग ले रहे है। क्वालिफाईग मैचों के बाद मेन मैचिस खेले जायेगें। 29 जुलाई को विजेता टीमों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जायेगा।’

आयोजन कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस आयोजन में उत्तराखंड से रैकिंग खिलाड़ी कुहू गर्ग, मोहित तिवारी, रोहित रतूड़ी, हिमांशु तिवारी सहित उभरते हुए खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। निर्णयाक मंडल में चीफ रेफरी एम.आर.गौड़ (महाराष्ट्र) मैच कन्ट्रोलर प्रवीण राज (इलाहाबाद) रहेंगे। जिला बैडमिंटन एसोसिएशन हरिद्वार की अध्यक्ष अलकनंदा, सचिव नीरज कुमार, संसुक्त सचिव सुमन कुमार, अनुराग गुप्ता, रचित कुमार, अंतराष्ट्रीय बैटरन खिलाड़ी राजेश निझावन सहित आयोजन के पदाधिकारी टूर्नामेंट की सफलता के लिए संयुक्त रूप से प्रयासरत है।

इस टूर्नामेंट को लेकर जहां जिला आयोजन समिति में उत्साह है, वहीं देश के विभिन्न राज्यों से आयें खिलाड़ी भी तीर्थ नगरी हरिद्वार में आकर स्वयं को भाग्यशाली मान रहे हैं।

स्वाइन फ्लू का कहर, अब तक 26 मरीजों में पुष्टि

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मौसम में नमी के कारण स्वाइन फ्लू का खतरा लगातार बरकरार है। दून में चार और मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इस साल 26 मरीज इस बीमारी की गिरफ्त में आ चुके हैं। जबकि छह की स्वाइन फ्लू के कारण मृत्यु हो चुकी है।

स्वाइन फ्लू के वायरस और मौसम में गहरा संबंध है। 
कम तापमान और ज्यादा नमी के कारण हवा घनी होती है। जो वायरस के एक्टिव होने में मददगार बन रही है। यही कारण है कि स्वाइन फ्लू दून में लगातार अपना असर दिखा रहा है। क्या बच्चे और क्या बड़े, यह हर किसी को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। अब चार और मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें रेशम माजरी डोईवाला निवासी 25 वर्षीय युवती का हिमालयन हॉस्पिटल में उपचार चल रहा है। जबकि दून निवासी 35 वर्षीय एक अन्य महिला को हिमालयन हॉस्पिटल से उपचार के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। इसके अलावा श्यामपुर प्रेमनगर से एक साल की बच्ची में भी स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। बच्ची दून अस्पताल में भर्ती थी, जिसे अब डिस्चार्ज कर दिया गया है। मैक्स अस्पताल में भर्ती ऋषिकेश निवासी 52 वर्षीय एक मरीज को परिजन स्वयं डिस्चार्ज करा ले गए हैं।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. तारा चंद पंत ने बताया कि, ‘फरवरी से अब तक जनपद में कुल 26 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इसके अलावा पांच अन्य मरीजों के सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजे गए हैं।’ उन्होंने बताया कि स्वाइन फ्लू को लेकर लगातार एहतियात बरती जा रही है। निजी व सरकारी अस्पतालों को मरीज में स्वाइन फ्लू के लक्षण मिलने पर तुरंत सूचना देने को कहा गया है।

जिलाधिकारी ने किया सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण, दो मेडिकल स्टोर सील

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रुड़की सिविल अस्पताल में आज डीएम दीपक रावत के अचानक निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में खलबली मच गई। जिलाधिकारी ने अस्पताल में पहुँचते ही सबसे पहले ट्रामा सेंटर स्थित डिजिटल एक्सरा रूम में गए। उन्हें एक्सरा रूम बन्द मिला तो उसे खुलवाकर रीकॉर्ड खंगाले साथ ही जिलाधिकारी ने एक्सरा रूम में तैनात दोनों लोगों के तुरंत ट्रांसफर के आदेश दे दिए।

उसके बाद ओपीडी पंजीकरण कक्ष में पहुंचकर वहां के रिकॉर्ड चेक किये, जन ओषधि केंद्र में दवाइयों की जांच की और फिर पहुंच गए ओपीडी में बँटने वाली दवाई की खिड़की में वहां की व्यवस्थाएं देखकर दीपक रावत का पारा चढ़ गया। दवाई कक्ष में कुछ छोटी पर्चियां डीएम को मिली जिसके बारे में फार्मेसिस्ट एके शर्मा ने बताया कि चिकित्सक दो पंजीकृत पर्चे के साथ इस प्रकार की एक पर्ची देते है जो कि अस्पताल में रिकॉर्ड के लिए रखी जाती है। जिलाधिकारी ने बोला ये इस व्यवस्था में तो भर्ष्टाचार की बू आ रही है इसे तुरंत बंद करें और जिलाधिकारी ने छोटी पर्चियों की बोरी को जप्त करवा लिया।

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मेडिकल स्टोर सील करने के आदेश

निरीक्षण के दौरान डीएम रावत सिविल अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर पर निरीक्षण के लिए पहुंचे तो दोनों स्टोर बंद मिले।  दीपक रावत के निर्देश पर खोले गए तो एक मेडिकल स्टोर का संचालक अंदर ही खाना खाते हुए मिला। जिलाधिकारी व ज्वाइन्ट मजिस्ट्रेट रुड़की ने दवाइयां चेक की तो काफी मात्रा में एक्सपायरी दवाइयां मिली, जिसे तुरंत सील करने के आदेश दिए। वहीं दूसरे मेडिकल स्टोर का शटर तुड़वाकर देखा तो उसमें भी अधिकांश दवाइयां एक्सपायर हो चुकी थी।

बिना बिल दवाइयां ले जाते पकड़े दो युवक

डीएम दीपक रावत जब मेडिकल स्टोर का निरीक्षण कर रहे थे तब दो युवक एक दवाई की पेटी को लेकर सड़क से गुजर रहे थे जिलाधिकारी ने दवाइयों का बिल मांगा तो युवक नही दिखा पाए इस पर जिलाधिकारी ने दवाइयां जब्त करवाकर दोनों युवकों को पुलिस के हवाले कर दिया।